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  • सस्टेनेबल मोबिलिटी की दिशा में बदलाव: भारत में इलेक्ट्रिक बसों का उपयोग तेजी से बढ़ने के संकेत

    सस्टेनेबल मोबिलिटी की दिशा में बदलाव: भारत में इलेक्ट्रिक बसों का उपयोग तेजी से बढ़ने के संकेत


    नई दिल्ली ।  भारत में सार्वजनिक परिवहन प्रणाली धीरे-धीरे एक बड़े और महत्वपूर्ण परिवर्तन की ओर बढ़ रही है, जहां इलेक्ट्रिक बसें भविष्य की मुख्य भूमिका निभाने के लिए तैयार दिखाई दे रही हैं। हाल के वर्षों में जिस तरह से स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण पर जोर बढ़ा है, उसने परिवहन क्षेत्र में इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को तेजी से बढ़ावा दिया है। अब यह बदलाव केवल शुरुआती चरण में नहीं रहा, बल्कि एक व्यापक और संरचनात्मक परिवर्तन के रूप में सामने आ रहा है।

    देश में इलेक्ट्रिक बसों की हिस्सेदारी वर्तमान में अभी सीमित स्तर पर है, लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि वित्त वर्ष 2035 तक यह आंकड़ा लगभग 35 से 40 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में सार्वजनिक परिवहन का स्वरूप पूरी तरह से बदल सकता है। इसी अवधि में यह भी संभावना जताई गई है कि सार्वजनिक परिवहन में चलने वाली कुल बसों में इलेक्ट्रिक बसों की हिस्सेदारी 85 प्रतिशत से अधिक तक पहुंच सकती है, जो एक ऐतिहासिक बदलाव होगा।

    भारत में बसें सार्वजनिक परिवहन का सबसे बड़ा माध्यम हैं और लाखों लोग रोजाना इसी पर निर्भर रहते हैं। कुल यात्रियों की यात्रा दूरी का एक बड़ा हिस्सा बसों के माध्यम से तय होता है, ऐसे में इस क्षेत्र का इलेक्ट्रिफिकेशन न केवल पर्यावरण के लिए लाभकारी है, बल्कि यह शहरी प्रदूषण और ईंधन निर्भरता को भी काफी हद तक कम कर सकता है।

    इस बदलाव के पीछे कई प्रमुख कारण सामने आ रहे हैं। सबसे बड़ा कारण सरकारी स्तर पर बढ़ते निवेश और खरीद योजनाएं हैं, जिनके तहत इलेक्ट्रिक बसों की खरीद को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार और तकनीकी सुधार भी इस सेक्टर को मजबूती दे रहे हैं। धीरे-धीरे निजी क्षेत्र की भागीदारी भी इस दिशा में बढ़ रही है, जिससे इस मॉडल को और गति मिल रही है।

    वर्तमान समय में देश के विभिन्न हिस्सों में हजारों इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर चल रही हैं और कई नए ऑर्डर और योजनाएं पाइपलाइन में हैं। हालांकि इस क्षेत्र में अभी भी कुछ चुनौतियां मौजूद हैं, जैसे चार्जिंग स्टेशनों की उपलब्धता, बैटरी तकनीक की लागत और संचालन की दक्षता। इसके बावजूद इस सेक्टर में विकास की गति लगातार बनी हुई है।

    आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ाने, वित्तीय मॉडल को मजबूत करने और चार्जिंग नेटवर्क को व्यापक बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे न केवल इलेक्ट्रिक बसों की लागत कम होगी, बल्कि उनका संचालन भी अधिक आसान और प्रभावी बन सकेगा।

    कुल मिलाकर देखा जाए तो भारत में इलेक्ट्रिक बसों का बढ़ता उपयोग केवल एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि यह देश के परिवहन तंत्र को अधिक स्वच्छ, आधुनिक और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि यह गति इसी तरह बनी रही, तो आने वाले दशक में भारत का सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह से हरित ऊर्जा आधारित प्रणाली की ओर बढ़ सकता है।

  • ल्ली ईवी पॉलिसी 2026-2030 से परिवहन प्रणाली में बड़ा बदलाव और हरित भविष्य की ओर कदम

    ल्ली ईवी पॉलिसी 2026-2030 से परिवहन प्रणाली में बड़ा बदलाव और हरित भविष्य की ओर कदम


    नई दिल्ली।राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक नीति का मसौदा तैयार किया है। Delhi Electric Vehicle Policy 2026-2030 के तहत तैयार यह प्रस्ताव राजधानी के परिवहन ढांचे को अधिक स्वच्छ, आधुनिक और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस मसौदे पर हितधारकों से सुझाव मांगे गए हैं ताकि इसे अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बनाया जा सके।

    इस प्रस्तावित नीति का मुख्य उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने के साथ-साथ चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार करना और बैटरी रीसाइक्लिंग सिस्टम को मजबूत करना है। सरकार का मानना है कि दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण का एक बड़ा हिस्सा वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन के कारण होता है, इसलिए परिवहन क्षेत्र में बदलाव बेहद जरूरी है। इसी दृष्टिकोण से नीति में सभी प्रकार के वाहनों को इलेक्ट्रिक तकनीक की ओर ले जाने की रूपरेखा तैयार की गई है।

