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  • जेल से रिहा होते ही आजम खान को ED ने किया गिरफ्तार, आज कोर्ट में पेशी

    जेल से रिहा होते ही आजम खान को ED ने किया गिरफ्तार, आज कोर्ट में पेशी


    लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद शनिवार शाम रामपुर जेल से रिहा होते ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। ईडी की टीम उन्हें अपने साथ ले गई। अब एजेंसी रविवार सुबह करीब 10 बजे आजम खान को कोर्ट में पेश कर कस्टडी की मांग करेगी।

    दरअसल, ईडी ने आजम खान के खिलाफ 14 अक्टूबर को मुकदमा दर्ज किया था। दूसरी ओर, हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की जेल से रिहाई की उम्मीद थी। इसी बीच ईडी की टीम सीआरपीएफ जवानों के साथ रामपुर जेल के बाहर पहुंच गई। जेल से बाहर आते ही टीम ने आजम खान को हिरासत में ले लिया और बाद में गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई। अब्दुल्ला आजम की रिहाई को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।

    दो पैन कार्ड मामले में हाईकोर्ट से मिली थी राहत

    आजम खान और अब्दुल्ला आजम ने दो पैन कार्ड मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। दोनों ने क्रिमिनल रिवीजन याचिका दाखिल कर दोषसिद्धि पर रोक लगाने, सजा निलंबित करने और अंतरिम जमानत पर रिहा करने की मांग की थी।

    15 अक्टूबर को मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद जस्टिस समित गोपाल की एकल पीठ ने दोनों की जमानत याचिका मंजूर करते हुए सजा निलंबित कर दी। हालांकि, दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग अदालत ने खारिज कर दी थी।

    रिहाई के बाद आजम खान ने उठाए सवाल

    रामपुर जेल से बाहर आने के बाद आजम खान ने कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अब कहने के लिए क्या बचा है और वह क्या कह सकते हैं। उनके मुताबिक, कानून का अस्तित्व ही खत्म हो गया है।

    आजम खान ने सवाल किया, ‘क्या मुस्लिम होने की यही सजा है?’ उन्होंने कहा कि उनकी गलती सिर्फ इतनी थी कि एक मुस्लिम ने यूनिवर्सिटी बनाई। उन्होंने बच्चों के लिए स्कूल बनाए और क्या यही उनका अपराध है?

    ED ने 1,170 करोड़ की संपत्तियां अटैच करने का किया था दावा

    प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार को बताया था कि उसने मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत रामपुर स्थित आजम खान की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और भवनों को अटैच किया है। एजेंसी के मुताबिक, इन संपत्तियों की मौजूदा बाजार कीमत करीब 1,170 करोड़ रुपये है।

    ईडी का आरोप है कि सार्वजनिक कार्यों के लिए आवंटित सरकारी फंड का इस्तेमाल निजी यूनिवर्सिटी के निर्माण में किया गया। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया था कि आजम खान ने उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मंत्री और जल निगम में कैबिनेट मंत्री रहते हुए अपने प्रभाव का इस्तेमाल कथित अनियमितताओं के लिए किया।

    वहीं, रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने जुलाई में यूनिवर्सिटी परिसर की 38 इमारतों को गिराने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ यूनिवर्सिटी की ओर से अपील दायर की गई थी। ईडी ने इस मामले में अगस्त में छापेमारी कर आजम खान से पूछताछ भी की थी।

    अखिलेश यादव बोले- वक्त बदलता है तो तख्त भी बदल जाता है

    समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आजम खान के समर्थन में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, ‘आज के हुक्मरानों को याद रहे, जब वक्त बदल जाता है तो तख्त बदल जाता है।’

    अखिलेश यादव ने कहा कि आजम खान के खिलाफ मुकदमों की जो साजिश की जा रही है, उसे पूरा देश ही नहीं, बल्कि दुनिया देख रही है। उन्होंने एक उम्रदराज व्यक्ति को बार-बार मुकदमों में फंसाकर जेल भेजने को बेहद कायराना हरकत बताया।

    सपा प्रमुख ने कहा कि सत्ता जिस गलत रवायत को बढ़ावा दे रही है, हवा बदलने पर उसे खुद भी इसका सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जब नाइंसाफी हद से गुजर जाती है तो वह जुल्म करने वालों के लिए ही कहर बन जाती है। अखिलेश ने इस पूरी कार्रवाई को बेहद निंदनीय बताया।

