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  • भोपाल में बच्चों के लिए नई पहल: शुरू होगा ‘लिटिल रीडर्स क्लब’, कहानी, क्विज और क्रिएटिव एक्टिविटी से बढ़ेगा पढ़ने का शौक

    भोपाल में बच्चों के लिए नई पहल: शुरू होगा ‘लिटिल रीडर्स क्लब’, कहानी, क्विज और क्रिएटिव एक्टिविटी से बढ़ेगा पढ़ने का शौक


    नई दिल्ली। भोपाल में बच्चों को मोबाइल स्क्रीन से दूर कर किताबों की दुनिया से जोड़ने और उनमें पढ़ने की आदत विकसित करने के उद्देश्य से एक अनूठी पहल शुरू की जा रही है। शहर की प्रतिष्ठित स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी, न्यू मार्केट में 14 जून (रविवार) से ‘लिटिल रीडर्स क्लब’ का शुभारंभ किया जाएगा। यह क्लब 4 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य उन्हें कहानियों, पुस्तकों और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से सीखने के लिए प्रेरित करना है।

    लाइब्रेरी प्रबंधन के अनुसार, इस क्लब को विशेष रूप से बच्चों की उम्र के अनुसार दो समूहों में बांटा गया है। ‘लिटिल बड्स’ समूह में 4 से 8 वर्ष के बच्चों को कहानी सुनाने, चित्र पुस्तकों की दुनिया से परिचित कराने और प्रारंभिक पठन गतिविधियों में शामिल किया जाएगा। वहीं ‘पेज टर्नर्स’ समूह (9 से 14 वर्ष) के बच्चों के लिए पुस्तक पठन के साथ-साथ संवादात्मक चर्चा, विचार-विमर्श और रचनात्मक अभिव्यक्ति पर जोर दिया जाएगा।

    शुभारंभ कार्यक्रम 14 जून को शाम 5 बजे आयोजित किया जाएगा, जिसमें बच्चों के लिए कई रोचक गतिविधियां शामिल होंगी। इनमें ‘बुक जैकेट डिजाइन’ के तहत बच्चे अपनी पसंदीदा किताब का नया कवर तैयार करेंगे और उस पर आकर्षक परिचय लिखेंगे। इसके अलावा ‘बुक पिच’ गतिविधि में बच्चे विज्ञापन विशेषज्ञ की तरह अपनी पसंदीदा पुस्तक को प्रस्तुत करेंगे, जिससे उनकी अभिव्यक्ति क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।

    कार्यक्रम में कहानी वाचन, पुस्तक चर्चा, चित्रकला, क्राफ्ट, शब्द और पहेली खेल, रचनात्मक लेखन, रोल प्ले, क्विज प्रतियोगिता और समूह गतिविधियां भी शामिल होंगी। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में आत्मविश्वास, कल्पनाशक्ति, टीमवर्क और संचार कौशल को विकसित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

    लाइब्रेरी के प्रबंधक यतीश भटेले ने बताया कि यह क्लब हर 15 दिनों में नियमित रूप से आयोजित किया जाएगा, ताकि बच्चों में लगातार पढ़ने की आदत विकसित हो सके। क्लब का संचालन तूलिका श्री और अनीर्बन चक्रवर्ती करेंगे, जो लंबे समय से साहित्य और बाल गतिविधियों से जुड़े रहे हैं।

    इस पहल को लेकर अभिभावकों में भी उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि आज के डिजिटल युग में बच्चों को किताबों से जोड़ना एक बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे में यह क्लब बच्चों के मानसिक विकास और रचनात्मक सोच को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • CBSE रिजल्ट पोर्टल पर बड़ा साइबर हमला, 38 लाख से अधिक संदिग्ध रिक्वेस्ट ब्लॉक; सिस्टम रहा सुरक्षित

    CBSE रिजल्ट पोर्टल पर बड़ा साइबर हमला, 38 लाख से अधिक संदिग्ध रिक्वेस्ट ब्लॉक; सिस्टम रहा सुरक्षित


