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  • ED ने अनिल अंबानी ग्रुप के दो पूर्व अधिकारियों को किया गिरफ्तार

    ED ने अनिल अंबानी ग्रुप के दो पूर्व अधिकारियों को किया गिरफ्तार


    मुंबई।
    प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate- ED) ने शुक्रवार अनिल अंबानी (Anil Ambani) के करीबी और रिलायंस ग्रुप (Reliance Group) के पूर्व ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के वाइस-चेयरमैन सतीश सेठ (Satish Seth) को मुंबई में गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद उन्हें एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया है, जहां से ईडी को ट्रांजिट रिमांड मिल गई है. अब उन्हें दिल्ली लाया जा रहा है.

    एक रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को मुंबई में रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप (RAAG) के दो पूर्व अधिकारियों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया।

    उन्होंने बताया कि गिरफ्तार के बाद सतीश को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 48 घंटे की ट्रांजिट रिमांड पर भेज दिया गया है. चूंकि ये मामले दिल्ली में दर्ज है तो जांच एजेंसी की टीम रिमांड अवधि में सतीश को दिल्ली लाकर अदालत में पेश करेगी और आगे की पूछताछ-जांच के लिए हिरासत की मांग करेगी।

    केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस साल मार्च महीने में ही सतीश सेठ और गौतम दोशी के खिलाफ मामला दर्ज किया था. सीबीआई की टीम ने इस जांच के हिस्से के रूप में दोनों अधिकारियों के परिसरों और ठिकानों पर छापेमारी भी की थी. सीबीआई की इसी शिकायत को आधार बनाकर ईडी ने दोनों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत अपनी जांच शुरू की है।

    सीबीआई के अनुसार, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) कुल 11 बैंकों के उस कंसोर्टियम (समूह) का एक प्रमुख सदस्य था, जिसने रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड को कुल 735 करोड़ रुपये की टर्म लोन सुविधा मंजूर की थी. इसी स्वीकृत लोन में से 114.98 करोड़ रुपये की राशि में भारी धोखाधड़ी और वित्तीय हेरफेर करने का गंभीर आरोप इन दोनों अधिकारियों पर लगा है।

    बता दें कि सतीश सेठ को लंबे समय तक अनिल अंबानी का बेहद करीबी और भरोसेमंद सहयोगी माना जाता रहा है जो रिलायंस ग्रुप के ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के वाइस-चेयरमैन के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं. अब प्रवर्तन निदेशालय इस पूरे बैंक लोन फ्रॉड मामले में सतीश सेठ और गौतम दोशी दोनों की वास्तविक भूमिकाओं की गहराई से जांच कर रहा है।

  • AAP मंत्री संजीव अरोड़ा मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार, ED की बड़ी कार्रवाई से पंजाब की राजनीति में हलचल

    AAP मंत्री संजीव अरोड़ा मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार, ED की बड़ी कार्रवाई से पंजाब की राजनीति में हलचल



    नई दिल्ली। पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार में मंत्री संजीव अरोड़ा को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार कर लिया है। शनिवार सुबह ED की टीम ने चंडीगढ़ सेक्टर-2 स्थित उनके सरकारी आवास पर छापेमारी की, जिसके बाद लगभग 10 घंटे लंबी पूछताछ की गई और शाम करीब 5 बजे उन्हें दिल्ली ले जाया गया।

    ED के अनुसार यह मामला करीब 157.12 करोड़ रुपये के कथित फर्जी मोबाइल एक्सपोर्ट, शेल कंपनियों और GST इनपुट क्रेडिट धोखाधड़ी से जुड़ा है। जांच एजेंसी का आरोप है कि अरोड़ा से जुड़ी कंपनियों ने फर्जी खरीद-बिक्री और निर्यात दिखाकर अवैध तरीके से धन की हेराफेरी की और विदेशी कंपनियों के जरिए पैसे की राउंड ट्रिपिंग की गई।

    ED ने हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड और उनसे जुड़ी संस्थाओं के बैंक खाते, डीमैट होल्डिंग्स और कई अचल संपत्तियों को भी अस्थायी रूप से जब्त किया है। यह कार्रवाई 17 अप्रैल को की गई छापेमारी और दस्तावेजों की जांच के बाद सामने आए तथ्यों के आधार पर की गई है।

