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  • 2047 का विकसित भारत अब दूर नहीं! सिर्फ 20 साल बाकी, वित्त मंत्री सीतारमण बोलीं- सुधारों को चाहिए और ज्यादा समर्थन

    2047 का विकसित भारत अब दूर नहीं! सिर्फ 20 साल बाकी, वित्त मंत्री सीतारमण बोलीं- सुधारों को चाहिए और ज्यादा समर्थन


    नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को लेकर बड़ा संदेश देते हुए कहा है कि यह लक्ष्य अब मुश्किल से 20 वर्ष दूर रह गया है। ऐसे में भारत को आर्थिक और संरचनात्मक सुधारों की रफ्तार को और तेज करने के लिए व्यापक समर्थन की जरूरत होगी। अमेरिका के शिकागो में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिभाशाली और व्यापक अनुभव रखने वाले लोगों के साथ ऐसे लोगों का सहयोग भी जरूरी है जो नई सोच और नए विचारों के साथ भारत की विकास यात्रा को मजबूती दे सकें। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया में पूंजी को बेहद महत्वपूर्ण बताया और कहा कि किसी देश की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त पूंजी आवश्यक होती है।

    सीतारमण ने भारत की आर्थिक नीतियों और राजकोषीय अनुशासन का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने वर्ष 2030 तक कर्ज को सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के 50 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य तय किया है। सरकार इसी दिशा में लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं में कर्ज का स्तर उनकी जीडीपी के 200 प्रतिशत से भी अधिक है लेकिन भारत ने अपने लिए राजकोषीय अनुशासन का स्पष्ट रास्ता चुना है। वित्त मंत्री के अनुसार राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए तय किए गए लक्ष्यों की दिशा में भी सरकार ने निर्धारित प्रगति हासिल की है।

    वित्त मंत्री ने भारत की आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि देश की क्रेडिट रेटिंग में सुधार हो रहा है और यह सुधार किसी नियम को दरकिनार करके हासिल नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सामाजिक कल्याण के लिए जरूरी संसाधनों को रोककर भी आर्थिक मजबूती हासिल नहीं की जा रही है बल्कि अर्थव्यवस्था का उचित और संतुलित प्रबंधन इसकी मुख्य वजह है। उनके मुताबिक भारत ने आर्थिक विकास के साथ सामाजिक जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है।

    सीतारमण ने वैश्विक आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हाल के दौर में कच्चे तेल एलपीजी और उर्वरक जैसी महत्वपूर्ण वस्तुओं की वैश्विक आपूर्ति में मुश्किलें सामने आईं। इन वस्तुओं को भारत तक पहुंचाने वाले जहाजों को पर्याप्त बीमा कवर मिलने में भी दिक्कतें आईं और जोखिम प्रीमियम काफी बढ़ गया। ऐसी परिस्थितियों में आयात और आपूर्ति व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता था।

    उन्होंने बताया कि सरकार ने बजट में एक घोषणा के जरिए ऐसा फंड उपलब्ध कराया जिससे जोखिम के कारण शिपिंग कंपनियों को चुकाने पड़ने वाले अतिरिक्त प्रीमियम में सहायता दी जा सके। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि वैश्विक संकट का सीधा असर भारतीय किसानों परिवारों और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र पर न पड़े। वित्त मंत्री के अनुसार इस कदम से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिली और भारतीय अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने की कोशिश की गई।

    उर्वरक की उपलब्धता का उदाहरण देते हुए सीतारमण ने कहा कि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति में कमी के बावजूद भारत में उर्वरक की कमी महसूस नहीं होने दी गई। सरकार ने बाजारों को लगातार यह जानकारी उपलब्ध कराई कि देश को कितनी मात्रा में उर्वरक की आवश्यकता होगी। इससे आपूर्ति की योजना बनाने और जरूरत के मुताबिक संसाधन जुटाने में मदद मिली।

    वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच कई देशों की आर्थिक गणनाएं प्रभावित हुईं लेकिन भारत ने अपनी सीमाओं के बावजूद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपने नागरिकों को सुरक्षित रखने की कोशिश की। उनके बयान का व्यापक संदेश यही रहा कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य हासिल करने के लिए आने वाले वर्षों में आर्थिक अनुशासन निवेश सुधार नवाचार और वैश्विक भारतीय समुदाय के सहयोग को एक साथ आगे बढ़ाना होगा। अब जब लक्ष्य लगभग दो दशक की दूरी पर है तब सुधारों की गति और उनके प्रभाव को बढ़ाना सरकार की बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

