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  • इंडोनेशिया में 7.7 के बाद 6.9 तीव्रता का भूकंप, 40 लोगों की मौत; भूस्खलन से बढ़ी तबाही

    इंडोनेशिया में 7.7 के बाद 6.9 तीव्रता का भूकंप, 40 लोगों की मौत; भूस्खलन से बढ़ी तबाही


    जकार्ता।
    इंडोनेशिया के फ्लोरेस द्वीप के पास शनिवार को आए शक्तिशाली भूकंप ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। 7.7 तीव्रता के भूकंप के बाद 6.9 तीव्रता का एक और तेज झटका महसूस किया गया। भूकंप और उसके बाद हुए भूस्खलन में अब तक कम से कम 40 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान जारी है।

    भूकंप के तेज झटकों से कई मकान और अन्य इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं। कई स्थानों पर सड़कें भूस्खलन के मलबे से बंद हो गईं। दहशत के कारण लोग घरों से बाहर निकल आए। इंडोनेशिया की आपदा प्रबंधन एजेंसी (BNPB) के प्रमुख सुहार्यांतो के अनुसार राहत और बचाव दल प्रभावित इलाकों में पहुंच रहे हैं। ऐसे में मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है।

    भूस्खलन में दबे लोग, कई इलाकों में तबाही

    भूकंप के बाद फ्लोरेस के कई हिस्सों में भूस्खलन हुआ। सिक्का, वेस्ट मंग्गाराई और ईस्ट मंग्गाराई क्षेत्रों से कम से कम 20 शव बरामद किए जाने की जानकारी है। इनमें रेओके गांव में भूस्खलन की चपेट में आकर जान गंवाने वाले आठ लोग भी शामिल हैं।

    हादसे में छह लोग घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं, दो ग्रामीणों के मलबे में दबकर लापता होने की सूचना भी सामने आई है। राहत दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं।

    सड़कें मलबे से बंद, इमारतों को नुकसान

    भूकंप के कारण फ्लोरेस में कई घरों और सरकारी समेत अन्य इमारतों को नुकसान पहुंचा है। सामने आए वीडियो में कुछ इमारतें क्षतिग्रस्त और गिरी हुई दिखाई दे रही हैं। भूकंप के झटकों के बाद बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित स्थानों की ओर निकल गए।

    भूस्खलन के कारण कई सड़कों पर आवाजाही प्रभावित हुई है। राहत एवं बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

    सुनामी की चेतावनी से मचा डर

    शक्तिशाली भूकंप के बाद अधिकारियों ने सुनामी की चेतावनी जारी की थी। इससे समुद्र तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों में दहशत फैल गई। हालांकि, बाद में समुद्र के जलस्तर में कोई बड़ा बदलाव नहीं मिलने पर सुनामी की चेतावनी वापस ले ली गई।

    फिलहाल प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी है। टीमें मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रही हैं और भूकंप से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अभियान आगे बढ़ने के साथ मृतकों और घायलों की संख्या में बदलाव हो सकता है।

  • Maharashtra: नासिक में सुबह-सुबह महसूस किए गए भूकंप के झटके… तीव्रता 3.4 रही

    Maharashtra: नासिक में सुबह-सुबह महसूस किए गए भूकंप के झटके… तीव्रता 3.4 रही


    नासिक।
    महाराष्ट्र (Maharashtra) के नासिक (Nashik) में शुक्रवार सुबह-सुबह भूकंप के झटके (Earthquake tremors) महसूस किए गए। जानकारी के मुताबिक, सुबह करीब 5 बजकर 32 मिनट पर आए इस भूकंप की तीव्रता 3.4 बताई जा रही है.

    इससे पहले महाराष्ट्र के पालघर में भी सोमवार रात करीब एक घंटे के अंदर भूकंप के दो झटके महसूस किए गए. दोनों झटकों की तीव्रता 3.4 रही थी। महाराष्ट्र के पालघर में पहला झटका रात 10:04 बजे महसूस किया गया. करीब 56 मिनट बाद 11 बजे फिर भूकंप आया. दोनों की तीव्रता 3.4 मापी गई।

    बता दें, भूकंप की तीव्रता को रिक्टर स्केल पर मापा जाता है. 7.0 या उससे अधिक तीव्रता वाले भूकंप को खतरनाक श्रेणी में रखा जाता है. वहीं, 2.0 या उससे कम तीव्रता वाले भूकंप माइक्रो भूकंप कहते हैं, जिन्हें अधिकांश लोग महसूस भी नहीं कर पाते. दूसरी ओर, 4.5 या उससे अधिक तीव्रता का भूकंप इमारतों और घरों को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है।

    इस बीच, लद्दाख के लेह में भी गुरुवार को सुबह-सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के मुताबिक, सुबह 6:05 बजे आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.5 दर्ज की गई।


    कैसे आता है भूकंप?

