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  • कथित बैंक लोन धोखाधड़ी मामले में ईडी का शिकंजा, एडीएजी के पूर्व शीर्ष अधिकारियों पर कार्रवाई

    कथित बैंक लोन धोखाधड़ी मामले में ईडी का शिकंजा, एडीएजी के पूर्व शीर्ष अधिकारियों पर कार्रवाई

    नई दिल्ली । प्रवर्तन निदेशालय द्वारा कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में रिलायंस अनिल अंबानी समूह के दो पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद कारोबारी और वित्तीय क्षेत्र में हलचल बढ़ गई है। जांच एजेंसी ने मामले में आगे की कार्रवाई करते हुए दोनों पूर्व अधिकारियों को हिरासत में लिया है और उनकी भूमिका की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

    जांच के दायरे में आए दोनों अधिकारी समूह की विभिन्न कंपनियों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई एक कथित ऋण धोखाधड़ी मामले से जुड़ी जांच के आधार पर की गई है, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के एक प्रमुख बैंक को वित्तीय नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि ऋण वितरण और उसके उपयोग की प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई थी या नहीं।

    मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि संबंधित कंपनियों को बैंकिंग कंसोर्टियम की ओर से बड़ी वित्तीय सहायता प्रदान की गई थी। बाद में ऋण वापसी और धन के उपयोग को लेकर सवाल खड़े हुए, जिसके बाद जांच एजेंसियों ने मामला दर्ज कर विस्तृत पड़ताल शुरू की। इसी जांच के क्रम में संबंधित पूर्व अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की जा रही है।

    गिरफ्तारी के बाद रिलायंस समूह की ओर से जारी प्रतिक्रिया में कहा गया कि दोनों व्यक्ति अब कंपनी या समूह की किसी भी इकाई से जुड़े नहीं हैं। कंपनी के अनुसार, एक अधिकारी ने वर्ष 2025 में समूह छोड़ा था, जबकि दूसरे अधिकारी कई वर्ष पहले ही अपने पदों से अलग हो चुके थे। समूह ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान प्रबंधन का इन व्यक्तियों की व्यक्तिगत कानूनी स्थिति से कोई संबंध नहीं है।

    इस मामले से पहले भी समूह की कुछ पूर्व इकाइयों से जुड़े वित्तीय मामलों की जांच विभिन्न एजेंसियों द्वारा की जा चुकी है। हाल के महीनों में बैंक ऋणों और वित्तीय लेन-देन से संबंधित कई मामलों में जांच तेज हुई है, जिससे कॉर्पोरेट क्षेत्र में जवाबदेही और अनुपालन को लेकर चर्चा बढ़ी है।

    इसी बीच एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण ने उद्योगपति अनिल अंबानी के खिलाफ व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति दी है। यह मामला कुछ कंपनियों को दिए गए ऋणों के लिए प्रदान की गई व्यक्तिगत गारंटी से जुड़ा बताया जा रहा है। इस फैसले के बाद कानूनी और वित्तीय हलकों में इसकी व्यापक चर्चा हो रही है।

    अनिल अंबानी की ओर से जारी प्रतिक्रिया में कहा गया है कि आदेश की विस्तृत प्रति मिलने के बाद कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी। साथ ही संबंधित मंचों पर उपलब्ध कानूनी विकल्पों का उपयोग करते हुए फैसले को चुनौती देने की संभावना भी जताई गई है।

    वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक कंपनी या व्यक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और ऋण प्रबंधन से जुड़े व्यापक मुद्दों को भी सामने लाता है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों और न्यायिक संस्थाओं की कार्रवाई पर बाजार और निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

  • इंदौर में ED की बड़ी कार्रवाई नगर निगम के ARO राजेश परमार की 1.06 करोड़ की संपत्तियां कुर्क आय से 175 प्रतिशत अधिक संपत्ति का खुलासा

    इंदौर में ED की बड़ी कार्रवाई नगर निगम के ARO राजेश परमार की 1.06 करोड़ की संपत्तियां कुर्क आय से 175 प्रतिशत अधिक संपत्ति का खुलासा


    मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है। इंदौर नगर निगम के सहायक राजस्व अधिकारी राजेश परमार अब केंद्रीय जांच एजेंसी के शिकंजे में हैं। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए परमार और उनके परिवार के नाम दर्ज 1.06 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर दिया है। जांच में सामने आया है कि उनके पास मौजूद संपत्ति उनकी ज्ञात वैध आय से 175 प्रतिशत अधिक है।

    यह मामला मूल रूप से आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ भोपाल द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है। ईओडब्ल्यू ने राजेश परमार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया था। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की। जांच के दौरान साल 2007 से 2022 तक की आय और संपत्ति का विस्तृत आकलन किया गया।

    ईडी की जांच में सामने आया कि इस 15 वर्ष की अवधि में राजेश परमार ने करीब 1.66 करोड़ रुपये की संपत्तियां अर्जित कीं। जब इन संपत्तियों की तुलना उनकी आधिकारिक सैलरी और अन्य वैध आय स्रोतों से की गई तो यह अंतर चौंकाने वाला निकला। एजेंसी के अनुसार यह संपत्ति उनकी ज्ञात आय से लगभग 175 प्रतिशत अधिक पाई गई। जांच एजेंसी ने अनुमान लगाया है कि अपराध से अर्जित संदिग्ध आय लगभग 1.21 करोड़ रुपये हो सकती है।

    अटैच की गई संपत्तियों में मकान प्लॉट और जमीन शामिल हैं जो राजेश परमार और उनके परिजनों के नाम दर्ज हैं। इन संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है ताकि जांच के दौरान इनका हस्तांतरण या विक्रय न किया जा सके। ईडी का कहना है कि आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत इन संपत्तियों को स्थायी रूप से जब्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

    जांच में यह भी सामने आया कि कथित रूप से अवैध तरीके से अर्जित नकदी को सीधे निवेश करने के बजाय पहले बैंक खातों के माध्यम से घुमाया गया। ईडी के अनुसार बड़ी मात्रा में नकद राशि को स्वयं और परिवार के सदस्यों के खातों में जमा कराया गया। इसके बाद बैंक ट्रांसफर के जरिए इन्हीं पैसों से अचल संपत्तियां खरीदी गईं। एजेंसी का दावा है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य धन के वास्तविक स्रोत को छिपाना और उसे वैध कमाई के रूप में दिखाना था।

    प्रवर्तन निदेशालय की इस कार्रवाई को इंदौर में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी पहल माना जा रहा है। फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है और संबंधित दस्तावेजों तथा वित्तीय लेनदेन की पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद एजेंसी द्वारा अभियोजन की कार्रवाई भी की जा सकती है।