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  • ताइवान-चीन तनाव बढ़ा, ट्रंप के बयान से कूटनीतिक हलचल तेज, हथियार सौदे पर भी सस्पेंस

    ताइवान-चीन तनाव बढ़ा, ट्रंप के बयान से कूटनीतिक हलचल तेज, हथियार सौदे पर भी सस्पेंस



    नई दिल्ली। ताइवान की संप्रभुता और चीन के दावे को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान के बाद ताइवान ने कड़ा रुख अपनाते हुए खुद को पूरी तरह स्वतंत्र और संप्रभु देश बताया है।

    ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका ताइवान के साथ किसी भी सैन्य टकराव में जल्दबाजी नहीं करना चाहता, क्योंकि यह अमेरिका से हजारों किलोमीटर दूर स्थित है। उनके इस बयान को ताइवान की सुरक्षा को लेकर नरम रुख के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे वहां चिंता बढ़ गई है।

    ताइवान के विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि “बीजिंग को ताइवान पर कोई अधिकार नहीं है” और वह एक लोकतांत्रिक और स्वतंत्र राष्ट्र है। यह बयान ट्रंप की चेतावनी के बाद आया, जिसमें उन्होंने ताइवान को यह भी कहा कि वह अमेरिका के भरोसे अपनी स्वतंत्रता की घोषणा को और आगे न बढ़ाए।

    इस बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ट्रंप के बीच हुई बातचीत में ताइवान मुद्दा सबसे बड़ा विवाद बिंदु रहा। चीन इसे अपनी “रेड लाइन” मानता है, जबकि अमेरिका अब तक रणनीतिक अस्पष्टता की नीति अपनाता रहा है।

    इसी बीच ताइवान को दिए जाने वाले 11 अरब डॉलर के हथियार पैकेज पर भी अनिश्चितता बनी हुई है। ट्रंप ने साफ कहा कि इस डील को लेकर उन्होंने अभी अंतिम मंजूरी नहीं दी है और “यह आगे भी रद्द या मंजूर दोनों हो सकता है।”

    इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिका, चीन और ताइवान के बीच पहले से चल रहे तनाव को और अधिक जटिल बना दिया है।

  • समुद्र में सियासी संग्राम ,अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान का कड़ा रुख, बोला मुंहतोड़ जवाब देंगे

    समुद्र में सियासी संग्राम ,अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान का कड़ा रुख, बोला मुंहतोड़ जवाब देंगे

    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव गहराता नजर आ रहा है जहां अमेरिका और ईरान के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना द्वारा एक ईरानी जहाज को जब्त किए जाने के बाद हालात तेजी से बिगड़ते दिख रहे हैं। इस कार्रवाई के बाद ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे सीधी उकसावे वाली कार्रवाई बताया है और जवाब देने की चेतावनी दी है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना की जानकारी देते हुए बताया कि ईरान के झंडे वाला एक बड़ा कार्गो जहाज अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को पार करने की कोशिश कर रहा था। उनके अनुसार लगभग 900 फीट लंबे इस जहाज को रोकने के लिए पहले चेतावनी दी गई लेकिन जब जहाज के क्रू ने निर्देशों का पालन नहीं किया तो अमेरिकी नौसेना को सख्त कार्रवाई करनी पड़ी।

    बताया जा रहा है कि अमेरिकी गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS Spruance ने जहाज को रोकने के लिए उसके इंजन रूम को निशाना बनाया जिससे वह आगे बढ़ने में असमर्थ हो गया। इसके बाद अमेरिकी मरीन ने जहाज को अपने कब्जे में ले लिया। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इस जहाज पर पहले से वित्तीय प्रतिबंध लगे हुए थे और यह गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल रहा है।

