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  • सिंहस्थ-2028 के लिए इंदौर में बनेंगे अस्थायी सैटेलाइट टाउन:उज्जैन में भीड़ बढ़ने पर श्रद्धालुओं को शहर से पहले रोका जाएगा

    सिंहस्थ-2028 के लिए इंदौर में बनेंगे अस्थायी सैटेलाइट टाउन:उज्जैन में भीड़ बढ़ने पर श्रद्धालुओं को शहर से पहले रोका जाएगा


    नई दिल्ली। सिंहस्थ-2028 को देखते हुए इंदौर पुलिस ने भीड़ प्रबंधन की तैयारी शुरू कर दी है। पुलिस ने योजना बनाई है कि उज्जैन में भीड़ बढ़ने पर श्रद्धालुओं को शहर में प्रवेश से पहले इंदौर में ही रोका जाएगा। इसके लिए शहर के बाहरी क्षेत्रों में अस्थायी सैटेलाइट टाउन विकसित किए जाएंगे।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ हुई चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया है। प्रशासन और पुलिस के बीच हुई संयुक्त बैठक में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए ट्रैफिक और भीड़ नियंत्रण की रणनीति पर चर्चा की गई।

    इंदौर से सबसे ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार सिंहस्थ के दौरान उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की सबसे ज्यादा आवाजाही इंदौर मार्ग से होने की संभावना है। ऐसे में भीड़ का दबाव कम करने के लिए पहले से व्यवस्था तैयार की जा रही है।

    प्रस्तावित सैटेलाइट टाउन में श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग, पेयजल, भोजन, शौचालय और विश्राम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इन स्थानों से श्रद्धालुओं को नियंत्रित तरीके से उज्जैन की ओर भेजा जाएगा।

    बाहरी क्षेत्रों में स्थानों का चयन

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार शहर के बाहरी इलाकों में ऐसे कई स्थानों का चयन किया गया है, जहां अस्थायी सैटेलाइट टाउन विकसित किए जाएंगे। इससे उज्जैन में अचानक भीड़ का दबाव नहीं बढ़ेगा।

    ट्रैफिक प्रबंधन के लिए प्रशिक्षण

    एडिशनल पुलिस आयुक्त (मुख्यालय) आर.के. सिंह के अनुसार सिंहस्थ को देखते हुए ट्रैफिक प्रबंधन के लिए पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

    तीन नए ट्रैफिक थानों का प्रस्ताव

    शहर में फिलहाल एक ही ट्रैफिक थाना है। सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए तीन नए ट्रैफिक थानों के निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया है।

    इनमें चंदन नगर क्षेत्र में धार रोड, बाणगंगा में सुपर कॉरिडोर और लसूड़िया में महालक्ष्मी नगर में ट्रैफिक थाना बनाने की योजना है। धार रोड के लिए प्रशासन ने जमीन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।

    कई थानों में बल बढ़ाने का प्रस्ताव

    पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह ने तिलक नगर, राऊ और द्वारकापुरी थानों में अतिरिक्त बल बढ़ाने का प्रस्ताव भी पुलिस मुख्यालय को भेजा है। इसके अलावा ट्रैफिक थानों के लिए भी अतिरिक्त पुलिस बल की मांग की जाएगी।

    सिंहस्थ-2028 में करोड़ों श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना को देखते हुए इंदौर पुलिस तैयारियों को लेकर योजना बना रही है।

  • ग्वालियर में PM आवास की पानी की टंकी में मरी छिपकलियां, 1300 परिवारों में दहशत में

    ग्वालियर में PM आवास की पानी की टंकी में मरी छिपकलियां, 1300 परिवारों में दहशत में


    ग्वालियर। मानपुर क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने फ्लैटों की पानी की टंकी में मरी हुई पांच छिपकलियां मिलने से 1300 परिवारों में दहशत का माहौल बन गया है। टंकी से सीधे फ्लैटों में पानी सप्लाई होता है, जिससे रहवासियों को डर है कि कई दिन तक वे अनजाने में दूषित पानी पी चुके हैं।
    स्थानीय लोगों ने बताया कि फेस-वन के ब्लॉक ई-52 की पानी की टंकी में बदबू और गंदगी की शिकायत के बाद टंकी का ढक्कन खोला गया, तो अंदर मरी हुई छिपकलियां पाई गईं। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिससे परिसर में भय का माहौल बन गया। अधिकांश परिवारों ने फिलहाल टंकी का पानी पीना बंद कर दिया है और बाहर से कैन या आरओ का पानी मंगाना शुरू कर दिया है।