    नई दिल्ली । केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) के पोस्ट-रिजल्ट पोर्टल पर 3 जून 2026 को एक बड़ा साइबर हमला दर्ज किया गया। इस हमले में करीब 38 लाख से अधिक संदिग्ध रिक्वेस्ट भेजी गईं, जिसका उद्देश्य सिस्टम को बाधित करना था। हालांकि, बोर्ड की मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी टीम की सतर्कता के चलते पोर्टल पर कोई असर नहीं पड़ा और सेवा पूरी तरह सुचारू रूप से चलती रही।

     DDoS अटैक के जरिए किया गया हमला
    विशेषज्ञों के अनुसार यह हमला डिनायल-ऑफ-सेवा (DDoS) श्रेणी का था, जिसमें एक साथ भारी मात्रा में ट्रैफिक भेजकर किसी वेबसाइट को ठप करने की कोशिश की जाती है। CBSE के अनुसार, पोर्टल शुरू होने के कुछ ही मिनटों में लाखों रिक्वेस्ट आईं, जिनमें बड़ी संख्या अनधिकृत लॉगिन प्रयासों की थी। सिस्टम ने इन सभी को पहचानकर तुरंत ब्लॉक कर दिया।

     मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था ने रोका नुकसान
    बोर्ड ने बताया कि पोर्टल लॉन्च से पहले व्यापक सुरक्षा परीक्षण किए गए थे, जिनमें पेनिट्रेशन टेस्टिंग, वल्नरेबिलिटी असेसमेंट और लोड टेस्टिंग शामिल थीं। पोर्टल को आधुनिक सुरक्षा तकनीकों जैसे वेब एप्लिकेशन फायरवॉल (WAF), DDoS सुरक्षा प्रणाली, ऑडिट लॉगिंग और 24×7 मॉनिटरिंग से सुरक्षित किया गया था। इसी वजह से यह हमला सफल नहीं हो सका।

     रिजल्ट के बाद बढ़ा ट्रैफिक, हजारों आवेदन दर्ज
    रिजल्ट के बाद छात्रों की ओर से पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन के लिए बड़ी संख्या में आवेदन भी आए हैं। बोर्ड को अब तक हजारों आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन और अंकों के सत्यापन की मांग शामिल है।

     शुरुआती मिनटों में ही भारी दबाव
    रिपोर्ट के अनुसार, पोर्टल लाइव होने के मात्र दो मिनट के भीतर लगभग 15 लाख एक्सेस रिक्वेस्ट दर्ज की गईं। सिस्टम ने तुरंत सक्रिय होकर 1 लाख से अधिक संदिग्ध प्रयासों को ब्लॉक कर दिया।

    यह घटना दिखाती है कि डिजिटल सिस्टम पर साइबर हमलों का खतरा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन मजबूत सुरक्षा ढांचे के चलते बड़े संस्थान भी ऐसे हमलों से सुरक्षित रह सकते हैं।

  • NEET अभ्यर्थी की मौत पर सियासी और सामाजिक चिंता, परिवार से राहुल गांधी की बातचीत चर्चा में

    NEET अभ्यर्थी की मौत पर सियासी और सामाजिक चिंता, परिवार से राहुल गांधी की बातचीत चर्चा में


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के मऊगंज की NEET अभ्यर्थी आकांक्षा चतुर्वेदी की आत्महत्या का मामला एक बार फिर चर्चा में है। कथित पेपर लीक से निराश होकर जान देने वाली छात्रा के परिवार से कांग्रेस सांसद Rahul Gandhi ने फोन पर बात की और संवेदना व्यक्त की। बातचीत के दौरान आकांक्षा की मां भावुक हो गईं और कहा कि उनकी बेटी ही परिवार का सबसे बड़ा सहारा थी।

    “आप तो देश की रक्षा कर रहे हैं, मेरा बच्चा वापस नहीं आएगा”
    शुक्रवार को हुई इस बातचीत का वीडियो Vikrant Bhuria ने सोशल मीडिया पर साझा किया। फोन पर राहुल गांधी ने आकांक्षा की मां से कहा कि उन्होंने छात्रा की चिट्ठी पढ़ी है और उसे पढ़कर उन्हें बहुत दुख हुआ। उन्होंने परिवार से पूछा कि यदि उनके लायक कोई मदद हो तो वे जरूर बताएं। इस पर आकांक्षा की मां ने भावुक स्वर में कहा, “आप तो खुद देश की रक्षा कर रहे हैं। मेरा तो जो गया, वह लौटकर नहीं आएगा।”

