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  • मुंबई में प्रदर्शन के दौरान 75 वर्षीय बुजुर्ग की हार्ट अटैक से मौत, सीने में दर्द के बाद अस्पताल ले जाया गया

    मुंबई में प्रदर्शन के दौरान 75 वर्षीय बुजुर्ग की हार्ट अटैक से मौत, सीने में दर्द के बाद अस्पताल ले जाया गया

    नई दिल्ली: मुंबई के शिवाजी पार्क में 2 अक्टूबर को आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान 75 वर्षीय गोपालकृष्ण सुब्बैया पिल्लई की हार्ट अटैक से मौत हो गई। पिल्लई ठाणे के दोस्ती वेस्ट काउंटी के बी विंग में रहते थे और प्रदर्शन में शामिल होने के लिए शाम करीब 4:30 बजे शिवाजी पार्क पहुंचे थे। करीब 5 बजे उन्हें सीने में तेज दर्द की शिकायत हुई। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद उनके दोस्तों और पुलिसकर्मियों ने उन्हें पास के अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

    यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर उठाई गई आपत्तियों से जुड़ी थी। प्रदर्शन शाम करीब 4 बजे शुरू हुआ और शुरुआत में ही बड़ी संख्या में लोग शिवाजी पार्क के आसपास जमा हो गए। प्रदर्शन में युवाओं, कार्यकर्ताओं और छात्र संगठनों से जुड़े लोगों ने भी हिस्सा लिया।

    प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है और इसके कारण लाखों नागरिकों के मतदान के अधिकार प्रभावित हुए हैं। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने तिरंगा, पोस्टर और बैनर लेकर अपनी मांगें रखीं। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे भी लगाए।

    प्रदर्शन के आयोजकों ने एसआईआर प्रक्रिया को तुरंत रोकने, 2025 की मतदाता सूची को फ्रीज करने और पुरानी मतदाता सूची के आधार पर चुनाव कराने की मांग की। इसके अलावा नागरिक समाज की भागीदारी के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार की मांग भी रखी गई। संगठन की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने की मांग भी की गई। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की बात कही।

    प्रदर्शन के दौरान हुई 75 वर्षीय गोपालकृष्ण सुब्बैया पिल्लई की मौत अलग स्वास्थ्य संबंधी घटना के रूप में सामने आई। पिल्लई शाम करीब 4:30 बजे प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे थे और करीब आधे घंटे बाद उन्हें सीने में तेज दर्द हुआ। मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों के इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। प्रदर्शन के दौरान उनकी मौत की खबर से वहां मौजूद लोगों को घटना की जानकारी मिली।

  • CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते करेगा सुनवाई, आयोग के फैसलों की प्रक्रिया पर उठे सवाल

    CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते करेगा सुनवाई, आयोग के फैसलों की प्रक्रिया पर उठे सवाल


    नई दिल्ली।
    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व वाले चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते सुनवाई करेगा। मामले को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के सामने उठाया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने मामले में जल्द सुनवाई की मांग रखी, जिसके बाद अदालत ने याचिका को अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति दी। याचिका में यह सवाल उठाया गया है कि क्या चुनाव आयोग जैसे बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्थान से जुड़े फैसले अकेले मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा लिए जा सकते हैं।

    याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के नाम पर कुछ फैसले चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की मंजूरी के बिना लिए गए। इसमें कहा गया है कि आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 और 2023 के संबंधित कानून की धारा 18 के तहत सामूहिक रूप से फैसले लेने की प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। याचिका में चुनाव आयोग के बहुसदस्यीय स्वरूप, निर्णय लेने की प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त की शक्तियों से जुड़े कई मुद्दे उठाए गए हैं। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने समेत कई मांगें भी की गई हैं।

    मामले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से सवाल उठाया गया है कि SIR से जुड़े फैसले पूरे आयोग की सहमति या बहुमत से लिए गए थे या नहीं। याचिका में दावा किया गया है कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कम से कम 14 मामलों में आपत्ति दर्ज की। इन आपत्तियों को चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया से जोड़कर देखा गया है और इसी आधार पर याचिका में आयोग के सामूहिक निर्णय लेने के अधिकार तथा प्रक्रिया की जांच की मांग की गई है।

    याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई से जुड़ी मांगों के साथ यह भी कहा गया है कि आयोग में निहित सामूहिक शक्तियों का इस्तेमाल निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप होना चाहिए। याचिकाकर्ता ने अदालत से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि आयोग के नाम पर लिए गए फैसलों में सभी सदस्यों की भूमिका और सहमति किस तरह रही। इस मामले का एक प्रमुख हिस्सा SIR से जुड़े निर्णय हैं, जिनको लेकर याचिका में यह जानने की मांग की गई है कि संबंधित फैसले सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर लिए गए थे या नहीं।

    वहीं, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र प्रशासनिक मुद्दों से जुड़े थे और उनका SIR या आयोग के नीतिगत फैसलों से संबंध नहीं था। ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की निर्णय लेने की प्रक्रिया, मुख्य चुनाव आयुक्त की शक्तियों और SIR से जुड़े फैसलों को लेकर उठाए गए सवालों पर सुनवाई होगी। अदालत अगले सप्ताह इस मामले में याचिका में की गई मांगों और उठाए गए मुद्दों पर विचार करेगी।

  • ‘उंगली नीचे करो’ TMC सांसदों ने चुनाव आयोग से की तीखी बहस SIR और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोप

    ‘उंगली नीचे करो’ TMC सांसदों ने चुनाव आयोग से की तीखी बहस SIR और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोप




    नई दिल्ली।
    तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग (ECI) के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से SIR (सर्विलांस इन्टरव्यू रिकॉर्ड) और वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों को लेकर करीब ढाई घंटे तक बैठक की। बैठक के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनसे उंगली उठाकर बात करने की कोशिश की, जिस पर बनर्जी ने कहा, “उंगली नीचे करके बात करें।
    आप मनोनीत हैं, हम निर्वाचित हैं। हम किसी के दास नहीं हैं।”

    अभिषेक बनर्जी ने कहा कि देश में अब ईवीएम से वोट चोरी नहीं हो रही, बल्कि सॉफ्टवेयर और एल्गोरिदम के जरिए वोटर लिस्ट में हेरफेर किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि TMC के 10 सांसदों और पश्चिम बंगाल सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों ने आयोग से सवाल किए, लेकिन आयोग ने कोई ठोस जवाब नहीं दिया।

    साथ ही उन्होंने आयोग पर 28 नवंबर को पूछे गए सवालों का जवाब न देने और चयनित मीडिया को जानकारी देने का भी आरोप लगाया।

    TMC नेता ने दावा किया कि SIR के तहत 1.36 करोड़ मामलों में लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी बताई जा रही है, लेकिन आयोग ने अभी तक सूची सार्वजनिक नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि ECI ऐप में गड़बड़ी है, दस्तावेज जमा होने के बावजूद नोटिस जारी नहीं हो रहे और नाम सॉफ्टवेयर के जरिए हटाए जा रहे हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि 60 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों, दिव्यांग और गंभीर बीमार लोगों को घंटों वेरिफिकेशन के लिए बैठाना अमानवीय है।

    अभिषेक बनर्जी ने बंगाल को बदनाम करने की कोशिश पर सवाल उठाया और कहा, रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम पर झूठा प्रचार किया जा रहा है। अगर अवैध प्रवासी हैं तो उन्हें बाहर करने का हम समर्थन करेंगे, लेकिन झूठा प्रचार बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि अन्य 11 राज्यों में SIR चल रहा है, लेकिन बंगाल में सबसे कम डिलीशन होने के बावजूद सबसे ज्यादा सख्ती की जा रही है।

    अभिषेक बनर्जी ने विपक्षी दलों को चेताया कि वोट चोरी ईवीएम से नहीं, वोटर लिस्ट और सॉफ्टवेयर के जरिए हो रही है। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी इसी तरीके से महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली और बिहार में जीत हासिल कर रही है। अंत में उन्होंने कहा, “पहले मतदाता तय करते थे कि सरकार कौन बनाएगा, अब सरकार तय कर रही है कि वोट डालने कौन जाएगा। लेकिन संविधान हमेशा रहेगा और 2026 में बंगाल की जनता फिर बीजेपी को हराएगी।