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  • गांव का घर साधारण लेकिन सरकारी स्कूल हाईटेक, चीन पहुंचकर भारतीय PhD स्कॉलर ने दिखाया हैरान करने वाला VIDEO

    गांव का घर साधारण लेकिन सरकारी स्कूल हाईटेक, चीन पहुंचकर भारतीय PhD स्कॉलर ने दिखाया हैरान करने वाला VIDEO


    नई दिल्ली। चीन का नाम सुनते ही आमतौर पर लोगों के जेहन में आधुनिक इमारतें हाईटेक तकनीक तेज रफ्तार ट्रेनें और चमचमाते शहरों की तस्वीर सामने आती है। लेकिन चीन की एक अलग तस्वीर उसके गांवों में भी दिखाई देती है। चीन में PhD की पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्र सैयद शेन आलम ने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव से जुड़े कुछ वीडियो शेयर किए हैं। इन वीडियो में उन्होंने चीन के एक गांव के घर से लेकर वहां के सरकारी स्कूल तक की झलक दिखाई है। उनके अनुभव ने सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान खींचा है।

    सैयद शेन आलम चीन में PhD कर रहे हैं और पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम इंग्लिश टीचर के तौर पर भी काम करते हैं। वह सोशल मीडिया पर चीन की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े वीडियो साझा करते रहते हैं। इस बार वह अपने एक दोस्त के गांव पहुंचे। दोस्त के परिवार को उनके आने की जानकारी पहले से थी इसलिए उनके लिए भोजन की व्यवस्था भी की गई थी। शेन ने परिवार की मेहमाननवाजी की तारीफ करते हुए घर के अलग-अलग हिस्सों को वीडियो में दिखाया।

    गांव का यह घर बाहर से भले ही सामान्य नजर आता हो लेकिन अंदर कई जरूरी सुविधाएं मौजूद थीं। घर में अलग-अलग कमरे थे और उनमें बेड सोफा अलमारी तथा रोजमर्रा की जरूरत का सामान रखा हुआ था। एक कमरे के बारे में शेन ने बताया कि उनकी दोस्त शादी के बाद इसी कमरे में रहने लगी थीं। हालांकि घर में एक ऐसी चीज भी थी जिसने उन्हें हैरान किया। उनका कहना था कि घर काफी बड़ा होने के बावजूद वहां सिर्फ एक वॉशरूम था। यह वॉशरूम घर के आखिरी हिस्से में बना था और उसका डिजाइन भी कुछ पुराना दिखाई दे रहा था।

    शेन ने घर का गेस्ट रूम भी दिखाया जहां चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी पत्नी की तस्वीर लगी हुई थी। इसके अलावा घर में एक अलग स्थान ऐसा था जहां परिवार के बुजुर्ग अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा करते थे। शेन ने चीन की नई और पुरानी पीढ़ी के बीच परंपराओं को लेकर अंतर की बात भी कही। उनके मुताबिक गांवों में कई बुजुर्ग आज भी अपनी पुरानी मान्यताओं और परंपराओं को बनाए हुए हैं।

    इसके बाद शेन चीन के इसी ग्रामीण क्षेत्र के एक सरकारी स्कूल पहुंचे। यहां का नजारा उनके लिए काफी अलग था। उन्होंने वीडियो में स्कूल की कक्षाएं और बच्चों के लिए मौजूद सुविधाएं दिखाईं। उनके मुताबिक स्कूल में बच्चों से पढ़ाई की फीस नहीं ली जाती है। क्लासरूम में AC की सुविधा के साथ पानी का डिस्पेंसर भी लगा हुआ था। बच्चों की पढ़ाई के लिए स्मार्ट बोर्ड और Wi-Fi जैसी सुविधाएं भी दिखाई गईं।

    शेन ने बताया कि स्कूल में डिजिटल सुविधाओं के साथ सामान्य बोर्ड का भी इस्तेमाल किया जाता है। यानी शिक्षक जरूरत के अनुसार स्मार्ट बोर्ड के साथ चॉक और सामान्य बोर्ड की मदद से भी बच्चों को पढ़ा सकते हैं। स्कूल में बच्चों के लिए सरकार की तरफ से मिड डे मील की व्यवस्था होने की बात भी उन्होंने बताई।

