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  • यूपी: शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने मंत्री आवास घेरा, आयोग की संस्तुति लागू करने की मांग

    यूपी: शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने मंत्री आवास घेरा, आयोग की संस्तुति लागू करने की मांग

    लखनऊ। 68500 सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा-2018 में आरक्षण से जुड़ी विसंगतियों के मामले में अभ्यर्थियों ने मंगलवार को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास का घेराव कर प्रदर्शन किया। अभ्यर्थी राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग, उत्तर प्रदेश की ओर से जारी आदेश/संस्तुति को तत्काल लागू करने की मांग कर रहे थे। प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने अभ्यर्थियों को हिरासत में लेकर ईको गार्डन भेज दिया।

    आयोग की संस्तुति लागू करने की मांग
    अभ्यर्थियों का कहना है कि 68500 शिक्षक भर्ती में आरक्षण संबंधी विसंगतियों को लेकर वे लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। उनके मुताबिक, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने अभ्यर्थियों के हित में स्पष्ट आदेश/संस्तुति जारी की है, लेकिन काफी समय बीतने के बावजूद शासन और संबंधित विभाग की ओर से इसका अनुपालन नहीं किया गया।

    अभ्यर्थियों के अनुसार आयोग की संस्तुति में 150 में 60 अंक यानी 40% या उससे अधिक अंक पाने वाले ओबीसी अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण मानकर नियमानुसार नियुक्ति देने की बात कही गई है। उनका दावा है कि इससे ओबीसी के साथ दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित वर्ग के पात्र अभ्यर्थियों को भी लाभ मिलेगा।

    बोले- संवैधानिक अधिकार मांग रहे हैं
    धरने का नेतृत्व कर रहे तूफान सिंह ने कहा कि अभ्यर्थी किसी पर अहसान नहीं मांग रहे, बल्कि अपने संवैधानिक अधिकार और न्याय की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भर्ती के अभ्यर्थियों ने वर्षों तक संघर्ष किया है और आयोग के आदेश के बाद उन्हें न्याय की उम्मीद जगी है। शासन को आदेश को लंबित रखने के बजाय तत्काल अमल की दिशा में कदम उठाना चाहिए।

    दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
    अभ्यर्थियों ने आरक्षण संबंधी विसंगतियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कर जवाबदेही तय करने की भी मांग की। उनका कहना है कि केवल नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आयोग की संस्तुति के मुताबिक जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।

    सरकार के सामने रखीं ये मांगें
    – राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के आदेश/संस्तुति का तत्काल अनुपालन किया जाए।
    – 150 में 60 अंक यानी 40% अंक पाने वाले पात्र ओबीसी, दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित अभ्यर्थियों को नियमानुसार उत्तीर्ण कर नियुक्ति दी जाए।
    – आरक्षण संबंधी विसंगतियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाए।
    – आयोग की संस्तुति पर शासन की ओर से की गई कार्रवाई की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जाए।
    – पात्र अभ्यर्थियों के भविष्य को देखते हुए मामले का जल्द और न्यायपूर्ण निस्तारण किया जाए।

    अभ्यर्थियों ने कहा कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता और राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के आदेश का प्रभावी अनुपालन नहीं होता, तब तक उनका लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रहेगा। प्रदर्शन में तूफान सिंह, आशुतोष वर्मा, नवीन चौधरी, अखिल यादव, योगेश लोधी, ललिता चौधरी, कुसुम चौधरी, अनुराग पाल, विनोद प्रजापति, राम भवन साहू, शेरा, उमेश गुप्ता, रणबहादुर वर्मा, नसीम और राकेश साहनी समेत अन्य अभ्यर्थी शामिल रहे।

  • 1.21 लाख मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप के लिए 25-25 हजार रुपए, सीएम मोहन यादव बोले- सफलता को सिर पर न चढ़ाएं और असफलता से सीखकर आगे बढ़ें

    1.21 लाख मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप के लिए 25-25 हजार रुपए, सीएम मोहन यादव बोले- सफलता को सिर पर न चढ़ाएं और असफलता से सीखकर आगे बढ़ें


