Tag: drones

  • अरुणाचल सीमा पर चीनी सैनिकों से आमना-सामना, ITBP ने तैयार कीं शौर्य कमांडो टीमें..

    अरुणाचल सीमा पर चीनी सैनिकों से आमना-सामना, ITBP ने तैयार कीं शौर्य कमांडो टीमें..

    नई दिल्ली । भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव की स्थिति को लेकर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि राज्य के कई सीमावर्ती स्थानों पर भारतीय जवानों और चीनी सैनिकों के बीच आमने-सामने की स्थिति बनी है। इनमें से कुछ स्थानों पर ऐसी परिस्थितियां अब भी जारी हैं। उन्होंने बल के जवानों को संबोधित करते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात ‘शौर्य कमांडो’ टीमों के प्रदर्शन की सराहना की।

    यह जानकारी आईटीबीपी के 65वें स्थापना दिवस से पहले आयोजित ‘हिमवीर सम्मान समारोह’ के दौरान सामने आई। कपूर ने कहा कि हाल के दिनों में अरुणाचल प्रदेश के कई इलाकों में जवानों को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है। इन स्थितियों में तैनात शौर्य कमांडो टीमों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार सतर्कता बनाए रखने और कठिन परिस्थितियों से निपटने के लिए बल अपनी परिचालन क्षमताओं को मजबूत कर रहा है।

    आईटीबीपी प्रमुख के अनुसार, बल की प्रत्येक बटालियन में कमांडो टीम तैयार की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त दो और टीमें गठित करने की प्रक्रिया चल रही है। दीर्घकालिक लक्ष्य हर बटालियन में एक पूर्ण कमांडो कंपनी तैयार करना है। इसके साथ ही विशेष अभियानों के संचालन के लिए एक अलग कमांडो बटालियन बनाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। इन इकाइयों को विशेष रूप से पहाड़ी और अधिक ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में काम करने के लिए तैयार किया जा रहा है, जहां मौसम, भौगोलिक परिस्थितियां और सीमित पहुंच जवानों के सामने चुनौतियां पैदा करती हैं।

    सीमा सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए आईटीबीपी आधुनिक तकनीक पर भी ध्यान दे रही है। कपूर ने कहा कि ड्रोन ने युद्ध के पारंपरिक तरीकों में बदलाव किया है। रूस-यूक्रेन संघर्ष का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन और अन्य उन्नत तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसी को देखते हुए बल ड्रोन संचालन, पायलटों के प्रशिक्षण और ड्रोन निर्माण की अपनी क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है।

    ड्रोन के साथ-साथ एंटी-ड्रोन प्रणालियों के विकास और इस्तेमाल की तैयारी भी की जा रही है। इन तकनीकों का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में ड्रोन से पैदा होने वाले संभावित खतरों का मुकाबला करना और निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाना है। बल की आधुनिकीकरण योजना में ड्रोन तथा एंटी-ड्रोन प्रणालियों के लिए लगभग 1,000 करोड़ रुपये निर्धारित करने की बात कही गई है। इसके अलावा वाहनों, उपकरणों और गोला-बारूद को आधुनिक बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    दुर्गम सीमावर्ती इलाकों में तेजी से आवाजाही और प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाने के लिए विशेष वाहनों, स्वचालित जमीनी वाहनों और क्विक रिएक्शन व्हीकल को भी योजना में शामिल किया गया है। इसके साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की तैयारी है। इन कदमों का उद्देश्य जरूरत पड़ने पर जवानों और उपकरणों की तैनाती को अधिक प्रभावी बनाना है।

    भारत और चीन के बीच सीमा संबंधी मुद्दों पर सैन्य स्तर पर बातचीत भी जारी रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 6 सितंबर 2026 को अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र में वाचा-दमाई बॉर्डर पर्सनल मीटिंग पॉइंट पर कोर कमांडर स्तर की बैठक हुई थी। सीमा पर दोनों देशों की अलग-अलग धारणाओं के कारण कुछ क्षेत्रों में गश्त के दौरान आमने-सामने की स्थिति बनती रही है।

