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  • शरद पूर्णिमा पर इन 5 चीजों का दान माना जाता है शुभ, मां लक्ष्मी की कृपा और सुख-समृद्धि के लिए जानें धार्मिक मान्यताएं

    शरद पूर्णिमा पर इन 5 चीजों का दान माना जाता है शुभ, मां लक्ष्मी की कृपा और सुख-समृद्धि के लिए जानें धार्मिक मान्यताएं

    नई दिल्ली । शरद पूर्णिमा का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। यह तिथि मां लक्ष्मी की पूजा, चंद्रदेव की आराधना और दान-पुण्य के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। इस अवसर पर पूजा-पाठ करने के साथ जरूरतमंद लोगों की सहायता करने की परंपरा भी प्रचलित है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक दान करने से सुख-शांति और घर में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। ऐसे में इस पावन अवसर पर कुछ विशेष वस्तुओं का दान करने का धार्मिक महत्व बताया गया है।

    सनातन परंपरा में पूर्णिमा तिथि को पूजा, जप और दान-पुण्य के लिए विशेष माना जाता है। शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी का स्मरण करने और चंद्रदेव की पूजा करने की परंपरा है। इस रात खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखने की मान्यता भी काफी प्रचलित है। इसके साथ ही जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और उपयोगी सामग्री देना सेवा भाव से जुड़ा माना जाता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, दान का महत्व केवल वस्तु देने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना भी इसका प्रमुख उद्देश्य है।

    शरद पूर्णिमा पर सफेद वस्त्रों का दान करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में सफेद रंग को शांति, पवित्रता और चंद्रमा से जोड़कर देखा जाता है। इस दिन जरूरतमंद लोगों को साफ-सुथरे कपड़े दिए जा सकते हैं। दान करते समय अपनी आर्थिक स्थिति और सामर्थ्य का ध्यान रखना चाहिए। महंगे वस्त्र देना आवश्यक नहीं है, बल्कि किसी जरूरतमंद की आवश्यकता पूरी करना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

    इस अवसर पर चावल, दूध और चीनी का दान भी शुभ माना जाता है। शरद पूर्णिमा पर खीर बनाने और उसे चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा के कारण इन खाद्य सामग्रियों का विशेष उल्लेख किया जाता है। जरूरतमंद परिवारों को चावल, दूध, चीनी या अन्य उपयोगी खाद्य सामग्री देना अन्नदान और सेवा भाव से जुड़ा है। इस तरह का दान परिवारों की भोजन संबंधी जरूरतों को पूरा करने में भी मदद कर सकता है।

    धार्मिक मान्यताओं में चांदी का संबंध चंद्रदेव से माना जाता है। इसलिए शरद पूर्णिमा पर सामर्थ्य के अनुसार चांदी के बर्तनों का दान करना भी शुभ बताया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से मानसिक शांति और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। हालांकि, दान के लिए चांदी जैसी महंगी वस्तु देना अनिवार्य नहीं है। व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार छोटी वस्तु दान करके भी सेवा कार्य में योगदान दे सकता है।

    शरद पूर्णिमा पर सफेद मिठाई और मौसमी फलों का दान करना भी पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन जरूरतमंद लोगों को मिठाई, फल और अन्य खाद्य पदार्थ दिए जा सकते हैं। भोजन साझा करना और दूसरों की सहायता करना इस परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके अलावा जरूरतमंदों को भोजन कराना, राशन देना या आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना भी उपयोगी दान कार्यों में शामिल है। धार्मिक परंपराओं में अन्नदान को विशेष महत्व दिया गया है, क्योंकि इससे लोगों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है।

    दान करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है। दान हमेशा श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार करना चाहिए। खाद्य सामग्री साफ-सुथरी और उपयोग के योग्य होनी चाहिए। सहायता करते समय सामने वाले व्यक्ति की वास्तविक जरूरत को प्राथमिकता देनी चाहिए और किसी भी प्रकार के दिखावे या अहंकार से बचना चाहिए। किसी जरूरतमंद की मदद करते समय उसके सम्मान और भावनाओं का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण है।

    मां लक्ष्मी की कृपा पाने की धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात घर की साफ-सफाई करने, दीपक जलाने, श्रद्धापूर्वक पूजा करने और जरूरतमंदों की सहायता करने की परंपरा है। हालांकि, इन धार्मिक मान्यताओं को आस्था और विश्वास के संदर्भ में समझना चाहिए। इस पर्व का एक महत्वपूर्ण संदेश दूसरों के साथ खुशियां बांटना और समाज में सेवा भावना को बढ़ावा देना भी है। इसलिए शरद पूर्णिमा पर दान करते समय वस्तु के मूल्य से अधिक उसके पीछे की भावना और जरूरतमंद की सहायता को महत्व देना चाहिए।