    भोपाल । भोपाल में आयोजित लैपटॉप वितरण कार्यक्रम मेधावी विद्यार्थियों के लिए यादगार बन गया जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक साथ 1 लाख 21 हजार से अधिक विद्यार्थियों के भविष्य को डिजिटल शिक्षा से जोड़ने की बड़ी पहल की। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 10 विद्यार्थियों को प्रतीकात्मक रूप से लैपटॉप सौंपे जबकि 1 लाख 21 हजार 804 पात्र विद्यार्थियों के बैंक खातों में लैपटॉप खरीदने के लिए 25-25 हजार रुपए की राशि ट्रांसफर की गई। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को केवल अच्छे अंक हासिल करने तक सीमित नहीं रहने बल्कि जीवन की हर चुनौती से सीखते हुए आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सफलता मिलने पर उसे सिर पर नहीं चढ़ाना चाहिए और असफलता आने पर निराश होकर रुकने के बजाय अपनी गलतियों से सीखकर नई शुरुआत करनी चाहिए। विद्यार्थियों को बड़े लक्ष्य तय करने और चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा देते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ नॉलेज और स्किल्स को मजबूत करना भी आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

    मुख्यमंत्री ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए विद्यार्थियों के सामने जीवन के बदलते दौर का उदाहरण रखा। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा भी था जब गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मिलने वाले लड्डू के लिए भी तरसना पड़ता था लेकिन आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं और सरकार विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के संसाधन उपलब्ध करा रही है। उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि आज सीखोगे तो कल कमाओगे। उनके अनुसार लैपटॉप केवल एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण नहीं बल्कि डिजिटल लर्निंग ई-लाइब्रेरी और उच्च शिक्षा के नए अवसरों तक पहुंचने का माध्यम है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने पत्थर और मूर्तिकार का उदाहरण देकर विद्यार्थियों को संघर्ष का महत्व भी समझाया। उन्होंने कहा कि जिस पत्थर में छेनी और हथौड़ी की चोट सहने की क्षमता होती है वही आगे चलकर सुंदर मूर्ति बनता है और सम्मान पाता है। जीवन की कठिनाइयां भी इंसान को इसी तरह मजबूत बनाती हैं। उन्होंने कहा कि मैदान में उतरने वाला खिलाड़ी ही हार सकता है लेकिन जीत का सपना भी वही देखता है जो मुकाबला करने का साहस रखता है।

    लैपटॉप योजना के विस्तार पर मुख्यमंत्री ने बताया कि इसकी शुरुआत कभी केवल 473 विद्यार्थियों से हुई थी लेकिन आज इसका दायरा बढ़कर 1 लाख 21 हजार से अधिक मेधावी विद्यार्थियों तक पहुंच चुका है। इस दौरान कई विद्यार्थियों ने अपने भविष्य के सपने भी साझा किए। 12वीं में 97.2 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले धीरेंद्र सिंह मुंडेला ने बताया कि वह पहले यूपीएससी की तैयारी करना चाहते हैं और आगे चलकर राजनीति में आकर देश के विकास में योगदान देना चाहते हैं। वहीं 95 प्रतिशत अंक हासिल करने वाली हिमांशी पाठक ने नौकरी करने के साथ भविष्य में अपना व्यवसाय शुरू करने और नौकरी देने वाली बनने की इच्छा जताई।

    मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि केवल डॉक्टर इंजीनियर और वकील बनने का सपना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि अच्छे किसान और योग्य राजनेता भी समाज और देश की जरूरत हैं। उन्होंने सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और प्राचार्यों की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि बेहतर मार्गदर्शन से कमजोर शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थी भी शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं।

    स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने बताया कि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों का भरोसा बढ़ा है और ड्रॉपआउट दर में लगातार कमी आई है। वर्ष 2025-26 में करीब 1.21 लाख विद्यार्थियों ने 12वीं में 75 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए हैं जबकि पिछले वर्ष यह संख्या लगभग 92 हजार थी। उन्होंने कहा कि लैपटॉप योजना से अब तक करीब 6 लाख विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं और सरकार इस योजना पर लगभग 1620 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है। साथ ही करीब 18 हजार रिक्त शिक्षक पदों पर भर्ती की तैयारी भी आगे बढ़ाई जा रही है ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का बेहतर माहौल मिल सके।

  • NEET-UG पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा, NTA एक्सपर्ट्स पेपर तैयार करते समय याद कर लेते थे सवाल

    NEET-UG पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा, NTA एक्सपर्ट्स पेपर तैयार करते समय याद कर लेते थे सवाल


    नई दिल्ली। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ा खुलासा किया है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल 94 पेज की चार्जशीट के मुताबिक, पेपर लीक की साजिश परीक्षा से कई महीने पहले ही शुरू हो गई थी। आरोप है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के पेपर तैयार करने वाले कुछ एक्सपर्ट्स ने सवालों को याद कर लिया और बाद में उन्हें पर्चियों के जरिए बाहर पहुंचाया।

