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  • दुर्गा पूजा के बीच सिलीगुड़ी में लगे पोस्टर, मांस और बिरयानी हिंदू दुकानदारों से खरीदने की अपील पर विवाद

    दुर्गा पूजा के बीच सिलीगुड़ी में लगे पोस्टर, मांस और बिरयानी हिंदू दुकानदारों से खरीदने की अपील पर विवाद


    नई दिल्ली:
    पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में दुर्गा पूजा के बीच मांस, बिरयानी और पूजा से जुड़ी सामग्री हिंदू दुकानदारों से खरीदने की अपील वाले पोस्टर लगाए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। शहर के कई इलाकों में दिखाई दिए इन पोस्टरों में लोगों से कहा गया है कि बिरयानी खाने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन इसे हिंदू दुकानदारों से ही खरीदा जाए। इसी तरह मांस और पूजा की सामग्री भी हिंदू व्यापारियों से खरीदने की अपील की गई है। इन संदेशों ने त्योहार के दौरान धार्मिक पहचान, कारोबार और सामाजिक सौहार्द को लेकर बहस तेज कर दी है।

    ये पोस्टर सिलीगुड़ी के भारत नगर सहित कई स्थानों पर लगाए गए हैं। कुछ पोस्टर तरुण तीर्थ क्लब के दुर्गा पूजा आयोजन स्थल के आसपास की दीवारों पर भी दिखाई दिए। इन संदेशों में लोगों से हिंदू व्यापारियों का समर्थन करने और समुदाय के कारोबार को बढ़ावा देने की अपील की गई है। पोस्टर लगाने की जिम्मेदारी हिंदू जागरण मंच ने ली है। संगठन का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य हिंदुओं में एकता की भावना को मजबूत करना और त्योहार के दौरान हिंदू दुकानदारों को आर्थिक लाभ पहुंचाना है। संगठन के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि ये संदेश किसी तरह का आदेश नहीं, बल्कि लोगों से की गई अपील हैं।

    हिंदू जागरण मंच के प्रतिनिधि अभिषेक दास के अनुसार, पोस्टर केवल भारत नगर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शहर के विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों के आसपास भी लगाए गए हैं। संगठन इन संदेशों के जरिए हिंदू एकता का विचार सामने रखना चाहता है। मंच से जुड़े लोगों का तर्क है कि दुर्गा पूजा के दौरान बड़ी संख्या में लोग खरीदारी करते हैं और इस आर्थिक गतिविधि का लाभ हिंदू व्यापारियों को भी मिलना चाहिए। पोस्टरों में मांस और बिरयानी की दुकानों के अलावा पूजा सामग्री बेचने वाले कारोबारियों का भी उल्लेख किया गया है। इस तरह धार्मिक पहचान को खरीदारी के विकल्प से जोड़ने की कोशिश की गई है।

    हालांकि, इस अभियान को लेकर राजनीतिक विरोध भी सामने आया है। सिलीगुड़ी के पूर्व महापौर और वामपंथी नेता अशोक भट्टाचार्य ने पोस्टरों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि इस तरह के संदेश समाज में धर्म के आधार पर विभाजन को बढ़ावा दे सकते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी से जुड़े संगठनों पर धार्मिक पहचान के आधार पर लोगों के बीच दूरी पैदा करने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक देश में इस प्रकार के अभियान पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। विरोध करने वाले नेताओं का कहना है कि दुर्गा पूजा बंगाल की सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इस दौरान सामाजिक सद्भाव बनाए रखना जरूरी है।

    इस विवाद के बीच पश्चिम बंगाल के पर्यटन मंत्री और सिलीगुड़ी के विधायक शंकर घोष ने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है कि उनके आवास के पास पूजा स्थल के आसपास पोस्टर किसने लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पोस्टर लगाने वाले ही उनके उद्देश्य के बारे में बता सकते हैं। इस बयान के बाद भी पोस्टर अभियान को लेकर चर्चा जारी है। एक ओर संगठन इसे हिंदू व्यापारियों को प्रोत्साहित करने और समुदाय के भीतर एकजुटता बढ़ाने का प्रयास बता रहा है, वहीं आलोचक इसे धार्मिक पहचान के आधार पर खरीदारी को प्रभावित करने वाला कदम मान रहे हैं। दुर्गा पूजा के दौरान सामने आया यह मामला अब व्यापारिक हितों, व्यक्तिगत पसंद और बंगाल की सामाजिक परंपराओं से जुड़ी बहस का विषय बन गया है।

  • नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा से दूर होते हैं भय और संकट, जानिए पूजा विधि, भोग और आरती का धार्मिक महत्व

    नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा से दूर होते हैं भय और संकट, जानिए पूजा विधि, भोग और आरती का धार्मिक महत्व