    धरती के अंदर 7 प्लेट्स ऐसी होती हैं जो लगातार घूम रही हैं. ये प्लेट्स जिन जगहों पर ज्यादा टकराती हैं, उसे फॉल्ट लाइन जोन कहते हैं. बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं. जब प्रेशर ज्यादा बनने लगता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं. इन प्लेट्स के टूटने के कारण अंदर की एनर्जी बाहर आने का रास्ता खोजती है. इस डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।

  • जापान में शक्तिशाली भूकंप के बाद सोनी का कुमामोटो प्लांट बंद, उत्पादन पर असर का आकलन जारी

    जापान में शक्तिशाली भूकंप के बाद सोनी का कुमामोटो प्लांट बंद, उत्पादन पर असर का आकलन जारी

    नई दिल्ली । जापान के कुमामोटो क्षेत्र में आए शक्तिशाली भूकंप के बाद सोनी सेमीकंडक्टर सॉल्यूशंस ने एहतियाती कदम उठाते हुए अपने कुमामोटो टेक्नोलॉजी सेंटर का परिचालन अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। कंपनी ने बताया कि प्लांट की इमारतों, उत्पादन उपकरणों और विनिर्माण लाइनों पर भूकंप के प्रभाव का विस्तृत आकलन किया जा रहा है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उत्पादन दोबारा कब शुरू होगा।

    कंपनी के अनुसार, मंगलवार को स्थानीय समयानुसार शाम 4:27 बजे भूकंप आने के तुरंत बाद किकुयो कस्बे स्थित सोनी सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉर्पोरेशन के संयंत्र में उत्पादन रोक दिया गया था। यह निर्णय कर्मचारियों की सुरक्षा और संभावित तकनीकी नुकसान का निरीक्षण करने के उद्देश्य से लिया गया। विशेषज्ञों की टीम पूरे परिसर का निरीक्षण कर रही है ताकि परिचालन फिर से शुरू करने से पहले सभी सुरक्षा मानकों की पुष्टि की जा सके।

    सोनी ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके नागासाकी, ओइता और कागोशिमा स्थित अन्य टेक्नोलॉजी सेंटर सामान्य स्थिति में हैं। इन केंद्रों में किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली है और भूकंप के समय वहां मौजूद किसी भी कर्मचारी के घायल होने की खबर भी सामने नहीं आई है। कंपनी लगातार सभी इकाइयों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

    भूकंप की तीव्रता 7.1 मापी गई, जिसके कारण कुमामोटो और आसपास के इलाकों में व्यापक असर देखने को मिला। कई इमारतों को नुकसान पहुंचा और राहत एवं बचाव अभियान तुरंत शुरू कर दिए गए। अधिकारियों के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन जारी है, जबकि बचाव दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश और सुरक्षित निकासी में जुटे हुए हैं।

    जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने बताया कि भूकंप में कम से कम 13 लोगों की मौत हुई है और कई अन्य लोग प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार सभी उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए राहत एवं बचाव कार्य तेज गति से चला रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रभावित लोगों तक जल्द से जल्द सहायता पहुंचाने के लिए सभी संबंधित एजेंसियां समन्वय के साथ काम कर रही हैं।

    सोनी सेमीकंडक्टर सॉल्यूशंस वैश्विक स्तर पर इमेज सेंसर और अन्य सेमीकंडक्टर कंपोनेंट्स की प्रमुख निर्माता कंपनियों में शामिल है। कंपनी के उत्पादों का उपयोग उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, औद्योगिक उपकरणों और कई उन्नत तकनीकी क्षेत्रों में किया जाता है। ऐसे में कुमामोटो प्लांट का अस्थायी रूप से बंद होना वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, हालांकि कंपनी ने अभी उत्पादन पर संभावित प्रभाव को लेकर कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है।