    इससे पहले अखिलेश यादव ने जेल में आजम खान से मुलाकात की थी। उन्होंने बीजेपी सरकार पर आजम खान के खिलाफ राजनीतिक बदले की कार्रवाई करने का आरोप लगाया था। अखिलेश ने यह भी दावा किया था कि उनके खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए गए हैं।

  • छत्तीसगढ़ में कारोबारी नितिन डागा और गुलशन बघेल के ठिकानों पर ईडी की छापेमारी, दस्तावेजों की जांच जारी

    छत्तीसगढ़ में कारोबारी नितिन डागा और गुलशन बघेल के ठिकानों पर ईडी की छापेमारी, दस्तावेजों की जांच जारी

    नई दिल्ली । छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने रायपुर और दुर्ग में कारोबारी नितिन डागा तथा बघेल्स कॉर्पोरेट प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक गुलशन बघेल के ठिकानों पर छापेमारी की। अधिकारियों ने दोनों स्थानों पर पहुंचकर दस्तावेजों की जांच शुरू की। रायपुर में नितिन डागा के आवास पर सुबह करीब चार बजे टीम पहुंची, जबकि दुर्ग की ऋषभ कॉलोनी में गुलशन बघेल के घर भी कार्रवाई की गई। फिलहाल, जांच एजेंसी की ओर से छापेमारी के कारण और संबंधित मामले को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    रायपुर में नितिन डागा के आवास पर जांच

    जानकारी के अनुसार, ईडी की टीम रायपुर के पंडरी क्षेत्र स्थित रवि नगर के सुशील विला में कारोबारी नितिन डागा के घर पहुंची। अधिकारियों के दो गाड़ियों से वहां आने की जानकारी सामने आई है। टीम ने आवास के भीतर दस्तावेजों की पड़ताल शुरू की। नितिन डागा का कारोबार ज्वेलरी और जमीन से जुड़ा बताया जाता है।

    हालांकि, उनके आवास पर की गई कार्रवाई किस मामले से संबंधित है, इसका आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है। जांच एजेंसी की ओर से छापेमारी के उद्देश्य, किसी संभावित अनियमितता या जांच के दायरे को लेकर फिलहाल विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। ऐसे में कार्रवाई के पीछे की वजह की पुष्टि आधिकारिक बयान आने के बाद ही हो सकेगी।

    दुर्ग में गुलशन बघेल के घर भी पहुंची टीम

    दुर्ग की ऋषभ कॉलोनी में बघेल्स कॉर्पोरेट प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक गुलशन बघेल के आवास पर भी ईडी की टीम ने जांच की। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, दो गाड़ियों से पहुंचे दल में 10 से अधिक अधिकारी शामिल थे। अधिकारियों ने यहां भी दस्तावेजों की पड़ताल की।

    इस कार्रवाई को भारतमाला परियोजना से जुड़े मामले से संबंधित होने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन जांच एजेंसी ने इसकी पुष्टि नहीं की है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों स्थानों पर की गई कार्रवाई एक ही मामले से जुड़ी है या अलग-अलग जांच के तहत की गई है। किसी संभावित वित्तीय अनियमितता या अन्य आरोप के संबंध में भी आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है।

    कौन हैं गुलशन बघेल?

    गुलशन बघेल बघेल्स कॉर्पोरेट प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक बताए जाते हैं। कंपनी भवन निर्माण, सड़क निर्माण, अर्थवर्क, निर्माण सामग्री की ढुलाई और परिवहन सेवाओं से जुड़े कार्य करती है। कंपनी सरकारी और निजी क्षेत्र की निर्माण परियोजनाओं में भी काम करती है। उनके आवास पर ईडी की कार्रवाई के संबंध में विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही जांच के दायरे को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    पहले भी ठगी के आरोपों को लेकर आए थे चर्चा में

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करीब छह साल पहले गुलशन बघेल पर खुद को छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का भतीजा बताकर सरकारी नौकरी दिलाने का दावा करने और एक महिला से ठगी करने के आरोप लगे थे। उस मामले में पुलिस ने उन्हें पकड़ा था। हालांकि, उस पुराने प्रकरण और मौजूदा ईडी कार्रवाई के बीच किसी संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    फिलहाल, रायपुर और दुर्ग में जारी जांच के संबंध में कई अहम सवालों के जवाब सामने आना बाकी है। ईडी की ओर से कार्रवाई के कारण, जांच के विषय और दस्तावेजों की पड़ताल से जुड़े निष्कर्षों की आधिकारिक जानकारी मिलने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • पंजाब सरकार ने सीबीआई जांच के हाईकोर्ट आदेश को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, चुनाव से पहले राजनीतिक प्रेरणा का लगाया आरोप