    नई दिल्ली । शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां चंद्रघंटा अपने भक्तों को साहस और आत्मविश्वास प्रदान करती हैं तथा भय और नकारात्मकता से लड़ने की शक्ति देती हैं। मां का यह स्वरूप शांति और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। भक्त नवरात्रि के तीसरे दिन विधि-विधान से पूजा करके परिवार की सुख-समृद्धि और जीवन में सकारात्मकता की कामना करते हैं।
    मां चंद्रघंटा को मां दुर्गा का तीसरा स्वरूप माना गया है। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित होता है इसलिए उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। धार्मिक चित्रण में मां को दस भुजाओं वाली देवी के रूप में दर्शाया जाता है। उनके हाथों में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र और कमल जैसे प्रतीक दिखाई देते हैं। मां का वाहन सिंह है जो शक्ति और निर्भयता का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की आराधना करने से भक्तों के मन में साहस का संचार होता है और वे कठिन परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं।
    नवरात्रि के तीसरे दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके मां दुर्गा और मां चंद्रघंटा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। पूजा के दौरान दीपक जलाएं और मां को फूल तथा अक्षत अर्पित करें। इसके बाद रोली और चंदन से तिलक लगाकर धूप-दीप दिखाएं। मां को फल और मिठाई का भोग लगाएं। पूजा करते समय मन को शांत रखें और श्रद्धापूर्वक मां के मंत्रों का जाप करें। अंत में मां चंद्रघंटा की आरती करके परिवार की सुख-शांति और कल्याण की प्रार्थना करें।
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां चंद्रघंटा को दूध से बनी मिठाइयां और खीर का भोग लगाना शुभ माना जाता है। कुछ भक्त मां को दूध या दूध से बने अन्य पकवान भी अर्पित करते हैं। पूजा में अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार भोग तैयार किया जा सकता है। इसके बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य भक्तों में बांटना चाहिए। पूजा के दौरान स्वच्छता और सात्विकता का ध्यान रखना चाहिए। व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार कर सकते हैं।
    मां चंद्रघंटा की आराधना के समय इस मंत्र का जाप किया जा सकता है: ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार इस मंत्र का 11 या 108 बार जाप कर सकते हैं। मान्यता है कि नियमित मंत्र जाप से मन को एकाग्र करने और सकारात्मक विचारों को बढ़ावा देने में मदद मिलती है। मां की पूजा करते समय क्रोध और कटु वचन से बचने तथा जरूरतमंद लोगों की सहायता करने का संकल्प लेना भी शुभ माना जाता है।
    नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा का संदेश है कि जीवन में शांति बनाए रखते हुए अन्याय और कठिनाइयों का साहस से सामना करना चाहिए। मां का स्वरूप भक्तों को निर्भयता और आत्मबल की प्रेरणा देता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार सच्चे मन से की गई आराधना से भक्तों को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। हालांकि पूजा का सबसे महत्वपूर्ण आधार श्रद्धा और सद्भाव है। इसलिए नवरात्रि के इस पावन दिन मां चंद्रघंटा का ध्यान करके परिवार की खुशहाली और सभी के कल्याण की कामना करनी चाहिए।

  • नवरात्र शुरू होने से पहले निपटा लें ये 5 जरूरी काम, पूजा में बाधा से बचने के लिए अभी कर लें तैयारी

    नवरात्र शुरू होने से पहले निपटा लें ये 5 जरूरी काम, पूजा में बाधा से बचने के लिए अभी कर लें तैयारी

    नई दिल्ली: शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले हैं। नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना के साथ मां दुर्गा की पूजा-अर्चना शुरू होगी और इसके बाद लगातार नौ दिनों तक धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे। नवरात्र के दौरान पूजा में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए कुछ जरूरी तैयारियां पहले ही पूरी करने की सलाह दी जाती है। इनमें घर की साफ-सफाई से लेकर पूजा सामग्री जुटाने और ऐसे काम पूरे करने तक की बातें शामिल हैं, जिन्हें नवरात्र के दौरान करना वर्जित माना जाता है।

    नवरात्र से पहले सबसे पहले पूरे घर की अच्छी तरह सफाई करने की बात कही गई है। घर के कोने-कोने की सफाई के साथ टूटी-फूटी और कबाड़ की चीजों को भी बाहर कर देना चाहिए। इसके बाद पूजा स्थल की भी अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए। भगवान के वस्त्र और पूजा के बर्तनों को धोकर साफ करने के साथ पूजा सामग्री रखने की जगह को भी व्यवस्थित करना जरूरी बताया गया है। पूजा स्थल पर मौजूद निर्माल्य को हटा देना चाहिए और जो पूजा सामग्री खत्म हो गई है, उसकी सूची बनाकर उसे पहले ही खरीद लेना चाहिए।

