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  • दिल्ली में पानी का संकट गहराया: यमुना का स्तर गिरा, सप्लाई 25% तक कम

    दिल्ली में पानी का संकट गहराया: यमुना का स्तर गिरा, सप्लाई 25% तक कम


    दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली एक बार फिर गंभीर जल संकट की चपेट में है। यमुना नदी का जलस्तर लगातार गिरने से शहर के कई प्रमुख वाटर ट्रीटमेंट प्लांट प्रभावित हो गए हैं, जिसके चलते पानी उत्पादन में लगभग 25 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। इसका सीधा असर राजधानी की जलापूर्ति पर पड़ रहा है और कई इलाकों में आने वाले दिनों में पानी की किल्लत और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    रिपोर्ट के अनुसार, वजीराबाद, चंद्रावल और ओखला जैसे प्रमुख जल शोधन संयंत्रों को पर्याप्त कच्चा पानी नहीं मिल पा रहा है। यमुना में पानी की कमी के कारण इन प्लांटों की क्षमता प्रभावित हुई है और उत्पादन में लगातार गिरावट देखी जा रही है।

    दिल्ली की लगभग 40 प्रतिशत जलापूर्ति यमुना नदी पर निर्भर है। ऐसे में जलस्तर में कमी का सीधा असर राजधानी के लाखों लोगों पर पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में पानी का दबाव कम हो गया है, जबकि कुछ इलाकों में आपूर्ति बाधित होने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि भीषण गर्मी, कम वर्षा और हरियाणा से आने वाले पानी में कमी इस संकट के प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा यमुना में बढ़ता प्रदूषण और अमोनिया का उच्च स्तर भी ट्रीटमेंट प्लांटों के संचालन को प्रभावित कर रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, अत्यधिक प्रदूषित पानी को शुद्ध करना प्लांटों की क्षमता से बाहर हो जाता है, जिससे उत्पादन घटाना पड़ता है।

    स्थिति को देखते हुए कई क्षेत्रों में लोग टैंकरों पर निर्भर होते जा रहे हैं। दिल्ली जल बोर्ड ने लोगों से पानी के सीमित उपयोग और बर्बादी रोकने की अपील की है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि हालात में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में जल संकट और गंभीर हो सकता है।

    सरकार की ओर से यमुना की सफाई और सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता बढ़ाने के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं, लेकिन फिलहाल स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

  • भोपाल संभाग में डेवलपमेंट प्लान पर एसीएस की बैठक: पानी की समस्या और नगरीय विकास पर जोर, विधायकों ने ग्रीष्मकालीन पानी संकट उजागर किया

    भोपाल संभाग में डेवलपमेंट प्लान पर एसीएस की बैठक: पानी की समस्या और नगरीय विकास पर जोर, विधायकों ने ग्रीष्मकालीन पानी संकट उजागर किया


    भोपाल। भोपाल संभाग की विकास योजनाओं और शासकीय नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर अपर मुख्य सचिव (एसीएस) संजय कुमार शुक्ला ने बुधवार को कमिश्नर ऑफिस में अहम बैठक की। बैठक में संभाग के विभिन्न जिलों से जुड़े कलेक्टर, जिपं सीईओ और विधायकों ने हिस्सा लिया। मुख्य चर्चा का केंद्र पानी से जुड़े मुद्दे, पेयजल आपूर्ति, अधोसंरचना विकास और स्वास्थ्य एवं शिक्षा व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग रहा।

    बैठक में भोपाल दक्षिण-पश्चिम विधायक भगवानदास सबनानी, सांची विधायक प्रभुराम चौधरी, शमशाबाद विधायक सूर्यप्रकाश मीणा, नरसिंहगढ़ विधायक मोहन शर्मा और बैरसिया विधायक विष्णु खत्री उपस्थित रहे। अन्य जिलों के विधायक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।

    एसीएस शुक्ला ने पानी आपूर्ति, नल-जल योजना और जल जीवन मिशन की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि गर्मी के मौसम में नागरिकों को पर्याप्त पानी उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि समूह पेयजल योजनाओं को समय-सीमा में पूर्ण करना प्राथमिकता होनी चाहिए। शुक्ला ने कलेक्टर्स को निर्देश दिए कि जनप्रतिनिधियों और विधायकों के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखें और उनके द्वारा उठाए गए स्थानीय मुद्दों का तत्काल समाधान सुनिश्चित करें।

    स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देते हुए शुक्ला ने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, स्कूलों और आंगनवाड़ियों की संचालन मॉनिटरिंग नियमित रूप से की जाए। किसी भी कमी या अनियमितता पाए जाने पर तुरंत कार्रवाई की जाए।

    अधोसंरचना और नगरीय विकास के तहत, उन्होंने अमृत-2.0 योजना के निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि कार्य पूर्ण होने के बाद सड़कों और सार्वजनिक ढांचों को जीर्ण-शीर्ण अवस्था में न छोड़ा जाए। शहरों की बाहरी सीमाओं पर बहुद्देश्यीय विकास परियोजनाओं का निर्माण समयबद्ध तरीके से किया जाए ताकि शहरी विकास नियोजित रूप में हो।

    बैठक में दोहरा प्रभार वाले अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए कि वे संबंधित कार्यस्थलों पर नियमित समीक्षा के लिए उपस्थित रहें और किसी प्रकार की बाधा रोकें। साथ ही, बांधों और अधिग्रहीत भूमि का शीघ्र नामांतरण संबंधित विभागों के नाम करने के निर्देश भी दिए गए।

    एसीएस शुक्ला ने स्पष्ट किया कि शहरों के विकास और नागरिक सुविधाओं के सुचारू संचालन के लिए अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय अनिवार्य है। बैठक में सभी प्रतिनिधियों ने गर्मी के मौसम में पेयजल संकट और योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया।