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  • गाजा में युद्धविराम के लिए ट्रंप का कूटनीतिक दांव, जेरेड कुशनर ने मिस्र में हमास नेताओं से की अहम बातचीत

    गाजा में युद्धविराम के लिए ट्रंप का कूटनीतिक दांव, जेरेड कुशनर ने मिस्र में हमास नेताओं से की अहम बातचीत

    नई दिल्ली । गाजा में जारी इजराइल-हमास संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद और मध्य पूर्व मामलों के दूत जेरेड कुशनर ने मिस्र में हमास के नेताओं के साथ अहम बातचीत की। इस बैठक का केंद्र गाजा में युद्धविराम, संघर्ष समाप्त करने की प्रक्रिया और युद्ध के बाद क्षेत्र के प्रशासन को लेकर प्रस्तावित अमेरिकी योजना रही। बातचीत को ट्रंप प्रशासन की ओर से तैयार किए जा रहे शांति रोडमैप को आगे बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

    बैठक में हमास के राजनीतिक नेता खलील अल-हया भी शामिल रहे। अमेरिका की ओर से कुशनर ने स्पष्ट किया कि ऐसी किसी योजना का समर्थन नहीं किया जाएगा, जिसमें गाजा के लोगों को उनकी जमीन से बाहर जाने के लिए मजबूर किया जाए। इससे संकेत मिलता है कि प्रस्तावित व्यवस्था में गाजा की आबादी को वहीं रखते हुए प्रशासनिक और सुरक्षा ढांचे में बदलाव पर जोर दिया जा रहा है।

    बैठक में युद्ध के बाद गाजा के प्रशासन को लेकर भी चर्चा हुई। अमेरिकी प्रस्ताव के तहत एक नई राष्ट्रीय समिति को क्षेत्र की प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपने की योजना पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही हमास को शासन व्यवस्था से अलग रखने और उसके हथियार तथा सैन्य ढांचा समाप्त करने की मांग सामने रखी गई है। यह मुद्दा बातचीत की सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील शर्तों में शामिल है।

    मिस्र में हुई वार्ता में केवल अमेरिका और हमास ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय मध्यस्थ देशों के प्रतिनिधि भी शामिल रहे। मिस्र, कतर और तुर्की के अधिकारियों ने बातचीत में हिस्सा लिया। मिस्र के खुफिया प्रमुख हसन रशद, कतर के राजनयिक अली अल-थवादी और तुर्की के एक वरिष्ठ अधिकारी ने वार्ता में भाग लिया। बोर्ड ऑफ पीस के दूत निकोले म्लादेनोव और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर भी कुशनर के साथ मौजूद रहे।

    कुशनर की मिस्र और इजराइल यात्रा ऐसे समय हुई है, जब गाजा को लेकर अमेरिकी प्रस्ताव पर वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पहले ही प्रस्तावित योजना को इजराइल के लिए स्वीकार्य नहीं बता चुके हैं। ऐसे में हमास और क्षेत्रीय पक्षों के साथ कुशनर की बातचीत को कूटनीतिक सहमति बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

    वार्ता के बाद हमास ने ट्रंप की योजना के दूसरे चरण को आगे बढ़ाने की तैयारी जताई। संगठन ने मध्यस्थ देशों और बोर्ड ऑफ पीस से इजराइल पर समझौते की शर्तें लागू कराने के लिए दबाव बनाने की अपील की। हमास ने युद्धविराम के उल्लंघन रोकने, इजराइली सैन्य कार्रवाई बंद करने और दूसरे चरण के क्रियान्वयन के लिए स्पष्ट समयसीमा तय करने की मांग भी रखी।

    गाजा में लंबे समय से जारी संघर्ष के कारण युद्धविराम की किसी भी पहल के सामने कई जटिल चुनौतियां बनी हुई हैं। एक तरफ हमास के हथियार और भविष्य की राजनीतिक भूमिका का सवाल है, वहीं दूसरी तरफ इजराइल की सुरक्षा चिंताएं और गाजा के प्रशासन का स्वरूप महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। अमेरिका, मिस्र, कतर और तुर्की की भागीदारी से बातचीत को क्षेत्रीय समर्थन देने की कोशिश हो रही है।

