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  • शिक्षकों के लिए बड़ा अपडेट! MP में 12 अक्टूबर से TET, 150 सवालों का होगा पेपर; 21 अगस्त से भरें फॉर्म

    शिक्षकों के लिए बड़ा अपडेट! MP में 12 अक्टूबर से TET, 150 सवालों का होगा पेपर; 21 अगस्त से भरें फॉर्म


    भोपाल । मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा TET 2026 को लेकर लंबे समय से चल रही तैयारी अब अगले चरण में पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कर्मचारी चयन मंडल ESB ने प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर पढ़ा रहे संबंधित शिक्षकों के लिए परीक्षा की नियम पुस्तिका जारी कर दी है। इसके साथ ही परीक्षा की तारीख और आवेदन प्रक्रिया भी तय कर दी गई है। प्रदेश में करीब डेढ़ लाख शिक्षकों के इस परीक्षा में शामिल होने की संभावना है। परीक्षा का आयोजन 12 अक्टूबर 2026 से शुरू होगा जबकि ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 21 अगस्त से शुरू की जाएगी।

    अभ्यर्थी 4 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन में किसी तरह की गलती होने पर संशोधन का अवसर भी दिया गया है। इसके लिए 21 अगस्त से 9 सितंबर तक का समय निर्धारित किया गया है। परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को प्रत्येक प्रश्नपत्र के लिए 1000 रुपये परीक्षा शुल्क देना होगा। इसके अलावा आवेदन के माध्यम के हिसाब से पोर्टल या कियोस्क शुल्क भी देना होगा। MP Online पोर्टल के जरिए आवेदन करने पर 60 रुपये और रजिस्टर्ड सिटीजन यूजर के माध्यम से आवेदन करने पर 20 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। आवेदन में संशोधन के लिए भी अलग शुल्क लगेगा। पहली बार संशोधन करने पर 20 रुपये और अंतिम चरण में संशोधन के लिए 40 रुपये शुल्क तय किया गया है।

    TET की फीस को लेकर शिक्षक संगठनों ने आपत्ति जताई है। शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश ने वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों से परीक्षा शुल्क लिए जाने का विरोध किया है। संगठन की ओर से आवेदन और परीक्षा शुल्क माफ करने के साथ ऑनलाइन परीक्षा की जगह ऑफलाइन परीक्षा कराने की मांग की गई है। इसके अलावा शिक्षकों को परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष अध्ययन अवकाश देने और ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाजनक परीक्षा केंद्र बनाए जाने की मांग भी उठाई गई है।

    प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा में कुल 150 प्रश्न पूछे जाएंगे और प्रत्येक प्रश्न एक अंक का होगा। इस तरह परीक्षा कुल 150 अंकों की होगी। उम्मीदवारों को प्रश्नपत्र हल करने के लिए 2 घंटे 30 मिनट का समय मिलेगा। खास बात यह है कि परीक्षा में नकारात्मक अंक यानी नेगेटिव मार्किंग नहीं होगी। गलत उत्तर देने पर उम्मीदवार के प्राप्त अंकों में कटौती नहीं की जाएगी।

    परीक्षा में सफलता के लिए भी वर्ग के अनुसार न्यूनतम अंक निर्धारित किए गए हैं। अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग दिव्यांग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अभ्यर्थियों को न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक हासिल करने होंगे। वहीं अन्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक जरूरी होंगे। माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा में भी प्रत्येक प्रश्न एक अंक का रहेगा और नेगेटिव मार्किंग नहीं होगी। परीक्षा की अवधि 2 घंटे 30 मिनट निर्धारित है।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर कार्यरत संबंधित शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा पास करना जरूरी किया गया है। नियमों के तहत पात्र शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। प्राथमिक स्तर के सरकारी स्कूलों में कार्यरत सहायक शिक्षक प्राथमिक शिक्षक सहायक अध्यापक संविदा शाला शिक्षक वर्ग 3 प्रयोगशाला सहायक प्राथमिक शिक्षक विज्ञान सहित संबंधित श्रेणियों के शिक्षक परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।

    परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा और अनुशासन को लेकर भी सख्त नियम लागू रहेंगे। मोबाइल फोन कैलकुलेटर स्मार्ट वॉच ब्लूटूथ डिवाइस ईयरफोन डिजिटल वॉच रिकॉर्डिंग उपकरण पेजर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान परीक्षा केंद्र में ले जाना प्रतिबंधित रहेगा। नकल अनुचित साधनों का इस्तेमाल फर्जी पहचान या किसी दूसरे अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने जैसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

    दिव्यांग अभ्यर्थियों को नियमों के अनुसार अतिरिक्त समय और Scribe यानी लेखन सहायक की सुविधा दी जाएगी। इसके लिए निर्धारित पात्रता और जरूरी शर्तों का पालन करना होगा। परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड कर्मचारी चयन मंडल की वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकेगा। इसमें परीक्षा केंद्र तारीख और समय समेत जरूरी जानकारी उपलब्ध होगी। परीक्षा के बाद रिजल्ट और विषयवार मॉडल आंसर भी ऑनलाइन जारी किए जाएंगे।

    अभ्यर्थियों को प्रश्नों और उत्तरों को लेकर आपत्ति दर्ज कराने का अवसर भी मिलेगा। प्राप्त आपत्तियों पर विषय विशेषज्ञों की समिति विचार करेगी। यदि किसी प्रश्न को निरस्त किया जाता है तो उसके अंकों की गणना नियम पुस्तिका में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी। ऐसे में परीक्षा में शामिल होने वाले शिक्षकों के लिए आवेदन की तारीख से लेकर परीक्षा केंद्र के नियम और न्यूनतम उत्तीर्ण अंक तक सभी जानकारियों को ध्यान से समझना जरूरी होगा।

  • UGC NET पेपर लीक का बड़ा दावा NEET के बाद फिर घिरी परीक्षा व्यवस्था 90 सवाल मैच होने से मचा बवाल

    UGC NET पेपर लीक का बड़ा दावा NEET के बाद फिर घिरी परीक्षा व्यवस्था 90 सवाल मैच होने से मचा बवाल


    नई दिल्ली ।  देश की प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। नीट परीक्षा को लेकर उठे विवाद अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुए थे कि अब यूजीसी नेट परीक्षा में कथित पेपर लीक के आरोपों ने लाखों अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ा दी है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक पीडीएफ और उसमें शामिल सवालों के परीक्षा से मेल खाने के दावों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। हालांकि फिलहाल इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन छात्रों और विभिन्न संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी है।

    दावों के अनुसार 30 जून को आयोजित यूजीसी नेट समाजशास्त्र परीक्षा से पहले करीब 100 पन्नों की एक पीडीएफ सोशल मीडिया के अलग अलग प्लेटफॉर्म पर साझा की गई थी। परीक्षा समाप्त होने के बाद कई अभ्यर्थियों ने दावा किया कि इस दस्तावेज में दिए गए लगभग 90 प्रश्न और उनके विकल्प वास्तविक प्रश्नपत्र से काफी हद तक मेल खाते हैं। छात्रों का कहना है कि यह सामान्य अध्ययन सामग्री नहीं थी बल्कि प्रश्नपत्र से जुड़ा दस्तावेज प्रतीत होता था। इसी आधार पर पेपर लीक की आशंका जताई जा रही है।

    विवाद उस समय और गहरा गया जब कुछ सोशल मीडिया पोस्ट और छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि कथित प्रश्नपत्र कई राज्यों में लाखों रुपये लेकर उपलब्ध कराया गया। दावा किया गया कि बिहार उत्तर प्रदेश हरियाणा दिल्ली और राजस्थान जैसे राज्यों में यह कथित पेपर करीब 2.25 लाख रुपये में बेचा गया। इन दावों की अभी तक किसी सरकारी एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है लेकिन आरोपों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल एक परीक्षा नहीं बल्कि लाखों मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों का समय और बड़ी आर्थिक लागत लगती है। ऐसे में यदि परीक्षा की गोपनीयता भंग होती है तो सबसे बड़ा नुकसान ईमानदारी से तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को उठाना पड़ता है। यही कारण है कि सोशल मीडिया पर पारदर्शी जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग लगातार तेज हो रही है।