    “उसकी कोई गलती नहीं थी, उसने सिर्फ पढ़ाई की थी”
    बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि आकांक्षा की कोई गलती नहीं थी। उसने केवल मेहनत से पढ़ाई की थी और डॉक्टर बनने का सपना देखा था। उन्होंने छात्रा के परिवार द्वारा पढ़ाई के लिए लिए गए कर्ज का भी जिक्र किया। आकांक्षा की मां ने कहा कि उनकी बेटी ने वर्षों मेहनत की थी और उसे भरोसा था कि अच्छे अंक आने पर वह डॉक्टर बन जाएगी। उनका कहना था कि यदि पेपर लीक जैसी स्थिति नहीं होती तो शायद यह दुखद घटना नहीं होती। उन्होंने कहा, “हमारा तो कोई दूसरा सहारा भी नहीं है। वही हमारे परिवार की उम्मीद थी। उसके भरोसे ही हम जीवन जी रहे थे।”

    सुसाइड नोट में झलका था टूटे सपनों का दर्द
    राहुल गांधी ने बातचीत में आकांक्षा के सुसाइड नोट का जिक्र करते हुए कहा कि छात्रा को यह महसूस होने लगा था कि परिवार ने उसकी पढ़ाई के लिए जो कर्ज लिया, वह सब व्यर्थ हो गया। उन्होंने कहा कि यह सोचकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह कितने मानसिक दबाव और दुख से गुजर रही होगी। आकांक्षा की मां ने बताया कि उनकी बेटी को विश्वास था कि पहले प्रयास में उसका चयन हो सकता था, लेकिन कथित पेपर लीक विवाद के बाद उसका आत्मविश्वास पूरी तरह टूट गया था।

    पिता की बीमारी ने बढ़ाई थी परिवार की चिंता
    बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने आकांक्षा के पिता के स्वास्थ्य के बारे में भी पूछा। परिवार ने बताया कि उन्हें पहले दो बार गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो चुकी हैं और वे आंशिक रूप से लकवाग्रस्त हैं। उनका एक हाथ ठीक से काम नहीं करता और वे दैनिक कार्यों के लिए भी दूसरों पर निर्भर हैं। परिवार के अनुसार आकांक्षा घर की सबसे बड़ी संतान थी और भविष्य में परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी संभालने की उम्मीद उसी से थी।

    आर्थिक सहायता का भी मिला आश्वासन
    बातचीत के अंत में राहुल गांधी ने कहा कि यदि आगे किसी प्रकार की सहायता की जरूरत हो तो परिवार कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI के माध्यम से संपर्क कर सकता है। इस दौरान परिवार के एक सदस्य ने बताया कि आर्थिक सहायता के रूप में कुछ राशि पहले ही प्राप्त हो चुकी है और अतिरिक्त मदद भी मिलने वाली है।

    आकांक्षा चतुर्वेदी का मामला NEET परीक्षा प्रणाली, छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव और पेपर लीक जैसे विवादों को लेकर फिर से बहस का विषय बन गया है। छात्रा के सुसाइड नोट और परिवार की स्थिति ने इस घटना को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

  • “NEET दोबारा करा लोगे, बेटी लौटा पाओगे?”-परिवार का दर्द और राहुल के बयान पर मचा राजनीतिक घमासान

    “NEET दोबारा करा लोगे, बेटी लौटा पाओगे?”-परिवार का दर्द और राहुल के बयान पर मचा राजनीतिक घमासान


    नई दिल्ली: NEET परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक और अनिश्चितता के बीच नागपुर में आत्महत्या करने वाली मऊगंज की छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। परिवार गहरे सदमे में है और मां की आंखों से निकलता हर शब्द दर्द की कहानी बयां कर रहा है। मां नीलम चतुर्वेदी का कहना है, “पेपर तो दोबारा करा लोगे, लेकिन मेरी बेटी को लौटा पाओगे क्या?”

