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  • हाईकोर्ट पहुंचे आरक्षक सौरभ शर्मा बोले, सुनवाई का मौका दिए बिना हुई कार्रवाई

    हाईकोर्ट पहुंचे आरक्षक सौरभ शर्मा बोले, सुनवाई का मौका दिए बिना हुई कार्रवाई


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के चर्चित सौरभ शर्मा मामले में एक नया कानूनी मोड़ सामने आया है। आय से अधिक संपत्ति और कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों के बीच आरटीओ आरक्षक सौरभ शर्मा ने अब प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इस कदम के बाद प्रदेश के सबसे चर्चित मामलों में शामिल इस प्रकरण की कानूनी लड़ाई और दिलचस्प हो गई है।

    हाईकोर्ट में दायर याचिका में सौरभ शर्मा ने प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई की वैधानिकता पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि जांच और कानूनी प्रक्रिया के दौरान उन्हें अपना पक्ष रखने का समुचित अवसर नहीं दिया गया। याचिका में कहा गया है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 233(1) के तहत किसी भी शिकायत पर संज्ञान लेने से पहले संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर दिया जाना आवश्यक है।

    याचिकाकर्ता की ओर से यह भी तर्क दिया गया है कि जांच एजेंसी ने इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया और बिना पक्ष सुने ही आगे की कार्रवाई शुरू कर दी। उनका कहना है कि यह निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांत और संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों के विपरीत है। इसी आधार पर उन्होंने अदालत से राहत की मांग की है।

    सौरभ शर्मा ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले का भी उल्लेख किया है। मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में शीर्ष अदालत द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि किसी भी आरोपी को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए। याचिका के अनुसार इस मामले में उन्हें ऐसा अवसर नहीं दिया गया, जिससे उनके अधिकार प्रभावित हुए हैं।

    गौरतलब है कि सौरभ शर्मा का नाम उस समय सुर्खियों में आया था जब उनके और उनसे जुड़े ठिकानों पर हुई कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर करोड़ों रुपये की संपत्ति और नकदी से जुड़े दस्तावेज सामने आए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने भी जांच शुरू की थी और कथित मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

    यह मामला लंबे समय से प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई और उससे जुड़े खुलासों ने इसे हाई प्रोफाइल बना दिया है। अब सौरभ शर्मा द्वारा हाईकोर्ट का रुख किए जाने के बाद इस मामले की कानूनी दिशा पर सबकी नजरें टिक गई हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट हो सकेगा कि जांच एजेंसियों द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया कानूनी मानकों के अनुरूप थी या नहीं। फिलहाल हाईकोर्ट में दायर याचिका के बाद इस बहुचर्चित मामले में नए कानूनी तर्क और बहसें सामने आने की संभावना बढ़ गई है।

    आने वाले दिनों में अदालत का रुख और सुनवाई के दौरान पेश किए जाने वाले पक्ष इस पूरे मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। तब तक यह प्रकरण प्रदेश के सबसे चर्चित कानूनी और प्रशासनिक मामलों में बना रहेगा।

  • मिलावटी डेयरी मामले में जयश्री फूड्स के किशन मोदी की 11 संपत्तियां अटैच, 20 करोड़ की कार्रवाई

    मिलावटी डेयरी मामले में जयश्री फूड्स के किशन मोदी की 11 संपत्तियां अटैच, 20 करोड़ की कार्रवाई


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित जयश्री गायत्री फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के संचालक किशन मोदी की 20.59 करोड़ की संपत्ति प्रवर्तन निदेशालय ED ने अटैच कर दी है। ईडी ने “मिल्क मैजिक” ब्रांड से जुड़े मिलावटी डेयरी उत्पाद मामले में कार्रवाई करते हुए उनकी 11 अचल संपत्तियों को अटैच किया।

    न्यायिक हिरासत में किशन मोदी

    इस मामले में किशन मोदी मुख्य आरोपी हैं। पहले 13 मार्च 2026 को ईडी ने उन्हें गिरफ्तार किया था। 18 मार्च तक रिमांड पर रहने के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से किशन मोदी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

    मामले का विवरण

    किशन मोदी पर आरोप है कि उन्होंने दूध में पाम ऑयल और हानिकारक रसायनों मिलाकर मिलावटी डेयरी उत्पाद तैयार किए और निर्यात किया। “मिल्क मैजिक” ब्रांड के तहत काम करने वाली इस कंपनी पर फर्जी लैब टेस्ट रिपोर्ट का इस्तेमाल कर बहरीन, हांगकांग, सिंगापुर, ओमान, कतर और UAE जैसे देशों में घटिया दूध और डेयरी उत्पाद भेजने का आरोप है। इस कार्रवाई से यह स्पष्ट हुआ कि प्रवर्तन निदेशालय और प्रशासन मिलावट और उपभोक्ता सुरक्षा के मामलों में कड़ी कार्रवाई कर रहा है।

  • राजगढ़ पोस्ट ऑफिस घोटाला: जीरापुर उप डाकघर में खातों में हेरफेर कर करोड़ों की धोखाधड़ी

    राजगढ़ पोस्ट ऑफिस घोटाला: जीरापुर उप डाकघर में खातों में हेरफेर कर करोड़ों की धोखाधड़ी


    राजगढ़ के जीरापुर उप डाकघर में खाताधारकों के खातों में हेरफेर कर 1.23 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी करने वाले पूर्व उप डाकघर मास्टर अशोक कुमार सोनी पर प्रवर्तन निदेशालय का शिकंजा कस रहा है। ईडी ने भोपाल स्थित न्यायालय में अशोक कुमार सोनी के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की है। न्यायालय ने आरोपी को पूर्व संज्ञान सुनवाई का नोटिस जारी किया।

    इससे पहले यह मामला सीबीआइ और एसीबी द्वारा दर्ज किया गया था। दिसंबर 2020 में सीबीआइ ने आरोपपत्र दाखिल कर लिया था। जांच में पता चला कि वर्ष 2016-17 के दौरान अशोक कुमार सोनी, जीरापुर उप डाकघर में उप डाकघर मास्टर के पद पर तैनात था।

    दिसंबर 2016 से मई 2017 के बीच उसने संचय पोस्ट साफ्टवेयर का उपयोग करके 138 डाक बचत बैंक खातों में पिछली तारीखों की फर्जी जमा प्रविष्टियां कीं। इसके जरिए उसने बिना किसी वास्तविक जमा के खातों की शेष राशि बढ़ा दी। इसके बाद फर्जी खाते और संचय पोस्ट से फिनाकल सिस्टम में स्थानांतरण करके उसने कुल 1,23,31,180 रुपये निकाल लिए।घोटाले का पता तब चला जब अशोक कुमार सोनी ने नवंबर और दिसंबर 2017 के दौरान 1,24,44,800 रुपये नकद जमा किए। इस धोखाधड़ी की जानकारी मिलने पर सीबीआइ ने केस दर्ज किया और बाद में मामला ईडी के पास पहुंचा।

    ईडी ने आरोप लगाया कि यह धोखाधड़ी और फर्जी प्रविष्टियों का मामला गंभीर है और आरोपी को न्यायालय में जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। जांच में यह भी पता चला कि अशोक कुमार सोनी ने खाताधारकों की जानकारी का दुरुपयोग कर राशि का गबन किया।इस घोटाले के मामले में ईडी की कार्रवाई और कोर्ट में शिकायत दर्ज होने के बाद अब इस मामले पर न्यायिक प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी। अधिकारियों का कहना है कि धोखाधड़ी की राशि की वापसी और आरोपी की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।