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  • बजट की कमी से थमी 'ड्रोन दीदी' योजना की रफ्तार, प्रशिक्षण के एक साल बाद भी नहीं मिले कृषि ड्रोन

    बजट की कमी से थमी 'ड्रोन दीदी' योजना की रफ्तार, प्रशिक्षण के एक साल बाद भी नहीं मिले कृषि ड्रोन

    झांसी। महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई ड्रोन दीदी योजना झांसी में बजट के अभाव में आगे नहीं बढ़ पा रही है। बड़ागांव ब्लॉक की तीन महिला किसानों ने एक वर्ष पहले लखनऊ में ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण पूरा किया था, लेकिन अब तक उन्हें कृषि ड्रोन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। ऐसे में प्रशिक्षण के बावजूद वे स्वरोजगार की शुरुआत नहीं कर सकी हैं।

    प्रशिक्षण पूरा, लेकिन संसाधनों का इंतजार
    योजना के तहत राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़े स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं का चयन कर उन्हें ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के बाद कृषि कार्यों के लिए ड्रोन उपलब्ध कराया जाता है, ताकि महिलाएं खेतों में उर्वरक और कीटनाशक के छिड़काव जैसी सेवाएं देकर आय अर्जित कर सकें।

    पिछले वर्ष बड़ागांव ब्लॉक की तीन महिलाओं को लखनऊ में प्रशिक्षण दिलाया गया था। हालांकि, प्रशिक्षण पूरा हुए एक साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन बजट जारी न होने के कारण उन्हें अब तक ड्रोन नहीं मिल पाए हैं। इससे वे सीखी गई तकनीक का व्यावहारिक उपयोग नहीं कर पा रही हैं।

    एक ड्रोन की लागत करीब 10 लाख रुपये
    एनआरएलएम के तहत चयनित महिलाओं को लगभग 10 लाख रुपये लागत का कृषि ड्रोन उपलब्ध कराया जाता है। इन ड्रोन की मदद से वे किसानों के खेतों में उर्वरक, कीटनाशक और सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव कर नियमित आय अर्जित कर सकती हैं।

    पहले चयनित महिलाओं ने पेश की मिसाल
    योजना के सफल परिणाम भी सामने आ चुके हैं। करीब दो वर्ष पहले बड़ागांव क्षेत्र के गड़मऊ गांव की रानी देवी और हेमवती को हैदराबाद में ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया गया था। प्रशिक्षण के बाद दोनों को ड्रोन उपलब्ध कराए गए और वर्तमान में वे किसानों के खेतों में ड्रोन के माध्यम से छिड़काव कर अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि यदि नई चयनित महिलाओं को भी समय पर ड्रोन उपलब्ध करा दिए जाएं तो वे भी इसी तरह अपना स्वरोजगार स्थापित कर सकेंगी।

    क्या है ड्रोन दीदी योजना?
    ड्रोन दीदी योजना का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ना है। इसके तहत महिलाओं को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया जाता है और बाद में कृषि ड्रोन उपलब्ध कराया जाता है। इन ड्रोन की मदद से कम समय में उर्वरक, कीटनाशक और सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव किया जा सकता है। इससे किसानों का समय और लागत दोनों बचते हैं, जबकि प्रशिक्षित महिलाओं के लिए आय का नया स्रोत तैयार होता है।

    बजट मिलते ही दिए जाएंगे ड्रोन
    एनआरएलएम, झांसी के प्रभारी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि बजट उपलब्ध होते ही ड्रोन दीदी योजना के तहत चयनित महिला किसानों को कृषि ड्रोन उपलब्ध करा दिए जाएंगे, ताकि वे जल्द से जल्द कृषि सेवाएं शुरू कर सकें।