    यदि नवरात्र में अखंड ज्योति जलानी है या घटस्थापना करनी है, तो उससे जुड़ी सभी जरूरी सामग्री एक दिन पहले ही लाकर रख लेने की सलाह दी गई है। पूजा के लिए साफ चौकी की व्यवस्था भी पहले कर लेनी चाहिए, ताकि नवरात्र के पहले दिन पूजा की तैयारियों में जल्दबाजी न करनी पड़े। घर की सफाई और पूजा स्थल की व्यवस्था पहले से पूरी होने पर नौ दिनों तक पूजा-पाठ के दौरान जरूरी चीजें आसानी से उपलब्ध रह सकती हैं।

    नवरात्र से पहले घर में रखी तामसिक चीजों को हटाने की भी बात कही गई है। इनमें लहसुन-प्याज, नॉनवेज और शराब जैसी चीजें शामिल हैं। यदि किसी कारण से इन्हें घर से पूरी तरह हटाना संभव न हो, तो इन्हें अलग स्थान पर रखने की सलाह दी गई है। इन्हें पूजा स्थल या उस जगह के पास नहीं रखना चाहिए, जहां भोग तैयार किया जाता है। जिन घरों में नॉनवेज भोजन बनाया जाता है, वहां भोग, प्रसाद और व्रत का भोजन तैयार करने के लिए अलग बर्तनों की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है। नॉनवेज बनाने वाले बर्तनों में भोग या व्रत का भोजन नहीं बनाना चाहिए।

    नवरात्र के दौरान बाल और नाखून कटवाना वर्जित माना जाता है। खासतौर पर नवरात्र का व्रत रखने वाले लोगों को इन नौ दिनों में बाल और नाखून नहीं कटवाने की सलाह दी जाती है। इसलिए यह काम नवरात्र शुरू होने से पहले ही पूरा कर लेना बेहतर बताया गया है। इन तैयारियों के अलावा घटस्थापना के मुहूर्त की जानकारी भी पहले से रखना जरूरी है। 11 अक्टूबर 2026 को घटस्थापना के लिए सुबह का शुभ मुहूर्त 6:19 बजे से 10:12 बजे तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा। नवरात्र की पूजा के लिए घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई तथा आवश्यक सामग्री की व्यवस्था पहले से करने से तैयारियों को समय पर पूरा किया जा सकता है।

  • बांग्लादेश में दुर्गा पूजा से पहले हिंदू मंदिर में तैयार की जा रही 7 मूर्तियों से तोड़फोड़

    बांग्लादेश में दुर्गा पूजा से पहले हिंदू मंदिर में तैयार की जा रही 7 मूर्तियों से तोड़फोड़


    ढाका।
    बांग्लादेश (Bangladesh) के टंगाइल जिले (Tangail district) में दुर्गा पूजा (Durga Puja) से पहले हिंदू मंदिर (Hindu temple) में तैयार की जा रही 7 प्रतिमाओं में अज्ञात लोगों ने तोड़फोड़ कर दी। यह घटना बुधवार रात से गुरुवार सुबह के बीच मिर्जापुर उपजिला के जमुरकी पश्चिमपाड़ा स्थित मंदिर में हुई। स्थानीय अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर में करीब 85 साल से जमुरकी आर्य समिति की देखरेख में दुर्गा पूजा आयोजित की जा रही है। इस घटना के बाद इलाके में रहने वाले हिंदू समुदाय के लोगों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    रिपोर्ट के अनुसार, जिन 7 प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचाया गया, उनमें मुख्य दुर्गा प्रतिमा भी शामिल थी। सभी प्रतिमाएं लगभग पूरी हो चुकी थीं और उनमें सिर्फ रंग भरने का काम बाकी था। जमुरकी आर्य समिति के अध्यक्ष प्रकाश बाकली ने बताया कि गुरुवार को जब वह अन्य समुदाय के लोगों के साथ मंदिर पहुंचे तो प्रतिमाओं को क्षतिग्रस्त हालत में पाया। उन्होंने कहा कि अभी यह पता नहीं चल पाया है कि तोड़फोड़ किसने की। मामले की औपचारिक शिकायत पुलिस से की गई है। अब उनकी मांग है कि पुलिस जिम्मेदार लोगों की पहचान करे और उन्हें कानून के तहत सजा दिलाए।