  • चामुंडा मंदिर में गुप्त दानदाता ने दिए 3 किलो सोना और 6 क्विंटल चांदी, गर्भगृह का बदलेगा स्वरूप

    चामुंडा मंदिर में गुप्त दानदाता ने दिए 3 किलो सोना और 6 क्विंटल चांदी, गर्भगृह का बदलेगा स्वरूप


    नई दिल्ली । हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित प्रसिद्ध श्री चामुंडा नंदकेश्वर धाम के नवीनीकरण का काम तेजी से चल रहा है। करीब 400 साल पुराने इस धार्मिक स्थल को नए स्वरूप में सजाने के लिए एक गुमनाम दानदाता ने बड़ी मात्रा में सोना और चांदी देने का निर्णय लिया है। पंजाब से जुड़े इस दानदाता की ओर से देवी चामुंडा के सिंहासन के लिए 3 किलो सोना और गर्भगृह की सजावट के लिए 6 क्विंटल चांदी देने की बात सामने आई है।

    मंदिर प्रशासन के मुताबिक, दानदाता ने अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करने का अनुरोध किया है। पहले से मंदिर में मौजूद करीब 2.85 क्विंटल चांदी को भी नए दान के साथ मिलाकर गर्भगृह की सजावट में इस्तेमाल किया जाएगा। इस तरह मंदिर के गर्भगृह को सजाने के लिए उपलब्ध चांदी की कुल मात्रा काफी अधिक हो जाएगी।

    श्री चामुंडा नंदकेश्वर धाम देवी चामुंडा को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी ने चंड और मुंड नाम के राक्षसों का वध किया था। इसी प्रसंग से देवी के चामुंडा स्वरूप का संबंध बताया जाता है। मंदिर परिसर में देवी के मुख्य मंदिर के साथ भगवान शिव का स्वयंभू शिवलिंग भी स्थित है। इसी वजह से यह स्थान चामुंडा नंदकेश्वर धाम के नाम से भी जाना जाता है।

    नवीनीकरण के तहत गर्भगृह में विशेष मार्बल लगाया जा रहा है। इसके लिए वियतनाम से मार्बल मंगाया जा रहा है, जबकि मंदिर के अन्य हिस्सों में राजस्थान के मकराना का मार्बल इस्तेमाल किया जा रहा है। मंदिर में पत्थर और मार्बल से जुड़े काम को तेजी से पूरा किया जा रहा है। उम्मीद है कि नवीनीकरण का यह चरण इस साल के अंत तक पूरा हो जाएगा।

    मंदिर के नंदकेश्वर हिस्से को सुंदर बनाने का काम पहले ही पूरा किया जा चुका है। यहां एक स्वयंभू शिवलिंग स्थित है, जिसके ऊपर एक बड़ा पत्थर मौजूद है। इसके अलावा यज्ञशाला का काम भी पूरा हो चुका है। मंदिर परिसर में किए जा रहे कई अन्य कार्यों में भी दानदाताओं का सहयोग लिया जा रहा है। इनमें से कुछ दानदाताओं ने अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करने की इच्छा जताई है।

    चामुंडा धाम धार्मिक आस्था के साथ अपनी परंपराओं के लिए भी जाना जाता है। विवाह के बाद नए शादीशुदा जोड़े यहां दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पूरे वर्ष मंदिर में आते हैं। मंदिर बानेर नदी के किनारे स्थित है और हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

    मंदिर से जुड़ी स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार, कई सदियों पहले एक स्थानीय राजा और पुजारी ने देवी से प्रार्थना की थी कि उनका पवित्र स्थान पहाड़ी की दुर्गम चोटी से हटाकर ऐसी जगह स्थापित किया जाए, जहां श्रद्धालुओं के लिए पहुंचना आसान हो। मान्यता है कि देवी ने पुजारी के सपने में आकर बानेर नदी के किनारे एक स्थान पर खुदाई करने को कहा था।

    कहा जाता है कि खुदाई के दौरान वहां पत्थर की एक प्राचीन मूर्ति मिली। शुरुआत में लोगों ने उसे सामान्य चट्टान समझा और कई लोगों ने उसे उठाने का प्रयास किया, लेकिन वे सफल नहीं हुए। बाद में पुजारी ने स्नान कर श्रद्धापूर्वक वहां पहुंचकर मूर्ति को आसानी से उठा लिया और उसे वर्तमान स्थान पर स्थापित किया। इसी घटना को मंदिर की स्थापना से जुड़ी प्रमुख धार्मिक मान्यताओं में गिना जाता है।