    CBI ने 28 जुलाई को इस मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें NTA के तीन एक्सपर्ट्स समेत कोचिंग संचालकों, बिचौलियों और अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है।

    होटल लौटकर पर्चियों पर लिखते थे सवाल
    चार्जशीट के अनुसार, NTA कार्यालय में पेपर तैयार करने और मॉडरेशन के दौरान एक्सपर्ट्स सवाल याद कर लेते थे। इसके बाद होटल लौटने पर याद किए गए प्रश्नों और उनके विकल्पों को पर्चियों पर लिखा जाता था। संबंधित प्रश्नों को व्यवस्थित करने के लिए NCERT की किताबों में अध्याय और पैराग्राफ तक चिन्हित किए जाते थे। CBI का दावा है कि NTA कार्यालय में आने-जाने के दौरान एक्सपर्ट्स की तलाशी नहीं होती थी। उन्हें रफ वर्क के लिए सादे कागज भी दिए जाते थे। आरोप है कि एक्सपर्ट पीवी कुलकर्णी ने इन कागजों पर केमिस्ट्री के 135 प्रश्न और उनके विकल्प नोट किए। उन्होंने केमिस्ट्री पेपर का मराठी से अंग्रेजी में बैक-ट्रांसलेशन भी किया।

    कोचिंग संचालकों और बिचौलियों ने बनाया नेटवर्क
    जांच एजेंसी के मुताबिक, यह किसी एक व्यक्ति की साजिश नहीं थी। परीक्षा से कई महीने पहले ही कोचिंग संचालकों और बिचौलियों ने NTA के तीनों एक्सपर्ट्स से संपर्क किया था। बातचीत, मुलाकात और कथित पैसों के लेन-देन के जरिए पेपर लीक का नेटवर्क तैयार किया गया। इसके बाद लीक हुए सवालों को वॉट्सऐप, टेलीग्राम, PDF और तस्वीरों के माध्यम से छात्रों तक पहुंचाया गया। कुछ कोचिंग संस्थानों में छात्रों को हाथ से लिखे प्रश्नों के जरिए परीक्षा की तैयारी भी कराई गई। CBI के मुताबिक, डिजिटल सबूतों से बचने के लिए यह तरीका अपनाया गया था।

    इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और चैट से मिले सबूत
    CBI ने कहा है कि फोरेंसिक जांच, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, चैट रिकॉर्ड, बरामद दस्तावेजों और गवाहों के बयानों से पेपर लीक नेटवर्क की पुष्टि हुई। चार्जशीट में मनीषा संजय वाघमारे, धनंजय लोखंडे, शुभम मधुकर खैरनार और यश यादव को नेटवर्क की अहम कड़ी बताया गया है। जांच के दौरान एक आरोपी द्वारा कथित तौर पर लीक पेपर के बदले अपने 10वीं-12वीं के प्रमाणपत्र और ब्लैंक चेक सुरक्षा के तौर पर दिए जाने की बात भी सामने आई है।

    डॉक्टर और कोचिंग संचालक भी आरोपी
    CBI ने डॉ. अभंग प्रभु मेडिकल एकेडमी, पुणे के COO तेजस हर्षदकुमार शाह, रेणुकाई करियर सेंटर के मैनेजिंग पार्टनर शिवराज मोटेगांवकर और सिद्धिविनायक हॉस्पिटल के मालिक डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे को भी आरोपी बनाया है। जांच एजेंसी के अनुसार, NTA के बाहर से नेटवर्क संचालित करने और लीक पेपर छात्रों तक पहुंचाने में इनकी भूमिका थी। CBI ने पेपर लीक के पीछे अवैध कमाई और कुछ कोचिंग संस्थानों के परिणाम बेहतर दिखाने का उद्देश्य बताया है।

    13 आरोपियों के खाते और लॉकर फ्रीज
    CBI ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। एजेंसी ने 13 आरोपियों के बैंक खाते, बैंक लॉकर और एक डीमैट अकाउंट फ्रीज किया है। तीनों NTA एक्सपर्ट्स पर पेपर लीक, भ्रष्टाचार और लोक सेवक के तौर पर विश्वासघात समेत गंभीर आरोप लगाए गए हैं। चार्जशीट में संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत दोष सिद्ध होने पर कड़ी सजा और जुर्माने का उल्लेख किया गया है।

    पेपर लीक के बाद दोबारा हुई थी परीक्षा
    NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित हुई थी। पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई और 21 जून को दोबारा परीक्षा कराई गई। इस पूरे विवाद ने परीक्षा व्यवस्था और पेपर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

