Tag: ED Investigation

  • इंदौर के चर्चित हाउसिंग घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच तेज, करोड़ों की अनियमितताओं पर ED का एक्शन

    इंदौर के चर्चित हाउसिंग घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच तेज, करोड़ों की अनियमितताओं पर ED का एक्शन


    इंदौर  इंदौर की चर्चित नवभारत हाउसिंग सोसायटी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी जांच तेज करते हुए बड़ी कार्रवाई की है। करीब 4.64 करोड़ रुपए की कथित वित्तीय अनियमितताओं और जमीन घोटाले से जुड़े मामले में ईडी ने पांच आरोपियों के खिलाफ धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत विशेष न्यायालय इंदौर में अभियोजन चालान पेश किया है। अदालत ने मामले का संज्ञान लेते हुए आरोपियों को नोटिस जारी कर सुनवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    ईडी की कार्रवाई उन आरोपों पर आधारित है जिनमें नवभारत गृह निर्माण सहकारी समिति के तत्कालीन पदाधिकारियों पर सोसायटी की संपत्तियों और फंड में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी करने का आरोप है। इस मामले की शुरुआत इंदौर के एमजी रोड थाना में दर्ज एफआईआर से हुई थी। इसी एफआईआर के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच शुरू की और वित्तीय लेनदेन की गहन पड़ताल की।

    जांच एजेंसी के अनुसार आरोपी श्रीकांत घंटे सुभाष चंद्र दुबे राकेश जैन अंतिम जोशी और आनंद शाह ने कथित रूप से सोसायटी की संपत्तियों का दुरुपयोग करते हुए योजनाबद्ध तरीके से करोड़ों रुपए की हेराफेरी की। आरोप है कि सोसायटी के फंड से खरीदी गई जमीनों को विभिन्न संस्थाओं और अन्य पक्षों को बेच दिया गया तथा बिक्री से प्राप्त रकम का सही हिसाब सोसायटी के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया। इससे सोसायटी के सदस्यों को आर्थिक नुकसान पहुंचा और फंड का कथित रूप से गबन किया गया।

    ईडी का दावा है कि इस पूरे मामले में सोसायटी के सदस्यों को वास्तविक जानकारी से दूर रखा गया। जांच के दौरान ऐसे संकेत भी मिले कि जमीन बिक्री और वित्तीय लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों को नष्ट या गायब किया गया ताकि कथित गड़बड़ियों का खुलासा न हो सके। एजेंसी का आरोप है कि गबन की गई राशि को बाद में अलग-अलग माध्यमों से वैध दिखाने का प्रयास किया गया और उससे अचल संपत्तियां भी खरीदी गईं। इसी आधार पर मामले में धनशोधन के प्रावधान लागू किए गए हैं।

    इससे पहले भी ईडी इस मामले में कार्रवाई कर चुकी है। एजेंसी ने 12 फरवरी को पीएमएलए के तहत आरोपी श्रीकांत घंटे और सुभाष चंद्र दुबे से जुड़ी करीब 64 लाख रुपए मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था। जांच एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई कथित अवैध आय से अर्जित संपत्तियों के आधार पर की गई थी।

    ईडी के अनुसार मामले की जांच अभी जारी है और वित्तीय लेनदेन की कई अन्य कड़ियों की भी पड़ताल की जा रही है। यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो आगे और लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल विशेष अदालत में प्रस्तुत चालान के बाद अब मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और आरोपों की सुनवाई होगी।

  • अशोक खरात केस में ED की सख्ती, NCP नेता रूपाली चाकणकर से ट्रस्ट कनेक्शन पर गहन पूछताछ

    अशोक खरात केस में ED की सख्ती, NCP नेता रूपाली चाकणकर से ट्रस्ट कनेक्शन पर गहन पूछताछ


    नई दिल्ली । मनी लॉन्ड्रिंग और कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने NCP नेता रूपाली चाकणकर से लंबी पूछताछ की। यह पूछताछ लगभग आठ घंटे तक चली, जिसमें जांच एजेंसी ने मुख्य रूप से अशोक खरात से जुड़े एक ट्रस्ट और उससे संबंधित वित्तीय गतिविधियों पर विस्तृत सवाल किए। मामला सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि इसमें कई लोगों के नाम और बड़े पैमाने पर वित्तीय लेनदेन के आरोप जुड़े हुए हैं।

    सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान जांच एजेंसी ने नाशिक जिले में स्थित एक संस्थान ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, उसमें उनकी भूमिका और वित्तीय निर्णयों में उनकी भागीदारी को लेकर सवाल किए। एजेंसी यह समझने की कोशिश कर रही है कि ट्रस्ट के संचालन में किस स्तर पर कौन-कौन शामिल था और धन के प्रवाह की दिशा क्या रही। इस दौरान ट्रस्ट को मिले दान और उसके उपयोग से जुड़े पहलुओं पर भी विस्तार से पूछताछ की गई।

    रूपाली चाकणकर से यह भी पूछा गया कि उनका ट्रस्ट से जुड़ाव किस परिस्थिति में हुआ और क्या उनकी कोई वित्तीय या प्रशासनिक जिम्मेदारी थी। पूछताछ में यह भी जानने का प्रयास किया गया कि क्या ट्रस्ट से जुड़े किसी भी प्रकार के निर्णयों में उनकी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका रही है। जांच एजेंसी ने कुछ संदिग्ध लेनदेन और बैंकिंग गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए और उनके स्पष्टीकरण दर्ज किए।

    सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान चाकणकर ने कई आरोपों से इनकार किया और कहा कि उनका ट्रस्ट के वित्तीय संचालन में कोई प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं था। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें कई वित्तीय गतिविधियों की जानकारी नहीं थी और उनका संबंध केवल नाममात्र का था। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लेनदेन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उनमें उनकी कोई भूमिका नहीं रही है।

    जांच एजेंसी ने उनके परिवार से जुड़े कुछ वित्तीय मामलों और व्यापारिक गतिविधियों की भी जानकारी मांगी। विशेष रूप से रियल एस्टेट और बैंकिंग से जुड़े कुछ लेनदेन पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसके अलावा परिजनों से जुड़े खातों और वित्तीय प्रवाह की भी जांच की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके।

    पूछताछ के बाद रूपाली चाकणकर ने कहा कि वह जांच में पूरा सहयोग कर रही हैं और भविष्य में भी करती रहेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे कई आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और उन्हें गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन और संस्थागत भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों को भी निराधार बताया।

    इस पूरे मामले में जांच एजेंसी अब प्राप्त बयानों और दस्तावेजों का विश्लेषण कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, जरूरत पड़ने पर आगे भी पूछताछ की जा सकती है। मामले की जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और आने वाले समय में इससे जुड़े कई और पहलुओं की जांच होने की संभावना है।

  • दुबई के रास्ते सोना तस्करी का नेटवर्क रान्या राव केस में नए खुलासे से हड़कंप

    दुबई के रास्ते सोना तस्करी का नेटवर्क रान्या राव केस में नए खुलासे से हड़कंप

    नई दिल्ली:कन्नड़ एक्ट्रेस रान्या राव से जुड़े 102 करोड़ रुपये के हाई प्रोफाइल गोल्ड तस्करी मामले में अब एक नया और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है जांच एजेंसियों के अनुसार रान्या और उनके पार्टनर तरुण कोंडुरु राजू ने एक सुनियोजित प्लान के तहत भारत में बड़े पैमाने पर सोने की तस्करी का नेटवर्क तैयार किया था इस प्लान में अफ्रीकी देशों जैसे युगांडा केन्या और तंजानिया से सोना खरीदने और उसे दुबई के जरिए भारत लाने की योजना शामिल थी

    इस पूरी साजिश में एक और मोड़ तब आया जब उनके साथ जुड़े युगांडा के एक तस्कर ने उन्हें करीब 2 करोड़ रुपये का चूना लगा दिया बताया जा रहा है कि इस तस्कर ने अफ्रीका से सीधे सोने की सप्लाई का वादा किया था लेकिन पैसे लेने के बाद उसने अपना वादा पूरा नहीं किया इस धोखाधड़ी के बाद रान्या और उनके पार्टनर ने केन्या के अधिकारियों से भी संपर्क किया लेकिन अंततः उन्होंने अफ्रीका से सीधे सोना मंगवाने की योजना को छोड़ दिया

    जांच एजेंसियों के अनुसार यह पूरा नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था राजस्व खुफिया निदेशालय ने मार्च 2025 में रान्या राव को उस समय पकड़ा जब वह दुबई से भारत लौट रही थीं उनके पास से लगभग 14.213 किलोग्राम सोना बरामद हुआ जिसकी कीमत करोड़ों में आंकी गई थी यह मामला तब और गंभीर हो गया जब जांच में सामने आया कि रान्या के पास से मिले सोने की तस्करी कोई एक बार की घटना नहीं थी बल्कि यह एक लंबे समय से चल रहे नेटवर्क का हिस्सा था

