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  • हम हारे नहीं, हराए गए, ममता बनर्जी का बड़ा आरोप, चुनाव आयोग पर उठाए सवाल; बंगाल में सियासी संग्राम तेज

    हम हारे नहीं, हराए गए, ममता बनर्जी का बड़ा आरोप, चुनाव आयोग पर उठाए सवाल; बंगाल में सियासी संग्राम तेज



    नई दिल्ली। ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उनकी पार्टी चुनाव नहीं हारी, बल्कि उन्हें हराया गया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए।ममता बनर्जी ने भारत निर्वाचन आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि चुनाव निष्पक्ष तरीके से नहीं कराए गए। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया में कई अनियमितताएं देखने को मिलीं।

    ‘सीटों में गड़बड़ी’ का दावा
    TMC प्रमुख ने आरोप लगाया कि कई सीटों पर नतीजे प्रभावित किए गए। उनका कहना है कि विपक्ष के वोटों को व्यवस्थित तरीके से कमजोर किया गया, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    मतदाता सूची को लेकर विवाद
    ममता ने SIR (स्पेशल रिवीजन) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इससे चुनाव परिणामों पर असर पड़ा। इस मुद्दे पर चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रतिक्रिया आना बाकी है।

    विपक्ष का समर्थन
    उन्होंने बताया कि राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, उद्धव ठाकरे और अखिलेश यादव जैसे नेताओं ने उनसे बातचीत कर समर्थन जताया है।कोलकाता की एक महत्वपूर्ण सीट पर मतों की दोबारा गिनती जारी है। अधिकारियों के अनुसार, अंतिम नतीजे पुनर्गणना पूरी होने के बाद ही घोषित किए जाएंगे।

    ED की कार्रवाई से बढ़ा सियासी तापमान
    इस बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई ने भी माहौल को और गरमा दिया है। एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है।

    भाजपा का पलटवार
    भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह जनता का स्पष्ट जनादेश है। पार्टी नेताओं का दावा है कि जीत संगठन की मेहनत और रणनीति का नतीजा है। कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों के बाद राजनीतिक टकराव अपने चरम पर है। एक ओर विपक्ष चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी ओर सत्ताधारी पक्ष इसे लोकतांत्रिक जनादेश बता रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने के संकेत हैं।

  • एक वोट ने पलटा चुनावी परिणाम, तमिलनाडु में मंत्री की हार, तिरुप्पत्तूर सीट बनी चर्चा का केंद्र

    एक वोट ने पलटा चुनावी परिणाम, तमिलनाडु में मंत्री की हार, तिरुप्पत्तूर सीट बनी चर्चा का केंद्र

    तिरुप्पत्तूर। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बीच एक ऐसा परिणाम सामने आया है, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। तमिलगा वेत्री कझगम की जीत के बीच तिरुप्पत्तूर विधानसभा सीट पर बेहद रोमांचक मुकाबला देखने को मिला, जहां हार-जीत का फैसला सिर्फ एक वोट से हुआ।

    इस सीट पर के.आर. पेरियाकरुप्पन, जो द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के वरिष्ठ नेता और मंत्री हैं, उन्हें महज एक वोट के अंतर से हार का सामना करना पड़ा। उनके खिलाफ टीवीके उम्मीदवार सीनिवास सेतुपति आर विजयी रहे। मतगणना पूरी होने के बाद सामने आया कि सीनिवास सेतुपति को कुल 83,375 वोट मिले, जो पेरियाकरुप्पन से सिर्फ एक वोट अधिक थे। इस बेहद करीबी मुकाबले ने यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र में हर एक वोट की कितनी अहमियत होती है।

    कम अंतर से हुए इस नतीजे को हाल के चुनावों के सबसे कड़े मुकाबलों में गिना जा रहा है। यह परिणाम उन उदाहरणों में शामिल हो गया है, जहां जीत या हार का फैसला एक ही वोट से हुआ हो।

    पूरे राज्य के नतीजों की बात करें तो 234 विधानसभा सीटों की गिनती पूरी हो चुकी है, जिसमें तमिलगा वेत्री कझगम 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम 59 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही, जबकि ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम को 47 सीटें मिलीं। वहीं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 5 सीटों पर जीत दर्ज की और पीएमके के खाते में 4 सीटें आईं।

