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  • क्रिकेट में नाम अब पुलिस सेवा में सम्मान बिहार के आकाशदीप और मुकेश कुमार को मिला डीएसपी का पद

    क्रिकेट में नाम अब पुलिस सेवा में सम्मान बिहार के आकाशदीप और मुकेश कुमार को मिला डीएसपी का पद


    नई दिल्ली। बिहार के खेल जगत के लिए एक ऐतिहासिक दिन तब बना जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर आकाशदीप और मुकेश कुमार को राज्य सरकार ने पुलिस विभाग में उप पुलिस अधीक्षक यानी डीएसपी पद पर नियुक्त किया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ऊर्जा ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह के दौरान दोनों खिलाड़ियों सहित कुल 21 खिलाड़ियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। यह नियुक्तियां मेडल लाओ नौकरी पाओ योजना के तहत दी गईं जिसका उद्देश्य उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सम्मानजनक सरकारी सेवा प्रदान कर खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना है।

    समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का यह कदम खिलाड़ियों के सम्मान और उनके उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि पहली बार बिहार में किसी खिलाड़ी को डीएसपी जैसे उच्च पद पर नियुक्त किया गया है और इससे युवा खिलाड़ियों को खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की नई प्रेरणा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में बिहार के खिलाड़ी ओलंपिक एशियन गेम्स कॉमनवेल्थ गेम्स विश्व कप और आईपीएल जैसे बड़े मंचों पर देश और राज्य का गौरव बढ़ाएंगे।

    मुख्यमंत्री ने खेलों के विकास को लेकर सरकार की योजनाओं की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आगामी 15 सितंबर से पंचायत स्तर पर खेल प्रतिभाओं की पहचान अभियान शुरू किया जाएगा। चयनित खिलाड़ियों को आधुनिक प्रशिक्षण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि नालंदा में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की स्थापना और राज्य में खेल अधोसंरचना के विस्तार पर लगातार काम किया जा रहा है।

    सरकार ने यह भी घोषणा की कि पटना के मोइनुल हक स्टेडियम का पुनर्विकास कराया जा रहा है और इसके संचालन की जिम्मेदारी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को सौंपी गई है। साथ ही पूरे बिहार में पिछले दो वर्षों के दौरान पांच हजार खेल मैदानों का निर्माण पूरा किया जा चुका है ताकि गांव स्तर तक खेल सुविधाएं पहुंचाई जा सकें।

    नियुक्ति पत्र प्राप्त करने के बाद तेज गेंदबाज आकाशदीप ने इसे अपने जीवन का गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि वह रोहतास जिले के एक छोटे से गांव से आते हैं और शुरुआती दिनों में सीमित संसाधनों के बीच क्रिकेट खेलते थे। उस समय खेल को करियर के रूप में ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता था लेकिन अब सरकार की ऐसी योजनाओं से खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ेगा। उन्होंने सासाराम में आधुनिक मल्टी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स विकसित करने की इच्छा भी जताई ताकि स्थानीय प्रतिभाओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

    भारतीय टीम के तेज गेंदबाज मुकेश कुमार ने भी बिहार सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला खिलाड़ियों के लिए बेहद प्रेरणादायक है। उनके अनुसार बिहार में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है बल्कि जरूरत केवल उचित अवसर और बेहतर प्रशिक्षण की है। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार की नई नीति आने वाले वर्षों में राज्य से बड़ी संख्या में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    बिहार सरकार की यह पहल केवल सरकारी नियुक्ति तक सीमित नहीं है बल्कि यह संदेश भी देती है कि खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मान और सुरक्षित भविष्य दोनों मिल सकते हैं। इससे राज्य के हजारों युवा खेलों को करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित होंगे और बिहार खेलों के क्षेत्र में नई पहचान बनाने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाएगा।

