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  • होर्मुज में बारूद, जहाजों पर खतरा, अमेरिका ने ईरान के लारक आईलैंड पर क्यों गिराए बम?

    होर्मुज में बारूद, जहाजों पर खतरा, अमेरिका ने ईरान के लारक आईलैंड पर क्यों गिराए बम?


    नई दिल्ली। होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान के लारक आईलैंड पर एयर स्ट्राइक की है। अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने भी जवाबी हमला किया और जॉर्डन व कतर में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए मिसाइलें दागने का दावा किया। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में है होर्मुज स्ट्रेट, जहां से दुनिया के तेल कारोबार का बड़ा हिस्सा गुजरता है।

    अमेरिकी सेना ने बताया है कि लारक आईलैंड पर हमला किसी बड़े सैन्य अभियान का हिस्सा नहीं था, बल्कि एक संभावित तत्काल खतरे को खत्म करने के लिए सीमित और सटीक कार्रवाई की गई।

    अमेरिका के मुताबिक क्या था खतरा?

    अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की माइन बिछाने वाली यूनिट समुद्र में माइंस तैनात करने की तैयारी कर रही थी। इसके लिए दो रॉकेट लॉन्चरों का इस्तेमाल किए जाने की आशंका थी।

    अमेरिका का दावा है कि अगर ये समुद्री माइंस होर्मुज स्ट्रेट के शिपिंग रूट में बिछा दी जातीं तो तेल टैंकरों और दूसरे व्यावसायिक जहाजों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता था। इसी वजह से अमेरिकी सेना ने इसे ‘इमिनेंट थ्रेट’ यानी तत्काल खतरा माना और दोनों लॉन्चरों को निशाना बनाया।

    लारक आईलैंड ही क्यों बना निशाना?

    लारक आईलैंड ईरान के दक्षिणी तट के पास फारस की खाड़ी में स्थित है और होर्मुज स्ट्रेट के बेहद करीब है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है।

    होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल शिपिंग रूट्स में से एक है। यहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या जहाजों की आवाजाही में रुकावट का असर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के साथ-साथ कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

    इसी रणनीतिक स्थिति के कारण अमेरिका का दावा है कि लारक आईलैंड पर मौजूद सैन्य गतिविधियों पर नजर रखना और किसी संभावित खतरे को रोकना जरूरी था।

    पहले माइंस हटाईं, फिर हमला क्यों किया?

    अमेरिकी सेना के मुताबिक, उसने हाल ही में होर्मुज स्ट्रेट के अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट से पहले बिछाई गई समुद्री माइंस को हटाने का अभियान पूरा किया था।

    इसके बाद अमेरिकी निगरानी में IRGC की गतिविधियां सामने आईं। अमेरिका का दावा है कि ईरान दो लॉन्चरों के जरिए नई समुद्री माइंस तैनात करने की तैयारी कर रहा था।

    वॉशिंगटन के मुताबिक, माइंस शिपिंग लेन में पहुंच जातीं तो तेल टैंकरों और दूसरे कमर्शियल जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती थी। इसलिए अमेरिका ने संभावित खतरे के बढ़ने का इंतजार करने के बजाय लॉन्चरों को निशाना बनाया।

    ईरान ने कैसे दिया जवाब?

    ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को आक्रामक हमला बताया है। IRGC ने दावा किया कि लारक आईलैंड पर अमेरिकी हमले में उसके कई जवान और अन्य लोग मारे गए या घायल हुए।

    इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों की मेजबानी करने वाले दो ठिकानों की ओर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। जॉर्डन ने अपने एयरस्पेस में आठ मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने का दावा किया है।

    होर्मुज में अब क्या स्थिति?

    अमेरिकी हमले और ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद होर्मुज स्ट्रेट में तनाव और बढ़ गया है। ईरान ने स्ट्रेट में एक शिप-टू-शिप ऑयल ट्रांसफर भी रुकवाया है। वहीं, अमेरिकी एयर स्ट्राइक की खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में 2 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखी गई।

    ईरान और ओमान के बीच होर्मुज को लेकर आपसी सहमति बनी हुई है, लेकिन इसके बावजूद स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही पहले ही कम हुई है।

    क्या बड़ा सैन्य टकराव हो सकता है?

    फिलहाल अमेरिका का कहना है कि लारक आईलैंड पर कार्रवाई का उद्देश्य ईरान के सैन्य ढांचे को बड़े पैमाने पर तबाह करना नहीं, बल्कि होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों के लिए पैदा हो रहे तत्काल खतरे को खत्म करना था।

    दूसरी ओर, ईरान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मान रहा है और जवाबी कार्रवाई भी कर चुका है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या लारक आईलैंड पर अमेरिकी हमला और ईरान का पलटवार दोनों देशों को एक बड़े सैन्य टकराव की ओर ले जाएगा?