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  • फडणवीस और शिंदे से मुलाकात के बाद तेज हुई सियासी चर्चा, शरद गुट ने NDA में शामिल होने की अटकलों को बताया निराधार

    फडणवीस और शिंदे से मुलाकात के बाद तेज हुई सियासी चर्चा, शरद गुट ने NDA में शामिल होने की अटकलों को बताया निराधार


    मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल और जितेंद्र आव्हाड ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से उनके सरकारी आवास ‘नंदनवन’ में करीब 45 मिनट तक बंद कमरे में मुलाकात की। इससे पहले जयंत पाटिल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी देर रात मुलाकात कर चुके थे।

    लगातार हुई इन बैठकों के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या शरद पवार की पार्टी सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के करीब आ रही है। हालांकि दोनों नेताओं ने इन अटकलों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि मुलाकात का राजनीतिक गठबंधन से कोई संबंध नहीं है।

    जयंत पाटिल ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि उनकी शिंदे से मुलाकात क्षेत्र के विकास कार्यों और शहरी विकास विभाग से जुड़े लंबित मामलों को लेकर थी। उन्होंने बताया कि एक नगर परिषद अध्यक्ष की अयोग्यता के खिलाफ दायर अपील पर भी चर्चा की गई।

    वहीं, जितेंद्र आव्हाड ने भी कहा कि इतने लंबे राजनीतिक अनुभव वाला कोई भी नेता यदि किसी बड़े राजनीतिक गठबंधन पर चर्चा करना चाहता है, तो वह इस तरह सार्वजनिक रूप से मुलाकात नहीं करेगा। उनके मुताबिक, इन बैठकों को लेकर लगाए जा रहे राजनीतिक कयास बेबुनियाद हैं।

    आव्हाड ने आरोप लगाया कि उनके क्षेत्र के नगर परिषद अध्यक्ष को अयोग्य ठहराने की कार्रवाई सत्तारूढ़ गठबंधन की दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। उनका कहना है कि इस फैसले के जरिए उन्हें राजनीतिक रूप से झुकाने की कोशिश की जा रही है।

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल जानबूझकर ऐसी अफवाहें फैला रहे हैं ताकि जयंत पाटिल की साफ-सुथरी छवि को नुकसान पहुंचे और पार्टी अध्यक्ष शरद पवार के प्रति उनकी निष्ठा पर सवाल खड़े किए जा सकें। आव्हाड ने कहा कि वे केवल इस पूरे मामले को राज्य के शीर्ष नेतृत्व के सामने रख रहे हैं, क्योंकि इतना बड़ा प्रशासनिक फैसला मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की जानकारी के बिना संभव नहीं हो सकता।

  • शरद पवार की शिंदे से मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल, महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज

    शरद पवार की शिंदे से मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल, महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज


    मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा परिसर में मंगलवार को हुई एक मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से विधान भवन में मुलाकात की। औपचारिक तौर पर इसे शिष्टाचार भेंट माना जा रहा है, लेकिन इसके समय और परिस्थितियों को देखते हुए इसे राजनीतिक नजरिए से भी अहम माना जा रहा है।

    शरद पवार महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद के मुद्दे पर महाराष्ट्र एकीकरण समिति की बैठक में शामिल होने के लिए विधान भवन पहुंचे थे। बैठक के बाद वे सीधे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यालय पहुंचे। इस दौरान उनके साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता जयंत पाटील, जितेंद्र आव्हाड और शशिकांत शिंदे भी मौजूद थे।

    उस समय एकनाथ शिंदे कैबिनेट बैठक में व्यस्त थे, लेकिन पवार के पहुंचने की जानकारी मिलते ही उन्होंने बैठक बीच में रोककर उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच करीब 15 मिनट तक बातचीत हुई। राजनीतिक हलकों में इसे शिंदे की ओर से शरद पवार के प्रति सम्मान और संवाद की पहल के रूप में देखा जा रहा है।

    मुलाकात के बाद शिंदे दोबारा कैबिनेट बैठक में लौट गए, जबकि शरद पवार कुछ देर तक उनके कार्यालय में रुककर अपने विधायकों के साथ चर्चा करते रहे।

