Tag: Eclipse

  • 12 अगस्त के सूर्य ग्रहण से इन 3 राशियों पर मंडराया संकट, जानिए किसे रहना होगा सबसे ज्यादा सावधान

    12 अगस्त के सूर्य ग्रहण से इन 3 राशियों पर मंडराया संकट, जानिए किसे रहना होगा सबसे ज्यादा सावधान

    नई दिल्ली । वर्ष 2026 का अंतिम सूर्य ग्रहण आगामी 12 अगस्त को घटित होने जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इस खगोलीय घटना को अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली माना गया है। गणना के अनुसार, यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र में लगेगा। इस ग्रहण के प्रभाव से राशि चक्र की तीन प्रमुख राशियों सिंह, धनु और कुंभ के त्रिक भाव सक्रिय हो रहे हैं, जिसके कारण इन राशियों के जातकों को स्वास्थ्य, करियर और आर्थिक मामलों में अत्यधिक सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    ज्योतिष शास्त्र में छठे, आठवें और बारहवें भाव को त्रिक भाव कहा जाता है, जिन्हें सामान्यतः संघर्ष, व्यय और बाधाओं का कारक माना जाता है। ग्रहण के प्रभाव से सिंह राशि के जातकों के 12वें भाव पर असर पड़ेगा, जो अनियंत्रित खर्चों और आर्थिक नुकसान का संकेत देता है। इस अवधि में सिंह राशि के लोगों का बजट प्रभावित हो सकता है और पारिवारिक स्तर पर वैचारिक मतभेद उभर सकते हैं। विशेष रूप से विदेश से जुड़ा व्यापार करने वालों और सेहत के प्रति लापरवाह रहने वालों को सावधान रहने की जरूरत है।

    धनु राशि के जातकों के लिए यह सूर्य ग्रहण आठवें भाव में घटित हो रहा है, जो अचानक आने वाली रुकावटों और संकटों से संबंधित माना जाता है। इस दौरान बने-बनाए कार्यों में अड़चनें आ सकती हैं। ज्योतिषीय परामर्श के अनुसार, धनु राशि वाले इस समय किसी भी प्रकार के बड़े वित्तीय निवेश या जोखिम भरे फैसलों से बचें। यात्रा के दौरान सामान की सुरक्षा और वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतना आवश्यक रहेगा।

    कुंभ राशि के जातकों के लिए ग्रहण का प्रभाव छठे भाव में देखने को मिलेगा, जिसे रोग और प्रतिस्पर्धियों का भाव माना जाता है। इस दौरान कार्यस्थल पर गुप्त शत्रुओं की सक्रियता बढ़ सकती है, जो कार्यों में रुकावट डालने का प्रयास कर सकते हैं। व्यापार से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी न करने और सहकर्मियों के साथ संयम बनाए रखने की सलाह दी गई है। इसके अलावा पेट और रक्त से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति भी सचेत रहना होगा।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस खगोलीय घटना के प्रभाव से बचने के लिए संबंधित राशि के जातकों को ईश्वर आराधना और नियमित मंत्र जाप करने का परामर्श दिया गया है। देश के विभिन्न हिस्सों में इस ग्रहण को लेकर धार्मिक और आध्यात्मिक तैयारियां भी की जा रही हैं।

  • ग्रहण और होली का अद्वितीय संगम: चंद्र ग्रहण के दिन पानी से होली खेलने पर प्रतिबंध

    ग्रहण और होली का अद्वितीय संगम: चंद्र ग्रहण के दिन पानी से होली खेलने पर प्रतिबंध


    नई दिल्ली। इस वर्ष, फाल्गुन पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण एक ही दिन पड़ रहे हैं। 3 मार्च को एक ग्रस्त उदित चंद्र ग्रहण रहेगा, जो दोपहर 3:19 बजे से शाम 6:47 बजे तक होगा। इस ग्रहण का प्रभाव विशेष रूप से 6:47 बजे तक रहेगा, जब धुलेंडी (होली) का पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, ग्रहण का सूतक काल प्रातः 6:47 बजे से शुरू होगा, जो ग्रहण के समाप्त होने तक असर दिखाएगा।

