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  • स्वास्थ्य विभाग अनजान: डिग्री का खेल उजागर, असली-नकली डॉक्टर का चौंकाने वाला मामला

    स्वास्थ्य विभाग अनजान: डिग्री का खेल उजागर, असली-नकली डॉक्टर का चौंकाने वाला मामला


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने सरकारी व्यवस्थाओं की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ही एमबीबीएस डिग्री के आधार पर दो अलग-अलग लोग वर्षों से सरकारी डॉक्टर बनकर काम कर रहे हैं। इनमें से एक असली डॉक्टर है, जबकि दूसरा बिना मेडिकल पढ़ाई के ही 15 साल से मरीजों का इलाज करता रहा और हैरानी की बात यह है कि विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी।
    बालाघाट से शुरू हुई जांच, खुलने लगे राज
    पूरे मामले की परतें बालाघाट जिले से खुलनी शुरू हुईं। यहां बिरसा के सरकारी अस्पताल में पदस्थ एक डॉक्टर की पहचान को लेकर संदेह पैदा हुआ। जांच में सामने आया कि संबंधित डॉक्टर कभी अस्पताल में तो कभी अपने गांव में निजी क्लीनिक चलाते हैं। स्थानीय लोगों ने पुष्टि की कि वे बिना किसी बोर्ड या आधिकारिक पहचान के घर के पास मरीजों का इलाज करते रहे हैं।
    दस्तावेजों में बड़ा खेल, अलग-अलग जगहों का जिक्र
    जब उनके दस्तावेजों की जांच की गई, तो कई विसंगतियां सामने आईं। कहीं उनका गृह जिला रीवा बताया गया, तो कहीं मुरैना और बालाघाट। इतना ही नहीं, उनके पास केवल प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन पाया गया, जबकि परमानेंट रजिस्ट्रेशन का रिकॉर्ड गायब था।
    देवास में मिला असली डॉक्टर
    जांच टीम ने देवास में पदस्थ दूसरे डॉक्टर से संपर्क किया। उन्होंने अपनी ओरिजिनल एमबीबीएस डिग्री और परमानेंट रजिस्ट्रेशन दिखाया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बालाघाट में उपयोग की जा रही डिग्री उनकी ही है, लेकिन उस व्यक्ति को वे नहीं जानते। इससे साफ हो गया कि एक ही डिग्री की कॉपी का इस्तेमाल कर कोई दूसरा व्यक्ति सरकारी नौकरी कर रहा है।
    मेडिकल काउंसिल ने किया खुलासा
    मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल में जांच के दौरान यह पुष्टि हुई कि परमानेंट रजिस्ट्रेशन नंबर एक ही व्यक्ति के नाम पर दर्ज है और वह देवास में कार्यरत डॉक्टर का है। इससे बालाघाट वाले डॉक्टर की स्थिति पूरी तरह संदिग्ध हो गई है।
    जिम्मेदार अधिकारी भी अनजान
    बालाघाट के सीएमएचओ ने माना कि उन्हें हाल ही में इस मामले की शिकायत मिली है और जांच जारी है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ कहा कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं थी।
    विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन में बड़ी चूक को दर्शाता है। अगर समय रहते जांच नहीं हुई, तो ऐसे कई और फर्जी डॉक्टर सिस्टम में सक्रिय हो सकते हैं।
    बड़ा सवाल मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़?
    सबसे गंभीर बात यह है कि जिस व्यक्ति के पास असली डिग्री नहीं है, वह वर्षों से मरीजों का इलाज करता रहा। इससे न केवल मरीजों की जान जोखिम में पड़ी, बल्कि पूरे स्वास्थ्य सिस्टम की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ गए हैं।