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  • जापान के बोनिन द्वीप समूह में सुबह-सुबह आया 6.5 तीव्रता का भूकंप

    जापान के बोनिन द्वीप समूह में सुबह-सुबह आया 6.5 तीव्रता का भूकंप


    टोक्यो।
    जापान (Japan) के बोनिन द्वीप समूह क्षेत्र (Bonin Islands region) में 6.5 तीव्रता (Magnitude 6.3) का भूकंप (Earthquake) आया है. धरती के अंदर 7 प्लेट ऐसी होती हैं जो लगातार घूम रही हैं. ये प्लेट जिन जगहों पर अधिक टकराती हैं, उसे फॉल्ट लाइन जोन कहते हैं।

    जापान के बोनिन द्वीप समूह क्षेत्र में रविवार सुबह 6.5 तीव्रता के भूकंप के तेज झटके दर्ज किए गए। यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (यूएसजीएस) के अनुसार, इस भूकंप के बाद जान-माल के नुकसान या सुनामी की किसी चेतावनी से जुड़ी विस्तृत जानकारी तत्काल उपलब्ध नहीं हो सकी है।

    संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने बताया कि टोक्यो से लगभग 1000 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिणपूर्व में बोनिन द्वीप समूह, जिसे ओगासावारा द्वीप समूह भी कहा जाता है, में 6.5 तीव्रता का भूकंप आया।

    भूकंप का केंद्र समुद्र में 494 किलोमीटर की गहराई में था। प्रभावित क्षेत्रों के लिए सुनामी की कोई चेतावनी जारी नहीं की गई थी, और कोई भी भौतिक क्षति या हताहत होने की सूचना नहीं थी। भूकंप फिलीपीन और प्रशांत टेक्टोनिक प्लेटों के बीच भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्र में आया।

    बता दें, बार-बार टकराने से प्लेट के कोने मुड़ते हैं. जब प्रेशर ज्यादा बनने लगता है कि तो प्लेट टूटने लगती हैं. इनके टूटने के कारण अंदर की एनर्जी बाहर आने का रास्ता खोजती है. इस डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है. 4.5 या उससे ज्यादा तीव्रता का भूकंप इमारतों और घरों को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है।

    भूकंप की तीव्रता को रिक्टर स्केल पर मापा जाता है. 7.0 या उससे ज्यादा तीव्रता वाले भूकंप को आमतौर पर खतरनाक माना जाता है, वहीं, 2.0 या उससे कम तीव्रता वाले भूकंप को माइक्रो भूकंप कहा जाता हैं, जिन्हें कई लोग महसूस भी नहीं कर पाते हैं।

    इस बीच, शनिवार को वानुआतू द्वीप में भी भूकंप के जोरदार झटके महसूस किए गए थे. रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 7.1 मापी गई. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक, भूकंप 24 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 1 मिनट पर आया. वानुआतू, दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित एक द्वीपसमूह देश है।

  • तिब्बत में फिर महसूस किए भूकंप के झटके…. कुछ घंटों में तीन बार कांपी धरती

    तिब्बत में फिर महसूस किए भूकंप के झटके…. कुछ घंटों में तीन बार कांपी धरती


    ल्हासा।
    तिब्बत (Tibet) में शनिवार, 24 अक्तूबर 2026 को कुछ ही घंटों के भीतर तीन बार भूकंप (Earthquakes) दर्ज किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) National Center for Seismology – NCS) की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इन भूकंपों की तीव्रता (Earthquakes Intensity) 4.0, 4.6 और 4.5 रही। इनमें सबसे तेज झटका 4.6 तीव्रता का था, जिसका केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई पर दर्ज किया गया। एनसीएस के आंकड़ों के मुताबिक, तीनों भूकंप भारतीय समयानुसार रात 1 बजे से सुबह 6 बजे के बीच दर्ज हुए।


    कुछ घंटों में तीन बार दर्ज हुए भूकंप

    नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, तिब्बत में भूकंपीय गतिविधियों का ब्योरा इस प्रकार है:
    – पहला भूकंप: रात 1 बजकर 8 मिनट पर 4.0 तीव्रता का झटका दर्ज किया गया। इसकी गहराई 15 किलोमीटर रही।
    – दूसरा भूकंप: रात 2 बजकर 7 मिनट पर 4.6 तीव्रता का भूकंप आया। इसका केंद्र 10 किलोमीटर की गहराई पर दर्ज हुआ।
    – तीसरा भूकंप: सुबह 5 बजकर 38 मिनट पर 4.5 तीव्रता का झटका दर्ज किया गया। इसकी गहराई भी 10 किलोमीटर रही।