  • बंगाल के रुझानों में भाजपा की बढ़त पर भोपाल में जश्न, शिवराज सिंह ने बांटी 'झालमुड़ी', बोले- मोदी है तो मुमकिन है

    बंगाल के रुझानों में भाजपा की बढ़त पर भोपाल में जश्न, शिवराज सिंह ने बांटी 'झालमुड़ी', बोले- मोदी है तो मुमकिन है

    भोपाल । पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के ऐतिहासिक रुझानों ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी उत्सव का माहौल पैदा कर दिया है। जैसे ही बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) जीत की ओर बढ़ी, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के भोपाल स्थित निवास पर ‘महाविजय’ का जश्न शुरू हो गया। इस खास मौके पर उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर बंगाल के प्रसिद्ध व्यंजन ‘झालमुड़ी’ का आनंद लिया और जीत की खुशी साझा की।

    ‘मामा’ के घर पर आतिशबाजी और ढोल-नगाड़े
    सोमवार को जैसे-जैसे मतगणना के रुझान स्पष्ट हुए, शिवराज सिंह चौहान के आवास पर कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ पड़ा। पूरे परिसर में ढोल-नगाड़ों की थाप और आतिशबाजी के बीच “जय श्री राम” और “मोदी-मोदी” के नारे गूंजते रहे। जीत के जश्न को बंगाली टच देने के लिए खास तौर पर झालमुड़ी बनवाई गई, जिसे केंद्रीय मंत्री ने खुद कार्यकर्ताओं को बांटकर बधाई दी। शिवराज सिंह ने कहा कि यह ‘असाधारण और अद्भुत’ है, उन्‍होंने इसे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व का परिणाम बताया।

    “श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आत्मा आज गदगद होगी”
    मीडिया से बातचीत के दौरान भावुक होते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “मुझे उम्मीद ही नहीं, बल्कि पूरा विश्वास था कि बंगाल में इस बार महाविजय होगी। आज एक बड़ा संकल्प पूरा हुआ है और एक सपना साकार हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आत्मा आज गदगद होगी।”

    उन्होंने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि “जनता ने घटिया वोट बैंक और तुष्टीकरण की राजनीति को सिरे से नकार दिया है। घुसपैठ को बढ़ावा देने वाली ताकतों को करारा जवाब मिला है। अब हारने वाले ईवीएम (EVM) का बहाना ढूंढेंगे, लेकिन सच तो यह है कि जनता ने मोदी जी के पीछे खड़े होकर ऐतिहासिक जनादेश दिया है।”

    असम से तमिलनाडु तक ‘भगवा’ लहर
    शिवराज सिंह ने केवल बंगाल ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों के रुझानों पर भी संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि असम में भाजपा का प्रदर्शन असाधारण है और पुडुचेरी में एक बार फिर एनडीए (NDA) की सरकार बनने जा रही है। उन्होंने तमिलनाडु में भाजपा के बढ़ते प्रभाव का जिक्र करते हुए गृह मंत्री अमित शाह की ‘अचूक रणनीति’ और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की मेहनत को इस सफलता का श्रेय दिया।

    शिवराज ने कहा कि पूरा देश मानता है “मोदी है तो मुमकिन है।” उन्होंने बंगाल, असम और पुडुचेरी की जनता का दिल से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जब हार सामने दिखती है, तो खिसियानी बिल्ली खंभा नोचने लगती है, विपक्ष भी अब हार के बहाने तलाशेगा।

  • पश्चिम बंगाल चुनाव में बड़ा सियासी दावा, ममता बनर्जी बोलीं-शाम तक पलट जाएगा पूरा रिजल्ट

    पश्चिम बंगाल चुनाव में बड़ा सियासी दावा, ममता बनर्जी बोलीं-शाम तक पलट जाएगा पूरा रिजल्ट

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना के बीच राज्य की राजनीति एक बार फिर बेहद गरम हो गई है। शुरुआती रुझानों के सामने आने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया है कि अंतिम परिणाम पूरी तरह बदल सकते हैं और शाम तक पूरा राजनीतिक समीकरण पलट जाएगा। उनके इस बयान के बाद राज्य में चुनावी माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया है।

