Tag: ED Investigation

  • आजम खां के बाद अब परिवार पर ईडी का शिकंजा, पत्नी तजीन फातिमा और दोनों बेटों समेत बहन की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

    आजम खां के बाद अब परिवार पर ईडी का शिकंजा, पत्नी तजीन फातिमा और दोनों बेटों समेत बहन की बढ़ सकती हैं मुश्किलें


    नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की कार्रवाई अब उनके परिवार तक पहुंच सकती है। उनकी पत्नी तजीन फातिमा और दोनों बेटों के साथ बहन निकहत अफलाक की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की आशंका जताई जा रही है। इसकी वजह मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट है जिसके माध्यम से विश्वविद्यालय का निर्माण कराया गया था। इस ट्रस्ट में आजम खां के परिवार के कई सदस्य अलग-अलग पदों पर रहे हैं। ईडी ने इस मामले में आजम खां को रामपुर जेल से बाहर आते ही गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद उन्हें गाजियाबाद में पेश करने के बाद डासना जेल भेज दिया गया। अब जांच का दायरा बढ़ने के साथ परिवार के अन्य सदस्यों की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं।

    ईडी की ओर से 13 अक्टूबर को रामपुर के अजीम नगर थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में जौहर ट्रस्ट को भी आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण में 426 करोड़ रुपये से अधिक की ब्लैक मनी का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा 80 करोड़ रुपये से ज्यादा सरकारी धन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी लगाए गए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक विश्वविद्यालय के निर्माण में सरकारी धन के इस्तेमाल और कथित तौर पर फर्जी फर्मों के माध्यम से चंदा जुटाने जैसे मामलों की जांच की जा रही है। इन सभी वित्तीय गतिविधियों में जौहर ट्रस्ट की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसी वजह से ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों और सदस्यों की भूमिका की भी पड़ताल की जा सकती है।

    दरअसल आजम खां ने वर्ष 1990 में मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट का गठन किया था। वह खुद इसके संस्थापक अध्यक्ष बने थे। उनकी पत्नी तजीन फातिमा को सचिव और बहन निकहत अफलाक को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई थी। वहीं उनके दोनों बेटे अदीब और अब्दुल्ला भी ट्रस्ट के सदस्य बनाए गए थे। इनके अलावा मुश्ताक अहमद सिद्दीकी को उपाध्यक्ष और चमरौवा से सपा विधायक नसीर अहमद खां को संयुक्त सचिव बनाया गया था। इस तरह ट्रस्ट की शुरुआती कार्यकारिणी में आजम खां के परिवार की अहम भागीदारी रही थी।

    हालांकि दो जन्म प्रमाणपत्र के मामले में सजा सुनाए जाने के बाद आजम खां ने ट्रस्ट से अपना नाम हटवा लिया था। उनकी पत्नी और छोटे बेटे का नाम भी ट्रस्ट से हटाया गया। इसके बाद नई कार्यकारिणी में उनकी बहन निकहत अफलाक को अध्यक्ष और बड़े बेटे अदीब को सचिव बनाया गया। नई टीम में मुश्ताक अहमद सिद्दीकी और नसीर अहमद खां के अलावा जावेद उर रहमान खान मुमताज बी और शहरेयार सलीम को भी शामिल किया गया। अब ईडी की प्राथमिकी में ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय लेन-देन और विश्वविद्यालय निर्माण में कथित गड़बड़ियों का जिक्र होने के बाद पुराने और नए पदाधिकारियों की भूमिका भी जांच का विषय बन सकती है।

    ईडी की जांच में विश्वविद्यालय निर्माण के लिए खर्च की गई रकम सरकारी धन के इस्तेमाल और कथित कमीशनखोरी से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है। आरोप है कि निर्माण कार्य में बिना उचित हिसाब के बड़ी रकम खर्च की गई। ऐसे में ट्रस्ट के पदों पर रहे लोगों से पूछताछ और दस्तावेजों के आधार पर उनकी जिम्मेदारी तय करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि पत्नी बेटों और बहन के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अभी अंतिम निर्णय या किसी की दोषसिद्धि सामने नहीं आई है।

    इस बीच आजम खां से जुड़े दो मामलों में 2 नवंबर को रामपुर की अदालत में सुनवाई होनी है। इनमें भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में कस्टडी रिमांड की मांग महत्वपूर्ण है। विवेचक सीओ टांडा पंकज पंत ने 29 अक्टूबर को अदालत में आजम खां के खिलाफ रिमांड वारंट जारी करने का अनुरोध किया था। अब अदालत के फैसले पर आगे की कानूनी कार्रवाई निर्भर करेगी। जौहर विश्वविद्यालय प्रकरण में ईडी की जांच और अदालत की सुनवाई के चलते आजम खां के साथ उनके परिवार और ट्रस्ट से जुड़े लोगों की भूमिका भी चर्चा में आ गई है।

  • शेफाली बग्गा ने ED को सौंपे 1.20 करोड़ रुपये, महादेव बेटिंग ऐप प्रमोशन से मिली रकम की जांच में बड़ा खुलासा

    शेफाली बग्गा ने ED को सौंपे 1.20 करोड़ रुपये, महादेव बेटिंग ऐप प्रमोशन से मिली रकम की जांच में बड़ा खुलासा

    नई दिल्ली: टीवी प्रेजेंटर और बिग बॉस की पूर्व कंटेस्टेंट शेफाली बग्गा ने महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप से प्राप्त रकम प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सौंप दी है। महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप सिंडिकेट मामले की जांच के दौरान सामने आए विवरण के मुताबिक, शेफाली को अवैध बेटिंग ऐप के प्रमोशनल वीडियो बनाने के लिए कुल 1.5 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। पूछताछ के बाद उन्होंने एजेंसी को 1.20 करोड़ रुपये सौंप दिए। शेफाली ने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं थी कि जिस ऐप का वह प्रचार कर रही थीं, वह अवैध रूप से संचालित किया जा रहा था।

    ED ने महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप सिंडिकेट मामले में छत्तीसगढ़ की रायपुर कोर्ट में चार्जशीट पेश की है। चार्जशीट में शेफाली बग्गा का भी उल्लेख किया गया है। इसमें बताया गया है कि उन्हें महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप सिंडिकेट से जुड़े लोगों से ऐप के प्रचार के बदले रकम मिली थी, जिसे उन्होंने बाद में एजेंसी को सौंप दिया। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जांच के दौरान सामने आई जानकारी के अनुसार, किसी व्यक्ति द्वारा सिंडिकेट से प्राप्त अपराध की आय को खुद एजेंसी के पास लौटाने का यह पहला ऐसा मामला हो सकता है। शेफाली की सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में फैन फॉलोइंग भी है।

    इस मामले में ED ने कुल 42 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। इनमें Ebix ग्रुप के चेयरमैन विकास गर्ग भी शामिल हैं। एजेंसी ने विकास गर्ग को पहले गिरफ्तार किया था और उनकी गिरफ्तारी से पहले करीब 940 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क की गई थी। आरोप है कि विकास गर्ग महादेव बेटिंग सिंडिकेट से अपराध के जरिए प्राप्त रकम को मास्टरमाइंड हरिशंकर तिब्रेवाल के माध्यम से अपनी कंपनियों तक पहुंचा रहे थे। जांच के मुताबिक, तिब्रेवाल ने FPI और बॉन्ड के जरिए महादेव बेटिंग सिंडिकेट और स्काई एक्सचेंज बेटिंग सिंडिकेट से प्राप्त सैकड़ों करोड़ रुपये की कथित अपराध की आय को विकास गर्ग की कंपनियों में भेजा।

    जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि विकास गर्ग और हरिशंकर तिब्रेवाल ने कुछ अन्य लोगों के जरिए इस रकम का इस्तेमाल गर्ग की कई सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों की कीमतों में हेरफेर करने के लिए किया। विकास गर्ग दिल्ली भाजपा के सदस्य थे, लेकिन गिरफ्तारी सामने आने के बाद उन्हें पार्टी से हटा दिया गया। इसी मामले में EaseMyTrip के प्रमोटर निशांत पिट्टी के खिलाफ भी चार्जशीट दायर की गई है। उन पर हरिशंकर तिब्रेवाल से मिली करीब 59 करोड़ रुपये की कथित अपराध की कमाई को आगे बढ़ाने का आरोप है।

    महादेव बेटिंग सिंडिकेट की जांच के दौरान ED ने कई बॉलीवुड हस्तियों को भी समन भेजे थे। इनमें अभिनेता, अभिनेत्री, परफॉर्मर और गायक शामिल रहे हैं। जांच के अनुसार, कुछ लोगों ने सिंडिकेट के प्रमोटरों या उनके सहयोगियों के निमंत्रण पर विदेशों में आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था, जबकि कुछ पर वीडियो और क्लिप के जरिए महादेव ऑनलाइन बेटिंग सिंडिकेट का प्रचार करने का आरोप है। ED की लेटेस्ट चार्जशीट के मुताबिक, सिंडिकेट में अपराध से हुई कुल आय 75,000 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है और एजेंसी को आशंका है कि वास्तविक रकम इससे भी ज्यादा हो सकती है। सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल समेत कई प्रमोटर अब भी फरार हैं। मामले में अब तक ED छह चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।

  • बैंक लोन से जुड़ा 66 करोड़ का मामला फर्जी बिल और LC के इस्तेमाल का आरोप ED ने कोर्ट में पेश किया चालान

    बैंक लोन से जुड़ा 66 करोड़ का मामला फर्जी बिल और LC के इस्तेमाल का आरोप ED ने कोर्ट में पेश किया चालान


    इंदौर। रुचि ग्लोबल लिमिटेड से जुड़े करीब 66 करोड़ रुपए के बैंक लोन मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने 1 अक्टूबर 2026 को इंदौर की विशेष PMLA कोर्ट में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट यानी चालान दाखिल किया है। इसके बाद कोर्ट ने मामले से जुड़े 21 आरोपियों और संस्थाओं को नोटिस जारी करते हुए प्री कॉग्निजेंस सुनवाई के लिए तलब किया है। कंपनी का मौजूदा नाम एग्रोट्रेड एंटरप्राइजेज लिमिटेड बताया गया है। मामले में ED की जांच अभी जारी है।

    इस पूरे मामले की शुरुआत CBI भोपाल की FIR से हुई थी। इसी FIR के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े प्रावधानों के तहत जांच शुरू की। CBI की FIR में रुचि ग्लोबल लिमिटेड के साथ उमेश शाहरा साकेत बरोडिया आशुतोष मिश्रा और कुछ अज्ञात लोक सेवकों के नाम दर्ज किए गए थे। इसके बाद ED ने बैंकिंग लेनदेन और कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू की।

    ED की जांच के अनुसार रुचि ग्लोबल ने पंजाब नेशनल बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा और जम्मू कश्मीर बैंक के कंसोर्टियम से करीब 66 करोड़ रुपए की नॉन फंड बेस्ड क्रेडिट सुविधाएं हासिल की थीं। इनमें लेटर ऑफ क्रेडिट यानी LC भी शामिल थे। एजेंसी का आरोप है कि इन बैंकिंग सुविधाओं का इस्तेमाल संबंधित सहयोगी संस्थाओं के पक्ष में कृषि उत्पाद खरीदने के नाम पर किया गया।

    जांच एजेंसी के मुताबिक इस प्रक्रिया में कथित तौर पर फर्जी बिल ऑफ एक्सचेंज और नकली लॉरी रिसीट का इस्तेमाल किया गया। इन दस्तावेजों के आधार पर बैंकों से बिल डिस्काउंट कराए गए और रकम संबंधित संस्थाओं के खातों में पहुंची। ED का दावा है कि इसके बाद रकम को कई खातों के जरिए घुमाया गया और महज एक से तीन दिन के भीतर फिर रुचि ग्लोबल के खातों में वापस पहुंचा दिया गया। एजेंसी ने इसे बैंक से हासिल क्रेडिट सुविधाओं के कथित दुरुपयोग और रकम को लेयर करने की प्रक्रिया बताया है।