    कल भी तिब्बत में आया था भूकंप, 16 की गई थी जान

    इससे पहले गुरुवार शाम आए 7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी। इस प्राकृतिक आपदा में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि 76 लोग घायल हुए हैं। चीन की सरकारी मीडिया के अनुसार, उत्तरी तिब्बत के नागचू शहर में भूकंप के झटकों से सैकड़ों मकान ढह गए।

    नागचू के अधिकारियों के मुताबिक, भूकंप के कारण 339 घर और पशुओं को रखने के 20 बाड़े गिर गए। घटना के बाद प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया गया। इस काम में 1,600 से अधिक बचावकर्मियों को लगाया गया है। प्रभावित लोगों की मदद के लिए राहत सामग्री भी भेजी गई है। इसमें करीब 3,000 तंबू, 1,000 तैयार आवासीय इकाइयां, फोल्डिंग बेड, टॉर्च और सर्दियों में काम आने वाले कपड़े शामिल हैं।


    चीन में भी 4.6 तीव्रता का भूकंप

    इसके अलावा चीन में भी भारतीय समयानुसार सुबह 4 बजकर 9 मिनट पर 4.6 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। भूकंप का केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई पर था। इसका केंद्र 32.920 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 93.761 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था।


    क्यों आते हैं भूकंप?

    पृथ्वी की बाहरी परत कई बड़ी और छोटी टेक्टोनिक प्लेटों में बंटी हुई है। ये प्लेटें लगातार गति करती रहती हैं। जब इनके बीच दबाव बढ़ता है और चट्टानों में जमा ऊर्जा अचानक निकलती है, तो भूकंपीय तरंगें पैदा होती हैं। इन्हीं तरंगों से धरती की सतह पर कंपन महसूस होता है।

    भूकंप का असर उसके केंद्र से दूरी, गहराई, तीव्रता और स्थानीय जमीन की प्रकृति पर निर्भर करता है। अधिक तीव्रता वाले भूकंप के झटके दूर तक महसूस किए जा सकते हैं, लेकिन नुकसान की मात्रा केवल तीव्रता से तय नहीं होती।


    भूकंप की तीव्रता कैसे मापी जाती है?

    भूकंप की तीव्रता और उससे निकलने वाली ऊर्जा का आकलन आधुनिक भूकंपमापी उपकरणों और वैज्ञानिक माप-पद्धतियों से किया जाता है। समाचारों में अक्सर भूकंप का परिमाण बताया जाता है, जिसे कई बार सामान्य बोलचाल में रिक्टर स्केल की तीव्रता कहा जाता है। वैज्ञानिक रिपोर्टों में इसकी गणना के लिए अलग-अलग पैमानों का इस्तेमाल हो सकता है।

  • मध्य प्रदेश के सिंगरौली में 3.5 तीव्रता का भूकंप, दोपहर 2:12 बजे आए झटकों का केंद्र 10 किलोमीटर गहराई में

    मध्य प्रदेश के सिंगरौली में 3.5 तीव्रता का भूकंप, दोपहर 2:12 बजे आए झटकों का केंद्र 10 किलोमीटर गहराई में

    मध्य प्रदेश। के सिंगरौली जिले में शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को भूकंप के झटके दर्ज किए गए। भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.5 मापी गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भूकंप दोपहर 2 बजकर 12 मिनट 35 सेकंड पर आया। इसका केंद्र जमीन से करीब 10 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। सिंगरौली में भूकंप दर्ज होने की जानकारी सामने आने के बाद इस घटना का समय, तीव्रता और केंद्र की गहराई प्रमुख विवरण रहे।