    अब आगे की प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित पक्ष युद्धविराम की शर्तों, गाजा के प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कितनी सहमति बना पाते हैं। कुशनर की यह पहल ट्रंप प्रशासन के लिए गाजा संघर्ष को राजनीतिक समाधान की दिशा में ले जाने की एक अहम कूटनीतिक कोशिश मानी जा रही है।

  • विश्व चैंपियन की दमदार वापसी, अर्जेंटीना ने मिस्र को हराकर क्वार्टर फाइनल का टिकट कटाया

    विश्व चैंपियन की दमदार वापसी, अर्जेंटीना ने मिस्र को हराकर क्वार्टर फाइनल का टिकट कटाया


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 में मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना ने अपने जुझारू खेल का शानदार प्रदर्शन करते हुए क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। अटलांटा में खेले गए राउंड ऑफ-16 मुकाबले में अर्जेंटीना ने मिस्र के खिलाफ 0-2 से पिछड़ने के बाद जबरदस्त वापसी करते हुए 3-2 से रोमांचक जीत दर्ज की। इस यादगार मुकाबले में कप्तान लियोनेल मेसी ने एक गोल करने के साथ एक गोल में असिस्ट भी किया, जबकि एंजो फर्नांडीज ने स्टॉपेज टाइम में विजयी गोल दागकर टीम की जीत सुनिश्चित की।

    मुकाबले की शुरुआत मिस्र के लिए शानदार रही। 15वें मिनट में यासर इब्राहिम ने शानदार हेडर के जरिए गोल कर अपनी टीम को बढ़त दिला दी। अर्जेंटीना ने बराबरी की कई कोशिशें कीं, लेकिन मिस्र के गोलकीपर मुस्तफा शोबीर ने बेहतरीन बचाव करते हुए मेसी की पेनाल्टी समेत कई खतरनाक प्रयास नाकाम कर दिए। पहले हाफ में अर्जेंटीना गोल नहीं कर सकी और दबाव लगातार बढ़ता गया।

    दूसरे हाफ में मिस्र ने 62वें मिनट में मुस्तफा जिको के गोल की बदौलत बढ़त को 2-0 कर दिया। उस समय ऐसा लग रहा था कि मौजूदा विश्व चैंपियन टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगा। हालांकि अर्जेंटीना ने हार नहीं मानी और लगातार आक्रामक खेल जारी रखा।

    79वें मिनट में लियोनेल मेसी ने शानदार मूव बनाते हुए क्रिस्टियन रोमेरो के गोल में अहम भूमिका निभाई, जिससे स्कोर 2-1 हो गया। इसके बाद 83वें मिनट में मेसी ने खुद शानदार फिनिश करते हुए बराबरी का गोल दाग दिया। लुटारो मार्टिनेज की लंबी गेंद पर मेसी ने बेहतरीन नियंत्रण दिखाया और गेंद को गोल में पहुंचाकर अर्जेंटीना को मुकाबले में वापस ला खड़ा किया।

    जब मुकाबला अतिरिक्त समय की ओर बढ़ता नजर आ रहा था, तभी स्टॉपेज टाइम के तीसरे मिनट में एंजो फर्नांडीज ने शानदार गोल कर अर्जेंटीना को 3-2 की बढ़त दिला दी। यह गोल अंततः निर्णायक साबित हुआ और अर्जेंटीना ने रोमांचक जीत के साथ क्वार्टर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली।

    इस मुकाबले में अर्जेंटीना ने शानदार मानसिक मजबूती और संघर्ष का परिचय दिया। दो गोल से पिछड़ने के बावजूद टीम ने धैर्य बनाए रखा और लगातार हमले करते हुए मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। कप्तान मेसी ने एक बार फिर बड़े मुकाबले में अपनी अहमियत साबित की, जबकि एंजो फर्नांडीज ने निर्णायक गोल कर टीम को यादगार जीत दिलाई।

    अब अर्जेंटीना की नजर क्वार्टर फाइनल में जीत की लय बरकरार रखते हुए लगातार दूसरी बार विश्व कप खिताब की ओर कदम बढ़ाने पर होगी।

  • काहिरा हवाई अड्डे पर जब उमड़ा था 'महानायक' के प्रशंसकों का जनसैलाब: खुद अमिताभ बच्चन ने 1991 के उस दौर को बताया था 'राष्ट्रीय संकट'

    काहिरा हवाई अड्डे पर जब उमड़ा था 'महानायक' के प्रशंसकों का जनसैलाब: खुद अमिताभ बच्चन ने 1991 के उस दौर को बताया था 'राष्ट्रीय संकट'