    आईटीबीपी प्रमुख का बयान बताता है कि सीमा पर सतर्कता बनाए रखने के साथ-साथ बल अपनी विशेष इकाइयों, निगरानी प्रणालियों और आधुनिक उपकरणों को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। हालांकि, अरुणाचल प्रदेश में जिन स्थानों पर आमने-सामने की स्थिति बनी हुई है, उनके बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

  • रूस ने यूक्रेन पर फिर किया बड़ा हमला… एक साथ दागे कई ड्रोन और मिलाइलें

    रूस ने यूक्रेन पर फिर किया बड़ा हमला… एक साथ दागे कई ड्रोन और मिलाइलें


    नई दिल्ली।
    रूस (Russia) ने यूक्रेन (Ukraine) के कई शहरों पर एक साथ कई तरह की मिसाइलों और ड्रोनों से हमला (Missiles and Drones Attack) किया. इस हमले में ओनिक्स-एम, जिरकॉन और इस्कंदर-एम जैसी मिसाइलों का इस्तेमाल बताया गया है. साथ ही सैकड़ों ड्रोन भी दागे गए. हमला 10 क्षेत्रों में हुआ जिसमें कीव, द्निप्रो और क्रिवी रीह शामिल हैं।

    यूक्रेनी बलों ने ज्यादातर खतरों को रोक लिया लेकिन कुछ हमले लक्ष्य तक पहुंच गए. इससे आग लगी, कारखाने क्षतिग्रस्त हुए और चेर्निहिव में 1 लाख लोगों को बिजली कटौती का सामना करना पड़ा. द्निप्रो में तीन या चार लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए।

    रूस ने इस हमले को मास्को के पास यूक्रेनी हमलों का जवाब बताया. दोनों पक्ष ऊर्जा और औद्योगिक ठिकानों पर हमले बढ़ा रहे हैं. यह घटना लंबे संघर्ष के बीच तनाव को और बढ़ाने वाली साबित हुई है. हमले में विभिन्न प्रकार की मिसाइलों का मिश्रण इस्तेमाल हुआ. ओनिक्स-एम सुपरसोनिक एंटी-शिप क्रूज मिसाइल है लेकिन जमीन के ठिकानों पर भी लगाई जा सकती है.

    जिरकॉन हाइपरसोनिक मिसाइल है जो तेज गति से लक्ष्य पर हमला करती है. इस्कंदर-एम बैलिस्टिक मिसाइल है जो सटीक निशाना लगाने में सक्षम है. इनके अलावा कुछ क्रूज मिसाइलें भी दागी गईं. ड्रोन की संख्या सैकड़ों में बताई गई है जो विभिन्न दिशाओं से आए।

    यूक्रेनी वायु रक्षा ने इनमें से अधिकांश को मार गिराया. कुल 186 खतरों को रोकने का दावा किया गया. बावजूद इसके कुछ मिसाइल और ड्रोन लक्ष्य तक पहुंच गए. कीव और अन्य शहरों में विस्फोट की आवाजें सुनाई दीं. औद्योगिक क्षेत्रों और ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाया गया जिससे बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई।


    नुकसान और नागरिक प्रभाव

    द्निप्रो में सबसे ज्यादा नुकसान की खबरें आईं. वहां मौतें हुईं और कई लोग घायल हुए. चेर्निहिव में बिजली कटौती से एक लाख लोग प्रभावित हुए. आग बुझाने और मलबा हटाने का काम जारी रहा. कारखानों को नुकसान पहुंचने से स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है. नागरिक इलाकों में भी हमले की खबरों ने लोगों में भय पैदा किया।

    यूक्रेनी अधिकारियों ने नागरिक ठिकानों पर हमले की निंदा की. रूस ने सैन्य और ऊर्जा लक्ष्यों को निशाना बनाने का दावा किया. दोनों पक्षों के बयान अलग-अलग हैं लेकिन जमीनी हकीकत में नुकसान साफ दिख रहा है. यह हमला यूक्रेन द्वारा मास्को के आसपास किए गए हमलों के जवाब में बताया जा रहा है।

