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  • ग्वालियर में दशहरे पर इन रास्तों से बचकर निकलें, जुलूस के लिए रूट डायवर्ट, रावण दहन के लिए पार्किंग की व्यवस्था

    ग्वालियर में दशहरे पर इन रास्तों से बचकर निकलें, जुलूस के लिए रूट डायवर्ट, रावण दहन के लिए पार्किंग की व्यवस्था


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर में विजयादशमी के अवसर पर दशहरा जुलूस रावण दहन और नवदुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन को देखते हुए यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है। मंगलवार को शहर में धार्मिक आयोजनों के दौरान लोगों की भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए पुलिस ने कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने और कुछ रास्तों को बंद रखने की व्यवस्था की है। ऐसे में घर से निकलने वाले वाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले निर्धारित मार्गों की जानकारी जरूर लें और जरूरत के अनुसार वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें।

    दशहरा जुलूस अचलेश्वर मंदिर से शुरू होकर फूलबाग मैदान तक पहुंचेगा। जुलूस के निर्धारित मार्ग में दाल बाजार लोहिया बाजार ऊंट पुल पाटनकर चौराहा दौलतगंज महाराज बाड़ा सराफा बाजार गश्त का ताजिया राम मंदिर छप्परवाला पुल शिंदे की छावनी और गुरुद्वारा शामिल हैं। इन रास्तों से जुलूस गुजरने के दौरान यातायात नियंत्रित रहेगा। इस वजह से संबंधित क्षेत्रों में वाहन चालकों को इंतजार करना पड़ सकता है या उन्हें दूसरे रास्तों से जाना पड़ सकता है। खासकर बाजार और प्रमुख चौराहों के आसपास निकलने वाले लोगों को अतिरिक्त समय लेकर घर से निकलना चाहिए।

    यातायात व्यवस्था के तहत जलालपुर से सागरताल होते हुए बहोड़ापुर जाने वाले मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी। इस मार्ग का इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों को रितुराज होटल और मोतीझील वाले रास्ते से जाने की सलाह दी गई है। इसके अलावा चार शहर का नाका से सागरताल रोड और ट्रांसपोर्ट नगर से सागरताल की ओर जाने वाले मार्ग पर भी वाहनों की आवाजाही बंद रहेगी। इन बदलावों का उद्देश्य धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ वाले इलाकों में यातायात को व्यवस्थित रखना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

    दशहरे पर रावण दहन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों के फूलबाग मैदान पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए मैदान के आसपास पार्किंग की व्यवस्था की गई है। जानकारी के मुताबिक रावण दहन में शामिल होने वाले लोगों के लिए मैदान नंबर दो और चिड़ियाघर के सामने पार्किंग की सुविधा रखी गई है। वाहन चालकों को कोशिश करनी चाहिए कि वे निर्धारित पार्किंग स्थलों पर ही वाहन खड़े करें ताकि आयोजन स्थल के आसपास अनावश्यक जाम न लगे और पैदल आने जाने वाले लोगों को परेशानी न हो।

    शहर में दशहरा जुलूस के साथ नवदुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के चलते भी कुछ मार्गों पर यातायात प्रभावित हो सकता है। ऐसे में वाहन चालकों को पुलिस के निर्देशों का पालन करना चाहिए और बैरिकेडिंग वाले रास्तों में जबरन प्रवेश करने से बचना चाहिए। जिन लोगों को महाराज बाड़ा दाल बाजार फूलबाग या सागरताल क्षेत्र की ओर जाना है उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग पहले से तय कर लेना चाहिए। आपात स्थिति में पुलिसकर्मियों के निर्देशों के अनुसार रास्ता बदलना भी जरूरी होगा।

    दशहरा शहर में धार्मिक उत्साह और सामूहिक आयोजन का अवसर है लेकिन बड़ी भीड़ के कारण यातायात व्यवस्था बनाए रखना भी चुनौतीपूर्ण रहता है। ऐसे में लोगों की सावधानी और प्रशासन के निर्देशों का पालन जाम और अव्यवस्था को कम करने में मदद कर सकता है। घर से निकलने से पहले ट्रैफिक रूट की जानकारी लेना और निर्धारित पार्किंग का इस्तेमाल करना ही बेहतर रहेगा।

