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  • भारत के स्मार्ट मीटर और ग्रिड अपग्रेड बाजार में बड़ी दौड़, Hitachi-ABB समेत कंपनियों में बढ़ी प्रतिस्पर्धा

    भारत के स्मार्ट मीटर और ग्रिड अपग्रेड बाजार में बड़ी दौड़, Hitachi-ABB समेत कंपनियों में बढ़ी प्रतिस्पर्धा


    नई दिल्ली । भारत के पावर इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में इस समय एक बड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है, जहां कई वैश्विक और घरेलू कंपनियां स्मार्ट मीटरिंग, ग्रिड ऑटोमेशन और हाई वोल्टेज सिस्टम के बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाने की कोशिश कर रही हैं। बिजली उत्पादन से लेकर उसके वितरण तक का पूरा सिस्टम अब तेजी से तकनीकी बदलाव की ओर बढ़ रहा है, जिससे इस क्षेत्र की कंपनियों के लिए अवसर भी बढ़े हैं और चुनौतियां भी उतनी ही जटिल हो गई हैं।

    स्मार्ट मीटरिंग और ग्रिड मॉडर्नाइजेशन को लेकर सरकार की योजनाओं के तहत बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है। रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के तहत करोड़ों स्मार्ट मीटर लगाने की योजना है, लेकिन अभी तक इसका बड़ा हिस्सा लागू होना बाकी है। यही कारण है कि इस सेक्टर में काम करने वाली कंपनियों की ऑर्डर बुक तेजी से बढ़ रही है और निवेशकों की नजर भी इन पर लगातार बनी हुई है।

    Hitachi Energy, ABB India, Siemens Energy और Genus Power जैसी कंपनियां इस पूरे इकोसिस्टम में प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभर रही हैं। इन कंपनियों को लगातार बड़े ऑर्डर मिल रहे हैं, खासकर ग्रिड ऑटोमेशन, हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट सिस्टम और स्मार्ट मीटरिंग प्रोजेक्ट्स में। हालांकि केवल ऑर्डर मिलना ही सफलता की गारंटी नहीं माना जा रहा है, क्योंकि असली चुनौती इन प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने और उन्हें रेवेन्यू में बदलने की होती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार भारत में स्मार्ट मीटरिंग का लक्ष्य बेहद बड़ा है, लेकिन अभी तक इंस्टॉलेशन की गति अपेक्षाकृत धीमी रही है। करोड़ों मीटर लगाने की योजना के मुकाबले वास्तविक इंस्टॉलेशन का आंकड़ा काफी कम है, जिससे यह साफ है कि आने वाले वर्षों में इस सेक्टर में काम की संभावनाएं काफी ज्यादा हैं। इसी वजह से कंपनियों के बीच इस बाजार को पकड़ने की दौड़ और तेज हो गई है।

    इस पूरे सेक्टर की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ तकनीक नहीं बल्कि प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन भी है। बिजली ग्रिड को न केवल मजबूत बनाना होता है, बल्कि उसे रियल टाइम मॉनिटरिंग, कम लॉस और बेहतर स्टेबिलिटी के साथ चलाना भी जरूरी है। इसके अलावा बिजली चोरी को रोकना और वितरण प्रणाली को अधिक कुशल बनाना भी इस बदलाव का अहम हिस्सा है।

  • सीहोर में विकास को नई रफ्तार नवीन विद्युत उपकेंद्र से सुधरेगी बिजली व्यवस्था

    सीहोर में विकास को नई रफ्तार नवीन विद्युत उपकेंद्र से सुधरेगी बिजली व्यवस्था


    सीहोर । मध्यप्रदेश के सीहोर जिला मुख्यालय के मंडी क्षेत्र में आज बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया जब प्रदेश शासन की मंत्री एवं जिले की प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर ने नवीन विद्युत उपकेंद्र का लोकार्पण किया इस अवसर पर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों की उपस्थिति में कार्यक्रम आयोजित हुआ जिसमें विकास और बुनियादी सुविधाओं को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से नजर आई

    इस कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक सुदेश राय नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर और भाजपा मंडल अध्यक्ष सुशील ताम्रकार सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे सभी ने इस उपकेंद्र के निर्माण को क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया और उम्मीद जताई कि इससे मंडी क्षेत्र सहित आसपास के इलाकों में बिजली से जुड़ी समस्याओं का समाधान होगा

    मध्य प्रदेश विद्युत वितरण कंपनी द्वारा इस विद्युत उपकेंद्र का निर्माण लगभग दो करोड़ 79 लाख रुपये की लागत से किया गया है लंबे समय से मंडी क्षेत्र में बिजली आपूर्ति को लेकर शिकायतें सामने आ रही थीं खासतौर पर वोल्टेज की समस्या और बार बार बिजली कटौती से आम नागरिकों के साथ साथ व्यापारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता था ऐसे में इस नए उपकेंद्र के शुरू होने से बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर और सुचारू होने की उम्मीद है

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि हर क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जाए और नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं उन्होंने कहा कि यह उपकेंद्र न केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करेगा बल्कि भविष्य में बढ़ती बिजली मांग को भी ध्यान में रखकर तैयार किया गया है

    स्थानीय लोगों ने भी इस पहल का स्वागत किया और इसे क्षेत्र के विकास की दिशा में एक अहम कदम बताया उनका कहना है कि अब उन्हें बार बार बिजली कटौती और लो वोल्टेज जैसी समस्याओं से राहत मिलेगी जिससे घरेलू और व्यावसायिक दोनों तरह की गतिविधियां प्रभावित नहीं होंगी

    यह लोकार्पण कार्यक्रम केवल एक औपचारिकता नहीं बल्कि क्षेत्र के विकास की एक नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है जहां सरकार की योजनाएं जमीनी स्तर पर आकार लेती नजर आ रही हैं आने वाले समय में इस तरह की परियोजनाएं प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी लागू होंगी जिससे समग्र विकास को गति मिलेगी