    दोनों देश एक-दूसरे के ऊर्जा और औद्योगिक ढांचे को निशाना बना रहे हैं. ड्रोन और मिसाइल हमलों की संख्या बढ़ने से वायु रक्षा प्रणाली पर दबाव बढ़ गया है. सर्दियों के करीब आने के साथ ऊर्जा सुविधाओं पर हमले नागरिकों के लिए और मुश्किलें पैदा कर सकते हैं।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस हमले की निंदा हुई है. संघर्ष के लंबे होते जाने से दोनों पक्ष नई रणनीति अपना रहे हैं. हाइपरसोनिक और सुपरसोनिक मिसाइलों का इस्तेमाल युद्ध की प्रकृति को बदल रहा है. बचाव और पुनर्निर्माण का काम चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

    यूक्रेन अपनी वायु रक्षा को मजबूत करने की कोशिश में लगा है. रूस लगातार हमलों से दबाव बनाए रखना चाहता है. आम नागरिकों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की बहाली सबसे बड़ी जरूरत है. यह हमला दिखाता है कि संघर्ष अभी भी तीव्र चरण में है और शांति की संभावनाएं फिलहाल कमजोर दिख रही हैं. दोनों पक्षों को संयम बरतने और राजनयिक समाधान तलाशने की सलाह दी जा रही है लेकिन मैदान में तनाव जारी है।

  • रूस पर यूक्रेन का बड़ा ड्रोन हमला, मॉस्को समेत कई इलाकों में नुकसान; चुनाव के आखिरी दिन बढ़ा तनाव

    रूस पर यूक्रेन का बड़ा ड्रोन हमला, मॉस्को समेत कई इलाकों में नुकसान; चुनाव के आखिरी दिन बढ़ा तनाव

    नई दिल्ली । रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के दौरान रविवार को रूस पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले की खबर सामने आई। रूसी अधिकारियों के अनुसार, रातभर में यूक्रेन की ओर से एक हजार से अधिक ड्रोन भेजे गए। इनमें बड़ी संख्या में ड्रोन मॉस्को और उसके आसपास के इलाकों की ओर बढ़े। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन ने इसे राजधानी पर अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला बताया।

    रूसी अधिकारियों के अनुसार, देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी संख्या में ड्रोन को हवा में ही नष्ट किया गया। रक्षा मंत्रालय ने 1,100 से अधिक यूक्रेनी ड्रोन को रोकने की जानकारी दी, जबकि मॉस्को के मेयर के अनुसार राजधानी की ओर बढ़ रहे करीब 450 ड्रोन को नष्ट किया गया। बाद में सामने आई जानकारी में रूस के अलग-अलग मोर्चों पर 1,600 से अधिक ड्रोन गिराए जाने का दावा भी किया गया।

    हमले के दौरान मॉस्को की एक तेल रिफाइनरी और एक रिहायशी इमारत को नुकसान पहुंचा। रिहायशी इमारत से बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। मॉस्को क्षेत्र के अधिकारियों के मुताबिक, एक 21 मंजिला इमारत से करीब 400 लोगों को निकाला गया, जिनमें बच्चे भी शामिल थे।

    मॉस्को क्षेत्र के गवर्नर आंद्रे वोरोब्योव के अनुसार, हमले में दो लोगों की मौत हुई। मृतकों में 44 वर्षीय महिला और एक बुजुर्ग व्यक्ति शामिल बताए गए हैं। क्षेत्र में 20 लोगों के घायल होने की जानकारी भी सामने आई है। घायलों को इलाज के लिए अस्पतालों में पहुंचाया गया।

    हमले का असर ऐसे समय में सामने आया जब रूस में तीन दिन से चल रहा संसदीय चुनाव अपने अंतिम दिन में था। मतदान 18 सितंबर से शुरू हुआ था और 20 सितंबर को अंतिम चरण में पहुंचा। मॉस्को के मेयर ने आरोप लगाया कि ड्रोन हमले का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में बाधा डालना था। हालांकि, मतदान जारी रहा और अधिकारियों ने कहा कि हमला चुनाव को रोकने में सफल नहीं हुआ।

