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  • पानी आया, लेकिन बिल आ रहे 3 साल से: इंदौर महापौर की जनता चौपाल में फूटा गुस्सा

    पानी आया, लेकिन बिल आ रहे 3 साल से: इंदौर महापौर की जनता चौपाल में फूटा गुस्सा


    इंदौर। नर्मदा लाइन के पानी के आगमन के बाद भी नगर निगम के पुराने बिलों की उलझन और जल व्यवस्था की समस्याएं जनता के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। शनिवार को वार्ड 41 में महापौर पुष्यमित्र भार्गव द्वारा आयोजित जनता चौपाल में नागरिकों ने अपनी नाराजगी और समस्याएं खुलेआम रखीं। चौपाल में शहरवासियों ने बताया कि नर्मदा लाइन के पानी के बावजूद नगर निगम लगातार तीन साल से पेयजल बिल भेज रहा है, जिससे आम लोगों पर वित्तीय बोझ पड़ा है। कुछ निवासियों ने कहा कि उन्होंने समय पर बिल भरे, लेकिन निगम की लापरवाही और पुराने रिकॉर्डों की गलतियों के कारण परेशानी अभी भी बनी हुई है।

    इस अवसर पर जनता ने महापौर के सामने ड्रेनेज और सड़कों की समस्याओं को भी उठाया। कई इलाकों में सड़कें टूटी हुई हैं और बारिश या पानी के रिसाव से वहां की स्थिति और खराब हो गई है। लोगों ने कहा कि कई बार शिकायत करने के बावजूद भी निगम ने ठोस कदम नहीं उठाए, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। विशेष रूप से भागीरथपुरा कांड के डेढ़ महीने बाद भी शहर में पेयजल की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ है। गणराज नगर के एक स्कूली छात्र ने महापौर से सीधे कहा कि नर्मदा लाइन के पानी में अब भी गंदगी मिल रही है। इस पर महापौर ने सुधार के निर्देश देने का आश्वासन दिया।

    जनता चौपाल के दौरान महापौर ने जनता से संवाद करते हुए कहा कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जा रहा है और जल्द समाधान के प्रयास किए जाएंगे। हालांकि, लोगों का गुस्सा निगम की लगातार लापरवाही और पुराने बिलों के कारण बढ़ा हुआ था। कई निवासी इस बात पर असंतोष व्यक्त कर रहे थे कि पानी तो अब उपलब्ध है, लेकिन पिछले तीन साल के बिल अभी भी लोगों के घरों में आ रहे है विशेषज्ञों का मानना है कि नगर निगम को तकनीकी सुधार और डेटा अपडेट पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। साथ ही जल गुणवत्ता की निगरानी और शिकायत निवारण प्रणाली को तेज करने की आवश्यकता है।

    इस चौपाल ने यह भी दिखा दिया कि शहर में सुधार की दिशा में कदम उठाने के बावजूद नागरिकों की अपेक्षाएं बढ़ गई हैं। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने आश्वासन दिया कि जल आपूर्ति, बिल प्रणाली और सड़क-ड्रेनेज जैसी समस्याओं का निराकरण प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। शहरवासियों की चिंता और नाराजगी यह संकेत देती है कि इंदौर निगम को अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, तेजी और जवाबदेही लाने की आवश्यकता है। जनता चौपाल ने नागरिकों को अपनी बात सीधे महापौर तक पहुँचाने का अवसर दिया और उम्मीद जताई कि जल्द ही इन समस्याओं का स्थायी समाधान होगा।

  • जबलपुर में नालियों से गुजर रहीं पेयजल आपूर्ति की लाइनों से बढ़ रही चिंता इंदौर जैसी घटना का खतरा

    जबलपुर में नालियों से गुजर रहीं पेयजल आपूर्ति की लाइनों से बढ़ रही चिंता इंदौर जैसी घटना का खतरा


    जबलपुर । हाल ही में इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई 15 लोगों की मौत ने प्रदेशभर में चिंता की लहर दौड़ा दी है और अब जबलपुर के नागरिकों में भी जल आपूर्ति व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। जबलपुर में जल वितरण पाइपलाइनों की हालत बेहद खराब है क्योंकि शहर की करीब 80 प्रतिशत पेयजल आपूर्ति लाइनें नाली-नालियों के नीचे से होकर गुजर रही हैं।

    इन पाइपलाइनों का निर्माण आमतौर पर 20 साल पहले किया गया था लेकिन कई लाइनें 40 से 50 साल पुरानी हो चुकी हैं। समय के साथ इन पाइपलाइनों में क्षरण हो चुका है और इनसे लगातार नाली के पानी धूल और मिट्टी का संपर्क होता है। इस कारण पाइपलाइनों में लीकेज हो रहा है जिससे गंदगी और दूषित पानी वितरण के दौरान पेयजल में घुलने की संभावना बढ़ गई है।

    इंदौर में हुई घटना के बाद जबलपुर नगर निगम ने इस गंभीर समस्या को लेकर सक्रियता दिखाई और जल विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमों का गठन किया। ये टीमें शहर के विभिन्न हिस्सों से पेयजल के सैंपल लेकर उसकी गुणवत्ता जांचने में जुट गईं। हालांकि एक दिन सैंपल लेने के बाद विभागीय टीम की गतिविधियां सुस्त पड़ गईं जिससे इस मुद्दे को लेकर नागरिकों के बीच और भी चिंता बढ़ गई है।

    विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शहर में जल वितरण की पाइपलाइनों के रखरखाव और सही तरीके से मरम्मत की आवश्यकता है ताकि पानी की गुणवत्ता पर कोई असर न पड़े। यह समस्या इंदौर जैसी बड़ी घटनाओं को टालने के लिए जल्द सुलझाई जानी चाहिए।नागरिकों ने इस विषय पर नगर निगम और प्रशासन से जल्द ठोस कदम उठाने की अपील की है ताकि भविष्य में दूषित पानी से कोई स्वास्थ्य संकट उत्पन्न न हो।