    भूकंप की तीव्रता 3.5 होने के कारण इसे हल्की श्रेणी का भूकंप माना जाता है। इस स्तर के भूकंप के झटके कुछ लोगों को महसूस हो सकते हैं, जबकि कई बार लोग इन्हें महसूस नहीं कर पाते। झटकों का अनुभव आसपास के क्षेत्र, इमारत की स्थिति और व्यक्ति के स्थान जैसे कारकों पर निर्भर कर सकता है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि सिंगरौली में कितने लोगों ने झटके महसूस किए।भूकंप का केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर नीचे बताया गया है। भूकंप विज्ञान में केंद्र की गहराई महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इससे सतह पर झटकों के प्रभाव को समझने में मदद मिलती है। हालांकि, केवल तीव्रता और गहराई के आधार पर किसी क्षेत्र में हुए नुकसान का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए स्थानीय स्थिति और नुकसान से जुड़ी अलग जानकारी की जरूरत होती है।

    सिंगरौली मध्य प्रदेश का एक प्रमुख ऊर्जा क्षेत्र है। यहां भूकंप के झटके दर्ज होने की खबर शनिवार दोपहर सामने आई। उपलब्ध विवरण में भूकंप की तीव्रता, समय और केंद्र की गहराई की जानकारी दी गई है। हालांकि, घटना के बाद किसी तरह के जान-माल के नुकसान, भवनों में दरार या अन्य प्रभावों के बारे में कोई पुष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।भूकंप की तीव्रता को समझने के लिए यह ध्यान रखना जरूरी है कि रिक्टर स्केल पर दर्ज संख्या भूकंप के परिमाण को दर्शाती है। 3.5 तीव्रता का भूकंप सामान्य तौर पर हल्के स्तर का होता है, लेकिन अलग-अलग स्थानों पर इसका अनुभव अलग हो सकता है। कम तीव्रता के झटके भी कुछ परिस्थितियों में महसूस किए जा सकते हैं, जबकि कुछ जगहों पर उनका पता नहीं चलता।

    भूकंप की घटना के संबंध में उपलब्ध जानकारी में किसी बड़े नुकसान या आपात स्थिति का उल्लेख नहीं है। ऐसे में नुकसान होने या नहीं होने के बारे में अतिरिक्त पुष्टि के बिना कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। घटना से जुड़े विवरणों में फिलहाल सबसे प्रमुख तथ्य यह है कि भूकंप शनिवार दोपहर दर्ज किया गया और इसकी तीव्रता 3.5 रही।भूकंप जैसी घटनाओं के दौरान लोगों को घबराने के बजाय सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करना चाहिए। यदि झटके महसूस हों, तो मजबूत मेज के नीचे सुरक्षित स्थान लेना, खिड़कियों और भारी वस्तुओं से दूरी बनाए रखना तथा लिफ्ट का उपयोग नहीं करना उपयोगी सावधानियां हैं। झटके रुकने के बाद आसपास की स्थिति देखकर ही बाहर निकलना चाहिए और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों पर ध्यान देना चाहिए।

    सिंगरौली में 17 अक्टूबर को दर्ज इस भूकंप का केंद्र 10 किलोमीटर की गहराई में था और इसकी तीव्रता 3.5 मापी गई। घटना से संबंधित उपलब्ध जानकारी में किसी नुकसान की पुष्टि नहीं की गई है। आगे की स्थिति के बारे में निष्कर्ष निकालने के लिए स्थानीय प्रशासन या संबंधित विभागों की ओर से जारी होने वाली पुष्ट जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

  • पश्चिम बंगाल में भूकंप…. अलीपुरद्वार में सुबह-सुबह महसूस किए गए झटके, 3.0 रही तीव्रता

    पश्चिम बंगाल में भूकंप…. अलीपुरद्वार में सुबह-सुबह महसूस किए गए झटके, 3.0 रही तीव्रता


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) के अलीपुरद्वार (Alipurduar) में आज सुबह हल्के भूकंप (Earthquake) के झटके महसूस किए गए. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (National Center for Seismology-NCS) के मुताबिक यह भूकंप सुबह 6 बजकर 56 मिनट पर आया. भूकंप की तीव्रता (Earthquake intensity) रिक्टर पैमाने पर 3.0 मापी गई, जिसे मामूली श्रेणी में रखा जाता है. फिलहाल किसी तरह के जान माल के नुकसान की खबर नहीं है।

    नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने अपने आधिकारिक हैंडल से इस भूकंप की जानकारी साझा की. एजेंसी के अनुसार भूकंप का केंद्र अक्षांश 26.445 उत्तर और देशांतर 89.560 पूर्व पर स्थित था. भूकंप की गहराई जमीन से करीब 9 किलोमीटर नीचे बताई गई है. भूकंप का केंद्र अलीपुरद्वार जिले में ही रहा, जो पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से में स्थित है और भूटान तथा असम की सीमा के करीब पड़ता है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक 3.0 तीव्रता का भूकंप हल्का माना जाता है और इससे आमतौर पर किसी बड़े नुकसान की आशंका नहीं होती. ऐसे झटके अक्सर सिर्फ हल्की कंपन के रूप में महसूस होते हैं और कई बार लोगों को इनका एहसास भी नहीं होता. कम गहराई वाले भूकंप जमीन के करीब होने की वजह से थोड़ा ज्यादा महसूस हो सकते हैं, भले ही उनकी तीव्रता कम हो. अलीपुरद्वार और आसपास का इलाका हिमालय की तलहटी में आता है, जहां भूगर्भीय हलचल की वजह से समय समय पर हल्के भूकंप आते रहते हैं।

    फिलहाल प्रशासन की तरफ से किसी नुकसान या एहतियाती कदम को लेकर कोई अलग बयान नहीं आया है. मौसम और भूकंप एजेंसियां इलाके की निगरानी करती रहती हैं ताकि किसी भी आगे की गतिविधि पर नजर रखी जा सके।

  • इंडोनेशिया में 7.7 के बाद 6.9 तीव्रता का भूकंप, 40 लोगों की मौत; भूस्खलन से बढ़ी तबाही

    इंडोनेशिया में 7.7 के बाद 6.9 तीव्रता का भूकंप, 40 लोगों की मौत; भूस्खलन से बढ़ी तबाही


    जकार्ता।
    इंडोनेशिया के फ्लोरेस द्वीप के पास शनिवार को आए शक्तिशाली भूकंप ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। 7.7 तीव्रता के भूकंप के बाद 6.9 तीव्रता का एक और तेज झटका महसूस किया गया। भूकंप और उसके बाद हुए भूस्खलन में अब तक कम से कम 40 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान जारी है।

    भूकंप के तेज झटकों से कई मकान और अन्य इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं। कई स्थानों पर सड़कें भूस्खलन के मलबे से बंद हो गईं। दहशत के कारण लोग घरों से बाहर निकल आए। इंडोनेशिया की आपदा प्रबंधन एजेंसी (BNPB) के प्रमुख सुहार्यांतो के अनुसार राहत और बचाव दल प्रभावित इलाकों में पहुंच रहे हैं। ऐसे में मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है।

    भूस्खलन में दबे लोग, कई इलाकों में तबाही

    भूकंप के बाद फ्लोरेस के कई हिस्सों में भूस्खलन हुआ। सिक्का, वेस्ट मंग्गाराई और ईस्ट मंग्गाराई क्षेत्रों से कम से कम 20 शव बरामद किए जाने की जानकारी है। इनमें रेओके गांव में भूस्खलन की चपेट में आकर जान गंवाने वाले आठ लोग भी शामिल हैं।

    हादसे में छह लोग घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं, दो ग्रामीणों के मलबे में दबकर लापता होने की सूचना भी सामने आई है। राहत दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं।

    सड़कें मलबे से बंद, इमारतों को नुकसान

    भूकंप के कारण फ्लोरेस में कई घरों और सरकारी समेत अन्य इमारतों को नुकसान पहुंचा है। सामने आए वीडियो में कुछ इमारतें क्षतिग्रस्त और गिरी हुई दिखाई दे रही हैं। भूकंप के झटकों के बाद बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित स्थानों की ओर निकल गए।

    भूस्खलन के कारण कई सड़कों पर आवाजाही प्रभावित हुई है। राहत एवं बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

    सुनामी की चेतावनी से मचा डर

    शक्तिशाली भूकंप के बाद अधिकारियों ने सुनामी की चेतावनी जारी की थी। इससे समुद्र तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों में दहशत फैल गई। हालांकि, बाद में समुद्र के जलस्तर में कोई बड़ा बदलाव नहीं मिलने पर सुनामी की चेतावनी वापस ले ली गई।

    फिलहाल प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी है। टीमें मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रही हैं और भूकंप से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अभियान आगे बढ़ने के साथ मृतकों और घायलों की संख्या में बदलाव हो सकता है।

