Tag: Elections

  • पश्चिम बंगाल की सियासत में बड़ा बदलाव, प्रतीकों की लड़ाई में भाजपा की बढ़त..

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के चुनावी परिदृश्य में इस बार मुकाबला केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह लड़ाई सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं और जनभावनाओं के गहरे स्तर तक पहुंच गई। चुनावी रुझानों और माहौल से यह साफ संकेत मिला कि मतदाताओं ने केवल विकास या योजनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जुड़ाव और प्रतीकों की ताकत को भी महत्व दिया।

    चुनाव प्रचार के दौरान एक ओर जहां भाजपा ने अपने अभियान में पारंपरिक धार्मिक प्रतीकों और सांस्कृतिक भावनाओं को केंद्र में रखा, वहीं दूसरी ओर टीएमसी ने अपने सामाजिक कल्याण और क्षेत्रीय पहचान से जुड़े संदेशों को आगे बढ़ाया। लेकिन जैसे-जैसे चुनाव आगे बढ़ा, बहस का केंद्र मुद्दों से हटकर प्रतीकों और नैरेटिव की दिशा में शिफ्ट होता चला गया।

    भाजपा ने ‘जय मां काली’ जैसे सांस्कृतिक प्रतीकों को अपने प्रचार का हिस्सा बनाकर यह संदेश देने की कोशिश की कि बंगाल की जड़ें उसकी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में गहराई से जुड़ी हैं। पार्टी का फोकस इस बात पर रहा कि जनता अपने पारंपरिक मूल्यों के साथ जुड़ाव महसूस करे और उसी आधार पर राजनीतिक निर्णय ले।

    दूसरी ओर टीएमसी ने अपने प्रचार में विकास योजनाओं, सामाजिक सुरक्षा और क्षेत्रीय अस्मिता को प्रमुखता दी। लेकिन चुनावी माहौल में सांस्कृतिक प्रतीकों की चर्चा इतनी हावी हो गई कि अन्य मुद्दे पीछे छूटते नजर आए। इस बदलाव ने चुनावी समीकरणों को काफी हद तक प्रभावित किया।

    महिला मतदाताओं को साधने के लिए भी दोनों पक्षों ने व्यापक रणनीति अपनाई। विभिन्न योजनाओं, आर्थिक सहायता और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े वादों के जरिए महिलाओं को केंद्र में रखा गया। इससे चुनावी प्रतिस्पर्धा और भी तेज हो गई और हर वर्ग के मतदाताओं पर विशेष ध्यान दिया गया।

    इसके साथ ही राज्य में मतदाता सूची, प्रशासनिक प्रक्रिया और चुनावी व्यवस्था को लेकर भी बहस देखने को मिली। इन सभी कारकों ने मिलकर चुनावी माहौल को बेहद जटिल और बहुस्तरीय बना दिया, जहां हर चरण में नई राजनीतिक रणनीतियां उभरती रहीं।

    जमीनी स्तर पर राजनीतिक दलों ने अपने संगठन को मजबूत करने के लिए व्यापक अभियान चलाया। बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता, जनसंपर्क और स्थानीय मुद्दों पर फोकस ने चुनावी परिणामों को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    कुल मिलाकर पश्चिम बंगाल का यह चुनाव एक साधारण राजनीतिक मुकाबला नहीं रहा, बल्कि यह एक ऐसा चुनाव बन गया जिसमें संस्कृति, परंपरा और विचारधारा की गहरी टक्कर देखने को मिली। रुझानों से यह संकेत मिलता है कि इस बार मतदाताओं ने उन संदेशों को अधिक महत्व दिया जो उनकी सांस्कृतिक पहचान से सीधे जुड़े हुए थे, जिससे पूरे राज्य का राजनीतिक परिदृश्य एक नए मोड़ पर पहुंच गया।

  • दिल्ली और बंगाल के बाद BJP के सामने बचे ये 3 बड़े राजनीतिक किले, अब असली परीक्षा शुरू

    दिल्ली और बंगाल के बाद BJP के सामने बचे ये 3 बड़े राजनीतिक किले, अब असली परीक्षा शुरू

    नई दिल्ली। हाल के चुनावी नतीजों और रुझानों ने भारतीय राजनीति की तस्वीर को काफी हद तक बदल दिया है। दिल्ली में जीत और पश्चिम बंगाल में बढ़त के बाद भाजपा का राजनीतिक प्रभाव लगातार विस्तार करता दिख रहा है। हालांकि इस सफलता के बीच भी देश में कुछ ऐसे राज्य हैं, जहां पार्टी के लिए स्थिति अभी भी बेहद चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। इन राज्यों को राजनीतिक रूप से सबसे कठिन क्षेत्र माना जाता है, जहां जीत हासिल करना किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं है।

    पंजाब इस सूची में सबसे ऊपर आता है। यहां राजनीति लंबे समय से क्षेत्रीय भावनाओं, किसान मुद्दों और स्थानीय नेतृत्व के इर्द-गिर्द घूमती रही है। राज्य में मतदाता काफी जागरूक और मुद्दा-आधारित वोटिंग के लिए जाने जाते हैं। यहां शहरी और ग्रामीण दोनों ही इलाकों की राजनीतिक सोच अलग-अलग है, जिससे किसी भी राष्ट्रीय दल के लिए स्थायी पकड़ बनाना आसान नहीं होता। हालांकि भाजपा लगातार अपनी रणनीति को मजबूत करने में लगी है, लेकिन जमीन पर व्यापक समर्थन हासिल करना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।

    दूसरा राज्य केरल है, जहां राजनीति पूरी तरह वैचारिक और संगठित ढांचे पर आधारित मानी जाती है। यहां दशकों से दो प्रमुख राजनीतिक ध्रुवों के बीच मुकाबला चलता आ रहा है। मतदाता वर्ग में शिक्षा और राजनीतिक जागरूकता का स्तर काफी ऊंचा है, जिससे चुनावी निर्णय अधिक सोच-समझकर लिए जाते हैं। भाजपा यहां धीरे-धीरे अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही है, खासकर कुछ शहरी क्षेत्रों और स्थानीय निकायों में, लेकिन राज्य स्तर पर बड़ी सफलता अभी दूर नजर आती है।

    तीसरा और सबसे जटिल राजनीतिक मैदान तमिलनाडु है। यहां राजनीति की नींव मजबूत क्षेत्रीय पहचान, भाषा और सांस्कृतिक विचारधारा पर टिकी हुई है। द्रविड़ आंदोलन का प्रभाव आज भी यहां की राजनीति में गहराई से देखा जा सकता है। स्थानीय दलों की मजबूत पकड़ और सामाजिक समीकरणों के कारण यहां बाहरी राजनीतिक दलों के लिए विस्तार करना बेहद कठिन माना जाता है। हालांकि हाल के वर्षों में राजनीतिक परिदृश्य में कुछ नए बदलाव देखने को मिले हैं, जिससे भविष्य में समीकरण बदलने की संभावना को भी पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता।

    इन तीनों राज्यों की एक खास बात यह है कि यहां राष्ट्रीय राजनीति की तुलना में स्थानीय मुद्दे कहीं अधिक प्रभावी भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि यहां किसी भी राष्ट्रीय दल के लिए स्थायी आधार बनाना आसान नहीं होता। इसके बावजूद भाजपा लगातार संगठन विस्तार, जमीनी संपर्क और स्थानीय नेताओं के साथ तालमेल के जरिए अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

    राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन राज्यों में सफलता हासिल करना केवल चुनावी जीत नहीं होगी, बल्कि यह संगठनात्मक क्षमता और रणनीतिक धैर्य की भी बड़ी परीक्षा होगी। यह भी माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में इन राज्यों की राजनीति और अधिक प्रतिस्पर्धी और दिलचस्प हो सकती है।

    कुल मिलाकर, दिल्ली और बंगाल की बढ़त के बाद भाजपा का सफर आसान नहीं है, क्योंकि असली चुनौती अभी बाकी है और वह इन तीन मजबूत राजनीतिक किलों में अपनी पकड़ बनाना है।

  • पांच राज्यों में चुनाव के बाद काउंटिंग की तैयारी…. केन्द्रों पर त्रिस्तरीय सुरक्षा… QR आधारित फोटो ID होंगे जारी

    पांच राज्यों में चुनाव के बाद काउंटिंग की तैयारी…. केन्द्रों पर त्रिस्तरीय सुरक्षा… QR आधारित फोटो ID होंगे जारी


    नई दिल्ली।
    अभी हाल ही में संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों (Assembly Elections Five states) में मतों की गिनती के दिन यानी 4 मई को सभी मतगणना केंद्रों (Counting centres) पर चुनाव आयोग (Election Commission.) क्यूआर कोड आधारित फोटो पहचान पत्र (QR-Based Identity Cards) जारी करेगा ताकि किसी अनाधिकृत व्यक्ति के प्रवेश को रोका जा सके। चुनाव आयोग की यह अनूठी पहल है और पहली बार व्यापक पैमाने पर लागू किया जाएगा। पांच राज्यों की सभी विधानसभा क्षेत्रों के काउंटिंग सेंटर के अलावा यह व्यवस्था पांच राज्यों की सात असेंबली सीटों पर हुए उपचुनाव में मतगणना केंद्रों पर भी की जाएगी।

    भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने गुरुवार को एक प्रेस नोट जारी कर घोषणा की कि काउंटिंग सेंटर्स पर सुरक्षा को मजबूत करने और अनाधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश को रोकने के लिए ECINET पर QR कोड-आधारित फोटो पहचान पत्र प्रणाली शुरू की गई है। आयोग के अनुसार, “काउंटिंग सेंटर्स में किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति के प्रवेश की संभावना को खत्म करने के लिए QR कोड-आधारित फोटो पहचान पत्र मॉड्यूल शुरू किया गया है।”