    पंजाब सरकार ने सीबीआई जांच के हाईकोर्ट आदेश को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, चुनाव से पहले राजनीतिक प्रेरणा का लगाया आरोप

    नई दिल्ली । पंजाब की भगवंत मान सरकार ने पंजाब हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार, धांधली और लेनदेन के मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया गया था। यह मामला प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पंजाब के पुलिस महानिदेशक को भेजी गई चिट्ठी और उसमें लगाए गए आरोपों से जुड़ा है। मामले में मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी राजबीर सिंह घुमन और उनके सहयोगियों नितिन गोहल तथा बीर देविंदर के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं। हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जरूरत बताई थी और पंजाब पुलिस के रवैये से संतुष्ट नहीं होने के बाद जांच सीबीआई को सौंप दी थी।

    पंजाब सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने मामले में तत्काल सुनवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि कुछ दिनों में इस मामले पर विचार किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से कहा गया कि पंजाब में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और चुनाव से पहले लगाए जा रहे ऐसे आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं। विकास सिंह ने कहा कि ये आरोप राज्य में अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग से संबंधित हैं और चुनाव से पहले ऐसे मामले गढ़े जा रहे हैं। सरकार ने हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश को इसी आधार पर चुनौती दी है।

    मामले की शुरुआत ईडी की गोपनीय जांच से जुड़ी है। ईडी ने अपनी जांच के दौरान आरोपों से संबंधित सामग्री जुटाई थी। इसमें अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग करवाने, सरकारी नीतियों और मंजूरियों को प्रभावित करने, निविदाओं तथा अन्य सरकारी कामों में कथित आर्थिक लेनदेन से जुड़े आरोपों का उल्लेख था। ईडी ने 30 जुलाई 2026 को यह सामग्री पंजाब के पुलिस महानिदेशक को भेजी थी और मामले में केस दर्ज करने का अनुरोध किया था। इसके बाद इस मामले को लेकर जांच और कार्रवाई का मुद्दा अदालत तक पहुंचा।

    पंजाब हाईकोर्ट ने अधिवक्ता निखिल सराफ की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सीएमओ से जुड़े लोगों पर लगाए गए कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने ईडी की ओर से पंजाब डीजीपी को भेजे गए पत्रों के आधार पर सीबीआई को केस दर्ज करने के निर्देश दिए। अदालत ने संबंधित जांच एजेंसी को दो महीने के भीतर जांच रिपोर्ट दाखिल करने के लिए भी कहा था। हाईकोर्ट के इसी आदेश के खिलाफ अब पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

    मामले में सरकार का कहना है कि विधानसभा चुनाव से पहले अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग से जुड़े आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित तरीके से उठाया जा रहा है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए इस मामले पर जल्द सुनवाई की मांग की है। दूसरी ओर, हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की आवश्यकता को देखते हुए सीबीआई को जांच सौंपने का फैसला किया था। अदालत ने जांच को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के लिए दो महीने में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश भी दिया था।

    अब सुप्रीम कोर्ट में पंजाब सरकार की चुनौती पर सुनवाई के बाद मामले की आगे की दिशा तय होगी। इस मामले में ईडी की ओर से जुटाई गई सामग्री में ट्रांसफर-पोस्टिंग, सरकारी नीतियों और मंजूरियों को प्रभावित करने, निविदाओं तथा अन्य सरकारी कार्यों में कथित आर्थिक लेनदेन से जुड़े आरोप शामिल हैं। पंजाब सरकार ने इन आरोपों और जांच की प्रक्रिया को विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। हाईकोर्ट पहले ही सीबीआई को केस दर्ज कर जांच करने और निर्धारित समय में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दे चुका है।

  • अमृत ग्रुप की कंपनियों और प्रमोटरों से जुड़े ठिकानों पर ईडी की रेड, निवेशकों से कथित धोखाधड़ी और फंड ट्रेल की जांच

    अमृत ग्रुप की कंपनियों और प्रमोटरों से जुड़े ठिकानों पर ईडी की रेड, निवेशकों से कथित धोखाधड़ी और फंड ट्रेल की जांच

