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  • केमिस्ट एसोसिएशन की रैली: ई-फार्मेसी के खिलाफ कलेक्ट्रेट पहुंचा विरोध

    केमिस्ट एसोसिएशन की रैली: ई-फार्मेसी के खिलाफ कलेक्ट्रेट पहुंचा विरोध


    मध्य प्रदेश । अशोकनगर में बुधवार को ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर मेडिकल दुकानों का एक दिवसीय बंद देखने को मिला। जिलेभर के दवा व्यापारियों ने ई-फार्मेसी और बड़े कॉरपोरेट्स की कथित अनुचित व्यापारिक नीतियों के खिलाफ विरोध जताते हुए अपनी दुकानें बंद रखीं। शहर की लगभग 180 और जिले की कुल 297 मेडिकल दुकानों ने इस बंद में भाग लिया, जिससे दिनभर बाजार में मेडिकल स्टोरों के शटर बंद नजर आए।

    दोपहर के समय बड़ी संख्या में केमिस्ट और दवा व्यापारी एकत्रित हुए और शहर में रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। व्यापारी हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने की मांग कर रहे थे। रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई कलेक्ट्रेट पहुंची, जहां प्रतिनिधिमंडल ने तहसीलदार को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में केंद्र सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री से जुड़ी अधिसूचनाएं वापस लेने और ई-फार्मेसी पर सख्त नियंत्रण लगाने की मांग की गई।

    एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि जिला संगठन मध्यप्रदेश केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन और राष्ट्रीय संगठन ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स से संबद्ध है, जो देशभर के करीब 12.40 लाख केमिस्ट और दवा वितरकों का प्रतिनिधित्व करता है। संगठन का आरोप है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और बड़े कॉरपोरेट्स भारी छूट और प्रिडेटोरी प्राइसिंग के जरिए छोटे और मध्यम मेडिकल संचालकों के व्यापार को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे लाखों परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।

    दवा व्यापारियों ने जनस्वास्थ्य को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उनका कहना है कि ऑनलाइन माध्यम से बिना वैध डॉक्टर पर्चे के दवाइयों की बिक्री हो रही है। एंटीबायोटिक्स, नशीली और आदत बनाने वाली दवाओं की आसान उपलब्धता मरीजों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। साथ ही नकली प्रिस्क्रिप्शन और दवाओं के गलत भंडारण जैसी समस्याएं भी लगातार बढ़ रही हैं। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि इस पर नियंत्रण नहीं लगाया गया तो एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या तेजी से बढ़ सकती है।

    ज्ञापन में विशेष रूप से केंद्र सरकार की 28 अगस्त 2018 की अधिसूचना GSR 817(E) और 26 मार्च 2020 की अधिसूचना GSR 220(E) को वापस लेने की मांग उठाई गई। व्यापारियों का कहना है कि कोविड काल में लागू की गई इन व्यवस्थाओं का अब गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे पारंपरिक मेडिकल व्यापार प्रभावित हो रहा है।

    प्रदर्शनकारी व्यापारियों ने कहा कि वे सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री पर स्पष्ट और सख्त नियम लागू करने की मांग कर रहे हैं, ताकि जनस्वास्थ्य सुरक्षित रहे और छोटे व्यापारियों का अस्तित्व बचाया जा सके। पूरे दिन चले इस विरोध प्रदर्शन के दौरान दवा बाजार में सन्नाटा पसरा रहा और कई लोगों को मेडिकल स्टोर बंद होने के कारण दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा।

    अशोकनगर में ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में 297 मेडिकल दुकानें बंद रहीं। जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने रैली निकालकर कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपा और ई-फार्मेसी पर रोक लगाने की मांग की। व्यापारियों ने जनस्वास्थ्य और छोटे कारोबारियों की आजीविका पर खतरे की बात कही।

  • ई-फार्मेसी के विरोध में सड़कों पर उतरे केमिस्ट, पीएम के नाम सौंपा ज्ञापन

    ई-फार्मेसी के विरोध में सड़कों पर उतरे केमिस्ट, पीएम के नाम सौंपा ज्ञापन


    मध्य प्रदेश । शिवपुरी में बुधवार को ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के विरोध में केमिस्टों की देशव्यापी हड़ताल का बड़ा असर देखने को मिला। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर जिलेभर के करीब 350 मेडिकल स्टोर पूरे दिन बंद रहे। इनमें शहर के लगभग 150 मेडिकल प्रतिष्ठान भी शामिल थे। केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन ने इस दौरान विरोध प्रदर्शन करते हुए कलेक्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री Narendra Modi के नाम ज्ञापन सौंपा और ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने की मांग की।

    केमिस्टों ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स बिना वैध चिकित्सकीय पर्चे के दवाओं की होम डिलीवरी कर रहे हैं, जो नियमों के खिलाफ है। साथ ही भारी डिस्काउंट देकर छोटे मेडिकल व्यापारियों के कारोबार को प्रभावित किया जा रहा है। एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से नियम GSR 817(E) और GSR 220(E) को तत्काल वापस लेने की मांग उठाई है।

    एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. चन्द्र प्रकाश गोयल और सचिव गोपाल दास अग्रवाल ने कहा कि दवाएं कोई सामान्य उपभोक्ता वस्तु नहीं हैं, बल्कि सीधे जन स्वास्थ्य से जुड़ी होती हैं। उनका कहना है कि अनियंत्रित ऑनलाइन बिक्री मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायतों के बावजूद सरकार इस मुद्दे पर प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रही है।

    केमिस्टों ने यह भी कहा कि कोविड महामारी के दौरान स्थानीय मेडिकल स्टोरों ने फ्रंटलाइन हेल्थ सपोर्ट की भूमिका निभाई थी और लोगों तक दवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। इसके बावजूद आज छोटे दवा व्यापारियों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

    हालांकि जिलेभर में मेडिकल स्टोर बंद रहने के बावजूद मरीजों को ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। हड़ताल को ध्यान में रखते हुए एसोसिएशन ने पहले से ही आवश्यक और आपातकालीन दवाओं की व्यवस्था कर दी थी। इसके अलावा प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र और अस्पताल परिसरों में संचालित मेडिकल स्टोर सामान्य रूप से खुले रहे, जहां जरूरतमंद मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराई गईं।

    दवा व्यापारियों का कहना है कि यदि सरकार ने ऑनलाइन दवा बिक्री को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में आंदोलन और तेज किया जाएगा। उनका मानना है कि बिना निगरानी के ऑनलाइन दवा वितरण से न केवल छोटे व्यापारियों को नुकसान हो रहा है, बल्कि मरीजों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।