    मामले में ED ने दिसंबर 2025 में भी कार्रवाई की थी। एजेंसी ने 23 दिसंबर को PMLA की धारा 17 के तहत तलाशी ली थी। इस दौरान 23.50 लाख रुपए की कथित बेहिसाब नकदी जब्त की गई थी। कुछ बैंक खातों को भी फ्रीज किया गया था। इसके बाद फरवरी 2026 में ED ने करीब 5.13 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियों के संबंध में प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया।

    ED के अनुसार कुर्क की गई संपत्तियों में रुचि ग्लोबल से जुड़े उमेश शाहरा की पत्नी नीता शाहरा के नाम की जमीन भी शामिल है। एजेंसी का आरोप है कि बैंक से प्राप्त कथित रकम का इस्तेमाल संपत्तियां खरीदने में किया गया। हालांकि संपत्ति कुर्की और आरोपों से जुड़े अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होंगे।

    CBI की FIR में बैंक समूह की शिकायत के आधार पर कुल 188.35 करोड़ रुपए के नुकसान का आरोप लगाया गया था। वहीं ED की मौजूदा जांच में करीब 66 करोड़ रुपए की नॉन फंड बेस्ड क्रेडिट सुविधाओं के कथित दुरुपयोग पर फोकस है। चालान दाखिल होने के बाद अब 21 आरोपियों और संस्थाओं को जारी नोटिस के आधार पर कोर्ट में आगे की कार्यवाही होगी। ED ने स्पष्ट किया है कि मामले में जांच जारी है और लेनदेन से जुड़ी अन्य कड़ियों की भी पड़ताल की जा रही है।

  • इंदौर के चर्चित हाउसिंग घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच तेज, करोड़ों की अनियमितताओं पर ED का एक्शन

    इंदौर के चर्चित हाउसिंग घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच तेज, करोड़ों की अनियमितताओं पर ED का एक्शन


    इंदौर । इंदौर की चर्चित नवभारत हाउसिंग सोसायटी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी जांच तेज करते हुए बड़ी कार्रवाई की है। करीब 4.64 करोड़ रुपए की कथित वित्तीय अनियमितताओं और जमीन घोटाले से जुड़े मामले में ईडी ने पांच आरोपियों के खिलाफ धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत विशेष न्यायालय इंदौर में अभियोजन चालान पेश किया है। अदालत ने मामले का संज्ञान लेते हुए आरोपियों को नोटिस जारी कर सुनवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    ईडी की कार्रवाई उन आरोपों पर आधारित है जिनमें नवभारत गृह निर्माण सहकारी समिति के तत्कालीन पदाधिकारियों पर सोसायटी की संपत्तियों और फंड में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी करने का आरोप है। इस मामले की शुरुआत इंदौर के एमजी रोड थाना में दर्ज एफआईआर से हुई थी। इसी एफआईआर के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच शुरू की और वित्तीय लेनदेन की गहन पड़ताल की।

    जांच एजेंसी के अनुसार आरोपी श्रीकांत घंटे सुभाष चंद्र दुबे राकेश जैन अंतिम जोशी और आनंद शाह ने कथित रूप से सोसायटी की संपत्तियों का दुरुपयोग करते हुए योजनाबद्ध तरीके से करोड़ों रुपए की हेराफेरी की। आरोप है कि सोसायटी के फंड से खरीदी गई जमीनों को विभिन्न संस्थाओं और अन्य पक्षों को बेच दिया गया तथा बिक्री से प्राप्त रकम का सही हिसाब सोसायटी के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया। इससे सोसायटी के सदस्यों को आर्थिक नुकसान पहुंचा और फंड का कथित रूप से गबन किया गया।

