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  • पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों के परिवारों से मिले अमित शाह, न्याय का भरोसा और 2029 तक नशा खत्म करने का लक्ष्य

    पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों के परिवारों से मिले अमित शाह, न्याय का भरोसा और 2029 तक नशा खत्म करने का लक्ष्य

    नई दिल्ली । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को पंजाब के एक दिवसीय दौरे के दौरान नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने गुरदासपुर, संगरूर और मानसा में मृतकों के परिवारों की बातें सुनीं और उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया। इस दौरान नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई और प्रभावित परिवारों की मांगें प्रमुख मुद्दे रहे। शाह ने दिसंबर 2029 तक नशे के कारोबार को खत्म करने का लक्ष्य भी दोहराया।

    दशहरे के अवसर पर शाह सबसे पहले बटाला पहुंचे और वहां से गुरदासपुर जिले के मारी पनवां गांव गए। यहां उन्होंने 15 अक्टूबर को मारे गए बिक्रमजीत सिंह के परिवार से मुलाकात की। ग्रामीणों का आरोप है कि बिक्रमजीत ने अपने क्षेत्र में नशीले पदार्थों की तस्करी का विरोध किया था, जिसके कारण उन्हें निशाना बनाया गया। हालांकि, पुलिस के अनुसार, उनकी हत्या मोबाइल फोन को लेकर दो गुटों के बीच हुए विवाद का परिणाम थी। दोनों पक्षों के बीच बताए गए घटनाक्रम को लेकर जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

    बिक्रमजीत के परिजनों ने गृह मंत्री के सामने मामले में न्याय की मांग रखी। परिवार के एक सदस्य के मुताबिक, शाह ने उनका ज्ञापन पढ़ा और उनकी बातें ध्यानपूर्वक सुनीं। बिक्रमजीत के चाचा गुरनाम सिंह ने भी कहा कि गृह मंत्री ने परिवार को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है। इस मुलाकात के दौरान पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों भी मौजूद रहे। शाह के दौरे को देखते हुए गुरदासपुर, संगरूर और मानसा में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

    इसके बाद गृह मंत्री संगरूर पहुंचे, जहां उन्होंने तुरबंजारा गांव के गुलजार सिंह के परिवार से मुलाकात की। दलित समुदाय से संबंध रखने वाले गुलजार की सात सितंबर को मृत्यु हो गई थी। परिवार का आरोप है कि उन्होंने अपने क्षेत्र में नशीले पदार्थों की आपूर्ति को लेकर पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से सवाल किया था। इसके बाद उन्हें कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया और जातिसूचक टिप्पणियां की गईं। परिजनों के अनुसार, इन परिस्थितियों से परेशान होकर गुलजार ने जहरीला पदार्थ खा लिया था। परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच और तथ्यों की पुष्टि इस मामले में महत्वपूर्ण है।

    संगरूर के बाद शाह मानसा पहुंचे, जहां उन्होंने नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा के परिजनों से मुलाकात की। झोटा की 13 अक्टूबर को मानसा के एक व्यस्त बाजार में स्थित मेडिकल स्टोर के भीतर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के समय वह फेसबुक लाइव कर रहे थे। आरोप है कि मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार ने एक बुजुर्ग को नशीली दवाएं बेचने पर सवाल उठाए जाने के बाद झोटा को गोली मारी। पुलिस ने आरोपी को राजस्थान के सालासर से हिरासत में लिया था।

    झोटा के पिता भीम सिंह ने पहले ही बेटे की हत्या की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग उठाने की बात कही थी। शाह के पंजाब पहुंचने से कुछ घंटे पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान ने घोषणा की कि राज्य सरकार ने इस हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला किया है। इससे मामले की जांच को लेकर नया घटनाक्रम सामने आया है।

    पंजाब में नशे की समस्या और उससे जुड़े मामलों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हैं। राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। अमित शाह का यह 20 दिनों के भीतर दूसरा पंजाब दौरा है। इससे पहले 30 सितंबर को उन्होंने जालंधर में भाजपा की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के समापन पर रैली को संबोधित किया था। अब मृतकों के परिवारों से मुलाकात और नशे के कारोबार को खत्म करने के लक्ष्य ने इस मुद्दे को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

  • इंदौर में नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई, एमडी ड्रग्स और ब्राउन शुगर के साथ दो आरोपी गिरफ्तार

    इंदौर में नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई, एमडी ड्रग्स और ब्राउन शुगर के साथ दो आरोपी गिरफ्तार

