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  • शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के अग्रदूत फुले के ऐतिहासिक योगदान को देश ने किया नमन

    शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के अग्रदूत फुले के ऐतिहासिक योगदान को देश ने किया नमन


    नई दिल्ली :संसद भवन में महात्मा ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती पर देश के शीर्ष नेतृत्व ने अर्पित की श्रद्धांजलि, सामाजिक समानता और शिक्षा के आदर्शों को किया याद देश के महान समाज सुधारक और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए जीवनभर संघर्ष करने वाले Jyotirao Phule की 200वीं जयंती पर राजधानी में विशेष श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया। संसद भवन परिसर में हुए इस आयोजन में देश के शीर्ष नेतृत्व ने एक साथ उपस्थित होकर उन्हें नमन किया और उनके सामाजिक न्याय, शिक्षा तथा महिला सशक्तिकरण के योगदान को याद किया। इस अवसर ने उनके विचारों की प्रासंगिकता को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया।

    इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति Droupadi Murmu, उपराष्ट्रपति Jagdeep Dhankhar, लोकसभा अध्यक्ष Om Birla और प्रधानमंत्री Narendra Modi सहित कई शीर्ष नेताओं ने भाग लिया और संसद परिसर में पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान विभिन्न दलों के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति ने इस अवसर को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया, जिससे सामाजिक सुधार के मूल्यों पर व्यापक सहमति का संदेश सामने आया।

    नेताओं ने अपने संबोधन में महात्मा फुले के उस ऐतिहासिक संघर्ष को याद किया जिसमें उन्होंने समाज में व्याप्त असमानता, छुआछूत और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई थी। विशेष रूप से शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को रेखांकित किया गया, जहां उन्होंने वंचित वर्गों और महिलाओं के लिए शिक्षा के द्वार खोलने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाए। उनके प्रयासों ने उस समय की सामाजिक संरचना को चुनौती दी और एक नए युग की शुरुआत की।

    इस अवसर पर यह भी कहा गया कि महात्मा फुले ने अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले के साथ मिलकर महिला शिक्षा की मजबूत नींव रखी, जो भारतीय समाज सुधार आंदोलन का एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है। उनके प्रयासों के कारण समाज के उन वर्गों तक शिक्षा पहुंची जो लंबे समय तक इससे वंचित रहे थे।

    कार्यक्रम में यह विचार भी सामने आया कि आधुनिक भारत में भी फुले के विचार उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके समय में थे। सामाजिक समानता, शिक्षा का अधिकार और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दे आज भी विकास और न्यायपूर्ण समाज की बुनियाद बने हुए हैं। नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि उनके आदर्शों को केवल स्मरण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें नीतियों और व्यवहार में वास्तविक रूप से लागू करना आवश्यक है।

    इस श्रद्धांजलि समारोह ने यह संदेश दिया कि सामाजिक न्याय और समानता के मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है और फुले के विचार इस दिशा में आज भी मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकते हैं। उनके जीवन को एक प्रेरणास्रोत के रूप में देखते हुए यह भी कहा गया कि उनका संघर्ष केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी दिशा प्रदान करता है।

  • एमपी बोर्ड का बड़ा फैसला, अब फेल ही नहीं पास छात्र भी सुधार सकेंगे अंक, ‘द्वितीय परीक्षा’ से मिलेगा दूसरा मौका

    एमपी बोर्ड का बड़ा फैसला, अब फेल ही नहीं पास छात्र भी सुधार सकेंगे अंक, ‘द्वितीय परीक्षा’ से मिलेगा दूसरा मौका


    नई दिल्ली/भोपाल। माध्यमिक शिक्षा मंडल म.प्र. भोपाल ने इस वर्ष से परीक्षा प्रणाली में अहम बदलाव करते हुए पारंपरिक पूरक परीक्षा व्यवस्था को समाप्त कर दिया है। इसके स्थान पर अब द्वितीय परीक्षा शुरू की जा रही है जिसमें फेल और पास दोनों ही प्रकार के छात्र शामिल हो सकेंगे। यह परीक्षा 7 मई 2026 से आयोजित होगी।