    पानी से होली खेलने की मनाही
    चंद्रमा को जल का कारक माना जाता है, इसलिए इस वर्ष ग्रहण के दौरान पानी से होली खेलना वर्जित है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि जल का उपयोग करने से मानसिक अशांति और नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं। अत: इस बार गुलाल से ही होली खेलना शुभ रहेगा, जबकि पानी से होली खेलना टालना चाहिए।

    गैर निकाले जा सकेंगे, लेकिन…
    ग्रहण के दिन गैर (पारंपरिक लोकनृत्य) निकालने की परंपरा भी जारी रहेगी, लेकिन यह सिर्फ सूखा और गुलाल का ही इस्तेमाल करके किया जाएगा। उज्जैन और राज्य के अन्य हिस्सों में यह परंपरा बनाये रखने की मान्यता है। ज्योतिषाचार्य पं. अमर डिब्बेवाला के अनुसार, परंपरागत गैर निकाले जाने से कोई दोष नहीं लगता, बशर्ते यह एक प्रहर (लगभग तीन घंटे) के भीतर किया जाए।

    भद्राकाल में होगा होलिका दहन
    2 मार्च की रात को होलिका दहन होगा, लेकिन इस बार भद्राकाल (शाम 5:55 से रात 4:28 तक) के प्रभाव में यह किया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि प्रदोष काल में होलिका पूजन सबसे श्रेष्ठ होगा, साथ ही इस समय दान-पुण्य भी किए जा सकते हैं, जो इस दिन की महिमा को बढ़ाते हैं।

    ग्रहण और सूतक काल का समय
    सूतक काल: ग्रहण से 12 घंटे पहले शुरू होता है, यानी सुबह 6:47 बजे से।

    ग्रहण का समय: 3:19 बजे से 6:47 बजे तक।

    इस दौरान कोई भी शुभ कार्य वर्जित माना जाता है और मंदिरों के पट बंद रखे जाते हैं।

    राशियों पर ग्रहण का प्रभाव
    ग्रहण का राशियों पर भी खास असर होगा:

    मेष: अनुकूल रहेगा, मित्रों से सहायता मिलेगी।

    वृषभ: प्रयास बढ़ाने होंगे, विशेष ध्यान दें।

    मिथुन: वाणी और क्रोध पर संयम जरूरी।

    कर्क: जलीय राशि होने के कारण लाभ की संभावना।

    सिंह: कानूनी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर से पहले सावधानी बरतें।

    कन्या: नई नौकरी और व्यापार में अवसर मिल सकते हैं।

    तुला: विशेष व्यक्ति से सहयोग मिलेगा।

    वृश्चिक: भूमि भवन से जुड़ा कोई काम हो सकता है।

    धनु: नए कार्यों की शुरुआत संभव।

    मकर और कुम्भ: न्यायिक दृष्टि से अनुकूल समय।

    मीन: धार्मिक कार्यों में सफलता मिलेगी।

    सूतक काल में क्या करें और क्या न करें?
    भोजन: 6:30 बजे से 9:30 बजे तक बुजुर्ग और मरीज भोजन कर सकते हैं।

    पूजा-अर्चना: ग्रहण के दौरान संयम रखकर भजन-पूजन करें। विशेष रूप से ग्रहण के समय और सूतक काल में ध्यान रखें कि कोई भी शुभ कार्य न करें।

    इस वर्ष के ग्रहण और होली का समय परंपरा और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बहुत ही विशेष है। जल से होली न खेलने का कारण यह भी है कि इस दिन चंद्रमा को जल का कारक माना जाता है, और इससे कुछ नकारात्मक असर हो सकता है। इस बार सिर्फ गुलाल से होली खेलना ही शुभ रहेगा।