    मध्य प्रदेश: के इंदौर में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस ने दो अलग-अलग कार्रवाइयां करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन कार्रवाइयों में पुलिस ने कुल 11 ग्राम एमडी ड्रग्स और 8.8 ग्राम ब्राउन शुगर बरामद की है। दोनों आरोपियों के खिलाफ स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस एक्ट) के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस अब नशीले पदार्थों की खरीद-फरोख्त और उनकी आपूर्ति से जुड़े नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है।

    पहली कार्रवाई इंदौर क्राइम ब्रांच ने की। पुलिस ने एमआर-10 ब्रिज के नीचे मेट्रो के पिलर नंबर 409 के पास से अनस खान को पकड़ा। वह खरगोन जिले का निवासी बताया गया है। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से 11 ग्राम एमडी ड्रग्स बरामद हुई। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया।

    पुलिस अब अनस खान से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बरामद नशीला पदार्थ कहां से लाया गया था। इसके अलावा, यह भी जांच की जा रही है कि वह इसे किसी अन्य व्यक्ति तक पहुंचाने वाला था या इसके पीछे कोई संगठित आपूर्ति नेटवर्क सक्रिय है। मामले में नशीले पदार्थों की खरीद और बिक्री से जुड़े संभावित संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है।

    दूसरी कार्रवाई राजेंद्र नगर थाना पुलिस ने की। पुलिस ने पानी की टंकी के पास से 23 वर्षीय आयुष ठाकुर को गिरफ्तार किया। तलाशी के दौरान उसके पास से 8.8 ग्राम ब्राउन शुगर बरामद की गई। पुलिस ने इस मामले में भी एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया है। दोनों कार्रवाइयां अलग-अलग स्थानों पर की गईं और दोनों आरोपियों के कब्जे से अलग-अलग प्रकार के नशीले पदार्थ मिलने की जानकारी सामने आई है।

    पुलिस के अनुसार, आयुष ठाकुर के खिलाफ पहले भी जुआ, लूट और मादक पदार्थों से संबंधित मामले दर्ज होने की जानकारी है। हालांकि, उसके पुराने मामलों की वर्तमान स्थिति और उनसे जुड़े विस्तृत तथ्यों की पुष्टि जांच के दौरान की जानी है। फिलहाल, ताजा मामले में बरामद ब्राउन शुगर के स्रोत और उससे जुड़े संभावित संपर्कों की पड़ताल की जा रही है।

    दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस का ध्यान नशीले पदार्थों की आपूर्ति के स्रोत तक पहुंचने पर है। जांच के तहत यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आरोपियों को मादक पदार्थ किसने उपलब्ध कराए और वे किन लोगों के संपर्क में थे। इसके साथ ही शहर में नशीले पदार्थों की खरीद-फरोख्त के संभावित तरीकों और आपूर्ति से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।

    इंदौर में की गई इन कार्रवाइयों के बाद पुलिस दोनों मामलों में साक्ष्य और अन्य जरूरी जानकारी जुटा रही है। बरामद पदार्थों की मात्रा, आरोपियों के संपर्कों और संभावित आपूर्ति नेटवर्क से जुड़े पहलुओं की पड़ताल आगे की जांच का हिस्सा है। फिलहाल, अनस खान और आयुष ठाकुर के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामले दर्ज हैं और पुलिस की जांच जारी है।

  • पंजाब में नशे और गैंगस्टरवाद पर अमित शाह के आरोपों से भड़के केजरीवाल, तीन कृषि कानूनों का मुद्दा उठाया

    पंजाब में नशे और गैंगस्टरवाद पर अमित शाह के आरोपों से भड़के केजरीवाल, तीन कृषि कानूनों का मुद्दा उठाया


    नई दिल्ली ।पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच राजनीतिक टकराव तेज होता दिखाई दे रहा है। राज्य में नशे के कारोबार, गैंगस्टर नेटवर्क और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भगवंत मान सरकार पर सवाल उठाए। इसके जवाब में आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पलटवार करते हुए भाजपा पर ही पंजाब में नशा फैलाने और राज्य के हितों को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए।

    केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया में अडानी पोर्ट के रास्ते पंजाब में नशा फैलने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि देश में नशे की समस्या उन राज्यों में भी गंभीर है, जहां लंबे समय से भाजपा की सरकारें हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि दूसरे राज्यों में नशे के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने के बजाय पंजाब को लेकर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं।