  • राम मंदिर दान चोरी की गोपनीय जानकारी लीक करने वाले तक पहुंची पुलिस, लखनऊ कनेक्शन भी सामने आया

    राम मंदिर दान चोरी की गोपनीय जानकारी लीक करने वाले तक पहुंची पुलिस, लखनऊ कनेक्शन भी सामने आया

    नई दिल्ली ।अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान चोरी मामले की जांच अब केवल चोरी की घटनाओं तक सीमित नहीं रह गई है। पुलिस की पड़ताल मंदिर और ट्रस्ट से जुड़ी गोपनीय जानकारियों के बाहर पहुंचने की कड़ी तक भी पहुंच गई है। जांच के दौरान पूर्व और वर्तमान कर्मचारियों से पूछताछ की गई है और उनके बयान दर्ज किए गए हैं।

    पूछताछ से मिली जानकारियों के आधार पर पुलिस उस व्यक्ति तक पहुंची है, जिस पर दान चोरी से संबंधित संवेदनशील जानकारी एक प्रमुख राजनीतिक नेता तक पहुंचाने का संदेह है। जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित व्यक्ति की नेता से संपर्क था और वह उनसे मिलने के लिए लखनऊ भी गया था।

    गोपनीय जानकारी लीक होने का मामला उस समय जांच के दायरे में आया, जब चढ़ावा चोरी की घटना के करीब एक महीने बाद ट्रस्ट पदाधिकारियों के बीच हुई बातचीत से जुड़ी जानकारियां सामने आईं। इस बातचीत में मंदिर और ट्रस्ट के भीतर की सूचनाओं के बाहर पहुंचने को लेकर चिंता जताई गई थी।

    इसके बाद पुलिस ने यह पता लगाने पर ध्यान केंद्रित किया कि मंदिर और ट्रस्ट से जुड़ी अंदरूनी जानकारी किस व्यक्ति के माध्यम से बाहर पहुंची। जांच के दौरान एक कर्मचारी के प्रमुख राजनीतिक नेता के संपर्क में रहने और उनसे मिलने के लिए लखनऊ जाने की जानकारी सामने आई।

    पुलिस अब इस जानकारी का मिलान अन्य उपलब्ध साक्ष्यों और पूछताछ में सामने आए तथ्यों से कर रही है। जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर संदिग्ध के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

    जांच का एक हिस्सा संदिग्ध की सोशल मीडिया गतिविधियों से भी जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, जुलाई के बाद उसके फेसबुक अकाउंट से कई पोस्ट हटा दी गईं। 28 जुलाई के बाद अकाउंट पर कोई नई पोस्ट भी नहीं की गई। पुलिस ने हटाई गई पोस्ट से संबंधित डेटा हासिल करने के लिए साइबर सेल की मदद ली है।

    जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि चढ़ावा चोरी की घटना के बाद संबंधित लोगों के बीच किस तरह संपर्क हुआ और उस दौरान कौन-कौन सी सूचनाएं साझा की गईं। सोशल मीडिया गतिविधियों और आपसी संपर्कों को जांच के उपलब्ध तथ्यों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    दान चोरी मामले में बैंक के संबंधित कर्मचारियों से भी पूछताछ पूरी की जा चुकी है। भारतीय स्टेट बैंक से जुड़े सभी संबंधित कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए हैं। इनमें तीन कर्मचारियों से विस्तृत पूछताछ की गई। इनमें से दो कर्मचारियों से मिली जानकारी को जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    पुलिस इन बयानों को अन्य साक्ष्यों के साथ मिलाकर मामले की पूरी कड़ी तैयार करने में जुटी है। जांच का उद्देश्य चोरी की घटना के साथ-साथ उससे जुड़ी सूचनाओं के संभावित लीक की भूमिका को भी स्पष्ट करना है।

    मामले की विवेचना अब अंतिम चरण में बताई जा रही है। पुलिस 25 सितंबर को आरोपपत्र दाखिल करने की तैयारी में है। जांच के दौरान दो और नाम सामने आने की संभावना भी जताई गई है, हालांकि इन नामों को लेकर अंतिम कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।

    22 सितंबर को आरोपियों की गिरफ्तारी के 90 दिन पूरे हो रहे हैं। कानून के अनुसार, निर्धारित अवधि के भीतर आरोपपत्र दाखिल नहीं होने की स्थिति में आरोपियों को जमानत का अधिकार मिल सकता है। इसलिए अब आरोपपत्र दाखिल होने और आरोपियों की जमानत से जुड़े घटनाक्रम पर भी नजर बनी हुई है।