    रूस ने यूक्रेन के कब्जे वाले कुछ इलाकों और क्रीमिया में भी संसदीय चुनाव के लिए मतदान कराया है। यूक्रेन ने इन क्षेत्रों में रूस की ओर से कराए जा रहे मतदान को अवैध बताया है। ऐसे में चुनाव के अंतिम दिन हुआ यह बड़ा ड्रोन हमला पहले से तनावपूर्ण राजनीतिक और सैन्य परिस्थितियों के बीच हुआ।

    यूक्रेन की ओर से इस हमले को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। दोनों देशों के बीच युद्ध के दौरान ड्रोन हमलों का इस्तेमाल लगातार बढ़ा है और ऊर्जा ढांचे तथा अन्य महत्वपूर्ण ठिकाने हमलों का लक्ष्य बनते रहे हैं।

    मॉस्को की तेल रिफाइनरी को नुकसान पहुंचना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि रूस के ऊर्जा ढांचे पर हमले युद्ध के दौरान बार-बार सामने आए हैं। अधिकारियों ने रिफाइनरी परिसर में ड्रोन पहुंचने और नुकसान की पुष्टि की है। आपातकालीन दलों को प्रभावित स्थानों पर भेजकर स्थिति संभालने का काम किया गया।

    रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष में यह हमला ऐसे समय हुआ है जब दोनों पक्षों के बीच सैन्य तनाव बना हुआ है। मॉस्को और आसपास के क्षेत्र में हुए नुकसान तथा जानमाल की हानि ने युद्ध के दौरान ड्रोन हमलों के बढ़ते प्रभाव को एक बार फिर सामने ला दिया है।

  • सऊदी अरब जाने वाले अमेरिकी नागरिकों को अलर्ट, अमेरिका ने जारी की लेवल-3 ट्रैवल एडवाइजरी, यमन सीमा पर सबसे कड़ी चेतावनी

    सऊदी अरब जाने वाले अमेरिकी नागरिकों को अलर्ट, अमेरिका ने जारी की लेवल-3 ट्रैवल एडवाइजरी, यमन सीमा पर सबसे कड़ी चेतावनी


    नई दिल्ली ।पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच अमेरिका ने सऊदी अरब की यात्रा करने वाले अपने नागरिकों के लिए नई चेतावनी जारी की है। अमेरिकी प्रशासन ने सऊदी अरब के लिए लेवल-3 ट्रैवल एडवाइजरी जारी करते हुए नागरिकों से वहां की यात्रा पर पुनर्विचार करने को कहा है। इस चेतावनी में क्षेत्र में संभावित हमलों, आतंकवाद और सुरक्षा जोखिमों को प्रमुख कारण बताया गया है।

    सऊदी अरब के लिए जारी लेवल-3 चेतावनी का अर्थ है कि अमेरिकी नागरिकों को वहां जाने से पहले सुरक्षा परिस्थितियों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। पश्चिम एशिया में लगातार बने तनाव के बीच अमेरिकी हितों और नागरिकों को संभावित खतरे की आशंका भी जताई गई है। विशेष रूप से ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों को सुरक्षा चिंता का प्रमुख कारण बताया गया है।

    यमन से लगे सऊदी अरब के कुछ सीमावर्ती इलाकों के लिए इससे भी सख्त लेवल-4 ट्रैवल एडवाइजरी जारी की गई है। इस स्तर की चेतावनी के तहत इन क्षेत्रों की यात्रा नहीं करने की सलाह दी गई है। यमन सीमा के आसपास सुरक्षा स्थिति को अधिक संवेदनशील माना गया है, जहां सशस्त्र समूहों की गतिविधियों और हमलों के कारण खतरा बढ़ने की बात कही गई है।

    चेतावनी में ड्रोन और मिसाइल हमलों के अलावा हवा में नष्ट किए गए हथियारों के मलबे से होने वाले नुकसान की आशंका का भी उल्लेख किया गया है। किसी हमले को रोकने के दौरान गिरने वाला मलबा भी लोगों और संपत्ति के लिए खतरा पैदा कर सकता है। ऐसे में यमन सीमा के आसपास रहने या यात्रा करने वाले अमेरिकी नागरिकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है।