  • मध्य प्रदेश में दशहरे का भव्य उत्सव, 18 मैदानों में जलेगा रावण, 1 लाख वर्गफीट में रंगोली और ड्रोन से होगी पुष्पवर्षा

    मध्य प्रदेश में दशहरे का भव्य उत्सव, 18 मैदानों में जलेगा रावण, 1 लाख वर्गफीट में रंगोली और ड्रोन से होगी पुष्पवर्षा


    भोपाल । मध्य प्रदेश में दशहरे का पर्व आज पूरे उत्साह और भव्यता के साथ मनाया जाएगा। प्रदेश के अलग-अलग शहरों में रावण दहन के लिए विशेष तैयारियां की गई हैं। इंदौर में 121 फीट भोपाल में 105 फीट और उज्जैन में 101 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। कई शहरों में विशाल पुतलों के साथ आकर्षक आतिशबाजी शोभायात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। हालांकि प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की संभावना को देखते हुए आयोजकों ने पुतलों को सुरक्षित रखने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।

    भोपाल में दशहरे के अवसर पर 18 प्रमुख मैदानों में रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित होंगे। कोलार हिंदू उत्सव समिति की ओर से 105 फीट ऊंचा रावण जलाया जाएगा। इस पुतले को जयपुर के कलाकारों ने तैयार किया है। रावण मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले बनाने में करीब 20 लाख रुपये खर्च हुए हैं। इसके अलावा जंबूरी मैदान में 101 फीट और कलियासोत ग्राउंड में 90 फीट ऊंचे रावण का दहन होगा। टीटी नगर दशहरा मैदान में 55 फीट और बिट्टन मार्केट में 53 फीट ऊंचा पुतला जलाया जाएगा। कोलार और छोला में आयोजित कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के शामिल होने की भी संभावना है।

    छोला दशहरा मैदान में रावण दहन से पहले मारवाड़ी रोड स्थित बांके बिहारी मंदिर से पारंपरिक चल समारोह निकाला जाएगा। इसमें करीब 10 झांकियां बैंड शहनाई पुलिस बैंड दुल-दुल घोड़ी और आदिवासी टोली आकर्षण का केंद्र रहेंगी। चल समारोह विभिन्न रास्तों से होते हुए घोड़ा नक्कास के मार्ग से मैदान पहुंचेगा। यहां रात करीब 9 बजे रावण दहन का कार्यक्रम प्रस्तावित है। दूसरी ओर राजेंद्र नगर में श्रीराम जानकी हिंदू उत्सव समिति की ओर से 70 फीट ऊंचे रावण का दहन किया जाएगा। यहां रामलीला सांस्कृतिक कार्यक्रम और मेले का आयोजन भी होगा। समिति ने रावण दहन के वीडियो पर सबसे ज्यादा व्यूज और लाइक्स लाने वाले इन्फ्लुएंसर को 11 हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है।

    इंदौर में उषागंज छावनी में 121 फीट ऊंचे रावण का दहन किया जाएगा। आयोजन के लिए 250 फीट लंबी लंका भी तैयार की गई है। शोभायात्रा के मैदान पहुंचने के बाद रावण दहन होगा और करीब डेढ़ घंटे तक आतिशबाजी की जाएगी। उज्जैन में दशहरा मैदान पर 101 फीट ऊंचा रावण जलाया जाएगा। इसके लिए देवास और ग्वालियर से कलाकार बुलाए गए हैं जो करीब 45 मिनट तक आतिशबाजी करेंगे। शहर के कार्तिक मैदान उन्हेल चौराहे और हीरा मिल मैदान में भी रावण दहन के आयोजन होंगे।

    दशहरे पर उज्जैन में बाबा महाकाल की सवारी भी विशेष आकर्षण रहेगी। चांदी की पालकी में सवार होकर बाबा महाकाल दशहरा मैदान पहुंचेंगे जहां शमी वृक्ष का पूजन किया जाएगा। सवारी मार्ग पर करीब एक लाख वर्गफीट क्षेत्र में रंगोली बनाने की तैयारी है। आयोजन के दौरान ड्रोन के माध्यम से पालकी पर पांच क्विंटल फूल बरसाने की योजना है। इस आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है और प्रशासन की ओर से भी व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