    नई व्यवस्था के तहत छात्र केवल अनुत्तीर्ण विषयों के लिए ही नहीं बल्कि अपने अंक सुधारने के उद्देश्य से भी किसी विषय में दोबारा परीक्षा दे सकेंगे। बोर्ड का मानना है कि इस पहल से विद्यार्थियों को अपने परिणाम बेहतर करने का अधिक अवसर मिलेगा।

    पहले की व्यवस्था में हाईस्कूल 10वीं में अधिकतम दो विषय और हायर सेकेंडरी 12वीं में एक विषय में फेल छात्र ही पूरक परीक्षा दे सकते थे। लेकिन अब इस नई द्वितीय परीक्षा प्रणाली में सभी छात्रों को समान अवसर प्रदान किया गया है।

    नियमों के अनुसार जो छात्र किसी विषय में फेल हैं उनके लिए उस विषय की परीक्षा देना अनिवार्य होगा। वहीं पास छात्र अपनी इच्छा से किसी भी विषय में शामिल होकर अपने अंक सुधार सकते हैं। इसे छात्रों के लिए राहतभरा कदम माना जा रहा है।

    जारी टाइमटेबल के मुताबिक 12वीं की द्वितीय परीक्षा 7 मई से 25 मई 2026 तक आयोजित होगी जबकि 10वीं की परीक्षा 7 मई से 19 मई 2026 के बीच होगी। सभी परीक्षाएं निर्धारित केंद्रों पर कराई जाएंगी।

    बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि द्वितीय परीक्षा के बाद जारी अंकसूची मुख्य परीक्षा के समान ही होगी। छात्र के दोनों परिणामों में से जो बेहतर होगा वही अंतिम रूप से मान्य किया जाएगा जिससे उन्हें सीधे तौर पर फायदा मिलेगा।

    द्वितीय परीक्षा में शामिल होने के लिए छात्रों को मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित होने के सात दिनों के भीतर आवेदन करना होगा। आवेदन प्रक्रिया एमपी ऑनलाइन कियोस्क के माध्यम से पूरी की जाएगी। इसके लिए छात्र बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट www.mpbse.nic.in पर जाकर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

  • मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में शिक्षा व्यवस्था मजबूत शून्य ड्रॉप आउट की ओर बढ़ता मध्यप्रदेश

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में शिक्षा व्यवस्था मजबूत शून्य ड्रॉप आउट की ओर बढ़ता मध्यप्रदेश


    भोपाल । मध्यप्रदेश में शासकीय स्कूलों के प्रति अभिभावकों और बच्चों का भरोसा तेजी से बढ़ रहा है और यह बदलाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने भोपाल के मॉडल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय टीटी नगर में राज्य स्तरीय प्रवेशोत्सव कार्यक्रम 2026 का शुभारंभ करते हुए इस सकारात्मक परिवर्तन को शिक्षा व्यवस्था की बड़ी उपलब्धि बताया उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक से चार अप्रैल तक चलने वाला स्कूल चले हम अभियान बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का अभिनव प्रयास है जिसका असर अब जमीन पर नजर आ रहा है

    मुख्यमंत्री ने बताया कि शासकीय विद्यालयों में नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है और यह जनता के बढ़ते विश्वास का प्रमाण है वर्ष 2025 26 में कुल नामांकन में लगभग बीस प्रतिशत वृद्धि हुई है जबकि सरकारी स्कूलों में यह वृद्धि बत्तीस प्रतिशत से अधिक रही है राज्य सरकार ने इस शैक्षणिक सत्र में एक करोड़ पैंतालीस लाख विद्यार्थियों के नामांकन का लक्ष्य रखा है और इस दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने नव प्रवेशित बच्चों का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया और उन्हें नि शुल्क साइकिलें तथा पाठ्य पुस्तकें वितरित की उन्होंने कहा कि बच्चों को स्कूल आने जाने में सुविधा मिले इसके लिए बड़े स्तर पर साइकिल वितरण किया जा रहा है आने वाले महीनों में लाखों विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा साथ ही गणवेश किताबें और मध्यान्ह भोजन जैसी सुविधाएं भी सुनिश्चित की जा रही हैं

    मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि शासकीय स्कूलों में ड्रॉप आउट की संख्या शून्य करने की दिशा में शिक्षा विभाग ने महत्वपूर्ण कार्य किया है उन्होंने इसके लिए शिक्षकों अभिभावकों और समाज के सहयोग की सराहना की और कहा कि हर बच्चे को स्कूल तक लाना ही सरकार का लक्ष्य है

    उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों और पीएमश्री स्कूलों के माध्यम से आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है इन संस्थानों में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने अटल टिंकरिंग लैब रोबोटिक लैब और आईसीटी लैब का अवलोकन भी किया जिससे यह स्पष्ट होता है कि शिक्षा अब तकनीक से जुड़ रही है

    मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे पढ़ लिखकर डॉक्टर इंजीनियर और उद्यमी बनें और अपने भविष्य को मजबूत करें उन्होंने बताया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षकों की भर्ती की गई है ताकि शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जा सके

    मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार द्वारा लैपटॉप और स्कूटी जैसी योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले हजारों विद्यार्थियों को इसका लाभ मिला है और आगामी बजट में भी इसके लिए पर्याप्त प्रावधान किया गया है

    कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि यह दिन शिक्षा विभाग के लिए उत्सव जैसा है उन्होंने बताया कि प्रदेश में पहले ही एक करोड़ से अधिक विद्यार्थियों का नामांकन हो चुका है और प्रयास है कि हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचे साथ ही विकासखंड स्तर पर बुक फेयर आयोजित करने की योजना भी बनाई जा रही है जिससे निजी स्कूलों के विद्यार्थियों को भी सस्ती पुस्तकें उपलब्ध हो सकें

    इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों अधिकारियों शिक्षकों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि मध्यप्रदेश अब शिक्षा के क्षेत्र में एक मजबूत और सकारात्मक परिवर्तन की ओर बढ़ रहा है

  • वडोदरा का वेमार प्राइमरी स्कूल बना प्रेरणा का स्रोत, बच्चों को शिक्षा से बढ़कर भविष्य की दिशा दे रहा है

    वडोदरा का वेमार प्राइमरी स्कूल बना प्रेरणा का स्रोत, बच्चों को शिक्षा से बढ़कर भविष्य की दिशा दे रहा है


    अहमदाबाद । वडोदरा जिले के सावली तालुका स्थित वेमार प्राइमरी स्कूल आज गुजरात के सरकारी स्कूलों के लिए एक आदर्श उदाहरण बनकर उभर रहा है। यह स्कूल बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखता बल्कि उन्हें व्यावहारिक शिक्षा के जरिए भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर रहा है।गुजरात सरकार की ज्ञान ही शक्ति है पहल के तहत स्कूल में रचनात्मकता आत्मनिर्भरता और नवाचार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    स्कूल में नियमित पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को विभिन्न सह-पाठ्यक्रम और कौशल-आधारित गतिविधियों में भी सक्रिय रूप से शामिल किया जाता है। इससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है और उनकी छिपी प्रतिभाएं सामने आ रही हैं। यहां रोबोट निर्माण हस्तशिल्प मार्बल आर्ट मार्शल आर्ट और व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसी गतिविधियां शुरू की गई हैं जिन्हें लेकर छात्रों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।वेमार प्राइमरी स्कूल के शिक्षक बच्चों के मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहे हैं। वे न केवल पढ़ाई पर ध्यान देते हैं बल्कि बच्चों को प्रयोगात्मक सीख के लिए भी प्रेरित करते हैं। कक्षा में पढ़ाई और हाथों से सीखने के इस संतुलन ने प्राथमिक स्तर पर शिक्षा को अधिक रोचक और प्रभावी बना दिया है।