    हाल के दिनों में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह सांसद एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हुए थे। इसके बाद यह अटकलें भी लगाई जा रही थीं कि शिंदे की नजर अब शरद पवार गुट के जनप्रतिनिधियों पर भी हो सकती है। ऐसे माहौल में पवार का स्वयं शिंदे के कार्यालय पहुंचना कई राजनीतिक संदेशों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुलाकात से शरद पवार ने अपने विधायकों और नेताओं को यह संकेत देने की कोशिश की कि पार्टी नेतृत्व हर राजनीतिक गतिविधि पर नजर बनाए हुए है। इससे संभावित टूट-फूट की अटकलों के बीच पार्टी कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों का मनोबल बनाए रखने का प्रयास भी माना जा रहा है।

    इस मुलाकात को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के लिए भी एक अप्रत्यक्ष राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। फडणवीस के बजाय सीधे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात कर पवार ने यह संकेत दिया कि वे सत्ता पक्ष के सभी प्रमुख नेताओं के साथ संवाद बनाए रखने की क्षमता रखते हैं। राजनीतिक मामलों में बातचीत के रास्ते खुले रखने की रणनीति शरद पवार की पहचान मानी जाती है।

    हालांकि, इस 15 मिनट की बातचीत में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसका खुलासा अब तक किसी भी पक्ष ने नहीं किया है। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषक इस मुलाकात को आगामी राजनीतिक समीकरणों और रणनीतियों से जोड़कर देख रहे हैं। आने वाले दिनों में ही इस मुलाकात के वास्तविक राजनीतिक मायने स्पष्ट हो सकेंगे।

  • महाराष्ट्र MLC चुनाव में महायुति की प्रचंड जीत: 17 में से 16 सीटों पर कब्जा, नासिक में बागी ने पलटा खेल

    महाराष्ट्र MLC चुनाव में महायुति की प्रचंड जीत: 17 में से 16 सीटों पर कब्जा, नासिक में बागी ने पलटा खेल


    नई दिल्ली ।महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर राज्य की राजनीति में महायुति की मजबूत पकड़ को साबित कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सत्तारूढ़ गठबंधन महायुति ने 17 में से 16 सीटों पर जीत दर्ज कर विपक्ष को करारा झटका दिया है। चुनाव परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में महायुति की संगठनात्मक ताकत और राजनीतिक प्रभाव अभी भी मजबूत बना हुआ है।

    18 जून को हुए मतदान के बाद सोमवार को घोषित परिणामों में भाजपा सबसे बड़ी विजेता बनकर उभरी। पार्टी ने कुल 9 सीटों पर जीत हासिल की। वहीं शिवसेना और एनसीपी के उम्मीदवारों ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में शानदार प्रदर्शन किया। इससे पहले छह सीटों पर महायुति के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो चुके थे, जिससे गठबंधन की स्थिति और मजबूत दिखाई दी।

    हालांकि इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा नासिक सीट की रही। यहां भाजपा के बागी नेता गोकुल गिट्टे ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ते हुए शिवसेना उम्मीदवार नरेंद्र दराडे को पराजित कर दिया। गिट्टे को भाजपा से टिकट नहीं मिला था, जिसके बाद उन्होंने बगावती तेवर अपनाते हुए निर्दलीय मैदान में उतरने का फैसला किया। उनकी जीत को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। यह परिणाम दर्शाता है कि स्थानीय स्तर पर बागी नेताओं की ताकत कई बार गठबंधन की रणनीति पर भारी पड़ सकती है।

    चुनाव परिणामों में नांदेड़ सीट से भाजपा के अमरनाथ राजुरकर ने जीत दर्ज की। नागपुर उपचुनाव में भाजपा के डॉ. राजीव पोतदार विजयी रहे। भंडारा-गोंदिया से अविनाश ब्राह्मणकर, छत्रपति संभाजीनगर-जालना से सुहास शिरसाट, जलगांव से नंदकिशोर महाजन, सांगली-सतारा से धैर्यशील कदम, सोलापुर से राजेंद्र राउत, धाराशिव-लातूर-बीड से बसवराज पाटिल और अमरावती से प्रवीण पोटे ने जीत हासिल की।

    वहीं परभणी-हिंगोली सीट पर शिवसेना के सईद खान ने विजय हासिल कर महायुति की सफलता में योगदान दिया। इन नतीजों ने विपक्षी दलों कांग्रेस, शिवसेना उद्धव गुट और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शरद पवार गुट के लिए चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि कई महत्वपूर्ण सीटों पर उनके उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा।