    नई दिल्ली । बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन की लोकप्रियता केवल भारत की सीमाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनके प्रशंसकों की संख्या करोड़ों में है। अस्सी के दशक में जब इंटरनेट और सोशल मीडिया का नामोनिशान नहीं था, तब भी सात समंदर पार मिडिल ईस्ट के देशों में उनकी दीवानगी चरम पर थी। विशेष रूप से मिस्र यानी इजिप्ट में अमिताभ बच्चन को लेकर ऐसा असाधारण क्रेज देखा गया कि वहां की तात्कालिक सरकार के लिए यह चिंता का विषय बन गया था और अंततः उन्हें एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाना पड़ा था।

    साल 1980 के दौर में मिस्र के सिनेमाघरों में जब भी अमिताभ बच्चन की कोई फिल्म लगती थी, तो टिकट खिड़कियों पर मील लंबी लाइनें लग जाती थीं। इस अभूतपूर्व दीवानगी का सीधा नुकसान मिस्र के स्थानीय फिल्म उद्योग को उठाना पड़ रहा था क्योंकि वहां के क्षेत्रीय सिनेमाघरों में दर्शकों की भारी कमी हो गई थी और सन्नाटा पसरने लगा था। अपनी घरेलू फिल्म इंडस्ट्री को मंदी से उबारने और उसे संरक्षण देने के उद्देश्य से मिस्र की सरकार ने एक कड़ा आर्थिक और सांस्कृतिक फैसला लेते हुए अमिताभ बच्चन की फिल्मों के प्रदर्शन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था।

    इस सरकारी प्रतिबंध के बावजूद वहां के आम नागरिकों के दिलों से अमिताभ बच्चन का जादू कम नहीं किया जा सका। मिस्र के लोग उनकी फिल्में देखने के लिए नए-नए रास्ते निकालने लगे और वहां के छोटे-छोटे निजी थिएटरों व बंद कमरों में चोरी-छिपे इन फिल्मों का प्रदर्शन किया जाने लगा। उस दौर में जिन लोगों के पास फिल्में देखने के साधन या टेप रिकॉर्डर उपलब्ध नहीं थे, वे हर गुरुवार को स्थानीय कैफे में बड़ी संख्या में एकत्र होते थे और केवल अमिताभ बच्चन की फिल्मों के ऑडियो गाने सुनकर ही अपनी दीवानगी पूरी किया करते थे। उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि मिस्र की एक स्थानीय फिल्म में अमिताभ बच्चन की सुपरहिट फिल्म ‘गिरफ्तार’ के एक मुख्य दृश्य को हूबहू कॉपी किया गया था।

    मिस्र में अमिताभ बच्चन के इस दबदबे का सबसे बड़ा नजारा साल 1991 में देखने को मिला जब वे काहिरा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हिस्सा लेने के लिए अफ्रीकी महाद्वीप पहुंचे थे। काहिरा हवाई अड्डे पर उनके स्वागत और एक झलक पाने के लिए इतनी विशाल और बेकाबू भीड़ उमड़ पड़ी कि वहां की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई थी। हवाई अड्डे से लेकर शहर की सड़कों तक हालात इस कदर बेकाबू हो गए थे कि खुद अमिताभ बच्चन ने बाद में अपने एक साक्षात्कार में उस माहौल को एक ‘राष्ट्रीय संकट’ जैसी स्थिति के रूप में याद किया था।

    जिस देश की सरकार ने कभी अपनी स्थानीय फिल्म इंडस्ट्री के अस्तित्व को बचाने के लिए अमिताभ बच्चन की फिल्मों को प्रतिबंधित कर दिया था, उसी देश को आखिरकार वैश्विक कला और उनके अभिनय के सामने नतमस्तक होना पड़ा। इस ऐतिहासिक दीवानगी और सांस्कृतिक प्रभाव को स्वीकार करते हुए मिस्र सरकार ने साल 2001 में अमिताभ बच्चन को आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया। वहां उन्हें सिनेमा जगत के सर्वोच्च सम्मानों में से एक ‘एक्टर ऑफ द सेंचुरी’ के खिताब से नवाजा गया, जो यह साबित करता है कि कला को किसी भी देश की भौगोलिक और प्रशासनिक सीमाओं में कैद नहीं किया जा सकता।