  • राम मंदिर में चंदा चोरी का बड़ा खुलासा, CCTV में 105 घटनाएं आईं सामने; 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी

    राम मंदिर में चंदा चोरी का बड़ा खुलासा, CCTV में 105 घटनाएं आईं सामने; 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी

    नई दिल्ली । अयोध्या स्थित राम मंदिर में चंदा चोरी के मामले की जांच अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान मामले की जांच से जुड़ी कई अहम जानकारियां सामने रखी गईं। जांच के दौरान मंदिर परिसर में लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली गई, जिसमें चंदा चोरी की 105 घटनाओं का पता चला है। इन घटनाओं से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई।

    जांच में CCTV फुटेज के अलावा गवाहों के बयान और दूसरे उपलब्ध साक्ष्यों को भी शामिल किया गया। रिकॉर्डिंग का बारीकी से विश्लेषण कर घटनाओं की परिस्थितियों को समझने और संबंधित लोगों की पहचान करने की कोशिश की गई। जांच में सामने आए अलग-अलग साक्ष्यों को आपस में मिलाकर मामले की कड़ियों को जोड़ने का काम किया गया है।

    अदालत को यह भी जानकारी दी गई कि मंदिर में कीमती सामान से संबंधित रसीदें सॉफ्टवेयर के जरिए तैयार की जाती हैं। इन रसीदों को सुरक्षित रखने के लिए SBI लॉकर में रखा जाता है। जांच के दौरान रसीदों की व्यवस्था, रिकॉर्ड और अन्य जरूरी सामग्री को भी देखा गया। CCTV में सामने आई 105 घटनाएं अब मामले की जांच का अहम हिस्सा बन गई हैं।

    जांच की मौजूदा स्थिति के मुताबिक पड़ताल लगभग पूरी हो चुकी है। 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी की जा रही है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद संबंधित मजिस्ट्रेट कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करेंगे। इस समयसीमा को देखते हुए मामले की जांच और आरोप पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से जांच की स्टेटस रिपोर्ट उपलब्ध कराने की मांग भी की गई। हालांकि अदालत ने रिपोर्ट देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि फिलहाल मामले को सेशन जज से अपने पास लेने की आवश्यकता नहीं है। अगर आगे किसी अतिरिक्त जांच की जरूरत महसूस होती है, तो उस संबंध में उचित आदेश जारी किया जा सकता है।

    चंदा चोरी के मामले के बाद राम मंदिर ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। ट्रस्ट में CEO व्यवस्था लागू की गई है और पूर्व सैन्य अधिकारी जितेंद्र मिश्रा को मुख्य कार्यकारी अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। नई व्यवस्था के तहत प्रशासनिक कामकाज को नए तरीके से संचालित करने की तैयारी की गई है।

    मामले में पहली गिरफ्तारी के बाद 90 दिन की अवधि पूरी होने की तारीख भी अहम है। बताया गया कि 25 सितंबर को यह अवधि पूरी हो रही है। यदि निर्धारित समय तक चार्जशीट दाखिल नहीं होती है तो गिरफ्तार आरोपियों को कानून के तहत स्वत: जमानत मिलने की स्थिति बन सकती है। इसी वजह से समय पर आरोप पत्र दाखिल करना जांच के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    अब 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल होने और उसके बाद होने वाली कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी। CCTV में सामने आई 105 घटनाओं, गवाहों के बयानों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

  • इंडिगो के सह-संस्थापक राकेश गंगवाल की IIT कानपुर को 300 करोड़ की मदद, मेडिकल स्कूल और अस्पताल को मिलेगा विस्तार

    इंडिगो के सह-संस्थापक राकेश गंगवाल की IIT कानपुर को 300 करोड़ की मदद, मेडिकल स्कूल और अस्पताल को मिलेगा विस्तार


    नई दिल्ली ।आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र और इंडिगो के सह-संस्थापक राकेश गंगवाल ने अपने संस्थान को 300 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है। यह राशि आईआईटी कानपुर में विकसित किए जा रहे गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के विस्तार और विकास में इस्तेमाल की जाएगी। इससे पहले वर्ष 2022 में गंगवाल ने इसी संस्थान के लिए 100 करोड़ रुपये का योगदान दिया था। इस तरह मेडिकल स्कूल के लिए उनका कुल योगदान 400 करोड़ रुपये हो जाएगा।

    राकेश गंगवाल का आईआईटी कानपुर से पुराना और मजबूत संबंध रहा है। उन्होंने वर्ष 1975 में संस्थान से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया स्थित व्हार्टन स्कूल से एमबीए किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने विमानन क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और कई बड़ी एयरलाइनों के साथ काम किया।