    एजेंसी का दावा है कि 157 करोड़ रुपये के घोषित एक्सपोर्ट में से बड़ी राशि UAE की दो कंपनियों के जरिए घूमाकर वापस भारत लाई गई, जिससे FEMA और GST नियमों के उल्लंघन का संदेह गहराया है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और ED ने आगे की पूछताछ दिल्ली में करने की बात कही है।

    इधर गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया और कहा कि ED का इस्तेमाल पार्टी को तोड़ने के लिए किया जा रहा है। वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव बनाने के लिए की गई है।

    आप सांसद राघव चड्ढा ने भी इस मामले को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला और इसे राजनीतिक साजिश करार दिया। वहीं भाजपा की ओर से कहा गया है कि जांच एजेंसी अपना काम कर रही है और कानून से कोई ऊपर नहीं है।

    फिलहाल संजीव अरोड़ा ED की हिरासत में हैं और मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। यह मामला पंजाब की राजनीति में बड़ा विवाद बन गया है और आने वाले दिनों में इसके और राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।

  • ईडी ने अनिल अंबानी समूह की कंपनियों की 581.65 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त किया

    ईडी ने अनिल अंबानी समूह की कंपनियों की 581.65 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त किया

    Anil Ambani group

    नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अनिल अंबानी के रिलायंस समूह की दो कंपनियों आरएचएफएल और आरसीएफएल की 581.65 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त किया है। यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत रिलायंस पावर लिमिटेड के मामले में की गई है।

    ईडी ने गुरुवार को जारी एक बयान में बताया कि उसने रिलायंस समूह के अध्यक्ष अनिल अंबानी की दो कंपनियों रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) की 581.65 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत रिलायंस पावर लिमिटेड के मामले में की है, जिसमें देश के कई राज्यों में जमीन के टुकड़ों के रूप में 31 अचल प्रॉपर्टीज को अटैच किया गया है।

    केंद्रीय जांच एजेंसी ने कहा कि ईडी ने 11 मार्च, 2026 को रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) के मामले में गोवा, केरल, कर्नाटक, पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और राजस्थान में जमीन के टुकड़ों के रूप में 31 अचल संपत्ति को प्रोविजनल तौर पर अटैच किया गया है, जिनकी कीमत 581.65 करोड़ रुपये है।

    ईडी के मुताबिक यह अटैचमेंट विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत रिलायंस पावर लिमिटेड (आर-पावर) के मामले में 6 मार्च, 2026 को किए गए सर्च ऑपरेशन के बाद किया गया है। इस ताजा कार्रवाई के बाद रिलायंस अनिल अंबानी समूह की कुल कुर्क संपत्ति 16,310 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

  • मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED की बड़ी कार्रवाई… अनिल अंबानी के मुम्बई स्थित घर 'अबोड' को किया जब्त

    मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED की बड़ी कार्रवाई… अनिल अंबानी के मुम्बई स्थित घर 'अबोड' को किया जब्त


    मुम्बई।
    प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate- ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी कानून (Anti-Money Laundering Laws – PMLA) के तहत बड़ी कार्रवाई की है। रिपोर्ट के अनुसार, ईडी ने अनिल अंबानी (Anil Ambani) के मुंबई स्थित घर ‘अबोड’ को जब्त कर लिया है। जब्त घर की कीमत 3,716 करोड़ रुपये बताई जा रही है। ईडी के अनुसार, अनिल अंबानी और उनके ग्रप की कंपनियों के खिलाफ अब तक कुल अटैचमेंट की कार्रवाई 15000 करोड़ से अधिक हो चुकी है। बता दें कि 23 फरवरी को बॉम्बे उच्च न्यायालय ने उद्योगपति अनिल अंबानी को झटका देते हुए एकल न्यायाधीश पीठ के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उनके एवं रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के बैंक खातों को ‘धोखाधड़ी’ वाला वर्गीकृत करने की कार्यवाही पर रोक लगाई गई थी।

    यह आदेश मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम ए अंखड की खंडपीठ ने बैंक ऑफ बड़ौदा, आईडीबीआई बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और ऑडिटर बीडीओ इंडिया एलएलपी की याचिका पर पारित किया। पीठ ने ‘उल्टे’ और ‘गैर-कानूनी’ अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया और अंबानी की इसके अभियान पर रोक लगाने के निवेदन को भी ठुकरा दिया।