    प्रदेश के दूसरे शहरों में भी बड़े स्तर पर रावण दहन की तैयारी है। ग्वालियर के फूलबाग मैदान में 65 फीट ऊंचे रावण का दहन होगा। यहां राम जुलूस और रामलीला के समापन का कार्यक्रम भी रखा गया है। जबलपुर के ग्वारीघाट में 75 फीट ऊंचा रावण जलाया जाएगा जहां शिवकाशी से आए कलाकार आतिशबाजी करेंगे। मंदसौर में 80 फीट ऊंचे पुतले की खासियत यह होगी कि उसकी आंखें झपकेंगी गर्दन घूमेगी और तलवार वाला हाथ भी चलेगा। रायसेन में 35 फीट छिंदवाड़ा और सागर में 51 फीट तथा गुना में 31 फीट ऊंचे रावण का दहन किया जाएगा।

    इसके अलावा देवास आगर-मालवा बैतूल दमोह सेंधवा शाजापुर श्योपुर और आलीराजपुर सहित कई जिलों में भी रावण दहन के कार्यक्रम होंगे। सेंधवा में पहली बार रावण के साथ कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले भी जलाए जाएंगे। शाजापुर में 71 फीट ऊंचे रावण के साथ 25-25 फीट के कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले तैयार किए गए हैं। दशहरे पर पुलिस लाइन मंदिरों सामाजिक संगठनों और अखाड़ों में शस्त्र पूजन भी किया जाएगा। करणी सेना सहित कई संस्थाएं शौर्य प्रदर्शन और पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित करेंगी।

    इसी बीच कांग्रेस ने भी दशहरे पर अलग कार्यक्रम की घोषणा की है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अनुसार मध्य प्रदेश के सभी जिलों में रावण के स्थान पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला जलाया जाएगा। इस तरह प्रदेश में दशहरा धार्मिक आयोजनों के साथ राजनीतिक गतिविधियों के कारण भी चर्चा में रहेगा। बारिश की आशंका के बीच अब आयोजकों की नजर मौसम पर है ताकि रावण दहन और अन्य कार्यक्रम निर्धारित समय पर संपन्न हो सकें।

  • 2 से 20 फीट तक के रावण, कहीं कुंभकरण तो कहीं मेघनाथ, भोपाल में दशहरे के लिए सजा खास बाजार, महंगे हुए पुतले

    2 से 20 फीट तक के रावण, कहीं कुंभकरण तो कहीं मेघनाथ, भोपाल में दशहरे के लिए सजा खास बाजार, महंगे हुए पुतले


    भोपाल । दशहरे के पर्व को लेकर भोपाल में तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर में इन दिनों एक अनोखा बाजार लोगों का ध्यान खींच रहा है। यहां कपड़े या घरेलू सामान नहीं बल्कि रावण कुंभकरण और मेघनाथ के रंग-बिरंगे पुतले बिक रहे हैं। लिंक रोड नंबर-2 के आसपास कई जगहों पर सजे इस बाजार में लोग परिवार के साथ पुतले खरीदने पहुंच रहे हैं। बाजार में 2 फीट से लेकर 20 फीट तक ऊंचे पुतले उपलब्ध हैं। वहीं विशेष ऑर्डर पर 40 फीट या उससे अधिक ऊंचाई के पुतले भी तैयार किए जा रहे हैं। इनकी कीमत आकार और बनावट के अनुसार 800 रुपये से लेकर 40 हजार रुपये तक बताई जा रही है।

    भोपाल में दशहरे के अवसर पर बड़े स्तर पर रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। शहर में 18 से अधिक स्थानों पर प्रमुख आयोजन होंगे। इसके अलावा गली-मोहल्लों और कॉलोनियों में भी बड़ी संख्या में रावण दहन किया जाएगा। अनुमान है कि शहर में 7 हजार से ज्यादा जगहों पर पुतले जलाए जाएंगे। इसी मांग को देखते हुए तुलसीनगर लिंक रोड नंबर-2 सेकंड स्टॉफ बांसखेड़ी ईंटखेड़ी और पंचशील नगर सहित कई इलाकों में कारीगर पिछले डेढ़ से दो महीने से पुतले बनाने में जुटे हुए हैं। इस काम में 300 से अधिक कारीगर लगे हैं।