  • Maharashtra: नासिक में सुबह-सुबह महसूस किए गए भूकंप के झटके… तीव्रता 3.4 रही

    Maharashtra: नासिक में सुबह-सुबह महसूस किए गए भूकंप के झटके… तीव्रता 3.4 रही


    नासिक।
    महाराष्ट्र (Maharashtra) के नासिक (Nashik) में शुक्रवार सुबह-सुबह भूकंप के झटके (Earthquake tremors) महसूस किए गए। जानकारी के मुताबिक, सुबह करीब 5 बजकर 32 मिनट पर आए इस भूकंप की तीव्रता 3.4 बताई जा रही है.

    इससे पहले महाराष्ट्र के पालघर में भी सोमवार रात करीब एक घंटे के अंदर भूकंप के दो झटके महसूस किए गए. दोनों झटकों की तीव्रता 3.4 रही थी। महाराष्ट्र के पालघर में पहला झटका रात 10:04 बजे महसूस किया गया. करीब 56 मिनट बाद 11 बजे फिर भूकंप आया. दोनों की तीव्रता 3.4 मापी गई।

    बता दें, भूकंप की तीव्रता को रिक्टर स्केल पर मापा जाता है. 7.0 या उससे अधिक तीव्रता वाले भूकंप को खतरनाक श्रेणी में रखा जाता है. वहीं, 2.0 या उससे कम तीव्रता वाले भूकंप माइक्रो भूकंप कहते हैं, जिन्हें अधिकांश लोग महसूस भी नहीं कर पाते. दूसरी ओर, 4.5 या उससे अधिक तीव्रता का भूकंप इमारतों और घरों को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है।

    इस बीच, लद्दाख के लेह में भी गुरुवार को सुबह-सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के मुताबिक, सुबह 6:05 बजे आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.5 दर्ज की गई।


    कैसे आता है भूकंप?

    धरती के अंदर 7 प्लेट्स ऐसी होती हैं जो लगातार घूम रही हैं. ये प्लेट्स जिन जगहों पर ज्यादा टकराती हैं, उसे फॉल्ट लाइन जोन कहते हैं. बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं. जब प्रेशर ज्यादा बनने लगता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं. इन प्लेट्स के टूटने के कारण अंदर की एनर्जी बाहर आने का रास्ता खोजती है. इस डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।

  • जापान में शक्तिशाली भूकंप के बाद सोनी का कुमामोटो प्लांट बंद, उत्पादन पर असर का आकलन जारी

    जापान में शक्तिशाली भूकंप के बाद सोनी का कुमामोटो प्लांट बंद, उत्पादन पर असर का आकलन जारी

    नई दिल्ली । जापान के कुमामोटो क्षेत्र में आए शक्तिशाली भूकंप के बाद सोनी सेमीकंडक्टर सॉल्यूशंस ने एहतियाती कदम उठाते हुए अपने कुमामोटो टेक्नोलॉजी सेंटर का परिचालन अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। कंपनी ने बताया कि प्लांट की इमारतों, उत्पादन उपकरणों और विनिर्माण लाइनों पर भूकंप के प्रभाव का विस्तृत आकलन किया जा रहा है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उत्पादन दोबारा कब शुरू होगा।

    कंपनी के अनुसार, मंगलवार को स्थानीय समयानुसार शाम 4:27 बजे भूकंप आने के तुरंत बाद किकुयो कस्बे स्थित सोनी सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉर्पोरेशन के संयंत्र में उत्पादन रोक दिया गया था। यह निर्णय कर्मचारियों की सुरक्षा और संभावित तकनीकी नुकसान का निरीक्षण करने के उद्देश्य से लिया गया। विशेषज्ञों की टीम पूरे परिसर का निरीक्षण कर रही है ताकि परिचालन फिर से शुरू करने से पहले सभी सुरक्षा मानकों की पुष्टि की जा सके।

    सोनी ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके नागासाकी, ओइता और कागोशिमा स्थित अन्य टेक्नोलॉजी सेंटर सामान्य स्थिति में हैं। इन केंद्रों में किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली है और भूकंप के समय वहां मौजूद किसी भी कर्मचारी के घायल होने की खबर भी सामने नहीं आई है। कंपनी लगातार सभी इकाइयों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

