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  • ग्वालियर में लव मैरिज विवाद: नर्स से शादी के लिए 15 लाख दहेज की मांग, परिवार पर हमला

    ग्वालियर में लव मैरिज विवाद: नर्स से शादी के लिए 15 लाख दहेज की मांग, परिवार पर हमला



    ग्वालियर।  हजीरा स्थित राधा-कृष्ण विहार कॉलोनी में सोमवार शाम लव मैरिज के बीच बड़ा विवाद सामने आया। युवक अभय मौर्य और नर्स युवती के परिवार ने शादी तय कर ली थी, लेकिन अभय के माता-पिता और मामा ने 15 लाख रुपए का दहेज मांग डाला। जब युवती के भाई कृष्णा ने रकम देने से इनकार किया, तो अभय के परिवार ने युवती, उसके भाई और मां को सड़क पर दौड़ा-दौड़ा कर पीटा और घर में तोड़फोड़ की।

    घटना की पूरी कहानी
    युवती की बहन नर्स है और वह अभय मौर्य से शादी करना चाहती थी। दोनों परिवारों ने शुरुआत में शादी के लिए हामी भर दी थी, लेकिन धीरे-धीरे अभय के परिजन दूरी बनाने लगे। युवती ने बातचीत की तो कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला, लेकिन अभय लगातार कहता रहा कि चिंता मत करो, शादी होगी।

    दहेज न देने पर हिंसा
    सोमवार को अभय के पिता राघवेंद्र, मां सुनीता और मामा अनिल निगम युवती के घर पहुंचे। बातचीत में उन्होंने शादी के लिए 15 लाख रुपए दहेज की मांग की, और कहा कि रकम दिए बिना शादी नहीं होगी। युवती के भाई कृष्णा और माता ने यह मांग अस्वीकार कर दी। इसी पर बात इतनी बिगड़ी कि अभय के मामा ने कृष्णा और उनकी मां पर हमला कर दिया, डंडों से मारपीट की। युवती को भी बचाने आई बहन को चोटें आईं। घर में तोड़फोड़ भी की गई।

    मारपीट का विवरण
    कृष्णा के मुंह में डंडा लगने से सूजन।

    मां की उंगलियों और हाथों में चोटें।

    बहन को भी सड़क पर पीटा गया।

    घर में पथराव और तोड़फोड़।

    कृष्णा का कहना है कि अभय के मामा इस घटना के सबसे बड़े जिम्मेदार हैं, और अगर अभय को पता चलता तो यह नहीं होने देता।

    पुलिस कार्रवाई
    सीएसपी नागेंद्र सिंह सिकरवार ने कहा कि युवती के परिवार पर हमला हुआ है और मारपीट का मामला दर्ज कर लिया गया है। प्रारंभिक जांच में पता चला कि यह विवाद प्रेम विवाह और दहेज मांग के कारण हुआ।

  • लिव-इन रिश्ते में दहेज उत्पीड़न का दावा…SC ने सरकार से मांगी कानूनी स्पष्टता

    लिव-इन रिश्ते में दहेज उत्पीड़न का दावा…SC ने सरकार से मांगी कानूनी स्पष्टता


    नई दिल्ली।
    क्या एक विवाहित व्यक्ति जो अपनी पत्नी के जीवित रहते हुए किसी अन्य महिला के साथ लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) में है, उस महिला द्वारा दहेज प्रताड़ना (IPC की धारा 498A) का मामला दर्ज कराया जा सकता है? यह एक ऐसा सवाल है जिस पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court.) ने अब गंभीर कानूनी विचार करने का निर्णय लिया है। भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A (अब भारतीय न्याय संहिता) स्पष्ट रूप से यह प्रावधान करती है कि केवल एक पत्नी ही अपने पति या उसके रिश्तेदारों के खिलाफ दहेज या क्रूरता की शिकायत दर्ज करा सकती है।

    चूंकि हिंदू विवाह अधिनियम के अंतर्गत कानूनी रूप से एक व्यक्ति एक ही समय में दो महिलाओं का पति नहीं हो सकता है। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि क्या लिव-इन पार्टनर को कानूनन पत्नी का दर्जा दिया जा सकता है?

    सर्वोच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन के सिंह की पीठ ने एक डॉक्टर लोकेश बी.एच. द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की। लोकेश ने फरवरी 2000 में नवीना से शादी की थी। आरोप है कि उन्होंने 2010 में तीर्थ नामक महिला से भी शादी की, जो कानूनी रूप से अवैध है। तीर्थ ने 2016 में लोकेश पर दहेज की मांग को लेकर उसे जलाने का प्रयास करने का आरोप लगाया। बाद में उसने घरेलू हिंसा का मामला भी दर्ज कराया।

    लोकेश ने तर्क दिया कि तीर्थ के साथ उनका कोई कानूनी वैवाहिक संबंध नहीं है। उन्होंने इस आशय की घोषणा के लिए बेंगलुरु की एक पारिवारिक अदालत में मुकदमा भी दायर किया है, जो लंबित है। इसके अलावा लोकेश के नियोक्ता ने प्रमाणित किया है कि कथित घटना के दिन लोकेश अस्पताल में ड्यूटी पर थे।

    कर्नाटक उच्च न्यायालय ने लोकेश की याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ चल रही कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी।

    सर्वोच्च न्यायालय ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी को इस मामले में सहयोग करने के लिए कहा है। इसके अलावा, अदालत ने मामले की जटिलता को देखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता नीना नरिमन को ‘एमिकस क्यूरी’ (अदालत का मित्र) नियुक्त किया है, जो इस कानूनी मुद्दे पर निष्पक्ष राय प्रदान करेंगी।

    याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील संजय नुली ने तर्क दिया कि उच्च न्यायालय ने धारा 498A की व्याख्या करने में गलती की है। उनका तर्क है कि कानून की शब्दावली स्पष्ट रूप से पति और पत्नी का उल्लेख करती है। इसे एक लिव-इन रिलेशनशिप पर लागू नहीं किया जा सकता है। विशेषकर तब जब पुरुष पहले से ही विवाहित हो।

    यदि सुप्रीम कोर्ट लिव-इन पार्टनर को इस धारा के तहत पत्नी मानता है, तो यह वैवाहिक कानूनों की पारंपरिक व्याख्या में एक बड़ा बदलाव होगा।