    पिछले एक साल में 30 से अधिक पहलों का हिस्सा

    यह प्रणाली 4 मई, 2026 को होने वाली मतगणना से लागू की जाएगी। यह असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी की विधानसभाओं के आम चुनावों के साथ-साथ पांच राज्यों के सात विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले उपचुनावों के लिए होगी। ECI ने कहा कि इस प्रणाली का विस्तार भविष्य में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के सभी आम चुनावों और उपचुनावों तक भी किया जाएगा। आयोग ने कहा कि यह कदम पिछले एक साल में की गई 30 से अधिक पहलों का हिस्सा है, जिसमें बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) के लिए मानकीकृत QR कोड-आधारित पहचान पत्र शामिल हैं।


    मतगणना केद्रों पर तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था

    आयोग के मुताबिक मतगणना केंद्रों पर पहचान सत्यापन के लिए तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाएगी। पहले और दूसरे स्तर पर, संबंधित निर्वाचन अधिकारियों द्वारा जारी किए गए फोटो पहचान पत्रों की व्यक्तिगत रूप से जांच की जाएगी। मतगणना कक्ष के पास स्थित तीसरे और सबसे भीतरी सुरक्षा घेरे में, क्यूआर कोड की सफल ‘स्कैनिंग’ के बाद ही कर्मी को प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। क्यूआर आधारित पहचान पत्र मतगणना केंद्रों के भीतर प्रवेश करने की अनुमति प्राप्त सभी श्रेणियों के अधिकृत कर्मियों को जारी किए जाएंगे, जिनमें चुनाव अधिकारी, सहायक चुनाव अधिकारी, मतगणना कर्मचारी, तकनीकी कर्मी, उम्मीदवार, चुनाव एजेंट और मतगणना एजेंट शामिल हैं।

    केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही QR-आधारित पहचान पत्र
    आयोग ने कहा है कि QR-आधारित पहचान पत्र केवल अधिकृत व्यक्तियों को जारी किए जाएंगे। इनमें रिटर्निंग ऑफिसर, सहायक रिटर्निंग ऑफिसर, मतगणना कर्मचारी, तकनीकी कर्मी, उम्मीदवार, चुनाव एजेंट, मतगणना एजेंट और आयोग द्वारा अनुमति प्राप्त अन्य व्यक्ति शामिल हैं। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया कि मौजूदा निर्देशों के अनुसार उसके द्वारा जारी किए गए प्राधिकार पत्रों के आधार पर मीडियाकर्मियों को प्रवेश की अनुमति जारी रहेगी। लोकसभा चुनाव-2024 में उस समय विवाद पैदा हो गया था, जब मुंबई उत्तर पश्चिम लोकसभा सीट पर मतगणना के दौरान एक उम्मीदवार के सहयोगी द्वारा एक ”अधिकृत व्यक्ति” के मोबाइल फोन का ”अनाधिकृत रूप से” उपयोग किया गया था।

  • पांच राज्यों के चुनाव के बाद भी पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं….

    पांच राज्यों के चुनाव के बाद भी पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं….


    नई दिल्ली।
    5 राज्यों के चुनाव के बाद आज पेट्रोल-डीजल (Petrol Diesel Price) के नए रेट जारी हो गए हैं। इस बीच बुरी खबर ये है कि कच्चा तेल (Crude oil) 119 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है। आज 30 अप्रैल को सुबह 6 बजे सरकारी ऑयल माार्केटिंग कंपनियों (Government oil marketing companies) इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और बीपीसीएल ने फ्यूल के रेट अपडेट कीं। आज के ताजा रेट के मुताबिक दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध है। बता दें कि अप्रैल 2022 के शुरू से ही पेट्रोल और डीजल के रिटेल दाम नहीं बदले हैं।


    कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग

    ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतें अभी भी 119 डॉलर प्रति बैरल के पार हैं। युद्ध शुरू होने से पहले कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थीं। ब्रेंट क्रूड 119 डॉलर प्रति बैरल के पार ट्रेड कर रहा है। जबकि, WTI के भाव 106 डॉलर प्रति बैरल पर हैं।


    क्या कही थी सरकार

    केंद्र सरकार ने उन अटकलों को खारिज कर दिया था कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। केंद्र सरकार ने स्पष्ट कहा कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। आज चुनाव के बाद भी तेल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।


    ₹10 और ₹12.50 की बढ़ोतरी की अफवाह

    बता दें चुनाव बाद पेट्रोल डीजल के रेट में इजाफे को लेकर सोशल मीडिया पर एक आदेश वायरल हो रहा है। इस दावा किया गया है कि आदेश पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में क्रमशः ₹10 और ₹12.50 की बढ़ोतरी की गई है।” पीआईबी फैक्ट चेक ने कहा कि भारत सरकार ने ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया है।


