Tag: Domestic Violence Case

  • खजराना मंदिर विवाद में नया मोड़: पीड़िता बोलीं- केस वापस लेने का बनाया जा रहा दबाव

    खजराना मंदिर विवाद में नया मोड़: पीड़िता बोलीं- केस वापस लेने का बनाया जा रहा दबाव


    मध्यप्रदेश। इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर से जुड़े पुजारी परिवार को लेकर चल रहे विवाद में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है। दहेज प्रताड़ना, घरेलू हिंसा, मानसिक उत्पीड़न और मंदिर प्रबंधन से जुड़े गंभीर आरोप लगाने वाली डॉ. इंद्रा भट्ट (शर्मा) ने दावा किया है कि उन पर दर्ज प्रकरण वापस लेने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रभावशाली लोगों द्वारा उन्हें समझाने और मामला खत्म करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वह न्याय की लड़ाई से पीछे हटने वाली नहीं हैं।

    मंगलवार को डॉ. इंद्रा कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में पहुंचीं और अधिकारियों को आवेदन सौंपकर मांग की कि उनके पति एवं खजराना मंदिर के पुजारी पुनीत भट्ट के गर्भगृह में प्रवेश और पूजा-अर्चना करने पर जांच पूरी होने तक रोक लगाई जाए। उनका कहना है कि जब किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज हो और मामले की जांच जारी हो, तब तक उसे मंदिर की महत्वपूर्ण धार्मिक जिम्मेदारियों से दूर रखा जाना चाहिए।

    डॉ. इंद्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मामला दर्ज होने के बाद कई प्रभावशाली लोग उनके घर पहुंचे। उनके अनुसार उन्हें यह कहकर समझाने का प्रयास किया गया कि सामने वाला परिवार काफी प्रतिष्ठित और रसूखदार है, इसलिए विवाद को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी भी दबाव के आगे झुकने वाली नहीं हैं। उनका कहना है कि न्याय की लड़ाई कठिन जरूर है, लेकिन वह इसे अंत तक लड़ेंगी।

    पीड़िता ने यह भी कहा कि उनके लिए केवल एफआईआर दर्ज हो जाना या अदालत में मामला चलना ही न्याय नहीं है। उनके अनुसार वास्तविक न्याय तब होगा जब उन्हें अपने वैवाहिक घर में रहने का अधिकार मिलेगा। उनका आरोप है कि उन्हें बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के घर से बाहर कर दिया गया और अब अपने ही ससुराल में वापस प्रवेश पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ रही है।

    डॉ. इंद्रा ने अपने आवेदन में आंध्र प्रदेश के एक मंदिर से जुड़े मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां एक समान शिकायत के बाद प्रशासन ने संबंधित पुजारियों को सेवा से निलंबित कर दिया था। इसी आधार पर उन्होंने मांग की है कि जांच लंबित रहने तक पुनीत भट्ट को मंदिर की धार्मिक गतिविधियों और गर्भगृह से दूर रखा जाए।

    पीड़िता ने मंदिर परिसर में कथित अनियमितताओं और श्रद्धालुओं द्वारा दी गई दक्षिणा के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि उनके पास इन आरोपों से जुड़े कुछ दस्तावेज और अन्य साक्ष्य मौजूद हैं, जिन्हें संबंधित एजेंसियों को उपलब्ध कराया जा सकता है।

    दूसरी ओर, मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल संबंधित प्रकरण न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर विचाराधीन है। इस बीच डॉ. इंद्रा भट्ट का कहना है कि महिलाओं को हर दौर में अपने अधिकारों और सम्मान के लिए संघर्ष करना पड़ता है, लेकिन वह अपने पक्ष को साबित करने और न्याय प्राप्त करने के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखेंगी।

    खजराना मंदिर से जुड़े इस विवाद पर अब प्रशासन, मंदिर प्रबंधन और संबंधित पक्षों की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

  • पारिवारिक विवाद पहुंचा पुलिस के पास: बेटों और बहुओं की शिकायत लेकर एसपी ऑफिस पहुंचे माता-पिता

    पारिवारिक विवाद पहुंचा पुलिस के पास: बेटों और बहुओं की शिकायत लेकर एसपी ऑफिस पहुंचे माता-पिता

     
    झाबुआ । झाबुआ जिले के पेटलावद तहसील अंतर्गत ग्राम हिरानिनामापाड़ा से एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां एक बुजुर्ग दंपति ने अपने ही बेटों और बहुओं पर लगातार मारपीट, प्रताड़ना और जान से मारने की धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित रतनीबाई और उनके पति नाकु डांगी मंगलवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में पहुंचे और न्याय की गुहार लगाई।

