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  • मंदसौर में स्मार्ट मीटरों के खिलाफ फूटा जनाक्रोश, ढाई घंटे प्रदर्शन के बाद विभाग को सौंपा ज्ञापन

    मंदसौर में स्मार्ट मीटरों के खिलाफ फूटा जनाक्रोश, ढाई घंटे प्रदर्शन के बाद विभाग को सौंपा ज्ञापन


    मध्य प्रदेश । मंदसौर में स्मार्ट मीटरों को लेकर उपभोक्ताओं का असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। बुधवार को शहर के सरदार वल्लभभाई पटेल चौराहे पर बड़ी संख्या में नागरिकों, किसानों, व्यापारियों और जनप्रतिनिधियों ने स्मार्ट मीटरों के विरोध में करीब ढाई घंटे तक प्रदर्शन किया। दोपहर 12:15 बजे शुरू हुआ यह प्रदर्शन लगभग 2:30 बजे तक चला, जिसमें लोगों ने बिजली विभाग के खिलाफ नाराजगी जताते हुए अपनी विभिन्न समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।

    प्रदर्शन का नेतृत्व जिला पंचायत सदस्य दीपक सिंह गुर्जर ने किया। उन्होंने विद्युत विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि स्मार्ट मीटरों की स्थापना के बाद क्षेत्र के अनेक उपभोक्ताओं को बढ़े हुए बिजली बिलों का सामना करना पड़ रहा है। आम लोगों की लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का संतोषजनक समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं हुई तो लोगों का आक्रोश और बढ़ सकता है।

    प्रदर्शनकारियों का सबसे बड़ा आरोप यह था कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिलों में अप्रत्याशित वृद्धि देखने को मिली है। उपभोक्ताओं का कहना है कि उनकी बिजली खपत में कोई विशेष बढ़ोतरी नहीं हुई, फिर भी बिल पहले की तुलना में काफी अधिक आ रहे हैं। इससे मध्यमवर्गीय परिवारों, किसानों और छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। लोगों ने मांग की कि ऐसे सभी मामलों की जांच कर बिलों का पुनर्मूल्यांकन किया जाए और जहां आवश्यक हो, वहां संशोधित बिल जारी किए जाएं।

    स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली को लेकर भी लोगों ने सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मीटर रीडिंग, पल्स रेट और बिल तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर उपभोक्ताओं के बीच पर्याप्त जानकारी नहीं है। पारदर्शिता के अभाव में लोगों के मन में भ्रम और अविश्वास की स्थिति बन रही है। कई उपभोक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि बिना पूर्व सूचना उनके बिजली कनेक्शन काट दिए गए, जिससे उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ा।

    प्रदर्शन के दौरान सोलर ऊर्जा उपभोक्ताओं की समस्याएं भी प्रमुखता से उठाई गईं। दीपक सिंह गुर्जर ने कहा कि कई लोगों ने लाखों रुपये खर्च कर सोलर प्लांट स्थापित किए हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके हजारों रुपये के बिजली बिल आ रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि यदि सोलर ऊर्जा अपनाने के बाद भी राहत नहीं मिल रही, तो ऐसी योजनाओं का लाभ आम उपभोक्ताओं को कैसे मिलेगा।

    प्रदर्शनकारियों ने स्मार्ट मीटरों को हटाकर पुराने मीटर दोबारा लगाने की मांग भी की। उनका कहना था कि वर्तमान व्यवस्था लोगों को सुविधा देने के बजाय नई परेशानियां खड़ी कर रही है। साथ ही बिजली बिल जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ाने और शिकायतों के निपटारे के लिए विशेष व्यवस्था बनाने की मांग भी रखी गई।

    प्रदर्शन के बाद विद्युत विभाग के अधिकारियों ने उपभोक्ताओं को आश्वस्त किया कि बिजली बिल जमा करने की अंतिम तिथि 18 जून से बढ़ाकर 30 जून कर दी गई है। इसके अलावा 30 जून से पहले एक विशेष शिविर आयोजित किया जाएगा, जिसमें उपभोक्ता अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। विभाग ने भरोसा दिलाया कि जांच के बाद आवश्यक होने पर बिलों में संशोधन भी किया जाएगा।

    हालांकि प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 30 जून तक समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। ऐसे में अब सभी की निगाहें विभाग द्वारा किए जाने वाले सुधारात्मक कदमों पर टिकी हुई हैं।

  • मध्य प्रदेश में 1 अप्रैल से महंगी होगी बिजली, 10% से ज्यादा बढ़ सकता है टैरिफ

    मध्य प्रदेश में 1 अप्रैल से महंगी होगी बिजली, 10% से ज्यादा बढ़ सकता है टैरिफ


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के डेढ़ करोड़ से अधिक बिजली उपभोक्ताओं को अप्रैल 2026 से महंगे बिजली बिल का सामना करना पड़ सकता है। राज्य की मध्य प्रदेश पॉवर मैनेजमेंट कंपनी ने विद्युत नियामक आयोग को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बिजली दरों में 10.20% वृद्धि का प्रस्ताव सौंपा है। यदि यह मंजूर होता है तो 1 अप्रैल से नई दरें लागू हो जाएंगी।