    घटना के बाद मामला केवल पारिवारिक त्रासदी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने आकांक्षा की मौत को सिस्टम की विफलता बताया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पेपर लीक और परीक्षा में अनिश्चितता ने छात्रा के भविष्य और मानसिक स्थिति पर गंभीर असर डाला, जिससे यह दुखद कदम उठाना पड़ा।

    राहुल गांधी का सरकार पर हमला, BJP ने किया पलटवार
    राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा कि यह घटना केवल आत्महत्या नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता का परिणाम है। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों पर भी सवाल उठाए। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए राहुल गांधी पर “प्रोपेगेंडा फैलाने” का आरोप लगाया। बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि विपक्ष भय और भ्रम फैलाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है। इस बयानबाजी के बीच मामला लगातार गरमाता जा रहा है और दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

    परिवार का दर्द: कर्ज, संघर्ष और टूटे सपने
    उधर मऊगंज स्थित परिवार में मातम पसरा है। परिवार के अनुसार आकांक्षा बेहद मेधावी छात्रा थी और डॉक्टर बनने का सपना देखती थी। पिता ने बेटी की पढ़ाई के लिए 15–20 लाख रुपये तक का कर्ज लिया था। आर्थिक दबाव और भविष्य की उम्मीदों के बीच परिवार संघर्ष कर रहा था। मां ने रोते हुए बताया कि परिवार पहले ही भारी कर्ज में डूबा हुआ था, और बेटी पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा था। पिता की तबीयत भी खराब बताई जा रही है और वे अस्पताल में भर्ती हैं।

    डिप्रेशन और तनाव की स्थिति ने बढ़ाई चिंता
    परिजनों के अनुसार, पेपर लीक की खबरों के बाद छात्रा मानसिक तनाव में आ गई थी। परीक्षा परिणाम और भविष्य को लेकर अनिश्चितता ने उसकी मानसिक स्थिति को प्रभावित किया। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से वह चुपचाप रहने लगी थी और उसने खाना-पीना भी कम कर दिया था।

    गांव में मातम और डर का माहौल
    इस घटना के बाद गांव में भी गहरा असर देखने को मिल रहा है। लोग अपनी बेटियों को बाहर पढ़ाई के लिए भेजने को लेकर चिंतित हैं। ग्रामीणों में डर और असुरक्षा का माहौल है।

    आकांक्षा चतुर्वेदी की मौत ने न केवल एक परिवार को तोड़ दिया है, बल्कि परीक्षा प्रणाली, मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल मामला राजनीतिक बहस और सामाजिक चिंता दोनों का केंद्र बना हुआ है।

  • CBSE 12th Result 2026: भोपाल रीजन का 79.43% रिजल्ट, देशभर में 85.20% पासिंग-जानें कौन रहा सबसे आगे

    CBSE 12th Result 2026: भोपाल रीजन का 79.43% रिजल्ट, देशभर में 85.20% पासिंग-जानें कौन रहा सबसे आगे