    इस घटना पर भारत ने भी संवेदना व्यक्त की है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जापान में आए भूकंप पर चिंता जताते हुए कहा कि भारत इस कठिन समय में जापान की सरकार और वहां के लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा है। उन्होंने प्रभावित लोगों की सुरक्षा, शीघ्र राहत और जल्द सामान्य स्थिति बहाल होने की कामना की। फिलहाल सभी की नजरें राहत कार्यों की प्रगति और सोनी के कुमामोटो प्लांट में परिचालन दोबारा शुरू होने के निर्णय पर टिकी हुई हैं।

  • जापान में 7.1 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप से हिली धरती, कई प्रांतों के लिए सुनामी अलर्ट जारी..

    जापान में 7.1 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप से हिली धरती, कई प्रांतों के लिए सुनामी अलर्ट जारी..

    नई दिल्ली । जापान के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में मंगलवार को आए 7.1 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने व्यापक क्षेत्र में लोगों को दहशत में डाल दिया। भूकंप का केंद्र कुमामोटो प्रांत के आसपास दर्ज किया गया। तेज झटकों के तुरंत बाद जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने सुनामी की चेतावनी जारी करते हुए तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी। प्रशासन ने संभावित खतरे को देखते हुए कई क्षेत्रों में आपातकालीन अलर्ट भी जारी कर दिया है।

    जापान मौसम विज्ञान एजेंसी के अनुसार, भूकंप रिक्टर पैमाने पर 7.1 तीव्रता का था। झटके इतने तेज थे कि कुमामोटो सहित आसपास के कई क्षेत्रों में इमारतें हिलने लगीं और लोग घरों तथा कार्यालयों से बाहर निकल आए। प्रारंभिक आकलन के अनुसार समुद्र में लगभग एक मीटर ऊंची लहरें उठने की आशंका जताई गई है, जिसके चलते तटीय क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

    भूकंप के तुरंत बाद जापान सरकार ने इमरजेंसी भूकंप चेतावनी प्रणाली सक्रिय कर दी। इसके तहत दक्षिणी क्यूशू द्वीप के कई प्रांतों के लिए विशेष अलर्ट जारी किया गया। कुमामोटो के अलावा नागासाकी, कागोशिमा, फुकुओका, सागा, ओइता और मियाज़ाकी प्रांतों में प्रशासन ने लोगों से आधिकारिक निर्देशों का पालन करने और समुद्र तटों से दूर रहने की अपील की है।

    सुरक्षा एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी कर रहे हैं। राहत और बचाव दलों को भी तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है।

    जापान दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में शामिल है। देश प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में स्थित है, जहां कई टेक्टोनिक प्लेटें आपस में मिलती हैं। इसी कारण यहां समय-समय पर मध्यम और तेज तीव्रता के भूकंप आते रहते हैं। जापान ने वर्षों के अनुभव के आधार पर उन्नत भूकंप चेतावनी प्रणाली और आपदा प्रबंधन तंत्र विकसित किया है, जिससे लोगों को समय रहते सतर्क किया जा सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े भूकंप के बाद कुछ समय तक आफ्टरशॉक आने की संभावना बनी रहती है। इसी कारण प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने तटीय इलाकों में रहने वाले नागरिकों से समुद्र के किनारे जाने से बचने और जरूरत पड़ने पर ऊंचे एवं सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने का आग्रह किया है।

    फिलहाल प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। भूकंप के बाद विभिन्न सरकारी एजेंसियां नुकसान का आकलन करने में जुटी हैं। साथ ही परिवहन, संचार और अन्य आवश्यक सेवाओं की स्थिति की भी समीक्षा की जा रही है। यदि स्थिति में कोई नया बदलाव होता है तो संबंधित अधिकारियों द्वारा समय-समय पर नई जानकारी जारी की जाएगी। अभी तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता देते हुए सभी संबंधित विभाग अलर्ट मोड पर काम कर रहे हैं।

  • पश्चिमी ईरान में 5.5 तीव्रता का भूकंप, 10 किलोमीटर गहराई में था केंद्र; फिलहाल बड़े नुकसान की सूचना नहीं, निगरानी जारी

    पश्चिमी ईरान में 5.5 तीव्रता का भूकंप, 10 किलोमीटर गहराई में था केंद्र; फिलहाल बड़े नुकसान की सूचना नहीं, निगरानी जारी