    सऊदी अरब में सैन्य ठिकानों और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे के आसपास के क्षेत्रों को भी संवेदनशील माना गया है। अमेरिकी नागरिकों के लिए इन इलाकों में सुरक्षा जोखिम अधिक होने की बात सामने आई है। क्षेत्रीय तनाव के चलते सऊदी अरब में अमेरिकी हितों को निशाना बनाए जाने की आशंका भी व्यक्त की गई है।

    यमन से लगी सीमा के अलावा उड़ानों पर पड़ने वाले असर को भी सुरक्षा स्थिति से जोड़ा गया है। क्षेत्र में तनाव बढ़ने के कारण हवाई सेवाओं में रुकावट की स्थिति पैदा हो सकती है। इसके साथ ही अमेरिकी कर्मचारियों की आवाजाही से संबंधित कुछ प्रतिबंध भी लागू किए गए हैं, जिससे वहां की सुरक्षा परिस्थितियों को लेकर चिंता का स्तर स्पष्ट होता है।

    अमेरिकी चेतावनी ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बना हुआ है। सऊदी अरब को लेकर जारी सलाह में आम इलाकों और विशेष रूप से संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों के बीच अलग-अलग स्तर की चेतावनी दी गई है। जहां पूरे सऊदी अरब के लिए यात्रा पर पुनर्विचार करने को कहा गया है, वहीं यमन सीमा से लगे कुछ क्षेत्रों के लिए यात्रा नहीं करने की सलाह दी गई है।

    अमेरिकी नागरिकों को सऊदी अरब की यात्रा की योजना बनाने से पहले मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों पर ध्यान देने और संभावित जोखिमों को समझने की सलाह दी गई है। सैन्य गतिविधियों, ड्रोन और मिसाइल हमलों तथा क्षेत्रीय तनाव के बीच जारी यह चेतावनी सऊदी अरब जाने वाले अमेरिकी यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा संदेश के रूप में सामने आई है।

  • यूक्रेन का रूस पर अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला, मॉस्को क्षेत्र से रोस्तोव तक कई ठिकानों पर मची तबाही

    यूक्रेन का रूस पर अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला, मॉस्को क्षेत्र से रोस्तोव तक कई ठिकानों पर मची तबाही

    नई दिल्ली । रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में रविवार 16 अगस्त को हवाई हमलों का अब तक का सबसे बड़ा दौर देखने को मिला। यूक्रेन ने रूस के कई इलाकों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला किया। रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि रातभर में 822 यूक्रेनी ड्रोन नष्ट किए गए। हमलों के कारण कई क्षेत्रों में आग, नुकसान और जनहानि की खबर सामने आई है।

    मॉस्को क्षेत्र में यूक्रेनी ड्रोन हमलों का बड़ा असर दिखाई दिया। पोडोल्स्क इलाके में ऑनलाइन रिटेल कंपनी वाइल्डबेरीज के एक गोदाम को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई। हमले के बाद गोदाम में भीषण आग लग गई और आसमान में धुएं का बड़ा गुबार दिखाई दिया। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में 83 वर्षीय एक व्यक्ति की मौत हुई, जबकि कई लोग घायल हुए।

    मॉस्को क्षेत्र के अधिकारियों ने इसे युद्ध शुरू होने के बाद क्षेत्र पर हुए सबसे बड़े यूक्रेनी ड्रोन हमलों में से एक बताया। पोडोल्स्क के अलावा आसपास के इलाकों में भी ड्रोन गतिविधियों की सूचना मिली। हमले के चलते स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई और प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य चलाया गया।

    यूक्रेन ने रूस के रोस्तोव क्षेत्र में मिसाइल ईंधन बनाने वाली एक सुविधा को भी निशाना बनाने का दावा किया। इस कार्रवाई को रूसी सैन्य ढांचे को प्रभावित करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि हमले से हुए नुकसान का पूरा आकलन तत्काल सामने नहीं आया। दोनों पक्षों के दावों के बीच हमले की व्यापकता और प्रभाव को लेकर स्थिति लगातार स्पष्ट हो रही है।