    ईडी का दावा है कि इस पूरे मामले में सोसायटी के सदस्यों को वास्तविक जानकारी से दूर रखा गया। जांच के दौरान ऐसे संकेत भी मिले कि जमीन बिक्री और वित्तीय लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों को नष्ट या गायब किया गया ताकि कथित गड़बड़ियों का खुलासा न हो सके। एजेंसी का आरोप है कि गबन की गई राशि को बाद में अलग-अलग माध्यमों से वैध दिखाने का प्रयास किया गया और उससे अचल संपत्तियां भी खरीदी गईं। इसी आधार पर मामले में धनशोधन के प्रावधान लागू किए गए हैं।

    इससे पहले भी ईडी इस मामले में कार्रवाई कर चुकी है। एजेंसी ने 12 फरवरी को पीएमएलए के तहत आरोपी श्रीकांत घंटे और सुभाष चंद्र दुबे से जुड़ी करीब 64 लाख रुपए मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था। जांच एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई कथित अवैध आय से अर्जित संपत्तियों के आधार पर की गई थी।

    ईडी के अनुसार मामले की जांच अभी जारी है और वित्तीय लेनदेन की कई अन्य कड़ियों की भी पड़ताल की जा रही है। यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो आगे और लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल विशेष अदालत में प्रस्तुत चालान के बाद अब मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और आरोपों की सुनवाई होगी।

  • अशोक खरात केस में ED की सख्ती, NCP नेता रूपाली चाकणकर से ट्रस्ट कनेक्शन पर गहन पूछताछ

    अशोक खरात केस में ED की सख्ती, NCP नेता रूपाली चाकणकर से ट्रस्ट कनेक्शन पर गहन पूछताछ


    नई दिल्ली । मनी लॉन्ड्रिंग और कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने NCP नेता रूपाली चाकणकर से लंबी पूछताछ की। यह पूछताछ लगभग आठ घंटे तक चली, जिसमें जांच एजेंसी ने मुख्य रूप से अशोक खरात से जुड़े एक ट्रस्ट और उससे संबंधित वित्तीय गतिविधियों पर विस्तृत सवाल किए। मामला सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि इसमें कई लोगों के नाम और बड़े पैमाने पर वित्तीय लेनदेन के आरोप जुड़े हुए हैं।

    सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान जांच एजेंसी ने नाशिक जिले में स्थित एक संस्थान ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, उसमें उनकी भूमिका और वित्तीय निर्णयों में उनकी भागीदारी को लेकर सवाल किए। एजेंसी यह समझने की कोशिश कर रही है कि ट्रस्ट के संचालन में किस स्तर पर कौन-कौन शामिल था और धन के प्रवाह की दिशा क्या रही। इस दौरान ट्रस्ट को मिले दान और उसके उपयोग से जुड़े पहलुओं पर भी विस्तार से पूछताछ की गई।

    रूपाली चाकणकर से यह भी पूछा गया कि उनका ट्रस्ट से जुड़ाव किस परिस्थिति में हुआ और क्या उनकी कोई वित्तीय या प्रशासनिक जिम्मेदारी थी। पूछताछ में यह भी जानने का प्रयास किया गया कि क्या ट्रस्ट से जुड़े किसी भी प्रकार के निर्णयों में उनकी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका रही है। जांच एजेंसी ने कुछ संदिग्ध लेनदेन और बैंकिंग गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए और उनके स्पष्टीकरण दर्ज किए।

    सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान चाकणकर ने कई आरोपों से इनकार किया और कहा कि उनका ट्रस्ट के वित्तीय संचालन में कोई प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं था। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें कई वित्तीय गतिविधियों की जानकारी नहीं थी और उनका संबंध केवल नाममात्र का था। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लेनदेन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उनमें उनकी कोई भूमिका नहीं रही है।

    जांच एजेंसी ने उनके परिवार से जुड़े कुछ वित्तीय मामलों और व्यापारिक गतिविधियों की भी जानकारी मांगी। विशेष रूप से रियल एस्टेट और बैंकिंग से जुड़े कुछ लेनदेन पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसके अलावा परिजनों से जुड़े खातों और वित्तीय प्रवाह की भी जांच की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके।

