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  • नशे के खिलाफ शिवपंथ के अभियान की CM ने की सराहना, बोले- सरकार और समाज मिलकर बदल सकते हैं तस्वीर

    नशे के खिलाफ शिवपंथ के अभियान की CM ने की सराहना, बोले- सरकार और समाज मिलकर बदल सकते हैं तस्वीर


    बड़वानी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़वानी जिले के ग्राम अजगरिया में आयोजित शिवपंथी नशामुक्ति कार्यक्रम में नशे के खिलाफ जनजागरण का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नशा नाश की जड़ है और अपने साथ कई तरह की बुराइयां तथा सामाजिक विकृतियां लेकर आता है। हर व्यक्ति को संकल्प लेना चाहिए कि वह स्वयं नशे से दूर रहेगा और अपने परिवार तथा समाज को भी इस बुराई से बचाने के लिए प्रयास करेगा। मुख्यमंत्री ने शिवपंथ समुदाय की ओर से नशामुक्ति के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि सामूहिक भागीदारी से इस अभियान को जनआंदोलन बनाया जा सकता है।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने शिवपंथ के संस्थापक परम पूज्य गुरुवर्य श्री वनसिंह महाराज को नमन किया। उन्होंने श्री कालूसिंह महाराज और सुमली माताजी के प्रयासों की भी प्रशंसा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि मनुष्य जीवन अनमोल है और इसे नशे की प्रवृत्ति में बर्बाद करने के बजाय ऐसे कार्यों में लगाना चाहिए जिनसे जीवन सार्थक बने। आध्यात्मिकता और सत्संग के माध्यम से लोगों को सकारात्मक दिशा देने का शिवपंथ का प्रयास समाज के लिए प्रेरणादायी है।

    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नशामुक्त समाज बनाने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। इसमें परिवारों सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नशामुक्त भारत के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2029 तक नशे की बुराई को दूर करने के लक्ष्य की दिशा में सभी को मिलकर काम करना होगा। मुख्यमंत्री ने शरद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की धार्मिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आस्था और जनजागरण को जोड़कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

    मुख्यमंत्री ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार इस वर्ष किसान कल्याण वर्ष मना रही है। किसान और ग्रामीण परिवार गौपालन तथा दुग्ध उत्पादन के माध्यम से अपनी आय बढ़ा सकते हैं। सरकार गौशालाओं के संचालन और दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए सहायता देगी। दूध समितियों के माध्यम से दूध बेचने पर ग्रामीणों को आमदनी का अवसर मिलेगा। उन्होंने लोगों से दूध और पौष्टिक आहार अपनाने तथा नशे से दूर रहने की अपील की।

    बड़वानी प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के विकास के लिए कई घोषणाएं भी कीं। इनमें ग्राम में खुपजदेव धाम का निर्माण और वहां तक सड़क बनाने की घोषणा शामिल है। ग्राम अजगरिया में बालक और बालिकाओं के लिए 100-100 सीटर छात्रावास बनाए जाने की बात कही गई। ग्राम पांजरिया ध में 50 लाख रुपये की लागत से सर्वसुविधायुक्त शेड बनाने तथा ग्राम धवली में पुलिस चौकी स्थापित करने की घोषणा भी की गई।

    मुख्यमंत्री ने स्थानीय भाषा और जनजातीय समुदाय से जुड़े विषयों पर भी ध्यान देने की बात कही। बारेली भाषा के संरक्षण और विकास के लिए दस्तावेजों के संरक्षण तथा शोध पर काम किया जाएगा। आदिवासी क्षेत्र में सिकल सेल बीमारी की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं जांच परामर्श और उपचार की व्यवस्था को मजबूत करने की घोषणा की गई। इसके साथ ही वन औषधियों के संरक्षण और शोध को बढ़ावा देने के लिए बड़वानी में वन औषधि शोध संस्थान स्थापित करने की बात कही गई।

    वन अधिकार के तहत जिन जनजातीय परिवारों को अभी पट्टे नहीं मिले हैं उन्हें पट्टे देने और जिन परिवारों को पट्टे मिल चुके हैं उनकी रजिस्ट्री कराने की घोषणा भी की गई। इन घोषणाओं का उद्देश्य क्षेत्र में शिक्षा स्वास्थ्य आजीविका और आदिवासी अधिकारों से जुड़े प्रयासों को गति देना है।