    इस बीच विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी पूरे मामले को लेकर केंद्र सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र से जुड़े दस्तावेज सामने आए हैं तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका आरोप है कि लगातार सामने आ रहे परीक्षा विवादों के बावजूद छात्रों को न्याय और जवाबदेही नहीं मिल रही है। दूसरी ओर मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार शिक्षा मंत्रालय ने इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से पूरे मामले की जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट देने को कहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि देश की बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था आधुनिक तकनीक और सख्त निगरानी व्यवस्था बेहद जरूरी है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो उस पर त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए ताकि छात्रों का भरोसा बना रहे।

    फिलहाल यूजीसी नेट पेपर लीक को लेकर लगाए गए आरोप जांच के दायरे में हैं और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। ऐसे में किसी भी दावे को अंतिम सत्य मानने से पहले आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी है। वहीं लाखों अभ्यर्थियों की नजर अब जांच के नतीजों और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

  • नीट परीक्षा व्यवस्था के बीच पीएम मोदी का संवेदनशील कदम एयरपोर्ट पर रोका काफिला

    नीट परीक्षा व्यवस्था के बीच पीएम मोदी का संवेदनशील कदम एयरपोर्ट पर रोका काफिला


    नई दिल्ली । NEET री एग्जाम के पहले सरकार पूरी ताकत झोंक रही है. बार बार पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की घटनाओं के बाद इस परीक्षा को सुचारू और पारदर्शी तरीके से कराना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. इस बार देश भर में लाखों छात्र छात्राएं शामिल हो रहे हैं. सरकार का प्रयास है कि किसी भी छात्र को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े.

    इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा एक महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया जिसने सभी का ध्यान खींचा है. प्रधानमंत्री दोपहर 1 बजकर 15 मिनट पर दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे थे. यहां से उन्हें अपने आवास के लिए रवाना होना था. लेकिन उन्होंने तत्काल प्रोटोकॉल से ऊपर उठकर छात्रों की सुविधा को प्राथमिकता दी.

    अगर पीएम का काफिला उस समय एयरपोर्ट से निकलता तो राजधानी की कई सड़कों पर यातायात रोकना पड़ता. उसी समय हजारों छात्र नीट परीक्षा केंद्रों की ओर जा रहे थे. इससे छात्रों को देरी और परेशानी का सामना करना पड़ सकता था.

    ऐसे में प्रधानमंत्री ने निर्णय लिया कि वे एयरपोर्ट पर ही रुकेंगे. उन्होंने अपने काफिले को वहीं रोक दिया. बताया जा रहा है कि वे तब तक एयरपोर्ट पर रहे जब तक परीक्षा शुरू नहीं हुई. इसके बाद ही वे अपने आवास के लिए रवाना हुए.

    देश भर में इस बार नीट परीक्षा का आयोजन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा किया जा रहा है. परीक्षा में कुल 22.79 लाख अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं. यह परीक्षा देश के साथ साथ विदेशों के कुछ केंद्रों पर भी आयोजित की गई है. कुल 551 शहरों और 14 विदेश शहरों में परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं. लगभग 5000 से अधिक परीक्षा केंद्रों पर यह परीक्षा संपन्न हो रही है.

    परीक्षा को निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं. हर केंद्र पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है. सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और जैमर का उपयोग किया जा रहा है. आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन की व्यवस्था की गई है ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी न हो सके.

    इस पूरे आयोजन में दो लाख से अधिक कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है. सैकड़ों सिटी कोऑर्डिनेटर और हजारों ऑब्जर्वर भी तैनात किए गए हैं जो परीक्षा की निगरानी कर रहे हैं. प्रशासन का लक्ष्य है कि परीक्षा पूरी तरह पारदर्शी और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो.

    छात्रों के लिए यह परीक्षा बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि सीमित सीटों के कारण प्रतिस्पर्धा काफी कठिन है. ऐसे में सरकार और प्रशासन दोनों का प्रयास है कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए. प्रधानमंत्री का यह निर्णय भी इसी दिशा में एक संवेदनशील कदम के रूप में देखा जा रहा है.

