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  • चंद्र ग्रहण खत्म होने के बाद करें इन 5 चीजों का दान, जानिए क्‍या है वजह ?

    चंद्र ग्रहण खत्म होने के बाद करें इन 5 चीजों का दान, जानिए क्‍या है वजह ?


    नई दिल्ली। इस साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा (Sawan Purnima) के दिन लगेगा। यह आंशिक चंद्र ग्रहण होगा, लेकिन भारत (India) में दिखाई नहीं देगा। ऐसे में यहां इसका सूतक काल (Sutak period) भी मान्य नहीं होगा। हालांकि, ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान चंद्रमा पीड़ित अवस्था में माना जाता है। इससे मानसिक अशांति और नकारात्मकता बढ़ने की मान्यता है। इन्हीं को दूर करने के लिए ग्रहण समाप्त होने के बाद दान-पुण्य करने की परंपरा है।

    ग्रहण के बाद दान का क्या है महत्व?
    धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक ग्रहण के दौरान मंत्र जाप और ईश्वर का ध्यान करना शुभ माना जाता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके जरूरतमंदों को दान करने की परंपरा है। माना जाता है कि इससे नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। हालांकि, दान हमेशा श्रद्धा और बिना अहंकार के करने की सलाह दी जाती है।

    1. अन्न का करें दान
    ग्रहण समाप्त होने के बाद जरूरतमंदों को भोजन कराना या अन्न दान करना शुभ माना जाता है। गेहूं, चावल और दाल जैसी खाद्य सामग्री का दान किया जा सकता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इससे चंद्र दोष के नकारात्मक प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है।

    2. जरूरतमंदों को धन दें
    ग्रहण के बाद अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को धन का दान किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है। इससे धन संबंधी परेशानियां कम होने की मान्यता है।

    3. दीप दान करें
    चंद्र ग्रहण के बाद दीप दान को भी विशेष शुभ माना जाता है। परंपरा के अनुसार पवित्र नदी के किनारे मिट्टी का दीपक जलाकर प्रवाहित किया जाता है। यदि नदी के किनारे जाना संभव न हो तो घर में भी शाम के समय चंद्रमा का स्मरण करते हुए दीपक जला सकते हैं। मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

    4. चांदी या मोती का दान
    ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार चंद्रमा का संबंध चांदी और मोती से माना जाता है। ऐसे में ग्रहण समाप्त होने के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार चांदी या मोती का दान किया जा सकता है। माना जाता है कि इससे मानसिक तनाव कम करने और कुंडली में चंद्रमा से जुड़े नकारात्मक प्रभावों को शांत करने में मदद मिल सकती है।

    5. सफेद चीजों का दान
    सफेद रंग का संबंध भी चंद्रमा से माना जाता है। इसलिए ग्रहण के बाद जरूरतमंदों को दूध, चीनी, चावल, सफेद मिठाई या सफेद वस्त्र जैसी चीजें दान करने की परंपरा है। ज्योतिष के अनुसार इससे मन को शांति मिलने और सकारात्मकता बढ़ने की मान्यता है।

    ध्यान रखें: ये उपाय पारंपरिक धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। इनके प्रभाव और परिणाम व्यक्ति की आस्था, परिस्थितियों, स्थान और अन्य कारकों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। इन्हें सामान्य धार्मिक जानकारी के तौर पर ही लिया जाना चाहिए, किसी निश्चित लाभ की गारंटी के रूप में नहीं।

  • 50 पैसे का सिक्का 17,000 रुपये में नीलाम… ईरान की मदद के लिए 5 साल के बच्चे ने गुल्लक से किया था दान

    50 पैसे का सिक्का 17,000 रुपये में नीलाम… ईरान की मदद के लिए 5 साल के बच्चे ने गुल्लक से किया था दान


    नई दिल्ली।
    कश्मीर (Kashmir) की वादियों से इंसानियत और मासूमियत की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया है। श्रीनगर के डल झील (Dal Lake, Srinagar) स्थित ‘मीर बहरी’ इलाके में युद्ध प्रभावित ईरान के लिए आयोजित एक डोनेशन अभियान (Donation Campaign) के दौरान 50 पैसे का एक पुराना सिक्का 17,000 में नीलाम हुआ। यह सिक्का एक 5 साल के बच्चे ने अपने गुल्लक से दान किया था।

    युद्ध की विभीषिका झेल रहे लोगों की मदद के लिए इलाके में चंदा इकट्ठा किया जा रहा था। इसी दौरान एक पांच साल का बच्चा अपनी ‘पिगी बैंक’ (गुल्लक) लेकर पहुंचा। जब गुल्लक खोली गई, तो उसमें से अन्य पैसों के साथ 50 पैसे का एक सिक्का भी निकला, जो आजकल चलन में लगभग न के बराबर है। बच्चे की इस मासूम कोशिश ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया।


    17,000 की ऐतिहासिक नीलामी

    बच्चे की भावना का सम्मान करने के लिए स्थानीय लोगों ने उस 50 पैसे के सिक्के की नीलामी करने का फैसला किया। देखते ही देखते बोली बढ़ती गई और अंत में यह दुर्लभ सिक्का 17,000 रुपये में नीलाम हुआ। सिक्के से प्राप्त यह पूरी राशि ईरान में राहत कार्यों के लिए भेजी जाएगी।

    स्थानीय निवासी जावेद अहमद सूफी ने बच्चे के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि यह घटना दर्शाती है कि दान का महत्व उसकी कीमत से नहीं, बल्कि देने वाले की भावना से तय होता है। उन्होंने कहा, “एक बच्चे के लिए उसकी गुल्लक की जमापूंजी सबसे कीमती होती है। अपनी सबसे प्रिय चीज को दूसरों की मदद के लिए दे देना ही सच्ची दयालुता है।”

    डाल झील के किनारे घटित इस वाकये की चर्चा पूरे श्रीनगर में हो रही है। लोग इस नन्हे फरिश्ते की तारीफ कर रहे हैं, जिसकी एक छोटी सी बचत ने युद्ध पीड़ितों की मदद के लिए एक बड़ी राशि जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।