    भारत में आज कहां मिल रहा सस्ता पेट्रोल

    – पोर्ट ब्लेयर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह: ₹82.46 प्रति लीटर
    – ईटानगर, अरुणाचल प्रदेश: ₹90.87 प्रति लीटर
    – सिलवासा, दादरा और नगर हवेली: ₹92.37 प्रति लीटर
    – दमन, दमन और दीव: ₹92.55 प्रति लीटर
    – हरिद्वार, उत्तराखंड: ₹92.78 प्रति लीटर
    – रुद्रपुर, उत्तराखंड: ₹92.94 प्रति लीटर
    – ऊना, हिमाचल प्रदेश: ₹93.27 प्रति लीटर
    – देहरादून, उत्तराखंड: ₹93.35 प्रति लीटर
    – नैनीताल, उत्तराखंड: ₹93.41 प्रति लीटर
    स्रोत: इंडियन ऑयल


    भारत में सस्ता डीजल बेचने वाले शहर

    – पोर्ट ब्लेयर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह: ₹78.05 प्रति लीटर
    – ईटानगर, अरुणाचल प्रदेश: ₹80.38 प्रति लीटर
    – जम्मू, जम्मू और कश्मीर: ₹81.32 प्रति लीटर
    – संबा, जम्मू और कश्मीर: ₹81.58 प्रति लीटर
    – कठुआ, जम्मू और कश्मीर: ₹81.97 प्रति लीटर
    – उधमपुर, जम्मू और कश्मीर: ₹82.15 प्रति लीटर
    – चंडीगढ़: ₹82.44 प्रति लीटर
    – राजौरी, जम्मू और कश्मीर: ₹82.64 प्रति लीटर
    स्रोत: इंडियन ऑयल


    पड़ोसी देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बेकाबू

    कच्चे तेल की कीमतों का असर से भारत के पड़ोसी देश के लोग पेट्रोल-डीजल की महंगाई की मार झेल रहे हैं। पाकिस्तान में 133.56 और चीन में 125.71 रुपये लीटर है। श्रीलंका में 1 लीटर पेट्रोल की कीमत 135.13 रुपये पर पहुंच गई है। नेपाल में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 137.13 रुपये तक पहुंच गई है। बंग्लादेश में भी पेट्रोल 107.78 रुपये लीटर है। जबकि, म्यांमार में 147.25 रुपये। भूटान में पेट्रोल 102.78 रुपये लीटर पर पहुंच गया है।

  • तमिलनाडु चुनाव में ब्राह्मण उम्मीदवारों की कमी, बड़ी पार्टियों की रणनीति ने खड़े किए सवाल

    तमिलनाडु चुनाव में ब्राह्मण उम्मीदवारों की कमी, बड़ी पार्टियों की रणनीति ने खड़े किए सवाल


    चेन्नई। तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों की उम्मीदवार सूची में एक खास रुझान देखने को मिल रहा है—ब्राह्मण समुदाय के उम्मीदवार लगभग गायब हैं। राज्य की आबादी में करीब 3 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले इस समुदाय को टिकट देने से प्रमुख पार्टियां इस बार बचती नजर आईं, जिसे विश्लेषक नई चुनावी रणनीति से जोड़ रहे हैं।
    प्रमुख दलों ने नहीं दिए टिकट

    करीब 35 वर्षों में पहली बार अन्नाद्रमुक ने विधानसभा चुनाव में एक भी ब्राह्मण उम्मीदवार नहीं उतारा। दिवंगत नेता जे. जयललिता के निधन के बाद पार्टी ने पिछले एक दशक में केवल एक ब्राह्मण उम्मीदवार को मौका दिया था। 2021 में पूर्व डीजीपी आर. नटराज को टिकट दिया गया था।

    इसी तरह भारतीय जनता पार्टी ने भी 27 सीटों में से किसी पर ब्राह्मण उम्मीदवार नहीं उतारा।

    द्रमुक और कांग्रेस ने भी इस समुदाय को प्रतिनिधित्व नहीं दिया।

    छोटे दलों ने दिए सीमित टिकट

    हालांकि तमिलगा वेत्रि कझगम (अभिनेता विजय की पार्टी) ने दो ब्राह्मण उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि नाम तमिलर कच्ची ने छह उम्मीदवार मैदान में उतारे। इन दलों ने मायिलापुर और श्रीरंगम जैसे क्षेत्रों को चुना, जहां ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या अपेक्षाकृत अधिक मानी जाती है।

    रणनीति के पीछे क्या वजह?
    विश्लेषकों का मानना है कि लंबे समय तक ब्राह्मण मतदाता अन्नाद्रमुक के साथ रहे, लेकिन हाल के वर्षों में उनका झुकाव भाजपा की ओर बढ़ा है। इसी कारण अन्नाद्रमुक को ब्राह्मण उम्मीदवार उतारने में चुनावी लाभ नहीं दिख रहा। राजनीतिक टिप्पणीकार रवींद्रन दुरईसामी के अनुसार, पहले एम.जी. रामचंद्रन और जयललिता ब्राह्मण उम्मीदवारों को नियमित तौर पर मौका देते थे।

    वहीं विश्लेषक अरुण कुमार का कहना है कि जयललिता के निधन के बाद ब्राह्मण मतदाता भाजपा की ओर गए, जिससे अन्य दलों ने इस वर्ग पर कम ध्यान देना शुरू कर दिया।