    कंपनियों का दावा है कि पिछले वित्तीय वर्ष में उन्हें 6 044 करोड़ रुपये का घाटा हुआ जिसे रिकवर करने के लिए यह बढ़ोतरी आवश्यक है। पिछली साल केवल 3.46% वृद्धि की गई थी जबकि कंपनियों ने 7.52% बढ़ोतरी की मांग की थी। इस बार प्रस्तावित 10.20% की बढ़ोतरी उपभोक्ताओं के लिए बड़ा आर्थिक झटका साबित हो सकती है।

    औसत घरेलू उपभोक्ता जिनकी मासिक खपत 150-300 यूनिट है के बिल में 150-300 रुपये प्रति माह और सालाना लगभग 3 600 रुपये अतिरिक्त जुड़ सकते हैं। वहीं उच्च खपत वाले परिवार 400 यूनिट+ के लिए बिल 400-600 रुपये तक बढ़ सकता है।

    जनसुनवाई में जनता ने इस प्रस्ताव का जोरदार विरोध किया। उपभोक्ताओं और संगठनों ने सवाल उठाया कि कंपनियां अपना घाटा क्यों उपभोक्ताओं पर डाल रही हैं जबकि पहले से ही मध्य प्रदेश की बिजली दरें पड़ोसी राज्यों से महंगी हैं। विद्युत नियामक आयोग अब सभी आपत्तियों और दावों की समीक्षा करने के बाद अगले सप्ताह मार्च के अंत तक अंतिम टैरिफ ऑर्डर जारी करेगा।

  • JE से मारपीट पड़ी महंगी: सकरा गांव में बिजली कंपनी का सख्त एक्शन, पिटाई करने वालों की सप्लाई कटी

    JE से मारपीट पड़ी महंगी: सकरा गांव में बिजली कंपनी का सख्त एक्शन, पिटाई करने वालों की सप्लाई कटी


    जबलपुर । जबलपुर जिले के पाटन तहसील अंतर्गत सकरा गांव में बिजली कंपनी ने अनुशासन और कानून व्यवस्था को लेकर सख्त संदेश देते हुए बड़ी कार्रवाई की है। जूनियर इंजीनियर के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद विभाग ने न सिर्फ बकायादार उपभोक्ताओं बल्कि मारपीट में शामिल लोगों के खिलाफ भी कड़ा कदम उठाते हुए उनकी बिजली सप्लाई तत्काल प्रभाव से बंद कर दी। इस कार्रवाई से पूरे गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और अवैध रूप से बिजली उपयोग करने वालों में हड़कंप मच गया।

    दरअसल, बिजली बिल की वसूली और अवैध कनेक्शनों की जांच के लिए जूनियर इंजीनियर मनोज दुबे सकरा गांव पहुंचे थे। इसी दौरान कुछ उपभोक्ताओं द्वारा बिल जमा करने को लेकर विवाद हुआ, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गया। आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात JE मनोज दुबे के साथ कुछ लोगों ने हाथापाई की, जिससे विभागीय कर्मचारियों में आक्रोश फैल गया। घटना की जानकारी मिलते ही बिजली कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

    घटना के अगले ही दिन बिजली कंपनी की टीम सकरा गांव पहुंची और विशेष अभियान चलाया गया। इस दौरान जिन उपभोक्ताओं पर बिजली बिल बकाया था, उनकी लाइन काट दी गई। वहीं, जिन लोगों पर JE से मारपीट का आरोप है, उनकी विद्युत सप्लाई भी बिना किसी देरी के बंद कर दी गई। कार्रवाई के दौरान अवैध कनेक्शनों की भी जांच की गई और कई स्थानों पर बिजली चोरी के मामले सामने आए, जिन पर नियमानुसार कार्रवाई की गई।

    बिजली सप्लाई कटते ही गांव में हड़कंप की स्थिति बन गई। कई उपभोक्ता बिजली कर्मचारियों से लाइन जोड़ने की गुहार लगाते नजर आए, जबकि कुछ लोग कार्रवाई से बचने के प्रयास करते दिखे। विभागीय अधिकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि सरकारी कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि बिना बिल भुगतान और अवैध कनेक्शन के बिजली उपयोग करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह सख्त अभियान जारी रहेगा।

    बिजली कंपनी फिलहाल “समाधान शिविर” अभियान के तहत उपभोक्ताओं को बकाया बिल जमा करने और अपनी समस्याओं के समाधान का अवसर भी दे रही है, लेकिन इसके बावजूद नियमों की अनदेखी करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। विभाग का कहना है कि राजस्व वसूली और कर्मचारियों की सुरक्षा दोनों ही उनकी प्राथमिकता हैं। इस पूरी कार्रवाई के दौरान कार्यपालन अभियंता नवनीत राठौर, शिशिर शताक्षी, सहायक अभियंता शुभम तंतुवाय, स्वर्ण सिंह मनकोटिया तथा कनिष्ठ अभियंता पवन यादव सहित विभागीय अमला मौजूद रहा। अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे समय पर बिजली बिल जमा करें और किसी भी प्रकार के विवाद से बचें, ताकि इस तरह की कठोर कार्रवाई की नौबत न आए।