  • NEET पेपर लीक पर मध्य प्रदेश में आक्रोश 20 जिलों में प्रदर्शन इंदौर से उठी सबसे बुलंद आवाज

    NEET पेपर लीक पर मध्य प्रदेश में आक्रोश 20 जिलों में प्रदर्शन इंदौर से उठी सबसे बुलंद आवाज


    भोपाल । NEET पेपर लीक और दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में मध्य प्रदेश के 20 से अधिक जिलों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। सबसे बड़ा आंदोलन इंदौर के टंट्या भील चौराहे पर चल रहा है, जहां 30 जून को सिर्फ 5 छात्रों से शुरू हुआ धरना अब हजारों लोगों का आंदोलन बन चुका है।

    इंदौर में शनिवार को एक छात्रा नीम की पत्तियां लेकर प्रदर्शन में पहुंची। उसने कहा कि जिस तरह नीम बैक्टीरिया खत्म करती है, उसी तरह शिक्षा व्यवस्था में फैली गड़बड़ियों को भी साफ करने की जरूरत है। लगातार बारिश के बावजूद छात्र पिछले 25 दिनों से धरने पर डटे हुए हैं। आंदोलन स्थल पर पुलिस ड्रोन से निगरानी कर रही है।

    भोपाल के बोर्ड ऑफिस चौराहे पर भी छात्रों का धरना जारी है। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

    ग्वालियर में आंदोलन को लेकर समर्थक और विरोधी आमने-सामने आ गए, जबकि जबलपुर में “कॉकरोच जनता पार्टी” के विरोध में “लाल हिट जनता पार्टी” ने प्रदर्शन किया। संगठन ने कहा कि छात्रों की मांगें उचित हैं, लेकिन विरोध का तरीका सही नहीं है।

    धार, मऊगंज, नर्मदापुरम, झाबुआ, सिंगरौली, भिंड, टीकमगढ़, शाजापुर, सतना, सीधी, रतलाम, रीवा, बैतूल, उमरिया, बड़वानी और श्योपुर सहित कई जिलों में भी रैलियां, धरने और ज्ञापन सौंपे गए। कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हुई तथा कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।

    प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में NEET पेपर लीक की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, परीक्षा प्रणाली में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग शामिल है। वहीं, विभिन्न छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों ने भी आंदोलन को अपना समर्थन दिया है, जिससे यह विरोध अब राज्यव्यापी रूप ले चुका है।

  • NEET आंदोलन पर टूटी बॉलीवुड की चुप्पी, सलमान से आलिया तक कई सितारों ने छात्रों का किया समर्थन

    NEET आंदोलन पर टूटी बॉलीवुड की चुप्पी, सलमान से आलिया तक कई सितारों ने छात्रों का किया समर्थन



    नई दिल्ली । NEET पेपर लीक को लेकर देशभर में जारी छात्र आंदोलन के बीच अब बॉलीवुड की चुप्पी भी टूटती नजर आ रही है। शुरुआत में जहां फिल्म उद्योग के चुनिंदा कलाकार ही इस मुद्दे पर अपनी राय रख रहे थे वहीं अब कई बड़े सितारे खुलकर छात्रों के समर्थन में सामने आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर इसे लेकर चर्चा तेज है कि क्या सलमान खान की प्रतिक्रिया के बाद बॉलीवुड के अन्य कलाकारों ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी या फिर यह छात्रों के बढ़ते आंदोलन का असर है।

    सबसे पहले अभिनेता सलमान खान ने NEET पेपर लीक को गंभीर मुद्दा बताते हुए छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और भरोसा कायम रहना बेहद जरूरी है। बाद में उन्होंने छात्रों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की और सरकार की कार्रवाई पर भरोसा जताते हुए आंदोलन समाप्त करने का भी आग्रह किया।

    सलमान खान की प्रतिक्रिया के बाद अभिनेत्री आलिया भट्ट ने भी छात्रों के समर्थन में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि हर छात्र के पीछे एक सपना और एक परिवार की उम्मीद जुड़ी होती है। उनके अनुसार नई पीढ़ी की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का विश्वास बनाए रखना जरूरी है।

    इसके अलावा कई अन्य कलाकारों ने भी आंदोलन को लेकर अपनी राय सार्वजनिक की। रिपोर्टों के अनुसार शबाना आजमी हुमा कुरैशी और अन्य फिल्मी हस्तियों ने भी छात्रों के साथ एकजुटता जताते हुए निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग की। कुछ कलाकारों ने यह भी कहा कि शिक्षा जैसे संवेदनशील विषय को राजनीतिक बहस से अलग रखते हुए छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

