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  • वैश्विक विकास में भारत की भूमिका अहम, फिनलैंड के महावाणिज्यदूत ने सराहा सहयोग

    वैश्विक विकास में भारत की भूमिका अहम, फिनलैंड के महावाणिज्यदूत ने सराहा सहयोग

    नई दिल्ली । भारत और फिनलैंड के बीच आर्थिक, तकनीकी और सतत विकास से जुड़े सहयोग को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। फिनलैंड के महावाणिज्यदूत एरिक अफ हॉलस्ट्रॉम ने भारत को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण देशों में से एक बताते हुए कहा कि वैश्विक विकास और आर्थिक प्रगति में भारत की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। उन्होंने माना कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत न केवल एक बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है, बल्कि टिकाऊ विकास और नवाचार के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

    मुंबई में बातचीत के दौरान हॉलस्ट्रॉम ने कहा कि सर्कुलर इकोनॉमी यानी संसाधनों के पुनः उपयोग और टिकाऊ उत्पादन की अवधारणा आने वाले वर्षों में दुनिया की प्रमुख जरूरत बनने जा रही है। उनके अनुसार भारत और फिनलैंड दोनों ऐसे देश हैं जो पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और संसाधनों के बेहतर उपयोग को प्राथमिकता दे रहे हैं। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और संसाधनों की सीमित उपलब्धता जैसी चुनौतियों का सामना करने के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारी बेहद आवश्यक है।

    भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते पर बोलते हुए उन्होंने इसे दोनों पक्षों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताया। उनका कहना था कि समझौते से जुड़ी बातचीत पूरी हो चुकी है और अब इसके क्रियान्वयन की प्रक्रियाएं आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि समझौता लागू होने के बाद भारत और यूरोपीय देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों में तेज वृद्धि होगी। विशेष रूप से फिनलैंड और भारत के बीच व्यापारिक संबंधों को इससे नई ऊर्जा मिलेगी और द्विपक्षीय व्यापार वर्तमान स्तर से दोगुना तक पहुंच सकता है। इससे निवेश, तकनीक हस्तांतरण और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

    महाराष्ट्र की आर्थिक भूमिका पर चर्चा करते हुए हॉलस्ट्रॉम ने कहा कि यह राज्य भारत की अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र है और देश के औद्योगिक तथा निवेश परिदृश्य में इसकी विशेष पहचान है। उन्होंने बताया कि फिनलैंड और महाराष्ट्र के बीच कई परियोजनाओं पर सहयोग जारी है। मुंबई के ससून डॉक के विकास से संबंधित परियोजना में फिनिश कंपनियां सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उनका मानना है कि ऐसे संयुक्त प्रयास दोनों देशों के बीच व्यावसायिक संबंधों को और मजबूत बनाने में सहायक साबित होंगे।

    उन्होंने यह भी बताया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और फिनलैंड के विदेश व्यापार मंत्री विले टावियो के बीच अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कई बार मुलाकात हो चुकी है। इन बैठकों में हरित अर्थव्यवस्था, सतत विकास और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। इसके अलावा विज्ञान, तकनीक और नवाचार जैसे क्षेत्रों में भी दोनों पक्ष नए अवसर तलाश रहे हैं। हाल ही में फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाने का निर्णय लिया था, जिसे भविष्य के सहयोग के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    भारत और फिनलैंड के बीच बढ़ता सहयोग आने वाले समय में व्यापार, तकनीक और हरित विकास के क्षेत्रों में नए अवसर पैदा कर सकता है। भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने के बाद दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और मजबूती मिलने की संभावना है, जिससे निवेश और कारोबार का दायरा भी व्यापक होगा।

  • भारत-न्यूजीलैंड व्यापार सहयोग मजबूत, निवेश और सेवाओं के क्षेत्र में खुले नए अवसर..

    भारत-न्यूजीलैंड व्यापार सहयोग मजबूत, निवेश और सेवाओं के क्षेत्र में खुले नए अवसर..

    नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है, जिसे दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य व्यापार को आसान बनाना और निवेश के नए रास्ते खोलना है, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को लाभ मिल सके।

    इस पहल के तहत यह तय किया गया है कि व्यापारिक प्रक्रियाओं को अधिक सरल और प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि कंपनियों को एक-दूसरे के बाजारों तक पहुंचने में किसी तरह की कठिनाई का सामना न करना पड़े। इससे निर्यात और आयात दोनों क्षेत्रों में तेजी आने की उम्मीद है।

    भारत और न्यूजीलैंड के मौजूदा व्यापारिक संबंध पहले से ही मजबूत हैं, लेकिन इस नए समझौते के बाद इनके और विस्तार की संभावना बढ़ गई है। खासतौर पर सेवा क्षेत्र और तकनीकी उद्योगों में नए अवसर खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    इस साझेदारी में केवल वस्तुओं का व्यापार ही नहीं, बल्कि सेवाओं के क्षेत्र को भी प्राथमिकता दी गई है। आईटी, शिक्षा, वित्तीय सेवाएं और पेशेवर सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों के लिए नए बाजार खुल सकते हैं।

    साथ ही निवेश को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया गया है, जिससे दोनों देशों में नए उद्योग स्थापित हो सकते हैं और रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। यह आर्थिक सहयोग दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

    लोगों के बीच संपर्क और यात्रा सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया गया है, ताकि व्यापार के साथ-साथ सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध भी मजबूत हो सकें। इससे दोनों देशों के बीच भरोसा और सहयोग और गहरा होगा।

    न्यूजीलैंड में रहने वाले भारतीय समुदाय को भी इस साझेदारी में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला माना जा रहा है, जो व्यापार और निवेश को आगे बढ़ाने में सेतु का काम कर सकता है।

    यह समझौता भारत और न्यूजीलैंड के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम है, जिससे आने वाले समय में दोनों देशों को व्यापार और निवेश के क्षेत्र में बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

  • जापान का भारत को बड़ा तोहफा: 16,420 करोड़ का ODA लोन, मेट्रो-हेल्थ और कृषि को मिलेगा बढ़ावा

    जापान का भारत को बड़ा तोहफा: 16,420 करोड़ का ODA लोन, मेट्रो-हेल्थ और कृषि को मिलेगा बढ़ावा


    नई दिल्ली। भारत के विकास को गति देने के लिए जापान ने एक बड़ा कदम उठाया है। जापान सरकार ने भारत को 275.858 बिलियन येन (करीब 16,420 करोड़ रुपए) का आधिकारिक विकास सहायता (ODA) लोन देने का ऐलान किया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह फंड देश के शहरी परिवहन, स्वास्थ्य और कृषि जैसे अहम क्षेत्रों में बड़े प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। इस फैसले से भारत-जापान के बीच दशकों पुराने आर्थिक रिश्ते और मजबूत होने की उम्मीद है।

    मेट्रो प्रोजेक्ट्स को मिलेगा बड़ा सहारा

    इस लोन का सबसे बड़ा हिस्सा शहरी परिवहन, खासकर मेट्रो रेल नेटवर्क के विस्तार पर खर्च किया जाएगा। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में मेट्रो रेल फेज-3 परियोजना के लिए 102.480 बिलियन येन दिए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट से शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी और लोगों को बेहतर व तेज कनेक्टिविटी मिल सकेगी।

    इसी तरह, महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में मेट्रो लाइन-11 परियोजना के लिए 92.400 बिलियन येन की सहायता दी जाएगी। इस परियोजना से मुंबई में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने, यात्रा को आसान बनाने और प्रदूषण घटाने में मदद मिलेगी। यह पहल शहरी जीवन को अधिक सुगम और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

    स्वास्थ्य सेवाओं में होगा सुधार

    जापान की इस आर्थिक सहायता का एक बड़ा हिस्सा स्वास्थ्य क्षेत्र के विकास पर भी खर्च किया जाएगा। महाराष्ट्र में आधुनिक अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और नर्सिंग संस्थानों के निर्माण के लिए 62.294 बिलियन येन का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य आम लोगों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इस निवेश से स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती मिलेगी और चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच भी बढ़ेगी।