    अलग-अलग दलों की अलग रणनीति
    TVK ब्राह्मण उम्मीदवार देकर खुद को गैर-ब्राह्मण राजनीति तक सीमित नहीं दिखाना चाहती
    DMK की राजनीति पारंपरिक रूप से गैर-ब्राह्मण सशक्तिकरण पर केंद्रित रही है
    NTK प्रमुख सीमन पहचान आधारित राजनीति पर जोर देते रहे हैं
    कुल मिलाकर, चुनावी समीकरणों और सामाजिक समीकरणों के बदलते रुझान के कारण तमिलनाडु की राजनीति में ब्राह्मण प्रतिनिधित्व घटता नजर आ रहा है, जिसे विश्लेषक राज्य की बदलती राजनीतिक दिशा का संकेत मान रहे हैं।
  • पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर EC का बड़ा फैसला…. पहली बार रिटर्निंग अफसर तैनात

    पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर EC का बड़ा फैसला…. पहली बार रिटर्निंग अफसर तैनात


    नई दिल्ली।
    चुनाव आयोग (Election Commission) ने पश्चिम बंगाल (West Bengal) में पहली बार देश के अन्य हिस्सों की तरह 152 चुनाव क्षेत्रों में SDM या उसके बराबर या उससे ऊंचे लेवल के अधिकारियों को को रिटर्निंग ऑफिसर्स (Returning Officers) यानी निर्वाचन अधिकारी के पद पर अपग्रेड कर तैनाती को मंजूरी दी है। चुनाव आयोग की तरफ से आज (गुरुवार, 12 मार्च को) जारी एक नोटिफिकेशन में राज्य के सभी 294 विधानसभा क्षेत्रों में SDM या उसके बराबर या उससे ऊंचे लेवल के रिटर्निंग ऑफिसर्स की लिस्ट जारी किए गए हैं।

    अधिकारियों के अनुसार, यह कदम तब उठाया गया, जब चुनाव आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य सरकार निर्वाचन अधिकारी के रूप में कार्य करने के लिए उचित रैंक के अधिकारियों को नामित करे, जो चुनाव कराने के लिए एक अनिवार्य शर्त है। इसके बाद, राज्य प्रशासन ने पात्र अधिकारियों की एक संशोधित सूची सौंपी, जिससे आयोग के लिए इन नियुक्तियों का रास्ता साफ हो गया।


    निर्वाचन अधिकारी के क्या काम?

    निर्वाचन अधिकारी चुनाव प्रक्रिया में मुख्य भूमिका निभाते हैं। अपने निर्वाचन क्षेत्रों में नामांकन प्रक्रिया की निगरानी, उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच, मतदान की व्यवस्था, वोटों की गिनती और परिणामों की घोषणा जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निर्वाचन अधिकारी के कंधों पर ही होती हैं। चुनाव नियमों के तहत, चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता और कुशल प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए आमतौर पर इन अधिकारियों को वरिष्ठ प्रशासनिक संवर्गों से चुना जाता है।


    आयोग ने अधिकारियों की लिस्ट पर जताई थी चिंता

    अधिकारियों ने बताया कि आयोग ने पहले राज्य सरकार के प्रस्तावित अधिकारियों की वरिष्ठता के स्तर पर चिंता जताई थी और निर्धारित मानदंडों को पूरा करने वाले अधिकारियों की मांग की थी। राज्य के इस आवश्यकता को पूरा करने और उचित रैंक के अधिकारी उपलब्ध कराने के बाद ही आयोग ने निर्वाचन अधिकारियों की नियुक्ति की औपचारिक अधिसूचना जारी की।


    चुनाव से पहले की तैयारी

    यह कदम पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारियों में एक महत्वपूर्ण चरण है, जहां चुनाव आयोग संविधान के तहत अपनी देखरेख में राज्य प्रशासन के साथ तालमेल बिठाकर चुनाव कराता है। चुनाव की औपचारिक तारीखों की घोषणा से पहले निर्वाचन अधिकारियों की नियुक्ति शुरुआती प्रशासनिक उपायों में से एक है, ताकि नामांकन, मतदान और मतगणना के प्रबंधन के लिए आवश्यक ढांचा चुनाव से काफी पहले तैयार हो सके।

  • Elections : 10 राज्यों से राज्यसभा की 37 रिक्त सीटों के लिए 39 उम्मीदवार मैदान में…

    Elections : 10 राज्यों से राज्यसभा की 37 रिक्त सीटों के लिए 39 उम्मीदवार मैदान में…


    नई दिल्ली।
    देश के 10 राज्यों (10 States) से राज्यसभा (Rajya Sabha) की रिक्त 37 सीटों (37 Vacant Seats ) के लिए भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party- BJP) कांग्रेस समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के 37 उम्मीदवारों ने गुरुवार को नामांकन दाखिल किए वहीं दो निर्दलीय उम्मीदवार ने भी अपनी नामांकन दाखिल कर अपनी दावेदारी पेश की है। दिलचस्प तथ्य यह भी है कि सीटों की संख्या के अनुरूप उम्मीदवारों के नामाकंन दाखिल होने से उनके निर्विरोध निर्वाचन तय माने जा रहे हैं।