    फिल्म जगत के कई लोगों का मानना है कि छात्रों का शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक अधिकार है और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। वहीं कुछ कलाकारों ने यह भी अपील की कि आंदोलन का उद्देश्य शिक्षा सुधार बना रहे और किसी भी तरह की हिंसा या भटकाव से बचा जाए।

    सोशल मीडिया पर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग मान रहे हैं कि सलमान खान की टिप्पणी के बाद बॉलीवुड के अन्य सितारों का भी इस मुद्दे पर खुलकर सामने आना शुरू हुआ है जबकि कुछ का कहना है कि लगातार बढ़ते छात्र आंदोलन और जनसमर्थन ने कलाकारों को अपनी राय रखने के लिए प्रेरित किया। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है कि किसी एक अभिनेता की प्रतिक्रिया ही बाकी सितारों के बोलने का कारण बनी।

    फिलहाल NEET पेपर लीक विवाद और उससे जुड़े विरोध प्रदर्शन राष्ट्रीय बहस का विषय बने हुए हैं। छात्रों की मांग है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इसी बीच फिल्म जगत से मिल रहे समर्थन ने इस मुद्दे को और अधिक चर्चा में ला दिया है।

  • एमपी में मिड डे मील योजना पर घोटाले की आशंका 74 हजार रसोइयों के रिकॉर्ड जांच के दायरे में

    एमपी में मिड डे मील योजना पर घोटाले की आशंका 74 हजार रसोइयों के रिकॉर्ड जांच के दायरे में


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में स्कूली बच्चों को मिलने वाले मिड डे मील की व्यवस्था एक बड़े सवालों के घेरे में आ गई है। प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत रसोइयों और सहायकों के मानदेय भुगतान में गंभीर अनियमितताओं की आशंका सामने आने के बाद राज्य सरकार ने व्यापक जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। शुरुआती समीक्षा में पता चला है कि हजारों मामलों में रसोइयों के नाम और पते तो सही दर्ज हैं लेकिन उनके बैंक खातों की जगह किसी दूसरे व्यक्ति के खाते में मानदेय भेजा जा रहा है। इस खुलासे ने करोड़ों रुपये के संभावित फर्जीवाड़े की आशंका को जन्म दे दिया है।

    प्रदेशभर में संचालित इस योजना के तहत हर महीने लगभग 20 करोड़ रुपये रसोइयों और सहायकों के मानदेय के रूप में वितरित किए जाते हैं। योजना के पोर्टल की समीक्षा के दौरान 74 हजार से अधिक रसोइयों और सहायकों के पंजीयन तथा भुगतान संबंधी रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियां सामने आईं। इसके बाद सरकार ने सभी जिलों के कलेक्टरों और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को तत्काल जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

    सरकार ने सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को 20 जुलाई 2026 तक रसोइयों और सहायकों का अनिवार्य सत्यापन पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इस प्रक्रिया के तहत प्रत्येक कर्मचारी का ई केवाईसी समग्र आईडी और बैंक खाते का मिलान किया जाएगा। सत्यापन पूरा होने के बाद ही संबंधित जानकारी पोर्टल पर अपडेट होगी और उसके बाद ही मानदेय का भुगतान किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे फर्जी खातों में जाने वाले भुगतान पर पूरी तरह रोक लगाई जा सकेगी।

    जांच प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए विकासखंड स्तर पर ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे सभी रिकॉर्ड का भौतिक सत्यापन करेंगे और यदि किसी भी स्तर पर डुप्लीकेट या फर्जी पंजीयन मिलता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पूरी प्रक्रिया की लगातार मॉनिटरिंग और समीक्षा भी की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियां दोबारा सामने न आएं।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी स्कूल में निर्धारित संख्या से अधिक रसोइयों का पंजीयन पाया जाता है तो अतिरिक्त कर्मचारियों के मानदेय का भुगतान शासन नहीं करेगा। ऐसी स्थिति में पूरी जिम्मेदारी संबंधित क्रियान्वयन एजेंसी की होगी। इससे अनावश्यक और फर्जी भुगतान पर रोक लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

    अस्थायी एवं आउटसोर्स कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने इस मामले को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए कहा कि पिछले करीब 20 वर्षों से यह योजना संचालित हो रही है लेकिन आज तक सरकार के पास रसोइयों और सहायकों का पूरी तरह प्रमाणित और अद्यतन रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होना चिंता का विषय है। उनके अनुसार यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि संभावित भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करता है जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

    पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ने प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के पोर्टल को एजुकेशन पोर्टल 3.0 से भी जोड़ दिया है। अब सभी प्रधानाध्यापक केवल आधिकारिक लॉगिन आईडी और पासवर्ड के माध्यम से ही पोर्टल का उपयोग कर सकेंगे। इसी तरह ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर के लिए भी अधिकृत लॉगिन अनिवार्य कर दिया गया है ताकि किसी भी प्रकार की अनधिकृत एंट्री या बदलाव की संभावना समाप्त हो सके।

    सरकार का मानना है कि सत्यापन अभियान पूरा होने के बाद योजना का पूरा भुगतान तंत्र अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगा। यदि जांच में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा साबित होता है तो संबंधित दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जा सकती है। इस अभियान के नतीजों पर अब पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है।

  • महोबा: स्मार्ट क्लास में अश्लील भोजपुरी गाना चलाने का आरोप, हेडमास्टर निलंबित, जांच में शिकायतें सही मिलीं

    महोबा: स्मार्ट क्लास में अश्लील भोजपुरी गाना चलाने का आरोप, हेडमास्टर निलंबित, जांच में शिकायतें सही मिलीं

    महोबा। उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में स्मार्ट क्लास की एलईडी स्क्रीन पर कथित रूप से अश्लील भोजपुरी गीत चलाने और अनुचित आचरण का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने जांच कराई, जिसमें आरोपों की पुष्टि होने पर हेडमास्टर को निलंबित कर दिया गया।

    यह मामला खरेला क्षेत्र के टिकरी प्राथमिक विद्यालय का है। ग्रामीणों की शिकायत के आधार पर की गई जांच के बाद विभाग ने आरोपी हेडमास्टर रमेश चंद्र के खिलाफ कार्रवाई की है। साथ ही अन्य विभागीय कार्रवाई के लिए भी संस्तुति की गई है।

    स्कूल में कथित अनुचित हरकत का वीडियो वायरल
    जानकारी के अनुसार, जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित टिकरी प्राथमिक विद्यालय में रमेश चंद्र पिछले एक वर्ष से प्रधानाध्यापक के पद पर तैनात हैं।

    ग्रामीणों का आरोप है कि 8 जुलाई को विद्यालय की छुट्टी के बाद वह शाम करीब 4 बजे स्कूल लौटे। उनके नशे की हालत में होने का आरोप लगाया गया है। शिकायत के मुताबिक, उन्होंने स्मार्ट क्लास में लगी डिजिटल एलईडी स्क्रीन पर अश्लील भोजपुरी गीत चला दिए और कक्षा की बेंच पर लेट गए। तेज आवाज में गीत बजते रहे और वह वहीं आराम करते रहे।

    ग्रामीणों का कहना है कि कई बार आवाज देने के बावजूद उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इसके बाद स्थानीय लोगों ने घटना का वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

    ग्रामीणों ने लगाए कई गंभीर आरोप
    ग्रामीणों ने बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) राहुल मिश्रा को फोन पर शिकायत करने के साथ लिखित शिकायत भी सौंपी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि हेडमास्टर अक्सर विद्यालय परिसर में ही रहते हैं, नशे की हालत में दिखाई देते हैं और बच्चों के सामने अनुचित वेशभूषा में घूमते हैं। शिकायत में अभद्र भाषा का प्रयोग करने, विद्यालय परिसर में रात के समय शराब पार्टी होने और विरोध करने वालों को धमकाने जैसे आरोप भी लगाए गए।

    जांच के बाद हुई कार्रवाई
    बीएसए राहुल मिश्रा ने बताया कि शिकायत और वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच कराई गई। उन्होंने कहा कि विद्यालय परिसर में इस तरह का व्यवहार पूरी तरह अनुचित है।

    खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) अश्वनी यादव ने बताया कि जांच के दौरान वायरल वीडियो और शिकायतों में लगाए गए आरोप सही पाए गए। जांच रिपोर्ट बीएसए को सौंप दी गई, जिसके आधार पर हेडमास्टर रमेश चंद्र को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही आगे की विभागीय कार्रवाई की भी संस्तुति की गई है।

  • देशविरोधी कंटेंट पर सरकार का शिकंजा स्कूलों और कोचिंग सेंटरों की किताबों की होगी स्क्रीनिंग

    देशविरोधी कंटेंट पर सरकार का शिकंजा स्कूलों और कोचिंग सेंटरों की किताबों की होगी स्क्रीनिंग