    वहीं दूसरी ओर ईरान ने इस कार्रवाई को पूरी तरह गलत बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है। ईरानी सेना ने इसे समुद्री रास्ते में की गई डकैती करार दिया है और आरोप लगाया है कि अमेरिका ने न केवल जहाज को रोका बल्कि उसके नेविगेशन सिस्टम को भी नुकसान पहुंचाया और उस पर सैन्य कब्जा कर लिया। ईरान के सरकारी माध्यमों के जरिए जारी बयान में स्पष्ट कहा गया है कि इस कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा और जल्द ही जवाबी कदम उठाए जाएंगे।

    यह घटना ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावनाओं को लेकर भी चर्चा चल रही थी। खबरों के अनुसार अमेरिका की ओर से एक प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान के इस्लामाबाद जाने वाला है जहां संभावित वार्ता हो सकती है। इस प्रतिनिधिमंडल में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस स्पेशल दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शामिल बताए जा रहे हैं।

    हालांकि ईरान की ओर से अभी तक आधिकारिक रूप से इस बैठक की पुष्टि नहीं की गई है और वहां के मीडिया में भी इस पर संदेह जताया जा रहा है। ऐसे में यह घटना दोनों देशों के बीच संभावित कूटनीतिक प्रयासों पर भी असर डाल सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ओमान की खाड़ी जैसी संवेदनशील जगह पर इस तरह की सैन्य कार्रवाई वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा सकती है क्योंकि यह क्षेत्र पहले से ही सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

    फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि ईरान अपनी चेतावनी को किस हद तक अमल में लाता है और क्या दोनों देश बातचीत के जरिए इस तनाव को कम करने की दिशा में आगे बढ़ते हैं या यह टकराव और गंभीर रूप ले लेता है।

  • ट्रंप ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को कहा ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’, नोबेल न मिलने पर उठाए सवाल

    ट्रंप ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को कहा ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’, नोबेल न मिलने पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मियामी के फेना फोरम में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए ईरान युद्ध और वैश्विक राजनीति को लेकर कई तीखे बयान दिए। खुद को एक बार फिर पीसमेकर बताते हुए उन्होंने कहा कि यदि उन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार नहीं मिला, तो फिर यह किसी और को भी नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने क्यूबा को अगला निशाना भी बताया।

    ट्रंप ने दावा किया कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत ईरान की सैन्य ताकत को पूरी तरह कमजोर कर दिया गया है और वहां की सरकार अब समझौते के लिए मजबूर है। अपने खास अंदाज में उन्होंने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ तक कह दिया।

    अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट अब ईरानी आतंक और न्यूक्लियर ब्लैकमेल से मुक्त होने की ओर बढ़ रहा है। ट्रंप ने कहा, “मेरे नेतृत्व में अमेरिका इस कट्टरपंथी शासन से पैदा खतरे को खत्म कर रहा है। ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के जरिए ईरान की ताकत को तोड़ा जा रहा है। हमारे पास दुनिया की सबसे ताकतवर सेना है, जिसे मैंने अपने पहले कार्यकाल में मजबूत किया। हमारे पास ऐसे हथियार हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। 47 साल तक ईरान क्षेत्र का दबदबा बनाए हुए था, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है।”

    कासिम सुलेमानी का भी किया जिक्र

    ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी को मार गिराने की घटना का भी उल्लेख किया। जनवरी 2020 में बगदाद एयरपोर्ट पर अमेरिकी ड्रोन हमले में सुलेमानी की मौत हुई थी। उस समय अमेरिका ने इसे अपने हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम बताया था।

    उन्होंने कहा, “यह मेरे कार्यकाल का अहम पल था। वह इतना प्रभावशाली था कि मुझे लगता है ईरान का नेतृत्व भी अंदर से राहत महसूस कर रहा था, हालांकि वे इसे स्वीकार नहीं करते। अब कोई उनसे सवाल करने वाला भी नहीं है। ईरान पर इतना दबाव है कि उसे बातचीत के लिए आना ही होगा। वे समझौते के लिए आग्रह कर रहे हैं, लेकिन उन्हें ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ मेरा मतलब होर्मुज खोलना ही होगा। फेक न्यूज कहेगी कि यह गलती थी, लेकिन मैं बहुत कम गलती करता हूं।”