    नई दिल्ली । प्रवर्तन निदेशालय ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अमृत ग्रुप की कंपनियों और उनके प्रमोटरों से जुड़े कोलकाता और मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित करीब 17 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान केंद्रीय बलों के जवान भी टीमों के साथ मौजूद रहे। कोलकाता में छह अलग-अलग स्थानों पर तलाशी ली गई, जबकि इंदौर में 11 ठिकानों पर कार्रवाई जारी रही।

    यह जांच निवेश से जुड़े कथित धोखाधड़ी के मामले में की जा रही है। जांच एजेंसी के अनुसार, अमृत ग्रुप की कंपनियों और उनके निदेशकों ने अलग-अलग डिपॉजिट स्कीम के नाम पर आम लोगों से रकम जमा कराई। निवेशकों को आकर्षक और अधिक रिटर्न देने का भरोसा दिलाए जाने का आरोप है। एजेंसी के मुताबिक, बाद में कंपनी ने कथित तौर पर वादा किया गया रिटर्न नहीं दिया और निवेशकों की रकम भी वापस नहीं की।

    मामले में शिकायतें सामने आने के बाद जांच आगे बढ़ी। ईडी को संदेह है कि निवेशकों से कथित तौर पर जुटाए गए चिटफंड के पैसों का इस्तेमाल रियल एस्टेट और निर्माण कारोबार में किया गया तथा इसी माध्यम से रकम को कथित तौर पर वैध दिखाने की कोशिश की गई। तलाशी अभियान के दौरान एजेंसी इसी वित्तीय लेनदेन और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।

    कोलकाता में नारकेलडांगा, नेताजी नगर और रवींद्र सरोबर थाना क्षेत्रों में छह स्थानों पर ईडी की टीमें पहुंचीं। वहीं, इंदौर में भी अमृत ग्रुप से जुड़े कई परिसरों पर तलाशी ली गई। दोनों शहरों में एक साथ हुई इस कार्रवाई का उद्देश्य कथित वित्तीय अनियमितताओं और पैसों के लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करना है।

    इसी मामले से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में ईडी की कोलकाता टीम ने जमीन हड़पने और दस्तावेजों तथा जमीन के रिकॉर्ड में कथित धोखाधड़ी से जुड़े मामले में अमित गांगुली नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी मंगलवार रात की गई। जांच एजेंसी के अनुसार, अमित गांगुली पर अलग-अलग लोगों और संस्थाओं की संपत्तियों पर गैर-कानूनी तरीके से कब्जा करने के आरोप हैं।

    ईडी के मुताबिक, अमित गांगुली के खिलाफ पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से 23 एफआईआर दर्ज हैं। एजेंसी इन मामलों और संपत्तियों से जुड़े कथित लेनदेन की भी जांच कर रही है। हालांकि, इन आरोपों और मामलों को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच तथा संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

    अमृत ग्रुप से जुड़ी कंपनियों और उनके निदेशकों के खिलाफ कार्रवाई का मुख्य आधार निवेशकों से रकम जुटाने, कथित तौर पर रिटर्न का भुगतान नहीं करने और पैसों के संभावित दूसरे कारोबारों में इस्तेमाल से जुड़ी जांच है। ईडी की तलाशी के दौरान संबंधित दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है।

    फिलहाल कंपनी या उसके प्रमोटरों की ओर से ईडी की कार्रवाई को लेकर कोई तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कोलकाता में छह और इंदौर में 11 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया। जांच एजेंसी की कार्रवाई के दौरान सामने आने वाले दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन से मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • कर्नाटक मंत्री सतीश जारकीहोली के परिसरों पर ED तलाशी से विवाद गहराया, डीके शिवकुमार ने एजेंसी के इस्तेमाल पर उठाए सवाल

    कर्नाटक मंत्री सतीश जारकीहोली के परिसरों पर ED तलाशी से विवाद गहराया, डीके शिवकुमार ने एजेंसी के इस्तेमाल पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली ।कर्नाटक में मंत्री सतीश जारकीहोली से जुड़े कई ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय की तलाशी के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कार्रवाई को लेकर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए जांच एजेंसियों के कथित राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि ईडी को जांच करनी है तो वह अपनी कार्रवाई कर सकती है और कांग्रेस इस तरह के कदमों से डरने वाली नहीं है।

