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  • पहले चरण के मतदान के बाद बढ़ा राजनीतिक आत्मविश्वास, 152 सीटों में बड़ी जीत और नई सरकार बनने का संकेत

    पहले चरण के मतदान के बाद बढ़ा राजनीतिक आत्मविश्वास, 152 सीटों में बड़ी जीत और नई सरकार बनने का संकेत

    नई दिल्ली। कोलकाता में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान केंद्रीय नेतृत्व ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के बाद महत्वपूर्ण राजनीतिक दावा किया है। आंतरिक आकलन के आधार पर यह कहा गया कि पहले चरण की 152 सीटों में से 110 से अधिक सीटों पर जीत मिलने की संभावना है। इस दावे के साथ यह भी संकेत दिया गया कि आगामी चरणों को ध्यान में रखते हुए राज्य में नई सरकार बनने की स्थिति बन रही है।

    पहले चरण में रिकॉर्ड स्तर पर हुए मतदान को लेकर इसे जनता की सक्रिय भागीदारी और राजनीतिक बदलाव की इच्छा का संकेत माना गया। यह कहा गया कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं का मतदान केंद्रों तक पहुंचना इस बात को दर्शाता है कि लोग लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास रखते हैं और अपने भविष्य को लेकर सजग हैं। इस उत्साह को राज्य की राजनीति में संभावित बदलाव के रूप में भी देखा जा रहा है।

    संबोधन के दौरान यह भी कहा गया कि देश के विभिन्न हिस्सों में विकास और प्रशासनिक सुधारों के चलते जनता का भरोसा बढ़ा है और यही विश्वास अब पश्चिम बंगाल में भी दिखाई दे रहा है। मतदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा गया कि उन्होंने बड़ी संख्या में मतदान कर लोकतंत्र को मजबूत किया है। साथ ही आगामी चरणों में भी मतदाताओं से निर्भय होकर मतदान करने की अपील की गई।

    राज्य की वर्तमान स्थिति को लेकर कानून-व्यवस्था और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी चिंता जताई गई। यह कहा गया कि किसी भी राज्य में नागरिकों का सुरक्षित महसूस करना आवश्यक है और इसके लिए मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था जरूरी है। यह भी संकेत दिया गया कि यदि नई सरकार बनती है तो इन पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा और व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

    चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी जोर दिया गया और कहा गया कि मतदाताओं को बिना किसी दबाव के अपने मताधिकार का उपयोग करने का अवसर मिलना चाहिए। लोकतंत्र की मजबूती इसी पर निर्भर करती है कि हर नागरिक स्वतंत्र रूप से अपने विचार व्यक्त कर सके और चुनाव में भागीदारी कर सके।

    राजनीतिक दृष्टि से यह चुनाव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां पहले चरण के मतदान प्रतिशत और विभिन्न दावों के बीच आगामी चरणों की भूमिका निर्णायक होगी। चुनाव परिणाम राज्य की राजनीतिक दिशा तय करेंगे और यह स्पष्ट करेंगे कि मतदाताओं ने किस प्रकार का जनादेश दिया है।

  • प्रशांत किशोर का VIDEO वायरल, 'जितने लोग हमारे साथ फोटो खींचते हैं उतना वोट भी नहीं मिला'

    प्रशांत किशोर का VIDEO वायरल, 'जितने लोग हमारे साथ फोटो खींचते हैं उतना वोट भी नहीं मिला'


    नई दिल्ली । जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले कई बड़े-बड़े दावे किए थे. पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने तक की बात कही थी लेकिन रिजल्ट के बाद पार्टी जीरो पर आउट हो गई. अब प्रशांत किशोर हार का मंथन कर रहे हैं. अलग-अलग जिलों में जाकर कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं. इस बीच उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें वे ये कह रहे हैं कि जितने लोगों ने उनके साथ तस्वीर खिंचवाई उतना भी वोट नहीं मिला.

    वायरल वीडियो कहां का है ये साफ नहीं हो सका है. वीडियो में प्रशांत किशोर कार्यकर्ताओं से बातचत करते नजर आ रहे हैं. वे कहते हैं, “किसके पास प्रमाण है कि कौन ईमानदारी से काम कर रहा है? जितने लोग हमारे साथ फोटो खींचते हैं उतना वोट हमको नहीं मिला और सब आदमी यही कह रहा है कि भैया हम ही किए हैं दूसरा नहीं किया. उन बातों का कोई मतलब नहीं है.”

    प्रशांत किशोर ने किया एनडीए पर हमला

    दूसरी ओर प्रशांत किशोर बीते मंगलवार 17 फरवरी, 2026 को बेगूसराय पहुंचे. इस दौरान उन्होंने बिहार में शराबबंदी और बढ़ रहे अपराध को लेकर एनडीए सरकार पर हमला बोला. एनडीए की सरकार चुनने पर जनता को भी खूब सुनाया. प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर शराबबंदी से महिलाओं का सशक्तिकरण हो रहा है तो इसे पूरे देश में लागू करना चाहिए.  मीडिया से प्रशांत किशोर ने कहा कि जन सुराज ने तीन सालों तक रणनीति बनाकर काम किया. जनता ने लगभग 18 लाख वोट देकर सेवा के लिए उनको चुना, बिहार छोड़कर जाने के लिए नहीं. वे जनता के आदेश का पालन कर रहे हैं.

    तो सरकार एनडीए के एजेंडे पर चलेगी

    प्रशांत किशोर ने कहा कि पिछले तीन सालों से जन सुराज की ओर से एक ही बात समझाई जा रही है कि जो बोओगे वही काटोगे. अगर आप एनडीए को चुनेंगे तो सरकार एनडीए के एजेंडे पर ही चलेगी. एनडीए का एजेंडा क्लियर है वो पूरा देश देख रहा है.  नीट छात्रा की मौत पर प्रशांत किशोर ने कहा कि पुलिस ने सबसे पहले इसको आत्महत्या करार दे दिया. इसे हत्या मानने से इनकार कर दिया. इस मामले में वो जब पीड़िता के परिजनों से मिले तब जाकर सरकार की नींद खुली. एसआईटी का गठन किया गया. इसके बाद दो पुलिस पदाधिकारी सस्पेंड हुए.