    पीठ ने कहा, “जैसा कि हम पहले ही सुन चुके हैं कि 24 दिसंबर, 2025 का अंतरिम फैसला गैर-कानूनी है और इस प्रक्रिया में गड़बड़ी है इसलिए अगले कुछ सप्ताह के लिए इस आदेश के लागू होने पर रोक लगाने का निवेदन गैर-कानूनी आदेश को जारी रखने और गैर-कानूनी काम को जारी रखने के बराबर होगी। इसलिए अनिल अंबानी की तरफ से इस फैसले के लागू होने पर रोक लगाने के निवेदन को खारिज किया जाता है।”

    दिसंबर 2025 में जब अनिल अंबानी के खिलाफ मामला विचाराधीन था, न्यायमूर्ति मिलिंद एन जाधव की एकल न्यायाधीश पीठ ने उनको कुछ समय के लिए राहत दी। इस आदेश ने तीनों बैंकों की सभी कार्रवाइयों पर रोक लगा दी और उन्हें कारण बताओ नोटिस और धोखाधड़ी आदेश पर आगे बढ़ने से रोक दिया, जिससे उन्हें दो-जजों की पीठ के सामने अपील करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

  • टीना अंबानी ने 40 हजार करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस ED के सामने पेश होने से किया इन्कार

    टीना अंबानी ने 40 हजार करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस ED के सामने पेश होने से किया इन्कार


    मुम्बई।
    बिजनेसमैन अनिल अंबानी (Businessman Anil Ambani) की पत्नी टीना अंबानी (Tina Ambani) ने आज प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सामने पेश होने से इनकार कर दिया है। ईडी लगभग 40,000 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामलों (Money laundering cases) की जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी इस मामले में टीना अंबानी को नया समन जारी करेगी। प्रवर्तन निदेशालय ने अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (ADAG) और उससे जुड़ी संस्थाओं से जुड़े 40,000 करोड़ रुपये के कथित बैंकिंग और कॉर्पोरेट घोटाले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।

    एक खबर में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि SIT का नेतृत्व संघीय जांच एजेंसी की मुख्यालय जांच इकाई (HIU) में अतिरिक्त निदेशक स्तर के अधिकारी कर रहे हैं और इसमें आधा दर्जन अन्य जांचकर्ता शामिल हैं। यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा ADAG के खिलाफ मामलों की समीक्षा करने के बाद उठाया गया है। पिछले सप्ताह, सर्वोच्च न्यायालय ने ईडी को एक SIT गठित करने का निर्देश दिया था जो मामले में निष्पक्ष, स्वतंत्र, त्वरित और निष्पक्ष जांच करेगी। अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को कथित सांठगांठ, मिलीभगत और साजिश की जांच करने और अपनी जांच को तार्किक निष्कर्ष तक ले जाने के लिए कहा था।

    ईडी पिछले साल से अनिल अंबानी और उनकी रिलायंस समूह की कंपनियों की जांच कर रहा है। अब तक एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत तीन प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIRs) दर्ज की हैं। इसके अलावा, 12,000 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क भी की गई है। अनिल अंबानी से पिछले साल उनकी समूह की कंपनियों के कथित बैंक ऋण अनियमितताओं के लिए ईडी द्वारा पूछताछ की गई थी। कंपनी के एक पूर्व शीर्ष कार्यकारी और RCOM के पूर्व अध्यक्ष, पुनीत गर्ग को हाल ही में एजेंसी द्वारा गिरफ्तार किया गया है। अनिल अंबानी समूह की कंपनियों ने अतीत में किसी भी गलत काम से इनकार किया है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी पर बैंकिंग घोटाले की जांच में CBI-ED को 10 दिन में रिपोर्ट देने का आदेश

    सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी पर बैंकिंग घोटाले की जांच में CBI-ED को 10 दिन में रिपोर्ट देने का आदेश


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी और उनके ग्रुप पर लगे ₹1.5 लाख करोड़ के कथित बैंकिंग और कॉरपोरेट फ्रॉड के आरोपों को गंभीरता से लिया है। शुक्रवार को पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन पर सुनवाई के दौरान अदालत ने CBI और प्रवर्तन निदेशालय से कहा कि वे 10 दिन के भीतर सीलबंद लिफाफे में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें। यह मामला देश के सबसे बड़े कॉरपोरेट धोखाधड़ी के आरोपों में से एक माना जा रहा है।याचिका पूर्व नौकरशाह ई.ए.एस. सरमा की ओर से दायर की गई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि 2007-08 से अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप ने सार्वजनिक बैंकों और वित्तीय संस्थानों से लिए गए कर्ज का गलत इस्तेमाल किया और रकम को समूह की अन्य इकाइयों में डायवर्ट किया।

    सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि मामले में पहले भी नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन अब बॉम्बे हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि नोटिस अनिल अंबानी तक विधिवत पहुंचें। अदालत ने जांच एजेंसियों से अब तक की कार्रवाई का पूरा ब्यौरा मांगा है।याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा कॉरपोरेट फ्रॉड है। उन्होंने आरोप लगाया कि CBI और ED की मौजूदा जांच केवल फ्रॉड के सीमित हिस्से तक सीमित है, जबकि बैंकों के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच नहीं की जा रही। भूषण ने बताया कि लोन अप्रूवल प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी हुई और फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में भी हेरफेर किया गया।

    ED अब तक इस मामले में ₹10,117 करोड़ की संपत्तियां जब्त कर चुकी है। इसमें मुंबई के पाली हिल स्थित अनिल अंबानी का आवास, रिलायंस समूह की कंपनियों के बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट और अनलिस्टेड निवेश शामिल हैं। एजेंसी का दावा है कि रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस में फंड का गलत इस्तेमाल हुआ जिससे यस बैंक को करीब ₹2,700 करोड़ का नुकसान हुआ।

    सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जांच एजेंसियों की ओर से समय मांगा है। अब सभी की निगाहें 10 दिन बाद दाखिल होने वाली रिपोर्ट पर हैं जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट आगे की कार्रवाई तय करेगा। यह मामला न केवल कॉर्पोरेट गवर्नेंस बल्कि बैंकिंग निगरानी व्यवस्था पर भी अहम सवाल खड़ा कर रहा है।

  • ईडी का महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप केस में बड़ा एक्शन… 92 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क

    ईडी का महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप केस में बड़ा एक्शन… 92 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क


    रायपुर।
    प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) (Enforcement Directorate – ED) ने बुधवार को बताया उसने छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में कार्रवाई को अंजाम देते हुए अवैध ‘महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी’ (‘Mahadev Online Betting’) ऐप के मुख्य प्रवर्तकों में से एक सौरभ चंद्राकर (Saurabh Chandrakar) सहित विभिन्न आरोपियों की लगभग 92 करोड़ रुपए की संपत्तियों को कुर्क किया है। जिसमें चल और अचल दोनों तरह की संपत्तियां शामिल हैं। इस कार्रवाई के दौरान ईडी ने PMLA के तहत एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए परफेक्ट प्लान इन्वेस्टमेंट LLC और एक्जिम जनरल ट्रेडिंग- GZCO के नाम पर रखी गई 74.28 करोड़ रुपए से अधिक की बैंक जमा राशि को जब्त किया।


    दोनों कंपनियों से बड़े पैमाने पर बनाई अपराध की आय

    इस बारे में एक बयान जारी करते हुए ईडी ने बताया कि, ये दोनों कंपनियां सौरभ चंद्राकर, अनिल कुमार अग्रवाल और विकास छपारिया की हैं, जिनका इस्तेमाल अपराध की आय (PoC) को छिपाने और बेदाग निवेश के रूप में दिखाने के लिए किया जाता था। इसके अलावा ईडी ने बताया कि साथ ही Skyexchange.com के मालिक हरि शंकर टिबरेवाल के करीबी सहयोगी गगन गुप्ता की भी 17.5 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की गई है। इन जब्त की गई संपत्तियों में गगन गुप्ता के परिवार के सदस्यों के नाम पर रखी गई महंगी रियल एस्टेट और लिक्विड एसेट्स भी शामिल हैं, जिन्हें कैश से खरीदना पाया गया।


    अपराध की आय को बेनामी खातों के जरिए निकाला गया

    ईडी की जांच में पता चला है कि महादेव ऑनलाइन बुक, Skyexchange.com आदि जैसे अवैध सट्टेबाजी ऐप्स ने भारी मात्रा में नगदी उत्पन्न की, जिसे बेनामी बैंक खातों के एक जटिल जाल के माध्यम से निकाला गया। यह भी पता चला है कि सौरभ चंद्राकर और अन्य ने महादेव ऑनलाइन बुक एप्लिकेशन नामक एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से जनता को धोखा दिया।