    नई दिल्ली। भोपाल  केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने बुधवार दोपहर 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट घोषित कर दिया, जिसके साथ लाखों छात्रों का इंतजार खत्म हो गया। इस बार देशभर में कुल पास प्रतिशत 85.20% रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3.19% कम है।
    भोपाल रीजन के छात्रों के लिए इस बार परिणाम मिश्रित रहा। यहां कुल 79.43% छात्र पास हुए, जो राष्ट्रीय औसत से 5.77% कम है। भोपाल रीजन में मध्यप्रदेश सहित हजारों छात्रों ने परीक्षा दी थी, लेकिन प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह अंतर विभिन्न क्षेत्रों में शिक्षा संसाधनों और तैयारी स्तर की असमानता को दर्शाता है।
    देशभर के क्षेत्रों में तिरुवनंतपुरम (त्रिवेंद्रम) रीजन ने सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए 95.62% पास प्रतिशत हासिल किया। वहीं प्रयागराज रीजन इस बार सबसे कमजोर रहा, जहां केवल 72.43% छात्र सफल हो सके। दिल्ली वेस्ट और दिल्ली ईस्ट ने भी मजबूत प्रदर्शन करते हुए 91% से अधिक परिणाम दर्ज किए।
    इस बार के रिजल्ट में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रदर्शन में गिरावट देखी गई है। 2025 की तुलना में इस वर्ष कुल पास प्रतिशत कम रहा, जिससे शिक्षा विशेषज्ञों में चर्चा शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि परीक्षा पैटर्न की कठिनाई, मूल्यांकन मानकों और प्रतिस्पर्धा में वृद्धि इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।
    CBSE ने इस बार भी रिजल्ट डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जारी किया है। छात्र अपने रोल नंबर, स्कूल नंबर और जन्मतिथि की मदद से वेबसाइट, DigiLocker और UMANG ऐप पर परिणाम देख सकते हैं। भारी ट्रैफिक के कारण बोर्ड ने छात्रों को वैकल्पिक माध्यमों से रिजल्ट देखने की सलाह दी है।
    जो छात्र एक या अधिक विषयों में असफल रहे हैं, उन्हें कंपार्टमेंट परीक्षा का मौका मिलेगा, जिससे उनका वर्ष खराब नहीं होगा। इसके अलावा छात्र वेरिफिकेशन, री-इवैल्यूएशन और उत्तर पुस्तिका की कॉपी भी प्राप्त कर सकते हैं।
    इस बार मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल सिस्टम के तहत की गई, जिससे कॉपियों की जांच अधिक तेज और पारदर्शी रही। परीक्षा 17 फरवरी से 10 अप्रैल 2026 के बीच देशभर में एक ही शिफ्ट में आयोजित की गई थी।
    अब रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र आगे की पढ़ाई और करियर विकल्पों की ओर बढ़ेंगे, जबकि बोर्ड ने सभी को सही समय पर आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने की सलाह दी है।

  • CBSE 12वीं परिणाम 2026: रिजल्ट कभी भी जारी हो सकता है, MP के छात्रों में बढ़ी बेचैनी

    CBSE 12वीं परिणाम 2026: रिजल्ट कभी भी जारी हो सकता है, MP के छात्रों में बढ़ी बेचैनी


    नई दिल्ली। सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम कभी भी घोषित किया जा सकता है, जिससे देशभर के लाखों छात्रों की धड़कनें बढ़ गई हैं। इस परीक्षा में मध्यप्रदेश से कुल 80,454 छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे, जिनमें अकेले भोपाल से 9,399 विद्यार्थी परीक्षा में बैठे थे।

    परीक्षा का आयोजन 17 फरवरी से 10 अप्रैल 2026 के बीच देशभर में एक ही शिफ्ट में किया गया था। अब परीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम परिणाम की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है।

    इस साल केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Central Board of Secondary Education) ने मूल्यांकन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाया है। कॉपियों की जांच से लेकर अंकों के सत्यापन तक सभी काम ऑनलाइन सिस्टम के जरिए किए गए हैं, जिससे परिणाम प्रक्रिया को अधिक तेज और पारदर्शी बनाया गया है।

    रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र इसे आधिकारिक वेबसाइट के अलावा डिजिलॉकर और उमंग ऐप जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी देख सकेंगे। छात्र अपने रोल नंबर, स्कूल नंबर, एडमिट कार्ड आईडी और जन्मतिथि की मदद से लॉगिन कर अपनी मार्कशीट डाउनलोड कर पाएंगे।

    बोर्ड ने रिजल्ट से पहले सभी अंकों का अंतिम सत्यापन भी पूरा कर लिया है, ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि की संभावना न रहे। विभिन्न परीक्षा केंद्रों से प्राप्त डेटा का मिलान कर अंतिम परिणाम तैयार किया गया है।

    छात्रों को सलाह दी गई है कि रिजल्ट देखने से पहले अपने सभी जरूरी विवरण तैयार रखें, ताकि लॉगिन के समय किसी तरह की परेशानी न हो।