    भूकंप की तीव्रता 7.1 मापी गई, जिसके कारण कुमामोटो और आसपास के इलाकों में व्यापक असर देखने को मिला। कई इमारतों को नुकसान पहुंचा और राहत एवं बचाव अभियान तुरंत शुरू कर दिए गए। अधिकारियों के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन जारी है, जबकि बचाव दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश और सुरक्षित निकासी में जुटे हुए हैं।

    जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने बताया कि भूकंप में कम से कम 13 लोगों की मौत हुई है और कई अन्य लोग प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार सभी उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए राहत एवं बचाव कार्य तेज गति से चला रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रभावित लोगों तक जल्द से जल्द सहायता पहुंचाने के लिए सभी संबंधित एजेंसियां समन्वय के साथ काम कर रही हैं।

    सोनी सेमीकंडक्टर सॉल्यूशंस वैश्विक स्तर पर इमेज सेंसर और अन्य सेमीकंडक्टर कंपोनेंट्स की प्रमुख निर्माता कंपनियों में शामिल है। कंपनी के उत्पादों का उपयोग उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, औद्योगिक उपकरणों और कई उन्नत तकनीकी क्षेत्रों में किया जाता है। ऐसे में कुमामोटो प्लांट का अस्थायी रूप से बंद होना वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, हालांकि कंपनी ने अभी उत्पादन पर संभावित प्रभाव को लेकर कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है।

    इस घटना पर भारत ने भी संवेदना व्यक्त की है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जापान में आए भूकंप पर चिंता जताते हुए कहा कि भारत इस कठिन समय में जापान की सरकार और वहां के लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा है। उन्होंने प्रभावित लोगों की सुरक्षा, शीघ्र राहत और जल्द सामान्य स्थिति बहाल होने की कामना की। फिलहाल सभी की नजरें राहत कार्यों की प्रगति और सोनी के कुमामोटो प्लांट में परिचालन दोबारा शुरू होने के निर्णय पर टिकी हुई हैं।

  • जापान में 7.1 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप से हिली धरती, कई प्रांतों के लिए सुनामी अलर्ट जारी..

    जापान में 7.1 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप से हिली धरती, कई प्रांतों के लिए सुनामी अलर्ट जारी..

    नई दिल्ली । जापान के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में मंगलवार को आए 7.1 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने व्यापक क्षेत्र में लोगों को दहशत में डाल दिया। भूकंप का केंद्र कुमामोटो प्रांत के आसपास दर्ज किया गया। तेज झटकों के तुरंत बाद जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने सुनामी की चेतावनी जारी करते हुए तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी। प्रशासन ने संभावित खतरे को देखते हुए कई क्षेत्रों में आपातकालीन अलर्ट भी जारी कर दिया है।

    जापान मौसम विज्ञान एजेंसी के अनुसार, भूकंप रिक्टर पैमाने पर 7.1 तीव्रता का था। झटके इतने तेज थे कि कुमामोटो सहित आसपास के कई क्षेत्रों में इमारतें हिलने लगीं और लोग घरों तथा कार्यालयों से बाहर निकल आए। प्रारंभिक आकलन के अनुसार समुद्र में लगभग एक मीटर ऊंची लहरें उठने की आशंका जताई गई है, जिसके चलते तटीय क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

    भूकंप के तुरंत बाद जापान सरकार ने इमरजेंसी भूकंप चेतावनी प्रणाली सक्रिय कर दी। इसके तहत दक्षिणी क्यूशू द्वीप के कई प्रांतों के लिए विशेष अलर्ट जारी किया गया। कुमामोटो के अलावा नागासाकी, कागोशिमा, फुकुओका, सागा, ओइता और मियाज़ाकी प्रांतों में प्रशासन ने लोगों से आधिकारिक निर्देशों का पालन करने और समुद्र तटों से दूर रहने की अपील की है।

    सुरक्षा एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी कर रहे हैं। राहत और बचाव दलों को भी तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है।