    कारीगरों ने अब तैयार पुतलों को सड़क किनारे बिक्री के लिए सजा दिया है। सोमवार को बाजार में खरीदारों की अच्छी भीड़ दिखाई दी। कई लोगों ने पहले ही अपनी जरूरत के हिसाब से पुतलों की बुकिंग करा दी थी। मंगलवार शाम तक खरीदारी जारी रहने की उम्मीद है। बड़े पुतलों को बनाने में खास मेहनत और समय लगता है। कारीगरों के मुताबिक एक बड़े पुतले को तैयार करने में करीब एक सप्ताह तक लग सकता है। इसके लिए बांस का ढांचा तैयार किया जाता है और फिर उस पर कपड़ा कागज तथा अन्य सजावटी सामग्री लगाई जाती है।

    इस बार पुतलों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। पुतले बनाने में इस्तेमाल होने वाले बांस सूत और कागज के दाम बढ़ने से लागत पर असर पड़ा है। कारीगर राखी पटेल के मुताबिक पहले जो बांस 150 रुपये में मिलता था उसकी कीमत बढ़कर 200 रुपये हो गई है। इसी तरह सूत के दाम 120 रुपये से बढ़कर 180 रुपये तक पहुंच गए हैं। कागज की कीमत भी 60 रुपये से बढ़कर 80 रुपये बताई गई है। सामग्री महंगी होने के कारण ग्राहकों को भी पहले की तुलना में अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।

    करोंद से खरीदारी करने पहुंचे अजय सोनी ने बताया कि इस बार पुतलों की कीमतों में करीब 500 से 1000 रुपये तक का अंतर देखने को मिल रहा है। उन्होंने वॉटरप्रूफ पुतला खरीदने की कोशिश की लेकिन उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें कागज वाला पुतला लेना पड़ा। बारिश की आशंका के चलते इस बार कुछ कारीगरों ने पानी से बचाव के लिए विशेष पुतले भी तैयार किए हैं। हालांकि हर आकार और हर कीमत में ऐसे पुतले उपलब्ध हों यह जरूरी नहीं है।

    रावण के पुतलों के साथ मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले भी खरीदारों को मिल रहे हैं। इनमें आकर्षक वेशभूषा और हथियारों के जरिए इन्हें खास रूप दिया जाता है। सामान्य तौर पर पुतले बिना पटाखों के बनाए जाते हैं। यदि खरीदार पटाखे लगवाना चाहते हैं तो लागत और कीमत बढ़ जाती है। बड़े पुतलों में बांस कपड़ा धागा और कागज अधिक मात्रा में इस्तेमाल होता है। इन्हें बनाने में तीन से चार कारीगरों की मेहनत भी लगती है।

    इस बार कारीगरों के सामने सबसे बड़ी चिंता मौसम को लेकर है। मंगलवार को बारिश की संभावना जताई गई है। इससे पुतलों के भीगने और बिक्री प्रभावित होने का डर बना हुआ है। वर्ष 2022 में दशहरे के दौरान तेज बारिश के कारण कई जगह पुतले भीग गए थे और आयोजनों में परेशानी आई थी। बांसखेड़ी क्षेत्र में कुछ कारीगरों को पुतले बस स्टॉप में रखकर बचाने पड़े थे जिससे नुकसान भी हुआ था। अब तीन साल बाद फिर बारिश की आशंका ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में कारीगरों को उम्मीद है कि मौसम साथ देगा और दशहरे से पहले अधिक से अधिक पुतलों की बिक्री हो सकेगी।

  • विजयादशमी पर मध्यप्रदेश में होगा शस्त्र-पूजन, इंदौर में मुख्यमंत्री मोहन यादव करेंगे पूजा, 31 जिलों में मंत्री संभालेंगे जिम्मेदारी

    विजयादशमी पर मध्यप्रदेश में होगा शस्त्र-पूजन, इंदौर में मुख्यमंत्री मोहन यादव करेंगे पूजा, 31 जिलों में मंत्री संभालेंगे जिम्मेदारी

    मध्यप्रदेश: में विजयादशमी के अवसर पर 20 अक्टूबर 2026 को प्रदेशव्यापी शस्त्र-पूजन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। राज्य सरकार ने इस आयोजन के लिए जिलों के अनुसार जिम्मेदारियां तय की हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव इंदौर में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर शस्त्र-पूजन करेंगे। वहीं, प्रदेश के 31 जिलों में मंत्री और अन्य प्रमुख जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। शेष 24 जिलों में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक कार्यक्रम की जिम्मेदारी संभालेंगे।