    रिजल्ट जारी होने के बाद छात्रों के लिए आगे की पढ़ाई और करियर की दिशा तय करने का अहम समय होगा। कई छात्र उच्च शिक्षा की ओर कदम बढ़ाएंगे, तो कई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटेंगे।

  • MP में शिक्षक भर्ती को मिली रफ्तार, 12 मई से शुरू होगी चॉइस फिलिंग

    MP में शिक्षक भर्ती को मिली रफ्तार, 12 मई से शुरू होगी चॉइस फिलिंग


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती का लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। भोपाल में लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) कार्यालय के सामने हुए प्रदर्शन के बाद राज्य सरकार ने 4000 माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षकों के नियुक्ति आदेश जारी कर दिए हैं। अब चयनित अभ्यर्थियों को 12 मई से 18 मई 2026 के बीच ऑनलाइन माध्यम से स्कूलों का चयन (चॉइस फिलिंग) करना होगा।

    उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने जानकारी दी कि पूरी भर्ती प्रक्रिया पारदर्शिता और नियमों के अनुसार की जा रही है। सरकार का उद्देश्य योग्य अभ्यर्थियों को समय पर नियुक्ति देना है। वहीं स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने भी कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह निर्धारित नियमों के तहत संचालित हो रही है और किसी तरह की अनियमितता की गुंजाइश नहीं है।

    यह भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2022 में शुरू हुई थी। इसके बाद 2023 में पात्रता परीक्षा आयोजित की गई और अप्रैल 2025 में चयन परीक्षा ली गई। लंबे इंतजार के बाद सितंबर 2025 में परिणाम घोषित किया गया। हालांकि करीब 10,700 अभ्यर्थियों की चयन सूची जारी होने के बावजूद पिछले नौ महीनों से नियुक्ति प्रक्रिया अटकी हुई थी, जिससे उम्मीदवारों में नाराजगी बढ़ रही थी।

    भोपाल में हाल ही में हुए प्रदर्शन के बाद सरकार ने प्रक्रिया को तेज करते हुए नियुक्ति आदेश जारी किए। इसके बाद अब चयनित अभ्यर्थियों को ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्कूलों का चयन करना होगा। उन्हें अपने संबंधित जिले या संभाग के सभी स्कूलों को प्राथमिकता क्रम में भरना अनिवार्य किया गया है।

    विभाग ने स्पष्ट किया है कि चॉइस फिलिंग केवल तभी पूरी मानी जाएगी जब पोर्टल शुल्क जमा कर दिया जाएगा। यदि कोई अभ्यर्थी निर्धारित समय सीमा में स्कूल विकल्प नहीं भरता है, तो उसे बची हुई रिक्तियों के आधार पर स्कूल आवंटित किया जाएगा, जिससे मनचाहा स्कूल मिलने की संभावना कम हो जाएगी।

    इसके अलावा, दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया भी चल रही है। सभी चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच के बाद ही उनकी अंतिम पात्रता तय होगी और उसके आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।

    विभाग ने अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि वे नियमित रूप से एमपी ऑनलाइन के आधिकारिक पोर्टल पर नजर बनाए रखें, क्योंकि सभी महत्वपूर्ण अपडेट और निर्देश वहीं जारी किए जाएंगे। विशेष पदों जैसे संगीत, नृत्य और खेल विषयों के लिए अलग से सूची जारी की जाएगी।

    सरकार का कहना है कि यह भर्ती प्रक्रिया राज्य में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और जल्द ही सभी चयनित अभ्यर्थियों को अंतिम नियुक्ति आदेश भी जारी कर दिए जाएंगे।

  • झाबुआ में बनेगा DAVV का मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज में अस्थायी संचालन की तैयारी

    झाबुआ में बनेगा DAVV का मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज में अस्थायी संचालन की तैयारी


    नई दिल्ली। इंदौर स्थित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय अब आदिवासी बहुल झाबुआ जिले में अपना मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विश्वविद्यालय को इसके लिए राज्य सरकार द्वारा भूमि आवंटित कर दी गई है, जिससे परियोजना को औपचारिक रूप से मंजूरी मिल चुकी है।