    नई दिल्ली । पश्चिमी ईरान में सोमवार को आए 5.5 तीव्रता के भूकंप ने एक बार फिर क्षेत्र की भूकंपीय संवेदनशीलता को उजागर कर दिया। सुबह दर्ज किए गए इस भूकंप के झटके काहरिज और जावनरुद सहित आसपास के कई इलाकों में महसूस किए गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार भूकंप का केंद्र जमीन से लगभग 10 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। झटकों के बाद लोगों में कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बना, हालांकि अब तक किसी बड़े जान-माल के नुकसान या व्यापक तबाही की पुष्टि नहीं हुई है।

    यूरोपियन-मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर के अनुसार भूकंप का केंद्र काहरिज शहर से लगभग 54 किलोमीटर पश्चिम में स्थित था। वहीं जावनरुद शहर से यह लगभग 33 किलोमीटर दक्षिण की ओर दर्ज किया गया। दोनों क्षेत्रों में लोगों ने झटकों को स्पष्ट रूप से महसूस किया। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारी प्रभावित इलाकों की स्थिति का लगातार आकलन कर रहे हैं ताकि किसी भी संभावित नुकसान की सही जानकारी जुटाई जा सके।

    भूकंप के तुरंत बाद कई स्थानों पर लोग एहतियात के तौर पर घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। राहत एवं बचाव एजेंसियां भी सतर्क हैं और स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल किसी बड़े ढांचागत नुकसान, सड़क बाधित होने या जनहानि की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

    भूकंप के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे भी सामने आए। कुछ पोस्ट में इस घटना को ईरान के परमाणु कार्यक्रम या भूमिगत गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश की गई। हालांकि अब तक किसी भी अंतरराष्ट्रीय भूकंप निगरानी संस्था या वैज्ञानिक विशेषज्ञ ने ऐसे दावों की पुष्टि नहीं की है। विशेषज्ञों का कहना है कि उपलब्ध भूकंपीय आंकड़े इस घटना को एक सामान्य प्राकृतिक भूकंप के रूप में ही दर्शाते हैं और बिना वैज्ञानिक प्रमाण के किसी अन्य कारण से जोड़ना उचित नहीं होगा।

    ईरान लंबे समय से दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में गिना जाता है। इसका प्रमुख कारण इसकी भौगोलिक स्थिति है। देश ऐसे क्षेत्र में स्थित है जहां अरब और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटें लगातार एक-दूसरे की ओर बढ़ रही हैं। इन प्लेटों के बीच बनने वाला दबाव समय-समय पर भूकंप के रूप में बाहर निकलता है, जिसके कारण यहां मध्यम से लेकर शक्तिशाली भूकंप आते रहते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे क्षेत्रों में भूकंप का पूरी तरह पूर्वानुमान लगाना संभव नहीं है, इसलिए मजबूत निर्माण, प्रभावी आपदा प्रबंधन और समय पर चेतावनी व्यवस्था ही नुकसान को कम करने का सबसे प्रभावी उपाय है। स्थानीय प्रशासन भी प्रभावित इलाकों में स्थिति की निगरानी कर रहा है और यदि किसी प्रकार की क्षति सामने आती है तो आवश्यक राहत कार्य तुरंत शुरू किए जाएंगे।

    ताजा भूकंप ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता और आपदा तैयारियों का लगातार मजबूत रहना कितना आवश्यक है। फिलहाल संबंधित एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों का विस्तृत सर्वेक्षण कर रही हैं और स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

  • मेक्सिको में आया 7.4 की तीव्रता का भूकंप, आसपास के कई देशों में महसूस हुए झटके

    मेक्सिको में आया 7.4 की तीव्रता का भूकंप, आसपास के कई देशों में महसूस हुए झटके


    मेक्सिको सिटी।
    मेक्सिको (Mexico) में 7.4 की तीव्रता के साथ भयंकर भूकंप (Earthquake) आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक देश के दक्षिणी राज्य चियापास (Southern state Chiapas) के पास इसका केंद्र था। इस शक्तिशाली भूकंप (Powerful Earthquake) की वजह से मेक्सिको समेत आस पास के कई देशों जैसे कि अल सल्वाडोर और ग्वाटेमाला में झटके महसूस किए गए हैं। हालांकि अभी तक मानवीय नुकसान के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