    पुलिस मामले की जांच कर रही

    घटना की सूचना मिलने के बाद टंगाइल के पुलिस अधीक्षक मोहम्मद शमसुल आलम सरकार और सीनियर पुलिस अधिकारी मंदिर पहुंचे। अधिकारियों ने हिंदू समुदाय के लोगों को भरोसा दिलाया कि घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिले के सहायक पुलिस अधीक्षक मोहम्मद अदनान मुस्तफिज ने बताया कि कुछ प्रतिमाओं को आंशिक रूप से नुकसान पहुंचाया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और दोषियों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। इलाके में जरूरी सुरक्षा इंतजाम भी किए गए हैं।


    सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का सामना

    बांग्लादेश में हिंदू सबसे बड़ा धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय है और देश की आबादी में उनकी हिस्सेदारी करीब 7.95 प्रतिशत है। रिपोर्ट में कहा गया कि यह समुदाय लंबे समय से सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का सामना करता रहा है। राजनीतिक और सामाजिक तनाव के अलग-अलग दौर में हिंदू समुदाय के लोगों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं सामने आती रही हैं। स्थानीय मंदिरों और प्रतिमाओं में तोड़फोड़ की घटनाएं भी इसी तरह की चुनौतियों का हिस्सा रही हैं। टंगाइल की ताजा घटना ऐसे समय हुई है जब दुर्गा पूजा की तैयारियां चल रही हैं और मंदिर में प्रतिमाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा था।

  • Navratri 2026 Date: 11 अक्टूबर से शुरू होंगे शारदीय नवरात्र चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग में घटस्थापना का मिलेगा विशेष अवसर

    Navratri 2026 Date: 11 अक्टूबर से शुरू होंगे शारदीय नवरात्र चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग में घटस्थापना का मिलेगा विशेष अवसर


    नई दिल्ली। शारदीय नवरात्र 2026 इस बार एक विशेष ज्योतिषीय संयोग के कारण चर्चा में हैं। मां दुर्गा की आराधना का यह पावन पर्व इस वर्ष 11 अक्टूबर से शुरू होगा और पूरे 10 कैलेंडर दिनों तक चलेगा। पंचांग की गणना के अनुसार करीब 50 वर्षों में छठी बार ऐसा संयोग बन रहा है जब तिथि के विस्तार के कारण नवरात्र की अवधि सामान्य से अधिक होगी। इस दौरान अष्टमी तिथि दो दिन पड़ने के कारण पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों का कार्यक्रम भी खास रहेगा। श्रद्धालु घरों और मंदिरों में मां भगवती की उपासना करेंगे और पूरे विधि-विधान से घटस्थापना कर नवरात्र की शुरुआत करेंगे।

    काशी के विद्वान ज्योतिषियों के अनुसार जब किसी तिथि की अवधि एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय के बाद तक बनी रहती है तो पंचांग की गणना में उसका प्रभाव लगातार दो दिनों तक माना जा सकता है। इसी तरह तिथि के विस्तार से इस बार नवरात्र की अवधि 10 कैलेंडर दिनों की हो रही है। बीएचयू के ज्योतिष विभाग के ज्योतिषाचार्य प्रोफेसर सुभाष पांडेय के अनुसार नवरात्र के पहले दिन चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का संयोग बन रहा है। इस वजह से घटस्थापना के शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व रहेगा।

    पंचांग के अनुसार 11 अक्टूबर को घटस्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह नहीं बल्कि दोपहर में निर्धारित किया गया है। कलश स्थापना का शुभ समय सुबह 11 बजकर 37 मिनट से दोपहर 12 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। श्रद्धालुओं को पूजा संकल्प और घटस्थापना के लिए कुल 48 मिनट का समय मिलेगा। जो भक्त पूरे नौ दिनों तक व्रत रखकर मां दुर्गा की आराधना करते हैं वे इस अवधि में विधि-विधान से कलश स्थापित कर पूजा आरंभ कर सकते हैं। हालांकि स्थानीय पंचांग और पूजा परंपरा के अनुसार मुहूर्त में अंतर हो सकता है इसलिए श्रद्धालुओं को अपने क्षेत्र के पंचांग से भी जानकारी लेनी चाहिए।

    तिथियों की गणना के मुताबिक 18 अक्टूबर को पूरे दिन अष्टमी तिथि रहेगी जबकि 19 अक्टूबर की सुबह 7 बजकर 53 मिनट तक अष्टमी का प्रभाव बना रहेगा। इसके बाद नवमी तिथि शुरू होगी जो 20 अक्टूबर की सुबह 9 बजकर 29 मिनट तक रहेगी। इसी कारण इस बार नवरात्र का कैलेंडर दस दिनों का होगा। पंचांग के अनुसार 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी। इस दिन नवरात्र के समापन के साथ दशहरा पर्व का धार्मिक महत्व भी रहेगा। कन्या पूजन और व्रत पारण करने वाले श्रद्धालुओं को तिथि और स्थानीय परंपरा के अनुसार समय का ध्यान रखना होगा।