    सरकार की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन की परंपरा को आगे बढ़ाना और सुरक्षा, साहस तथा राष्ट्र के प्रति सम्मान के भाव को रेखांकित करना है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस परंपरा को देश की सैन्य शक्ति, सुरक्षा और स्वतंत्रता के प्रति सम्मान का प्रतीक बताया है। उनका कहना है कि शस्त्र-पूजन को साहस, आत्मरक्षा और अन्याय के खिलाफ खड़े होने की भावना से जोड़कर देखा जाना चाहिए।

    इन जिलों में प्रमुख नेता करेंगे शस्त्र-पूजन
    राज्य सरकार ने कई जिलों में मंत्रियों और प्रमुख जनप्रतिनिधियों को कार्यक्रम की जिम्मेदारी सौंपी है। इंदौर में मुख्यमंत्री मोहन यादव शस्त्र-पूजन करेंगे। ग्वालियर में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर कार्यक्रम की अगुवाई करेंगे। मंदसौर में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और रीवा में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल शस्त्र-पूजन में शामिल होंगे।

    राजधानी भोपाल में मंत्री विश्वास सारंग पूजा-अर्चना करेंगे। धार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। नरसिंहपुर में मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और जबलपुर में मंत्री राकेश सिंह शस्त्र-पूजन करेंगे। सीहोर में मंत्री करण सिंह वर्मा तथा नर्मदापुरम में मंत्री उदय प्रताप सिंह कार्यक्रम की जिम्मेदारी संभालेंगे।इनके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों में भी मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदारियां दी गई हैं। सरकार की योजना के अनुसार, कुल 31 जिलों में मंत्री स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

    24 जिलों में प्रशासन संभालेगा जिम्मेदारी
    प्रदेश के बाकी 24 जिलों में शस्त्र-पूजन कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को दी गई है। इन स्थानों पर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक मिलकर आयोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। इस तरह सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है।प्रशासनिक अधिकारियों की भागीदारी के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निर्धारित कार्यक्रम संबंधित जिलों में आयोजित हो सके। शस्त्र-पूजन में सुरक्षा से जुड़े विभागों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी।

    विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन का धार्मिक महत्व
    सनातन परंपरा में शस्त्रों को शक्ति, साहस और आत्मरक्षा का प्रतीक माना जाता है। विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन की परंपरा का उद्देश्य शक्ति के सदुपयोग और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की भावना को मजबूत करना है। इस अवसर पर सैनिक और पुलिसकर्मी अपने हथियारों की पूजा करते हैं, जबकि कई अन्य क्षेत्रों में लोग अपने कामकाज से जुड़े औजारों का पूजन करते हैं।


    शस्त्र-पूजन की एक मान्यता महाभारत काल से जुड़ी है। धार्मिक कथाओं के अनुसार, पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान अपने हथियार शमी के पेड़ के नीचे छिपाए थे। अज्ञातवास पूरा होने के बाद अर्जुन ने शमी के पेड़ से अपने शस्त्र निकाले और राजा विराट के राज्य की रक्षा के लिए कौरवों की सेना का सामना किया। इसी मान्यता के कारण कई स्थानों पर विजयादशमी के दिन शमी के पेड़ और शस्त्रों की पूजा की जाती है।

    राम और दुर्गा की विजय से जुड़ा पर्व
    विजयादशमी को भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और मां दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध की मान्यताओं से भी जोड़ा जाता है। दोनों प्रसंग बुराई, अन्याय और अधर्म पर अच्छाई की जीत का संदेश देते हैं। इसी भावना के साथ शस्त्र-पूजन में शक्ति का इस्तेमाल सही उद्देश्यों, सुरक्षा और धर्म की रक्षा के लिए करने का संकल्प लिया जाता है।

    मध्यप्रदेश में होने वाला यह आयोजन धार्मिक परंपरा के साथ-साथ सुरक्षा और जिम्मेदारी के महत्व को भी सामने रखेगा। प्रदेश के सभी 55 जिलों में तय व्यवस्था के अनुसार कार्यक्रम संपन्न कराने की जिम्मेदारी मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपी गई है।