    पूछताछ के बाद रूपाली चाकणकर ने कहा कि वह जांच में पूरा सहयोग कर रही हैं और भविष्य में भी करती रहेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे कई आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और उन्हें गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन और संस्थागत भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों को भी निराधार बताया।

    इस पूरे मामले में जांच एजेंसी अब प्राप्त बयानों और दस्तावेजों का विश्लेषण कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, जरूरत पड़ने पर आगे भी पूछताछ की जा सकती है। मामले की जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और आने वाले समय में इससे जुड़े कई और पहलुओं की जांच होने की संभावना है।

  • दुबई के रास्ते सोना तस्करी का नेटवर्क रान्या राव केस में नए खुलासे से हड़कंप

    दुबई के रास्ते सोना तस्करी का नेटवर्क रान्या राव केस में नए खुलासे से हड़कंप

    नई दिल्ली:कन्नड़ एक्ट्रेस रान्या राव से जुड़े 102 करोड़ रुपये के हाई प्रोफाइल गोल्ड तस्करी मामले में अब एक नया और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है जांच एजेंसियों के अनुसार रान्या और उनके पार्टनर तरुण कोंडुरु राजू ने एक सुनियोजित प्लान के तहत भारत में बड़े पैमाने पर सोने की तस्करी का नेटवर्क तैयार किया था इस प्लान में अफ्रीकी देशों जैसे युगांडा केन्या और तंजानिया से सोना खरीदने और उसे दुबई के जरिए भारत लाने की योजना शामिल थी

    इस पूरी साजिश में एक और मोड़ तब आया जब उनके साथ जुड़े युगांडा के एक तस्कर ने उन्हें करीब 2 करोड़ रुपये का चूना लगा दिया बताया जा रहा है कि इस तस्कर ने अफ्रीका से सीधे सोने की सप्लाई का वादा किया था लेकिन पैसे लेने के बाद उसने अपना वादा पूरा नहीं किया इस धोखाधड़ी के बाद रान्या और उनके पार्टनर ने केन्या के अधिकारियों से भी संपर्क किया लेकिन अंततः उन्होंने अफ्रीका से सीधे सोना मंगवाने की योजना को छोड़ दिया

    जांच एजेंसियों के अनुसार यह पूरा नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था राजस्व खुफिया निदेशालय ने मार्च 2025 में रान्या राव को उस समय पकड़ा जब वह दुबई से भारत लौट रही थीं उनके पास से लगभग 14.213 किलोग्राम सोना बरामद हुआ जिसकी कीमत करोड़ों में आंकी गई थी यह मामला तब और गंभीर हो गया जब जांच में सामने आया कि रान्या के पास से मिले सोने की तस्करी कोई एक बार की घटना नहीं थी बल्कि यह एक लंबे समय से चल रहे नेटवर्क का हिस्सा था

    प्रवर्तन निदेशालय की जांच में यह भी सामने आया है कि मार्च 2024 से मार्च 2025 के बीच इस नेटवर्क ने करीब 127 किलोग्राम सोने की तस्करी की जिसकी कुल कीमत लगभग 102 करोड़ रुपये बताई जा रही है इस सोने को देश के विभिन्न हिस्सों में ज्वैलर्स और अन्य हैंडलर्स के नेटवर्क के जरिए बाजार में खपाया गया

    ईडी ने इस मामले में रान्या राव और उनके पार्टनर के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत कार्रवाई करते हुए उनकी करीब 34 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त कर ली हैं इसके अलावा हवाला नेटवर्क से जुड़े एक अन्य व्यक्ति का नाम भी इस जांच में सामने आया है जिससे इस पूरे रैकेट की जटिलता का अंदाजा लगाया जा सकता है

    जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल तस्करी तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले हुए नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया है दुबई को एक ट्रांजिट हब के रूप में इस्तेमाल कर सोने को भारत में लाने की कोशिश की गई जिससे यह पूरा ऑपरेशन और भी जटिल और खतरनाक बन गया