    रहवासियों का आरोप है कि पिछले दो साल से टंकी की नियमित सफाई नहीं कराई गई।

    हाल ही में कॉलोनी के प्रतिनिधियों ने नगर निगम से मुलाकात कर सफाई और व्यवस्था सुधारने की मांग की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नगर निगम आयुक्त संघ प्रिया ने कहा कि ठेकेदार का ठेका समाप्त हो चुका है और जल्द ही टंकियों की देखभाल के लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाएगी।
    इस घटना ने न केवल स्वास्थ्य सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि नगर निगम की लापरवाही और निगरानी की कमी को भी उजागर किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, पानी की टंकियों की नियमित सफाई और ढक्कन की स्थिति पर ध्यान न देने से गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकता है।
  • पानी आया, लेकिन बिल आ रहे 3 साल से: इंदौर महापौर की जनता चौपाल में फूटा गुस्सा

    पानी आया, लेकिन बिल आ रहे 3 साल से: इंदौर महापौर की जनता चौपाल में फूटा गुस्सा


    इंदौर। नर्मदा लाइन के पानी के आगमन के बाद भी नगर निगम के पुराने बिलों की उलझन और जल व्यवस्था की समस्याएं जनता के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। शनिवार को वार्ड 41 में महापौर पुष्यमित्र भार्गव द्वारा आयोजित जनता चौपाल में नागरिकों ने अपनी नाराजगी और समस्याएं खुलेआम रखीं। चौपाल में शहरवासियों ने बताया कि नर्मदा लाइन के पानी के बावजूद नगर निगम लगातार तीन साल से पेयजल बिल भेज रहा है, जिससे आम लोगों पर वित्तीय बोझ पड़ा है। कुछ निवासियों ने कहा कि उन्होंने समय पर बिल भरे, लेकिन निगम की लापरवाही और पुराने रिकॉर्डों की गलतियों के कारण परेशानी अभी भी बनी हुई है।

    इस अवसर पर जनता ने महापौर के सामने ड्रेनेज और सड़कों की समस्याओं को भी उठाया। कई इलाकों में सड़कें टूटी हुई हैं और बारिश या पानी के रिसाव से वहां की स्थिति और खराब हो गई है। लोगों ने कहा कि कई बार शिकायत करने के बावजूद भी निगम ने ठोस कदम नहीं उठाए, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। विशेष रूप से भागीरथपुरा कांड के डेढ़ महीने बाद भी शहर में पेयजल की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ है। गणराज नगर के एक स्कूली छात्र ने महापौर से सीधे कहा कि नर्मदा लाइन के पानी में अब भी गंदगी मिल रही है। इस पर महापौर ने सुधार के निर्देश देने का आश्वासन दिया।

    जनता चौपाल के दौरान महापौर ने जनता से संवाद करते हुए कहा कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जा रहा है और जल्द समाधान के प्रयास किए जाएंगे। हालांकि, लोगों का गुस्सा निगम की लगातार लापरवाही और पुराने बिलों के कारण बढ़ा हुआ था। कई निवासी इस बात पर असंतोष व्यक्त कर रहे थे कि पानी तो अब उपलब्ध है, लेकिन पिछले तीन साल के बिल अभी भी लोगों के घरों में आ रहे है विशेषज्ञों का मानना है कि नगर निगम को तकनीकी सुधार और डेटा अपडेट पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। साथ ही जल गुणवत्ता की निगरानी और शिकायत निवारण प्रणाली को तेज करने की आवश्यकता है।

    इस चौपाल ने यह भी दिखा दिया कि शहर में सुधार की दिशा में कदम उठाने के बावजूद नागरिकों की अपेक्षाएं बढ़ गई हैं। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने आश्वासन दिया कि जल आपूर्ति, बिल प्रणाली और सड़क-ड्रेनेज जैसी समस्याओं का निराकरण प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। शहरवासियों की चिंता और नाराजगी यह संकेत देती है कि इंदौर निगम को अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, तेजी और जवाबदेही लाने की आवश्यकता है। जनता चौपाल ने नागरिकों को अपनी बात सीधे महापौर तक पहुँचाने का अवसर दिया और उम्मीद जताई कि जल्द ही इन समस्याओं का स्थायी समाधान होगा।

  • सीवेज प्रदूषण पर NGT सख्त, MP-UP-राजस्थान से जवाब तलब, इंदौर में मौतें और भोपाल में 'ई-कोलाई' का खतरा

