Tag: Early Menopause

  • कम उम्र में बंद हो रहे पीरियड्स कहीं समय से पहले मेनोपॉज का संकेत तो नहीं जानिए पूरी सच्चाई

    कम उम्र में बंद हो रहे पीरियड्स कहीं समय से पहले मेनोपॉज का संकेत तो नहीं जानिए पूरी सच्चाई


    नई दिल्ली । मेनोपॉज को लंबे समय तक केवल 45 से 50 वर्ष की उम्र के बाद होने वाली सामान्य जैविक प्रक्रिया माना जाता रहा है लेकिन अब चिकित्सा विशेषज्ञों के सामने एक नई और चिंताजनक तस्वीर उभर रही है। हाल के अध्ययनों में यह संकेत मिले हैं कि समय से पहले मेनोपॉज यानी प्रीमैच्योर ओवेरियन फेल्योर के मामले अब किशोरियों में भी सामने आने लगे हैं। कुछ मामलों में 13 वर्ष तक की लड़कियों में भी अंडाशय के समय से पहले काम करना बंद करने की समस्या दर्ज की गई है। विशेषज्ञ इसे दुर्लभ जरूर मानते हैं लेकिन चेतावनी देते हैं कि यदि समय रहते इसकी पहचान और उपचार न किया जाए तो भविष्य में प्रजनन क्षमता के साथ हड्डियों और हृदय स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी किशोरी के पीरियड्स लगातार अनियमित रहें या चार महीने अथवा उससे अधिक समय तक माहवारी बंद रहे तो इसे केवल हार्मोनल बदलाव या बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में स्त्री रोग विशेषज्ञ से तुरंत परामर्श लेना जरूरी है। आवश्यकता पड़ने पर हार्मोन जांच के साथ जेनेटिक ऑटोइम्यून और अन्य चिकित्सकीय परीक्षण भी कराए जा सकते हैं ताकि बीमारी का समय रहते पता लगाया जा सके।

    यूनान की नेशनल एंड कपोडिस्ट्रियन यूनिवर्सिटी ऑफ एथेंस के विशेषज्ञों द्वारा किए गए रिव्यू अध्ययन में बताया गया है कि यदि अंडाशय समय से पहले काम करना बंद कर दें तो महिला की प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी के कारण हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और भविष्य में ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम भी सामान्य महिलाओं की तुलना में अधिक हो सकता है।

    अमेरिका के कई प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में किए गए शोध में 13 से 21 वर्ष की आयु की लड़कियों में ऐसे मामलों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि कई मरीजों में बीमारी की पहचान इसलिए देर से हुई क्योंकि शुरुआती लक्षणों को सामान्य हार्मोनल असंतुलन समझ लिया गया। यही कारण है कि विशेषज्ञ अब माता पिता और किशोरियों दोनों को मासिक धर्म में होने वाले असामान्य बदलावों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।

    अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि जिन महिलाओं में 40 वर्ष की आयु से पहले मेनोपॉज हो जाता है उनमें भविष्य में हार्ट अटैक स्ट्रोक और अन्य हृदय रोगों का खतरा काफी बढ़ जाता है। शोध के अनुसार 40 वर्ष से पहले मेनोपॉज होने पर पहली बार हृदय रोग होने का जोखिम सामान्य महिलाओं की तुलना में लगभग 55 प्रतिशत अधिक पाया गया। वहीं 40 से 44 वर्ष की उम्र के बीच मेनोपॉज होने पर यह खतरा 30 प्रतिशत और 45 से 49 वर्ष के बीच होने पर 12 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया।

    विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि महिलाओं के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का भी मेनोपॉज से गहरा संबंध है। हिंसा मानसिक तनाव और लंबे समय तक चलने वाली भावनात्मक परेशानियां भी समय से पहले मेनोपॉज का जोखिम बढ़ा सकती हैं। इसलिए संतुलित आहार नियमित व्यायाम पर्याप्त नींद तनाव नियंत्रण और समय पर चिकित्सकीय जांच महिलाओं के संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी हैं। यदि पीरियड्स लंबे समय तक बंद रहें या लगातार अनियमित हों तो बिना देरी किए विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित और प्रभावी कदम माना जाता है।