  • नीट यूजी री-एग्जाम 2026 उत्तर प्रदेश में आज, पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड में

    नीट यूजी री-एग्जाम 2026 उत्तर प्रदेश में आज, पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड में


    नई दिल्ली । नीट यूजी री-एग्जाम 2026 को लेकर देशभर में कड़े सुरक्षा और प्रशासनिक इंतजाम किए गए हैं। उत्तर प्रदेश में आज यह महत्वपूर्ण परीक्षा आयोजित की जा रही है, जिसमें प्रदेश के 59 जनपदों में करीब 3.5 लाख अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं। परीक्षा को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने व्यापक तैयारी की है।

    यह परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक एक ही पाली में पेन और पेपर मोड में आयोजित की जा रही है। परीक्षा के सफल संचालन के लिए पुलिस, जिला प्रशासन और केंद्रीय एजेंसियों ने मिलकर मल्टी-लेयर सुरक्षा व्यवस्था तैयार की है ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमितता को रोका जा सके।

    राजधानी लखनऊ में ही 75 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां विशेष सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) के अनुसार प्रत्येक केंद्र पर सुरक्षा के लिए अलग-अलग स्तर पर पुलिस बल तैनात किया गया है। परीक्षा सामग्री को केंद्र तक पहुंचाने और आंसर शीट को सुरक्षित वापस लाने की जिम्मेदारी विशेष टीम को दी गई है, जिसमें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के जवानों के साथ स्थानीय पुलिसकर्मी शामिल हैं।

    परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए क्वेश्चन पेपर ले जाने वाली सभी गाड़ियों में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगाया गया है, ताकि हर गतिविधि पर रियल टाइम निगरानी रखी जा सके। इसके अलावा परीक्षा केंद्रों पर उम्मीदवारों की सख्त जांच और तलाशी की व्यवस्था भी की गई है।

    सरकार की ओर से छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रावधान किए गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में एडमिट कार्ड दिखाने पर अभ्यर्थियों को 50 प्रतिशत किराया छूट दी जा रही है। साथ ही दूसरे जिलों से आने वाले छात्रों के लिए अस्थायी आवास की व्यवस्था करने के भी निर्देश जारी किए गए हैं।

    गौरतलब है कि इससे पहले 3 मई को NEET परीक्षा आयोजित की गई थी, लेकिन पेपर लीक के आरोपों के चलते 12 मई को इसे रद्द कर दिया गया था। इसी कारण अब री-एग्जाम कराया जा रहा है, जिसे लेकर छात्रों में उत्साह और प्रशासन में सतर्कता दोनों देखने को मिल रही है।

  • अब नहीं छूटेगा साल 5वीं 8वीं के फेल और अनुपस्थित छात्रों के लिए जून में फिर परीक्षा

    अब नहीं छूटेगा साल 5वीं 8वीं के फेल और अनुपस्थित छात्रों के लिए जून में फिर परीक्षा


    भोपाल । मध्यप्रदेश के भोपाल सहित पूरे प्रदेश में कक्षा 5वीं और 8वीं के छात्रों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है जहां फेल और अनुपस्थित विद्यार्थियों को एक और मौका दिया जा रहा है। राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार अब ये छात्र 1 जून से 6 जून 2026 के बीच आयोजित होने वाली पुन परीक्षा में शामिल हो सकेंगे जिससे उनका एक शैक्षणिक वर्ष बच सकता है।

    शिक्षण सत्र 2025 26 की मुख्य परीक्षा में असफल या अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। इस पुन परीक्षा में सरकारी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों अनुदान प्राप्त संस्थानों और पंजीकृत मदरसों में पढ़ने वाले छात्र भी शामिल होंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी छात्र की पढ़ाई केवल एक परीक्षा के कारण बाधित न हो।

    परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रवेश पत्र 25 मई तक उपलब्ध करा दिए जाएंगे। छात्र अपना एडमिट कार्ड राज्य शिक्षा केंद्र के आधिकारिक पोर्टल www.rskmp.in से डाउनलोड कर सकेंगे। इसके लिए शाला प्रमुख जनशिक्षा केंद्र प्रभारी और संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है कि सभी छात्रों तक समय पर प्रवेश पत्र पहुंचाया जाए।