  • कनाडा के निवेशकों पर भारत की नजर, सीतारमण बोलीं- नीतियां अनुकूल और टैक्स व्यवस्था में बढ़ी निश्चितता

    कनाडा के निवेशकों पर भारत की नजर, सीतारमण बोलीं- नीतियां अनुकूल और टैक्स व्यवस्था में बढ़ी निश्चितता


    नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कनाडा के प्रमुख निवेशकों और कंपनियों को भारत में निवेश के बढ़ते अवसरों का लाभ उठाने का न्योता दिया है। टोरंटो में आयोजित हाई लेवल बिजनेस राउंडटेबल में वित्त मंत्री ने कनाडाई कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ भारत के निवेशक हितैषी नीतिगत माहौल टैक्स से जुड़ी निश्चितता और लगातार किए जा रहे आर्थिक सुधारों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत अलग अलग सेक्टर और क्षेत्रों में निवेश के लिए नए अवसर उपलब्ध करा रहा है और कनाडाई कंपनियां इन संभावनाओं के साथ अपनी साझेदारी को और मजबूत कर सकती हैं।

    राउंडटेबल में क्लीन टेक्नोलॉजी जरूरी खनिज रेयर अर्थ्स एनर्जी स्टोरेज सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर कृषि फूड प्रोसेसिंग ऑटोमोबाइल टेक्सटाइल्स ग्रीन स्टील एयरोस्पेस स्पेस साइबर सिक्योरिटी बायोटेक्नोलॉजी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एसेट मैनेजमेंट हायर एजुकेशन और स्किल डेवलपमेंट जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों के कारोबारी प्रतिनिधि शामिल हुए। इससे साफ है कि भारत और कनाडा के बीच आर्थिक सहयोग को केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित रखने के बजाय भविष्य की तकनीकों और उभरते उद्योगों तक विस्तार देने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    वित्त मंत्री ने ओंटारियो टीचर्स पेंशन प्लान की प्रेसिडेंट और सीईओ जो टेलर से भी मुलाकात की। उन्होंने भारत में ओटीपीपी के लंबे समय से जारी भरोसे और नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के साथ उसकी साझेदारी की सराहना की। दोनों पक्षों के बीच पार्टनरशिप और को इन्वेस्टमेंट के जरिए भारत में ओटीपीपी के इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को बढ़ाने की संभावनाओं पर बातचीत हुई। ट्रांसमिशन ट्रांसपोर्ट शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों को खास तौर पर महत्वपूर्ण बताया गया।

    सीतारमण ने ग्लोबल निवेशकों के लिए गिफ्ट आईएफएससी को एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म के तौर पर पेश किया और ओटीपीपी को भारत के साथ अपने आर्थिक जुड़ाव को और मजबूत करने तथा बड़े निवेश अवसर तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके साथ ही उन्होंने ओएमईआरएस के प्रेसिडेंट और सीईओ ब्लेक हचेसन से भी मुलाकात की और भारत में संस्थान के लगातार भरोसे की सराहना की। बातचीत में इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट समेत कई क्षेत्रों में लंबे समय की साझेदारी को और गहरा करने के अवसरों पर चर्चा हुई।

    बैठक के दौरान ट्रांसपोर्टेशन ट्रांसमिशन रिन्यूएबल एनर्जी शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर लॉजिस्टिक्स और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि बढ़ते मध्यम वर्ग और तेजी से बढ़ती इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरतों को विदेशी संस्थागत निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया गया।

    वित्त मंत्री ने कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड के प्रेसिडेंट और सीईओ जॉन ग्राहम से भी मुलाकात की। उन्होंने भारत में सीपीपीआईबी के लंबे समय के भरोसे और एनआईआईएफ इंफ्रा फंड II में उसके निवेश की सराहना की। दोनों पक्षों के बीच ट्रांसमिशन रिन्यूएबल एनर्जी सड़कें बंदरगाह शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटरों में संस्थागत पूंजी के लिए नए अवसर बढ़ाने पर चर्चा हुई। वित्त मंत्री का यह दौरा भारत में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने और कनाडाई निवेशकों के साथ दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।