    महाराष्ट्र

    महाराष्ट्र में राज्यसभा की सात सीटों पर चुनाव होने जा रहे हैं। भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति गठबंधन ने चार उम्मीदवारों रामदास अठावले, विनोद तावड़े, माया वाघमारे और रामराव वडकुटे को मैदान में उतारा तो वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की ओर से उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और दिवंगत नेता अजित पवार के बेटे पार्थ पवार ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया है। सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने पार्टी प्रवक्ता ज्योति वाघमारे को अपना एकमात्र उम्मीदवार घोषित किया है। दूसरी ओर विपक्षी महा विकास अघाड़ी गठबंधन ने दिग्गज नेता शरद पवार को अपना उम्मीदवार बनाया है। स्वास्थ्य कारणों से पवार विधानसभा नहीं पहुंच सके, लेकिन अधिकारियों ने उनके आवास पर जाकर नामांकन की औपचारिकताएं पूरी कीं। चूंकि राज्य में उपलब्ध सीटों और उम्मीदवारों की कुल संख्या अब बराबर है, इसलिए मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और यह पूरी प्रक्रिया निर्विरोध संपन्न होगी।


    हरियाणा

    हरियाणा से दो सीटों के लिए भाजपा उम्मीदवार संजय भाटिया ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। कांग्रेस ने इस चुनाव के लिए कर्मवीर सिंह बौद्ध को अपना प्रत्याशी बनाया है और यह उनका पहला चुनाव होगा। इस बीच निर्दलीय उम्मीदवार रोहतक के बोहर गांव निवासी सतीश नांदल ने भी तीसरे उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल कर चुनाव को त्रिकोणीय बना दिया है।


    हिमाचल प्रदेश

    हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा की एक सीट के लिए कांग्रेस उम्मीदवार अनुराग शर्मा ने नामांकन दाखिल किया है। 68 सदस्यीय हिमाचल प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस के पास आरामदायक बहुमत होने के कारण राज्यसभा के लिए शर्मा का निर्वाचन औपचारिकता मात्र होने की उम्मीद है, जब तक कि कोई अप्रत्याशित मुकाबला सामने न आये।


    तमिलनाडु

    तमिलनाडु से राज्यसभा की छह सीटों के लिये नामांकन के अंतिम दिन सभी छह उम्मीदवारों ने अपने पर्चे दाखिल कर दिए। इनमें सत्तारूढ़ दल के चार और विपक्ष के दो उम्मीदवार शामिल हैं। सत्तारूढ़ मोर्चे की ओर से एन. शिवा, प्रो. जे. कॉन्स्टेंटाइन रविंद्रन, क्रिस्टोफर तिलक और एल.के. सुदीश ने नामांकन दाखिल किया। वहीं विपक्षी गठबंधन की ओर से वर्तमान सांसद एम. थंबीदुरई और पीएमके नेता अम्बुमणि रामदास ने नामांकन दाखिल किया। 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में संख्या बल के आधार पर द्रमुक चार और अन्नाद्रमुक दो सीटें आसानी से जीत सकती है, जिसके कारण सभी छह उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने की संभावना है।


    पश्चिम बंगाल

    पश्चिम बंगाल से राज्यसभा की पांच सीटों के लिए सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार अभिनेता से नेता बने पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो, अभिनेत्री कोयल मल्लिक, पूर्व पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार और वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने अपने नामांकन दखिल किए है। भाजपा उम्मीदवार राहुल सिन्हा ने भी अपना नामांकन दाखिल किया है।


    ओडिशा

    ओडिशा से राज्यसभा की चार सीटों के लिए सत्तारूढ़ भाजपा ने मनमोहन सामल और वर्तमान राज्यसभा सदस्य सुजीत कुमार को मैदान में उतारा है, जबकि बीजू जनता दल (बीजद) ने संत्रुप्ता मिश्रा और प्रसिद्ध यूरोलॉजिस्ट डॉ. दत्तेश्वर होता को उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा दिलीप रे भाजपा के समर्थन से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। इन सभी उम्मीदवारों ने आज नामाकंन के अंतिम दिन अपने नामांकनपत्र दाखिल किए। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार असली मुकाबला डॉ दत्तेश्वर होता और दिलीप रे के बीच माना जा रहा है। रे ने नामांकन दाखिल करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा नेतृत्व का समर्थन देने के लिए आभार व्यक्त किया तथा राज्यसभा चुनाव में जीत का विश्वास जताया