    पुन परीक्षा की तैयारी को लेकर भी खास व्यवस्था की गई है। परीक्षा से पहले शाला स्तर पर विषयवार अतिरिक्त कक्षाएं संचालित की जाएंगी ताकि छात्र बेहतर तरीके से तैयारी कर सकें। जिन छात्रों ने पहले प्रोजेक्ट कार्य पूरा नहीं किया था या जिनके अंक कम थे उन्हें दोबारा प्रोजेक्ट पूरा करने और मूल्यांकन का अवसर भी दिया जाएगा।

    इस बार परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था भी अलग तरीके से की गई है। सभी परीक्षा केंद्र जनशिक्षा केंद्र स्तर पर बनाए जाएंगे ताकि परीक्षा प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी रहे। यदि किसी केंद्र पर 500 से अधिक छात्र होते हैं तो राज्य शिक्षा केंद्र की अनुमति से अतिरिक्त केंद्र भी बनाए जा सकेंगे।

    परीक्षा की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रश्न पत्रों की ऑन द स्पॉट प्रिंटिंग की जाएगी। यानी प्रश्न पत्र सीधे परीक्षा केंद्र पर ही डाउनलोड और प्रिंट किए जाएंगे जिससे लीक जैसी समस्याओं की संभावना कम होगी।

    गर्मी के मौसम को देखते हुए छात्रों की सुरक्षा के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। हर परीक्षा केंद्र पर पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था रहेगी। साथ ही बच्चों को नियमित अंतराल पर पानी पिलाने लू और डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए ORS उपलब्ध कराने और जरूरत पड़ने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।

    कुल मिलाकर यह पहल उन छात्रों के लिए एक बड़ी राहत है जो किसी कारणवश मुख्य परीक्षा में सफल नहीं हो पाए थे। अब उनके पास अपनी मेहनत से खुद को साबित करने और अगली कक्षा में आगे बढ़ने का एक और सुनहरा अवसर है।

  • भोपाल में घना कोहरा और कड़ाके की ठंड: 20 जिलों में स्कूल बंद, भोपाल में समय बदला

    भोपाल में घना कोहरा और कड़ाके की ठंड: 20 जिलों में स्कूल बंद, भोपाल में समय बदला


    नई दिल्ली। राजधानी भोपाल में पिछले तीन दिनों से घना कोहरा और कड़ाके की ठंड का असर देखने को मिल रहा है। सोमवार सुबह 6 से 8 बजे के बीच विजिबिलिटी 20 से 50 मीटर तक ही रही, यानी कोहरा इतना घना था कि 20 मीटर दूर भी देख पाना मुश्किल था। इसी बीच, नन्हें बच्चे ठिठुरते हुए स्कूल पहुंचे। सुबह के समय स्कूल वैन और बसों द्वारा बच्चों को लेने के दौरान हादसे का खतरा भी बना रहा।
    कड़ाके की ठंड और घने कोहरे की वजह से प्रदेश के 20 जिलों में स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है। भोपाल ऐसा जिला है, जहां नर्सरी से आठवीं तक की कक्षाओं की शुरुआत समय बदलकर सुबह 9.30 बजे कर दी गई, जबकि उच्च कक्षाओं (9वीं से 12वीं) के छात्रों को सामान्य समय पर स्कूल आना पड़ा।

    भोपाल में विशेष व्यवस्था
    भोपाल में नर्सरी से 8वीं तक के स्कूल सोमवार से सुबह 9.30 बजे खुलेंगे। इसके पहले जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र अहिरवार ने आदेश जारी किया था।

    छोटे बच्चों के लिए टाइमिंग बढ़ाने का मकसद उन्हें ठिठुरते हुए स्कूल जाने से बचाना है। लेकिन 9वीं से 12वीं के छात्रों को घने कोहरे के बीच स्कूल पहुंचना पड़ा।

    अभिभावक मयंक लिमये ने कहा, पूरे प्रदेश में तेज सर्दी और कोहरा छाया हुआ है। कई जिलों में स्कूल बंद किए गए हैं, लेकिन भोपाल में बच्चों को ठंड और कोहरे में स्कूल भेजा गया। यह असुरक्षा का सवाल है।