    इस बार मां दुर्गा के आगमन और प्रस्थान को लेकर भी ज्योतिषीय मान्यताओं में विशेष चर्चा है। शास्त्रीय गणना के अनुसार रविवार से नवरात्र शुरू होने के कारण मां दुर्गा का आगमन हाथी पर माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं में हाथी पर देवी के आगमन को अच्छी वर्षा और अतिवृष्टि के संकेत से जोड़ा जाता है। वहीं देवी का प्रस्थान मुर्गे पर होने की मान्यता है जिसे कुछ परंपराओं में जनमानस की व्याकुलता और अशांति से जोड़कर देखा जाता है। ये ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताएं हैं इन्हें निश्चित भविष्यवाणी या वैज्ञानिक निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।

    नवरात्र के दौरान भक्त मां शैलपुत्री से लेकर मां सिद्धिदात्री तक नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं। घरों में अखंड ज्योति प्रज्वलित की जाती है और मंदिरों में विशेष श्रृंगार भजन कीर्तन तथा धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होते हैं। श्रद्धालु मानते हैं कि सच्ची श्रद्धा और विधि-विधान से की गई आराधना से जीवन में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। इस तरह 2026 का शारदीय नवरात्र तिथि विस्तार शुभ मुहूर्त और विशेष धार्मिक मान्यताओं के कारण भक्तों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाला है।

  • कोलकाता में पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन से जुड़े 15 ठिकानों पर ED की छापेमारी, दुर्गा पूजा प्रीव्यू शो के नाम पर करोड़ों जुटाने का आरोप

    कोलकाता में पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन से जुड़े 15 ठिकानों पर ED की छापेमारी, दुर्गा पूजा प्रीव्यू शो के नाम पर करोड़ों जुटाने का आरोप


    नई दिल्ली : कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय ने कथित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए MassArt सोसाइटी से जुड़े 15 ठिकानों पर छापेमारी की है। इनमें पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री और तृणमूल कांग्रेस नेता इंद्रनील सेन से जुड़े परिसर भी शामिल हैं। यह कार्रवाई दुर्गा पूजा के प्रीव्यू शो के नाम पर कथित तौर पर बाजार से करोड़ों रुपये जुटाने और उस धनराशि से जुड़ी गतिविधियों की जांच के तहत की जा रही है। जांच का संबंध MassArt सोसाइटी की गतिविधियों और प्रीव्यू शो के नाम पर लोगों से जुटाई गई रकम से बताया जा रहा है।

    दुर्गा पूजा की तैयारियों के बीच सामने आए इस मामले में आरोप है कि MassArt सोसाइटी ने दुर्गा पूजा के प्रीव्यू शो आयोजित करने के नाम पर आम लोगों से बड़ी रकम जुटाई। इसके लिए पूजा पास बेचने की बात भी सामने आई है। जांच एजेंसी का आरोप है कि संस्था के नाम पर जुटाई गई इस रकम का इस्तेमाल उससे जुड़े लोगों ने निजी फायदे के लिए किया। मामले में कई लोगों और संस्थाओं को जांच के दायरे में रखा गया है। एजेंसी की ओर से की जा रही तलाशी के दौरान दस्तावेजों और अन्य संदिग्ध रिकॉर्ड की जांच की जा रही है, ताकि धनराशि जुटाने और उसके इस्तेमाल से संबंधित जानकारी सामने आ सके।

    मंगलवार तड़के शुरू हुई कार्रवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय की टीमें पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन और उनके करीबियों से जुड़े परिसरों पर पहुंचीं। इनमें हाइलैंड पार्क और हिंदुस्तान पार्क स्थित उनके ठिकाने भी शामिल हैं। इसके अलावा उनके रिश्तेदारों और अन्य संबंधित स्थानों पर भी तलाशी अभियान चलाया गया। दी गई जानकारी के अनुसार, कोलकाता में इंद्रनील सेन के घर समेत कुल 10 जगहों पर ED की टीमें तलाशी कर रही थीं। तलाशी के दौरान उनके घर से कुछ सबूत मिलने की बात भी सामने आई है। कार्रवाई का उद्देश्य मामले से जुड़े दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच करना है।

    जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू MassArt सोसाइटी की पहचान और उसके नाम पर धन जुटाने से जुड़ा है। एजेंसी को जानकारी मिली है कि संस्था को लोगों के सामने यूनेस्को से मान्यता प्राप्त या उससे जुड़ी संस्था के रूप में प्रस्तुत किया गया था। इसी आधार पर विभिन्न गतिविधियों के लिए धन जुटाए जाने की बात कही गई है। जांच एजेंसी अब इस पूरे मामले में संस्था की गतिविधियों, प्रीव्यू शो के नाम पर जुटाई गई रकम और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। कार्रवाई के दौरान सामने आने वाले दस्तावेज और रिकॉर्ड इस जांच का हिस्सा हैं।