    इंजीनियरिंग कॉलेज में अस्थायी संचालन की योजना

    कुलगुरु प्रोफेसर राकेश सिंघई के अनुसार, जब तक मेडिकल कॉलेज का नया भवन तैयार नहीं होता, तब तक अस्थायी रूप से इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में ही मेडिकल शिक्षा शुरू करने का प्रस्ताव है। इसके लिए विश्वविद्यालय ने अनुमति के लिए आवेदन किया है और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) से मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है।

     झाबुआ जिला अस्पताल बनेगा टीचिंग हॉस्पिटल

    योजना के तहत झाबुआ जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज के टीचिंग हॉस्पिटल के रूप में विकसित किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार अस्पताल में लगभग 250 बेड पहले से उपलब्ध हैं, और इसे 300 बेड क्षमता तक बढ़ाया जाएगा, जो 100 मेडिकल सीटों के लिए आवश्यक मानक है।

    परियोजना की लागत और विकास योजना

    मेडिकल कॉलेज की आधारभूत संरचना तैयार करने में शुरुआती तौर पर करीब 350 से 400 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। हालांकि अस्पताल पहले से उपलब्ध होने के कारण लागत अपेक्षाकृत नियंत्रित रहेगी।

    शासन की मंजूरी पर टिकी आगे की प्रक्रिया

    विश्वविद्यालय ने उम्मीद जताई है कि इस महीने के भीतर अनुमति से जुड़ा निर्णय आ सकता है। यदि मंजूरी मिलती है तो झाबुआ में मेडिकल शिक्षा की शुरुआत अस्थायी ढांचे से ही कर दी जाएगी।

     आदिवासी क्षेत्र के लिए बड़ा बदलाव

    झाबुआ जैसे आदिवासी क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज की स्थापना से न सिर्फ चिकित्सा शिक्षा का विस्तार होगा, बल्कि स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं में भी बड़ा सुधार आने की उम्मीद है।

    शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों में नई शुरुआत

    देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की यह पहल मध्यप्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में उच्च चिकित्सा शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

  • MP बोर्ड की बड़ी राहत: द्वितीय परीक्षा के लिए फॉर्म भरने की डेट बढ़ी, फेल के साथ पास छात्र भी दे सकेंगे एग्जाम

    MP बोर्ड की बड़ी राहत: द्वितीय परीक्षा के लिए फॉर्म भरने की डेट बढ़ी, फेल के साथ पास छात्र भी दे सकेंगे एग्जाम


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में छात्रों के लिए बड़ी राहत की खबर है। माध्यमिक शिक्षा मंडल ने हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी की द्वितीय परीक्षा के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। अब विद्यार्थी 4 मई 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। पहले यह तारीख 26 अप्रैल तय थी।

    यह आवेदन प्रक्रिया माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्य प्रदेश के तहत एमपी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पूरी की जा रही है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि अन्य सभी नियम पहले की तरह ही लागू रहेंगे।

    इस साल बोर्ड ने बड़ा बदलाव करते हुए पुरानी पूरक परीक्षा प्रणाली को समाप्त कर दिया है और उसकी जगह ‘द्वितीय परीक्षा’ प्रणाली लागू की है। इस नई व्यवस्था में न सिर्फ फेल छात्र शामिल हो सकेंगे, बल्कि पास छात्र भी अपने अंक सुधारने के लिए परीक्षा दे सकेंगे।

    नई व्यवस्था के अनुसार, जो छात्र किसी विषय में फेल हैं, उन्हें उस विषय की परीक्षा देनी होगी। वहीं पास छात्र भी बेहतर अंक प्राप्त करने के लिए इच्छानुसार किसी भी विषय में शामिल हो सकते हैं। इससे छात्रों को अपने परिणाम सुधारने का एक अतिरिक्त अवसर मिलेगा।

    परीक्षा कार्यक्रम के अनुसार, 12वीं की द्वितीय परीक्षा 7 मई से 25 मई 2026 तक और 10वीं की परीक्षा 7 मई से 19 मई 2026 के बीच आयोजित की जाएगी। सभी परीक्षाएं निर्धारित केंद्रों पर ही होंगी।