    शुक्रवार को आए इस भूकंप के बारे में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) विभाग ने स्पष्ट रूप से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भूकंप का केंद्र मेक्सिकों के प्यूर्टो मादेरो शहर से करीब 10 किलोमीटर की गहराई में था। अब ऑफ्टर शॉक की वजह से और भी झटके आने की आशंका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 7.4 तीव्रता के झटके बाद कई झटके और लगे। इसमें सबसे तेज झटका 6.1 की तीव्रता का था।

    मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम ने कहा कि भूकंप के बाद चियापास और टबास्को राज्यों में नुकसान की कोई तत्काल खबर नहीं मिली है। प्रभावित इलाकों में नुकसान का आकलन जारी है और अधिकारी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। वहीं, ग्वाटेमाला के राष्ट्रपति बर्नार्डो अरेवालो ने भी पुष्टि की, “अब तक किसी की मौत की खबर नहीं है। एजेंसियां पल-पल की स्थिति पर नजर रख रही हैं।” उन्होंने आगे कहा, “मैं लोगों से शांत रहने और ऐसे मामलों में दी गई सलाह का पालन करने की अपील करता हूं।”


    सुनामी की चेतावनी जारी

    इस शक्तिशाली भूकंप के बाद अमेरिकी अमेरिकी सुनामी चेतावनी प्रणाली (US Tsunami Warning System) ने इस क्षेत्र के लिए सुनामी खतरे की चेतावनी जारी की है। इसके साथ ही उन्होंने प्रभावित तटीय इलाकों में समुद्र के जल-स्तर में खतरनाक बदलाव की संभावना के प्रति आगाह किया।

    सोशल मीडिया पर भूकंप के बाद के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। इसमें इमारतें तेजी के साथ हिलती हुई नजर आ रही हैं।

    मेक्सिको में आए इस भूकंप का असर पड़ोसी देशों में भी देखा गया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ग्वाटेमाला सिटी में इमारतें बुरी तरह से हिल गई हैं। दूसरी तरफ अल सल्वाडोर में भी निवासियों ने तेज भूकंप के झटके महसूस किए हैं। फिलहाल किसी भी देश में कितना नुकसान हुआ है, इसके बारे में स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि, इतने शक्तिशाली भूकंप के बाद नुकसान की आशंका बढ़ गई है।

    यह भूकंप ऐसे समय में सामने आया है। जब कुछ समय पहले ही मेक्सिको के पड़ोसी देश वेनेजुएला में भूकंप ने तबाही मचाई थी। इसमें कई दर्जन लोग मारे गए थे। भारत समेत कई देशों ने मदद भेजी थी। इसके अलावा अभी हाल ही में न्यूजीलैंड और इंडोनेशिया के पास भूकंप आया था। इसके बाद भी सुनामी की चेतावनी जारी की गई थी।

  • जम्मू- कश्मीर के बारामूला जिले में महसूस किए गए भूकंप के झटके…. तीव्रता 3.6 दर्ज

    जम्मू- कश्मीर के बारामूला जिले में महसूस किए गए भूकंप के झटके…. तीव्रता 3.6 दर्ज


    श्रीनगर।
    जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के बारामूला जिले (Baramulla district) में सोमवार तड़के भूकंप (Earthquake) के हल्के झटके महसूस किए गए. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता (Earthquake Intensity 3.6) रिक्टर स्केल (Richter scale) पर 3.6 दर्ज की गई. यह भूकंप रात करीब 2 बजे आया और इसका केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई में था.

    भूकंप के झटके बारामूला के अलावा कश्मीर घाटी के कई अन्य इलाकों में भी महसूस किए गए. अचानक आए झटकों से लोगों में कुछ देर के लिए दहशत फैल गई. एहतियात के तौर पर कई लोग अपने घरों और इमारतों से बाहर निकल आए. हालांकि, किसी तरह के जान-माल के नुकसान या किसी के घायल होने की सूचना नहीं मिली।

    राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भूकंप की जानकारी दी. इसी साल फरवरी में भी बारामूला जिले में 4.6 तीव्रता का भूकंप आया था. उस समय पट्टन क्षेत्र भूकंप का केंद्र था और घाटी के कई हिस्सों में झटके महसूस किए गए थे. कश्मीर भूकंपीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है. यह इलाका उच्च भूकंपीय जोन में स्थित है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की लगातार गतिविधियों के कारण समय-समय पर भूकंप के झटके महसूस होते रहते हैं।

    इससे पहले 9 जुलाई को सुबह-सुबह महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए थे. नांदेड़, हिंगोली और परभणी जिलों में भूकंप के झटके महसूस किए गए. झटके हल्की तीव्रता के थे, लेकिन लोग दाहशत में अपने घरों से बाहर निकल आए.