    इस केस ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि कैसे संगठित गिरोह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम कर तस्करी जैसे अपराधों को अंजाम देते हैं और किस तरह जांच एजेंसियां लगातार इन नेटवर्क्स को तोड़ने के लिए काम कर रही हैं आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है

  • नीरव मोदी के भाई निहाल-नीशाल को कोर्ट नोटिस, PNB घोटाले में भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया शुरू

    नीरव मोदी के भाई निहाल-नीशाल को कोर्ट नोटिस, PNB घोटाले में भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया शुरू

    नई दिल्ली /मुंबई की एक विशेष अदालत ने पंजाब नेशनल बैंक के ₹23,780 करोड़ के काले घोटाले में नीरव मोदी के दो भाइयों, निहाल और नीशाल मोदी, को नोटिस जारी किया है। अदालत ने पूछा है कि उन्हेंभगोड़ा आर्थिक अपराधीFugitive Economic Offender घोषित क्यों न किया जाए। नोटिस के तहत दोनों को 7 मई तक अपना जवाब पेश करना होगा।

    प्रवर्तन निदेशालयED ने अदालत में अर्जी लगाकर दोनों भाइयों को भगोड़ा घोषित करने की मांग की थी। विशेष जज एवी गुजराती ने यह नोटिस जारी किया, और न सिर्फ निहाल और नीशाल, बल्कि नीरव मोदी की कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों आदित्य नानावती और संदीप मिस्त्री को भी इसी प्रकार का नोटिस भेजा गया।

    PNB घोटाला भारत के बैंकिंग इतिहास के सबसे बड़े मामलों में से एक माना जाता है। हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी और नीरव मोदी पर आरोप है कि उन्होंने बैंक अधिकारियों को रिश्वत देकर फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंगLoUs और फॉरेन लेटर्स ऑफ क्रेडिटFLCs के जरिए ₹23,780 करोड़ से अधिक की हेराफेरी की। इस मामले में नीरव मोदी फिलहाल लंदन की जेल में हैं, जबकि मेहुल चोकसी बेल्जियम में प्रत्यर्पण प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं।

    नीरव मोदी के भाइयों पर भी गंभीर आरोप हैं। निहाल मोदी पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी कंपनियों और विदेशी लेनदेन के जरिए करोड़ों रुपए छिपाने में भूमिका निभाई। वे अमेरिका में गिरफ्तार हैं और प्रत्यर्पण प्रक्रिया में हैं। वहीं, नीशाल मोदी दुबई स्थित फर्जी कंपनियों में डमी पार्टनर्स की नियुक्ति और 2011-2013 के दौरान कई फर्जी कंपनियों में सिग्नेटरी या लाभार्थी बने रहने में शामिल थे।

    अगर अदालत 7 मई तक उनके संतोषजनक जवाब नहीं पाती है, तो दोनों भाइयों को भगोड़ा घोषित किया जाएगा। भगोड़ा घोषित होने के बाद भारत सरकार उनकी देश और विदेश में मौजूद संपत्तियों को कुर्क या जब्त कर सकेगी।

    नीरव मोदी को 2019 में भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। मेहुल चोकसी के खिलाफ कार्रवाई अभी लंबित है। इस नए नोटिस के साथ मोदी परिवार के लिए कानूनी जाल और सख्त हो गया है। कोर्ट के इस कदम से न केवल संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि उनकी अंतरराष्ट्रीय संपत्तियों पर भी कड़ी नजर रखी जा सकेगी।

    विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला भारत में बड़े वित्तीय घोटालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का उदाहरण है। इसके साथ ही यह संकेत देता है कि प्रवर्तन एजेंसियां भगोड़ा घोषित करने और अपराधियों की संपत्ति कुर्क करने में तेजी ला रही हैं।

    नीरव मोदी और उनके परिवार के खिलाफ यह मामला अब कानूनी रूप से निर्णायक मोड़ पर पहुँच चुका है, और आगामी महीनों में इस घोटाले के विभिन्न पहलुओं पर नई कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

  • यूपी में कफ सिरप रैकेट का बड़ा खुलासा: 700 से अधिक फर्जी फर्मों से अरबों की कमाई, ईडी ने कहा-ऐसा फर्जीवाड़ा पहले कभी नहीं देखा