    गंगवाल ने US एयरवेज, एयर फ्रांस और यूनाइटेड एयरलाइंस जैसी कंपनियों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। बाद में वर्ष 2006 में उन्होंने राहुल भाटिया के साथ मिलकर इंटरग्लोब एविएशन की शुरुआत की। इसी कंपनी के जरिए इंडिगो एयरलाइन का संचालन हुआ और भारतीय विमानन क्षेत्र में कंपनी ने तेजी से अपनी पहचान बनाई।

    आईआईटी कानपुर में मेडिकल शिक्षा और तकनीक को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी की स्थापना की गई है। संस्थान ने इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी के साथ चिकित्सा क्षेत्र में शोध, नवाचार और क्लिनिकल सुविधाओं को जोड़ने की दिशा में इस पहल को महत्वपूर्ण कदम के तौर पर विकसित किया है।

    गंगवाल स्कूल की विकास योजना में आईआईटी कानपुर परिसर में 500 बेड वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की स्थापना शामिल है। इसके अलावा 200 बेड वाले कैंसर केयर एवं रिसर्च सेंटर का भी प्रस्ताव है। इन सुविधाओं के जरिए मेडिकल शिक्षा, चिकित्सा अनुसंधान और मरीजों के लिए उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं को एक साथ आगे बढ़ाने की योजना है।

    राकेश गंगवाल की ओर से दी जा रही 300 करोड़ रुपये की नई राशि मैचिंग ग्रांट के तौर पर दी गई है। इसका मतलब है कि संस्थान के विकास के लिए अन्य सहयोगियों की ओर से जुटाए गए योगदान के बराबर गंगवाल ने भी सहयोग दिया है। इससे मेडिकल स्कूल की विकास योजनाओं को वित्तीय मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    आईआईटी कानपुर ने वर्ष 2021 में मेडिकल स्कूल स्थापित करने का फैसला लिया था। इसका उद्देश्य इंजीनियरिंग, तकनीक और चिकित्सा के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना तथा स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल रिसर्च के क्षेत्र में नई संभावनाएं तैयार करना था। वर्ष 2022 में गंगवाल के 100 करोड़ रुपये के योगदान के बाद इस योजना को महत्वपूर्ण आर्थिक आधार मिला।

    गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के डीन प्रो. अनिल के लालवानी हैं। संस्थान का मानना है कि गंगवाल का योगदान मेडिकल शिक्षा और शोध के क्षेत्र में दीर्घकालिक प्रभाव पैदा कर सकता है। उत्तर प्रदेश में उन्नत स्वास्थ्य सुविधाओं और चिकित्सा अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिहाज से भी इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    राकेश गंगवाल का योगदान यह भी दर्शाता है कि किसी प्रतिष्ठित संस्थान के पूर्व छात्र उसके भविष्य के विकास में किस तरह बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। पांच दशक से अधिक समय पहले आईआईटी कानपुर से बीटेक करने वाले गंगवाल अब उसी संस्थान में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए बड़ी आर्थिक भागीदारी कर रहे हैं।

  • उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर में हैदराबाद के ओहरी परिवार ने 50 लाख की चांदी दान कर नई जलाधारी स्थापित कराई

    उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर में हैदराबाद के ओहरी परिवार ने 50 लाख की चांदी दान कर नई जलाधारी स्थापित कराई

    नई दिल्ली । धर्मनगरी उज्जैन स्थित प्राचीन श्री मंगलनाथ मंदिर में श्रद्धा और आस्था से जुड़ा विशेष अवसर सामने आया है। हैदराबाद के ओहरी परिवार ने भगवान मंगलनाथ को करीब 20 किलो चांदी दान की है। इस चांदी की अनुमानित कीमत लगभग 50 लाख रुपये बताई गई है। भक्त परिवार की इस भेंट से मंदिर में धार्मिक परंपरा के साथ एक नई सौगात जुड़ी है।

    दान की गई चांदी से भगवान मंगलनाथ के लिए नई जलाधारी तैयार कराई गई है। निर्धारित विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर में पुरानी जलाधारी को हटाकर नई जलाधारी स्थापित की गई। नई जलाधारी धारण करने के बाद भगवान मंगलनाथ अब भक्तों को इसी स्वरूप में दर्शन दे रहे हैं।

    मंदिर में पहले करीब 15 वर्ष पुरानी जलाधारी स्थापित थी। समय बीतने के बाद उसे बदलने की आवश्यकता महसूस की गई। इसके बाद ओहरी परिवार की ओर से चांदी दान किए जाने पर नई जलाधारी तैयार कराई गई। धार्मिक अनुष्ठान के साथ इसकी स्थापना पूरी की गई।