    नई दिल्ली । जम्मू कश्मीर सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा और अहम फैसला लिया है। सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के साथ साथ कोचिंग संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे अपनी लाइब्रेरी कक्षाओं और अन्य शैक्षणिक स्थानों पर रखी सभी किताबों की गहन जांच करें। इस जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों तक ऐसी कोई पुस्तक या अध्ययन सामग्री न पहुंचे जिसमें देशविरोधी विचार अलगाववाद हिंसा या किसी प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री शामिल हो। सरकार का मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच वैज्ञानिक दृष्टिकोण और राष्ट्रीय मूल्यों का विकास करना है इसलिए किसी भी प्रकार की भ्रामक सामग्री को शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा नहीं बनने दिया जाएगा।

    स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार सभी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों के प्रमुखों को सात दिनों के भीतर अपनी लाइब्रेरी और कक्षाओं में मौजूद पुस्तकों की जांच पूरी करनी होगी। इसके बाद उन्हें प्रमाणित करना होगा कि उनके संस्थान में ऐसी कोई पुस्तक मौजूद नहीं है जो राष्ट्रीय हितों के खिलाफ हो या छात्रों के मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डालती हो। यदि जांच के दौरान कोई संदिग्ध या आपत्तिजनक पुस्तक मिलती है तो उसकी पूरी जानकारी संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध करानी होगी ताकि आगे आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

    यह कदम हाल ही में सामने आए उस विवाद के बाद उठाया गया है जिसमें कुछ पुस्तकों में जम्मू कश्मीर को भारत के कब्जे वाला क्षेत्र बताया गया था और कुछ अलगाववादी व्यक्तियों का सकारात्मक चित्रण किया गया था। इन पुस्तकों के सामने आने के बाद प्रशासन ने इसे गंभीर मामला मानते हुए तत्काल जांच शुरू कर दी। इसके बाद उपराज्यपाल ने संबंधित शिक्षा अधिकारियों पर कार्रवाई करते हुए कई अधिकारियों को निलंबित कर दिया और पूरे प्रदेश में शैक्षणिक सामग्री का ऑडिट कराने के निर्देश दिए।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी शिक्षण संस्थानों में उपयोग होने वाली सामग्री नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप होनी चाहिए। ऐसी किसी भी पुस्तक को स्वीकार नहीं किया जाएगा जो धार्मिक भावनाओं को आहत करे समाज में विभाजन पैदा करे या छात्रों को भटकाने का प्रयास करे। शिक्षा विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों और संस्थानों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    इस पूरे मामले पर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे इतिहास और वैचारिक स्वतंत्रता से जोड़कर देखा है। कुछ नेताओं का कहना है कि किताबों की स्क्रीनिंग के नाम पर इतिहास को बदला नहीं जाना चाहिए जबकि सरकार का तर्क है कि छात्रों को तथ्य आधारित और संतुलित शिक्षा देना उसकी जिम्मेदारी है तथा किसी भी प्रकार की भ्रामक या राष्ट्रविरोधी सामग्री को शिक्षा का हिस्सा नहीं बनने दिया जा सकता।

    इस बीच बाल अधिकारों से जुड़े संगठनों ने भी इस विषय को गंभीर बताया है। उनका कहना है कि बच्चों को ऐसी सामग्री उपलब्ध कराना जो हिंसा अलगाववाद या भ्रामक विचारों को बढ़ावा देती हो उनके मानसिक विकास और भविष्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए शैक्षणिक संस्थानों में पाठ्य सामग्री की समय समय पर समीक्षा आवश्यक है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा किसी भी समाज की सबसे मजबूत नींव होती है। ऐसे में स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ाई जाने वाली पुस्तकों का तथ्यपरक संतुलित और संविधान की भावना के अनुरूप होना बेहद जरूरी है। यदि किसी सामग्री पर विवाद की आशंका हो तो उसकी निष्पक्ष समीक्षा कर उचित निर्णय लेना शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

  • देवास में NSUI का हल्ला बोल, जर्जर स्कूल भवन हटाने से लेकर कॉलेज का नाम बदलने तक उठाईं कई अहम मांगें

    देवास में NSUI का हल्ला बोल, जर्जर स्कूल भवन हटाने से लेकर कॉलेज का नाम बदलने तक उठाईं कई अहम मांगें


    देवास । देवास जिले के हाटपिपल्या में वर्षों से लंबित मांगों को लेकर राष्ट्रीय छात्र संगठन एनएसयूआई ने तहसील कार्यालय का घेराव करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाते हुए प्रशासन पर लगातार अनदेखी का आरोप लगाया।