    हादसे का डर
    सुबह के समय घना कोहरा रहने के कारण स्कूल वैन और बसें घर से बच्चों को लेने गईं।

    अभिभावकों का डर है कि कोहरे में वाहन दुर्घटना हो सकती है। उनका कहना है कि जब तक विजिबिलिटी सामान्य नहीं होती, स्कूल बंद रखना चाहिए।
    प्रदेश के 20 जिलों में छुट्टी की सूची
    इंदौर: कक्षा 1 से 8 तक, तीन दिन की छुट्टी।
    उज्जैन: नर्सरी से 5वीं तक, एक दिन छुट्टी।
    मंदसौर: नर्सरी से 8वीं तक, दो दिन छुट्टी।
    शाजापुर: नर्सरी से 8वीं तक, 5–6 जनवरी को अवकाश।
    विदिशा: नर्सरी से 5वीं तक, 5–6 जनवरी को अवकाश।
    ग्वालियर: नर्सरी से 8वीं तक, 5–6 जनवरी को छुट्टी, 7 जनवरी से स्कूल।
    अशोकनगर: 5 जनवरी को स्कूल व आंगनबाड़ी बंद।
    रायसेन: नर्सरी से 5वीं तक, 7 जनवरी तक छुट्टी।
    आगर-मालवा: कक्षा 1 से 8 तक, दो दिन अवकाश (आंगनबाड़ी भी बंद)।
    भिंड: नर्सरी से 8वीं तक, दो दिन अवकाश।
    टीकमगढ़: नर्सरी से 8वीं तक, 5–6 जनवरी को छुट्टी।
    हरदा: नर्सरी से 8वीं तक, सोमवार को अवकाश।
    नीमच: नर्सरी से 8वीं तक, 5–6 जनवरी को छुट्टी।
    रतलाम: नर्सरी से 8वीं तक, 5–6 जनवरी दो दिन अवकाश।
    राजगढ़: कक्षा 8वीं तक के स्कूलों में दो दिन अवकाश।
    मंडला: नर्सरी से 8वीं तक, 5–6 जनवरी दो दिन अवकाश, आंगनबाड़ी बंद।
    जबलपुर: नर्सरी से 8वीं तक, 5–6 जनवरी दो दिन अवकाश, आंगनबाड़ी बंद; परीक्षाएं यथावत।
    दमोह: प्री-प्राइमरी से 8वीं तक एक दिन अवकाश, आंगनबाड़ी बंद।
    डिंडौरी: नर्सरी से 5वीं, 5–6 जनवरी दो दिन अवकाश।
    नर्मदापुरम: 6–7 जनवरी कक्षा 8वीं तक छुट्टी।
    भोपाल में घने कोहरे और ठंड के बीच बच्चों की सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए। जबकि अन्य जिलों में स्कूल पूरी तरह बंद किए गए हैं, राजधानी में केवल छोटे बच्चों के समय में बदलाव किया गया। अभिभावक और शिक्षक उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन भविष्य में मौसम की गंभीरता को देखते हुए और भी सावधानी बरते।
  • दिल्ली-NCR में GRAP-4 लागू, प्रदूषण संकट के बीच स्कूल हाइब्रिड मोड पर शिफ्ट…

    दिल्ली-NCR में GRAP-4 लागू, प्रदूषण संकट के बीच स्कूल हाइब्रिड मोड पर शिफ्ट…


    नई दिल्ली/ दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र NCR में वायु गुणवत्ता AQI का स्तर एक बार फिर ‘बेहद खराब’ Severe श्रेणी में पहुंचने के कारण स्थिति गंभीर हो गई है। प्रदूषण के खतरनाक स्तर को देखते हुए, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत कार्यरत वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग CAQM ने तत्काल प्रभाव से ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान GRAP के सबसे सख्त चरण, यानी चरण 4 GRAP-4 को लागू करने का आदेश दिया है।

