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  • भारत में यात्री वाहनों की थोक बिक्री सितंबर में 21.8 प्रतिशत बढ़ी, दोपहिया और तिपहिया वाहनों की बिक्री में भी दर्ज हुई वृद्धि

    भारत में यात्री वाहनों की थोक बिक्री सितंबर में 21.8 प्रतिशत बढ़ी, दोपहिया और तिपहिया वाहनों की बिक्री में भी दर्ज हुई वृद्धि

    नई दिल्ली ।भारत में यात्री वाहनों की थोक बिक्री में सितंबर के दौरान उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। सालाना आधार पर बिक्री 21.8 प्रतिशत बढ़कर 4,54,574 यूनिट्स पर पहुंच गई, जबकि पिछले साल सितंबर में यह आंकड़ा 3,73,347 यूनिट्स था। वाहन उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में यात्री वाहनों के साथ दोपहिया और तिपहिया वाहनों की थोक बिक्री में भी वृद्धि दर्ज की गई।

    सितंबर में दोपहिया वाहनों की कुल थोक बिक्री सालाना आधार पर 13.5 प्रतिशत बढ़कर 24.63 लाख यूनिट्स हो गई। पिछले साल इसी महीने में दोपहिया वाहनों की बिक्री 21.70 लाख यूनिट्स रही थी। इस तरह एक साल के अंतराल में इस श्रेणी में भी बिक्री का आंकड़ा बढ़ा है। यात्री वाहनों और दोपहिया वाहनों के आंकड़े घरेलू बाजार में वाहन निर्माताओं की ओर से डीलरों को भेजे गए वाहनों की संख्या को दर्शाते हैं।

    तिपहिया वाहनों की थोक बिक्री में भी सितंबर के दौरान बढ़ोतरी देखने को मिली। इस महीने डीलरों को कुल 98,162 तिपहिया वाहन भेजे गए, जो पिछले साल की समान अवधि के 84,635 यूनिट्स से 16 प्रतिशत अधिक हैं। इस तरह यात्री, दोपहिया और तिपहिया वाहनों की बिक्री के आंकड़ों में सालाना वृद्धि दर्ज की गई।

    थोक बिक्री के अलावा, सितंबर में इलेक्ट्रिक वाहन बाजार की खुदरा बिक्री ने भी नया रिकॉर्ड बनाया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, देश में सभी श्रेणियों को मिलाकर इलेक्ट्रिक वाहनों की कुल खुदरा बिक्री 3,33,634 यूनिट्स तक पहुंच गई। यह पिछले साल सितंबर की तुलना में 74 प्रतिशत अधिक रही। यह आंकड़ा उपभोक्ताओं को वाहनों की बिक्री से संबंधित है, इसलिए इसकी तुलना निर्माताओं से डीलरों को भेजे गए वाहनों की थोक बिक्री से अलग आधार पर की जाती है।

    इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की खुदरा बिक्री सितंबर में बढ़कर 2,07,314 यूनिट्स के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 88.67 प्रतिशत अधिक रही। अगस्त के मुकाबले भी इसमें 13.16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। बाजार में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी बढ़कर 11.6 प्रतिशत हो गई, जबकि एक साल पहले सितंबर में यह 8.2 प्रतिशत थी।

    इलेक्ट्रिक यात्री वाहनों की खुदरा बिक्री में भी मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। सितंबर में इस श्रेणी की बिक्री 36,108 यूनिट्स के नए उच्च स्तर पर पहुंच गई। पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले इसमें 94.56 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि अगस्त की तुलना में बिक्री 17.63 प्रतिशत अधिक रही। इलेक्ट्रिक यात्री वाहनों की बाजार हिस्सेदारी भी बढ़ी। पिछले साल सितंबर में यह 5.7 प्रतिशत थी, जो इस साल बढ़कर 8.5 प्रतिशत हो गई।

    सितंबर के आंकड़े पारंपरिक वाहनों की थोक बिक्री और इलेक्ट्रिक वाहनों की खुदरा बिक्री में वृद्धि को दर्शाते हैं। यात्री वाहनों की थोक बिक्री में 21.8 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी के साथ दोपहिया और तिपहिया श्रेणियों में भी विस्तार दर्ज किया गया। वहीं, इलेक्ट्रिक दोपहिया और यात्री वाहनों की खुदरा बिक्री ने अपने-अपने उच्चतम मासिक स्तर हासिल किए। इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में दर्ज वृद्धि के साथ बाजार में उनकी हिस्सेदारी भी पिछले साल के मुकाबले बढ़ी है।