    असम

    असम में तीन राज्यसभा सीटों के लिए विपक्ष की ओर से सर्वसम्मति से उम्मीदवार खड़ा करने में विफल रहने के कारण आगामी चुनावों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से तीनों नामांकित उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना तय है। कैबिनेट मंत्री जोगेन महान, भाजपा के पूर्व विधायक तेराश गोवाला और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) के प्रमुख प्रमोद बोरो ने उच्च सदन के लिए अपना नामांकन दाखिल किया है। विपक्ष के किसी भी उम्मीदवार के मैदान में नहीं उतरने के कारण राजग के उम्मीदवारों के लिए चुनाव अब महज एक औपचारिकता बनकर रह गया है। उनकी निर्विरोध जीत से असम से राज्यसभा में राजग की मजबूत उपस्थिति एक बार फिर सुनिश्चित हो जाएगी।


    बिहार

    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की ओर से पांच उम्मीदवारों ने गुरुवार को राज्यसभा चुनाव के लिये नामांकन पत्र दाखिल किया। एनडीए की ओर से जनता दल यूनाईटेड (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, मौजूदा राज्यसभा सदस्य रामनाथ ठाकुर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, शिवेश कुमार और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने नामांकन पत्र दाखिल किया।


    छत्तीसगढ़

    वहीं, छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की दो सीटों के भाजपा उम्मीदवार लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस की मौजूदा राज्यसभा सदस्य फूलो देवी नेताम ने अपने नामांकन दाखिल किए हैं।

  • ED के छापों के बाद कोलकाता से दिल्ली तक सियासी बवाल, TMC के 8 सांसद अमित शाह के दफ्तर के बाहर हिरासत में

    ED के छापों के बाद कोलकाता से दिल्ली तक सियासी बवाल, TMC के 8 सांसद अमित शाह के दफ्तर के बाहर हिरासत में


    नई दिल्ली । कोलकाता में IPAC प्रमुख प्रतीक जैन के घर और ऑफिस पर ईडी की छापेमारी के बाद राजनीतिक हलकों में बवाल मच गया है। यह छापेमारी पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टीके बीच राजनीतिक संघर्ष को और गहरा कर दिया है। इस पर टीएमसी और बीजेपी दोनों ही पक्षों के बीच तीखी नोंकझोंक देखने को मिली।

    TMC के सांसदों ने मंगलवार, 9 जनवरी को दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया, विरोध जताने के लिए। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी करते हुए सांसदों ने ईडी की कार्रवाई को पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया। इस दौरान TMC के प्रमुख नेताओं में से डेरेक ओ’ब्रायन, शताब्दी रॉय, महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद शामिल रहे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने टीएमसी के नेताओं, डेरेक ओ’ब्रायन और महुआ मोइत्रा को हिरासत में ले लिया। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, कुल आठ सांसदों को हिरासत में लिया गया था, लेकिन उन्हें माहौल को देखते हुए बाद में रिहा कर दिया गया।

    महुआ मोइत्रा ने प्रदर्शन के दौरान मीडिया से बात करते हुए कहा, यह हमारे साथ अन्याय हो रहा है। हमारी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी किसी के सामने झुकने वाली नहीं हैं। गृह मंत्रालय ने ईडी का गलत इस्तेमाल किया है। ईडी को हमारी पार्टी की राजनीतिक और रणनीतिक जानकारी चुराने के लिए भेजा गया था। ममता बनर्जी शेरनी हैं और उन्होंने हमारी पार्टी की प्रॉपर्टी की रक्षा की है। हम बीजेपी को हराकर दिखाएंगे।

    TMC सांसद शताब्दी रॉय ने भी तीखा हमला करते हुए कहा, कल पूरी दुनिया ने देखा कि गृह मंत्रालय ने ईडी का गलत इस्तेमाल किया। ये सिर्फ चुनाव जीतने के लिए अपनी एजेंसियों को भेजते हैं, लेकिन वे चुनाव नहीं जीत सकते। वहीं, कीर्ति आजाद ने आरोप लगाया कि BJP ने ग्यारह साल तक सही टेंडर जारी नहीं किए और अपनी पार्टी के लोगों को काम देकर उन्हें लूटने का मौका दिया।

    टीएमसी ने आरोप लगाया कि बीजेपी लोकतंत्र को कुचलने के लिए दिल्ली पुलिस का इस्तेमाल कर रही है और यह सब असहमति को दबाने के लिए किया जा रहा है। TMC नेताओं का कहना है कि ईडी की छापेमारी को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, खासकर चुनावों से पहले। गौरतलब है कि ईडी ने कोयला चोरी घोटाले से जुड़े धनशोधन की जांच के तहत कोलकाता स्थित आई-पैक के कार्यालय और उसके निदेशक प्रतीक जैन के घर पर छापेमारी की थी। इसके बाद टीएमसी सरकार पर आरोप लगाते हुए लगातार हमलावर हो गई थी। इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक मैदान को और भी गरम कर दिया है, और दोनों प्रमुख दलों के बीच आगामी विधानसभा चुनावों में संघर्ष तेज हो गया है।

  • 5 राज्यों के चुनावों की तैयारी.. इसी माह BJP अध्यक्ष पद संभाल सकतें हैं नितिन नबीन

    5 राज्यों के चुनावों की तैयारी.. इसी माह BJP अध्यक्ष पद संभाल सकतें हैं नितिन नबीन