    शिक्षकों का मानना है कि बच्चों के शुरुआती वर्ष उनके बौद्धिक विकास और जीवन कौशल को मजबूत करने के लिए बेहद अहम होते हैं। इसी सोच के साथ यह स्कूल मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में लागू मिशन स्कूल्स ऑफ एक्सीलेंस और समग्र शिक्षा अभियान की नीतियों को जमीन पर उतार रहा है। अकादमिक पढ़ाई के साथ कौशल विकास पर जोर देकर वेमार प्राइमरी स्कूल ने गुजरात के सरकारी स्कूल तंत्र में समग्र और व्यावहारिक शिक्षा का एक नया मानक स्थापित किया है।गुजरात ने शिक्षा के क्षेत्र में मजबूत और लगातार बढ़ता हुआ बुनियादी ढांचा तैयार किया है। प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च और तकनीकी शिक्षा तक राज्य में सार्वजनिक निवेश और नीतिगत फोकस के चलते हजारों सरकारी और अनुदानित स्कूलों को उन्नत कक्षाओं डिजिटल लर्निंग टूल्स विज्ञान प्रयोगशालाओं और पुस्तकालयों से लैस किया गया है।

    उच्च शिक्षा के स्तर पर गुजरात में विश्वविद्यालयों इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों आईटीआई और कौशल विकास केंद्रों का व्यापक नेटवर्क है। आईआईटी गांधीनगर आईआईएम अहमदाबाद और एम्स राजकोट जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान राज्य की शैक्षणिक पहचान को मजबूत करते हैं। अहमदाबाद गांधीनगर वडोदरा सूरत और राजकोट जैसे शिक्षा केंद्रों में मजबूत ढांचा छात्रावास शोध सुविधाएं और इनक्यूबेशन सेंटर उपलब्ध हैं। वहीं डिजिटल प्लेटफॉर्म और स्मार्ट क्लासरूम ग्रामीण इलाकों तक शिक्षा की पहुंच को मजबूत कर रहे हैं जिससे गुजरात देश के अग्रणी शिक्षा राज्यों में अपनी जगह बना रहा है।

  • उच्च शिक्षा अधिष्ठान बिल क्या है? जानिए इससे शिक्षा व्यवस्था में क्या बदलेगा और क्यों मचा है सियासी विवाद

    उच्च शिक्षा अधिष्ठान बिल क्या है? जानिए इससे शिक्षा व्यवस्था में क्या बदलेगा और क्यों मचा है सियासी विवाद


    नई दिल्ली/केंद्र सरकार ने देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाते हुए लोकसभा में ‘विकसित भारत शिक्षा बिल 2025’ पेश किया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा लाया गया यह बिल उच्च शिक्षा के लिए एक नए उच्च शिक्षा अधिष्ठान Higher Education Authority के गठन का प्रस्ताव करता है। सरकार का दावा है कि इससे देश की कॉलेज और विश्वविद्यालय प्रणाली अधिक पारदर्शी, गुणवत्ता-आधारित और छात्र-केंद्रित बनेगी, जबकि विपक्ष और शिक्षा विशेषज्ञ इसे संस्थानों की स्वायत्तता पर खतरा बता रहे हैं। इस प्रस्तावित कानून के तहत एक केंद्रीय आयोग बनाया जाएगा, जिसे देश की पूरी उच्च शिक्षा व्यवस्था की निगरानी का अधिकार होगा। इस आयोग को मुख्य रूप से यह तय करने की जिम्मेदारी दी जाएगी कि कॉलेज और विश्वविद्यालय किस स्तर की पढ़ाई करा रहे हैं, वे नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं और उन्हें कितनी शैक्षणिक स्वतंत्रता दी जानी चाहिए।

    आयोग की संरचना कैसी होगी?
    प्रस्तावित अधिष्ठान में एक अध्यक्ष, एक वरिष्ठ शिक्षाविद या विषय विशेषज्ञ, केंद्र सरकार का प्रतिनिधि और एक सचिव शामिल होंगे। इसके अलावा, आयोग के अंतर्गत तीन अलग-अलग परिषदें बनाई जाएंगी ताकि नियमन, मान्यता और मानक तय करने के काम आपस में टकराएं नहीं।

    तीन परिषदों की भूमिका क्या होगी?