    सारे ग्राहक खो देते थे लगाए गई पूरी रकम

    इस दौरान इन अवैध सट्टेबाजी खेलों के ऐप्स/वेबसाइटों को इस तरह से तैयार किया गया था कि सभी ग्राहक अंततः पैसे खो देते थे। जिसके चलते इनके संचालकों के पास हजारों करोड़ रुपए का फंड इकट्ठा हो गया और पहले से तय प्रॉफिट-शेयरिंग तरीके से बांटा गया। इसके अलावा, बैंक अकाउंट खोलने के लिए जाली या चोरी किए गए KYC का भी इस्तेमाल किया गया और अवैध सट्टेबाजी से मिले पैसे को उनके सोर्स को छिपाने के लिए लेयरिंग की गई। इन सभी ट्रांजैक्शन का न तो हिसाब रखा गया और न ही उन्हें टैक्स नेट में लाया गया।


    FPI के नाम पर वापस भारत आया अपराध की कमाई का पैसा

    जांच में पता चला कि इन अवैध सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म से कमाए गए पैसे को हवाला चैनलों, ट्रेड-बेस्ड मनी लॉन्ड्रिंग ट्रांजैक्शन और क्रिप्टो-एसेट्स के इस्तेमाल से भारत के बाहर ट्रांसफर किया गया और बाद में विदेशी FPIs के नाम पर भारतीय स्टॉक मार्केट में वापस लाकर इन्वेस्ट किया गया। ED द्वारा की गई जांच में एक सोफिस्टिकेटेड कैशबैक स्कीम का भी पता चला, जिसमें ये FPI एंटिटी भारतीय लिस्टेड कंपनियों में भारी इन्वेस्ट करती थीं और बदले में, इन कंपनियों के प्रमोटरों को इन्वेस्टमेंट का 30% से 40% कैश में वापस देना होता था।


    गगन गुप्ता ने दो कंपनियों से लिया 98 करोड़ का फायदा

    जांच के दौरान एक आरोपी गगन गुप्ता को सालासर टेक्नो इंजीनियरिंग लिमिटेड और टाइगर लॉजिस्टिक लिमिटेड जैसी एंटिटी से जुड़े ऐसे ट्रांजैक्शन से कम से कम 98 करोड़ रुपए का लाभ मिलना पाया गया। बता दें कि अब तक इस मामले की जांच के दौरान ED ने 175 से ज़्यादा जगहों पर तलाशी ली है। साथ ही जांच के दौरान लगभग 2,600 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्ति जब्त, फ्रीज या अटैच भी की है। इसके अलावा, ED ने इस मामले में 13 लोगों को गिरफ्तार किया है, और अब तक दायर की गई पांच प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट में 74 लोगों को आरोपी बनाया गया है। महादेव ऐप का प्रचार सौरभ चंद्राकर और उसके सहयोगी रवि उप्पल ने किया था। ये दोनों छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं। उनका विदेश से प्रत्यर्पण कराने की कोशिश की जा रही है। उनके संयुक्त अरब अमीरात में होने का पता चला था।

  • ED की पंजाब में बड़ी कार्रवाई… मनी लॉन्ड्रिंग केस में 3500 करोड़ की 160 संपत्तियां जब्त

    ED की पंजाब में बड़ी कार्रवाई… मनी लॉन्ड्रिंग केस में 3500 करोड़ की 160 संपत्तियां जब्त


    नई दिल्ली।
    प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate- ED) ने पंजाब (Punjab) में PACL से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय एजेंसी ने गुरुवार को PACL और अन्य के मामले में चल रही जांच के सिलसिले में पंजाब के लुधियाना (Ludhiana, Punjab) में स्थित 3436.56 करोड़ रुपये की 169 अचल संपत्तियां जब्त की हैं। ईडी ने कहा कि उसकी जांच में पता चला है कि “लाखों निवेशकों से जुटाए गए फंड का एक हिस्सा PACL के नाम पर इन 169 अचल संपत्तियों को खरीदने में इस्तेमाल किया गया था, जिनकी मौजूदा कीमत 3436.56 करोड़ रुपये है।”

    प्रवर्तन निदेशालय के दिल्ली जोनल ऑफिस ने इन संपत्तियों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत जब्त किया है। यह कार्रवाई सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) द्वारा PACL लिमिटेड, PGF लिमिटेड, दिवंगत निर्मल सिंह भंगू और अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 की धारा 120-B और 420 के तहत दर्ज की गई FIR के आधार पर की गई जांच के बाद की गई है।


    क्या है पूरा मामला?

