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  • धरती की सबसे अनोखी बस्ती: सूरज के सबसे करीब बसे चिम्बोराजो के लोग, जानिए कैसे जीते हैं यहां के लोग

    धरती की सबसे अनोखी बस्ती: सूरज के सबसे करीब बसे चिम्बोराजो के लोग, जानिए कैसे जीते हैं यहां के लोग


    नई दिल्ली। अगर आप सोचते हैं कि धरती पर सूरज और अंतरिक्ष के सबसे करीब पहुंचने वाली जगह माउंट एवरेस्ट है, तो यह पूरी तरह सही नहीं है। वैज्ञानिक और भौगोलिक दृष्टि से यह गौरव दक्षिण अमेरिका के इक्वाडोर स्थित माउंट चिम्बोराजो को हासिल है।

    हालांकि समुद्र तल से सबसे ऊंचा पर्वत माउंट एवरेस्ट है, लेकिन पृथ्वी भूमध्य रेखा के आसपास उभरी हुई है। इसी वजह से भूमध्य रेखा के निकट स्थित चिम्बोराजो की चोटी, पृथ्वी के केंद्र से मापने पर अंतरिक्ष और सूरज के सबसे करीब पहुंचती है। इस बर्फीले और दुर्गम पर्वत की ढलानों पर आज भी हजारों लोग अपना जीवन बिता रहे हैं।

    समुद्र तल से 6,268 मीटर ऊंचे चिम्बोराजो की चोटी पर विशाल ग्लेशियर फैले हुए हैं। वहीं 3,500 से 4,200 मीटर की ऊंचाई के बीच फैले घास के मैदानों में छोटे-छोटे गांव बसे हैं। यहां मुख्य रूप से ‘क्वेशुआ’ और ‘पुरुहा’ आदिवासी समुदाय के कुछ हजार लोग रहते हैं, जिनके पूर्वजों ने सदियों पहले इस कठिन पर्वतीय क्षेत्र को अपना घर बनाया था।

    कम ऑक्सीजन में भी सामान्य जीवन
    इतनी अधिक ऊंचाई पर पहुंचने वाले अधिकांश लोगों को सांस लेने में परेशानी, सिरदर्द और चक्कर जैसी दिक्कतें होती हैं, लेकिन पीढ़ियों से यहां रहने वाले लोगों का शरीर कम ऑक्सीजन वाले वातावरण के अनुरूप ढल चुका है। यहां रात के समय तापमान अक्सर शून्य से नीचे चला जाता है और तेज ठंडी हवाएं लगातार चलती रहती हैं।

    कड़ाके की ठंड से बचने के लिए स्थानीय लोग मिट्टी की मोटी दीवारों वाले घर बनाते हैं, जिन्हें ‘चोजा’ कहा जाता है। इन घरों की छतों पर सूखी घास की मोटी परत बिछाई जाती है, जो दिन में गर्मी सोखकर रात में घर को गर्म बनाए रखती है। भोजन में गर्म जड़ी-बूटियों की चाय, आलू, चीज और एवोकाडो से बने सूप प्रमुख हैं, जबकि मांस भी उनके खानपान का अहम हिस्सा है। यहां की आजीविका खेती से अधिक पशुपालन पर आधारित है।

    ऊन देने वाले जानवरों पर टिकी आजीविका
    चिम्बोराजो क्षेत्र लामा, अल्पाका और विकुना जैसे ऊन देने वाले जानवरों का प्राकृतिक आवास है। इन्हीं की ऊन से स्थानीय लोग पारंपरिक मोटे कपड़े और पोंचो तैयार करते हैं, जो उन्हें कड़ाके की ठंड से बचाते हैं। पुरुष पोंचो पहनते हैं, जबकि महिलाएं लंबी ऊनी स्कर्ट और शॉल धारण करती हैं। बर्फ से ढके पहाड़ों के बीच उनके लाल, नीले और हरे रंग के पारंपरिक वस्त्र अलग ही आकर्षण पैदा करते हैं। खड़ी पहाड़ी ढलानों पर सामान ढोने में लामा आज भी उनके सबसे भरोसेमंद साथी हैं।

    पहाड़ नहीं, परिवार का संरक्षक
    स्थानीय लोगों के लिए चिम्बोराजो केवल एक पर्वत नहीं, बल्कि ‘पिता चिम्बोराजो’ है। उनका विश्वास है कि यह पर्वत उनकी रक्षा करता है। किसी भी खेती या शुभ कार्य से पहले वे पर्वत का आशीर्वाद लेते हैं। उनका मानना है कि पहाड़ के नाराज होने पर तूफान जैसी प्राकृतिक आपदाएं आती हैं।

    इस पर्वत से जुड़ी ‘हिएलेरोस’ नाम की एक सदियों पुरानी परंपरा भी प्रसिद्ध रही है। ‘हिएलेरोस’ यानी बर्फ निकालने वाले लोग ग्लेशियरों तक पहुंचकर बर्फ की बड़ी-बड़ी सिल्लियां काटते थे, उन्हें घास में लपेटकर नीचे के शहरों में बेचते थे। आधुनिक समय में यह परंपरा लगभग समाप्त हो चुकी है, लेकिन यह आज भी यहां के लोगों के संघर्ष और मेहनत की मिसाल मानी जाती है।