    केजरीवाल ने अपने बयान में पंजाब में नशे के प्रसार और गैंगस्टर नेटवर्क को लेकर भाजपा को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2007 से 2017 के बीच भी राज्य में नशे की समस्या को बढ़ावा मिला था। उन्होंने उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए भाजपा पर पुराने राजनीतिक सहयोगियों के साथ मिलकर पंजाब में नशे का कारोबार बढ़ाने का आरोप लगाया। ये आरोप केजरीवाल की ओर से लगाए गए हैं।

    अपने पलटवार में केजरीवाल ने पंजाब के पानी, पंजाब विश्वविद्यालय और चंडीगढ़ का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की नजर राज्य के इन महत्वपूर्ण विषयों पर है। इसी क्रम में उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2020 में लाए गए तीन कृषि कानूनों का जिक्र करते हुए आशंका जताई कि भाजपा दोबारा सत्ता में आने पर ऐसे कानूनों को फिर से ला सकती है। केजरीवाल ने कहा कि पंजाब ऐसा नहीं होने देगा। उनका यह बयान आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कृषि कानूनों और राज्य के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाता है।

    दरअसल, अमित शाह ने पंजाब की कानून-व्यवस्था को लेकर भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि राज्य नशे, गैंगस्टरवाद और संगठित अपराध के बढ़ते खतरे का सामना कर रहा है। शाह ने सवाल किया कि मौजूदा परिस्थितियों में पंजाब की जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन निभा रहा है। उन्होंने राज्य सरकार से नशे के कारोबार और अपराध पर नियंत्रण के लिए उठाए जा रहे कदमों को लेकर भी सवाल किए।

    शाह ने अपने बयान में मानसा में नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या का मामला उठाया। इसके साथ ही उन्होंने दिरबा में एक पिता की मौत से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया। शाह के अनुसार, परविंदर सिंह झोटा के पिता ने आम आदमी पार्टी की सरकार और उसके एक विधायक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय इन दोनों घटनाओं को लेकर पंजाब सरकार से जवाब मांगेगा।

    शाह ने यह भी कहा कि केजरीवाल और भगवंत मान ने विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब को नशामुक्त बनाने का वादा किया था, लेकिन मौजूदा हालात को लेकर सवाल बने हुए हैं। उन्होंने राज्य में भाजपा की सरकार बनने पर पंजाब को नशामुक्त, गैंगस्टरमुक्त और सुरक्षित बनाने का संकल्प दोहराया। शाह ने नशे के कारोबार पर कार्रवाई, युवाओं के भविष्य की रक्षा और अपराधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की बात कही।

    दोनों नेताओं के बयानों से स्पष्ट है कि पंजाब में नशे का कारोबार, संगठित अपराध और कानून-व्यवस्था आगामी विधानसभा चुनाव से पहले प्रमुख राजनीतिक मुद्दे बने हुए हैं। जहां भाजपा राज्य सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठा रही है, वहीं केजरीवाल ने पलटवार करते हुए भाजपा के शासन और उसके पुराने राजनीतिक फैसलों को बहस के केंद्र में ला दिया है।

  • हरभजन सिंह ने आम आदमी पार्टी छोड़ने की मुख्य वजह बताई और पंजाब में ड्रग्स की समस्या पर सवाल उठाए।

    हरभजन सिंह ने आम आदमी पार्टी छोड़ने की मुख्य वजह बताई और पंजाब में ड्रग्स की समस्या पर सवाल उठाए।


    नई दिल्ली । 
    पूर्व क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने हाल ही में आम आदमी पार्टी छोड़ने और भारतीय जनता पार्टी का दामन थामने के फैसले को लेकर अपनी बात रखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुरानी पार्टी में खेल और जनहित से जुड़े सुझावों की लगातार उपेक्षा की जा रही थी। इसके साथ ही उन्होंने पंजाब में पैर पसार रहे नशीले पदार्थों के नेटवर्क और ड्रग्स की गंभीर होती समस्या पर राज्य की भगवंत मान सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं।

    हरभजन सिंह ने एक विशेष बातचीत के दौरान बताया कि जब उन्हें पंजाब के मुख्यमंत्री की ओर से पार्टी में शामिल होने का प्रस्ताव मिला था, तब उनका मुख्य उद्देश्य राज्यसभा में खेलों और खिलाड़ियों के मुद्दों को मजबूती से उठाना था। उन्होंने शुरुआत में ही यह स्पष्ट कर दिया था कि वे सक्रिय राजनीति के बजाय केवल खेल विकास पर ध्यान केंद्रित करेंगे। इस अवसर के जरिए वे पंजाब समेत पूरे देश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देना चाहते थे।