    गत 27 जून को अफगानिस्तान के हिंदूकुश क्षेत्र में 6.2 तीव्रता का भूकंप आया था. भूकंप का केंद्र पूर्वोत्तर अफगानिस्तान में कालाफगान से करीब 81 किलोमीटर दूर, 36.442° उत्तरी अक्षांश और 70.672° पूर्वी देशांतर पर और धरती की सतह से 215 किलोमीटर की गहराई में था. भूकंप का केंद्र धरती की सतह से अत्यधिक गहराई में होने के कारण इसके झटके पाकिस्तान, भारत के उत्तरी हिस्से, चीन, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान और तुर्कमेनिस्तान समेत कई देशों में महसूस किए गए थे।

  • भूकंप से तबाह वेनेजुएला में मानवीय संकट गहराया, हजारों जानें गईं, अंतरराष्ट्रीय सहायता के सहारे पुनर्वास की चुनौती शुरू

    भूकंप से तबाह वेनेजुएला में मानवीय संकट गहराया, हजारों जानें गईं, अंतरराष्ट्रीय सहायता के सहारे पुनर्वास की चुनौती शुरू

    नई दिल्ली । वेनेजुएला में 24 जून को आए भीषण भूकंप के बाद हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो सके हैं। ताजा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 4,118 हो गई है। हजारों लोग अब भी प्रभावित हैं और सबसे ज्यादा नुकसान वाले इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में मलबा हटाने, लापता लोगों की तलाश और जरूरी सेवाओं को बहाल करने का कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है।

    सरकारी जानकारी के अनुसार, इस आपदा में 16,740 लोग घायल हुए हैं, जबकि अब तक 6,462 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। राहत एजेंसियां लगातार प्रभावित इलाकों में पहुंचकर लोगों को चिकित्सा सहायता, भोजन, स्वच्छ पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में जुटी हुई हैं। प्रशासन का कहना है कि दूरदराज के कई क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए विशेष बचाव दलों की मदद ली जा रही है।

    भूकंप के कारण बड़ी संख्या में मकान क्षतिग्रस्त या पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। इसके चलते 17,907 लोग बेघर हो चुके हैं, जबकि लगभग 86,794 परिवारों को विभिन्न प्रकार की राहत सहायता उपलब्ध कराई गई है। फिलहाल 17,266 लोग देशभर में बनाए गए 89 अस्थायी राहत शिविरों में रह रहे हैं, जहां उनके लिए भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। सरकार का कहना है कि पुनर्वास की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाई जाएगी।

    राहत एवं बचाव कार्य को तेज करने के लिए पूरे देश में बड़े पैमाने पर संसाधन लगाए गए हैं। हजारों सरकारी कर्मचारी, स्वयंसेवक और अंतरराष्ट्रीय बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार काम कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, देशभर में 30,000 से अधिक कर्मियों, लगभग 29,843 स्वयंसेवकों और 3,454 अंतरराष्ट्रीय बचावकर्मियों की सहायता से अभियान संचालित किया जा रहा है। इसके साथ ही भूकंप के बाद अब तक 1,171 से अधिक झटके दर्ज किए जा चुके हैं, जिससे कई इलाकों में लोगों के बीच चिंता और सतर्कता बनी हुई है।

    इस बीच कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने आपदा के बाद विभिन्न देशों से मिली मानवीय सहायता के लिए आभार व्यक्त किया है। उन्होंने राजधानी काराकास में राहत सामग्री संग्रह केंद्र का निरीक्षण किया, जहां दो हजार टन से अधिक अंतरराष्ट्रीय सहायता सामग्री को प्रभावित लोगों तक पहुंचाने के लिए व्यवस्थित किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि सभी सहयोगी देशों की सहायता का पारदर्शी तरीके से उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा ताकि जरूरतमंद लोगों तक समय पर राहत पहुंच सके।