    शिवपंथी सत्संग संगठन लंबे समय से ग्रामीण क्षेत्रों में नशामुक्ति के लिए जागरूकता अभियान चला रहा है। संगठन की मान्यता है कि आध्यात्मिकता सत्संग और अनुशासित जीवनशैली के माध्यम से व्यक्ति को नशे से दूर रहने की प्रेरणा मिल सकती है। शरद पूर्णिमा पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं पुरुष बुजुर्ग और बच्चे शामिल हुए। धार्मिक भजनों के साथ दूध प्रसादी और चावल की खिचड़ी का वितरण किया गया। कार्यक्रम में नशामुक्त समाज बनाने और क्षेत्र के विकास के लिए सामूहिक प्रयासों का संदेश दिया गया।

  • आदिवासी अंचल में शिवपंथ के प्रयासों की CM ने की सराहना, सनातन संस्कृति और अच्छे संस्कारों पर दिया जोर

    आदिवासी अंचल में शिवपंथ के प्रयासों की CM ने की सराहना, सनातन संस्कृति और अच्छे संस्कारों पर दिया जोर


    बड़वानी । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़वानी के आदिवासी अंचल में शिवपंथ समुदाय और गायत्री परिवार की ओर से किए जा रहे सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यों की सराहना की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार सनातन संस्कृति के मूल्य और अनुशासन सिखाना बेहद जरूरी है। इससे आने वाली पीढ़ी संस्कारवान चरित्रवान और जिम्मेदार नागरिक बन सकेगी। उन्होंने शिवपंथ समुदाय की ओर से नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को भी समाज सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 26 अक्टूबर को अपने बड़वानी प्रवास के दौरान मीडिया से चर्चा में कहा कि शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर आदिवासी अंचल में रात्रि विश्राम करने का अवसर मिला। इस दौरान उन्हें क्षेत्र में समाज को सकारात्मक दिशा देने वाले कई प्रयासों को करीब से देखने और समझने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि शिवपंथ समुदाय के महाराज बंशी और उनके अनुयायी भगवान की भक्ति तथा महादेव की आराधना के साथ नशे के विरुद्ध जनजागरण अभियान चला रहे हैं। आदिवासी समाज में नशे की समस्या को दूर करने के लिए इस तरह के प्रयास सराहनीय हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में स्थायी बदलाव लाने के लिए सरकार और सामाजिक संगठनों को मिलकर काम करना चाहिए। जब लोगों की भागीदारी से नशामुक्ति और सामाजिक जागरूकता जैसे अभियान चलाए जाते हैं तो उनका प्रभाव व्यापक हो सकता है। उन्होंने कहा कि शिवपंथ समुदाय की ओर से धार्मिक आस्था को सामाजिक सुधार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे अभियान लोगों को बेहतर जीवनशैली अपनाने और परिवार तथा समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

    डॉ. मोहन यादव ने गायत्री परिवार की गतिविधियों की भी प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि बीती रात गायत्री परिवार के आश्रम में रुकने का अवसर मिला। यहां बच्चों और युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए संस्कार आधारित कार्यक्रमों और रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। आश्रम में सुबह योगाभ्यास सहित विभिन्न गतिविधियों में शामिल होकर उन्हें सुखद अनुभूति हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों के व्यक्तित्व विकास में शिक्षा के साथ अनुशासन और नैतिक मूल्यों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

    उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को केवल किताबी ज्ञान देना पर्याप्त नहीं है। बच्चों को अपने परिवार समाज और देश के प्रति जिम्मेदारी का एहसास कराना भी जरूरी है। सनातन संस्कृति की परंपराओं और जीवन मूल्यों से परिचित कराकर उनमें अच्छे व्यवहार सेवा भावना और चरित्र निर्माण की नींव मजबूत की जा सकती है। मुख्यमंत्री के अनुसार इस तरह के प्रयास युवाओं को सही दिशा देने के साथ समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में भी सहायक होते हैं।

    मुख्यमंत्री ने बड़वानी को निमाड़ का पेरिस बताते हुए कहा कि इस प्रवास के दौरान समाज निर्माण और सांस्कृतिक चेतना से जुड़े कई प्रेरणादायी कार्य देखने को मिले। उन्होंने कहा कि शरद पूर्णिमा से दीपावली तक का समय सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखता है। ऐसे पर्व समाज में सद्भाव सेवा और परस्पर सहयोग की भावना को मजबूत करने का संदेश देते हैं।

    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार जनकल्याण सामाजिक उत्थान और लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार और समाज के साझा प्रयासों से संस्कारवान पीढ़ी तैयार करने नशे से दूर रहने और सामाजिक जिम्मेदारी बढ़ाने जैसे उद्देश्यों को मजबूती मिलेगी।