    चुनाव से पहले ही छह सीटों पर महायुति के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए थे। इनमें वर्धा-चंद्रपुर-गढ़चिरौली, यवतमाल, रायगढ़-रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग, ठाणे-पालघर और अहिल्यानगर जैसी महत्वपूर्ण सीटें शामिल हैं। विपक्ष इन सीटों पर प्रभावी चुनौती खड़ी नहीं कर पाया था।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधान परिषद चुनाव के परिणाम आगामी स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों के लिए भी संकेत दे सकते हैं। हालांकि नासिक में बागी उम्मीदवार की जीत ने यह भी दिखाया है कि टिकट वितरण और स्थानीय असंतोष भविष्य में गठबंधन दलों के लिए चुनौती बन सकता है।

    कुल मिलाकर महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में महायुति ने अपनी राजनीतिक ताकत का प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। लेकिन नासिक का परिणाम यह भी याद दिलाता है कि राजनीति में कभी-कभी एक बागी उम्मीदवार भी बड़े समीकरण बदलने की क्षमता रखता है।

  • महाराष्ट्र की सियासत में ओमराजे निंबालकर बने गेमचेंजर, उद्धव-शिंदे की बाजी पर टिकी नजरें

    महाराष्ट्र की सियासत में ओमराजे निंबालकर बने गेमचेंजर, उद्धव-शिंदे की बाजी पर टिकी नजरें


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर तीव्र सियासी हलचल के दौर में है जहां शिवसेना के दो धड़ों उद्धव ठाकरे गुट और एकनाथ शिंदे गुट के बीच शक्ति संतुलन की जंग और तेज हो गई है। इस पूरे राजनीतिक समीकरण के केंद्र में इस समय धाराशिव से सांसद ओमराजे निंबालकर का रुख सबसे अहम माना जा रहा है जिनका संभावित फैसला दोनों खेमों की रणनीति को सीधे प्रभावित कर सकता है।

    ओमराजे निंबालकर को लेकर सस्पेंस इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि हाल ही में उनके परिवार से जुड़े पुराने पवनराजे निंबालकर हत्याकांड मामले में अदालत ने आरोपियों को बरी कर दिया है। इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल और तेज हो गई है। उद्धव गुट के नेता लगातार उन्हें अपने साथ बनाए रखने की कोशिश में जुटे हैं जबकि शिंदे गुट भी इस समीकरण में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए सक्रिय दिखाई दे रहा है।

    सूत्रों के मुताबिक इस पूरे घटनाक्रम के बीच ऑपरेशन टाइगर की चर्चा भी तेज है जिसके तहत कुछ सांसदों और विधायकों के पाला बदलने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। कहा जा रहा है कि यदि उद्धव गुट के कुछ सांसद शिंदे गुट में शामिल होते हैं तो संख्या बल का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है। ऐसे में ओमराजे निंबालकर का रुख निर्णायक साबित हो सकता है।

    ओमराजे ने अभी तक किसी भी गुट के पक्ष में खुलकर बयान नहीं दिया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि वे अपने भविष्य का फैसला अपने क्षेत्र के लोगों और समर्थकों से चर्चा के बाद ही करेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने उद्धव ठाकरे या आदित्य ठाकरे के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की है और न ही भविष्य में ऐसी कोई बात करने का इरादा रखते हैं।

    इस बीच शिवसेना (यूबीटी) की ओर से उनके संपर्क में रहने की कोशिशें जारी हैं। वहीं पार्टी की ओर से जारी व्हिप के बावजूद उनकी अनुपस्थिति ने सियासी अटकलों को और हवा दे दी है। दूसरी ओर पार्टी ने कुछ सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्थिति को गंभीर बना दिया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महाराष्ट्र की मौजूदा सियासी जंग में यह सिर्फ एक व्यक्ति का फैसला नहीं बल्कि पूरे शक्ति संतुलन का मुद्दा बन चुका है। उद्धव और शिंदे दोनों ही गुट इस समय रणनीतिक बढ़त लेने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं और आने वाले दिनों में ओमराजे निंबालकर का रुख इस पूरे राजनीतिक खेल की दिशा तय कर सकता है।