  • गरबा से पहले भोपाल में नई गाइडलाइन की मांग वराह पूजन और पंचगव्य के बाद प्रवेश को लेकर समिति का बड़ा ऐलान

    गरबा से पहले भोपाल में नई गाइडलाइन की मांग वराह पूजन और पंचगव्य के बाद प्रवेश को लेकर समिति का बड़ा ऐलान


    भोपाल । भोपाल में नवरात्रि से पहले गरबा आयोजनों को लेकर हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच ने आयोजकों से धार्मिक स्वरूप बनाए रखने की अपील की है। समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि शहर में जहां भी गरबा कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं वहां मां दुर्गा की प्रतिमा विधिवत स्थापित की जानी चाहिए और प्रतिदिन पूजा अर्चना के साथ सुबह और शाम आरती होनी चाहिए। उनका कहना है कि गरबा केवल मनोरंजन का आयोजन नहीं बल्कि मां दुर्गा की आराधना से जुड़ा धार्मिक पर्व है इसलिए आयोजकों को इसकी परंपराओं और मर्यादा का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
    समिति की ओर से कहा गया है कि गरबा पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमा को प्रमुख स्थान दिया जाए। आरती के बाद धार्मिक गीतों और भजनों के साथ गरबा कराया जाए ताकि आयोजन का धार्मिक स्वरूप बना रहे। समिति ने आयोजकों से कार्यक्रमों में अश्लीलता या ऐसे किसी भी प्रकार के प्रदर्शन से बचने की अपील की है जिससे धार्मिक आयोजन की मर्यादा प्रभावित हो।

    हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने गरबा पंडालों के प्रवेश को लेकर भी एक सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि पंडाल के प्रवेश द्वार पर भगवान विष्णु के वराह अवतार की प्रतिमा स्थापित की जाए। उनके मुताबिक प्रवेश से पहले वराह भगवान का पूजन कराया जाना चाहिए। इसके साथ ही पंचगव्य ग्रहण कराने की बात भी कही गई है। समिति का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य गरबा आयोजन को धार्मिक परंपराओं से जोड़ना और उसकी पवित्रता बनाए रखना है।

    तिवारी ने बताया कि पंचगव्य में गाय का दूध दही घी गोबर और गोमूत्र शामिल होता है। उन्होंने दावा किया कि पंचगव्य ग्रहण करने से शुद्धिकरण होता है और इसके जरिए गरबा स्थल पर विधर्मियों के प्रवेश को रोका जा सकेगा। यह बयान सामने आने के बाद गरबा आयोजनों में प्रवेश व्यवस्था और आयोजन के स्वरूप को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    समिति ने गरबा आयोजकों से अपील की है कि वे नवरात्रि के दौरान होने वाले कार्यक्रमों को धार्मिक और पारंपरिक तरीके से आयोजित करें। आयोजकों से मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करने नियमित आरती कराने और धार्मिक गीतों के साथ गरबा आयोजित करने पर जोर दिया गया है। समिति की ओर से यह भी कहा गया है कि कार्यक्रम के दौरान ऐसी गतिविधियों से बचा जाए जो धार्मिक भावनाओं या आयोजन की मर्यादा के विपरीत हों।

    चंद्रशेखर तिवारी ने यह भी कहा कि यदि आयोजक इन बातों का ध्यान नहीं रखते हैं तो समिति को कार्रवाई के लिए बाध्य होना पड़ सकता है। नवरात्रि नजदीक आने के साथ ही भोपाल में गरबा आयोजनों की तैयारियां तेज हो गई हैं और ऐसे में समिति की इस अपील के बाद आयोजकों की व्यवस्थाओं पर नजर रहने की संभावना है। अब देखना होगा कि गरबा आयोजक इन सुझावों को किस तरह अपनाते हैं और आगामी नवरात्रि में शहर के गरबा पंडालों में धार्मिक परंपराओं और आयोजन व्यवस्था का स्वरूप कैसा रहता है।

  • महाअष्टमी पर नवार्ण मंत्र जाप से मिलेगा विशेष फल, पूरी होंगी मनोकामनाएं

    महाअष्टमी पर नवार्ण मंत्र जाप से मिलेगा विशेष फल, पूरी होंगी मनोकामनाएं

    नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और इस दौरान प्रत्येक दिन देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। इनमें महाअष्टमी का विशेष महत्व होता है, जो इस बार 26 मार्च को पड़ रही है। इस दिन मां दुर्गा के अष्टम स्वरूप मां महागौरी की विधि-विधान से पूजा की जाती है और कन्या पूजन का भी विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस दिन की गई पूजा, साधना या मंत्र जाप का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है।