    एनएसयूआई के अध्यक्ष अरुण माली के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता तहसील कार्यालय पहुंचे। संगठन का कहना है कि पिछले चार वर्षों से विभिन्न समस्याओं को लेकर लगातार ज्ञापन दिए जा रहे हैं लेकिन अब तक किसी भी मांग पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन केवल आश्वासन देता रहा लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं। इसी कारण संगठन को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

    प्रदर्शन के दौरान सबसे प्रमुख मुद्दा शासकीय बालक विद्यालय के जर्जर भवन का रहा। एनएसयूआई ने बताया कि स्कूल भवन लंबे समय से खस्ताहाल स्थिति में है और वहां पढ़ने वाले छात्र लगातार खतरे के बीच शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। संगठन ने याद दिलाया कि करीब दो वर्ष पहले भवन की छत का प्लास्टर गिरने से दो छात्र घायल हो गए थे लेकिन इसके बाद भी प्रशासन ने नया भवन बनाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। छात्रों ने मांग की कि पुराने और जर्जर भवन को हटाकर वहां आधुनिक सुविधाओं से युक्त नया भवन बनाया जाए तथा सीएम राइज स्कूल की स्थापना की जाए ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।

    एनएसयूआई ने शासकीय महाविद्यालय हाटपिपल्या का नाम भारत की पहली महिला शिक्षिका और समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले के नाम पर रखने की भी मांग की। संगठन का कहना है कि शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उनके ऐतिहासिक योगदान को सम्मान देने के लिए यह निर्णय लिया जाना चाहिए। इससे नई पीढ़ी को उनके संघर्ष और शिक्षा के प्रति समर्पण से प्रेरणा मिलेगी।

    ज्ञापन में महाविद्यालय के एक छात्र के साथ हुई कथित मारपीट की घटना का भी उल्लेख किया गया। संगठन ने इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। एनएसयूआई का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और किसी भी प्रकार की हिंसा या उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।

    प्रदर्शन के अंत में एनएसयूआई नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। संगठन ने कहा कि छात्र हितों की रक्षा के लिए वह लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगा। फिलहाल प्रशासन की ओर से ज्ञापन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है लेकिन छात्रों ने जल्द सकारात्मक कार्रवाई की उम्मीद जताई है।

  • NEET पेपर लीक के विरोध में इंदौर में सातवें दिन भी धरना जारी: कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी

    NEET पेपर लीक के विरोध में इंदौर में सातवें दिन भी धरना जारी: कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी


    इंदौर । इंदौर में NEET पेपर लीक मामले और छात्रों से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन लगातार सातवें दिन भी जारी रहा। टंट्याभील चौराहे पर छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि बारिश के बावजूद धरनास्थल पर डटे रहे। प्रदर्शनकारियों ने टेंट लगाकर अपना आंदोलन जारी रखा और नारेबाजी, कैंडल मार्च, हवन तथा क्रांतिकारी गीतों के माध्यम से अपनी मांगों को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया।

    आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र संगठनों का कहना है कि देशभर में सामने आए NEET पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाते हुए राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के संबंध में कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी दोहराई।

    धरने में केवल NEET परीक्षा का मुद्दा ही नहीं बल्कि प्रदेश के छात्रों से जुड़े कई अन्य विषय भी शामिल किए गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने छात्रवृत्ति का समय पर भुगतान, छात्रावास की बेहतर सुविधाएं, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और कुल 23 मांगों को लेकर अपना आंदोलन जारी रखा है। उनका कहना है कि छात्रों की समस्याओं का लंबे समय से समाधान नहीं हो रहा है, इसलिए उन्हें सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा।

    धरनास्थल पर पिछले सात दिनों के दौरान कई प्रतीकात्मक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। प्रदर्शनकारियों ने दिवंगत छात्रों की स्मृति में कैंडल मार्च निकाला, हवन किया और थाली बजाकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया। उनका कहना है कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और इसका उद्देश्य छात्रों की आवाज शासन तक पहुंचाना है।

    प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उनका कहना है कि संबंधित अधिकारियों के सामने सभी मांगें रखी जा चुकी हैं, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में आगामी दिनों में विरोध प्रदर्शन का दायरा बढ़ाया जा सकता है।

    छात्र संगठनों का कहना है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों से लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होता है। उनका आग्रह है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी और पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए। साथ ही मध्य प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े लंबित मुद्दों के समाधान की दिशा में भी शीघ्र कदम उठाए जाएं।