  • इंटिमेट सीन पर बड़ा दावा सिद्धार्थ मल्होत्रा और जैकलीन को लेकर वायरल किस्सा

    इंटिमेट सीन पर बड़ा दावा सिद्धार्थ मल्होत्रा और जैकलीन को लेकर वायरल किस्सा

    नई दिल्ली । हाल ही में एंटरटेनमेंट जगत से जुड़ा एक पुराना किस्सा फिर से चर्चा में आ गया है। यह मामला एक पॉडकास्ट बातचीत से सामने आया है जिसमें फेमस एंटरटेनमेंट जर्नलिस्ट सिमी चंदोक ने फिल्म शूटिंग के दौरान इंटिमेट सीन को लेकर कुछ कथित घटनाओं का जिक्र किया है। इन दावों के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है और लोग इस पूरे मामले को लेकर अलग अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

    सिमी चंदोक ने बातचीत के दौरान कहा कि फिल्म सेट पर कई बार ऐसे हालात बन जाते हैं जब इंटिमेट सीन की शूटिंग के दौरान अभिनेता और अभिनेत्री अपने किरदार में इतने ज्यादा डूब जाते हैं कि कट बोलने के बाद भी कुछ पल तक उसी भाव में बने रह जाते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि एक फिल्म के शूटिंग सेट पर सिद्धार्थ मल्होत्रा और जैकलीन फर्नांडिस के बीच एक किसिंग सीन के दौरान ऐसा ही कुछ हुआ था। उनके अनुसार सीन खत्म होने के बाद और टेक बंद होने के बावजूद दोनों कलाकार कुछ देर तक उसी स्थिति में रहे।

    इस बातचीत में आगे सिमी ने एक और फिल्म का जिक्र किया और बताया कि एक एक्शन कॉमेडी फिल्म की शूटिंग के दौरान टाइगर श्रॉफ और जैकलीन फर्नांडिस के बीच भी एक इंटिमेट सीन फिल्माया गया था। उनके अनुसार उस समय भी सीन खत्म होने के बाद तुरंत अलग होने की स्थिति नहीं बनी और कुछ सेकंड तक दोनों कलाकार उसी इमोशनल फ्लो में रहे।

    हालांकि यह पूरा बयान एक जर्नलिस्ट के पॉडकास्ट इंटरव्यू पर आधारित है और इसमें किसी भी कलाकार की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे सीन शूट करना सामान्य माना जाता है लेकिन प्रोफेशनल सेट पर हर चीज स्क्रिप्ट और डायरेक्शन के अनुसार होती है और टेक खत्म होने के बाद सभी कलाकार अपने कैरेक्टर से बाहर आ जाते हैं।

    सिद्धार्थ मल्होत्रा और जैकलीन फर्नांडिस की फिल्म एक जेंटलमैन साल दो हजार सत्रह में रिलीज हुई थी। यह एक एक्शन कॉमेडी फिल्म थी जिसे राज एंड डीके ने डायरेक्ट किया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर खास प्रदर्शन नहीं कर सकी थी और फ्लॉप रही थी। इसी तरह टाइगर श्रॉफ और जैकलीन फर्नांडिस की फिल्म ए फ्लाइंग जट्ट साल दो हजार सोलह में रिलीज हुई थी जिसे रेमो डिसूजा ने डायरेक्ट किया था। यह फिल्म भी दर्शकों के बीच ज्यादा सफल नहीं हो पाई थी।

    इन पुराने बयानों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तरह तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोग इसे सिर्फ शूटिंग का प्रोफेशनल हिस्सा बता रहे हैं जबकि कुछ इसे बेवजह बढ़ाया गया मुद्दा मान रहे हैं। फिलहाल यह मामला केवल दावों और चर्चाओं तक ही सीमित है और किसी भी तरह की आधिकारिक पुष्टि मौजूद नहीं है।

  • जून में फिर घिरे उद्धव ठाकरे! सांसदों के बाद विधायकों में टूट की आशंका, ‘ऑपरेशन टाइगर-2’ की चर्चाओं से महाराष्ट्र की सियासत गरमाई

    जून में फिर घिरे उद्धव ठाकरे! सांसदों के बाद विधायकों में टूट की आशंका, ‘ऑपरेशन टाइगर-2’ की चर्चाओं से महाराष्ट्र की सियासत गरमाई