    जमीन बांटने के बाद भी नहीं थमी प्रताड़ना
    दंपति ने बताया कि उन्होंने अपनी पूरी जमीन-जायदाद पहले ही अपने तीनों बेटों धनसिंग, डूंगरसिंग और एक अन्य पुत्र के बीच बांट दी थी। इसके बावजूद अब उनके पास केवल एक बीघा जमीन बची है, जिससे वे किसी तरह जीवनयापन कर रहे हैं। लेकिन इसके बाद भी बेटों और बहुओं द्वारा उनके साथ लगातार दुर्व्यवहार किया जा रहा है।

    शराब के नशे में मारपीट और मकान तोड़ने का आरोप
    पीड़ित दंपति के अनुसार, बीते रविवार और 23 मई को बेटों और उनकी पत्नियों ने शराब के नशे में उनके साथ बेरहमी से मारपीट की। नाकु डांगी ने आरोप लगाया कि उन्हें पत्थर मारकर घायल किया गया, जिससे उनके पैर में चोट आई है। वहीं, रतनीबाई ने बताया कि आरोपियों ने उनका मकान तोड़ दिया, जिसके चलते उन्हें भीषण गर्मी में खुले बरामदे में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।

    ‘पुलिस भी कुछ नहीं बिगाड़ सकती’ कहकर धमकी का आरोप
    दंपति ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने विरोध किया तो बेटों ने कहा कि अब जमीन और मकान उनके हैं और पुलिस भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। पीड़ितों का कहना है कि जब उन्होंने थाने में शिकायत करने की कोशिश की, तो आरोपियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी और उनका पीछा भी किया।

    एसपी से सख्त कार्रवाई की मांग
    लगातार प्रताड़ना से परेशान बुजुर्ग दंपति ने पुलिस अधीक्षक देवेन्द्र पाटीदार से निवेदन किया है कि उनके बेटों और बहुओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए और उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए, ताकि वे अपना शेष जीवन भयमुक्त होकर जी सकें।

  • पारिवारिक विवाद पहुंचा पुलिस के पास: बेटों की शिकायत लेकर एसपी ऑफिस पहुंचे माता-पिता

    पारिवारिक विवाद पहुंचा पुलिस के पास: बेटों की शिकायत लेकर एसपी ऑफिस पहुंचे माता-पिता


    झाबुआ  झाबुआ जिले के पेटलावद तहसील अंतर्गत ग्राम हिरानिनामापाड़ा में एक हृदयविदारक मामला सामने आया है, जहां बुजुर्ग दंपति ने अपने ही बेटों और बहुओं पर लगातार प्रताड़ना, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित दंपति रतनीबाई और उनके पति नाकु डांगी मंगलवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में पहुंचे और न्याय की गुहार लगाई।

    जमीन बांटने के बाद भी नहीं थमी प्रताड़ना
    पीड़ित दंपति ने बताया कि उन्होंने अपनी पूरी जमीन-जायदाद पहले ही अपने तीनों बेटों-धनसिंग, डूंगरसिंग और एक अन्य पुत्र के बीच बांट दी थी। इसके बावजूद उनके पास बची हुई मात्र एक बीघा जमीन से ही वे किसी तरह जीवनयापन कर रहे हैं। लेकिन अब आरोप है कि बेटों और बहुओं द्वारा लगातार उनके साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है।

    शराब के नशे में मारपीट और गंभीर चोट का आरोप
    दंपति के अनुसार, बीते रविवार और 23 मई को बेटों और उनकी पत्नियों ने शराब के नशे में उनके साथ बेरहमी से मारपीट की। नाकु डांगी ने आरोप लगाया कि उन्हें पत्थर मारकर घायल किया गया, जिससे उनके पैर में गंभीर चोट आई है। वहीं, रतनीबाई ने बताया कि आरोपियों ने उनका मकान तोड़ दिया, जिसके चलते उन्हें भीषण गर्मी में खुले बरामदे में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।

    धमकी देकर कहा-‘पुलिस हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती’
    पीड़ित दंपति ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने विरोध किया तो बेटों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी और कहा कि अब जमीन और मकान उनके कब्जे में हैं तथा पुलिस भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। दंपति ने यह भी बताया कि जब वे रायपुरिया थाने में शिकायत करने पहुंचे तो आरोपी मोटरसाइकिल से उनका पीछा करते हुए वहां तक पहुंच गए, जिससे वे बेहद भयभीत हो गए।

    एसपी से सख्त कार्रवाई की मांग
    लगातार प्रताड़ना और जान के खतरे से परेशान बुजुर्ग दंपति ने पुलिस अधीक्षक देवेन्द्र पाटीदार से निवेदन किया है कि उनके बेटों और बहुओं के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए और उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए, ताकि वे अपने शेष जीवन को भयमुक्त होकर जी सकें।

    यह मामला न केवल पारिवारिक टूटन की दर्दनाक तस्वीर पेश करता है, बल्कि बुजुर्गों की सुरक्षा और सामाजिक मूल्यों पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

  • नशे की लत ने उजाड़ा हंसता खेलता परिवार और बेटे के हाथों हुई पिता की निर्मम हत्या..