    मसौदे में यह भी प्रावधान किया गया है कि नागरिक और संबंधित हितधारक निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं, जिसके बाद अंतिम नीति को लागू किया जाएगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य नीति निर्माण को अधिक पारदर्शी और सहभागी बनाना है ताकि विभिन्न वर्गों की जरूरतों और सुझावों को शामिल किया जा सके।

    नीति में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन का विस्तृत ढांचा शामिल किया गया है। इसमें दोपहिया, तिपहिया और हल्के वाणिज्यिक वाहनों के लिए चरणबद्ध सब्सिडी देने का प्रस्ताव है, जिससे शुरुआती वर्षों में ईवी अपनाने की गति तेज हो सके। साथ ही पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को स्क्रैप करने पर अतिरिक्त आर्थिक लाभ देने की भी योजना है, ताकि स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा मिल सके।

    इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में पूरी या आंशिक छूट देने का प्रस्ताव भी शामिल है, जिससे उपभोक्ताओं पर शुरुआती आर्थिक बोझ कम हो सके। इस कदम से इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ने और बाजार में उनकी पहुंच आसान होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के लिए एक विशेष एजेंसी को नोडल जिम्मेदारी दी गई है, जो पूरे शहर में चार्जिंग स्टेशन की योजना, स्थापना और संचालन को व्यवस्थित करेगी। इसके साथ ही एक डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित सिंगल विंडो सिस्टम विकसित करने की योजना भी है, जिससे चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की प्रक्रिया सरल और तेज हो सके।

    नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि वाहन निर्माता कंपनियों और डीलरशिप को चार्जिंग सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। इससे उपयोगकर्ताओं को अधिक सुविधाजनक और व्यापक चार्जिंग नेटवर्क उपलब्ध हो सकेगा।

    बैटरी प्रबंधन और पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रीसाइक्लिंग और सुरक्षित निपटान प्रणाली विकसित करने पर भी जोर दिया गया है। इसके लिए बैटरी ट्रैकिंग और संग्रहण प्रणाली लागू करने की योजना है, जिससे पर्यावरणीय नुकसान को कम किया जा सके।

    सरकार ने सार्वजनिक परिवहन और सरकारी वाहनों को भी चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत आने वाले वर्षों में बसों, सरकारी गाड़ियों और अन्य सार्वजनिक वाहनों को ईवी में बदलने की दिशा में काम किया जाएगा, जिससे बड़े स्तर पर उत्सर्जन में कमी लाई जा सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति राजधानी में परिवहन व्यवस्था को नए दौर में ले जाने की क्षमता रखती है। यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो यह न केवल प्रदूषण को कम करेगी बल्कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर में निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकती है।

  • इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बढ़ा सहारा, चार्जिंग इकोसिस्टम को मिलेगा जोर-'लीफ' लॉन्च

    इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बढ़ा सहारा, चार्जिंग इकोसिस्टम को मिलेगा जोर-'लीफ' लॉन्च


    नई दिल्ली केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक असेंबल (ईवी) के इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए ‘लीफ’ (LEAF – लाइट इलेक्ट्रिक-व्हीकल एक्सेलेरेशन फोरम) लॉन्च किया है। मंत्रालय उद्योग एच. डी. कुमारस्वामी ने सोमवार को इसकी घोषणा की। यह एक इंडस्ट्रीज़-नेतृत्व मंच वाला है, जहां लाइट इलेक्ट्रिक व्हीकल (एलिवी) सेक्टर के सभी स्टेक होल्डर्स – व्हीकल निर्माता (ओईएम), रियोटेक्नोलॉजिस्ट, कंपोनेंट निर्माता और टेक्नोलॉजी प्रदाता – एक साथ काम कर रहे हैं।

    मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि यह पहल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेजी से बढ़ाने और बेहतर इंटरऑपरेबिलिटी, कंज्यूमर सिस्टम और डिजिटल नेटवर्क सुनिश्चित करने में मदद करेगी। उनका कहना था कि यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण का मानक है और इससे सस्टेनेबल मोबिलिटी को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी।

    LEAF का मकसद और उद्देश्य:

    नेटवर्क के बीच बेहतर संतुलन (इंटरऑपरेबिलिटी) सुनिश्चित करना।
    सिस्टम के अवशेष और उपभोक्ता को समान अनुभव देना।
    सार्वजनिक निजीकरण का विस्तार करना।
    ‘लाइट इलेक्ट्रिक कंबाइंड रिजर्वेशन सिस्टम (LECCS)’ जैसे स्टेप स्ट्रेंथ जा रहे हैं, जिनमें भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने मंजूरी दे दी है। यह सिस्टम स्लो और फास्ट दोनों तरह के रिजर्वेशन को सपोर्ट करेगा।

    अब तक इसमें 20 से ज्यादा कंपनियों को शामिल किया गया है, जिसमें ऑटोमोबाइल निर्माता, मोटरसाइकल निर्माता, सप्लायर और सॉफ्टवेयर इंजीनियर शामिल हैं। विशेषज्ञ का कहना है कि बेहतर इंटरऑपरेबिलिटी और मजबूत सार्वजनिक आरक्षण नेटवर्क ही देश में ईवी एनोटेशन की साख बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।

    लीफ (LEAF) फोरम के माध्यम से सरकार और औद्योगिक समूह भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देते हैं। यह कदम ईवी आरक्षण नेटवर्क की अनोखी और अनोखी अनुभव में अंतर जैसा झलक को दूर करने की दिशा में अहम साबित होगा।