    दक्षिणी रूस के बेलगोरोद क्षेत्र के पास भी ड्रोन हमले की जानकारी सामने आई। एक बस को निशाना बनाए जाने के बाद एक व्यक्ति की मौत होने की बात कही गई है। इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि युद्ध से जुड़े हवाई हमले केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रह गए हैं और नागरिक इलाकों पर भी उनका असर पड़ रहा है।

    इस बीच रूस ने भी यूक्रेन के कई हिस्सों पर रातभर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, एक स्टील प्लांट को हुए नुकसान में दो लोगों की मौत हुई और 14 लोग घायल हुए। हमले के कारण बिजली उत्पादन और ब्लास्ट फर्नेस से जुड़े हिस्सों को नुकसान पहुंचा तथा संयंत्र की कुछ उत्पादन गतिविधियां आंशिक रूप से प्रभावित हुईं।

    कीव में भी रूसी मिसाइल हमलों के कारण कई इलाकों में आग लगने की जानकारी सामने आई। शहर के कम से कम दो जिलों में नुकसान की खबर मिली। राजधानी और आसपास के क्षेत्र में कई लोग घायल हुए, जिनमें एक बच्चा भी शामिल बताया गया। हमलों के बाद आपातकालीन सेवाओं को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा गया।

    हाल के दिनों में दोनों देशों ने एक-दूसरे के सैन्य और आर्थिक ढांचे पर हमले तेज किए हैं। यूक्रेन रूसी तेल रिफाइनरियों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और सैन्य उपयोग से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बना रहा है। दूसरी ओर रूस यूक्रेन के शहरों, ऊर्जा ढांचे और बंदरगाहों पर लगातार हमले कर रहा है।

    काला सागर और डेन्यूब क्षेत्र में भी युद्ध का असर बढ़ा है। रूस ने पिछले सप्ताह रोमानियाई सीमा के पास डेन्यूब नदी पर स्थित यूक्रेन के प्रमुख अनाज निर्यात बंदरगाह को निशाना बनाया था। इस घटनाक्रम के बीच रोमानिया के ऊपर एक ड्रोन गिराए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

    रूस और यूक्रेन के बीच बढ़ते ड्रोन और मिसाइल हमले युद्ध के और लंबा खिंचने की आशंका बढ़ा रहे हैं। दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे की सैन्य क्षमता और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। 16 अगस्त की घटनाओं ने इस संघर्ष में हवाई हमलों के बढ़ते पैमाने और उससे जुड़े मानवीय नुकसान को एक बार फिर सामने ला दिया है।

  • मॉस्को और रोस्तोव को बनाया निशाना, रातभर चले यूक्रेनी ड्रोन हमलों में बुजुर्ग समेत छह लोगों की जान गई

    मॉस्को और रोस्तोव को बनाया निशाना, रातभर चले यूक्रेनी ड्रोन हमलों में बुजुर्ग समेत छह लोगों की जान गई

    नई दिल्ली ।रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में रविवार को हवाई हमलों का एक बड़ा दौर देखने को मिला। यूक्रेन की ओर से रूस के कई इलाकों में रातभर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए जाने की जानकारी सामने आई है। रूसी अधिकारियों के अनुसार, हवाई सुरक्षा बलों ने देश के अलग-अलग हिस्सों में 822 यूक्रेनी ड्रोन को नष्ट किया। इस हमले में कम से कम छह लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है।

    रूसी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, हमले के दौरान करीब 600 ड्रोन मॉस्को की दिशा में बढ़ रहे थे। राजधानी और उसके आसपास के इलाकों में हवाई सुरक्षा व्यवस्था को सक्रिय किया गया। मॉस्को क्षेत्र में एक ड्रोन या उसके मलबे के एक निजी मकान से टकराने के बाद 83 वर्षीय बुजुर्ग की मौत की जानकारी सामने आई।

    हमले का असर दक्षिण-पश्चिमी रोस्तोव क्षेत्र में भी देखा गया। क्षेत्रीय प्रशासन के अनुसार, तीन कस्बों को निशाना बनाया गया और वहां पांच लोगों की मौत हुई। हमलों से कई स्थानों पर नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में स्थिति का आकलन शुरू किया।