    नई जलाधारी की स्थापना के बाद मंदिर में दर्शन करने पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। भगवान मंगलनाथ के नए स्वरूप को देखने के लिए भक्तों में उत्सुकता बनी हुई है। मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालु इसे भगवान के प्रति अपनी आस्था और धार्मिक समर्पण से जोड़कर देख रहे हैं।

    उज्जैन का मंगलनाथ मंदिर धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। यह मंदिर भगवान मंगल ग्रह को समर्पित प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु भगवान मंगलनाथ के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।

    मान्यता के अनुसार मंगलनाथ मंदिर में मंगल दोष की शांति के लिए विशेष पूजा और भात पूजा कराई जाती है। श्रद्धालु जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना के साथ यहां धार्मिक अनुष्ठान कराते हैं। इसी कारण मंदिर में वर्षभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है।

    मंदिर में नई चांदी की जलाधारी स्थापित होने से धार्मिक वातावरण में भी विशेष आकर्षण देखने को मिल रहा है। चांदी से निर्मित जलाधारी भगवान मंगलनाथ के गर्भगृह की धार्मिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भक्तों के लिए यह केवल नया स्वरूप नहीं, बल्कि श्रद्धा से जुड़ा एक विशेष अवसर भी है।

    हैदराबाद के ओहरी परिवार की ओर से दी गई करीब 20 किलो चांदी की यह भेंट मंदिर के प्रति उनकी धार्मिक आस्था को दर्शाती है। करीब 50 लाख रुपये मूल्य की इस चांदी से तैयार जलाधारी अब भगवान मंगलनाथ को अर्पित की जा चुकी है।

    नई जलाधारी की स्थापना के बाद मंदिर में आने वाले श्रद्धालु भगवान मंगलनाथ के दर्शन कर रहे हैं। धार्मिक अनुष्ठान के बाद नई व्यवस्था के साथ दर्शन शुरू होने से मंदिर परिसर में भक्तों के बीच उत्साह का माहौल बना हुआ है। उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह धार्मिक अवसर आकर्षण का नया केंद्र बन गया है।

  • 9 अगस्त को कामिका एकादशी, अनाज से लेकर दीपदान तक इन चीजों का दान करने से मिलते हैं शुभ फल

    9 अगस्त को कामिका एकादशी, अनाज से लेकर दीपदान तक इन चीजों का दान करने से मिलते हैं शुभ फल


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को कामिका एकादशी कहा जाता है। इस वर्ष कामिका एकादशी का व्रत 9 अगस्त, रविवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही एकादशी तिथि पर जरूरतमंदों को दान देने की परंपरा भी बताई गई है। मान्यता है कि श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दान करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि के संयोग बनते हैं।

    कामिका एकादशी का उल्लेख धार्मिक ग्रंथों में भी मिलता है। मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ मिलता है। दान को भी इस दिन की धार्मिक साधना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। हालांकि दान हमेशा अपनी क्षमता और जरूरतमंद व्यक्ति की आवश्यकता को ध्यान में रखकर करना चाहिए। कामिका एकादशी पर किन वस्तुओं का दान शुभ माना जाता है, इसे लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं।

    कामिका एकादशी पर छाता दान करना भी शुभ माना जाता है। श्रावण मास में बारिश का मौसम रहता है और ऐसे में किसी जरूरतमंद व्यक्ति को छाता उपलब्ध कराना उपयोगी दान माना जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन छाता दान करने से सकारात्मकता और पुण्य फल की प्राप्ति होती है। खासतौर पर जरूरतमंद लोगों की सहायता को इस अवसर पर महत्वपूर्ण माना गया है।

    एकादशी के अवसर पर अन्न दान को भी विशेष महत्व दिया जाता है। कामिका एकादशी पर सात प्रकार के अनाज का दान करने की परंपरा बताई गई है। इसमें गेहूं, बाजरा और जौ सहित अन्य अनाज शामिल किए जा सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार अन्न दान को महत्वपूर्ण दान माना गया है। कहा जाता है कि जरूरतमंद व्यक्ति को अनाज उपलब्ध कराने से घर में अन्न और धन की कमी नहीं रहती। इस तरह का दान समाज में जरूरतमंद लोगों की मदद का माध्यम भी बन सकता है।

    कामिका एकादशी पर मौसमी फलों का दान भी किया जा सकता है। अपनी क्षमता के अनुसार केला, सेब, नाशपाती और अनार जैसे फल जरूरतमंदों को दिए जा सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं में फल दान को शुभ माना गया है और इससे परिवार में सुख-शांति बनी रहने की कामना की जाती है। किसी जरूरतमंद की सहायता करने से सेवा और परोपकार की भावना को भी बढ़ावा मिलता है।