  • मध्य प्रदेश में 20 साल बाद सुगम परिवहन की शुरुआत, पहले चरण में 351 बसें चलेंगी, रात में भी मिलेगी सेवा

    मध्य प्रदेश में 20 साल बाद सुगम परिवहन की शुरुआत, पहले चरण में 351 बसें चलेंगी, रात में भी मिलेगी सेवा

    मध्य प्रदेश: में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत की जा रही है। करीब 20 साल बाद प्रदेश में परिवहन व्यवस्था को नए स्वरूप में विकसित करने की दिशा में यह पहल की गई है। इसके तहत इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा, जिससे यात्रियों को सुविधाजनक, किफायती और बेहतर कनेक्टिविटी वाला सफर मिल सकेगा। योजना का पहला चरण 351 बसों के साथ शुरू होगा।

    इस सेवा के तहत भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड सहित विभिन्न शहरों में बसें संचालित की जाएंगी। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2031 तक पूरे प्रदेश में 15 हजार बसें चलाने का है। इस लक्ष्य के पूरा होने पर प्रदेश के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क का विस्तार होगा और अधिक लोगों को नियमित बस सेवा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

    नई व्यवस्था में यात्रियों को निर्धारित स्टॉप पर बसों का इंतजार कम करना पड़ेगा। बसों के संचालन का अंतराल मार्ग और सेवा के अनुसार 5 से 30 मिनट तक रहने की जानकारी दी गई है। कुछ मार्गों पर यात्रियों को हर 10 से 15 मिनट में बस मिलने की सुविधा भी मिलेगी। इससे रोजाना कामकाज, पढ़ाई और अन्य जरूरी गतिविधियों के लिए बस से यात्रा करने वाले लोगों को सहूलियत होगी।

    यात्रियों को बसों की जानकारी हासिल करने के लिए भी डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। मोबाइल फोन पर बस की लाइव लोकेशन देखी जा सकेगी। इसके अलावा ऑनलाइन टिकट की सुविधा भी मिलेगी। इससे यात्रियों को बस के आने का अनुमान लगाने और टिकट प्राप्त करने में आसानी होगी। निर्धारित किराया व्यवस्था लागू होने से मनमाने किराए पर भी नियंत्रण रखने का प्रयास किया जाएगा।

    बसों का किराया लगभग दो रुपये प्रति किलोमीटर निर्धारित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे नियमित यात्रियों को यात्रा खर्च में राहत मिलने की उम्मीद है। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर भी जोर दिया गया है। इन बसों से सीधे धुएं का उत्सर्जन नहीं होगा, जिससे वायु प्रदूषण कम करने में सहायता मिल सकती है। भोपाल जैसे शहर में, जहां झीलों और पर्यावरण का विशेष महत्व है, इलेक्ट्रिक बसों का संचालन प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में उपयोगी माना जा रहा है।

    नई बसों में यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए आधुनिक व्यवस्थाएं भी उपलब्ध रहेंगी। बसों में सीसीटीवी कैमरे और पैनिक बटन लगाए जाएंगे। इससे यात्रा के दौरान सुरक्षा संबंधी जरूरतों पर ध्यान दिया जा सकेगा। दिव्यांग यात्रियों के लिए भी बसों में चढ़ने और उतरने की सुविधा बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है।

    इस सेवा की एक महत्वपूर्ण विशेषता रात में भी बसों का संचालन है। इससे देर शाम या रात के समय यात्रा करने वाले लोगों को सार्वजनिक परिवहन का विकल्प मिल सकेगा। खासकर उन यात्रियों को फायदा हो सकता है, जिन्हें कामकाज या अन्य कारणों से सामान्य समय के बाद भी आवागमन करना पड़ता है।

    कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के जरिए प्रदेश में बस यात्रा को अधिक नियमित, सुरक्षित और डिजिटल बनाने की योजना है। पहले चरण में 351 बसों से शुरू होने वाली यह व्यवस्था आगे चलकर बड़े परिवहन नेटवर्क का हिस्सा बनेगी। वर्ष 2031 तक 15 हजार बसों के संचालन का लक्ष्य पूरा करने के लिए आने वाले वर्षों में सेवा का विस्तार किया जाएगा।