    नशे की लत ने उजाड़ा हंसता खेलता परिवार और बेटे के हाथों हुई पिता की निर्मम हत्या..

    नई दिल्ली: उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ से एक ऐसी हृदय विदारक घटना सामने आई है जिसने मानवीय रिश्तों और पारिवारिक मर्यादाओं को झकझोर कर रख दिया है। नशे की विनाशकारी लत के चलते एक युवक ने मामूली विवाद के बाद अपने ही पिता की लोहे की रॉड से हमला कर जान ले ली।

    यह दुखद वारदात शनिवार देर रात एक गांव में घटित हुई जिसके बाद से पूरे क्षेत्र में मातम और सनसनी का माहौल व्याप्त है। नशा किस प्रकार एक हंसते खेलते परिवार को पूरी तरह बर्बाद कर सकता है यह घटना उसका एक जीवंत और डरावना उदाहरण बनकर सामने आई है जिसने समाज के सामने कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

    प्राप्त प्राथमिक विवरण के अनुसार अठाइस वर्षीय आरोपी युवक लंबे समय से विभिन्न प्रकार के नशों का आदी था और इसी लत के कारण घर में अक्सर कलह की स्थिति बनी रहती थी। शनिवार की रात भी आरोपी का अपने पचास वर्षीय पिता के साथ किसी बहुत ही सामान्य बात को लेकर वाद विवाद शुरू हुआ था।

    नशे के प्रभाव और अनियंत्रित क्रोध में डूबे युवक ने पास ही रखी लोहे की एक भारी रॉड उठाई और अपने पिता के सिर पर जोरदार प्रहार कर दिया। हमले के बाद लहूलुहान होकर पिता जमीन पर गिर पड़े और चीख पुकार सुनकर पहुंचे परिजनों ने उन्हें तत्काल चिकित्सालय पहुंचाया लेकिन उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की और सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर आरोपी युवक को हिरासत में ले लिया। प्रारंभिक पूछताछ और ग्रामीणों के बयानों से यह स्पष्ट हुआ है कि आरोपी की नशे की लत ने उसे हिंसक बना दिया था और वह छोटी छोटी बातों पर भी अपना आपा खो बैठता था।

    शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। गांव के निवासी इस घटना से स्तब्ध हैं और उनका कहना है कि नशा केवल शरीर को ही नहीं बल्कि व्यक्ति के विवेक और संवेदनाओं को भी पूरी तरह समाप्त कर देता है।

    यह मामला केवल एक आपराधिक घटना मात्र नहीं है बल्कि यह हमारे समाज में तेजी से फैलते नशे के जाल की विभीषिका को भी दर्शाता है। पहाड़ी अंचलों में युवाओं के बीच बढ़ती नशाखोरी अब परिवारों के विनाश का कारण बन रही है जहां संस्कार और रिश्तों की डोर कमजोर पड़ती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए केवल दंडात्मक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है बल्कि सामाजिक स्तर पर जागरूकता अभियान और नशामुक्ति प्रयासों की सक्रियता अनिवार्य है। जब तक युवाओं को इस दलदल से बाहर निकालने के ठोस प्रयास नहीं होंगे तब तक रिश्तों के लहूलुहान होने का यह सिलसिला थमता नजर नहीं आता।

    वर्तमान में आरोपी गिरफ्त में है और कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है लेकिन एक पिता को खोने और एक बेटे के अपराधी बनने का यह घाव परिवार के लिए कभी न भरने वाला साबित होगा। गांव की गलियों में आज सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग भारी मन से इस त्रासदी पर चर्चा कर रहे हैं। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

    इस घटना ने एक बार फिर यह चेतावनी दी है कि यदि नशे के बढ़ते प्रभाव पर समय रहते लगाम नहीं कसी गई तो भविष्य में मानवीय मूल्यों का संरक्षण करना कठिन हो जाएगा और समाज को ऐसी ही अन्य पीड़ादायक घटनाओं का गवाह बनना पड़ेगा।