    पहली है नियामक परिषद Regulatory Council । यह परिषद कॉलेजों और यूनिवर्सिटी के संचालन पर नजर रखेगी। यह सुनिश्चित करेगी कि संस्थान शिक्षा को केवल मुनाफे का जरिया न बनाएं, फंड का सही इस्तेमाल हो और छात्रों व शिक्षकों की शिकायतों का समाधान समय पर हो।

    दूसरी है मान्यता परिषद Accreditation Council । इसका काम यह तय करना होगा कि कौन-सा संस्थान तय शैक्षणिक मानकों पर खरा उतरता है। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को मान्यता देना या वापस लेना इसी परिषद की जिम्मेदारी होगी। मान्यता से जुड़ी सभी जानकारियां सार्वजनिक की जाएंगी, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

    तीसरी है मानक परिषद Standards Council। यह परिषद पढ़ाई के स्तर, सिलेबस, क्रेडिट ट्रांसफर सिस्टम और शिक्षकों की योग्यता से जुड़े मानक तय करेगी। इसका मकसद यह होगा कि छात्रों को एक संस्थान से दूसरे संस्थान में जाने में दिक्कत न हो और शिक्षा की गुणवत्ता समान बनी रहे।

    किन संस्थानों पर लागू होगा यह कानून?

    यह बिल सभी केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों, डीम्ड यूनिवर्सिटी, IIT, NIT, कॉलेजों, ऑनलाइन और दूरस्थ शिक्षा संस्थानों पर लागू होगा। हालांकि मेडिकल, कानून, फार्मेसी और नर्सिंग जैसे पेशेवर कोर्स सीधे इस कानून के दायरे में नहीं आएंगे, लेकिन उन्हें भी नए शैक्षणिक मानकों का पालन करना होगा।

    केंद्र सरकार की भूमिका क्या होगी?
    केंद्र सरकार इस अधिष्ठान को दिशा-निर्देश दे सकेगी, प्रमुख पदों पर नियुक्तियां करेगी और विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में काम करने की मंजूरी देगी। जरूरत पड़ने पर आयोग या उसकी परिषदों को भंग करने का अधिकार भी सरकार के पास रहेगा। साथ ही, आयोग को हर साल संसद और ऑडिट के सामने जवाबदेह होना होगा।

    इससे क्या बदलाव और फायदे होंगे?
    सरकार का दावा है कि इससे उच्च शिक्षा अधिक छात्र-केंद्रित बनेगी, नए कॉलेज और कोर्स खोलना आसान होगा और रोजगार से जुड़ी स्किल्स पर जोर दिया जाएगा। शिकायत निवारण प्रणाली मजबूत होगी और छोटे संस्थानों को भी गुणवत्ता सुधार का मौका मिलेगा।

    लेकिन विवाद क्यों है?

    आलोचकों का कहना है कि यह बिल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को कमजोर कर सकता है। उन्हें डर है कि शिक्षा पर केंद्र सरकार का नियंत्रण बढ़ेगा और अकादमिक फैसलों में शिक्षकों व छात्रों की भूमिका घट जाएगी। यह भी आशंका जताई जा रही है कि ग्रामीण और छोटे कॉलेज सख्त नियमों का पालन नहीं कर पाएंगे और बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं।

    विपक्ष की आपत्ति क्या है?
    कांग्रेस, टीएमसी और वाम दलों ने इस बिल का विरोध किया है। उनका कहना है कि इतना बड़ा शिक्षा सुधार वाला बिल बिना पर्याप्त चर्चा के पेश किया गया। विपक्षी सांसदों ने इसे संयुक्त संसदीय समिति JPC को भेजने की मांग की थी, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया है। अब इस बिल पर विस्तृत जांच और चर्चा होगी।