    मतगणना के शुरुआती चरणों में कुछ सीटों पर अलग-अलग रुझान सामने आए हैं, जिससे सभी राजनीतिक दलों की धड़कनें तेज हो गई हैं। इसी बीच ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि शुरुआती आंकड़ों को जानबूझकर इस तरह दिखाया जा रहा है जिससे एक खास राजनीतिक दल को बढ़त मिलती हुई प्रतीत हो।

    उन्होंने इसे एक रणनीतिक प्रयास बताया है, जिसका उद्देश्य मतदाताओं और कार्यकर्ताओं के मनोबल को प्रभावित करना हो सकता है।

    मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि किसी भी स्थिति में मतगणना केंद्र न छोड़ा जाए और पूरी प्रक्रिया पर लगातार नजर रखी जाए। उनका कहना है कि असली तस्वीर अंतिम राउंड की गिनती के बाद ही सामने आएगी और तब तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक केवल शुरुआती राउंड की गिनती हुई है, जबकि पूरी मतगणना प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है। ऐसे में किसी भी तरह का अंतिम निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। ममता बनर्जी के अनुसार, जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ेगा, स्थिति बदलती जाएगी और टीएमसी की स्थिति मजबूत होती नजर आएगी।

    इसके साथ ही उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान कई जगहों पर अनियमितताएं देखने को मिली हैं। उनके अनुसार कुछ स्थानों पर मतगणना में देरी और तकनीकी गड़बड़ियों के कारण स्थिति को प्रभावित करने की कोशिश की गई है। हालांकि उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे शांत रहें और पूरी प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखें।

    राज्य के राजनीतिक माहौल में इस बयान के बाद नई बहस शुरू हो गई है। जहां एक तरफ टीएमसी समर्थक इस बयान को आत्मविश्वास के रूप में देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल इसे दबाव बनाने की रणनीति बता रहे हैं। मतगणना के हर राउंड के साथ राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है और सभी की नजरें अंतिम परिणाम पर टिकी हुई हैं।

    फिलहाल पूरे राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और हर ओर मतगणना को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। यह चुनाव केवल सीटों का मुकाबला नहीं बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई भी बन गया है, जिसका अंतिम फैसला आने वाले घंटों में साफ हो जाएगा।

  • सात सीटों में से अधिकांश पर भाजपा की बढ़त, कुछ जगह मुकाबला रोमांचक…

    सात सीटों में से अधिकांश पर भाजपा की बढ़त, कुछ जगह मुकाबला रोमांचक…

    नई दिल्ली।देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा उपचुनावों की मतगणना जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, राजनीतिक माहौल लगातार बदलता हुआ दिखाई दे रहा है। शुरुआती रुझानों ने कई जगहों पर स्पष्ट बढ़त और कुछ स्थानों पर कड़े मुकाबले की तस्वीर पेश की है। कुल मिलाकर सात विधानसभा सीटों पर हुए इन उपचुनावों ने सियासी हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है, जहां हर अपडेट के साथ समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।

    महाराष्ट्र की बारामती सीट इस पूरे चुनावी परिदृश्य का सबसे अहम केंद्र बनी हुई है। यहां से सुनेत्रा पवार आगे चल रही हैं और मजबूत बढ़त बनाए हुए हैं। इस सीट पर मतदाताओं का रुझान शुरुआत से ही खास चर्चा में रहा है, क्योंकि यह क्षेत्र राज्य की राजनीति में लंबे समय से प्रभावशाली भूमिका निभाता आया है। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार यहां मुकाबला एक तरफ झुकता हुआ दिखाई दे रहा है, जिससे राजनीतिक विश्लेषक भी इसके संभावित परिणामों पर नजर बनाए हुए हैं।

    इसी राज्य की राहुरी सीट पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार अक्षय कर्डिले ने बढ़त हासिल कर ली है। वे लगातार मजबूत स्थिति बनाए हुए हैं और उनके निकटतम प्रतिद्वंदी पीछे चलते नजर आ रहे हैं। इस सीट पर चुनाव प्रचार के दौरान दोनों प्रमुख दलों ने पूरी ताकत लगाई थी, लेकिन शुरुआती रुझानों में भाजपा का पलड़ा भारी दिखाई दे रहा है।