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में जून का महीना एक बार फिर शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के लिए चुनौती लेकर आया है। वर्ष 2022 में जून के महीने में ही एकनाथ शिंदे की बगावत ने शिवसेना को दो हिस्सों में बांट दिया था और राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल आया था। चार साल बाद जून 2026 में एक बार फिर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के सामने राजनीतिक संकट गहराता दिखाई दे रहा है। इस बार शुरुआत सांसदों की बगावत से हुई है और अब चर्चा विधायकों की संभावित टूट को लेकर हो रही है।

    हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के बागी रुख ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि आने वाले दिनों में पार्टी के कुछ विधायक भी पाला बदल सकते हैं। यही वजह है कि महाराष्ट्र की राजनीति में तथाकथित ‘ऑपरेशन टाइगर-2’ को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गतिविधियों ने इन चर्चाओं को और बल दिया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 22 जून से शुरू होकर 10 जुलाई तक चलने वाले महाराष्ट्र विधानमंडल के मानसून सत्र के दौरान या उसके बाद राज्य की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम देखने को मिल सकता है। ऐसे समय में उद्धव ठाकरे के लिए अपनी पार्टी के विधायकों और नेताओं को एकजुट बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

    विधानसभा में शिवसेना (यूबीटी) के पास वर्तमान में 20 विधायक हैं, जबकि विधान परिषद में उसके छह सदस्य हैं। महाविकास आघाड़ी (एमवीए) के भीतर भी उद्धव ठाकरे की पार्टी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी मानी जाती है। कांग्रेस के पास 16 विधायक और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के पास 10 विधायक हैं। दूसरी ओर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के पास 57 विधायक और विधान परिषद में आठ सदस्य हैं, जिससे उनका संगठनात्मक और राजनीतिक आधार कहीं अधिक मजबूत दिखाई देता है।

    इसी बीच शिवसेना के विधायक कृपाल तुमाने के एक बयान ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने दावा किया कि शिवसेना (यूबीटी) के 20 में से 16 विधायक शिंदे नेतृत्व के संपर्क में हैं। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे पार्टी में संभावित असंतोष और टूट की चर्चाओं को हवा मिली है।

    दूसरी ओर महाराष्ट्र सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री और शिवसेना नेता संजय शिरसाट ने कहा है कि उनकी पार्टी कोई ‘ऑपरेशन टाइगर’ नहीं चला रही है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई नेता या जनप्रतिनिधि स्वेच्छा से उनके साथ जुड़ना चाहता है तो उसका स्वागत किया जाएगा। इस बयान को भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में लगातार बदलते समीकरणों को देखते हुए आने वाले सप्ताह बेहद अहम माने जा रहे हैं। यदि विधायकों में किसी प्रकार की टूट होती है तो इसका असर केवल शिवसेना (यूबीटी) पर ही नहीं, बल्कि पूरे विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी की राजनीति पर भी पड़ सकता है। ऐसे में सभी की निगाहें अब मानसून सत्र और उसके बाद होने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिकी हुई हैं।

  • ‘अपने बयान पर कायम हूं’: कुणाल कामरा ने एकनाथ शिंदे पर टिप्पणी मामले में माफी से किया इनकार

    ‘अपने बयान पर कायम हूं’: कुणाल कामरा ने एकनाथ शिंदे पर टिप्पणी मामले में माफी से किया इनकार

    महाराष्ट्र। मशहूर स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा गुरुवार को महाराष्ट्र विधानसभा की एक कमेटी के सामने पेश हुए।
    यह मामला उनके द्वारा राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर की गई टिप्पणी से जुड़ा है। पूछताछ के दौरान कामरा ने स्पष्ट कहा कि उन्हें अपने बयान पर कोई पछतावा नहीं है और वे माफी भी नहीं मांगेंगे।

    कमेटी के समक्ष पेशी के बाद कामरा ने सोशल मीडिया पर भी लिखा कि वे अपने बयान पर कायम हैं और झूठी या औपचारिक माफी नहीं देंगे। उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस जारी होने के बाद इस मामले की जांच के लिए विधानसभा की कमेटी गठित की गई थी।