    सरकार ने कहा है कि इस कठिन समय में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सहयोग ने राहत कार्यों को मजबूती प्रदान की है। प्रशासन का ध्यान अब केवल तत्काल राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण, बुनियादी ढांचे की बहाली और विस्थापित परिवारों के स्थायी पुनर्वास पर भी केंद्रित है। अधिकारियों का मानना है कि पुनर्निर्माण की प्रक्रिया लंबी होगी, लेकिन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से प्रभावित क्षेत्रों को फिर से सामान्य स्थिति में लाने का प्रयास जारी रहेगा।

    भूकंप में जान गंवाने वाले लोगों की स्मृति में सरकार पहले ही सात दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा कर चुकी है। प्रशासन ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए भरोसा दिलाया है कि राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण का कार्य पूरी गंभीरता के साथ जारी रहेगा, ताकि प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द सामान्य जीवन की ओर लौटने में सहायता मिल सके।

  • Venezuela: भूकंप में मृतकों की संख्या 2200 के पार, अब भी रेस्क्यू जारी, मेक्सिको से आई मशहूर बचाव टीम

    Venezuela: भूकंप में मृतकों की संख्या 2200 के पार, अब भी रेस्क्यू जारी, मेक्सिको से आई मशहूर बचाव टीम


    मेक्सिको सिटी।
    वेनेजुएला (Venezuela) में आए विनाशकारी भूकंप (Earthquakes) ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा में मृतकों की संख्या 2,200 के पार पहुंच गई है, जबकि 11,000 से ज्यादा लोग घायल हैं। इस मुश्किल घड़ी में मेक्सिको (Mexico) की मशहूर बचाव टीम ‘टोपोस’ (Topos Azteca) मदद के लिए वेनेजुएला पहुंच रही है। यह टीम मलबे में दबे लोगों को निकालने में माहिर मानी जाती है।


    तबाही का मंजर और बढ़ती चुनौतियां

    भूकंप के करीब एक हफ्ते बाद भी वेनेजुएला में हालात बेहद खराब हैं। सबसे ज्यादा असर ला गुआरा राज्य में हुआ है, जहां कई बहुमंजिला इमारतें और घर जमींदोज हो गए हैं। अंतरराष्ट्रीय बचाव टीमें दिन-रात मलबे में दबे लोगों की तलाश कर रही हैं। हालांकि, समय बीतने के साथ अब जीवित बचे लोगों के मिलने की उम्मीद कम होती जा रही है। मेक्सिको से रवाना हुए 39 वर्षीय स्वयंसेवक जर्मन बेलो अपने साथ बचाव उपकरणों के अलावा बड़ी संख्या में ‘बॉडी बैग’ भी ले जा रहे हैं, ताकि मृतकों के शवों को सम्मान के साथ निकाला जा सके।


    कौन हैं ये ‘टोपोस’ और कैसे करते हैं काम?

    ‘टोपोस’ मेक्सिको का एक नागरिक बचाव संगठन है। इसकी शुरुआत 1985 में मेक्सिको सिटी में आए भीषण भूकंप के बाद हुई थी। स्पेनिश भाषा में ‘टोपोस’ का मतलब ‘छछूंदर’ (Moles) होता है। इस टीम को यह नाम इसलिए मिला क्योंकि इसके सदस्य मलबे के बीच बनी बेहद संकरी जगहों और छेदों में रेंगकर घुस जाते हैं। ये लोग थर्मल कैमरे और संवेदनशील माइक्रोफोन जैसे आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं ताकि मलबे के नीचे दबी हल्की सी आहट या शरीर की गर्मी को पहचाना जा सके।


    खामोशी का संकेत और बचाव का तरीका

    बचाव कार्य के दौरान यह टीम एक खास तकनीक अपनाती है। जब कोई बचावकर्मी हवा में मुट्ठी बंद करके हाथ उठाता है, तो इसका मतलब होता है ‘बिल्कुल खामोश हो जाएं’। यह संकेत मिलते ही वहां मौजूद अन्य लोग चुप हो जाते हैं। इस सन्नाटे में बचावकर्मी मलबे के नीचे कान लगाकर सुनते हैं कि कहीं से कोई आवाज या खटखटाहट तो नहीं आ रही। इसके बाद फावड़े और हथौड़ों की मदद से धीरे-धीरे मलबा हटाया जाता है ताकि मलबे के और ज्यादा गिरने का खतरा न रहे।