    हालांकि, समय बीतने के साथ पार्टी के भीतर उनके सुझावों को दरकिनार किया जाने लगा। भविष्य की योजनाओं और सुधारों को लेकर जब भी उन्होंने अपनी बात रखनी चाही, तो उनकी आवाज़ को अनसुना कर दिया गया। लगातार किनारे किए जाने से वे मानसिक रूप से काफी परेशान महसूस कर रहे थे। जिस सोच और विज़न के साथ वे पार्टी में शामिल हुए थे, वह कार्य पूरा नहीं हो पा रहा था, जिसके चलते उन्होंने अंततः पार्टी से अलग होने का निर्णय लिया।

    पंजाब में गहराते नशीले पदार्थों के संकट पर चिंता जताते हुए राज्यसभा सांसद ने कहा कि इसके दुष्परिणाम बेहद भयावह रूप ले रहे हैं। यह समस्या केवल किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के जिस भी हिस्से में ड्रग्स पहुंचती है, वहां युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो जाता है। सीमावर्ती राज्य होने के कारण पंजाब में स्थिति और भी अधिक संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

    उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बात की गहन जांच होनी चाहिए कि नशीले पदार्थों की आपूर्ति राज्य में किस रास्ते से हो रही है। इस समस्या पर पूरी तरह से अंकुश लगाने के लिए सख्त से सख्त कानून बनाए जाने और उन्हें कड़ाई से लागू करने की तत्काल आवश्यकता है। सरकार को इस दिशा में जवाबदेही तय करते हुए कड़े कदम उठाने होंगे ताकि युवा पीढ़ी को इस दलदल से बचाया जा सके।

    आप से अलग होने के बाद उनके आवास के बाहर हुए विरोध प्रदर्शनों और पुतला दहन की घटनाओं पर भी उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन करने वाले लोगों की पहचान किसी से छिपी नहीं है, इसलिए वे किसी का व्यक्तिगत नाम नहीं लेना चाहते। देश की जनता ने उन्हें एक क्रिकेटर के रूप में अपार प्रेम और सम्मान दिया है, जो उनके लिए सर्वोपरि है।

    देश के अन्य राज्यों की तरह मध्य प्रदेश में भी खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और युवाओं को नशे के कुचक्र से दूर रखने के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि हरभजन सिंह द्वारा उठाए गए मुद्दे केवल एक राज्य तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पूरे देश के खेल जगत और युवा नीति से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय है।

    हरभजन सिंह का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़कर वे खेलों के विकास और युवाओं के कल्याण के लिए अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेंगे। आने वाले समय में वे खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और नशा विरोधी अभियानों को राष्ट्रव्यापी स्तर पर गति देने के लिए प्रयासरत रहेंगे, ताकि देश का युवा सही दिशा में आगे बढ़ सके।

  • पौधों की नर्सरी में बन रहा था नशे का कारोबार: नारकोटिक्स विभाग ने मारा छापा, 10 करोड़ की MD ड्रग्स बरामद

    पौधों की नर्सरी में बन रहा था नशे का कारोबार: नारकोटिक्स विभाग ने मारा छापा, 10 करोड़ की MD ड्रग्स बरामद


    इंदौर । मध्य प्रदेश में नशे के कारोबार पर नकेल कसने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है, लेकिन अपराधी इसके बावजूद लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। शनिवार को आगर मालवा में नारकोटिक्स विभाग ने एक बड़ी सफलता प्राप्त की, जब उन्होंने नर्सरी की आड़ में चल रहे नशे के नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। इस छापे में 10 करोड़ रुपए से अधिक कीमत की मेफेड्रोन ड्रग्स बरामद की गई।यह कार्रवाई उज्जैन नारकोटिक्स टीम को मिली सूचना पर आधारित थी, जिसमें बताया गया था कि आगर मालवा के आमला क्षेत्र स्थित ‘तीर्थ’ हर्बल फार्म हाउस में नर्सरी के नाम पर नशे का कारोबार चल रहा है। टीम को यह भी जानकारी मिली थी कि वहां पर ड्रग्स की बड़ी खेप आने वाली थी, जिसके बाद टीम ने तड़के चार बजे फार्म हाउस पर छापा मारा।

