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  • भारत के रियल एस्टेट बाजार में जबरदस्त तेजी, 2026 की पहली तिमाही में निवेश 1.7 अरब डॉलर तक पहुंचा

    भारत के रियल एस्टेट बाजार में जबरदस्त तेजी, 2026 की पहली तिमाही में निवेश 1.7 अरब डॉलर तक पहुंचा

    नई दिल्ली। भारत का रियल एस्टेट बाजार 2026 की शुरुआत में मजबूत प्रदर्शन के साथ आगे बढ़ता नजर आया है। पहली तिमाही के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि इस सेक्टर में निवेश गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं और निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। जनवरी से मार्च के बीच कुल रियल एस्टेट ट्रांजेक्शन वैल्यू 1.7 अरब डॉलर तक पहुंच गई, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में लगभग 37 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बाजार में स्थिरता और दीर्घकालिक संभावनाओं को लेकर सकारात्मक माहौल बना हुआ है।

    इस दौरान एक अहम बदलाव बड़े आकार की संपत्तियों के अधिग्रहण में देखने को मिला। निवेशकों ने छोटे सौदों की बजाय बड़े और आय-सृजन करने वाले प्रोजेक्ट्स में ज्यादा रुचि दिखाई। इसी का परिणाम रहा कि बड़े सौदों का कुल मूल्य बढ़कर 1.03 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले समय की तुलना में काफी ज्यादा है। यह रुझान दर्शाता है कि निवेशक अब सुरक्षित और नियमित रिटर्न देने वाली संपत्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे जोखिम कम हो और लाभ स्थिर बना रहे।

    पहली तिमाही के बाद भी यह गति धीमी नहीं पड़ी, बल्कि आगे के महीनों में और तेज होती दिखाई दी। बड़े सौदों का कुल मूल्य बढ़कर 1.48 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो इस क्षेत्र में लगातार बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। यह स्पष्ट करता है कि निवेशक दीर्घकालिक रणनीति के तहत ऐसे प्रोजेक्ट्स में निवेश कर रहे हैं, जो भविष्य में स्थिर आय प्रदान कर सकें।

    विशेषज्ञों के अनुसार, यह केवल अल्पकालिक वृद्धि नहीं है, बल्कि रियल एस्टेट बाजार में एक गहरे बदलाव का संकेत है। निवेश का झुकाव अब उन संपत्तियों की ओर बढ़ रहा है, जिनमें नियमित आय की संभावना हो और जो आर्थिक उतार-चढ़ाव के दौरान भी स्थिर प्रदर्शन कर सकें। खासतौर पर ऑफिस स्पेस जैसे क्षेत्रों में निवेश की निरंतरता इस बात को मजबूत करती है कि इस सेगमेंट में अभी भी मजबूत आधार मौजूद है।

    पिछले दो वर्षों में भी रियल एस्टेट सेक्टर ने शानदार प्रदर्शन किया था। 2024 और 2025 के दौरान इस क्षेत्र में संस्थागत निवेश का स्तर काफी ऊंचा रहा और कुल मिलाकर 19.4 अरब डॉलर का निवेश दर्ज किया गया। यह उपलब्धि इस सेक्टर के लिए एक नई दिशा तय करने वाली साबित हुई, जिससे बाजार में दीर्घकालिक विश्वास और मजबूत हुआ।

    एक और महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि घरेलू निवेशकों की भूमिका तेजी से बढ़ी है। 2025 में पहली बार लंबे समय बाद घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार में प्रमुख हिस्सेदारी हासिल की। पहले जहां विदेशी निवेशकों का दबदबा था, वहीं अब घरेलू पूंजी इस क्षेत्र को गति दे रही है। 2026 की पहली तिमाही में कुल निवेश का लगभग 72 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय निवेशकों के पास रहा, जो इस बदलाव को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

    वैश्विक स्तर पर मौजूद अनिश्चितताओं और चुनौतियों के बावजूद भारत का रियल एस्टेट बाजार लचीलापन दिखा रहा है। विदेशी निवेशकों की सतर्कता के बीच घरेलू निवेशकों की सक्रियता ने बाजार को संतुलित बनाए रखा है। यह संतुलन आने वाले समय में इस सेक्टर को और अधिक स्थिर और आकर्षक बना सकता है।