    इसके अलावा कामिका एकादशी पर दीपदान का भी विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु के सामने घी या तिल के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। दिन और रात में दीपदान करने की परंपरा भी बताई गई है। मान्यता है कि दीपदान से पुण्य की प्राप्ति होती है और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है। कामिका एकादशी पर किए जाने वाले इन धार्मिक कार्यों का उद्देश्य केवल शुभ फल की कामना करना ही नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की सहायता, सेवा और परोपकार की भावना को मजबूत करना भी है।

  • असम बाढ़ त्रासदी में मदद के लिए आगे आए अनुपम खेर, मुख्यमंत्री राहत कोष में दान किए 5 लाख रुपये

    असम बाढ़ त्रासदी में मदद के लिए आगे आए अनुपम खेर, मुख्यमंत्री राहत कोष में दान किए 5 लाख रुपये

    नई दिल्ली । असम में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर आगे आए हैं। उन्होंने प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे परिवारों की सहायता के लिए असम मुख्यमंत्री राहत कोष में 5 लाख रुपये का योगदान दिया है। अभिनेता ने यह राशि आरटीजीएस के माध्यम से राहत कोष में भेजी, ताकि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे बचाव, राहत और पुनर्वास कार्यों को मजबूती मिल सके। अनुपम खेर का यह कदम आपदा के समय जरूरतमंद लोगों के प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है।

    असम इन दिनों भीषण बाढ़ की समस्या से जूझ रहा है, जिसके कारण कई जिलों में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। लगातार बारिश और नदियों के जलस्तर बढ़ने से कई इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। हजारों परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव अभियान लगातार चलाया जा रहा है। ऐसे समय में सामाजिक संस्थाओं, आम नागरिकों और सार्वजनिक हस्तियों की ओर से मिल रही मदद प्रभावित परिवारों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

    अनुपम खेर ने बाढ़ प्रभावित लोगों के प्रति अपनी चिंता जताते हुए कुछ दिन पहले लोगों से असम की सहायता के लिए आगे आने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि आपदा के समय छोटी से छोटी मदद भी प्रभावित परिवारों के लिए बड़ी राहत बन सकती है। इसके बाद उन्होंने स्वयं पहल करते हुए मुख्यमंत्री राहत कोष में आर्थिक सहायता प्रदान की।

    अभिनेता का यह योगदान अनुपम खेर फाउंडेशन के माध्यम से किए जा रहे सामाजिक कार्यों की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अनुपम खेर समय-समय पर जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए विभिन्न अभियानों से जुड़े रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में भी वह अपनी भागीदारी निभाते रहे हैं।

    असम में बाढ़ से प्रभावित लोगों को भोजन, चिकित्सा सुविधा, रहने की व्यवस्था और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराने के लिए सरकार और विभिन्न संगठन लगातार काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री राहत कोष के जरिए जुटाई जा रही राशि का इस्तेमाल प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाने और पुनर्वास कार्यों को गति देने में किया जा रहा है।

    अनुपम खेर ने अपने योगदान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि प्राकृतिक आपदा के समय समाज के हर वर्ग को एकजुट होकर प्रभावित लोगों की सहायता करनी चाहिए। उनका कहना है कि सामूहिक प्रयासों से ही बड़ी चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। असम में जारी राहत अभियान के बीच अभिनेता की यह पहल कई लोगों को मदद के लिए प्रेरित कर सकती है।

    असम में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए लगातार राहत कार्य जारी हैं और देश के विभिन्न हिस्सों से लोग सहायता के लिए आगे आ रहे हैं। सरकार, स्वयंसेवी संगठन और आम नागरिक मिलकर प्रभावित परिवारों को इस कठिन समय से बाहर निकालने का प्रयास कर रहे हैं।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर विधान परिषद में बवाल, सपा का हंगामा, केशव मौर्य ने किया पलटवार

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर विधान परिषद में बवाल, सपा का हंगामा, केशव मौर्य ने किया पलटवार

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के मानसून सत्र के पहले दिन श्रीराम मंदिर के दानपात्र से कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। समाजवादी पार्टी ने नियम-105 के तहत कार्यस्थगन प्रस्ताव लाकर मामले पर चर्चा की मांग की। जैसे ही नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य जवाब देने के लिए खड़े हुए, सपा सदस्य वेल में पहुंचकर नारेबाजी करने लगे। लगातार हंगामे के चलते सभापति ने सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी।

    कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी विपक्ष का विरोध जारी रहा। शोर-शराबे के बीच केशव प्रसाद मौर्य ने अपना पक्ष रखा। दोपहर 1:52 बजे सभापति ने कार्यस्थगन प्रस्ताव अस्वीकार करते हुए मामले को अग्रिम कार्रवाई के लिए सरकार को भेजने की घोषणा की। इसके बाद विपक्षी सदस्य अपनी सीटों पर लौटे और सदन की कार्यवाही सामान्य हो सकी।

    केशव मौर्य का विपक्ष पर पलटवार
    नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए एक रुपये का भी योगदान नहीं दिया, वे अब चढ़ावे की चोरी पर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बाबरी मस्जिद के नाम पर जुटाए गए चंदे का हिसाब भी सार्वजनिक होना चाहिए। उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर मंदिरों के प्रति नकारात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि भविष्य में जनता इसका जवाब देगी।

    सपा ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप
    समाजवादी पार्टी ने अपने कार्यस्थगन प्रस्ताव में आरोप लगाया कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के दानपात्र से हुई कथित चोरी वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार का गंभीर मामला है। विपक्ष का कहना था कि पुलिस की कार्रवाई पर्याप्त नहीं रही और केवल निचले स्तर के लोगों पर कार्रवाई की गई। विपक्ष के नेता लाल बिहारी यादव और सदस्य किरण पाल कश्यप ने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़ी दान सामग्री की चोरी गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावी कार्रवाई न होने से लोगों में नाराजगी है।

    अन्य मुद्दे भी उठे
    सदन में सदस्य राज बहादुर सिंह चंदेल ने शिक्षकों, कर्मचारियों और सेवानिवृत्त शिक्षकों को निशुल्क एवं कैशलेस चिकित्सा योजना में शामिल करने की मांग उठाई। इस पर नेता सदन ने कहा कि सरकार इस प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार करेगी। राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर हुए इस विवाद ने मानसून सत्र के पहले ही दिन सदन का माहौल गर्मा दिया और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिली।

  • सिद्धिविनायक मंदिर के चढ़ावे को लेकर राज ठाकरे के आरोप से महाराष्ट्र की राजनीति गरमाई, जांच की मांग तेज

    सिद्धिविनायक मंदिर के चढ़ावे को लेकर राज ठाकरे के आरोप से महाराष्ट्र की राजनीति गरमाई, जांच की मांग तेज

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर मंदिरों के चढ़ावे और ट्रस्टों की कार्यप्रणाली को लेकर बहस तेज हो गई है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने मुंबई स्थित प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर के दान को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि मंदिर में आने वाले दान में हर वर्ष लगभग 18 करोड़ रुपये की कथित चोरी होती है। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है और विभिन्न दलों की ओर से इस पर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।

    राज ठाकरे ने अपनी पार्टी की छात्र इकाई के स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान की पारदर्शिता सुनिश्चित होना आवश्यक है। उनका आरोप है कि सिद्धिविनायक मंदिर के दान प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक संस्थानों में आने वाले धन का सही उपयोग और उसका पारदर्शी लेखा-जोखा सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने के लिए जरूरी है।

    एमएनएस प्रमुख ने दावा किया कि सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के कुछ ट्रस्टियों ने राज्य के उपमुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उनके अनुसार, पत्र में यह आशंका जताई गई है कि मंदिर के दान से जुड़े वित्तीय मामलों में अनियमितताएं हुई हैं और कुछ कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    अपने संबोधन के दौरान राज ठाकरे ने अयोध्या के राम मंदिर के दान से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं का भी उल्लेख किया और कहा कि धार्मिक संस्थानों से जुड़े ऐसे मामलों पर व्यापक स्तर पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से भी इस प्रकार के आरोपों पर स्पष्ट रुख अपनाने और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की। उनका कहना था कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े किसी भी संस्थान में वित्तीय पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

    राज ठाकरे के आरोपों के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक ने उनके बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रसिद्ध गणेश मंदिर के बारे में इस तरह के आरोप लगाने से पहले ठोस प्रमाण सामने आने चाहिए। उनका कहना था कि धार्मिक संस्थानों की प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी और संयम के साथ बयान दिए जाने चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत न हों।

    सिद्धिविनायक मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध और समृद्ध धार्मिक स्थलों में गिना जाता है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में हर वर्ष करोड़ों रुपये का दान प्राप्त होता है, जिसके प्रबंधन की जिम्मेदारी ट्रस्ट के पास होती है। ऐसे में मंदिर के वित्तीय संचालन को लेकर लगाए गए आरोप स्वाभाविक रूप से सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बन गए हैं।

    फिलहाल इन आरोपों को लेकर संबंधित अधिकारियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। यदि जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो उससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। तब तक यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ धार्मिक संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर चल रही बहस का महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।