    कमेटी में पूछे गए सवाल

    कमेटी के अध्यक्ष प्रसाद लाड ने बताया कि कामरा से करीब 24 सवाल पूछे गए। उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें अपने बयान पर पछतावा है, जिस पर उन्होंने इनकार किया। माफी मांगने के सवाल पर भी उन्होंने साफ कहा कि यदि वे माफी मांगते हैं तो वह सच्ची नहीं होगी और इससे कलाकारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

    माफी पर कमेटी का रुख

    कमेटी ने कामरा को बताया कि यदि वे बिना शर्त माफी मांगते हैं तो मामले पर अलग तरीके से विचार किया जा सकता है। इस पर उनके वकील ने कहा कि वे इस बारे में चर्चा कर लिखित जवाब ईमेल के जरिए देंगे।

    गौरतलब है कि इस मामले की शिकायत प्रवीण दरेकर ने दर्ज कराई थी, जो भारतीय जनता पार्टी के विधान परिषद सदस्य हैं।

  • एकनाथ शिंदे से मुलाकात को लेकर महाराष्ट्र की सियासत में हलचल, राज ठाकरे बोले- मैं कल CM से मिल सकता हूं

    एकनाथ शिंदे से मुलाकात को लेकर महाराष्ट्र की सियासत में हलचल, राज ठाकरे बोले- मैं कल CM से मिल सकता हूं


    नई दिल्‍ली ।  राज ठाकरे ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से अपनी हालिया मुलाकात को लेकर उठे राजनीतिक कयासों पर साफ प्रतिक्रिया दी है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकरे ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि दो नेताओं की हर मुलाकात को राजनीतिक चश्मे से देखना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा चुनाव खत्म हो चुके हैं। यदि राज्य के हित में सकारात्मक काम करने हैं, तो क्या हमें एक-दूसरे से नहीं मिलना चाहिए? मैं कल मुख्यमंत्री से भी मिल सकता हूं। महाराष्ट्र के कई अहम मुद्दे हैं, उन्हीं पर चर्चा के लिए उनसे मिलूंगा। अगर आप वहां होते, तो आपसे भी यही बात करता।

    उन्‍होंने विकास की परिभाषा पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सिर्फ सड़कें बनाना ही डेवलपमेंट नहीं है। उन्‍होंने कहा कि शहरों की हालत ऐसी हो गई है मानो उन पर सूजन आ गई हो, जगह वही है, सड़कें वही हैं, लेकिन आबादी और वाहनों की संख्या बेतहाशा बढ़ चुकी है। उन्होंने खास तौर पर पार्किंग की अव्यवस्था को गंभीर समस्या बताया। इमारतों में पार्किंग की जगह होने के बावजूद गाड़ियां सड़कों पर खड़ी कर दी जाती हैं, जिससे यातायात और भी बदहाल होता है।

    राज ठाकरे ने शहरी अव्यवस्था पर उठाए सवाल

    राज ठाकरे ने शहरी भीड़ और अव्यवस्था को लेकर कड़ी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि शहरों में जो लोग रोजगार या अन्य कारणों से आते हैं, वे वापस नहीं लौटते, जिससे बुनियादी ढांचे पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। इस मुद्दे पर उन्होंने प्रशासनिक अधिकारी भूषण गगरानी से भी फोन पर चर्चा करने की बात कही।

    मनसे प्रमुख ने ओला-उबर जैसी कैब सेवाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पार्किंग और यातायात नियमों को लेकर अनुशासन की कमी साफ दिखती है। उन्‍होंने कहा जब तक नियम तोड़ने वालों से सख्ती से जुर्माना नहीं वसूला जाएगा, तब तक शहरों में व्यवस्था बहाल नहीं हो सकती। उन्होंने व्यवस्था पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि हालात ऐसे हो गए हैं मानो बाड़ ही खेत को खा रही हो। उन्‍होंने सवाल उठाया कि जिन लोगों द्वारा कागजात और अनुमति दी जाती है, उन पर जवाबदेही कब तय होगी?

