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  • J&K के डोडा क्षेत्र में सुबह-सुबह कांपी धरती, आया 4.6 तीव्रता का भूकंप

    J&K के डोडा क्षेत्र में सुबह-सुबह कांपी धरती, आया 4.6 तीव्रता का भूकंप


    जम्मू।
    जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के डोडा (Doda) क्षेत्र में रविवार की सुबह भूकंप (Earthquake) के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.6 मापी गई। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (National Centre for Seismolog) के अनुसार, यह भूकंप सुबह 4 बजकर 32 मिनट पर आया। फिलहाल किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है।


    महाराष्ट्र के हिंगोली में भूकंप के झटके

    इससे पहले शनिवार सुबह महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के हिंगोली जिले में 4.7 तीव्रता का भूकंप आया था। इसके झटके नांदेड और परभणी जिलों के कुछ हिस्सों में भी महसूस किए गए। अधिकारियों के अनुसार अभी तक किसी तरह के जान-माल के नुकसान की तत्काल सूचना नहीं है। हालांकि, पांगरा शिंदे गांव में कुछ घरों और सामुदायिक भवनों में दरारें आने की खबर है। हिंगोली के कलेक्टर राहुल गुप्ता ने बताया कि भूकंप सुबह 8 बजकर 45 मिनट पर दर्ज किया गया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, इसका केंद्र जमीन से करीब 10 किलोमीटर की गहराई पर हिंगोली जिले के वसमत तालुका के शिरली गांव के पास था।


    क्यों आता है भूकंप?

    पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।


    जानें क्या है भूंकप के केंद्र और तीव्रता का मतलब?

    भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर को है तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा।


    कैसे मापा जाता है भूकंप की तिव्रता और क्या है मापने का पैमाना?

    भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से होती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से मापा जाता है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से जो ऊर्जा निकलती है, उसकी तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का अंदाजा होता है।

  • पाकिस्तान में सुबह-सुबह भूकंप के तेज झटके से कांपी धरती, 4.6 मापी गई तीव्रता

    पाकिस्तान में सुबह-सुबह भूकंप के तेज झटके से कांपी धरती, 4.6 मापी गई तीव्रता


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) में भूकंप (Earthquake) के तेज झटके लगे हैं. नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी National Center for Seismology.- (NCS) के अनुसार, आज सुबह पाकिस्तान में 4.6 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। इसका केंद्र बलूचिस्तान के बारखान से लगभग 55 किलोमीटर उत्तर में स्थित था.


    सुबह-सुबह कांपी धरती

    एनसीएस के अनुसार, भूकंप 26 मार्च 2026 को सुबह 5:56 बजे (भारतीय समय) आया. भूकंप का केंद्र 30.394° उत्तरी अक्षांश और 69.534° पूर्वी देशांतर पर दर्ज किया गया, जबकि इसकी गहराई 10 किलोमीटर थी. भूकंप के झटके आसपास के इलाकों में भी महसूस किए गए, जिससे कुछ समय के लिए लोगों में दहशत फैल गई।


    जान-माल का नुकसान नहीं

    फिलहाल किसी बड़े जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है. प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है. विशेषज्ञों के मुताबिक, पाकिस्तान एक भूकंप संभावित क्षेत्र में स्थित है, क्योंकि यह भारतीय, यूरेशियाई और अरब टेक्टोनिक प्लेटों की सीमा के पास आता है, जिस कारण इस क्षेत्र में अक्सर भूकंपीय गतिविधियां दर्ज की जाती रहती हैं.


    क्यों आता है भूकंप?

    भूकंप पृथ्वी की सतह के अचानक कंपन को कहते हैं, जो जमीन के अंदर टेक्टोनिक प्लेटों के टकराने, घर्षण या ऊर्जा मुक्त होने के कारण आता है. यह ऊर्जा शॉक वेव्स के रूप में फैलती है, जिससे जमीन हिलती है और इमारतें गिर सकती हैं. भूकंप को रिक्टर पैमाने पर मापा जाता है और इसके कारण भूस्खलन, सुनामी या आग जैसी आपदाएं आ सकती हैं.

    केंद्र (Epicenter): जमीन के अंदर वह स्थान जहां से भूकंप शुरू होता है, उसे ‘फोकस’ कहते हैं, और ठीक ऊपर सतह पर स्थित स्थान को ‘एपिसेंटर’ कहते हैं.


    भूकंप के दौरान क्या करें?

    मेज के नीचे छिपें और उसे पकड़ें. अगर संभव हो तो इमारतों से दूर, खुले मैदान में चले जाएं. लिफ्ट का प्रयोग न करें. भूकंप के दौरान हमेशा सीढ़ियों का इस्तेमाल करें.