    उम्मीद की एक आखिरी किरण

    मेक्सिको सिटी के एयरपोर्ट पर एक भावुक पल देखने को मिला। जब वेनेजुएला के एक इंजीनियर डिएगो बेजरानो को पता चला कि जर्मन बेलो और उनकी टीम उनके देश जा रही है, तो वह रो पड़े। डिएगो का परिवार अभी भी वेनेजुएला की राजधानी कराकस में है। बेलो ने उन्हें गले लगाकर तसल्ली दी। बेलो पेशे से एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं और अपनी छोटी सी वर्कशॉप चलाते हैं, लेकिन आपदा के समय वह सब छोड़कर लोगों की जान बचाने निकल पड़ते हैं। उनका कहना है कि किसी दुखी इंसान को उम्मीद देना ही उनका सबसे बड़ा इनाम है।

  • Earthquake : पड़ोसी देश चीन के सिचुआन प्रांत में आया भूकंप… 5.5 रही तीव्रता

    Earthquake : पड़ोसी देश चीन के सिचुआन प्रांत में आया भूकंप… 5.5 रही तीव्रता


    बीजिंग।
    वेनेजुएला (Venezuela) में भूकंप (Earthquake) की तबाही से दुनिया अब तक गमगीन है. वेनेजुएला के बाद जापान और अमेरिका में भूकंप आया. भारत और अफगानिस्तान में भी भूकंप के झटके महसूस हुए. अब भूकंप की आहट भारत के पड़ोस में सुनाई दी है. जी हां, भारत के पड़ोस यानी चीन (China) में भूकंप आया है. दक्षिण-पश्चिम चीन (Southwest China) के सिचुआन प्रांत (Sichuan Province) में 5.5 तीव्रता का तेज भूकंप आया है. स्थानीय समयानुसार देर रात भूकंप के झटके महसूस किए गए. इससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई।

    दरअसल, दक्षिण-पश्चिम चीन के सिचुआन प्रांत के यिबिन शहर में देर रात 5.5 तीव्रता का जोरदार भूकंप आया. इस भूकंप के झटके चेंगदू और चोंगकिंग जैसे बड़े क्षेत्रीय केंद्रों तक महसूस किए गए. इस भूकंप से लोगों में खौफ का माहौल है. आधी रात को लोग अपने घरों से बाहर की ओर भागते दिखे. भूकंप का केंद्र गाओक्सियन काउंटी में जमीन से महज 6 किलोमीटर की गहराई पर था।

    अभी तक की जानकारी के मुताबिक, इस भूकंप से केंद्र के पास की कुछ इमारतों की दीवारों को मामूली नुकसान पहुंचा है और आपातकालीन टीमें नुकसान का आकलन कर रही हैं. अभी किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है. बता दें इससे दो दिन पहले यानी शनिवार को अफगानिस्तान में 6.2 तीव्रता का भूकंप आया था. इस भूकंप के कारण दिल्ली-एनसीआर के अलावा जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा तथा चंडीगढ़ सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में तेज झटके महसूस किए गए थे।


    संडे को जापान में भूकंप

    इसके बाद रविवार को जापान के उत्तर-पूर्वी हिस्से में 6.1 तीव्रता का भूकंप आया था. इवाते प्रांत के तट के पास रविवार को स्थानीय समयानुसार सुबह सात बजकर 25 मिनट पर भूकंप आया. इसका केंद्र करीब 40 किलोमीटर (25 मील) की गहराई में था. भूकंप के झटके आओमोरी प्रांत और आसपास के अन्य क्षेत्रों में भी महसूस किए गए. राहत की बात यह थी कि इसमें किसी जानमाल के नुकसान की खबर नहीं आई।


    वेनेजुएला में भूकंप की तबाही

    वहीं, वेनेज़ुएला में आए भूकंप के झटकों से मरने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. वेनेजुएला में अब तक 1500 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. अधिकारियों के अनुसार, परिवारों ने कम से कम 68,900 लोगों के लापता होने की जानकारी दी. इस सबके बीच लोगों में हताशा बढ़ती जा रही है. वेनेज़ुएला के सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्यों में से एक, ला ग्वायरा में, अपने प्रियजनों और पड़ोसियों की तलाश कर रहे लोग फावड़ों, भारी मशीनों, रस्सियों और अपने हाथों का इस्तेमाल करके कंक्रीट के ढेर को हटाने की कोशिश करते दिखे।