    आगे उन्होंने कहा कि क्या राज्य को यह तय नहीं करना चाहिए कि किसी शहर की क्षमता कितनी है और वहां कितनी आबादी रह सकती है? उन्‍होंने कहा कि अनियंत्रित शहरीकरण से शहरों की स्थिति बिगड़ती जा रही है। एक नागरिक और विपक्षी नेता होने के नाते इन मुद्दों पर बोलना उनकी जिम्मेदारी है। राज ठाकरे ने यह भी कहा कि पहले चुनाव के बाद नेता आपसी मतभेद भुलाकर संवाद करते थे, लेकिन अब राजनीतिक दूरी बढ़ती जा रही है। उन्‍होंने कहा कि केवल अलग-थलग रहकर समस्याओं का समाधान नहीं निकलेगा, संवाद और समन्वय जरूरी है।

  • BMC चुनाव 2026: 22 शहरों में जीरो, मुंबई में भी दहाई का आंकड़ा नहीं, MNS का करारी हार का अलार्म, राज ठाकरे की पार्टी बेहाल

    BMC चुनाव 2026: 22 शहरों में जीरो, मुंबई में भी दहाई का आंकड़ा नहीं, MNS का करारी हार का अलार्म, राज ठाकरे की पार्टी बेहाल


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र में BMC समेत 29 नगर निगम क्षेत्रों के 2869 वार्डों के लिए हुए चुनाव में बीजेपी और उसके गठबंधन ने निर्णायक बढ़त बनाई है। बीएमसी में पहली बार बीजेपी बहुमत की ओर बढ़ती दिख रही है, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 282 वार्डों में बढ़त दर्ज की है।

    राज ठाकरे की पार्टी MNS का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। मुंबई की 227 सीटों में MNS केवल 5 सीटों पर बढ़त दर्ज कर पा रही है। कल्याण-डोंबिवली में 122 सीटों में सिर्फ 4 सीट, ठाणे की 131 सीटों में केवल 1 सीट, नासिक की 122 सीटों में सिर्फ 2 सीट और नवी मुंबई की 1 सीट पर ही पार्टी आगे है।

    पूरे महाराष्ट्र में MNS को केवल 12 सीटें मिलीं, जबकि 22 शहरों में पार्टी का खाता तक नहीं खुला। इन शहरों में पुणे, नागपुर, कोल्हापुर, सांगली-मिरज, मीरा-भायंदर, वसई-विरार, भिवंडी, पनवेल, परभणी, जलगांव, धुले, नांदेड़, लातूर, अमरावती, अकोला और चंद्रपुर शामिल हैं।

    बीजेपी गठबंधन का प्रदर्शन जोरदार रहा। बीजेपी ने 1064 वार्डों में बढ़त बनाई, वहीं एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 282 वार्डों में बढ़त दर्ज की। कांग्रेस को 222 सीटें मिली हैं।
    मुंबई में ठाकरे ब्रदर्स ने साथ आकर चुनाव लड़ा, लेकिन MNS को केवल 5 सीटें ही मिलीं।

    पुणे और नासिक में राज ठाकरे ने खास जोर लगाया था, लेकिन परिणाम बेहद कमजोर रहे।
    विश्लेषकों का कहना है कि बीजेपी और शिंदे की शिवसेना ने महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव में अपनी पकड़ मजबूत कर दी है। दूसरी ओर, MNS और उद्धव की शिवसेना का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, जिससे राज ठाकरे की राजनीतिक चमक पर सवाल खड़े हो गए हैं।
    इस चुनाव से यह साफ हो गया है कि महाराष्ट्र में बीजेपी गठबंधन की ताकत और विस्तार लगातार बढ़ रहा है, जबकि MNS अब सिर्फ कुछ शहरों तक ही सीमित नजर आ रही है।
  • BMC Election 2026: सिर्फ नगर निगम नहीं, मुंबई की असली मिनी सरकार

    BMC Election 2026: सिर्फ नगर निगम नहीं, मुंबई की असली मिनी सरकार


    नई दिल्ली। मुंबई की राजनीतिक और प्रशासनिक धड़कनें इन दिनों बीएमसी चुनावों के साथ जोर पकड़ रही हैं। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) को अक्सर सिर्फ एक नगर निगम समझा जाता है, लेकिन यह शहर की असली मिनी सरकार की तरह काम करती है। जहां इस पर सत्ता होती है, वहां शहर की रफ्तार, विकास और जीवन स्तर तय होते हैं। 227 वार्डों के लिए 52.94% मतदान के साथ बीएमसी चुनाव इस बार भी देश की सबसे अमीर और ताकतवर नगर निगम को लेकर सियासी दिलचस्पी का केंद्र बन गया है।