    प्रदूषण की स्थिति और GRAP-4 की आवश्यकता

    राजधानी दिल्ली के कई निगरानी स्टेशनों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक AQI 450 के आंकड़े को पार कर गया है, जो ‘गंभीर’ श्रेणी को दर्शाता है। यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है, बल्कि इसे एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल के करीब माना जाता है। इस भयावह स्थिति से निपटने और प्रदूषण के खतरनाक स्रोतों पर तत्काल नियंत्रण लगाने के उद्देश्य से प्रशासन ने ये कड़े कदम उठाए हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों तक वायुमंडलीय स्थिरता और हवा की कम गति के कारण प्रदूषण के स्तर में किसी बड़े सुधार की संभावना कम है, जिसने स्थिति की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।

    शिक्षा पर तत्काल प्रभाव: हाइब्रिड मोड की वापसी
    GRAP-4 के लागू होते ही, दिल्ली शिक्षा निदेशालय DoE ने छात्रों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए स्कूलों के लिए विस्तृत और सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन दिशानिर्देशों का मुख्य फोकस कक्षा 9वीं से लेकर 11वीं तक के छात्रों की शिक्षा पद्धति में परिवर्तन लाना है:हाइब्रिड मोड: कक्षा 9वीं, 10वीं और 11वीं के छात्रों के लिए पढ़ाई अब हाइब्रिड मोड में आयोजित की जाएगी। इसका अर्थ है कि शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से संचालित होगी।

    स्कूलों पर लागू: यह नई व्यवस्था दिल्ली के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त Aided और निजी Private स्कूलों पर समान रूप से लागू होगी। स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि जो छात्र ऑनलाइन क्लास का विकल्प चुनते हैं, उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो। अन्य कक्षाएं: हालांकि, आदेश में 12वीं कक्षा के छात्रों और छोटी कक्षाओं 8वीं तक के लिए स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए हैं, लेकिन यह संकेत है कि सबसे अधिक संवेदनशील आयु वर्ग को घर से पढ़ने का विकल्प दिया जा रहा है। यह कदम छात्रों को अत्यधिक प्रदूषित वातावरण में बाहर निकलने और स्कूल आने-जाने से रोकने के लिए उठाया गया है।

    कार्यालयों और परिवहन पर सख्त नियंत्रण

    प्रदूषण के स्रोतों को कम करने के लिए कार्यस्थलों और परिवहन क्षेत्र पर भी महत्वपूर्ण पाबंदियां लगाई गई हैं:सरकारी कार्यालयों में उपस्थिति पर सीमा:कर्मचारी सीमा: सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति को सीमित कर दिया गया है। केवल 50 प्रतिशत कर्मचारी ही भौतिक रूप से कार्यालय में उपस्थित रहेंगे। वर्क फ्रॉम होम: शेष 50 प्रतिशत कर्मचारी ‘वर्क फ्रॉम होम’ WFH मोड पर कार्य करेंगे। इस व्यवस्था का लक्ष्य सड़क पर वाहनों की संख्या को कम करना है।

    निजी दफ्तरों को निर्देश:
    निजी दफ्तरों और प्रतिष्ठानों को भी सक्रिय रूप से फ्लेक्सिबल टाइमिंग Flexible Timings अपनाने और कर्मचारियों को अधिकतम संभव सीमा तक घर से काम Work From Home करने के लिए प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया गया है। यह व्यवस्था भीड़भाड़ वाले समय में वाहनों के आवागमन को कम करने में सहायक होगी।

    परिवहन पर पाबंदियां:
    भारी वाहनों पर रोक: दिल्ली की सीमा में बाहरी राज्यों से आने वाले ट्रकों और अन्य भारी/मध्यम मालवाहक वाहनों आवश्यक सेवाओं को छोड़कर के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। यह कदम भारी वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है। निर्माण कार्य पर पाबंदी: GRAP-4 के तहत पहले से ही गैर-आवश्यक निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।

    आगे की राह
    प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए गए ये कदम अल्पकालिक राहत प्रदान करने के उद्देश्य से हैं। दिल्ली-NCR के नागरिकों को भी दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नागरिकों से अपील की है कि वे अत्यंत आवश्यक न होने पर घर से बाहर न निकलें और N-95 जैसे मास्क का उपयोग करें। प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई है कि वे निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करें और सार्वजनिक परिवहन, साइकिलिंग या पैदल चलने को प्राथमिकता दें, ताकि इस राष्ट्रीय संकट से मिलकर लड़ा जा सके।