    डीके शिवकुमार ने कार्रवाई के समय को लेकर भी सवाल उठाए। मुख्यमंत्री के मुताबिक, सरकार के 100 दिन पूरे होने से ठीक पहले सतीश जारकीहोली से जुड़े परिसरों पर यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसी की कार्रवाई का समय राजनीतिक लाभ को ध्यान में रखकर तय किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सतीश जारकीहोली जांच में पूरा सहयोग करेंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि ईडी को मामले की जांच करनी है तो वह अपना काम कर सकती है। शिवकुमार ने आरोप लगाया कि भाजपा जांच एजेंसियों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदे के लिए कर रही है और इस तरह की कार्रवाई कांग्रेस को दबाव में नहीं ला सकती।

    ईडी की टीम ने सतीश जारकीहोली, उनकी बेटी और सांसद प्रियंका जारकीहोली सहित कुछ अन्य लोगों से जुड़े करीब 18 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इन परिसरों में बेंगलुरु और बेलगावी स्थित स्थान भी शामिल बताए गए हैं। तलाशी के दौरान अधिकारियों की ओर से दस्तावेजों और अन्य सामान की जांच की जा रही है।

    कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों की तैनाती भी की गई। अलग-अलग स्थानों पर चल रही तलाशी के बीच राज्य में इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री की ओर से भाजपा पर लगाए गए आरोपों के बाद मामला कर्नाटक की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।

    अधिकारियों के अनुसार, ईडी की मौजूदा कार्रवाई विदेशी मुद्रा से जुड़े नियमों के तहत दर्ज जांच से संबंधित है। यह जांच विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम यानी फेमा के प्रावधानों के तहत की जा रही है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि इस कार्रवाई का संबंध किसी पुराने धनशोधन मामले से नहीं है।

    तलाशी अभियान के दौरान ईडी की टीम संबंधित परिसरों में उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य सामग्री की जांच कर रही है। जांच का केंद्र विदेशी मुद्रा से जुड़े नियमों के संभावित उल्लंघन से संबंधित पहलुओं पर है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार कार्रवाई के संबंध में सतीश जारकीहोली के परिवार या कांग्रेस की ओर से तत्काल कोई अलग प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

    मामले ने कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को एक बार फिर तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कार्रवाई को राजनीतिक संदर्भ में देखते हुए भाजपा पर हमला बोला, जबकि ईडी की ओर से इसे फेमा के तहत चल रही जांच का हिस्सा बताया गया है। अब इस कार्रवाई से जुड़े दस्तावेजों और जांच के आगे बढ़ने के साथ मामले की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • ईडी के 715 करोड़ रुपये मामले में रिलायंस पावर को नोटिस, नकारात्मक खबर के बीच शेयर पांच फीसदी से ज्यादा चढ़े

    ईडी के 715 करोड़ रुपये मामले में रिलायंस पावर को नोटिस, नकारात्मक खबर के बीच शेयर पांच फीसदी से ज्यादा चढ़े

    नई दिल्ली । अनिल अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस पावर के शेयरों में शुक्रवार को तेज उछाल देखने को मिला। कंपनी को करीब 715 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में नोटिस मिलने की जानकारी सामने आने के बावजूद कारोबार के दौरान शेयर 5.55 प्रतिशत से अधिक चढ़कर 23.38 रुपये तक पहुंच गया। इस तेजी ने बाजार में निवेशकों के रुख को लेकर भी चर्चा बढ़ा दी है।

    रिलायंस पावर और उसकी सहायक कंपनी रिलायंस क्लीनजेन लिमिटेड को नई दिल्ली स्थित विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश की ओर से प्री-कॉग्निजेंस नोटिस मिला है। यह नोटिस प्रवर्तन निदेशालय की शिकायत के आधार पर जारी किया गया है। मामला रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड और उससे जुड़े अन्य पक्षों से संबंधित बताया गया है।

    प्रवर्तन निदेशालय ने करीब 715 करोड़ रुपये की कथित रकम से जुड़े मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत शिकायत दर्ज की है। इसमें अधिनियम की धारा 3 और 4 का उल्लेख किया गया है। शिकायत में रिलायंस पावर और उसकी सहायक कंपनी का नाम संभावित आरोपियों के रूप में शामिल किए जाने की जानकारी कंपनी की ओर से दी गई है।

