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  • Ekadashi 2026 Daan: विजया एकादशी के दिन दान करना क्यों माना जाता है शुभ? जानें किन-किन चीजों का दान करना होता है फलदायी

    Ekadashi 2026 Daan: विजया एकादशी के दिन दान करना क्यों माना जाता है शुभ? जानें किन-किन चीजों का दान करना होता है फलदायी

    Ekadashi 2026 Daan:विजया एकादशी का दिन भगवान विष्णु की आराधना और पुण्य कर्मों के लिए बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पावन तिथि पर व्रत, पूजा और दान करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। खासतौर पर विजया एकादशी पर किया गया दान कई गुना फलदायी माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस दिन किन-किन वस्तुओं का दान करना शुभ माना गया है और इसका क्या आध्यात्मिक महत्व है।

     किन-किन वस्तुओं का दान करना माना जाता है शुभ

    अन्न और चावल का दान
    इस दिन अन्नदान का विशेष महत्व है। खासकर चावल का दान शुभ फलदायी माना गया है। मान्यता है कि अन्न का दान करने से घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती और मां अन्नपूर्णा की कृपा बनी रहती है।
    धार्मिक पुस्तकों का दान
    विजया एकादशी के अवसर पर श्रीमद्भगवद्गीता, विष्णु सहस्रनाम या हनुमान चालीसा जैसी पवित्र पुस्तकों का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। इससे ज्ञान की वृद्धि होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह दान व्यक्ति को मानसिक संतुलन और आध्यात्मिक बल प्रदान करता है।
    पीले वस्त्र का दान
    भगवान विष्णु को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। इसलिए इस दिन पीले वस्त्र दान करने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की परेशानियां धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं। विशेषकर आर्थिक या पारिवारिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए यह दान लाभकारी माना गया है।

    देसी घी का दान
    विजया एकादशी पर शुद्ध देसी घी का दान भी शुभ माना गया है। धार्मिक दृष्टि से घी पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक है। मान्यता है कि घी का दान करने से मान-सम्मान में वृद्धि होती है और कुंडली में गुरु या शुक्र से संबंधित दोषों में भी राहत मिल सकती है।

    तिल और गुड़ का दान
    तिल और गुड़ का दान स्वास्थ्य और मानसिक शांति से जुड़ा माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और आरोग्य की प्राप्ति होती है। यह दान विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है, जिन्हें कार्यों में बार-बार रुकावटों का सामना करना पड़ता है।

  • सफला एकादशी 2025: सफलता के लिए विशेष योग, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त

    सफला एकादशी 2025: सफलता के लिए विशेष योग, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त


    नई दिल्ली / सफला एकादशी 2025 15 दिसंबर को पड़ रही है; व्रत और पूजा करने से सुख-समृद्धि, सफलता और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:56 से 12:27 बजे तक है।सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। सालभर में कुल 24 एकादशी आती हैं जिनमें से कुछ शुक्ल पक्ष में और कुछ कृष्ण पक्ष में पड़ती हैं। इनमें से सफला एकादशी हर साल पौष महीने के कृष्ण पक्ष में मनाई जाती है। इस वर्ष, सफला एकादशी 15 दिसंबर 2025 को पड़ रही है।

    सफला एकादशी का महत्व
    सफला एकादशी के दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के सभी कार्य सफल होते हैं और उसे जीवन में सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस दिन की पूजा से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और धन-समृद्धि की प्राप्ति के योग बनते हैं। इस अवसर पर मनोकामनाओं की पूर्णता की भी मान्यता है।

    सफला एकादशी 2025 तिथि
    वैदिक पंचांग के अनुसार, पौष कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 14 दिसंबर 2025 की रात 08:47 बजे शुरू होकर 15 दिसंबर 2025 की रात 10:08 बजे समाप्त होगी। इसलिए पंचांग के अनुसार 15 दिसंबर को ही सफला एकादशी का व्रत रखा जाएगा।

    सफला एकादशी 2025 शुभ मुहूर्त
    सफला एकादशी के दिन अभिजीत मुहूर्त भी बन रहा है। यह मुहूर्त दोपहर 11:56 बजे से शुरू होकर 12:27 बजे तक रहेगा। इस समय में व्रत रखने और पूजा-अर्चना करने का विशेष लाभ माना जाता है।

    सफला एकादशी पर जाप करने योग्य मंत्र-
    व्रत और पूजा के दौरान निम्नलिखित मंत्रों का जाप करने से विशेष पुण्य और सफलता प्राप्त होती है-

    ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
    ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीवासुदेवाय नमः
    ॐ नमो नारायणाय

    लक्ष्मी-विनायक मंत्र –
    दन्ताभये चक्र दरो दधानं,
    कराग्रगस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।
    धृताब्जया लिंगितमब्धिपुत्रया
    लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।।

    पूजा विधि और लाभ-
    सफला एकादशी पर व्रत रखने से भगवान विष्णु की कृपा हमेशा बनी रहती है। इस दिन की पूजा से हर क्षेत्र में सफलता, धनलाभ और सम्मान की प्राप्ति होती है। जिनकी कोई विशेष मनोकामना होती है, उसे बोलकर या मन ही मन कहकर पूरी होने की मान्यता है।

    विशेष जानकारी-

    इस साल अभिजीत मुहूर्त में पूजा-अर्चना करना और उपवास रखना विशेष शुभ माना गया है। सोलह वर्षों तक व्रत का महत्व बढ़ता है और यह दिन हर भक्त के लिए आध्यात्मिक एवं आर्थिक उन्नति का अवसर लेकर आता है।