  • रावण दहन किस शास्त्र में लिखा है, उज्जैन में युवा ब्राह्मण समाज का सवाल, चार समितियों को कानूनी नोटिस

    रावण दहन किस शास्त्र में लिखा है, उज्जैन में युवा ब्राह्मण समाज का सवाल, चार समितियों को कानूनी नोटिस

     
    उज्जैन  मध्य प्रदेश के उज्जैन में दशहरे पर होने वाले रावण दहन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने रावण दहन आयोजित करने वाली चार समितियों को वकील के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजकर सात दिन के भीतर जवाब मांगा है। समाज ने आयोजकों से सवाल किया है कि आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को रावण वध होने का उल्लेख किस धर्मशास्त्र या पुराण में मिलता है। नोटिस में कहा गया है कि यदि निर्धारित समय में संतोषजनक प्रमाण नहीं दिया गया तो वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है। इस मामले के सामने आने के बाद शहर में दशहरा उत्सव से पहले धार्मिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है।उज्जैन  ।

    जानकारी के मुताबिक 20 अक्टूबर को दशहरा पर्व के अवसर पर उज्जैन में विभिन्न स्थानों पर रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं। इससे पहले अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने इस पर आपत्ति जताते हुए संबंधित आयोजक समितियों को नोटिस जारी कराया है। महाकाल मंदिर के पुजारी और संगठन के संस्थापक अध्यक्ष महेश पुजारी ने अधिवक्ता अश्विन चौधरी के माध्यम से यह नोटिस भिजवाया है। जिन चार समितियों को नोटिस भेजा गया है उनमें लाला ओम अमरनाथ खत्री दशहरा उत्सव समिति कार्तिक मेला दशहरा उत्सव समिति सिद्धवट दशहरा समिति और शास्त्री नगर दशहरा उत्सव समिति शामिल हैं।

    नोटिस में आयोजकों से कहा गया है कि वे स्पष्ट करें कि आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को रावण वध किए जाने का उल्लेख किस धार्मिक ग्रंथ में मौजूद है। समाज ने संबंधित समितियों से इस तिथि पर रावण दहन नहीं करने का अनुरोध भी किया है। नोटिस के अनुसार सात दिन के भीतर शास्त्रीय आधार स्पष्ट नहीं किया गया तो आगे कानूनी कदम उठाने की चेतावनी दी गई है। इसमें संभावित कार्रवाई से जुड़े हर्जे और खर्च की जिम्मेदारी भी आयोजक समितियों पर डालने की बात कही गई है। हालांकि इस मामले में आयोजक समितियों का पक्ष सामने आने के बाद ही उनकी प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज के संस्थापक अध्यक्ष महेश पुजारी का कहना है कि रावण दहन के नाम पर ब्राह्मण समाज का अपमान नहीं होना चाहिए। उनका आरोप है कि देश के कई हिस्सों में रावण दहन की परंपरा के दौरान ब्राह्मण समुदाय की भावनाएं आहत होती हैं। उन्होंने आयोजक समितियों से सवाल किया कि यदि रावण दहन धार्मिक परंपरा का हिस्सा है तो उसके समर्थन में शास्त्रीय प्रमाण सार्वजनिक किए जाने चाहिए। महेश पुजारी का कहना है कि रावण के चरित्र और उससे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं पर चर्चा करते समय किसी समुदाय का अपमान नहीं किया जाना चाहिए।

    महेश पुजारी ने यह भी कहा कि अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज देश की विभिन्न संस्थाओं से रावण दहन बंद करने का अनुरोध कर रहा है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए ब्राह्मणों की शिखा और यज्ञोपवीत के अपमान की घटनाओं पर भी अपनी बात रखी। संगठन की मांग है कि धार्मिक आयोजनों में किसी समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली गतिविधियों से बचा जाए।

    फिलहाल उज्जैन में दशहरे से पहले रावण दहन का मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर आयोजन समितियों की तैयारियां जारी हैं तो दूसरी ओर युवा ब्राह्मण समाज ने शास्त्रीय प्रमाण और जवाबदेही की मांग उठाई है। अब सात दिन की समयसीमा में समितियां क्या जवाब देती हैं और इस विवाद पर प्रशासन या आयोजकों की ओर से क्या रुख सामने आता है इस पर सबकी नजर रहेगी।