    नोटिस की खबर सामान्य तौर पर कंपनी के लिए नकारात्मक मानी जा सकती है, लेकिन शुक्रवार को शेयर बाजार में इसका तत्काल असर अलग दिखाई दिया। रिलायंस पावर के शेयरों में खरीदारी बढ़ी और कीमत 23.38 रुपये तक पहुंच गई। हालांकि शेयर की मौजूदा स्थिति को केवल एक कारोबारी सत्र की तेजी से नहीं देखा जा सकता, क्योंकि पिछले कुछ समय में स्टॉक में काफी उतार-चढ़ाव रहा है।

    कंपनी के शेयरों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो छह महीने की अवधि में इसमें करीब 9.73 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है। एक साल के दौरान शेयर करीब 53 प्रतिशत टूट चुका है। हालांकि पांच साल की अवधि में स्टॉक ने लगभग 131.49 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। इससे कंपनी के शेयर में लंबी अवधि और छोटी अवधि के प्रदर्शन के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।

    शुक्रवार को कारोबार के दौरान रिलायंस पावर का बाजार पूंजीकरण करीब 9,574 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। कंपनी के शेयर का 52 सप्ताह का उच्च स्तर 50.90 रुपये और निचला स्तर 20.23 रुपये बताया गया है। मौजूदा भाव इन दोनों स्तरों के बीच कारोबार कर रहा है।

    रिलायंस पावर मुख्य रूप से बिजली उत्पादन से जुड़ी कंपनी है। इसे भारत और विदेशों में बिजली परियोजनाओं के विकास, निर्माण और संचालन के लिए स्थापित किया गया था। कंपनी के पास बिजली उत्पादन से संबंधित परियोजनाओं का पोर्टफोलियो है, जिसमें चालू और निर्माणाधीन परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं का संचालन कंपनी सीधे या अपनी सहायक कंपनियों के माध्यम से करती है।

    715 करोड़ रुपये के मामले में जारी नोटिस अब कंपनी के लिए कानूनी और कारोबारी दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। हालांकि नोटिस मिलना अपने आप में आरोपों का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाता। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया के दौरान संबंधित पक्षों का पक्ष और उपलब्ध तथ्यों का परीक्षण किया जाएगा।

    इस बीच शेयरों में आई तेजी यह दिखाती है कि बाजार में किसी खबर पर तत्काल प्रतिक्रिया हमेशा उसी दिशा में नहीं होती, जिस दिशा में खबर को सामान्य तौर पर देखा जाता है। रिलायंस पावर के मामले में भी कानूनी खबर के बीच शेयरों में खरीदारी देखने को मिली है, जबकि निवेशकों के लिए कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन और आगे की कानूनी प्रक्रिया दोनों पर नजर रखना महत्वपूर्ण रहेगा।

  • सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी से जुड़े आय से अधिक संपत्ति मामले में CBI और ED जांच पर लगाई अंतरिम रोक

    सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी से जुड़े आय से अधिक संपत्ति मामले में CBI और ED जांच पर लगाई अंतरिम रोक

    नई दिल्ली । कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को आय से अधिक संपत्ति के आरोपों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। सर्वोच्च अदालत ने मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय की जांच पर फिलहाल रोक लगा दी है। साथ ही अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है, जिसके तहत दोनों जांच एजेंसियों को मामले की जांच करने के निर्देश दिए गए थे।

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने शिकायतकर्ता के साथ-साथ CBI और ED को नोटिस जारी किया। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की आगे की प्रक्रिया पर विचार करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट में चल रही कार्यवाही को फिलहाल टालने का निर्देश दिया।

    इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने पहले आय से अधिक संपत्ति के आरोपों से संबंधित मामले में CBI और ED से जांच कराने का आदेश दिया था। इसी आदेश के खिलाफ राहुल गांधी की ओर से सुप्रीम कोर्ट का रुख किया गया। याचिका में हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए जांच एजेंसियों को दिए गए निर्देशों की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।

    सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि वह इस मामले के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करना चाहता है। अदालत ने विशेष रूप से इस बात पर विचार करने की जरूरत बताई कि जांच एजेंसियों को कार्रवाई के लिए किस प्रक्रिया के तहत निर्देश दिए गए। अदालत ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में प्राकृतिक न्याय और निष्पक्षता के सिद्धांतों का पालन महत्वपूर्ण है।

    पीठ ने इलाहाबाद हाई कोर्ट से 20 अगस्त को प्रस्तावित सुनवाई को फिलहाल टालने को कहा है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि राहुल गांधी की याचिका की प्रति शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराई जाए, ताकि संबंधित पक्ष मामले में अपना पक्ष रख सकें। इस निर्देश के बाद हाई कोर्ट में होने वाली अगली कार्यवाही पर भी फिलहाल विराम लग गया है।