    सीवेज प्रदूषण पर NGT सख्त, MP-UP-राजस्थान से जवाब तलब, इंदौर में मौतें और भोपाल में 'ई-कोलाई' का खतरा


    नई दिल्ली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की प्रधान पीठ ने नई दिल्ली में बुधवार को इंदौर, भोपाल और राजस्थान के शहरों में पेयजल में सीवेज की मिलावट से जुड़ी गंभीर समस्याओं पर स्वतः संज्ञान लिया। NGT ने मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की राज्य सरकारों से जवाब तलब किया है। ट्रिब्यूनल ने इंदौर में गंदे पानी के कारण मौतों और भोपाल में पेयजल में ‘ई-कोलाई’ बैक्टीरिया मिलने के मामलों का हवाला दिया।
    मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इंदौर में गंदे पानी के सेवन से मौतें हुई हैं, जबकि भोपाल के कुछ इलाकों में ट्यूबवेल से रिसाव के कारण पेयजल में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया। वहीं, राजस्थान के उदयपुर, जोधपुर, कोटा, बांसवाड़ा, जयपुर और अजमेर जैसे शहरों में पुरानी और जर्जर पाइपलाइन प्रणाली के चलते सीवेज के पानी का पेयजल में मिलना जारी है। ग्रेटर नोएडा में भी सीवेज मिला पानी पीने से कई लोग बीमार पड़े, जिनमें बच्चे भी शामिल थे।
    एनजीटी ने इन घटनाओं को गंभीर पर्यावरणीय और जनस्वास्थ्य से जुड़ा मामला माना। पीठ ने संबंधित राज्य सरकारों, प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) से स्पष्ट जवाब तलब किया है। कहा गया है कि यह मामला पर्यावरणीय कानूनों का पालन सुनिश्चित करने, जिम्मेदारी तय करने और नागरिकों के सुरक्षित पेयजल के अधिकार की रक्षा के लिए विचाराधीन रहेगा।

    इसके अलावा, NGT ने मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई के मामलों को भी संज्ञान में लिया। रिपोर्ट के अनुसार, सड़क, रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्ग और कोयला खदान परियोजनाओं के लिए 50 से 100 वर्ष पुराने लगभग 15 लाख पेड़ काटे जा चुके हैं या काटे जाने का प्रस्ताव है। सिंगरौली, खंडवा, विदिशा, भोपाल और इंदौर में भारी संख्या में पेड़ों की कटाई से वायु गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

    पीठ ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य वन विभागों को नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई तक शपथ पत्र के माध्यम से अपना जवाब दाखिल करें। अगली सुनवाई 9 मार्च 2026 को होगी।

  • खंडवा के 7 गांवों में ज़हरीला पानी बना अभिशाप, फ्लोराइड संकट पर कांग्रेस हमलावर; बीजेपी विधायक मीडिया सवालों से बचते नजर आए

    खंडवा के 7 गांवों में ज़हरीला पानी बना अभिशाप, फ्लोराइड संकट पर कांग्रेस हमलावर; बीजेपी विधायक मीडिया सवालों से बचते नजर आए


    खंडवा । मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में पीने के पानी को लेकर एक गंभीर स्वास्थ्य संकट सामने आया है। किल्लौद ब्लॉक के सात गांवों में लोग लंबे समय से फ्लोराइड युक्त पानी पीने को मजबूर हैं। पानी में फ्लोराइड की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंचने के बावजूद न तो प्रशासन ने ठोस कदम उठाए और न ही जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई स्पष्ट जवाब सामने आया है। इस मुद्दे को लेकर अब सियासत भी तेज हो गई है।

    कांग्रेस ने खंडवा में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रशासन और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि किल्लौद ब्लॉक के ग्रामीण कई दिनों से दूषित और फ्लोराइड युक्त पानी पी रहे हैं जिससे उन्हें गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी केवल औपचारिकता निभाते हुए हैंडपंप और ट्यूबवेल पर लाल निशान लगाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। न तो स्वास्थ्य विभाग की ओर से ग्रामीणों की मेडिकल जांच कराई गई और न ही पीने के सुरक्षित पानी की कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई।कांग्रेस ने सवाल उठाया कि क्या प्रशासन किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहा है जैसा कि हाल ही में इंदौर में देखने को मिला। नेताओं ने कहा कि हादसे के बाद नेता और अधिकारी पीड़ित परिवारों के यहां पहुंचकर संवेदनाएं जताते हैं लेकिन समय रहते अगर व्यवस्था सुधारी जाए तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है। कांग्रेस का आरोप है कि ग्रामीणों की सेहत के साथ खुला खिलवाड़ किया जा रहा है।