  • 40 साल से पहले मेनोपॉज बना सकता है दिल का दुश्मन, महिलाओं में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का बढ़ रहा खतरा

    40 साल से पहले मेनोपॉज बना सकता है दिल का दुश्मन, महिलाओं में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का बढ़ रहा खतरा


    नई दिल्ली । महिलाओं के जीवन में मेनोपॉज एक स्वाभाविक जैविक प्रक्रिया है, लेकिन यदि यह सामान्य उम्र से पहले शुरू हो जाए तो इसके गंभीर स्वास्थ्य परिणाम सामने आ सकते हैं। हाल ही में प्रकाशित एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने इस विषय को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। शोधकर्ताओं के अनुसार, 40 वर्ष की उम्र से पहले मेनोपॉज का अनुभव करने वाली महिलाओं में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा सामान्य महिलाओं की तुलना में काफी बढ़ जाता है।

    मेडिकल जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में 26 देशों की 1.11 लाख से अधिक महिलाओं के स्वास्थ्य आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। शोध में पाया गया कि जिन महिलाओं में 40 से 44 वर्ष की उम्र के बीच मेनोपॉज हुआ, उनमें सामान्य उम्र में मेनोपॉज होने वाली महिलाओं की तुलना में हृदय रोगों का खतरा 30 से 40 प्रतिशत तक अधिक था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निष्कर्ष महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चेतावनी है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    भारत की स्थिति इस मामले में और भी चिंताजनक बताई गई है। अध्ययन में शामिल भारतीय महिलाओं के आंकड़ों से पता चला कि बड़ी संख्या में महिलाओं को समय से पहले या अपेक्षाकृत कम उम्र में मेनोपॉज का सामना करना पड़ रहा है। शोध के अनुसार लगभग 18 प्रतिशत महिलाओं में प्रीमैच्योर मेनोपॉज देखा गया, जबकि एक बड़ी संख्या 40 से 44 वर्ष की आयु में ही मेनोपॉज के चरण में पहुंच गई। यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारतीय महिलाओं को इस समस्या के प्रति अधिक जागरूक होने की आवश्यकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि मेनोपॉज से पहले महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन पर्याप्त मात्रा में मौजूद रहता है, जो हृदय और रक्त वाहिकाओं को सुरक्षा प्रदान करता है। लेकिन जैसे-जैसे मेनोपॉज की प्रक्रिया शुरू होती है, एस्ट्रोजन का स्तर कम होने लगता है। इसके परिणामस्वरूप हृदय रोगों का जोखिम बढ़ जाता है। यही कारण है कि समय से पहले मेनोपॉज महिलाओं को कम उम्र में ही हृदय संबंधी समस्याओं की ओर धकेल सकता है।

    शोध में यह भी सामने आया कि दक्षिण एशियाई देशों की महिलाओं में मेनोपॉज की औसत उम्र वैश्विक औसत से कम है। विशेषज्ञ इसके पीछे कई कारण बताते हैं, जिनमें लगातार बढ़ता तनाव, धूम्रपान, प्रदूषण, खराब खानपान, नींद की कमी, मधुमेह और जीवनशैली से जुड़ी अन्य समस्याएं शामिल हैं। इसके अलावा एनीमिया, पोषण की कमी, कम उम्र में विवाह और बार-बार गर्भधारण जैसे सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी कारक भी महिलाओं में जल्दी मेनोपॉज की वजह बन सकते हैं।

    डॉक्टरों का मानना है कि समय से पहले मेनोपॉज का सामना करने वाली महिलाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए। हार्ट हेल्थ, ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की निगरानी के साथ-साथ मेनोपॉज संबंधी स्क्रीनिंग भी जरूरी है। समय रहते पहचान और उचित जीवनशैली अपनाकर हृदय रोगों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    विशेषज्ञ महिलाओं को संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तनाव नियंत्रण और धूम्रपान से दूरी बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं। क्योंकि स्वस्थ जीवनशैली ही समय से पहले मेनोपॉज और उससे जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका मानी जाती है।