    सुप्रीम कोर्ट की ओर से मिली यह राहत फिलहाल अंतरिम प्रकृति की है। इसका अर्थ यह नहीं है कि आय से अधिक संपत्ति से जुड़े आरोपों पर अंतिम निर्णय हो गया है। अदालत ने अभी केवल जांच और संबंधित न्यायिक कार्यवाही को लेकर अंतरिम स्तर पर हस्तक्षेप किया है तथा मामले में आगे की सुनवाई के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।

    मामले में CBI और ED को नोटिस जारी किए जाने के बाद अब दोनों जांच एजेंसियों के साथ शिकायतकर्ता का पक्ष भी अदालत के सामने आएगा। सुप्रीम कोर्ट इस बात पर विचार करेगा कि हाई कोर्ट द्वारा जांच के निर्देश दिए जाने की प्रक्रिया कानूनी और न्यायिक मानकों के अनुरूप थी या नहीं।

    राहुल गांधी के लिए यह आदेश फिलहाल महत्वपूर्ण कानूनी राहत माना जा रहा है, क्योंकि जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाई है। हालांकि मामले की अंतिम दिशा सर्वोच्च अदालत में होने वाली आगामी सुनवाई और उसके बाद दिए जाने वाले आदेश पर निर्भर करेगी।

  • इंदौर नगर निगम घोटाला: 103.42 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी ने पेश की 20 हजार पन्नों की चार्जशीट

    इंदौर नगर निगम घोटाला: 103.42 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी ने पेश की 20 हजार पन्नों की चार्जशीट


    इंदौर । इंदौर नगर निगम के बहुचर्चित 103.42 करोड़ रुपये के फर्जी बिल घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच को आगे बढ़ाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने 32 आरोपियों के खिलाफ करीब 20 हजार पन्नों की विस्तृत चार्जशीट विशेष पीएमएलए अदालत, इंदौर में दाखिल की है। इस मामले में ठेकेदारों के अलावा नगर निगम, लोकल फंड ऑडिट और रेजिडेंट ऑडिट कार्यालय के कई अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है।

    ईडी ने यह शिकायत 24 जुलाई को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत विशेष अदालत में प्रस्तुत की। अदालत ने चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए सभी आरोपियों को नोटिस जारी किए हैं और मामले की अगली सुनवाई के लिए तिथि निर्धारित कर दी है।

    जांच एजेंसी के अनुसार आरोपियों ने सुनियोजित साजिश के तहत फर्जी बिल, नकली वर्क ऑर्डर, फर्जी पूर्णता प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार कर सरकारी धन की निकासी की। जांच में यह भी सामने आया कि रिकॉर्ड में हेरफेर कर नगर निगम से लगभग 103.42 करोड़ रुपये का भुगतान कराया गया, जिसे बाद में विभिन्न माध्यमों से इस्तेमाल किया गया। ईडी इस पूरे लेनदेन को मनी लॉन्ड्रिंग का मामला मानते हुए इसकी वित्तीय परतों की भी जांच कर रही है।

    चार्जशीट में शामिल दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर एजेंसी ने आरोप लगाया है कि सरकारी धन की निकासी के लिए व्यवस्थित तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और भुगतान प्रक्रिया में अनियमितताओं को अंजाम दिया गया। इसी आधार पर संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका की जांच की गई और उन्हें आरोपी बनाया गया।

    अब विशेष पीएमएलए अदालत में इस मामले की सुनवाई के दौरान आरोपियों के खिलाफ प्रस्तुत साक्ष्यों और दस्तावेजों की कानूनी समीक्षा होगी। मामले को इंदौर नगर निगम से जुड़े सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक माना जा रहा है और आगे की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

  • TMC को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, ईडी द्वारा फ्रीज किए गए तीन बैंक खाते फिलहाल रहेंगे बंद

    TMC को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, ईडी द्वारा फ्रीज किए गए तीन बैंक खाते फिलहाल रहेंगे बंद


    नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) को सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा फ्रीज किए गए पार्टी के तीन बैंक खातों के संचालन की अंतरिम अनुमति देने से इनकार कर दिया। इन खातों में कुल 440.42 करोड़ रुपये जमा बताए गए हैं।

