Tag: Electricity Crisis

  • बिजली संकट से उबल पड़ा शिवपुरी सरपंच सड़क पर लेटे ग्रामीणों ने तीन घंटे किया चक्काजाम अधिकारियों के आश्वासन के बाद खुला रास्ता

    बिजली संकट से उबल पड़ा शिवपुरी सरपंच सड़क पर लेटे ग्रामीणों ने तीन घंटे किया चक्काजाम अधिकारियों के आश्वासन के बाद खुला रास्ता


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के अमोला थाना क्षेत्र के सिरसौद गांव में लगातार हो रही बिजली कटौती के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा आखिरकार सड़क पर फूट पड़ा। रविवार सुबह सरपंच अतर सिंह लोधी के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीणों ने सिरसौद पिछोर मार्ग पर चक्काजाम कर जोरदार प्रदर्शन किया। आंदोलन के दौरान सरपंच खुद सड़क पर लेट गए और बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। करीब तीन घंटे तक चले इस प्रदर्शन के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। हालांकि प्रदर्शनकारियों ने मानवता का परिचय देते हुए एम्बुलेंस को बिना किसी बाधा के गुजरने दिया। सुबह करीब नौ बजे बिजली विभाग के अधिकारियों के मौके पर पहुंचकर समाधान का भरोसा देने के बाद चक्काजाम समाप्त हुआ।

    ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कई दिनों से लोड सेटिंग के नाम पर रोजाना 10 से 12 घंटे तक बिजली की आपूर्ति बाधित की जा रही है। सबसे अधिक परेशानी रात के समय होने वाली कटौती से हो रही है। लगातार बिजली गुल रहने के कारण लोग भीषण गर्मी और उमस में रातभर जागने को मजबूर हैं। घरेलू कामकाज प्रभावित हो रहे हैं और बच्चों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है। ग्रामीणों ने बताया कि अंधेरे के कारण हाल ही में एक महिला छत से गिरकर घायल भी हो गई थी जिससे लोगों में आक्रोश और बढ़ गया।

    चक्काजाम की सूचना मिलते ही अमोला थाना प्रभारी योगेंद्र सिंह सेंगर पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। लेकिन प्रदर्शनकारी बिजली विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे। इसके बाद विभाग के अधिकारी घटनास्थल पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा कर समस्या के समाधान का आश्वासन दिया।

    सरपंच अतर सिंह लोधी ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में एक घंटे बिजली देने के बाद अगले घंटे फिर कटौती कर दी जाती है जिससे सिरसौद सहित आसपास के करीब 15 गांवों के लोग परेशान हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कई बार विभागीय अधिकारियों को शिकायत दी गई लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। उनका कहना है कि करैरा कस्बे में लोड सेटिंग के नाम पर बिजली कटौती नहीं की जाती जबकि ग्रामीण इलाकों में घंटों बिजली बंद रखी जाती है जिससे लोगों में भेदभाव की भावना पैदा हो रही है।

    ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ और लोड सेटिंग के नाम पर घंटों कटौती जारी रही तो वे दोबारा सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है बल्कि कुछ महीने पहले भी इसी समस्या को लेकर प्रदर्शन किया जा चुका है लेकिन हालात अब तक नहीं बदले। ऐसे में अब वे स्थायी समाधान मिलने तक अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे।

  • भीषण गर्मी के बीच बिजली कटौती पर मायावती का सरकार को संदेश, लोगों की परेशानी पर तुरंत कार्रवाई की अपील

    भीषण गर्मी के बीच बिजली कटौती पर मायावती का सरकार को संदेश, लोगों की परेशानी पर तुरंत कार्रवाई की अपील

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में इन दिनों भीषण गर्मी ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। तापमान में लगातार बढ़ोतरी और हीटवेव की स्थिति के बीच राज्य के कई हिस्सों में बिजली कटौती की समस्या ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। इस स्थिति को लेकर राजनीतिक हलकों में भी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, जहां बसपा प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने प्रदेश में बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर चिंता व्यक्त की है और सरकार से तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है।

    मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और जनसंख्या वाले राज्य में भीषण गर्मी के समय बिजली की निर्बाध आपूर्ति बेहद जरूरी है, लेकिन मौजूदा स्थिति में आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि गरीब, मध्यम वर्ग, किसान और छोटे व्यापारी सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, जिनके दैनिक जीवन पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। उनके अनुसार बिजली कटौती के कारण लोगों में असंतोष और आक्रोश बढ़ रहा है, जो कई जगहों पर सार्वजनिक रूप से भी सामने आ रहा है।

    उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को इस समस्या को केवल अस्थायी रूप से नहीं बल्कि दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए बिजली उत्पादन क्षमता को बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए और नए पावर प्लांट सहित अन्य संसाधनों पर ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि आपूर्ति व्यवस्था मजबूत हो सके।

    प्रदेश में लगातार बढ़ते तापमान और हीटवेव की चेतावनी के बीच स्वास्थ्य विभाग भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहा है। प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों में कहा जा रहा है कि लोग अनावश्यक रूप से धूप में बाहर न निकलें और पर्याप्त सावधानी बरतें। इसके बावजूद बिजली कटौती ने स्थिति को और अधिक कठिन बना दिया है, क्योंकि पंखे और कूलर जैसे साधनों पर निर्भरता के कारण आम लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है।

    स्थानीय स्तर पर कई जगहों से बिजली आपूर्ति बाधित होने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। गर्मी और बिजली संकट के कारण आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है और कई क्षेत्रों में लोगों द्वारा विरोध प्रदर्शन और नाराजगी भी देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती बिजली मांग और उत्पादन के बीच संतुलन बिगड़ने से यह स्थिति उत्पन्न हो रही है, जिसे सुधारने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम जरूरी हैं।

    कुल मिलाकर, भीषण गर्मी के इस दौर में बिजली संकट ने जनता की परेशानियों को और बढ़ा दिया है, वहीं राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर आवाजें तेज हो रही हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए किस तरह के ठोस कदम उठाती है, जिससे आम लोगों को राहत मिल सके