    बोर्ड ने यह भी साफ किया है कि मुख्य परीक्षा और द्वितीय परीक्षा दोनों में से जो भी बेहतर अंक होंगे, वही अंतिम परिणाम में मान्य किए जाएंगे। इससे छात्रों पर दबाव कम होगा और उन्हें बेहतर प्रदर्शन का अवसर मिलेगा।

    आवेदन करने के लिए छात्रों को परिणाम जारी होने के बाद सात दिनों के भीतर फॉर्म भरना होगा। प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी और इसके लिए निर्धारित शुल्क भी जमा करना होगा। अधिक जानकारी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।

  • एमपी अतिथि शिक्षक भर्ती 2026 शुरू, 2 मई से ऑनलाइन आवेदन, 10 हजार पदों पर बड़ा मौका

    एमपी अतिथि शिक्षक भर्ती 2026 शुरू, 2 मई से ऑनलाइन आवेदन, 10 हजार पदों पर बड़ा मौका

    मध्यप्रदेश में शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी एक महत्वपूर्ण भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत होने जा रही है, जो हजारों बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा अवसर लेकर आई है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए अतिथि शिक्षक भर्ती 2 मई से शुरू की जाएगी, जिसमें पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन माध्यम से संचालित किया जाएगा। इसका उद्देश्य चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और व्यवस्थित बनाना है।

    इस भर्ती अभियान के तहत करीब 10 हजार पदों को भरने की योजना बनाई गई है। ये पद राज्य के विभिन्न प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में रिक्त हैं, जहां लंबे समय से शिक्षकों की कमी महसूस की जा रही थी। इन नियुक्तियों से न केवल स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी।

    इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पूरा किया जाएगा, जहां उम्मीदवारों को पहले रजिस्ट्रेशन करना होगा। जो अभ्यर्थी पहले से पंजीकृत हैं, उन्हें अपनी प्रोफाइल अपडेट करनी होगी। इसके बाद सभी आवश्यक शैक्षणिक और अन्य दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करने होंगे। यह व्यवस्था इसलिए लागू की गई है ताकि चयन प्रक्रिया में किसी प्रकार की गड़बड़ी या पारदर्शिता की कमी न रहे।

    सबसे महत्वपूर्ण नियम यह रखा गया है कि बिना दस्तावेज सत्यापन के किसी भी उम्मीदवार का स्कोर कार्ड जारी नहीं किया जाएगा। उम्मीदवारों को अपने दस्तावेज संबंधित अधिकारियों के पास जाकर सत्यापित कराने होंगे। सत्यापन पूरा होने के बाद ही स्कोर कार्ड तैयार किया जाएगा, जो आगे मेरिट सूची का आधार बनेगा।

    यदि किसी भी चरण में दस्तावेजों में त्रुटि या गलत जानकारी पाई जाती है, तो आवेदन को रद्द किया जा सकता है। इसलिए सभी उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे अपनी जानकारी सावधानीपूर्वक और सही तरीके से प्रस्तुत करें। यह पूरी प्रक्रिया मेरिट आधारित होगी, जिसमें शैक्षणिक योग्यता, प्रशिक्षण और अन्य आवश्यक अंकों के आधार पर चयन किया जाएगा।

    इस भर्ती प्रक्रिया में समय सीमा का भी विशेष ध्यान रखा गया है। निर्धारित तारीखों के बाद किसी भी प्रकार का आवेदन या संशोधन स्वीकार नहीं किया जाएगा। इससे पूरी व्यवस्था को समय पर और सुचारू रूप से पूरा करने में मदद मिलेगी।

    यह भर्ती न केवल शिक्षा विभाग में खाली पदों को भरने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह युवाओं के लिए रोजगार का एक महत्वपूर्ण अवसर भी है। डिजिटल प्रक्रिया और मेरिट आधारित चयन इसे और अधिक निष्पक्ष और प्रभावी बनाते हैं, जिससे योग्य उम्मीदवारों को सही अवसर मिल सकेगा।