    ब्रिटेन और नाटो पर भी निशाना

    नाटो और ब्रिटेन को लेकर भी ट्रंप ने आलोचनात्मक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यूके के प्रधानमंत्री से उन्होंने दो एयरक्राफ्ट कैरियर की मांग की थी, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। ट्रंप ने कहा, “वे छोटे हैं और ज्यादा तेज भी नहीं हैं, लेकिन हम उनका इस्तेमाल हेलीकॉप्टर प्लेटफॉर्म के रूप में कर सकते हैं। मैंने पूछा कि क्या आप हमारी मदद करेंगे? जवाब मिला कि युद्ध खत्म होने के बाद मदद करेंगे। यही नाटो की हकीकत है। हम उनकी मदद करते हैं, लेकिन वे हमारे साथ खड़े नहीं होते।” उन्होंने यह भी कहा कि नाटो की तुलना में बहरीन और कुवैत ने ज्यादा सहयोग दिया है और मिडिल ईस्ट के सहयोगी देशों ने निराश नहीं किया।

    नोबेल पुरस्कार पर फिर दोहराया दावा

    ट्रंप ने कहा कि वह चाहते हैं कि उनकी पहचान एक बड़े शांतिदूत के रूप में बने। उन्होंने कहा, “अगर मुझे शांति का नोबेल पुरस्कार नहीं मिला, तो फिर किसी को नहीं मिलना चाहिए। मुझे यह नहीं मिला और मुझे इस पर हैरानी भी नहीं है।”

    मिसाइल हमलों पर भी किया दावा

    मिसाइल हमलों का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि हाल ही में उन पर 101 मिसाइलों से हमला किया गया था, लेकिन सभी को मार गिराया गया। उन्होंने कहा, “अब हम उनके ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। उनके पास एयर डिफेंस नहीं बचा है और हम आसानी से अपने टारगेट पर हमला कर रहे हैं। हमारे पास अभी 3,554 लक्ष्य बाकी हैं, जिन्हें जल्द खत्म किया जाएगा। आगे की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा।”

  • US हमले के बाद मोजतबा खामेनेई की हालत पर सस्पेंस, ट्रंप का दावा- जिंदा हैं, लेकिन बुरी तरह घायल

    US हमले के बाद मोजतबा खामेनेई की हालत पर सस्पेंस, ट्रंप का दावा- जिंदा हैं, लेकिन बुरी तरह घायल



    नई दिल्ली। ईरान में चल रहे युद्ध और सत्ता परिवर्तन के बीच नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की सेहत को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अटकलें तेज हो गई हैं। अमेरिका ने दावा किया है कि खामेनेई भी उस हमले में घायल हुए हैं जिसमें ईरान के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया गया था। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि मोजतबा खामेनेई संभवतः जीवित हैं, लेकिन गंभीर रूप से घायल हो सकते हैं।

    फॉक्स न्यूज रेडियो के ब्रायन किलमीड शो को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने पहली बार मोजतबा खामेनेई की स्थिति पर टिप्पणी की। उनसे जब पूछा गया कि क्या नया ईरानी नेता जीवित है, तो ट्रंप ने कहा, “मुझे लगता है कि वह शायद जिंदा हैं।” हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह घायल हो सकते हैं, लेकिन किसी न किसी रूप में जीवित हैं।

    ब्रिटेन के अखबार द सन की रिपोर्ट में मोजतबा की हालत को लेकर और भी गंभीर दावे किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, मोजतबा खामेनेई फिलहाल कोमा में हैं। हमले में उनका कम से कम एक पैर कट गया है और उनके पेट या लीवर को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है। बताया गया है कि तेहरान के सीना यूनिवर्सिटी अस्पताल में कड़ी सुरक्षा के बीच उनका इलाज चल रहा है।