    कुल मिलाकर, 2026 की पहली तिमाही के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारत का रियल एस्टेट बाजार एक मजबूत और भरोसेमंद निवेश विकल्प के रूप में उभर रहा है। लगातार बढ़ता निवेश, बड़े सौदों की ओर झुकाव और घरेलू भागीदारी इस क्षेत्र के उज्ज्वल भविष्य की ओर इशारा करते हैं।

  • भारतीय बाजारों की कमान अब घरेलू निवेशकों के हाथ… वैश्विक उथल-पुथल के बाद भी स्थिति मजबूत

    भारतीय बाजारों की कमान अब घरेलू निवेशकों के हाथ… वैश्विक उथल-पुथल के बाद भी स्थिति मजबूत


    नई दिल्ली।
    रूसी तेल (Russian oil), वेनेजुएला (Venezuela), ईरान में प्रदर्शन (Iran protests) और ग्रीनलैंड पर कब्जे की मंशा हर थोड़े समय बाद इन मुद्दों से शेयर बाजार (Stock market) सहमे हैं। इन सबके बीच भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) में ज्यादा गिरावट देखने को नहीं मिल रही। हालांकि कुछ सेक्टर में गिरावट है, स्मॉल कैप और मिड कैप में मुनाफावसूली चल रही है लेकिन सूचकांक इस गिरावट को दर्शा नहीं रहे हैं। इस संबंध में बाजार विशेषज्ञ अनुज गुप्ता से सवाल किए गए। पेश हैं उनके जवाब-

    विदेशियों की तेज बिकवाली से भी बाजार क्यों नहीं टूटा?
    अब भारतीय शेयर बाजार पूरी तरह विदेशी निवेशकों पर निर्भर नहीं है। घरेलू संस्थागत निवेशक-जैसे म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां और ईपीएफओ लगातार खरीदारी कर रहे हैं। एसआईपी के जरिए बढ़ती रिटेल भागीदारी से हर महीने आने वाला स्थायी निवेश विदेशी बिकवाली की भरपाई कर देता है।

    क्या भारतीय शेयर बाजार अब घरेलू निवेशकों से चल रहा है?
    हां, काफी हद तक। पहले बाजार विदेश निवेशकों के मूड पर निर्भर रहता था, लेकिन अब घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ गई है। यही वजह है कि विदेशी बिकवाली का असर सीमित दिखता है। भारतीय बाजार का ढांचा बदल रहा है- देसी संस्थानों की हिस्सेदारी रिकॉर्ड पर है, एसआईपी से रिटेल निवेश साल-दर-साल बढ़ रहा, बाजार में लंबी अवधि का पैसा ज्यादा आ रहा है।

    ज्यादातर शेयर गिर रहे हैं, फिर भी निफ्टी-सेंसेक्स क्यों टिके हैं?
    निफ्टी और सेंसेक्स कुछ बड़ी कंपनियों पर आधारित हैं। इन बड़े शेयरों का अधिमान इतना ज्यादा होता है कि अगर वे स्थिर रहें, तो सूचकांक भी स्थिर रहते हैं, चाहे बाकी शेयर गिर रहे हों। सूचकांकों की हकीकत यह है कि निफ्टी के शीर्ष 10 शेयरों का अधिमान 60% है, इसमें बैंक और आईटी सेक्टर का दबदबा है और छोटे शेयरों का असर सीमित है।

    सूचकांक में गड़बड़ी हो रही है?
    नहीं, इसे सूचकांक प्रबंधन कहना सही नहीं है। यह सूचकांकों की बनावट का असर है। कुछ गिने-चुने बड़े शेयर पूरे सूचकांकों की दिशा तय करते हैं। यह ‘खेल’ संभव नहीं है क्योंकि सूचकांकों के नियम तय और पारदर्शी होते हैं, उनका अधिमान पहले से निर्धारित है, कोई रोज इनके उतार-चढ़ाव को नियंत्रित नहीं कर सकता।

    तो क्या बाजार की असली हालत सूचकांक इंडेक्स नहीं दिखा रहे?
    पूरी तरह नहीं। सूचकांक दिशा दिखाते हैं, लेकिन अंदरूनी हालात नहीं। इस समय गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वालों से ज्यादा है, यानी बाजार के भीतर करेक्शन चल रहा है।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर ज्यादा क्यों टूट रहे हैं?
    इन शेयरों में पहले बहुत तेज तेजी आई थी। मूल्याकंन महंगे हो गए थे, इसलिए निवेशक अब मुनाफावसूली कर रहे हैं। साथ ही जोखिम से बचने की प्रवृत्ति भी बढ़ी है।