    कर्नाटक की दावणगेरे साउथ सीट पर भी भाजपा उम्मीदवार ने बढ़त बना रखी है, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार पीछे चल रहे हैं। वहीं इसी राज्य की बागलकोट सीट पर स्थिति इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है, जहां कांग्रेस उम्मीदवार आगे चल रहे हैं और भाजपा उम्मीदवार दूसरे स्थान पर हैं। यह स्थिति कर्नाटक में चुनावी प्रतिस्पर्धा को और दिलचस्प बना रही है, क्योंकि दोनों दल अलग-अलग सीटों पर बढ़त और नुकसान का सामना कर रहे हैं।

    त्रिपुरा की धर्मनगर सीट पर भी भाजपा उम्मीदवार आगे चल रहे हैं। यहां मतगणना के शुरुआती चरण से ही पार्टी को बढ़त मिलती दिख रही है। इसी तरह गुजरात की उमरेठ सीट पर भी भाजपा ने मजबूत पकड़ बनाई हुई है और उम्मीदवार ने बड़ी बढ़त दर्ज की है। नागालैंड की कोरिडांग सीट पर भी भाजपा उम्मीदवार मामूली अंतर से आगे हैं, जिससे यहां मुकाबला अभी पूरी तरह खत्म नहीं माना जा सकता।

    इन सभी सीटों के शुरुआती रुझानों से यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि कई राज्यों में सत्तारूढ़ दल का प्रभाव अभी भी मजबूत बना हुआ है, जबकि कुछ स्थानों पर विपक्षी दलों ने भी कड़ा संघर्ष किया है। हालांकि अभी अंतिम परिणाम आना बाकी है, इसलिए कई सीटों पर स्थिति बदलने की संभावना भी बनी हुई है।

    कुल मिलाकर इन उपचुनावों ने राजनीतिक माहौल को और अधिक सक्रिय और रोचक बना दिया है। हर राउंड की गिनती के साथ बढ़त और हार का अंतर बदल रहा है, जिससे यह स्पष्ट हो रहा है कि अंतिम नतीजे तक किसी भी तरह का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। अब सभी की नजरें अंतिम परिणामों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि राजनीतिक समीकरण किस दिशा में आगे बढ़ेंगे।

  • 4 मई से पहले अभेद्य रणनीति, ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की बड़ी बैठक..

    4 मई से पहले अभेद्य रणनीति, ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की बड़ी बैठक..

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों से ठीक पहले सियासी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले तृणमूल कांग्रेस ने पूरी ताकत के साथ अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री Mamata Banerjee और पार्टी के प्रमुख नेताओं ने यह साफ संकेत दे दिया है कि इस बार मतगणना के दिन किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी उद्देश्य से एक अहम वर्चुअल बैठक आयोजित की जा रही है, जिसमें राज्यभर के काउंटिंग एजेंट्स को शामिल किया जाएगा।

    यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब एग्जिट पोल के नतीजों ने राजनीतिक माहौल को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि चुनाव परिणाम से पहले हर स्तर पर सतर्कता जरूरी है। यही वजह है कि इस बैठक को केवल औपचारिक चर्चा तक सीमित न रखकर इसे एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य मतगणना प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है।

    सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में राज्य की लगभग सभी विधानसभा सीटों पर तैनात काउंटिंग एजेंट्स को विस्तार से दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। एजेंट्स को स्पष्ट रूप से कहा जाएगा कि वे मतगणना के हर चरण पर पैनी नजर बनाए रखें और किसी भी असामान्य स्थिति को तुरंत रिपोर्ट करें। पार्टी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि मतगणना के दौरान किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।

    एजेंट्स की भूमिका को बेहद अहम माना जा रहा है। उन्हें निर्देश दिए जाने की संभावना है कि वे मतगणना शुरू होने से लेकर अंतिम परिणाम और प्रमाण पत्र जारी होने तक काउंटिंग सेंटर पर मौजूद रहें। इसके साथ ही उन्हें ईवीएम को स्ट्रॉन्ग रूम से बाहर लाने की प्रक्रिया, सील खोलने और हर राउंड की गिनती पर नजर रखने के लिए भी तैयार किया जा रहा है। पार्टी का मानना है कि अंतिम राउंड तक सतर्कता बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि कई बार परिणाम आखिरी चरणों में बदल सकते हैं।