    मॉस्को क्षेत्र में ड्रोन हमलों के कारण कई जगह आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय किया गया। कुछ स्थानों पर आग लगने की सूचना भी सामने आई। हमलों के दौरान राजधानी की ओर बड़ी संख्या में ड्रोन आने के कारण हवाई सुरक्षा इकाइयों पर दबाव बढ़ा। यह हमला यूक्रेन की ओर से रूस के खिलाफ किए गए सबसे बड़े हवाई हमलों में से एक माना जा रहा है।

    मॉस्को क्षेत्र के एक औद्योगिक इलाके में स्थित एक बड़े गोदाम परिसर में भी आग लगने की जानकारी सामने आई। हमले के बाद आसपास के क्षेत्र में धुआं उठता दिखाई दिया। अधिकारियों ने प्रभावित स्थानों पर राहत और बचाव दल भेजे। नुकसान और हमले के पूरे प्रभाव का आकलन किया जा रहा है।

    यूक्रेन की ओर से रूस के भीतर लंबी दूरी तक ड्रोन और मिसाइलों के जरिए हमले तेज किए गए हैं। इन कार्रवाइयों का उद्देश्य रूसी सैन्य और औद्योगिक ढांचे पर दबाव बढ़ाना बताया जाता है। रूस लगातार ऐसे हमलों को रोकने के लिए अपनी हवाई सुरक्षा प्रणाली का इस्तेमाल कर रहा है।

    इस बड़े हमले से एक दिन पहले यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने रूस के भीतर गहरे क्षेत्र में किए गए हमलों की जानकारी दी थी। उनके अनुसार, रूस के समारा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र को निशाना बनाया गया था। यूक्रेन ने वहां अपने निर्मित फ्लेमिंगो मिसाइल के इस्तेमाल का दावा किया था। इसके अलावा एक रूसी एयरबेस को भी निशाना बनाए जाने की जानकारी दी गई थी।

    जेलेंस्की ने अपने बयान में कहा था कि रूस को युद्ध की वास्तविक कीमत महसूस करनी चाहिए। उनके अनुसार, यूक्रेन की लंबी दूरी की सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य रूस पर दबाव बढ़ाना है। इसके बाद रूस के कई हिस्सों में हुए बड़े ड्रोन हमले ने दोनों देशों के बीच संघर्ष की बढ़ती तीव्रता को सामने ला दिया है।

    इसी बीच रूस की ओर से यूक्रेन पर भी हमले जारी रहे। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, रविवार को कीव और दूसरे इलाकों में रूसी मिसाइल और ड्रोन हमलों से नुकसान हुआ तथा कुछ लोग घायल हुए। दोनों देशों के बीच लगातार हो रहे हमलों से नागरिक क्षेत्रों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर खतरा बढ़ रहा है।

    रूस पर हुए ताजा ड्रोन हमले ने युद्ध के उस दौर को और स्पष्ट किया है जिसमें दोनों पक्ष अपने प्रतिद्वंद्वी के क्षेत्र में दूर तक हमला करने की क्षमता बढ़ा रहे हैं। 822 ड्रोन नष्ट करने का रूसी दावा इस हमले के बड़े पैमाने को दर्शाता है, जबकि छह लोगों की मौत ने इसके मानवीय प्रभाव को भी सामने रखा है। हालांकि, युद्ध के दौरान किए गए सैन्य दावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग मामलों में सीमित रहती है।

  • 15 अगस्त से पहले दिल्ली में हाई अलर्ट, 2 से 16 अगस्त तक ड्रोन और हॉट एयर बैलून उड़ाने पर प्रतिबंध

    15 अगस्त से पहले दिल्ली में हाई अलर्ट, 2 से 16 अगस्त तक ड्रोन और हॉट एयर बैलून उड़ाने पर प्रतिबंध


    नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस 2026 के मद्देनजर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। संभावित सुरक्षा खतरों को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने 2 अगस्त से 16 अगस्त तक राजधानी में ड्रोन सहित सभी छोटे हवाई प्लेटफॉर्म के उड़ान संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है।

    पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत यह आदेश जारी किया है। इसके अनुसार प्रतिबंध अवधि के दौरान ड्रोन (UAV/UAS), क्वाडकॉप्टर, पैराग्लाइडर, पैरामोटर, हैंग ग्लाइडर, माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट, रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट (RPA), हॉट एयर बैलून, छोटे पावर्ड एयरक्राफ्ट तथा विमान से पैरा जंपिंग जैसी सभी गतिविधियों पर रोक रहेगी।

    दिल्ली पुलिस के अनुसार खुफिया एजेंसियों से मिली जानकारी में आशंका जताई गई है कि असामाजिक या आतंकवादी तत्व इन हवाई माध्यमों का इस्तेमाल कर आम नागरिकों, वीआईपी और महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। इसी संभावना को देखते हुए एहतियातन यह फैसला लिया गया है।


    पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    यह प्रतिबंध 2 अगस्त से लागू होकर 16 अगस्त 2026 तक प्रभावी रहेगा, ताकि स्वतंत्रता दिवस समारोह शांतिपूर्ण और सुरक्षित वातावरण में संपन्न कराया जा सके।

  • ट्रंप-जेलेंस्की मुलाकात के बाद रूस ने यूक्रेन पर कर दी मिसाइल और ड्रोन की बारिश

    ट्रंप-जेलेंस्की मुलाकात के बाद रूस ने यूक्रेन पर कर दी मिसाइल और ड्रोन की बारिश


    मॉस्को/कीव।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की वॉशिंगटन में हुई बैठक के कुछ ही समय बाद रूस ने यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, हमलों में देश के कई प्रमुख शहरों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इन हमलों की टाइमिंग को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।

    रिपोर्टों के अनुसार, रूस ने बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया। हमलों का असर कीव, ल्विव और नीप्रोपेत्रोव्स्क सहित कई क्षेत्रों में देखा गया। यूक्रेन ने दावा किया कि कई सैन्य और नागरिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया, जबकि रूस का कहना है कि उसके हमले केवल सैन्य लक्ष्यों पर केंद्रित थे।

    पैट्रियट एयर डिफेंस पर चर्चा के बीच हमला

    ट्रंप और जेलेंस्की की बैठक के दौरान यूक्रेन की वायु सुरक्षा क्षमता बढ़ाने और पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम की उपलब्धता पर चर्चा हुई थी। माना जा रहा है कि रूस ने ऐसे समय में हमला कर यूक्रेन की मौजूदा वायु सुरक्षा चुनौतियों का लाभ उठाने की कोशिश की। हालांकि, इस संबंध में रूस की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है।

    पोलैंड सीमा के निकट भी बढ़ी सतर्कता

    हमलों के दौरान एक रूसी मिसाइल के पोलैंड की सीमा के निकट पहुंचने की खबरों के बाद पड़ोसी देश पोलैंड ने अपनी वायु सुरक्षा व्यवस्था को अलर्ट पर रखा। पोलिश अधिकारियों ने स्थिति पर नजर रखने और सुरक्षा उपाय बढ़ाने की पुष्टि की है। हालांकि, घटना के कारणों और परिस्थितियों की जांच जारी है।

    रूस ने सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना

    रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि हमलों का उद्देश्य यूक्रेन के सैन्य एयरबेस, हथियार निर्माण इकाइयों, ड्रोन भंडारण केंद्रों और अन्य सैन्य अवसंरचना को निशाना बनाना था। मंत्रालय ने इसे यूक्रेन की ओर से हाल के दिनों में रूस के भीतर किए गए ड्रोन हमलों के जवाब में की गई कार्रवाई बताया।

    कूटनीतिक प्रयासों पर असर की आशंका

    विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप-जेलेंस्की बैठक के तुरंत बाद हुए इन हमलों से रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के कूटनीतिक प्रयासों को झटका लग सकता है। हालांकि, हमलों की टाइमिंग के पीछे रूस का क्या संदेश था, इस बारे में आधिकारिक स्तर पर कोई पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इससे जुड़े विभिन्न दावों को अभी विश्लेषकों के आकलन के रूप में ही देखा जा रहा है।

    रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।