  • नशे के नेटवर्क पर सख्ती की तैयारी, रीवा संभाग में करोड़ों की ड्रग्स और 312 वाहन जब्त, युवाओं को बचाने पर फोकस

    नशे के नेटवर्क पर सख्ती की तैयारी, रीवा संभाग में करोड़ों की ड्रग्स और 312 वाहन जब्त, युवाओं को बचाने पर फोकस


    रीवा । मध्य प्रदेश के रीवा संभाग में नशे के अवैध कारोबार पर लगाम लगाने के लिए पुलिस और प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। पिछले 18 महीनों के दौरान नशे के कारोबार में शामिल 1615 आरोपियों को जेल भेजा गया है। इस अवधि में गांजा और कोरेक्स से लेकर हेरोइन स्मैक ब्राउन शुगर और एमडी ड्रग्स जैसे नशीले पदार्थ जब्त किए गए हैं। इनकी कुल कीमत 13 करोड़ 17 लाख 39 हजार 600 रुपये बताई गई है। वहीं नशे के अवैध कारोबार में इस्तेमाल होने वाले दोपहिया और चारपहिया वाहनों को भी जब्त किया गया है। अब प्रशासन का जोर नशे के कारोबार को रोकने के साथ इसकी लत से पीड़ित लोगों के उपचार और पुनर्वास पर भी रहेगा।

    उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने रीवा के सर्किट हाउस में आयोजित बैठक में नशामुक्त भारत अभियान की समीक्षा की। उन्होंने पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को नशे के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कार्रवाई केवल छोटे स्तर पर काम करने वाले लोगों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि नशीले पदार्थों के उत्पादन और सप्लाई से जुड़े नेटवर्क तक पहुंचना जरूरी है। इसके लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय बनाकर अभियान चलाने पर जोर दिया गया।

    बैठक में रीवा जोन के पुलिस महानिरीक्षक गौरव राजपूत ने पिछले 18 महीनों की कार्रवाई का ब्योरा प्रस्तुत किया। उनके मुताबिक इस दौरान 5535 किलो 931 ग्राम गांजा और 97 हजार 665 शीशी कोरेक्स जब्त की गई। इसके अलावा 4 लाख 13 हजार 310 नशीली टैबलेट और कैप्सूल बरामद किए गए। पुलिस ने अफीम के 450 हरे पौधों के साथ 123.6 ग्राम हेरोइन 206.54 ग्राम स्मैक 244 ग्राम ब्राउन शुगर और 3 किलो 87 ग्राम एमडी ड्रग्स भी जब्त की है। जब्त नशीले पदार्थों की कुल कीमत 13 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।

    नशे के अवैध कारोबार में इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों पर भी कार्रवाई की गई। पुलिस ने 181 दोपहिया और 131 चारपहिया वाहन जब्त किए हैं। इन वाहनों की कुल कीमत 10 करोड़ 41 लाख 70 हजार रुपये बताई गई है। अधिकारियों का मानना है कि नशीले पदार्थों की सप्लाई में इस्तेमाल होने वाले संसाधनों पर कार्रवाई करना भी इस नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    रीवा संभाग में अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ भी अभियान चलाया गया। पिछले 18 महीनों में इस संबंध में 11 हजार 998 मामले दर्ज किए गए और 12 हजार 199 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के दौरान 35 हजार 890 लीटर अवैध देशी शराब और 22 हजार 807 लीटर विदेशी शराब जब्त की गई। जब्त शराब की कीमत 3 करोड़ 97 लाख 53 हजार 333 रुपये बताई गई है। उप मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश के अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर नशे के कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई जारी रखने के निर्देश भी दिए।

    राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि विंध्य क्षेत्र में कृषि उद्योग व्यापार और बुनियादी सुविधाओं के विकास से लोगों की आमदनी बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में युवाओं का नशे की गिरफ्त में आना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने नशामुक्ति केंद्रों को सक्रिय करने और पीड़ितों को उपचार के साथ पुनर्वास की सुविधा देने पर जोर दिया। कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने बताया कि इसी सप्ताह नशे की लत से पीड़ित 50 लोगों की पहचान कर उन्हें पुनर्वास के लिए नशामुक्ति केंद्रों में भर्ती कराने की योजना है। कोरेक्स की लत से जूझ रहे लोगों की मदद के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं का सहयोग भी लिया जाएगा।

    बैठक में जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। प्रशासन की कोशिश है कि नशे के कारोबार के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ लोगों को नशे से बाहर निकालने के लिए उपचार और जागरूकता पर भी काम किया जाए।