    इस बार TMC 2021 के अनुभवों से भी सबक ले रही है। पिछले चुनाव में कुछ स्थानों पर हुई अप्रत्याशित घटनाओं ने विवाद को जन्म दिया था, खासकर नंदीग्राम जैसे संवेदनशील क्षेत्र में। इन्हीं अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इस बार अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है, ताकि किसी भी तरह की स्थिति को तुरंत नियंत्रित किया जा सके।

    इसके अलावा, इस बार मतगणना प्रक्रिया में कुछ नई तकनीकी व्यवस्थाएं भी लागू की गई हैं, जिनमें QR कोड आधारित सत्यापन शामिल है। ऐसे में एजेंट्स को तकनीकी रूप से भी तैयार रहने के निर्देश दिए जाएंगे, ताकि वे नई प्रक्रियाओं को आसानी से समझ सकें और उनका सही तरीके से पालन सुनिश्चित कर सकें।

    हाल के दिनों में कुछ काउंटिंग सेंटरों को लेकर उठे सवालों ने भी पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। इसी कारण Mamata Banerjee खुद भी सक्रिय नजर आईं और उन्होंने मतगणना प्रक्रिया की पारदर्शिता पर जोर दिया। पार्टी के भीतर यह साफ संदेश दिया गया है कि इस बार किसी भी तरह का जोखिम नहीं लिया जाएगा।

     तृणमूल कांग्रेस इस बार मतगणना को लेकर पूरी तरह सतर्क और संगठित रणनीति के साथ मैदान में उतर रही है। पार्टी का लक्ष्य केवल चुनाव जीतना ही नहीं, बल्कि पूरे प्रक्रिया को निष्पक्ष और विवाद रहित बनाए रखना भी है। अब सबकी नजरें 4 मई पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि यह रणनीति कितनी कारगर साबित होती है।

  • नेपाल में बड़े राजनीतिक उलटफेर की आहट, चुनाव नतीजों से पहले सबकी धड़कनें तेज, PM की रेस में बालेन शाह….

    नेपाल में बड़े राजनीतिक उलटफेर की आहट, चुनाव नतीजों से पहले सबकी धड़कनें तेज, PM की रेस में बालेन शाह….


    काठमांडू।
    नेपाल (Nepal) चुनाव के नतीजे (Election Results) आने से पहले सबकी धड़कनें तेज हैं. जारी मतगणना से साफ है कि वहां राजनीति में बड़ा उलटफेर (Big Political Ppheaval) दहलीज पर है. 5 मार्च को हुए चुनाव में काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन्द्र (बालेन) शाह (Balendra (Balen) Shah) की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) भारी बढ़त के साथ आगे चल रही है. वहीं पारंपरिक दलों को करारी हार का सामना करना पड़ रहा है।

    ताजा रुझानों के मुताबिक, 275 सदस्यीय संसद के लिए हुए चुनाव में प्रत्यक्ष चुनाव की 165 सीटों में से शुक्रवार देर रात तक RSP 117 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. इससे बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनना लगभग तय है. जहां RSP प्रचंड बहुमत की ओर आगे बढ़ रही है, वहीं नेपाल के पारंपरिक दल जैसे- नेपाली कांग्रेस और सीपीएन-यूएमएल को जनता ने पूरी तरह से हाशिए पर डाल दिया है.

    117 सीटों पर RSP आगे है तो दूसरे नंबर पर नेपाली कांग्रेस सिर्फ 15 सीटों पर और के पी ओली के नेतृत्व में रहे यूएमएल सिर्फ 13 सीटों पर जीत के लिए संघर्ष कर रहे हैं. वहीं, पुष्प कमल दहाल प्रचंड के नेतृत्व वाली पार्टी की हालत इनसे भी बदतर हैं।


    बालेन शाह को Gen-Z का सपोर्ट, ओली बुरी तरह हार रहे

    विश्लेषकों का कहना है कि युवाओं और “Gen-Z” मतदाताओं का भारी समर्थन बालेन शाह की जीत का सबसे बड़ा कारण बना है, जिसने दशकों से सत्ता में रहे पारंपरिक दलों की पकड़ को कमजोर कर दिया है।