  • रेखा गुप्ता ने रवाना कीं नई ई बसें, दिल्ली करनाल रूट पर पांच एसी इलेक्ट्रिक बसों से बढ़ेगी कनेक्टिविटी

    रेखा गुप्ता ने रवाना कीं नई ई बसें, दिल्ली करनाल रूट पर पांच एसी इलेक्ट्रिक बसों से बढ़ेगी कनेक्टिविटी

    नई दिल्ली ।दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क में 200 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल हो गई हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली विश्वविद्यालय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से इन बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। नई बसों के साथ राजधानी में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या लगभग 5,000 तक पहुंच गई है। सरकार ने इस अवसर पर महिलाओं और छात्राओं के लिए विशेष बस सेवाओं की भी शुरुआत की है।

    नई व्यवस्था के तहत महिलाओं के लिए 28 अलग अलग रूटों पर 56 डेडिकेटेड लेडीज स्पेशल इलेक्ट्रिक बस सेवाएं शुरू की गई हैं। इनमें दिल्ली परिवहन निगम के अधिक मांग वाले 15 रूटों पर 30 विशेष ट्रिप संचालित होंगी। इन सेवाओं के माध्यम से आवासीय क्षेत्रों को नेहरू प्लेस, एम्स, साउथ एक्सटेंशन, आरके पुरम, कनॉट प्लेस, आईटीओ, दिल्ली सचिवालय, करोल बाग, कश्मीरी गेट और शिवाजी स्टेडियम जैसे प्रमुख इलाकों से जोड़ा जाएगा।

    विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। इसके तहत 13 रूटों पर 26 यूनिवर्सिटी लेडीज स्पेशल ट्रिप संचालित की जाएंगी। इन सेवाओं में दिल्ली के कई प्रमुख शिक्षण संस्थानों तक सीधी पहुंच उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। इनमें हिंदू कॉलेज, रामजस कॉलेज, दौलत राम कॉलेज, श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, लेडी श्रीराम कॉलेज, गार्गी कॉलेज, हंसराज कॉलेज और श्री गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज ऑफ कॉमर्स जैसे संस्थान शामिल हैं।

    नई बसों के बेड़े में अलग अलग क्षमता और आकार की इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं। इनमें 12 मीटर लंबी 88 इलेक्ट्रिक बसें और 9 मीटर लंबी 112 इलेक्ट्रिक बसें हैं। इनके शामिल होने के बाद दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन बेड़े में बसों की कुल संख्या करीब 6,800 तक पहुंचने की बात कही गई है। इसमें लगभग 4,938 इलेक्ट्रिक बसें और करीब 1,750 सीएनजी बसें शामिल हैं।

    सरकार के अनुसार इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन को अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाना और यात्रियों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना है। इलेक्ट्रिक बसों के इस्तेमाल से पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने और परिवहन क्षेत्र से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    नई बसों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे और आपात स्थिति में सहायता के लिए पैनिक बटन जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं। बसों को लो फ्लोर और वातानुकूलित बनाया गया है, जिससे वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, छात्रों और अन्य यात्रियों के लिए यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाने का प्रयास किया गया है।

    दिल्ली और हरियाणा के बीच सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के लिए दिल्ली करनाल अंतरराज्यीय ई बस सेवा भी शुरू की जा रही है। इस मार्ग पर पांच नई वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें संचालित होंगी। करीब 133 किलोमीटर लंबे इस रूट पर दोनों दिशाओं में प्रतिदिन 10 10 फेरे चलाने की योजना है।

    इस पहल के साथ राजघाट डिपो एक में सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन की शुरुआत भी की गई है। इससे इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए आवश्यक चार्जिंग ढांचे को मजबूत करने में मदद मिलेगी। राजधानी में इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के आधुनिकीकरण के साथ साथ स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    महिलाओं और छात्राओं के लिए निर्धारित विशेष सेवाओं से दिल्ली के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों और व्यस्त इलाकों तक आवागमन आसान होने की उम्मीद है। वहीं अंतरराज्यीय ई बस सेवा से दिल्ली और करनाल के बीच यात्रियों को एक अतिरिक्त पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन विकल्प मिलेगा।

  • दिल्ली में महिलाओं के लिए 56 स्पेशल इलेक्ट्रिक बसों की तैयारी, व्यस्त रूटों पर मिलेगी सुरक्षित और सुविधाजनक सफर की सुविधा