    इस पूरे मामले पर जब स्थानीय बीजेपी विधायक नारायण पटेल से मीडिया ने सवाल पूछे तो उनका रवैया और भी विवादों में आ गया। पहले अन्य मुद्दों पर मीडिया से बातचीत करने वाले विधायक जैसे ही किल्लौद ब्लॉक में फ्लोराइड युक्त पानी का सवाल सामने आया बिना कोई जवाब दिए वहां से चले गए। मीडियाकर्मी लगातार सवाल पूछते रहे लेकिन विधायक ने चुप्पी साधे रखी। उनके इस रवैये ने न केवल विपक्ष बल्कि आम लोगों में भी नाराजगी बढ़ा दी है।ग्रामीणों का कहना है कि फ्लोराइड की अधिक मात्रा ने उनकी जिंदगी मुश्किल कर दी है। कई गांवों में पानी में फ्लोराइड की मात्रा 2.0 से 5.0 पीपीएम तक पाई गई है जबकि सुरक्षित सीमा इससे कहीं कम मानी जाती है। इसके चलते लोग फ्लोरोसिस दांत गिरने आंखों की रोशनी कमजोर होने बाल सफेद होने और जोड़ों में असहनीय दर्द जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। कई परिवारों में बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

    ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। साफ पानी की मांग और स्वास्थ्य जांच की अपील सिर्फ आश्वासनों तक सीमित रह गई है।यह मामला केवल पानी की गुणवत्ता का नहीं बल्कि शासन-प्रशासन की जवाबदेही और संवेदनशीलता का भी है। सवाल यह है कि क्या किसी बड़ी जनहानि के बाद ही कार्रवाई होगी या फिर समय रहते ग्रामीणों को इस धीमे जहर से बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल किल्लौद के गांवों में रहने वाले लोग उम्मीद और चिंता के बीच अपनी जिंदगी जीने को मजबूर हैं।

  • इंदौर की मौत के बाद ग्वालियर निगम हुआ सक्रिय: 140 शिकायतों का निराकरण, 1200 ट्यूबवेल की सफाई, कंट्रोल रूम भी बनाया

    इंदौर की मौत के बाद ग्वालियर निगम हुआ सक्रिय: 140 शिकायतों का निराकरण, 1200 ट्यूबवेल की सफाई, कंट्रोल रूम भी बनाया


    नई दिल्ली ।मध्यप्रदेश के ग्वालियर में पानी की समस्या अब गंभीर रूप लेती जा रही है। इंदौर में दूषित पानी से मौत की घटना के बाद नगर निगम ने सक्रिय कदम उठाना शुरू किया है। शहर के कई इलाकों से गंदे पानी की शिकायतें आ रही थीं, जिनके समाधान के लिए जनता ने सीएम हेल्पलाइन CM Helpline का सहारा लिया।1 जनवरी से अब तक सीएम हेल्पलाइन में 140 शिकायतें दर्ज की गई हैं, जिनमें से अधिकांश मामलों का समाधान कर दिया गया है। नगर निगम कमिश्नर संघप्रिय सिंह ने बताया कि शिकायतों के निराकरण के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है, जिससे काम में तेजी लाई जा रही है।

    कुल 2600 ट्यूबवेलों में से अब तक 1200 की सफाई पूरी हो चुकी है और शेष ट्यूबवेलों की सफाई भी जल्द ही पूरी की जाएगी। इसके अलावा पानी की टंकियों की सफाई भी लगातार जारी है।शहर में कुछ स्थानों पर गंदे पानी की समस्या पुरानी और क्षतिग्रस्त सीवर तथा पेयजल लाइनों की वजह से उत्पन्न हो रही है। ऐसे 56 स्थानों की लाइनों को बदला जाएगा। नगर निगम ने इन इलाकों को चिन्हित किया है और हर क्षेत्र के लिए विशेष प्लान तैयार किया जा रहा है ताकि समस्या का स्थायी समाधान किया जा सके।