    इस बीच मोजतबा खामेनेई की ओर से ईरानी सरकारी टेलीविजन पर एक बयान प्रसारित किया गया। हालांकि यह बयान उन्होंने खुद नहीं पढ़ा, बल्कि एक एंकर ने इसे पढ़कर सुनाया। बयान में अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा गया है कि क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को तुरंत बंद किया जाए, अन्यथा उन पर हमले किए जाएंगे।

    बयान में यह भी कहा गया कि ईरान इस ‘थोपे गए युद्ध’ के लिए दुश्मनों से हर्जाना वसूलेगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो ईरान उनकी संपत्तियों को जब्त करने या बराबर मूल्य की संपत्ति को नष्ट करने की कार्रवाई करेगा।

  • US-ईरान तनाव के बीच अलर्ट: भारतीय दूतावास, तेहरान ने भारतीयों से तुरंत ईरान छोड़ने को कहा

    US-ईरान तनाव के बीच अलर्ट: भारतीय दूतावास, तेहरान ने भारतीयों से तुरंत ईरान छोड़ने को कहा


    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में तेजी से बदलते हालात और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने 23 फरवरी 2026 को एक अहम एडवाइजरी जारी कर ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों से तुरंत देश छोड़ने की अपील की है। दूतावास ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए छात्र, तीर्थयात्री, व्यापारी और पर्यटक उपलब्ध सभी साधनों, विशेषकर वाणिज्यिक उड़ानों, का उपयोग कर जल्द से जल्द ईरान से बाहर निकलने की योजना बनाएं। यह सलाह पहले 5 जनवरी और 14 जनवरी को जारी परामर्शों की निरंतरता में दोहराई गई है, लेकिन इस बार लहजा अधिक सतर्क और गंभीर है।

    दूतावास ने अपनी आधिकारिक एडवाइजरी में कहा है कि ईरान में स्थिति तेजी से बदल रही है और किसी भी संभावित आपात परिस्थिति से बचने के लिए एहतियात बरतना बेहद जरूरी है। भारतीय नागरिकों को विरोध प्रदर्शनों और भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहने, स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और दूतावास के साथ लगातार संपर्क में बने रहने की सलाह दी गई है। साथ ही सभी से अपने पासपोर्ट, वीजा और अन्य पहचान दस्तावेज तैयार रखने को कहा गया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तुरंत यात्रा की जा सके।

    दूतावास ने यह भी दोहराया है कि जिन भारतीयों ने अभी तक अपने प्रवास का पंजीकरण नहीं कराया है, वे तुरंत आधिकारिक लिंक के माध्यम से रजिस्ट्रेशन कराएं। यदि इंटरनेट कनेक्टिविटी में बाधा आ रही हो तो भारत में रह रहे उनके परिजन पंजीकरण प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। किसी भी आपात स्थिति में सहायता के लिए दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर +989128109115, +989128109109, +989128109102 और +989932179359 जारी किए हैं। इसके अलावा [email protected] पर ईमेल के माध्यम से भी संपर्क किया जा सकता है। दूतावास ने भरोसा दिलाया है कि भारतीय समुदाय की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

    दरअसल, यह एडवाइजरी ऐसे समय आई है जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को नए परमाणु समझौते पर सहमति के लिए सीमित समय का अल्टीमेटम दिया है और चेतावनी दी है कि विफलता की स्थिति में कड़े परिणाम भुगतने होंगे। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने मध्य पूर्व क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है, जिसमें युद्धपोत, फाइटर जेट्स और अन्य रणनीतिक संसाधन शामिल हैं। दूसरी ओर, ईरान में विरोध प्रदर्शन और झड़पों की खबरों ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं होते तो क्षेत्र में सैन्य टकराव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे परिदृश्य में भारतीय दूतावास का यह कदम एहतियाती और रणनीतिक दोनों ही दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बदलती परिस्थितियों के बीच भारतीय नागरिकों से अपील की गई है कि वे अफवाहों से बचें, केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और अपनी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।