    दिल्ली में महिलाओं के लिए 56 स्पेशल इलेक्ट्रिक बसों की तैयारी, व्यस्त रूटों पर मिलेगी सुरक्षित और सुविधाजनक सफर की सुविधा


    नई दिल्ली ।
    राजधानी में महिलाओं के लिए सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और आधुनिक बनाने की दिशा में दिल्ली सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। इस योजना के तहत दिल्ली परिवहन निगम महिलाओं के लिए 56 विशेष इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इनमें 30 लेडीज स्पेशल इलेक्ट्रिक बसें और 26 यूनिवर्सिटी लेडीज स्पेशल (यू-एसपीएल) बसें शामिल होंगी। इस पहल का उद्देश्य कामकाजी महिलाओं और छात्राओं को दैनिक आवागमन के दौरान सुरक्षित, समयबद्ध और आरामदायक यात्रा उपलब्ध कराना है।

    सरकार के अनुसार इन विशेष बसों का संचालन राजधानी के 28 प्रमुख और व्यस्त मार्गों पर किया जाएगा। ऐसे रूटों का चयन किया गया है जहां कार्यालय जाने वाली महिलाओं और शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाली छात्राओं की संख्या अधिक रहती है। सुबह और शाम के व्यस्त समय में सामान्य बसों में बढ़ने वाली भीड़ को कम करने के साथ महिलाओं को अधिक भरोसेमंद परिवहन उपलब्ध कराना इस योजना की प्रमुख प्राथमिकता है।

    लेडीज स्पेशल इलेक्ट्रिक बसों का नेटवर्क राजधानी के प्रमुख कार्यालय क्षेत्रों, व्यावसायिक केंद्रों, संस्थागत परिसरों और महत्वपूर्ण मेट्रो इंटरचेंज को आपस में जोड़ेगा। इन बसों का संचालन विशेष रूप से कार्यालय आने-जाने वाली महिलाओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर तय समय के अनुसार किया जाएगा। सुबह लगभग 7:52 बजे से 9:00 बजे तक और शाम 4:32 बजे से 6:15 बजे तक इन बसों की सेवाएं उपलब्ध रहेंगी, जिससे पीक आवर्स के दौरान महिला यात्रियों को अधिक सुविधा मिल सके।

    दूसरी ओर, यूनिवर्सिटी लेडीज स्पेशल बसें दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस, साउथ कैंपस तथा अन्य प्रमुख शिक्षण संस्थानों को राजधानी के विभिन्न आवासीय क्षेत्रों से जोड़ेंगी। इन बसों का लाभ नजफगढ़, रोहिणी, जनकपुरी, मुंडका, मयूर विहार, कालकाजी, पल्ला और धौलाकुआं सहित कई इलाकों में रहने वाली छात्राओं को मिलेगा। इससे कॉलेज और विश्वविद्यालय आने-जाने वाली छात्राओं के लिए यात्रा अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनने की उम्मीद है।

    योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू सुरक्षा से जुड़ा है। सभी 56 बसें पूरी तरह इलेक्ट्रिक होंगी और आधुनिक सुरक्षा सुविधाओं से लैस रहेंगी। इनमें सीसीटीवी कैमरे, ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर से जुड़े पैनिक बटन, लो-फ्लोर रैंप जैसी व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। आवश्यकता के अनुसार बस मार्शल या महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती भी की जा सकेगी। साथ ही इन बसों की अलग पहचान के लिए विशेष ब्रांडिंग की जाएगी, ताकि महिला यात्री इन्हें आसानी से पहचान सकें।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन विशेष बसों को पिंक स्मार्ट कार्ड प्रणाली से जोड़ा जाएगा। इसके माध्यम से पात्र महिला यात्रियों को कैशलेस और निःशुल्क यात्रा की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे यात्रा प्रक्रिया अधिक सरल और डिजिटल बनेगी तथा महिलाओं को टिकट संबंधी औपचारिकताओं से भी राहत मिलेगी। इलेक्ट्रिक बसों के उपयोग से प्रदूषण में कमी लाने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने का लक्ष्य भी इस योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और सुविधाजनक यात्रा सुनिश्चित करना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। उनके अनुसार यह विशेष बस नेटवर्क महिला यात्रियों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में शुरू की जा रही यह पहल राजधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अधिक समावेशी, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल बनाएगी। साथ ही इससे कामकाजी महिलाओं और छात्राओं के दैनिक सफर को अधिक सहज, भरोसेमंद और आरामदायक बनाने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।