    नवरात्रि को देवी भक्ति और साधना का सबसे श्रेष्ठ समय माना गया है। इस दौरान श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई पूजा से देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं। विशेष रूप से महाअष्टमी का दिन साधना और मंत्र जाप के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।

    इसी संदर्भ में नवार्ण मंत्र का विशेष महत्व बताया गया है। यह मंत्र नवार्ण मंत्र यानी ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे के रूप में जाना जाता है। इस मंत्र को दुर्गा साधना का अत्यंत प्रभावशाली और सिद्ध मंत्र माना गया है। नवार्ण शब्द में नव का अर्थ नौ और अर्ण का अर्थ अक्षर होता है, जो इस मंत्र के नौ अक्षरों को दर्शाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मंत्र के प्रत्येक अक्षर में देवी शक्ति का विशेष स्वरूप समाहित होता है। इसे ब्रह्मा, विष्णु और महेश के साथ-साथ महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की शक्तियों से भी जोड़ा जाता है। यही कारण है कि इस मंत्र का जाप करने से साधक को मानसिक, आध्यात्मिक और भौतिक स्तर पर लाभ प्राप्त होता है।

    माना जाता है कि नवार्ण मंत्र का नियमित जाप करने से व्यक्ति के भीतर साहस और आत्मविश्वास का संचार होता है, भय और नकारात्मकता दूर होती है तथा जीवन में शांति और संतुलन बना रहता है। इसके साथ ही यह मंत्र तरक्की, सुख-समृद्धि और पारिवारिक सुख के लिए भी अत्यंत लाभकारी माना गया है। विद्यार्थियों के लिए यह मंत्र एकाग्रता और सफलता में सहायक होता है, वहीं करियर और व्यवसाय में भी सकारात्मक परिणाम देता है।

    महाअष्टमी के दिन इस मंत्र का जाप विशेष रूप से फलदायी माना गया है। विधि के अनुसार प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर माता की पूजा करें और उसके बाद 108 दानों की माला से कम से कम तीन माला जाप करें। जाप करते समय मन को शांत, एकाग्र और श्रद्धा से पूर्ण रखना आवश्यक है। धार्मिक दृष्टि से यह भी माना जाता है कि यदि इस दिन नियमपूर्वक और सच्चे मन से मंत्र जाप किया जाए तो मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।

    इस प्रकार महाअष्टमी का दिन केवल पूजा-अर्चना का ही नहीं बल्कि आत्मिक शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का भी विशेष अवसर है। नवार्ण मंत्र की साधना के माध्यम से श्रद्धालु मां दुर्गा की कृपा प्राप्त कर अपने जीवन को सुख, शांति और समृद्धि की दिशा में अग्रसर कर सकते हैं।

  • चैत्र नवरात्रि 2026: पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा से पाएँ सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद

    चैत्र नवरात्रि 2026: पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा से पाएँ सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद


    नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व आज 19 मार्च 2026 से आरंभ हो चुका है जो 27 मार्च 2026 को राम नवमी के दिन संपन्न होगा। हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है क्योंकि इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित होता है जिन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री और सौभाग्य की देवी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में स्थिरता सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

    ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस वर्ष घटस्थापना यानी कलश स्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। पहला मुहूर्त सुबह 06:52 से 07:43 तक रहेगा जिसकी अवधि लगभग 50 मिनट है। यदि इस समय पूजा संभव न हो तो अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 तक विशेष फलदायी माना गया है। शुभ मुहूर्त में की गई पूजा घर में सुख-समृद्धि और बरकत लेकर आती है।

    पूजा की शुरुआत प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने से होती है। इसके बाद घर के पूजा स्थान पर लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा या मां शैलपुत्री की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। विधिपूर्वक कलश स्थापना की जाती है जो नवरात्रि का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। इसके बाद मां शैलपुत्री का ध्यान करते हुए उन्हें सफेद फूल अर्पित किए जाते हैं क्योंकि सफेद रंग उन्हें अत्यंत प्रिय है।

    भोग के रूप में मां को गाय के दूध से बनी मिठाई या अन्य सफेद खाद्य पदार्थ अर्पित किए जाते हैं। पूजा के दौरान घी का अखंड दीपक जलाना शुभ माना जाता है जिससे घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सकारात्मक वातावरण का निर्माण होता है। श्रद्धा और भक्ति के साथ मंत्रोच्चारण और प्रार्थना करने से मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