    शेन के मुताबिक विदेशी छात्रों और लोगों के लिए वॉलंटरी वर्क के अवसर भी मिलते हैं। इसी तरह के एक कार्यक्रम के तहत वह गांव के बच्चों से बातचीत करने और उन्हें कुछ सिखाने के लिए स्कूल पहुंचे थे। उनका अनुभव सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों ने चीन के ग्रामीण इलाकों और सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू कर दी।

    वीडियो ने यह सवाल भी खड़ा किया कि किसी देश की तस्वीर केवल उसके बड़े शहरों और आधुनिक इमारतों से नहीं समझी जा सकती। गांवों की जिंदगी और वहां की शिक्षा व्यवस्था भी देश के विकास की कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। शेन आलम के वीडियो में एक तरफ पारंपरिक ग्रामीण घर और पुरानी मान्यताएं दिखाई देती हैं तो दूसरी तरफ सरकारी स्कूल में आधुनिक शिक्षा सुविधाएं नजर आती हैं। यही विरोधाभास चीन के गांवों की एक अलग तस्वीर सामने लाता है।

  • सरकारी स्कूल में नहीं मिला एक भी छात्र, मिड-डे मील भी बंद; निरीक्षण में लापरवाही पर शिक्षकों को फटकार

    सरकारी स्कूल में नहीं मिला एक भी छात्र, मिड-डे मील भी बंद; निरीक्षण में लापरवाही पर शिक्षकों को फटकार


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देश पर बैराड़ तहसीलदार द्रगपाल सिंह बैश ने मंगलवार को पोहरी विकासखंड के सड़ और ककरई गांव के शासकीय विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सड़ प्राथमिक विद्यालय की स्थिति बेहद चिंताजनक मिली। यहां रिकॉर्ड में 33 छात्र दर्ज थे, लेकिन स्कूल में एक भी छात्र उपस्थित नहीं मिला। इतना ही नहीं, विद्यार्थियों के लिए बनने वाला मध्यान्ह भोजन भी तैयार नहीं किया गया था।

    निरीक्षण के समय विद्यालय में केवल एक शिक्षक मौजूद थे। छात्रों की शून्य उपस्थिति और मिड-डे मील जैसी महत्वपूर्ण योजना के क्रियान्वयन में लापरवाही देखकर तहसीलदार ने नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित शिक्षक को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी प्रयास किए जाएं और विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था में तत्काल सुधार किया जाए।

    दरअसल, जिला कलेक्टर अर्पित वर्मा ने हाल ही में सभी एसडीएम और तहसीलदारों को ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों का औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। इसी अभियान के तहत मंगलवार सुबह करीब 11 बजे तहसीलदार द्रगपाल सिंह बैश ने सड़ और ककरई गांव के स्कूलों का निरीक्षण किया। निरीक्षण का उद्देश्य शिक्षा और पोषण योजनाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करना था।

    सड़ प्राथमिक विद्यालय में मिली अव्यवस्थाओं के बाद तहसीलदार ककरई गांव पहुंचे, जहां प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय एक ही भवन में संचालित हो रहे हैं। यहां चार शिक्षक उपस्थित मिले, लेकिन छात्रों की संख्या अपेक्षा से काफी कम थी। कम उपस्थिति को लेकर तहसीलदार ने शिक्षकों से जवाब-तलब किया और बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए घर-घर संपर्क अभियान चलाने तथा अभिभावकों को जागरूक करने के निर्देश दिए।

    तहसीलदार ने शिक्षकों से कहा कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड पूरा करना नहीं, बल्कि बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पोषण पहुंचाना है। यदि विद्यालयों में छात्र ही नहीं आएंगे तो शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि निरीक्षण का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा और लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में लगातार सामने आ रही कम उपस्थिति और मिड-डे मील जैसी योजनाओं के सही क्रियान्वयन को लेकर प्रशासन अब सख्त नजर आ रहा है। जिला प्रशासन का मानना है कि नियमित निरीक्षण से न केवल व्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों की उपस्थिति में भी सकारात्मक बदलाव आएगा।