    नई दिल्ली।
    भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) के कार्यकारी अध्यक्ष (Working President) नितिन नवीन (Nitin Naveen) जनवरी के मध्य में अध्यक्ष पद संभाल सकते हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। फिलहाल, यह जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा (Jagat Prakash Nadda) संभाल रहे हैं। वह साल 2020 से अध्यक्ष पद पर हैं। खास बात है कि नवीन को भाजपा की कप्तानी ऐसे समय पर मिल रही है, जब पार्टी पश्चिम बंगाल (West Bengal) समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही है।

    एक रिपोर्ट में भाजपा सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि राष्ट्रीय स्तर पर बदलाव की जरूरत पूरी हो गई हैं। ऐसे में नवीन का मध्य जनवरी तक पार्टी के शीर्ष पद पर नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। वह इस पद पर 2029 लोकसभा चुनाव तक रहेंगे। भाजपा के एक नेता ने कहा, ‘हमने 18 लाख पोलिंग बूथों में से 17 लाख से ज्यादा पर देश की 1050 जिलों में से 950 से ज्यादा में 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 30 में पार्टी के संविधान के अनुसार संगठन चुनाव करा लिए हैं। आगे की प्रक्रिया भी पूरी तरह की जाएगी।’

    उन्होंने कहा, ‘चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में करीब 3 से 4 दिन लगने की संभावनाएं हैं। इसके बाद राष्ट्रीय परिषद की तरफ से इसे मंजूरी दी जाएगी।’ पार्टी के अन्य सूत्र ने अखबार को बताया, ‘चूंकि इस प्रक्रिया की घोषणा मकर संक्रांति के आसपास हो सकती है, तो ऐसे में 20 जनवरी तक नए अध्यक्ष के ऐलान के आसार हैं।’

    चुनाव कर रहे हैं इंतजार
    वर्ष 2025 के अंत में बिहार के विधायक नितिन नवीन को भाजपा का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया जाना पार्टी में पीढ़ीगत बदलाव का संकेत माना जा रहा है। उनके ऊपर साल 2026 में पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी होगी। माना जा रहा है कि बंगाल चुनाव सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।

  • बांग्लादेश में इस्लामिक राज्य बनने की संभावना भारत की सुरक्षा पर गंभीर खतरा हसीना के बेटे का दावा

    बांग्लादेश में इस्लामिक राज्य बनने की संभावना भारत की सुरक्षा पर गंभीर खतरा हसीना के बेटे का दावा



    नई दिल्ली ।
    बांग्लादेश में अगले साल फरवरी में होने वाले आम चुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग की चुनावी भागीदारी पर भी प्रतिबंध लगाए जाने की संभावना को लेकर माहौल गरमाया हुआ है। इस बीच शेख हसीना के बेटे और सलाहकार सजेब वाजेद जॉय ने बांग्लादेश की मौजूदा अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जॉय ने कहा कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में चल रही सरकार बांग्लादेश को इस्लामिक राज्य बनाने की दिशा में काम कर रही है जो न केवल देश के लिए बल्कि भारत के लिए भी एक बड़ा सुरक्षा खतरा हो सकता है।

    जॉय ने कहा कि इस सरकार के तहत आतंकवादी संगठन जैसे लश्कर-ए-तैयबा को पूरी छूट मिल रही है जिससे भारत के लिए आतंकवाद का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि इस संगठन की गतिविधियों को रोकने के लिए भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने की जरूरत है। जॉय का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश के राजनीतिक माहौल में तनाव बढ़ता जा रहा है और चुनावों को लेकर विभिन्न पार्टियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा हो रही है।

    सजेब वाजेद जॉय ने आगे कहा कि बांग्लादेश में मानवाधिकार उल्लंघन की स्थिति भी बहुत गंभीर हो गई है खासकर अल्पसंख्यकों के खिलाफ। उनका आरोप है कि यूनुस सरकार के तहत बांग्लादेश में लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है और विपक्षी पार्टियों को दबाया जा रहा है। इस स्थिति ने देश के भीतर असंतोष और अस्थिरता को बढ़ावा दिया है जो किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए एक खतरे की घंटी है।

    वाजेद जॉय के इस बयान ने बांग्लादेश के राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है और यह दर्शाता है कि बांग्लादेश में शासन के वर्तमान स्वरूप और भविष्य की दिशा को लेकर गहरी चिंताएं हैं। भारत के लिए भी इस स्थिति को नजरअंदाज करना मुश्किल हो सकता है क्योंकि बांग्लादेश का भारत के साथ गहरा भौगोलिक और राजनीतिक संबंध है।

    इन हालातों में भारत के सुरक्षा तंत्र को बांग्लादेश में चल रही घटनाओं और उनके संभावित परिणामों पर लगातार निगरानी रखनी होगी ताकि किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहा जा सके। इस बयान ने भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में न केवल तनाव को बढ़ाया है बल्कि दोनों देशों की सुरक्षा की साझा चिंता को भी उजागर किया है।