  • MP: सतना में 26 साल पुराना कर्ज उतारने के लिए सफाईकर्मी के घर पहुंचे DSP

    MP: सतना में 26 साल पुराना कर्ज उतारने के लिए सफाईकर्मी के घर पहुंचे DSP


    सतना।
    पद और प्रतिष्ठा मिल जाए, लेकिन इंसान को अपना अतीत और किसी का उपकार कभी नहीं भूलना चाहिए। मध्य प्रदेश पुलिस (Madhya Pradesh Police) के चर्चित और संवेदनशील अधिकारी DSP संतोष पटेल ने इस बात को साबित कर दिखाया है। वे अपने ऊपर चढ़े हुए 26 साल पुराने एक कर्ज (A 26-year-old Debt) को उतारने के लिए सतना (Santa) की तंग गलियों में मौजूद एक झुग्गी बस्ती (Slum) में पहुंचे। यह कर्ज पैसों का नहीं था, बल्कि खून का था। जिस सफाईकर्मी संतु मास्टर ने बचपन में अपना खून देकर संतोष पटेल की जान बचाई थी, वे उसी से मिलने के लिए शहर में आए थे। हालांकि यहां पहुंचकर उन्हें पता चला कि संतु अब दुनिया में नहीं रहे, जिसके बाद वे उनके परिवार का पता लगाकर उनसे मिलने के लिए यहां आ गए। यहां संतु मास्टर की बेटियों से मिलकर वह भावुक हो गए और इस दौरान उन्होंने उनकी बड़ी बेटी के चरण स्पर्श कर परिवार की जिम्मेदारी उठाने का संकल्प लिया।

    यहां पहुंचकर DSP संतोष पटेल ने एकबार फिर अपने बचपन का वो डरावना मंजर याद किया, जब उनकी जान पर बन आई थी। बात साल 1999 की है, जब वे महज 8-9 साल के थे। एक गंभीर बीमारी ने उन्हें जकड़ लिया था। शरीर का खून पानी बनकर मवाद में बदल गया था। इस दौरान उनके पिता और दादा ने 6 महीने झाड़-फूंक में गंवा दिए। हालत बिगड़ने पर उन्हें पन्ना जिला अस्पताल और फिर सतना के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि तत्काल ऑपरेशन करना होगा, और खून की सख्त जरूरत है।


    खून देने से पहले पिता को लगाई थी फटकार

    DSP ने बताया कि उस दौर में रक्तदान को लेकर कई भ्रांतियां थीं और कोई डोनर नहीं मिल रहा था। लेकिन इसी बीच अस्पताल में एक अजीब संयोग बना। संतोष के पिता ने गलती से पान-सुपारी खाकर अस्पताल परिसर में थूक दिया। वहां सफाई कर रहे संतु ने उन्हें देखा और दौड़कर आया। इसके बाद उसने पिता को डांटा-फटकारा और चला गया। हालांकि इसी दौरान जब बेटे की हालत की वजह से संतोष के पिता जब वहां पर निराश बैठे हुए थे, तो उसी सफाईकर्मी संतु ने उनके कंधे पर हाथ रखकर कहा था, ‘आप हताश मत हो, आपका बेटा जिंदा रहेगा।’

    इसी बीच जब संतु मास्टर को पता चला कि बच्चे को खून की जरूरत है, तो उसने बिना किसी स्वार्थ के अपना ब्लड डोनेट किया था। उसी खून से ऑपरेशन सफल रहा और आज संतोष पटेल जिंदा हैं और पुलिस अधिकारी है।

    ‘अधिकारी नहीं, बेटा बनकर आया हूं’
    DSP बनने के बाद संतोष पटेल सतना के उसी अस्पताल पहुंचे। वे संतु मास्टर को गले लगाना चाहते थे, लेकिन वहां पता चला कि उनका निधन हो चुका है और पत्नी भी नहीं रहीं। अस्पताल की एक बुजुर्ग महिला कर्मचारी ने बताया कि संतु की दो बेटियां झुग्गी बस्ती में रहती हैं। इसके बाद DSP उनका पता लेकर तुरंत यहां पहुंचे। वर्दी पहने एक बड़े अफसर को अपनी झोपड़ी में देख बेटियां सहम गईं, लेकिन जब DSP ने झुककर उनके पैर छुए, तो सबकी आंखें नम हो गईं।


    DSP बोले- मैं करूंगा कन्यादान

    DSP ने संतु की बेटियों से कहा,मैं संतु मास्टर का मुंह नहीं देख पाया, इसका अफसोस जीवन भर रहेगा, लेकिन मेरी रगों में भी उनका खून दौड़ रहा है। इसके साथ ही उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि वे लोग अकेले नहीं हैं। DSP ने संकल्प लिया कि वे संतु मास्टर की छोटी बेटी की शादी धूमधाम से कराएंगे। उन्होंने कहा, ‘अगर समय और संयोग रहा, तो मैं खुद भाई और पिता का फर्ज निभाते हुए कन्यादान भी करूंगा’।