    पूर्व प्रधानमंत्री के पी ओली अपने निर्वाचन क्षेत्र से बुरी तरह से पिछड़ गए हैं. झापा जिले के जिस संसदीय क्षेत्र से एक बार छोड़कर वो लगातार सात बार चुनाव जीतते आए थे आज उसी निर्वाचन क्षेत्र से बालेन शाह उनको पटखनी देने वाले हैं। देर रात तक चल रहे मतगणना में जहां बालेन को करीब 17 हजार वोट मिल चुके थे, वहीं ओली को सिर्फ 4 हजार वोट ही मिल पाए. यानी ओली अभी बालेन से 13 हजार वोट से पीछे चल रहे हैं।

    सिर्फ ओली ही नहीं उनकी पार्टी के एक भी पदाधिकारी या उनकी सरकार के एक भी मंत्री मतगणना में आगे नहीं है. पार्टी के सभी दिग्गज चुनाव में हार की कगार पर हैं. उधर नेपाली कांग्रेस का भी कुछ यही हाल है. इस पार्टी के अध्यक्ष गगन थापा भी अपने निकटतम प्रतिद्वंदी से पीछे चल रहे हैं जबकि पार्टी के कई दिग्गज चुनाव हार चुके हैं।


    उलटफेर के तीन बड़े कारण

    – भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता से जनता की नाराजगी
    – युवा मतदाताओं का ओली सहित पुराने नेताओं से नफरत
    – बालेन शाह का नई राजनीति का वादा करना

    नेपाल में कुल 1 करोड़ 89 लाख मतदाता हैं. कुल 275 सीटों के लिए मतदान हुआ. First Past The Post (FPTP) या प्रत्यक्ष मतदान की 165 सीटों में ही RSP को दो तिहाई का बहुमत मिलता दिख रहा है. वहीं, Proportional Representation (PR) या समानुपातिक सिस्टम की 110 सीटों के लिए गिनती जारी है जिसका परिणाम आखिर में बताया जाएगा. प्रत्यक्ष में RSP के पक्ष में सुनामी को देखते हुए इस पार्टी को समानुपातिक में भी 50 से ज्यादा सीट मिलने की उम्मीद है. यानि नेपाल के इतिहास में 36 सालों के बाद किसी एक पार्टी को न सिर्फ पूर्ण बहुमत बल्कि प्रचंड बहुमत मिलेगा. लोगों को राजनीतिक स्थायित्व की उम्मीद है और इस सरकार से अपेक्षा भी बहुत है।

  • इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन चुनाव: अध्यक्ष के लिए रोमांचक मुकाबला, उपाध्यक्ष और सह सचिव पद पर बड़ी जीत

    इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन चुनाव: अध्यक्ष के लिए रोमांचक मुकाबला, उपाध्यक्ष और सह सचिव पद पर बड़ी जीत


    इंदौर । इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव परिणाम बुधवार देर रात घोषित किए गए। लंबे और रोमांचक मुकाबले के बाद अध्यक्ष पद पर मनीष यादव विजयी हुए। उपाध्यक्ष, सचिव और सह सचिव पदों पर भी नवनिर्वाचितों ने अपने मजबूत प्रदर्शन से जीत दर्ज की। चुनाव में कुल 1914 मतदाता शामिल हुए।

    अध्यक्ष पद का मुकाबला बेहद कड़ा और रोमांचक रहा। शुरुआत में गौरव श्रीवास्तव आगे चल रहे थे, लेकिन जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ी, मनीष यादव ने 17वें राउंड में बढ़त बना ली और 20वें राउंड तक उसे बनाए रखा। अंततः मनीष यादव 512 वोटों के साथ 20 वोटों के अंतर से जीत गए। गौरव श्रीवास्तव को 492 वोट मिले। अन्य प्रत्याशियों में जीपी सिंह को 406, मनीष जैन को 282 और पवन जोशी को 95 मत मिले।

    उपाध्यक्ष पद पर अभिषेक तुगनावत ने शुरुआत से ही स्पष्ट बढ़त बनाए रखी और एकतरफा जीत दर्ज की। उन्हें 858 मत प्राप्त हुए, जबकि उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी अपूर्वा शुक्ला को 311, धर्मेंद्र साहू को 232, मधुसूदन यादव को 216 और भावना साहू को 162 वोट ही मिले।