    प्रवर्तन निदेशालय की जांच में यह भी सामने आया है कि मार्च 2024 से मार्च 2025 के बीच इस नेटवर्क ने करीब 127 किलोग्राम सोने की तस्करी की जिसकी कुल कीमत लगभग 102 करोड़ रुपये बताई जा रही है इस सोने को देश के विभिन्न हिस्सों में ज्वैलर्स और अन्य हैंडलर्स के नेटवर्क के जरिए बाजार में खपाया गया

    ईडी ने इस मामले में रान्या राव और उनके पार्टनर के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत कार्रवाई करते हुए उनकी करीब 34 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त कर ली हैं इसके अलावा हवाला नेटवर्क से जुड़े एक अन्य व्यक्ति का नाम भी इस जांच में सामने आया है जिससे इस पूरे रैकेट की जटिलता का अंदाजा लगाया जा सकता है

    जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल तस्करी तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले हुए नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया है दुबई को एक ट्रांजिट हब के रूप में इस्तेमाल कर सोने को भारत में लाने की कोशिश की गई जिससे यह पूरा ऑपरेशन और भी जटिल और खतरनाक बन गया

    इस केस ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि कैसे संगठित गिरोह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम कर तस्करी जैसे अपराधों को अंजाम देते हैं और किस तरह जांच एजेंसियां लगातार इन नेटवर्क्स को तोड़ने के लिए काम कर रही हैं आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है

  • नीरव मोदी के भाई निहाल-नीशाल को कोर्ट नोटिस, PNB घोटाले में भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया शुरू

    नीरव मोदी के भाई निहाल-नीशाल को कोर्ट नोटिस, PNB घोटाले में भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया शुरू

    नई दिल्ली /मुंबई की एक विशेष अदालत ने पंजाब नेशनल बैंक के ₹23,780 करोड़ के काले घोटाले में नीरव मोदी के दो भाइयों, निहाल और नीशाल मोदी, को नोटिस जारी किया है। अदालत ने पूछा है कि उन्हेंभगोड़ा आर्थिक अपराधीFugitive Economic Offender घोषित क्यों न किया जाए। नोटिस के तहत दोनों को 7 मई तक अपना जवाब पेश करना होगा।

    प्रवर्तन निदेशालयED ने अदालत में अर्जी लगाकर दोनों भाइयों को भगोड़ा घोषित करने की मांग की थी। विशेष जज एवी गुजराती ने यह नोटिस जारी किया, और न सिर्फ निहाल और नीशाल, बल्कि नीरव मोदी की कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों आदित्य नानावती और संदीप मिस्त्री को भी इसी प्रकार का नोटिस भेजा गया।

    PNB घोटाला भारत के बैंकिंग इतिहास के सबसे बड़े मामलों में से एक माना जाता है। हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी और नीरव मोदी पर आरोप है कि उन्होंने बैंक अधिकारियों को रिश्वत देकर फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंगLoUs और फॉरेन लेटर्स ऑफ क्रेडिटFLCs के जरिए ₹23,780 करोड़ से अधिक की हेराफेरी की। इस मामले में नीरव मोदी फिलहाल लंदन की जेल में हैं, जबकि मेहुल चोकसी बेल्जियम में प्रत्यर्पण प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं।

    नीरव मोदी के भाइयों पर भी गंभीर आरोप हैं। निहाल मोदी पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी कंपनियों और विदेशी लेनदेन के जरिए करोड़ों रुपए छिपाने में भूमिका निभाई। वे अमेरिका में गिरफ्तार हैं और प्रत्यर्पण प्रक्रिया में हैं। वहीं, नीशाल मोदी दुबई स्थित फर्जी कंपनियों में डमी पार्टनर्स की नियुक्ति और 2011-2013 के दौरान कई फर्जी कंपनियों में सिग्नेटरी या लाभार्थी बने रहने में शामिल थे।

    अगर अदालत 7 मई तक उनके संतोषजनक जवाब नहीं पाती है, तो दोनों भाइयों को भगोड़ा घोषित किया जाएगा। भगोड़ा घोषित होने के बाद भारत सरकार उनकी देश और विदेश में मौजूद संपत्तियों को कुर्क या जब्त कर सकेगी।

    नीरव मोदी को 2019 में भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। मेहुल चोकसी के खिलाफ कार्रवाई अभी लंबित है। इस नए नोटिस के साथ मोदी परिवार के लिए कानूनी जाल और सख्त हो गया है। कोर्ट के इस कदम से न केवल संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि उनकी अंतरराष्ट्रीय संपत्तियों पर भी कड़ी नजर रखी जा सकेगी।

    विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला भारत में बड़े वित्तीय घोटालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का उदाहरण है। इसके साथ ही यह संकेत देता है कि प्रवर्तन एजेंसियां भगोड़ा घोषित करने और अपराधियों की संपत्ति कुर्क करने में तेजी ला रही हैं।

    नीरव मोदी और उनके परिवार के खिलाफ यह मामला अब कानूनी रूप से निर्णायक मोड़ पर पहुँच चुका है, और आगामी महीनों में इस घोटाले के विभिन्न पहलुओं पर नई कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

  • यूपी में कफ सिरप रैकेट का बड़ा खुलासा: 700 से अधिक फर्जी फर्मों से अरबों की कमाई, ईडी ने कहा-ऐसा फर्जीवाड़ा पहले कभी नहीं देखा

    यूपी में कफ सिरप रैकेट का बड़ा खुलासा: 700 से अधिक फर्जी फर्मों से अरबों की कमाई, ईडी ने कहा-ऐसा फर्जीवाड़ा पहले कभी नहीं देखा


    नई दिल्ली।उत्तर प्रदेश/ प्रवर्तन निदेशालय ईडी ने उत्तर प्रदेश में कफ सिरप रैकेट को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। ईडी के अनुसार-इस रैकेट में 700 से अधिक फर्जी फर्मों के जरिए अरबों रुपये की कमाई की गई-और यह यूपी में अब तक का सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा माना जा रहा है। जांच में यह सामने आया है कि अधिकांश फर्में केवल कागजों में ही मौजूद थीं और इनके अधिकृत अधिकारी भी केवल दस्तावेजों में थे। ईडी की टीम ने उत्तर प्रदेश-गुजरात और झारखंड में 25 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की। इन तीन प्रदेशों में 40 घंटे से अधिक की जांच में रैकेट का पूरा नेटवर्क उजागर हुआ। शुरुआती साक्ष्यों के अनुसार-220 संचालकों के नाम से यह 700 से अधिक फर्जी फर्में बनाई गईं। इन फर्मों के माध्यम से अरबों रुपये की कमाई हुई-जबकि कई कंपनियों के अधिकारी इस अवैध कारोबार की जानकारी रखते हुए भी चुप्पी साधे रहे।

    ईडी ने मास्टरमाइंड्स पर शिकंजा कसा

    ईडी ने रैकेट के मुख्य आरोपियों-शुभम जायसवाल-पूर्व सांसद के करीबी आलोक सिंह और अमित टाटा-के ठिकानों पर छापेमारी कर महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए। एसटीएफ की पिछले साल की जांच के दौरान ये आरोपी कुछ हद तक सुरक्षित महसूस कर रहे थे-लेकिन ईडी की कार्रवाई ने उनके खेमे में खलबली मचा दी। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि शुभम जायसवाल के पिता-भोला प्रसाद जायसवाल-के खातों में भी संदिग्ध लेन-देन हुए हैं। दुबई में छिपे मास्टरमाइंड्स के अलावा इन खातों और फर्मों के माध्यम से अन्य नाम भी जांच में सामने आएंगे। रांची और धनबाद में भी कुछ फर्मों से रकम का आदान-प्रदान हुआ है-जिसकी गहराई से जांच जारी है।

    फर्जीवाड़े की तकनीक और प्रणाली पर सवाल
    ईडी के अधिकारियों का कहना है कि जिस तरह से फर्जीवाड़ा किया गया-उसने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी। फेंसेडिल सिरप बनाने वाली कंपनी के कई अधिकारियों ने रैकेट की जानकारी होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की। फर्जी फर्मों और खातों के माध्यम से यह कारोबार पूरी तरह से कागजों तक सीमित नहीं रहा अरबों रुपये का लेन-देन हुआ और धन शुद्धिकरण का खेल खेला गया।

    आगे की कार्रवाई

    ईडी ने कहा है कि वे अब इन फर्जी फर्मों और संबंधित संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई शुरू करेंगे। इसके अलावा-जीएसटी विभाग से फर्मों की सूची भी प्राप्त की जाएगी-जिससे जांच का दायरा और बढ़ेगा। अधिकारियों का कहना है कि अभी कई और फर्जी फर्में और संदिग्ध नाम सामने आने बाकी हैं।उत्तर प्रदेश में कफ सिरप रैकेट का यह खुलासा न केवल अवैध कारोबार की जटिलता को दर्शाता है-बल्कि प्रशासनिक और कानूनी सिस्टम की कमजोरी को भी उजागर करता है। ईडी की इस कार्रवाई से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में इस रैकेट के सभी मुख्य आरोपियों पर कठोर कदम उठाए जाएंगे और अवैध कमाई की जाँच पूरी की जाएगी।