    बता दें कि यह मामला PACL द्वारा बड़े पैमाने पर चलाई गई धोखाधड़ी वाली पोंजी स्कीम और सामूहिक निवेश योजनाओं से संबंधित है। इन योजनाओं के जरिए PACL और उसकी सहयोगी कंपनियों ने धोखे से भोले-भाले निवेशकों से लगभग 48,000 करोड़ रुपये जुटाए और उसका गबन कर लिया। ईडी ने इस मामले में अब तक 5,602 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को जब्त किया है, जिसमें देश बार में स्थित पर्ल ग्रुप की घरेलू संपत्तियां और विदेशी संपत्तियां दोनों शामिल हैं। इसके अलावा, इस मामले में अब तक एक अभियोजन शिकायत और दो पूरक अभियोजन शिकायतें दायर की जा चुकी हैं।

  • नीरव मोदी को झटका: भारत के आश्वासनों के बाद ब्रिटेन कोर्ट में प्रत्यर्पण अपील 2026 तक टली

    नीरव मोदी को झटका: भारत के आश्वासनों के बाद ब्रिटेन कोर्ट में प्रत्यर्पण अपील 2026 तक टली


    नई दिल्ली ।नीरव मोदी की भारत प्रत्यर्पण अपील पर सुनवाई ब्रिटेन की हाई कोर्ट में टाल दी गई है। यह मामला रॉयल कोर्ट्स ऑफ जस्टिस में लॉर्ड जस्टिस जेरेमी स्टुअर्ट-स्मिथ और जस्टिस रॉबर्ट जे की पीठ के समक्ष आया। सुनवाई के दौरान जजों ने कहा कि नीरव मोदी पहले भी भारत प्रत्यर्पण रोकने की कई कोशिशें कर चुका है, जो असफल रही हैं। भारत सरकार ने उसकी मुंबई की आर्थर रोड जेल में प्री-ट्रायल हिरासत की शर्तों के बारे में ठोस और विस्तृत आश्वासन पेश किए। इन्हीं आश्वासनों के आधार पर सुनवाई मार्च 2026 तक स्थगित कर दी गई।

    सुनवाई की प्रक्रिया और समय-सीमा

    अदालत ने फरवरी 2026 के मध्य तक लिखित दलीलें दाखिल करने की समय-सीमा तय की।मार्च या अप्रैल 2026 में दो दिन की सुनवाई होगी।इस सुनवाई में यह तय होगा कि नीरव मोदी की अपील दोबारा खोली जाए या नहीं।अनुमति न मिलने की स्थिति में नीरव मोदी का भारत प्रत्यर्पण तुरंत संभव हो सकेगा।

    सुनवाई के दौरान प्रमुख बातें
    54 वर्षीय नीरव मोदी वीडियो लिंक के जरिए उत्तर लंदन की पेंटनविल जेल से पेश हुए। CPS ने बताया कि भारत से CBI और ED के चार वरिष्ठ अधिकारी लंदन पहुंचे थे। नीरव मोदी के वकीलों ने संजय भंडारी मामले का हवाला दिया, जिसमें मानवाधिकार आधार पर राहत मिली थी। CPS ने कहा कि यह मामला नीरव मोदी के केस पर लागू नहीं होता।

    पृष्ठभूमि

    नीरव मोदी मार्च 2019 से ब्रिटेन में हिरासत में हैं। उन पर PNB से लगभग 2 अरब डॉलर की धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और सबूतों में छेड़छाड़ के तीन अलग-अलग मामले दर्ज हैं।अप्रैल 2021 में तत्कालीन ब्रिटिश गृह मंत्री प्रीति पटेल ने प्रत्यर्पण का आदेश दिया था।नीरव मोदी लगातार कानूनी दांव-पेंच अपनाते रहे हैं, लेकिन भारत के ठोस आश्वासनों और कोर्ट के सख्त समय-निर्धारण के बाद उनका प्रत्यर्पण अब और लंबित नहीं रह पाएगा।

  • फर्जी बैंक गारंटी से टेंडर मामले में ED की बड़ी कार्रवाई… रिलायंस पावर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

    फर्जी बैंक गारंटी से टेंडर मामले में ED की बड़ी कार्रवाई… रिलायंस पावर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल


    नई दिल्ली।
    एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (Enforcement Directorate- ED) ने शनिवार को रिलायंस पावर लिमिटेड (Reliance Power Limited) और 10 अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग (Money laundering.) के एक मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी है. यह मामला 68 करोड़ रुपए से ज्यादा की फर्जी बैंक गारंटी के जरिए एक बड़ा सरकारी टेंडर हासिल करने से जुड़ा हुआ है. यह चार्जशीट दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत दाखिल की गई है.