    बदलते मौसम के साथ बदल रही जिंदगी
    ग्लोबल वार्मिंग का असर अब चिम्बोराजो पर भी साफ दिखाई दे रहा है। तेजी से पिघलते ग्लेशियर भविष्य में इन बस्तियों के लिए पानी का संकट पैदा कर सकते हैं। बेहतर रोजगार और सुविधाओं की तलाश में कई युवा शहरों की ओर जा रहे हैं। वहीं, पहाड़ पर रहने वाले लोगों ने कम्युनिटी टूरिज्म को आजीविका का नया माध्यम बना लिया है। वे दुनिया भर से आने वाले ट्रैकर्स और पर्वतारोहियों के लिए गाइड का काम करते हैं, जबकि महिलाएं अपने हाथों से बुने ऊनी वस्त्र बेचकर आय अर्जित कर रही हैं।

    चिम्बोराजो के निवासी यह साबित करते हैं कि सीमित संसाधनों और कठिन प्राकृतिक परिस्थितियों के बावजूद दृढ़ इच्छाशक्ति के सहारे जीवन को सफल बनाया जा सकता है। यही वजह है कि उन्हें पूरी दुनिया में ‘सूरज का सबसे करीबी पड़ोसी’ होने का अनूठा गौरव प्राप्त है।

  • फीफा विश्व कप से बाहर होते ही इक्वाडोर में बड़ा फैसला, मेक्सिको से हार के बाद हेड कोच सेबेस्टियन बेकासे ने दिया इस्तीफा

    फीफा विश्व कप से बाहर होते ही इक्वाडोर में बड़ा फैसला, मेक्सिको से हार के बाद हेड कोच सेबेस्टियन बेकासे ने दिया इस्तीफा

    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 में मेक्सिको के हाथों राउंड ऑफ 32 में मिली हार के बाद इक्वाडोर फुटबॉल टीम में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। टीम के मुख्य कोच सेबेस्टियन बेकासे ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि विश्व कप में तय लक्ष्य हासिल नहीं हो सके, इसलिए पद छोड़ना उचित निर्णय है। उनके अनुसार विश्व कप अभियान की समाप्ति के साथ ही उनका अनुबंध भी समाप्त होना था और इसी कारण उन्होंने अपने कार्यकाल का समापन करने का फैसला लिया।

    मेक्सिको के खिलाफ खेले गए नॉकआउट मुकाबले में इक्वाडोर को 2-0 से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ टीम का विश्व कप अभियान समाप्त हो गया। मैच के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में बेकासे ने कहा कि वह इक्वाडोर फुटबॉल महासंघ और उसके नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने उन्हें स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर दिया। उन्होंने खिलाड़ियों, सहयोगी स्टाफ और पूरे देश का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह उनके लिए यादगार अनुभव रहा और टीम के साथ बिताया गया समय हमेशा विशेष रहेगा।

    कोच ने स्वीकार किया कि नॉकआउट मुकाबले में मेक्सिको ने हर विभाग में बेहतर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि उनकी टीम अपने स्वाभाविक खेल का स्तर नहीं दिखा सकी और प्रतिद्वंद्वी जीत का हकदार था। उनके अनुसार विश्व कप जैसे बड़े मंच पर छोटी-छोटी गलतियां भी भारी पड़ती हैं और इस मुकाबले में टीम अपेक्षित प्रदर्शन करने में सफल नहीं रही।

    सेबेस्टियन बेकासे ने अगस्त 2024 में इक्वाडोर की जिम्मेदारी संभाली थी। उस समय टीम दक्षिण अमेरिकी क्वालीफाइंग अभियान में कठिन दौर से गुजर रही थी। उनके नेतृत्व में इक्वाडोर ने शानदार वापसी करते हुए क्वालीफाइंग तालिका में अर्जेंटीना के बाद दूसरा स्थान हासिल किया। टीम ने पूरे अभियान में मजबूत रक्षात्मक प्रदर्शन किया और 18 क्वालीफाइंग मुकाबलों में केवल पांच गोल खाए। इस दौरान उसने कोलंबिया, उरुग्वे और ब्राजील जैसी मजबूत टीमों से बेहतर प्रदर्शन कर अपनी क्षमता का परिचय दिया।

    बेकासे के कार्यकाल का रिकॉर्ड भी संतुलित और प्रभावशाली रहा। उनके नेतृत्व में इक्वाडोर ने 24 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में नौ जीत दर्ज की, 12 मैच ड्रॉ रहे और केवल तीन मुकाबलों में हार मिली। विश्व कप से पहले टीम लगातार 19 मैचों तक अपराजित रही थी, जिससे उससे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीदें काफी बढ़ गई थीं।

    विश्व कप अभियान की शुरुआत हालांकि उम्मीद के अनुरूप नहीं रही। शुरुआती मुकाबले में आइवरी कोस्ट से हार और कुराकाओ के खिलाफ ड्रॉ के बाद टीम की आलोचना हुई। इसके बावजूद इक्वाडोर ने अंतिम ग्रुप मैच में जर्मनी को 2-1 से हराकर शानदार वापसी की और सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली टीमों में शामिल होकर राउंड ऑफ 32 में जगह बनाई। टीम की इस उपलब्धि पर इक्वाडोर सरकार ने राष्ट्रीय अवकाश की घोषणा भी की थी।

    हालांकि नॉकआउट चरण में मेक्सिको के खिलाफ हार के साथ अभियान समाप्त हो गया और इसके तुरंत बाद मुख्य कोच ने पद छोड़ने का फैसला लिया। अब इक्वाडोर फुटबॉल महासंघ के सामने नए मुख्य कोच की नियुक्ति और आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए टीम की नई रणनीति तैयार करने की चुनौती होगी।