    बीएमसी का इतिहास और सियासी महत्व
    बीएमसी की स्थापना 1865 में हुई थी और यह मुंबई की स्थानीय सरकार की तरह काम करती है। पिछले दो दशकों में शिवसेना का इस पर दबदबा रहा, लेकिन अब पार्टी दो धड़ों में बंटी हुई है

    एक का नेतृत्व उद्धव ठाकरे कर रहे हैं, जबकि दूसरा धड़ा एकनाथ शिंदे के हाथ में है। इस वजह से बीएमसी चुनाव राजनीतिक तौर पर बेहद अहम माना जाता है।

    सड़क और यातायात: मुंबई का कनेक्शन बीएमसी से
    मुंबई का सड़क नेटवर्क लगभग 2,050 किलोमीटर लंबा है। इन सड़कों का निर्माण, रखरखाव और मरम्मत बीएमसी की जिम्मेदारी है। खासतौर पर मानसून में सड़कें गड्ढों से भर जाती हैं, जिससे शहर में यातायात प्रभावित होता है। बीएमसी 700 किलोमीटर सड़कों को सीमेंट कंक्रीट में बदलने का काम कर रही है, जिस पर करीब 17,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके साथ ही फ्लाईओवर, पुल, लिंक रोड और कोस्टल रोड जैसे बड़े प्रोजेक्ट भी बीएमसी की देखरेख में हैं, जिनसे शहर में यातायात की गति बढ़ी है।

    पानी की आपूर्ति और झीलों का प्रबंधन
    मुंबई की पेयजल आपूर्ति सात झीलों पर निर्भर हैतुलसी, विहार, भात्सा, तानसा, अपर वैतरणा, मिडिल वैतरणा और मोडक सागर। इनमें से सिर्फ दो झीलें शहर की सीमा में हैं। बीएमसी इन सभी झीलों का प्रबंधन करती है, पानी को शुद्ध करती है और पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए घर-घर तक पहुंचाती है। लीकेज ठीक करना और बढ़ती आबादी के अनुसार व्यवस्था अपडेट करना भी उसकी जिम्मेदारी है।

    कचरा प्रबंधन और सफाई
    मुंबई में प्रतिदिन 8,000 से 10,000 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। इसे इकट्ठा करना, प्रोसेसिंग प्लांट और लैंडफिल तक पहुंचाना बीएमसी का काम है। इसके अलावा सड़कों की सफाई, सार्वजनिक शौचालयों का रखरखाव और सीवेज ट्रीटमेंट भी नगर निगम की जिम्मेदारी में आता है।

    स्वास्थ्य और शिक्षा
    बीएमसी देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों में से एक संचालित करती है। इसके तहत चार मेडिकल कॉलेज अस्पताल, 16 सामान्य अस्पताल, चार विशेष अस्पताल, डिस्पेंसरी और मातृत्व गृह आते हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान बीएमसी की भूमिका पूरे देश में सराही गई थी। शिक्षा के क्षेत्र में बीएमसी 1,100 से ज्यादा नगरपालिका स्कूल चलाती है, जिनमें गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों को कम खर्च में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलती है।

    बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट
    मुंबई कोस्टल रोड, गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड और वर्सोवा-भायंदर कोस्टल रोड जैसे प्रोजेक्ट बीएमसी के तहत विकसित किए गए हैं।

    इसके अलावा शहर में 340 से ज्यादा पुल और स्काईवॉक का रखरखाव भी बीएमसी करती है। ये सभी प्रोजेक्ट न सिर्फ यातायात को बेहतर बनाते हैं बल्कि शहर के विकास और आर्थिक गतिविधियों को भी गति देते हैं।

    बीएमसी चुनाव केवल नगर निगम की कुर्सी के लिए नहीं, बल्कि मुंबई की असली मिनी सरकार के नेतृत्व के लिए अहम हैं। सड़क, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और बड़े प्रोजेक्ट्सबीएमसी का दायरा शहर के हर पहलू में फैला है। इसलिए इस चुनाव के नतीजे न केवल राजनीतिक बल्कि शहरी जीवन और विकास की दिशा तय करने वाले होंगे।