    जापान दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में शामिल है। देश प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में स्थित है, जहां कई टेक्टोनिक प्लेटें आपस में मिलती हैं। इसी कारण यहां समय-समय पर मध्यम और तेज तीव्रता के भूकंप आते रहते हैं। जापान ने वर्षों के अनुभव के आधार पर उन्नत भूकंप चेतावनी प्रणाली और आपदा प्रबंधन तंत्र विकसित किया है, जिससे लोगों को समय रहते सतर्क किया जा सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े भूकंप के बाद कुछ समय तक आफ्टरशॉक आने की संभावना बनी रहती है। इसी कारण प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने तटीय इलाकों में रहने वाले नागरिकों से समुद्र के किनारे जाने से बचने और जरूरत पड़ने पर ऊंचे एवं सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने का आग्रह किया है।

    फिलहाल प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। भूकंप के बाद विभिन्न सरकारी एजेंसियां नुकसान का आकलन करने में जुटी हैं। साथ ही परिवहन, संचार और अन्य आवश्यक सेवाओं की स्थिति की भी समीक्षा की जा रही है। यदि स्थिति में कोई नया बदलाव होता है तो संबंधित अधिकारियों द्वारा समय-समय पर नई जानकारी जारी की जाएगी। अभी तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता देते हुए सभी संबंधित विभाग अलर्ट मोड पर काम कर रहे हैं।

  • पश्चिमी ईरान में 5.5 तीव्रता का भूकंप, 10 किलोमीटर गहराई में था केंद्र; फिलहाल बड़े नुकसान की सूचना नहीं, निगरानी जारी

    पश्चिमी ईरान में 5.5 तीव्रता का भूकंप, 10 किलोमीटर गहराई में था केंद्र; फिलहाल बड़े नुकसान की सूचना नहीं, निगरानी जारी

    नई दिल्ली । पश्चिमी ईरान में सोमवार को आए 5.5 तीव्रता के भूकंप ने एक बार फिर क्षेत्र की भूकंपीय संवेदनशीलता को उजागर कर दिया। सुबह दर्ज किए गए इस भूकंप के झटके काहरिज और जावनरुद सहित आसपास के कई इलाकों में महसूस किए गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार भूकंप का केंद्र जमीन से लगभग 10 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। झटकों के बाद लोगों में कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बना, हालांकि अब तक किसी बड़े जान-माल के नुकसान या व्यापक तबाही की पुष्टि नहीं हुई है।

    यूरोपियन-मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर के अनुसार भूकंप का केंद्र काहरिज शहर से लगभग 54 किलोमीटर पश्चिम में स्थित था। वहीं जावनरुद शहर से यह लगभग 33 किलोमीटर दक्षिण की ओर दर्ज किया गया। दोनों क्षेत्रों में लोगों ने झटकों को स्पष्ट रूप से महसूस किया। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारी प्रभावित इलाकों की स्थिति का लगातार आकलन कर रहे हैं ताकि किसी भी संभावित नुकसान की सही जानकारी जुटाई जा सके।

    भूकंप के तुरंत बाद कई स्थानों पर लोग एहतियात के तौर पर घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। राहत एवं बचाव एजेंसियां भी सतर्क हैं और स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल किसी बड़े ढांचागत नुकसान, सड़क बाधित होने या जनहानि की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

    भूकंप के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे भी सामने आए। कुछ पोस्ट में इस घटना को ईरान के परमाणु कार्यक्रम या भूमिगत गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश की गई। हालांकि अब तक किसी भी अंतरराष्ट्रीय भूकंप निगरानी संस्था या वैज्ञानिक विशेषज्ञ ने ऐसे दावों की पुष्टि नहीं की है। विशेषज्ञों का कहना है कि उपलब्ध भूकंपीय आंकड़े इस घटना को एक सामान्य प्राकृतिक भूकंप के रूप में ही दर्शाते हैं और बिना वैज्ञानिक प्रमाण के किसी अन्य कारण से जोड़ना उचित नहीं होगा।

    ईरान लंबे समय से दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में गिना जाता है। इसका प्रमुख कारण इसकी भौगोलिक स्थिति है। देश ऐसे क्षेत्र में स्थित है जहां अरब और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटें लगातार एक-दूसरे की ओर बढ़ रही हैं। इन प्लेटों के बीच बनने वाला दबाव समय-समय पर भूकंप के रूप में बाहर निकलता है, जिसके कारण यहां मध्यम से लेकर शक्तिशाली भूकंप आते रहते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे क्षेत्रों में भूकंप का पूरी तरह पूर्वानुमान लगाना संभव नहीं है, इसलिए मजबूत निर्माण, प्रभावी आपदा प्रबंधन और समय पर चेतावनी व्यवस्था ही नुकसान को कम करने का सबसे प्रभावी उपाय है। स्थानीय प्रशासन भी प्रभावित इलाकों में स्थिति की निगरानी कर रहा है और यदि किसी प्रकार की क्षति सामने आती है तो आवश्यक राहत कार्य तुरंत शुरू किए जाएंगे।

