Tag: drone attack

  • यूक्रेन के ड्रोन हमलों से रूस में तेल संकट गहराया, दो रिफाइनरियों पर हमला, पुतिन ने पहली बार मानी ईंधन की कमी

    यूक्रेन के ड्रोन हमलों से रूस में तेल संकट गहराया, दो रिफाइनरियों पर हमला, पुतिन ने पहली बार मानी ईंधन की कमी


    कीव। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में ऊर्जा ठिकानों पर हमलों ने हालात और तनावपूर्ण कर दिए हैं। यूक्रेन ने रूस की दो प्रमुख तेल रिफाइनरियों को ड्रोन हमलों से निशाना बनाया है, जिसके बाद वहां आग लगने और नुकसान की खबरें सामने आई हैं। इस बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहली बार स्वीकार किया है कि देश में ईंधन की कमी की स्थिति बन रही है।

    रिफाइनरी पर हमला, आग और नुकसान

    रिपोर्टों के अनुसार, रविवार को यूक्रेन ने रूस के दक्षिणी हिस्से में स्थित एक बड़ी तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमला किया, जिससे वहां भीषण आग लग गई। रूस के क्रास्नोडार क्षेत्र के स्लाव्यांस्क-ना-कुबानी स्थित इस रिफाइनरी में हमले के बाद एक व्यक्ति की मौत और एक अन्य के घायल होने की जानकारी भी सामने आई है।

    यह रिफाइनरी हर साल लगभग 40 लाख टन कच्चे तेल का प्रसंस्करण करती है और काला सागर के बंदरगाहों के जरिए पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी करती है।

    यूक्रेन का दावा- दो रिफाइनरियां निशाने पर

    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने दावा किया कि उनके देश के ड्रोन हमलों में रूस की दो तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया गया है। उनका कहना है कि हर सफल हमला रूस की सैन्य और आर्थिक क्षमता को कमजोर कर रहा है और शांति की दिशा में एक कदम है। हालांकि रूसी अधिकारियों ने यारोस्लाव क्षेत्र की दूसरी रिफाइनरी पर हमले की पुष्टि नहीं की है।

    रूस में ईंधन संकट के संकेत

    यूक्रेन द्वारा लगातार ऊर्जा ठिकानों पर किए जा रहे हमलों का असर अब रूस के भीतर दिखाई देने लगा है। कई क्षेत्रों में पेट्रोल और डीजल की कमी की स्थिति बन गई है। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं और कुछ इलाकों में ईंधन की बिक्री पर सीमा तय कर दी गई है।

    साइबेरिया के इरकुत्स्क क्षेत्र में एक सरकारी तेल कंपनी के पंप पर एक वाहन को प्रतिदिन अधिकतम 50 लीटर ईंधन देने का नियम लागू किया गया है। वहीं रूस के उपप्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने कहा है कि घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए ईंधन निर्यात समझौतों की समीक्षा की जा रही है।

    पुतिन का बयान और सैन्य स्थिति

    राष्ट्रपति पुतिन ने स्वीकार किया कि देश में ईंधन की कमी की स्थिति उत्पन्न हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार तेल संयंत्रों की सुरक्षा बढ़ाएगी, उत्पादन तेज करेगी और जरूरत पड़ने पर आयात पर भी विचार किया जाएगा।

    हालांकि पुतिन ने यह भी दावा किया कि यूक्रेन के हमलों का मोर्चे पर चल रही लड़ाई पर कोई असर नहीं पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूक्रेन का उद्देश्य रूस के भीतर अस्थिरता पैदा करना है।

    दोनों ओर से हमले जारी

    युद्ध के बीच दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हवाई हमले जारी रखे हैं। रूस ने यूक्रेन के जापोरिज्जिया शहर पर बमबारी की, जिसमें दो लोगों की मौत और 16 लोग घायल हुए, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं।

    रूस के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने एक रात में 213 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए। वहीं यूक्रेन की वायुसेना का कहना है कि रूस ने 142 ड्रोन और 8 मिसाइलें दागीं, जिनमें से अधिकांश को नष्ट कर दिया गया।

  • मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर: UAE पर ईरान का मिसाइल-ड्रोन हमला, अमेरिका की जवाबी बमबारी से हालात और बिगड़े

    मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर: UAE पर ईरान का मिसाइल-ड्रोन हमला, अमेरिका की जवाबी बमबारी से हालात और बिगड़े


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है, जहां संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने दावा किया है कि ईरान ने उसके क्षेत्र पर 2 बैलिस्टिक मिसाइल और 3 ड्रोन दागे। UAE रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उसकी एयर डिफेंस सिस्टम ने सभी मिसाइल और ड्रोन को हवा में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया, हालांकि इस हमले में 3 लोगों के घायल होने की जानकारी भी सामने आई है। अभी तक ईरान की तरफ से इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

    इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने सीजफायर के बावजूद ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की है। अमेरिका का कहना है कि ईरानी सेना ने उसके जंगी जहाजों पर मिसाइल, ड्रोन और छोटी नावों से हमला किया था, जिसके जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ चेतावनी दी है कि अगर ईरान किसी डील पर नहीं पहुंचता, तो आगे और भी बड़े हमले किए जाएंगे। वहीं ईरान ने पलटवार करते हुए दावा किया है कि अमेरिकी हमले में सैन्य ठिकानों की बजाय नागरिक इलाकों को निशाना बनाया गया है। ईरान ने यह भी कहा है कि उसने जवाबी कार्रवाई में होर्मुज स्ट्रेट और चाबहार पोर्ट के पास मौजूद अमेरिकी सैन्य जहाजों को निशाना बनाया। इसके साथ ही ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिकी हमले ओमान की खाड़ी में उसके तेल टैंकरों पर भी किए गए।

    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि CIA की इंटेलिजेंस गलत है और ईरान की मिसाइल क्षमता खत्म नहीं हुई है। उन्होंने दावा किया कि देश का मिसाइल रिजर्व अभी भी मजबूत स्थिति में है और ईरान किसी भी हालात में अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। अराघची ने यह भी कहा कि जब भी कूटनीतिक समाधान की संभावना बनती है, अमेरिका सैन्य रास्ता अपना लेता है, लेकिन ईरान दबाव में झुकने वाला नहीं है।

    इसी बीच होर्मुज स्ट्रेट में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं, जहां करीब 1500 जहाज फंसे होने की जानकारी सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री एजेंसी के अनुसार, इस संकट का असर तेल, गैस और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ रहा है, जिससे कई देशों में आर्थिक और खाद्य संकट की आशंका बढ़ गई है।

    मध्य पूर्व में इजराइल-हिजबुल्लाह संघर्ष भी तेज हो गया है, जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमलों का दावा कर रहे हैं। साथ ही अमेरिका ने ईरान से जुड़े नेटवर्क पर नए प्रतिबंध भी लगाए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ गया है।

  • UAE हमले पर भारत का कड़ा रुख: 3 भारतीय घायल, PM मोदी बोले- नागरिकों पर हमला बर्दाश्त नहीं

    UAE हमले पर भारत का कड़ा रुख: 3 भारतीय घायल, PM मोदी बोले- नागरिकों पर हमला बर्दाश्त नहीं



    नई दिल्ली। UAE के फुजैराह स्थित ऑयल पोर्ट और पेट्रोलियम सुविधाओं पर हुए हमले में 3 भारतीय नागरिकों के घायल होने के बाद भारत ने सख्त नाराजगी जताई है। भारत सरकार ने साफ कहा है कि आम लोगों और जरूरी ढांचों को निशाना बनाना पूरी तरह अस्वीकार्य है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि निर्दोष नागरिकों पर हमला किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    क्या हुआ फुजैराह में?
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, फुजैराह के इंडस्ट्रियल एरिया में ड्रोन और मिसाइल हमले के बाद पेट्रोलियम प्लांट में आग लग गई। इस घटना में तीन भारतीय घायल हो गए, जिनका इलाज जारी है।

    भारत की दो टूक
    भारत ने सभी पक्षों से तुरंत हिंसा रोकने और कूटनीति के रास्ते अपनाने की अपील की है। साथ ही होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की बात कही है, जिसे वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है।

    UAE का दावा, ईरान पर आरोप
    UAE ने इस हमले के पीछे ईरान का हाथ होने का दावा किया है। अधिकारियों के मुताबिक, कई बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ ड्रोन हमलों को रोका गया। हालांकि ईरान की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    24 घंटे में बढ़ा तनाव, बड़े अपडेट्स
    ड्रोन प्लांट पर हमला
    फुजैराह के पेट्रोलियम प्लांट पर हमले के बाद भीषण आग लगी, 3 भारतीय घायल।

    ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ लॉन्च
    अमेरिका ने होर्मुज क्षेत्र में फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए नई पहल शुरू की।

    दक्षिण कोरियाई जहाज पर अटैक
    दक्षिण कोरिया के जहाज पर हमले से आग लगी, कोई हताहत नहीं।

    जब्त जहाज पाकिस्तान को सौंपा
    अमेरिका ने जब्त ईरानी जहाज पाकिस्तान को सौंपा, जिसे बाद में ईरान भेजा गया।

    ईरान में फांसी
    ईरान में जासूसी के आरोप में तीन लोगों को फांसी दी गई।
    पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने साफ संकेत दिया है कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर पूरी तरह सतर्क है।

  • ड्रोन टकराव से आग, दुबई एयरपोर्ट पर सुरक्षा कारणों से सभी फ्लाइट्स रोकी गईं

    ड्रोन टकराव से आग, दुबई एयरपोर्ट पर सुरक्षा कारणों से सभी फ्लाइट्स रोकी गईं

    नई दिल्ली: दुबई एयरपोर्ट ने सोमवार को सुरक्षा कारणों से सभी उड़ानों को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया। यह कदम एक ड्रोन के ईंधन टैंक से टकराने के बाद उठाया गया। दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा DXBने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर यात्रियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय लेने की जानकारी दी।

    दुबई नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने यात्रियों को अपनी उड़ानों की ताजा स्थिति जानने के लिए संबंधित एयरलाइन से संपर्क करने की सलाह दी। दुबई मीडिया कार्यालय ने भी ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि आगे की जानकारी आधिकारिक चैनलों के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी।

    घटना के अनुसार, ड्रोन के ईंधन टैंक से टकराने के बाद आग लग गई। आपातकालीन टीमों ने तुरंत कार्रवाई की और सुरक्षा उपाय लागू करने के बाद किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। दुबई नागरिक सुरक्षा दल को आग बुझाने के लिए तुरंत तैनात किया गया।

    इस बीच, कोच्चि से दुबई जा रही एमिरेट्स फ्लाइट ईके533 को भी सुरक्षा कारणों से वापस लौटना पड़ा। सीआईएएल के प्रवक्ता ने बताया कि फ्लाइट में 325 यात्री सवार थे और अचानक एयरपोर्ट बंद होने के कारण इसे कोच्चि वापस लौटने का निर्देश दिया गया।

    सुरक्षा घटनाओं के अलावा, संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि हालिया संघर्ष के दौरान छह लोगों की मौत हुई है। इसमें चार नागरिक और दो सैन्यकर्मी शामिल हैं। तकनीकी खराबी के कारण हुए हेलीकॉप्टर हादसे में सैनिकों की जान गई।

    दुबई एयरपोर्ट प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और यात्रियों से अपील की गई है कि वे उड़ानों की जानकारी नियमित रूप से अपने एयरलाइन से प्राप्त करें।

  • बगदाद में अमेरिकी दूतावास के पास ड्रोन हमला, स्थिति पर अभी अस्पष्टता

    बगदाद में अमेरिकी दूतावास के पास ड्रोन हमला, स्थिति पर अभी अस्पष्टता


    बगदाद । इराक की राजधानी बगदाद में अमेरिकी दूतावास के आसपास ड्रोन हमले की खबर सामने आई है। मीडिया में जारी एक वीडियो में दूतावास परिसर के पास किसी इमारत से धुआं और आग की लपटें उठती दिखाई दे रही हैं। इस घटना ने क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

    सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि हमला सीधे अमेरिकी दूतावास परिसर पर हुआ है या किसी अन्य नजदीकी इमारत पर। घटना के कारणों और संभावित हताहतों की जानकारी अभी मीडिया और अधिकारियों को नहीं मिल पाई है।इस मामले पर प्रतिक्रिया के लिए अमेरिकी विदेश विभाग से संपर्क किया गया है। अधिकारियों ने अभी तक इस घटना की पुष्टि या विस्तृत विवरण साझा नहीं किया है।