    यूपी में कफ सिरप रैकेट का बड़ा खुलासा: 700 से अधिक फर्जी फर्मों से अरबों की कमाई, ईडी ने कहा-ऐसा फर्जीवाड़ा पहले कभी नहीं देखा


    नई दिल्ली।उत्तर प्रदेश/ प्रवर्तन निदेशालय ईडी ने उत्तर प्रदेश में कफ सिरप रैकेट को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। ईडी के अनुसार-इस रैकेट में 700 से अधिक फर्जी फर्मों के जरिए अरबों रुपये की कमाई की गई-और यह यूपी में अब तक का सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा माना जा रहा है। जांच में यह सामने आया है कि अधिकांश फर्में केवल कागजों में ही मौजूद थीं और इनके अधिकृत अधिकारी भी केवल दस्तावेजों में थे। ईडी की टीम ने उत्तर प्रदेश-गुजरात और झारखंड में 25 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की। इन तीन प्रदेशों में 40 घंटे से अधिक की जांच में रैकेट का पूरा नेटवर्क उजागर हुआ। शुरुआती साक्ष्यों के अनुसार-220 संचालकों के नाम से यह 700 से अधिक फर्जी फर्में बनाई गईं। इन फर्मों के माध्यम से अरबों रुपये की कमाई हुई-जबकि कई कंपनियों के अधिकारी इस अवैध कारोबार की जानकारी रखते हुए भी चुप्पी साधे रहे।

    ईडी ने मास्टरमाइंड्स पर शिकंजा कसा

    ईडी ने रैकेट के मुख्य आरोपियों-शुभम जायसवाल-पूर्व सांसद के करीबी आलोक सिंह और अमित टाटा-के ठिकानों पर छापेमारी कर महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए। एसटीएफ की पिछले साल की जांच के दौरान ये आरोपी कुछ हद तक सुरक्षित महसूस कर रहे थे-लेकिन ईडी की कार्रवाई ने उनके खेमे में खलबली मचा दी। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि शुभम जायसवाल के पिता-भोला प्रसाद जायसवाल-के खातों में भी संदिग्ध लेन-देन हुए हैं। दुबई में छिपे मास्टरमाइंड्स के अलावा इन खातों और फर्मों के माध्यम से अन्य नाम भी जांच में सामने आएंगे। रांची और धनबाद में भी कुछ फर्मों से रकम का आदान-प्रदान हुआ है-जिसकी गहराई से जांच जारी है।

    फर्जीवाड़े की तकनीक और प्रणाली पर सवाल
    ईडी के अधिकारियों का कहना है कि जिस तरह से फर्जीवाड़ा किया गया-उसने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी। फेंसेडिल सिरप बनाने वाली कंपनी के कई अधिकारियों ने रैकेट की जानकारी होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की। फर्जी फर्मों और खातों के माध्यम से यह कारोबार पूरी तरह से कागजों तक सीमित नहीं रहा अरबों रुपये का लेन-देन हुआ और धन शुद्धिकरण का खेल खेला गया।

    आगे की कार्रवाई

    ईडी ने कहा है कि वे अब इन फर्जी फर्मों और संबंधित संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई शुरू करेंगे। इसके अलावा-जीएसटी विभाग से फर्मों की सूची भी प्राप्त की जाएगी-जिससे जांच का दायरा और बढ़ेगा। अधिकारियों का कहना है कि अभी कई और फर्जी फर्में और संदिग्ध नाम सामने आने बाकी हैं।उत्तर प्रदेश में कफ सिरप रैकेट का यह खुलासा न केवल अवैध कारोबार की जटिलता को दर्शाता है-बल्कि प्रशासनिक और कानूनी सिस्टम की कमजोरी को भी उजागर करता है। ईडी की इस कार्रवाई से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में इस रैकेट के सभी मुख्य आरोपियों पर कठोर कदम उठाए जाएंगे और अवैध कमाई की जाँच पूरी की जाएगी।