    कृषि क्षेत्र को भी मिलेगा बढ़ावा

    कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए भी इस लोन का उपयोग किया जाएगा। पंजाब में टिकाऊ बागवानी (हॉर्टिकल्चर) को बढ़ावा देने के लिए 18.684 बिलियन येन की सहायता दी जाएगी। इससे किसानों को पारंपरिक खेती से हटकर ज्यादा लाभ देने वाली फसलों की ओर बढ़ने का मौका मिलेगा। साथ ही, कृषि से जुड़ी सप्लाई चेन और इंफ्रास्ट्रक्चर भी मजबूत होगा, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

    1958 से मजबूत हो रहे रिश्ते

    भारत और जापान के बीच विकास सहयोग का रिश्ता नया नहीं है। यह साझेदारी 1958 से लगातार मजबूत होती आ रही है। जापान लंबे समय से भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाओं में निवेश करता रहा है। मौजूदा फंडिंग पैकेज इस रिश्ते को और गहराई देगा और दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाएगा।

    विकास को मिलेगी नई रफ्तार

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश भारत के बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्रों में व्यापक सुधार लाने में सहायक होगा। मेट्रो प्रोजेक्ट्स से शहरी परिवहन बेहतर होगा, स्वास्थ्य निवेश से चिकित्सा सुविधाएं मजबूत होंगी और कृषि क्षेत्र में बदलाव से किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार आ सकता है। कुल मिलाकर, यह लोन भारत के समग्र विकास को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।

  • PM मोदी के इजरायल दौरे से पहले FTA पर नई पहल, भारत-इजरायल के बीच फिर शुरू हुई व्यापार वार्ता

    PM मोदी के इजरायल दौरे से पहले FTA पर नई पहल, भारत-इजरायल के बीच फिर शुरू हुई व्यापार वार्ता


    नई दिल्ली। भारत और इजरायल के बीच मुक्त व्यापार समझौते FTA को लेकर एक बार फिर सकारात्मक हलचल शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बुधवार को दो दिवसीय इजरायल दौरे से ठीक पहले दोनों देशों ने FTA पर औपचारिक चर्चा का पहला दौर शुरू कर दिया है।

    मंगलवार को जारी आधिकारिक बयान में पुष्टि की गई कि द्विपक्षीय वाणिज्यिक संबंधों को मजबूत करने और निवेश को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से वार्ता आगे बढ़ाई जा रही है। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष नवंबर में दोनों देशों ने इस समझौते के लिए संदर्भ की शर्तों टीओआर पर हस्ताक्षर किए थे।

    23 फरवरी से नई दिल्ली में शुरू हुई वार्ता

    वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार भारत-इजरायल FTA के लिए बातचीत का पहला दौर 23 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में शुरू हुआ जो 26 फरवरी तक चलेगा। इससे पहले दोनों देशों के बीच आठ दौर की बातचीत हो चुकी थी लेकिन अक्टूबर 2021 के बाद यह प्रक्रिया ठप पड़ गई थी। अब एक बार फिर इसे आगे बढ़ाया जा रहा है।

    तकनीकी स्तर पर गहन चर्चा

    इस दौर में दोनों देशों के तकनीकी विशेषज्ञ अलग-अलग सत्रों में समझौते के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श करेंगे। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव अजय भादू कर रहे हैं जबकि इजरायल की ओर से वरिष्ठ निदेशक यिफ़ात अलोन पेरेल वार्ता की अगुवाई कर रही हैं।

    व्यापार में गिरावट समझौते से उम्मीद

    ऐसे मुक्त व्यापार समझौतों में आमतौर पर अधिकतम वस्तुओं पर आयात शुल्क में भारी कटौती या पूरी तरह समाप्ति की व्यवस्था की जाती है। साथ ही सेवाओं और निवेश से जुड़े नियमों को भी आसान बनाया जाता है।

    वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत से इजरायल को निर्यात 52% घटकर 2.14 अरब डॉलर रह गया जबकि आयात भी 26.2% की गिरावट के साथ 1.48 अरब डॉलर पर आ गया। ऐसे में FTA से दोनों देशों के व्यापार को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।