    नगर निगम की टीम ने बताया कि फिलहाल 124 शिकायतों वाले स्थानों पर समस्या का समाधान कर दिया गया है और बाकी 16 पर काम चल रहा है। निगम ने जनता से अपील की है कि यदि किसी क्षेत्र में अब भी गंदे पानी की समस्या है तो वे सीधे सीएम हेल्पलाइन या नगर निगम कंट्रोल रूम से संपर्क करें।इस कदम से यह स्पष्ट है कि ग्वालियर नगर निगम पानी की समस्या को गंभीरता से ले रहा है। यह भी ध्यान रखा जा रहा है कि समस्या के कारण आने वाली स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को रोका जा सके।

    शहरवासियों के लिए राहत की बात यह है कि समस्या का निराकरण सिस्टमेटिक और तेज़ी से किया जा रहा है। कंट्रोल रूम के माध्यम से शिकायतों का ट्रैक रखा जा रहा है और हर इलाके का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है।ग्वालियर नगर निगम की यह पहल यह संदेश देती है कि नागरिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के प्रति प्रशासन सचेत है और तकनीकी एवं प्रबंधन उपायों के जरिए तेजी से कार्रवाई की जा रही है।

  • MP: शिवपुरी में हैंडपंप के पानी से बीमार हुआ व्यक्ति.. समाधान के बजाए नोटिस चिपकाकर निकल गए अधिकारी

    MP: शिवपुरी में हैंडपंप के पानी से बीमार हुआ व्यक्ति.. समाधान के बजाए नोटिस चिपकाकर निकल गए अधिकारी


    शिवपुरी।
    इंदौर के भागीरथपुरा (Indore Bhagirathpura) में दूषित पानी (Contaminated Water) से मौत का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ कि मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के शिवपुरी (Shivpuri) से दूषित पानी पीने से एक युवक के बीमार पड़ने का मामला सामने आया है। शिवपुरी जिले के पोहरी जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत भटनावार के मठ गांव में हैंडपंप (Handpump) के दूषित पानी से एक युवक की तबीयत खराब हो गई। इसके बाद विभाग की लापरवाही देखिए, जब ग्रामीणों ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को सूचना दी, तो विभागीय अमला मौके पर पहुंचा, लेकिन समाधान के बजाय हैंडपंप पर केवल “पानी पीने योग्य नहीं है” लिखकर लौट गया।

    इसके बावजूद ग्रामीणों को मजबूरी में उसी दूषित पानी को छानकर पीना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पानी का कोई दूसरा विकल्प उपलब्ध नहीं है, ऐसे में रोक के बाद भी उन्हें इसी हैंडपंप के पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में पेयजल का एकमात्र स्रोत यही हैंडपंप था। इसी का पानी पीने से रोहित पुरी गोस्वामी बीमार हुए थे। अब हैंडपंप के उपयोग पर रोक लगने और वैकल्पिक व्यवस्था न होने से लोग पीने के पानी के लिए परेशान हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों को सिर्फ चेतावनी देने के बजाय शुद्ध पानी की व्यवस्था करनी चाहिए थी।

    दुलारा पंचायत के सरपंच दिनेश धाकड़ ने विभाग पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि पूरी पंचायत में कई हैंडपंप खराब पड़े हैं। कुछ हैंडपंपों में पाइप बढ़ाने से पानी निकल सकता है, लेकिन इस संबंध में दी गई कई लिखित शिकायतों पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मामले में PHE विभाग के कार्यपालन यंत्री शुभम गुप्ता ने कहा कि दुलारा पंचायत और मठ गांव में जांच के लिए एसडीओ को भेजा जाएगा। जांच के बाद पेयजल समस्या के समाधान के लिए व्यावहारिक विकल्पों पर विचार कर ग्रामीणों को राहत दी जाएगी।

  • इंदौर में दूषित पानी से मौतों का मामला हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी दोषियों पर कार्रवाई के संकेत

    इंदौर में दूषित पानी से मौतों का मामला हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी दोषियों पर कार्रवाई के संकेत


    इंदौर । मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने मंगलवार को दूषित पेयजल के कारण होने वाली मौतों और बीमारियों को लेकर गंभीर टिप्पणी की। कोर्ट ने यह कहा कि इस घटना ने इंदौर की छवि को बुरी तरह से नुकसान पहुंचाया है। जो शहर देश का सबसे स्वच्छ माना जाता था आज वही दूषित पानी के कारण पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि स्वच्छ पेयजल सिर्फ इंदौर के लिए नहीं बल्कि पूरे राज्य का मौलिक अधिकार है और इसे किसी भी स्थिति में नकारा नहीं जा सकता।

    कोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को निर्देश दिया कि इस मामले में जवाब दाखिल कर स्थिति की रिपोर्ट पेश करें। इसके साथ ही यह भी कहा कि अगर भविष्य में दोषी अधिकारियों के खिलाफ सिविल और क्रिमिनल जिम्मेदारी तय करनी पड़ी तो अदालत इसमें कोई संकोच नहीं करेगी। यदि पीड़ितों को मुआवजा कम दिया गया है तो अदालत उचित निर्देश भी जारी करेगी।

    उधर कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की अगुवाई में पार्टी कार्यकर्ता मंगलवार को भागीरथपुरा पहुंचे। पुलिस की तगड़ी सुरक्षा के बीच कांग्रेसी नेता वहां मृतकों के परिजनों से मिले और सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया। पटवारी ने इंदौर के प्रभारी मंत्री महापौर और अन्य नेताओं से इस्तीफा भी मांगा।

    अब तक 17 लोगों की जान जा चुकी है और 110 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हैं। बीमार होने वाले 421 लोगों में से 311 मरीजों को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है जबकि 15 मरीज आईसीयू में हैं। अस्पतालों में उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए हैं।

    कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने पहले से की गई शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया जिससे यह संकट उत्पन्न हुआ। याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट में बताया कि 2022 में महापौर द्वारा नई पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव पारित किया गया था लेकिन फंड न मिलने के कारण इस काम में देरी हो रही है। इसके अलावा 2017-18 में किए गए पानी के 60 सैंपल टेस्ट में से 59 पीने योग्य नहीं पाए गए थे लेकिन इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

    हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को 15 जनवरी को एक नई स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में स्वच्छ पेयजल का अधिकार शामिल है और इसे नज़रअंदाज़ करना गंभीर मामला है।

    अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी जिसमें मुख्य सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। इस मामले से जुड़े मुद्दों को सात श्रेणियों में बांटा गया है जिनमें प्रभावित लोगों के लिए तत्काल निर्देश सुधारात्मक उपाय जिम्मेदारी तय करना अनुशासनात्मक कार्रवाई मुआवजा स्थानीय निकायों को निर्देश और जन-जागरूकता और पारदर्शिता शामिल हैं।

  • सागर में निगमायुक्त ने जलस्रोतों की गुणवत्ता जांच करवाई कुएं और हैंडपंप का जल पीने योग्य नहीं

    सागर में निगमायुक्त ने जलस्रोतों की गुणवत्ता जांच करवाई कुएं और हैंडपंप का जल पीने योग्य नहीं


    सागर । सागर नगर निगम आयुक्त राजकुमार खत्री ने सोमवार को नगर निगम टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड सीवर प्रोजेक्ट और एमपीयूडीसी के अधिकारियों के साथ नगर के जलस्रोतों की जांच की। इस दौरान वे जवाहरगंज भीतर बाजार स्थित शीतला माता मंदिर के पास पहुंचे जहां पानी की गुणवत्ता की जांच कराई गई। जांच में पाया गया कि इन जलस्रोतों में बड़ी मात्रा में अम्लीय गंदा पानी मिल चुका था जो पीने के लिए सुरक्षित नहीं है।

    अधिकांश नागरिक इन कुओं और हैंडपंप का पानी पीने के लिए उपयोग कर रहे थे। इसलिए निगमायुक्त ने तत्काल कदम उठाते हुए इन कुओं और हैंडपंपों पर लाल रंग से यह चेतावनी लिखवाने का आदेश दिया कि इस जल का उपयोग न करें यह पीने योग्य नहीं है। निगमायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो भी जलस्रोत गुणवत्ता में सही न पाए जाएं उन पर इस तरह की चेतावनी तत्काल लिखवाई जाए। उन्होंने कहा जब तक इन जलस्रोतों का पानी वैज्ञानिक तरीके से टेस्ट न हो जाए तब तक इन्हें पीने योग्य नहीं माना जाएगा।

    स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता

    राजकुमार खत्री ने स्पष्ट किया कि नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वर्तमान में टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड द्वारा राजघाट जलप्रदाय योजना के तहत प्रत्येक घर तक शुद्ध पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। इस जल की नियमित गुणवत्ता जांच कराई जा रही है और मानकों के अनुरूप पाए जाने पर ही इसकी आपूर्ति की जा रही है।

    नागरिकों से अपील

    नगर निगम आयुक्त ने नागरिकों से अपील की है कि वे तब तक कुओं और हैंडपंप के पानी का उपयोग पेयजल के रूप में न करें जब तक उसकी गुणवत्ता जांच पूरी न हो जाए।