    इस चार्जशीट में रिलायंस पावर के पूर्व CFO अशोक कुमार पाल, रिलायंस NU BESS लिमिटेड, रोजा पावर सप्लाई कंपनी लिमिटेड, रिलायंस ग्रुप के एग्जीक्यूटिव पुनीत नरेंद्र गर्ग और ट्रेड फाइनेंसिंग कंसल्टेंट अमर नाथ दत्ता का नाम शामिल किया गया है. इसके अलावा बायोथेन केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड, रविंदर पाल सिंह चड्ढा और मनोज भैयासाहेब पोंगडे को भी आरोपी बनाया गया है.

    ED इससे पहले इस केस में अपनी पहली चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिसमें ओडिशा की शेल कंपनी बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड और उसके MD पाठा सारथी बिस्वाल का नाम था. जांच एजेंसी का दावा है कि यह पूरा नेटवर्क कमीशन के बदले फर्जी बैंक गारंटी जारी करने में शामिल था. यह मामला 68.2 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी से जुड़ा है, जो रिलायंस पावर की लिस्टेड कंपनी रिलायंस NU BESS लिमिटेड की तरफ से सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड से टेंडर हासिल करने के लिए जमा की गई थी. ED का दावा है कि रिलायंस ग्रुप के अधिकारियों को पता था कि बैंक गारंटी फर्जी थी।

    जांच एजेंसी के अनुसार, SBI की एक नकली ईमेल ID के जरिए SECI को जाली एंडोर्समेंट भेजे गए. जब SECI को धोखाधड़ी का शक हुआ, तो एक दिन के भीतर IDBI बैंक से असली बैंक गारंटी जुटाने की कोशिश की गई, लेकिन तय समयसीमा के बाद जमा होने के कारण SECI ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया. ED का आरोप है कि जब रिलायंस NU BESS लिमिटेड L-2 बिडर के तौर पर सामने आई और टेंडर हाथ से फिसलता दिखा, तो कोलकाता में SBI ब्रांच से एक और नकली विदेशी बैंक गारंटी का एंडोर्समेंट कराने की कोशिश की गई. इसके लिए एक बैंक के नाम पर फर्जी गारंटी तैयार की गई.

    जांच में यह भी सामने आया कि इस फर्जी गारंटी को असली दिखाने के लिए sbi.co.in से मिलता-जुलता एक नकली डोमेन s-bi.co.in इस्तेमाल किया गया. इसी डोमेन से SBI के नाम पर फर्जी ईमेल और एंडोर्समेंट लेटर भेजे गए. ED ने यह भी आरोप लगाया है कि फर्जी बैंक गारंटी के इंतजाम के लिए जरूरी फंडिंग जुटाने को रिलायंस की दूसरी सब्सिडियरी रोजा पावर सप्लाई कंपनी लिमिटेड से बिस्वाल ट्रेडलिंक को फर्जी ट्रांसपोर्टेशन सर्विस के नाम पर 6.33 करोड़ रुपए भेजे गए. इस मामले में ED ने अब तक करीब 1000 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की है. जांच में 5.15 करोड़ रुपए की ठगी सामने आई है।

    इस केस में बिस्वाल के साथ-साथ रिलायंस पावर के पूर्व CFO अशोक कुमार पाल और अमर नाथ दत्ता को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है. वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं. रिलायंस पावर ने स्टॉक मार्केट को दिए अपने बयान में कहा है कि कंपनी, उसकी सब्सिडियरी और कर्मचारी पूरी तरह से निर्दोष हैं. वे थर्ड पार्टी द्वारा किए गए फ्रॉड, जालसाजी और साजिश के शिकार हैं. कंपनी का कहना है कि ED का यह केस उसी FIR पर आधारित है, जो खुद कंपनी ने दर्ज कराई थी. जांच एजेंसी के आरोपों की अभी तक न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है. यह मनी लॉन्ड्रिंग केस दिल्ली पुलिस की नवंबर 2024 में दर्ज FIR से निकला है।