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  • इंदौर से मिले ग्रीन फ्यूचर के संकेत EV कॉन्क्लेव में निवेश नवाचार और क्लीन ट्रांसपोर्ट पर बड़ा मंथन

    इंदौर से मिले ग्रीन फ्यूचर के संकेत EV कॉन्क्लेव में निवेश नवाचार और क्लीन ट्रांसपोर्ट पर बड़ा मंथन


                                                         
    इंदौर । इंदौर एक बार फिर नवाचार और भविष्य की तकनीकों का केंद्र बनकर उभरा है। शहर में आयोजित ईवी और ग्रीन एनर्जी कॉन्क्लेव ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी स्वच्छ ऊर्जा और सस्टेनेबल डेवलपमेंट के क्षेत्र में नए अवसरों की मजबूत तस्वीर पेश की। शेराटन ग्रैंड पैलेस में आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से आए निवेशकों स्टार्टअप संस्थापकों उद्योग विशेषज्ञों कॉरपोरेट प्रतिनिधियों और नीति निर्माताओं ने भाग लेकर हरित विकास की दिशा में नई रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की।

    ह्युन्स ऑफ ईवी द्वारा आयोजित इस कॉन्क्लेव में 200 से अधिक वरिष्ठ अधिकारी निवेशक और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हुए। इंदौर नगर निगम ने सिटी होस्ट पार्टनर के रूप में आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि शहर स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

    कार्यक्रम के दौरान इलेक्ट्रिक व्हीकल इकोसिस्टम बैटरी और ऊर्जा प्रबंधन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर लॉजिस्टिक्स टेक्नोलॉजी क्लाइमेट टेक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे अहम विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भविष्य की चुनौतियों निवेश की संभावनाओं और नई तकनीकों के बेहतर उपयोग पर विस्तृत मंथन किया।

    कॉन्क्लेव का सबसे आकर्षक हिस्सा स्टार्टअप्स की लाइव पिच प्रस्तुति रही। देशभर से मिले लगभग 2400 आवेदनों में से बहुस्तरीय चयन प्रक्रिया के बाद केवल नौ स्टार्टअप्स को निवेशकों के सामने अपने इनोवेशन और बिजनेस मॉडल पेश करने का अवसर मिला। इस दौरान निवेशकों और स्टार्टअप्स के बीच कई महत्वपूर्ण व्यावसायिक चर्चाएं हुईं और भविष्य में सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।

    कार्यक्रम में कई अग्रणी कंपनियों और उद्योग समूहों की भागीदारी रही। इस मंच ने स्टार्टअप्स उद्योग और निवेशकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के साथ नए निवेश और तकनीकी सहयोग का रास्ता भी खोला। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजन भारत में स्वच्छ परिवहन और ग्रीन एनर्जी सेक्टर को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाएंगे।

    एचईवी के सीईओ डॉ ललित सिंह ने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और क्लीन ट्रांसपोर्ट तेजी से विस्तार कर रहे हैं। ऐसे मंच स्टार्टअप्स को नवाचार के साथ निवेशकों तक पहुंचने का अवसर देते हैं और उद्योग के विकास को गति प्रदान करते हैं। वहीं सलाहकार स्वप्निल बंसल ने कहा कि इंदौर जैसे टियर टू और टियर थ्री शहर अब स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए मजबूत केंद्र बनते जा रहे हैं जहां नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और निवेश दोनों मिल रहे हैं।

    डायरेक्टर आभा सिंह और एडिटर दिव्या ठक्कर ने कहा कि यह आयोजन इस बात का संकेत है कि ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक व्हीकल आधारित नवाचार अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं हैं। मध्य भारत भी तेजी से इस परिवर्तन का महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है और आने वाले समय में इस क्षेत्र में नई तकनीकों निवेश और रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है।

  • बीजिंग ने कैसे तोड़ा प्रदूषण का घेरा? ‘गैस चैंबर’ बनती दिल्ली के लिए चीन की स्टेप-बाय-स्टेप सीख

    बीजिंग ने कैसे तोड़ा प्रदूषण का घेरा? ‘गैस चैंबर’ बनती दिल्ली के लिए चीन की स्टेप-बाय-स्टेप सीख


    नई दिल्ली /दिल्ली में वायु प्रदूषण एक बार फिर गंभीर स्तर पर पहुंच चुका है। हालात ऐसे हैं कि सरकार को वर्क फ्रॉम होम निर्माण गतिविधियों पर रोक और बिना पीयूसी पेट्रोल-डीजल न मिलने जैसी सख्त पाबंदियां लागू करनी पड़ी हैं। गैस चैंबर बनती राजधानी के बीच अब चीन का उदाहरण चर्चा में है। चीन के दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने बताया है कि बीजिंग ने किस तरह प्रदूषण को मात दी और कैसे एक दशक में हवा की गुणवत्ता में ऐतिहासिक सुधार किया।यू जिंग ने दिल्ली और बीजिंग की तुलना करते हुए आंकड़े साझा किए। उनके अनुसार वर्ष 2013 में बीजिंग में पीएम 2.5 का औसत स्तर 101.7 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था। यह स्तर 2024 तक घटकर 30.9 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रह गया। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ जब चीन में तेज शहरीकरण और औद्योगिक विस्तार जारी रहा। इसके बावजूद लगातार और कठोर नीतियों के कारण बीजिंग आज प्रदूषण नियंत्रण की मिसाल बन चुका है।

    वाहनों पर सबसे पहला वार

    चीन की रणनीति का पहला और सबसे अहम कदम था वाहन उत्सर्जन पर सख्त नियंत्रण। बीजिंग में यूरोपियन मानकों के बराबर कड़े उत्सर्जन नियम लागू किए गए। पुराने और ज्यादा धुआं छोड़ने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से सड़कों से हटाया गया। निजी वाहनों की संख्या सीमित करने के लिए लाइसेंस प्लेट लॉटरी सिस्टम ऑड-ईवन जैसी योजनाएं और सप्ताह के कुछ तय दिनों में गाड़ी चलाने पर रोक लगाई गई।इसके साथ-साथ सार्वजनिक परिवहन को मजबूत किया गया। मेट्रो और बस नेटवर्क का बड़े पैमाने पर विस्तार हुआ और इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से बढ़ावा दिया गया। आज बीजिंग में इलेक्ट्रिक बसों और टैक्सियों की संख्या लाखों में है जिससे प्रदूषण पर सीधा असर पड़ा।

    उद्योगों पर सख्त फैसला

    बीजिंग में प्रदूषण का बड़ा स्रोत भारी उद्योग भी थे। चीन ने इस मोर्चे पर भी कोई नरमी नहीं दिखाई। शहर से 3000 से अधिक बड़ी और प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों को या तो बंद कराया गया या फिर शहर से बाहर स्थानांतरित किया गया। देश की बड़ी स्टील कंपनी शौगांग को हटाने से ही हवा में खतरनाक कणों में लगभग 20 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।दिलचस्प बात यह है कि जिन इलाकों में पहले फैक्ट्रियां थीं वहां अब पार्क व्यावसायिक क्षेत्र और तकनीकी हब विकसित किए गए। शौगांग का पुराना औद्योगिक परिसर 2022 के शीतकालीन ओलंपिक का प्रमुख स्थल बना जो पर्यावरणीय बदलाव का प्रतीक बन गया।

    क्षेत्रीय सहयोग बना गेमचेंजर

    चीन ने सिर्फ बीजिंग तक सीमित रहकर कदम नहीं उठाए। आसपास के 26 शहरों को साथ लेकर साझा प्रदूषण नियंत्रण रणनीति अपनाई गई। कोयले का उपयोग न केवल उद्योगों में बल्कि घरों में भी चरणबद्ध तरीके से खत्म किया गया। स्वच्छ ईंधन और गैस आधारित प्रणालियों को बढ़ावा दिया गया।

    भारत के लिए क्या सीख?

    भारत में भी स्वच्छ ईंधन निजी वाहनों पर नियंत्रण और सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने पर लंबे समय से चर्चा होती रही है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की विशेषज्ञ अनुमिता रॉय चौधरी का कहना है कि फर्क नीति के इरादे और उसके पैमाने का है। चीन ने सालभर सख्ती बरती जबकि दिल्ली में अधिकतर कदम आपात स्थिति में ही उठाए जाते हैं।विशेषज्ञ मानते हैं कि दिल्ली में उद्योगों को पूरी तरह हटाना मुश्किल है लेकिन बेहतर तकनीक साझा प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था और लगातार निगरानी से हालात सुधारे जा सकते हैं। बीजिंग का अनुभव बताता है कि अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो और नीतियां लंबी अवधि की हों तो प्रदूषण जैसे जटिल संकट पर भी काबू पाया जा सकता है।