    पूजा के समापन पर आरती का विशेष महत्व होता है। सुबह की आरती सूर्योदय के समय और शाम की आरती सूर्यास्त के बाद करना शुभ माना जाता है। परिवार के सभी सदस्यों का एक साथ आरती में शामिल होना घर में प्रेम एकता और सामंजस्य को बढ़ाता है। मां शैलपुत्री की आरती के माध्यम से भक्त अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते हैं और जीवन में सुख-संपत्ति की कामना करते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां शैलपुत्री की पूजा से व्यक्ति के जीवन में स्थिरता आती है और मन के विकार दूर होते हैं। जो भक्त सच्चे मन से उनकी आराधना करते हैं उन्हें हर प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख शांति तथा समृद्धि का आगमन होता है। इस प्रकार नवरात्रि का पहला दिन आध्यात्मिक ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

  • चैत्र नवरात्र 2026: पहले तीन दिन रहेगा पंचक का साया, जानिए घटस्थापना पर इसका क्या पड़ेगा प्रभाव

    चैत्र नवरात्र 2026: पहले तीन दिन रहेगा पंचक का साया, जानिए घटस्थापना पर इसका क्या पड़ेगा प्रभाव


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्र को अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महत्व वाला पर्व माना जाता है। यह नौ दिनों तक चलने वाला उत्सव देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना को समर्पित होता है। हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से इसकी शुरुआत होती है। वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्र 19 मार्च से प्रारंभ होकर 27 मार्च तक मनाई जाएगी। नवरात्र के पहले दिन होने वाली सबसे महत्वपूर्ण रस्म कलश स्थापना या घटस्थापना होती है जिसे देवी शक्ति के घर में प्रवेश का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि विधान से पूजा करने पर घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सुख समृद्धि का वास होता है।

    हालांकि इस वर्ष नवरात्र की शुरुआत के साथ एक विशेष ज्योतिषीय स्थिति भी बन रही है। दरअसल नवरात्र के पहले दिन से पंचक का प्रभाव भी रहेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार पंचक 16 मार्च 2026 की शाम 6 बजकर 14 मिनट से शुरू होकर 21 मार्च 2026 तक रहेगा। इस तरह नवरात्र के शुरुआती तीन दिन पंचक की अवधि में ही पड़ेंगे। पंचक को ज्योतिष शास्त्र में ऐसा समय माना जाता है जब कुछ विशेष प्रकार के शुभ कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार पंचक के दौरान वाहन खरीदना नया व्यवसाय शुरू करना गृह प्रवेश करना या विवाह जैसे बड़े और मांगलिक कार्यों को टालना बेहतर माना जाता है। मान्यता है कि इस समय शुरू किए गए कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं या उनका अपेक्षित फल नहीं मिल पाता। इसी कारण लोग पंचक के दौरान बड़े आर्थिक या सामाजिक निर्णय लेने में सावधानी बरतते हैं।

    हालांकि धार्मिक और नियत तिथि वाले पर्व त्योहारों पर पंचक का प्रभाव नहीं माना जाता। इसी वजह से नवरात्र की घटस्थापना पर पंचक का कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना करना पूरी तरह से शुभ और शास्त्रसम्मत है। इस दिन विधिपूर्वक पूजा अर्चना व्रत और मां दुर्गा की आराधना करने से जीवन में सुख शांति समृद्धि और सौभाग्य की वृद्धि होती है।

    इस वर्ष नवरात्र के पहले तीन दिन पंचक में पड़ने के कारण श्रद्धालुओं को यह सलाह दी जा रही है कि धार्मिक कार्यों को छोड़कर अन्य मांगलिक गतिविधियों से परहेज करें। जैसे वाहन खरीदना नया व्यापार शुरू करना गृह प्रवेश विवाह या मुंडन जैसे संस्कार इन दिनों में टाल देना बेहतर माना जाता है।

    नवरात्र के नौ दिनों में भक्त माता दुर्गा के नौ रूपों शैलपुत्री ब्रह्मचारिणी चंद्रघंटा कूष्मांडा स्कंदमाता कात्यायनी कालरात्रि महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं। इस दौरान लोग व्रत रखते हैं भजन कीर्तन करते हैं दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं और घरों तथा मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना का आयोजन करते हैं। श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा से जीवन में मानसिक शांति सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति का संचार होता है।

    इस प्रकार पंचक के प्रभाव के बावजूद चैत्र नवरात्र की घटस्थापना और पूजा अर्चना पूरी तरह शुभ मानी जाती है। श्रद्धालु इस पावन पर्व को पूरे उत्साह और आस्था के साथ मनाते हैं और मां दुर्गा से सुख समृद्धि तथा कल्याण की कामना करते हैं।