    खुदरा निवेशकों की भूमिका कितनी अहम है?
    बहुत अहम। करोड़ों रिटेल निवेशक एसआईपी के जरिए हर महीने निवेश कर रहे हैं। यह पैसा बाजार को स्थिरता देता है।

  • घरेलू निवेशकों की सक्रियता से बाजार में मजबूती, मीडिया और मेटल शेयर चमके

    घरेलू निवेशकों की सक्रियता से बाजार में मजबूती, मीडिया और मेटल शेयर चमके


    नई दिल्ली। 31 दिसंबर, बुधवार को घरेलू शेयर बाजार में मजबूती का माहौल देखने को मिला। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज BSE का सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में करीब 200 अंकों की तेजी के साथ 84,870 के स्तर तक पहुंच गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज NSE का निफ्टी 70 अंक चढ़कर 26,000 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर कारोबार करता नजर आया। इस तेजी में वैश्विक संकेत मिले-जुले रहने के बावजूद घरेलू निवेशकों की सक्रिय खरीदारी का बड़ा योगदान रहा।सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 25 शेयर हरे निशान में बंद हुए, जबकि निफ्टी-50 के 40 शेयरों ने तेजी दिखाई। सेक्टोरल स्तर पर एनएसई के प्रमुख इंडेक्स में भी मजबूती देखने को मिली। विशेष रूप से मीडिया, मेटल और ऑयल एंड गैस सेक्टर में सबसे अधिक तेजी दर्ज की गई। निवेशकों का रुझान चुनिंदा सेक्टरों पर केंद्रित रहा, जिससे बाजार की चौड़ाई सकारात्मक बनी।

    वैश्विक बाजारों में कारोबार मिला-जुला रहा। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी और जापान का निक्केई अवकाश के कारण बंद रहे। पिछले कारोबारी सत्र में कोस्पी 0.15 फीसदी और निक्केई 0.37 फीसदी गिरावट के साथ बंद हुए थे। वहीं, हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स लगभग 1.01 फीसदी की गिरावट के साथ 25,592 पर और चीन का शंघाई कंपोजिट 0.07 फीसदी की कमजोरी के साथ 3,962 पर कारोबार करता दिखा। अमेरिकी बाजारों में भी दबाव देखा गया, जहां 30 दिसंबर को डाउ जोंस 0.20 फीसदी, नैस्डेक 0.24 फीसदी और एसएंडपी 500 लगभग 0.14 फीसदी गिरकर बंद हुए।

    घरेलू स्तर पर बाजार को सबसे बड़ा सहारा घरेलू संस्थागत निवेशकों DIIs से मिला। 29 दिसंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों FIIs ने 3,844 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि DIIs ने 6,159 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। दिसंबर महीने में अब तक FIIs लगभग 30,752 करोड़ रुपये के शेयर बेच चुके हैं, जबकि DIIs ने 72,860 करोड़ रुपये का निवेश किया है। नवंबर में भी यही रुझान देखने को मिला था जब विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद घरेलू निवेशकों की खरीदारी ज्यादा रही।इससे पहले, 30 दिसंबर को बाजार लगभग सपाट कारोबार में रहा। सेंसेक्स 20 अंक गिरकर 84,675 पर और निफ्टी मामूली कमजोरी के साथ 25,938 पर बंद हुआ। उस दिन ऑटो, मेटल और बैंकिंग शेयरों में मजबूती रही, जबकि मीडिया और रियल्टी सेक्टर में बिकवाली देखने को मिली।

    विश्लेषकों का कहना है कि साल के आखिरी कारोबारी सत्रों में घरेलू निवेशकों का भरोसा मजबूत रहना आने वाले समय के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि, वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।कुल मिलाकर, 2025 के आखिरी कारोबारी हफ्ते में घरेलू निवेशकों की सक्रिय खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया और सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों प्रमुख स्तरों पर मजबूती के साथ बंद हुए। मीडिया, मेटल और ऑयल एंड गैस सेक्टर ने निवेशकों को सबसे ज्यादा लाभ दिया, जिससे साल के अंत में बाजार में उत्साह बना रहा।