इस चुनाव में मतदाता सूची को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। जानकारी के अनुसार, वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए 12.90 लाख से ज्यादा आवेदन लंबित थे, लेकिन अब तक बेहद कम आवेदनों को ही मंजूरी मिल सकी है। इस मुद्दे ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
पहले चरण में भी इसी तरह की शिकायतें सामने आई थीं, जहां बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची में शामिल नहीं हो पाए थे। विपक्षी दलों ने इसे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जोड़कर सवाल उठाए हैं।
दूसरे चरण को चुनाव का सबसे निर्णायक चरण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें कई शहरी और राजनीतिक रूप से संवेदनशील इलाके शामिल हैं। कोलकाता, हावड़ा, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, हुगली और नदिया जैसे जिलों में मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है।
इन्हीं क्षेत्रों को चुनावी परिणामों का “गेम चेंजर” भी कहा जाता है, क्योंकि यहां के नतीजे अक्सर सत्ता की दिशा तय करते हैं।
चुनाव के इस चरण में प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का दावा है कि यह उसका मजबूत गढ़ है और यहां से उसे बड़ी जीत मिलेगी। वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का कहना है कि दक्षिण बंगाल में मजबूत प्रदर्शन के बिना सत्ता तक पहुंचना संभव नहीं है।
कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल चुनाव का यह चरण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बड़े पैमाने पर मतदान, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और सियासी घमासान के बीच यह चरण चुनाव के अंतिम परिणामों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