    ईडी ने यह कार्रवाई राज्य पुलिस की एफआईआर के आधार पर शुरू की गई जांच के तहत की है। जांच एजेंसी कथित वित्तीय अनियमितताओं, अवैध धन जुटाने और पार्टी के कुछ बैंक खातों के माध्यम से हुए संदिग्ध लेनदेन की पड़ताल कर रही है।

    हाईकोर्ट ने खारिज की अंतरिम राहत की मांग
    मामले की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने 13 जुलाई को अंतरिम आदेश सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए टीएमसी की अंतरिम राहत की मांग खारिज कर दी। इसके साथ ही पार्टी के तीनों बैंक खाते फिलहाल फ्रीज ही रहेंगे।

    जांच में क्या सामने आया?
    रिपोर्ट के मुताबिक, ईडी की प्रारंभिक जांच में दावा किया गया है कि अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच टीएमसी के बैंक खातों से करीब 160 करोड़ रुपये केयरवेल एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी एक अन्य इकाई को ट्रांसफर किए गए। जांच एजेंसी का यह भी आरोप है कि संबंधित कंपनी ने 2023 से 2026 के बीच 82.96 करोड़ रुपये एक अन्य नई कंपनी को भेजे। अधिकारियों के अनुसार, इस धनराशि का आगे भी लेनदेन किया गया।

    जेट और हेलीकॉप्टर खरीद की जांच
    ईडी के अनुसार, जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कथित लेनदेन में से 112 करोड़ रुपये का उपयोग एम्ब्रेयर लेगेसी 600 बिजनेस जेट और अगस्तावेस्टलैंड 109SP हेलीकॉप्टर की खरीद में किया गया। एजेंसी इस पूरे वित्तीय लेनदेन और धन के स्रोत की जांच कर रही है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और अदालत में इस संबंध में आगे की सुनवाई होना बाकी है।

  • UP: ईडी की जांच में सामने आया घुसपैठ नेटवर्क, विदेशी फंडिंग और बिना KYC खातों को लेकर बड़े खुलासे

    UP: ईडी की जांच में सामने आया घुसपैठ नेटवर्क, विदेशी फंडिंग और बिना KYC खातों को लेकर बड़े खुलासे


    लखनऊ। बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों की अवैध घुसपैठ तथा फर्जी दस्तावेज तैयार कराने से जुड़े नेटवर्क की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को कई अहम सुराग मिलने का दावा किया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, एटीएस की कार्रवाई के बाद भी पश्चिम बंगाल में यह नेटवर्क सक्रिय बना रहा और विदेश से मिलने वाली फंडिंग के जरिए अपनी गतिविधियां संचालित करता रहा।

    ईडी की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि कुछ गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को विदेश से प्राप्त धनराशि को जांच एजेंसियों की नजर से बचाने के लिए दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया।

    कई राज्यों में ईडी की छापेमारी
    प्रवर्तन निदेशालय ने पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा में 17 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दायरे में कई एनजीओ भी शामिल रहे। ईडी के अनुसार, तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज मिले हैं। एजेंसी का दावा है कि जांच में संकेत मिले हैं कि कुछ संस्थाएं अब भी विदेश से फंडिंग प्राप्त कर रही हैं।

    FCRA खातों और बैंकों की होगी जांच
    ईडी के मुताबिक, अब इस मामले में आगे की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। एजेंसी उन बैंकों से भी जवाब मांगेगी, जहां संबंधित एनजीओ के एफसीआरए (Foreign Contribution Regulation Act) खाते खोले गए थे और जिनके माध्यम से विदेश से धनराशि प्राप्त की जाती थी।

    इसके अलावा, जांच एजेंसी उन छोटे बैंकों की भूमिका की भी पड़ताल करेगी, जिन पर बिना आवश्यक केवाईसी (KYC) प्रक्रिया पूरी किए खाते खोलने का संदेह है। यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित संस्थानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

    यूपी में नेटवर्क की गहरी पैठ का दावा
    जांच एजेंसियों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों के नेटवर्क की जड़ें गहरी रही हैं। खास तौर पर सहारनपुर का देवबंद इस मामले में जांच एजेंसियों के रडार पर रहा है। बीते पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश एटीएस ने ऐसे तीन मॉड्यूल के खिलाफ कार्रवाई की है। इनमें से एक मामले में हाल ही में राजधानी की एक अदालत ने 15 आरोपियों को सजा सुनाई है। राज्य सरकार ने भी अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया के तहत डिटेंशन सेंटर स्थापित करने की योजना बनाई थी।