    नारकोटिक्स विभाग की टीम ने फार्म हाउस में जब जांच की, तो वहां कुछ असामान्य गतिविधियाँ पाई गईं। टीम को वहां नर्सरी के बीच एक पूरी लैब मिली, जहां मेफेड्रोन और अन्य नशीली दवाओं का निर्माण हो रहा था। इस लैब को तुरंत ध्वस्त कर दिया गया और वहां काम कर रहे कुछ संदिग्ध व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया गया।छापे के दौरान टीम ने कुल 31 किलो 250 ग्राम मेफेड्रोन ड्रग्स बरामद की। इसके अलावा, 600 किलो विभिन्न प्रकार के केमिकल्स, जैसे MDC, MMA, ट्राई थेला माईन, सोडियम कार्बोनेट और लैब की अन्य सामग्री भी बरामद की गई। इस सबका बाजार मूल्य लगभग 10 करोड़ रुपए बताया जा रहा है। विभाग का मानना है कि अगर ये ड्रग्स बाजार में पहुंच जाते, तो इसकी कीमत कहीं अधिक हो सकती थी।

    नारकोटिक्स विभाग के अधीक्षक वी एस कुमार ने बताया कि यह कार्रवाई नशे के कारोबार को रोकने के लिए एक बड़ी सफलता है और इससे जुड़े अपराधियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और उनके तारों को खंगालने में जुटा है। नशे के कारोबार में इस्तेमाल होने वाली इस तरह की साजिशें न केवल समाज के लिए खतरनाक हैं, बल्कि इससे युवा पीढ़ी का भविष्य भी दांव पर लगता है। हालांकि, इस कार्रवाई ने नशे के खिलाफ चल रहे अभियानों को एक नई दिशा दी है, और उम्मीद जताई जा रही है कि इससे नशे के व्यापारियों में खलबली मच सकती है।

  • यासीन मछली की जमानत याचिका खारिज, कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को आधार बनाया

    यासीन मछली की जमानत याचिका खारिज, कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को आधार बनाया


    भोपाल । मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यासीन अहमद उर्फ मछली की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने यासीन के खिलाफ दर्ज आरोपों की गंभीरता और उसके आपराधिक इतिहास को देखते हुए यह फैसला लिया। यासीन मछली, जो एक पत्रकार के नाम पर जारी फर्जी विधानसभा पार्किंग पास का इस्तेमाल कर रहा था, को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। हाईकोर्ट ने यासीन की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए इसे ठुकरा दिया, यह कहते हुए कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।

    यह घटना भोपाल में उस समय सामने आई थी जब यासीन मछली विधानसभा पार्किंग में एक फर्जी पास लगाकर अपनी कार पार्क कर रहा था। यह पास एक पत्रकार के नाम पर जारी हुआ था, जिसे दिसंबर 2024 के विधानसभा सत्र के लिए जारी किया गया था। पत्रकार ने इस मामले की शिकायत भोपाल अरेरा हिल्स पुलिस से की थी, जिसके बाद यासीन को गिरफ्तार कर लिया गया था।

    यासीन मछली के खिलाफ कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस ने यासीन और उसके चाचा शाहवर को ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया था। इसके अलावा, आरोपी के मोबाइल से अश्लील वीडियो भी बरामद हुए थे, जो जांच में एक और बड़ा मामला सामने लाए। यासीन और उसके साथियों के खिलाफ एक और गंभीर आरोप यह है कि वह स्कूल और कॉलेज की लड़कियों को पार्टियों के बहाने ड्रग्स की लत लगवाते थे, फिर उनका यौन शोषण करते और उन्हें ब्लैकमेल कर वीडियो बनाते थे। इसके अलावा, धर्मांतरण का दबाव भी इन अपराधों से जुड़ा हुआ था, जो पुलिस की जांच में उभरकर आया है।

    इस मामले के बाद से यासीन मछली की आपराधिक गतिविधियों की गहराई से जांच की जा रही है, और पुलिस उसे सख्त सजा दिलाने के लिए अपनी कोशिशें तेज कर चुकी है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का यह फैसला अपराधियों के खिलाफ सख्त संदेश देता है, कि कोर्ट गंभीर अपराधों में लिप्त आरोपियों को किसी भी प्रकार की राहत नहीं देगी। इस फैसले से यह भी स्पष्ट हो गया है कि अपराधी चाहे कितनी भी ताकतवर स्थिति में क्यों न हो, कानून के सामने सभी समान होते हैं।