    इराक और अमेरिका के बीच सुरक्षा और तनाव का यह नया मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम एशिया में सैन्य और कूटनीतिक घटनाओं को लेकर वैश्विक बाजार और राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो रहे हैं। स्थिति पर नजर रखी जा रही है, और क्षेत्रीय सुरक्षा बल तथा अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां हमले के स्रोत और संभावित प्रभाव का अध्ययन कर रही हैं।

  • ओमान के सलालाह पोर्ट पर ड्रोन हमला: तेल स्टोरेज टैंकों में लगी आग, सुल्तान ने ईरानी राष्ट्रपति से जताई नाराजगी, मिडिल-ईस्ट में तनाव बढ़ा

    ओमान के सलालाह पोर्ट पर ड्रोन हमला: तेल स्टोरेज टैंकों में लगी आग, सुल्तान ने ईरानी राष्ट्रपति से जताई नाराजगी, मिडिल-ईस्ट में तनाव बढ़ा

     
     
     
    नई दिल्ली। ओमान के दक्षिणी शहर सलालाह के पोर्ट पर तेल स्टोरेज टैंकों को निशाना बनाते हुए ड्रोन हमले की सूचना मिली है। ओमानी सरकारी मीडिया के अनुसार, ड्रोन हमले के बाद पोर्ट के फ्यूल स्टोरेज टैंकों में आग भड़क गई, लेकिन किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। समुद्री सुरक्षा कंपनी एम्ब्रे ने पुष्टि की कि पोर्ट पर मौजूद किसी व्यापारी जहाज को नुकसान नहीं पहुंचा।
    घटना के बाद ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक अल-सईद ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान को फोन कर इस हमले पर अपनी गहरी नाराजगी जताई। सुल्तान ने कहा कि ओमान मौजूदा संघर्ष में तटस्थ है और अपनी सुरक्षा व क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।
    तुर्किये के राष्ट्रपति रेचप तैयप एर्दोआन ने मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए कहा कि ईरान में जारी युद्ध को तुरंत रोकना होगा, वरना पूरा क्षेत्र आग की चपेट में आ सकता है। एर्दोआन ने कहा कि कूटनीति के माध्यम से ही इस संकट का समाधान संभव है और तुर्किये अभी भी दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है।
    इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने बताया कि अमेरिका के सहयोग से चल रहा अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक सभी लक्ष्य हासिल नहीं हो जाते, और इस ऑपरेशन की कोई निश्चित समयसीमा नहीं है।
    इस बीच, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने युद्ध के कारण खाड़ी क्षेत्र में तेल आपूर्ति पर असर को देखते हुए घोषणा की कि उसके 32 सदस्य देश आपातकालीन भंडार से 40 करोड़ बैरल कच्चा तेल बाजार में उतारेंगे। IEA के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने बताया कि यह एजेंसी के इतिहास में सबसे बड़ा तेल रिलीज होगा। उन्होंने कहा कि यह कदम युद्ध के कारण तेल आपूर्ति में आई बाधा को दूर करने के लिए उठाया गया है।
    28 फरवरी से होर्मुज स्ट्रेट के जरिए तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात युद्ध से पहले के स्तर से केवल 10% तक ही पहुंच पाया है। IEA ने कहा कि आपातकालीन भंडार से तेल सदस्य देशों की परिस्थितियों के अनुसार चरणबद्ध तरीके से बाजार में उतारा जाएगा।
    1974 में स्थापित IEA के इतिहास में यह छठी बार है जब सदस्य देश मिलकर रणनीतिक भंडार से तेल जारी कर रहे हैं। इससे पहले 1991 के खाड़ी युद्ध, 2005 के हरिकेन कैटरीना, 2011 के लीबिया युद्ध और 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान ऐसा कदम उठाया गया था। IEA के 32 सदस्य देशों में अमेरिका, जापान, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा और दक्षिण कोरिया शामिल हैं। भारत इस एजेंसी का सदस्य नहीं है, लेकिन 2017 से यह IEA का एसोसिएट देश है।
    ओमान के सलालाह पोर्ट पर ड्रोन हमला, सुल्तान की नाराजगी, मध्यस्थता के प्रयास और 32 देशों द्वारा 40 करोड़ बैरल तेल बाजार में उतारने की योजना के बीच, मिडिल-ईस्ट में तनाव और ऊर्जा संकट गहराता दिखाई दे रहा है।

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