    ताजा भूकंप ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता और आपदा तैयारियों का लगातार मजबूत रहना कितना आवश्यक है। फिलहाल संबंधित एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों का विस्तृत सर्वेक्षण कर रही हैं और स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

  • मेक्सिको में आया 7.4 की तीव्रता का भूकंप, आसपास के कई देशों में महसूस हुए झटके

    मेक्सिको में आया 7.4 की तीव्रता का भूकंप, आसपास के कई देशों में महसूस हुए झटके


    मेक्सिको सिटी।
    मेक्सिको (Mexico) में 7.4 की तीव्रता के साथ भयंकर भूकंप (Earthquake) आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक देश के दक्षिणी राज्य चियापास (Southern state Chiapas) के पास इसका केंद्र था। इस शक्तिशाली भूकंप (Powerful Earthquake) की वजह से मेक्सिको समेत आस पास के कई देशों जैसे कि अल सल्वाडोर और ग्वाटेमाला में झटके महसूस किए गए हैं। हालांकि अभी तक मानवीय नुकसान के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

    शुक्रवार को आए इस भूकंप के बारे में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) विभाग ने स्पष्ट रूप से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भूकंप का केंद्र मेक्सिकों के प्यूर्टो मादेरो शहर से करीब 10 किलोमीटर की गहराई में था। अब ऑफ्टर शॉक की वजह से और भी झटके आने की आशंका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 7.4 तीव्रता के झटके बाद कई झटके और लगे। इसमें सबसे तेज झटका 6.1 की तीव्रता का था।

    मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम ने कहा कि भूकंप के बाद चियापास और टबास्को राज्यों में नुकसान की कोई तत्काल खबर नहीं मिली है। प्रभावित इलाकों में नुकसान का आकलन जारी है और अधिकारी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। वहीं, ग्वाटेमाला के राष्ट्रपति बर्नार्डो अरेवालो ने भी पुष्टि की, “अब तक किसी की मौत की खबर नहीं है। एजेंसियां पल-पल की स्थिति पर नजर रख रही हैं।” उन्होंने आगे कहा, “मैं लोगों से शांत रहने और ऐसे मामलों में दी गई सलाह का पालन करने की अपील करता हूं।”


    सुनामी की चेतावनी जारी

    इस शक्तिशाली भूकंप के बाद अमेरिकी अमेरिकी सुनामी चेतावनी प्रणाली (US Tsunami Warning System) ने इस क्षेत्र के लिए सुनामी खतरे की चेतावनी जारी की है। इसके साथ ही उन्होंने प्रभावित तटीय इलाकों में समुद्र के जल-स्तर में खतरनाक बदलाव की संभावना के प्रति आगाह किया।

    सोशल मीडिया पर भूकंप के बाद के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। इसमें इमारतें तेजी के साथ हिलती हुई नजर आ रही हैं।

    मेक्सिको में आए इस भूकंप का असर पड़ोसी देशों में भी देखा गया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ग्वाटेमाला सिटी में इमारतें बुरी तरह से हिल गई हैं। दूसरी तरफ अल सल्वाडोर में भी निवासियों ने तेज भूकंप के झटके महसूस किए हैं। फिलहाल किसी भी देश में कितना नुकसान हुआ है, इसके बारे में स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि, इतने शक्तिशाली भूकंप के बाद नुकसान की आशंका बढ़ गई है।

    यह भूकंप ऐसे समय में सामने आया है। जब कुछ समय पहले ही मेक्सिको के पड़ोसी देश वेनेजुएला में भूकंप ने तबाही मचाई थी। इसमें कई दर्जन लोग मारे गए थे। भारत समेत कई देशों ने मदद भेजी थी। इसके अलावा अभी हाल ही में न्यूजीलैंड और इंडोनेशिया के पास भूकंप आया था। इसके बाद भी सुनामी की चेतावनी जारी की गई थी।