    सचिव पद के चुनाव में तीन प्रमुख प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर रही। मतों की बार-बार अदला-बदली के बीच मनीष गडकर 652 वोट लेकर विजयी हुए। उनके प्रतिद्वंद्वी गोविंद राय को 582 और निलेश मनोरे को 533 मत प्राप्त हुए। सह सचिव पद पर अमित राज ने सबसे बड़ी जीत दर्ज की। उन्हें 1027 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी ज्ञानेंद्र शर्मा को 739 वोट ही मिल सके। एग्जीक्यूटिव मेंबर के रूप में राहुल पांचाल, तेजस जैन, अमन मालवीय, रश्मेंद्र सूर्यवंशी और अर्निक जैन चुने गए।

    परिणाम घोषित होते ही बार परिसर में समर्थकों ने जीत का जश्न मनाया। नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने कहा कि वे अधिवक्ताओं की समस्याओं, सुविधाओं और हाईकोर्ट परिसर से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता से उठाएंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज द्विवेदी और मीडिया प्रभारी अजय मिश्रा के अनुसार, मतदान सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक हुआ। इसके बाद शाम 7 बजे से मतगणना शुरू हुई, जो देर रात करीब 1 बजे तक चली। इस चुनाव ने बार एसोसिएशन में नई ऊर्जा और उत्साह पैदा कर दिया है।

  • भाजपा को महाराष्ट्र में ऐतिहासिक सफलता40 साल बाद कम्पटी नगरपालिका में जीती पहली बार सत्ता

    भाजपा को महाराष्ट्र में ऐतिहासिक सफलता40 साल बाद कम्पटी नगरपालिका में जीती पहली बार सत्ता


    नागपुर । महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन को निकाय चुनावों में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। कुल 288 जिलों के निकायों में से 215 में महायुति ने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की हैजिसमें भाजपा ने 129 सीटों पर जीत के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। लेकिन भाजपा को सबसे बड़ी और ऐतिहासिक जीत कम्पटी नगरपालिका परिषद में मिलीजहां 40 साल बाद पहली बार उसे सत्ता हासिल हुई है। कम्पटी नगरपालिका परिषद में भाजपा के कैंडिडेट अजय अग्रवाल ने 103 वोटों के मामूली अंतर से जीत दर्ज की। हालांकिकांग्रेस के कैंडिडेट शाकूर नागानी ने चुनाव परिणाम में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि वह पूरे दिन चुनाव में आगे चल रहे थेलेकिन आखिरी समय में गड़बड़ी कर के अजय अग्रवाल को जिताया गया।

    यह चुनाव परिणाम नागपुर जिले में काफी चर्चा में रहाखासकर इस सीट के लिए भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी के कारण। एक और दिलचस्प बात यह रही कि बहुजन रिपब्लिकन एकता मंच की नेता सुलेखा कुंभारे ने इस सीट पर अजय कदम को कैंडिडेट बनाया था। हालांकिभाजपा ने इस बार उनका समर्थन नहीं कियाक्योंकि पार्टी को इस बार महाराष्ट्र में भगवा लहर की उम्मीद थी। कुंभारे ने यह भी दावा किया कि नितिन गडकरी उन्हें अपनी बहन मानते रहे हैंलेकिन भाजपा ने उनका समर्थन नहीं किया।नागपुर की इस महत्वपूर्ण नगरपालिका परिषद में भाजपा की 40 साल बाद जीत एक बड़ी राजनीतिक घटना मानी जा रही है।

    कांग्रेस के भीतर भी टिकट बंटवारे को लेकर विवाद उभरेऔर यह सवाल उठने लगा कि भाजपा अब बीएमसी में जीत की कोशिश कर सकती है।
    केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का नागपुर संसदीय क्षेत्र होने के बावजूद इस नगरपालिका परिषद में भाजपा की जीत का यह लंबे समय से इंतजार थाजो अब समाप्त हुआ। कांग्रेस ने भी अपनी स्थिति को लेकर सवाल उठाएऔर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने यह कहा कि बीएमसी में कांग्रेस का कोई वजूद नहीं हैक्योंकि पिछले 30 सालों से वे ही लगातार जीत रहे हैं। इन नतीजों के बादविपक्षी गठबंधन महाअघाड़ी में भी विवाद शुरू हो गया हैजो भविष्य में महाराष्ट्र की राजनीति में और भी हलचल पैदा कर सकता है।