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  • MP: उज्जैन में महाकाल की सवारी से पहले हाई वॉल्टेज ड्रामा, हाथी' के ब्लड सैंपल देने से महावत का इनकार

    MP: उज्जैन में महाकाल की सवारी से पहले हाई वॉल्टेज ड्रामा, हाथी' के ब्लड सैंपल देने से महावत का इनकार


    उज्जैन।
    साल 2016 से बाबा महाकाल (Baba Mahakal) की सवारी में सेवा देने वाले हाथी को लेकर उज्जैन (Ujjain) में हाई वॉल्टेज ड्रामा (High-voltage drama) देखने को मिला. दरअसल डॉक्टर्स की एक टीम श्यामू हाथी (Shyamu Elephant) की जांच के लिए महावत के निवास पहुंची थी. टीम का मानना था कि श्यामू अब सवारी के लिए अनफिट है, लेकिन महावत का कहना था कि एक साजिश के तहत उसके हाथी को न सिर्फ सवारी से दूर किया जा रहा है, बल्कि उसे ‘वनतारा’ जू भेजने की तैयारी की जा रही है. महावत का कहना था कि उनका हाथी पूरी तरह से फिट है. उज्जैन का ये मामला गुरूवार को पूरे दिन सुर्खियों में रहा.

    दरअसल, डेढ़ माह बाद 30 जुलाई से पवित्र श्रावण मास शुरू होने वाला है, जिसमें विश्व विख्यात महाकाल बाबा की सवारी निकाली जाएगी. इस सवारी में हर वर्ष की तरह श्यामू हाथी भी शामिल होगा। हाथी मालिक के अनुसार, 2016 से 2025 तक हर सवारी में श्यामू शामिल रहा है और आगे भी चलेगा. लेकिन अब उसे अनफिट बताया जा रहा है।

    गुरुवार को पन्ना टाइगर रिजर्व के डॉ. संजय गुप्ता, इंदौर जू प्रभारी डॉ. उत्तम यादव और उज्जैन के पशु चिकित्सक डॉ. मुकेश जैन इंदौर रोड स्थित सांईधाम कॉलोनी पहुंचे. चिकित्सकों को हाथी के स्वास्थ्य की जांच के लिए ब्लड सैंपल लेना था, मगर महावत और उसके परिवार वाले इस बात के लिए तैयार नहीं थे.


    मालिक का बड़ा आरोप

    महावत का कहना था कि हाथी पूरी तरह से फिट है, एक साजिश के तहत उसे बीते 9 महीने से परेशान किया जा रहा है. ये लोग हाथी को अनफिट बताकर उसे वनतारा जू भेजने की तैयारी में लगे हैं, इस बात से वे बहुत परेशान हैं। हाथी की जांच को लेकर दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक कहासुनी होती रही. अंत में डॉक्टर्स की टीम को पीछे हटना पड़ा. बाद में समझाइश पर महावत परिवार ने हाथी का मल-मूत्र डाक्टर्स को सौंपा, जिसके आधार पर टीम इस बात का पता लगाएगी कि श्यामू हाथी कितना फिट है.

    वैसे डाक्टर्स का कहना था कि हाथी के पैर अंदर की तरफ मुड़ने लगे हैं, जिससे वह ज्यादा चलने योग्य नहीं है, हो सकता है कहीं पर जानवर गिर जाए और हादसे की नौबत आ जाए. श्यामू हाथी को लेकर सिंतबर 2025 से विवाद चला आ रहा है. हालांकि, महाकाल मंदिर प्रशासन ने अभी तक ये स्पष्ट नहीं किया है कि सवारी में श्यामू शामिल होगा या नहीं।

    बता दें कि महाकाल सवारी के दौरान हाथी की पीठ पर बाबा महाकाल का एक विग्रह बैठाया जाता है, जिसे संभालने के लिए महावत के अलावा एक या दो पंडित भी हाथी पर सवार रहते हैं. भारी भीड़ के बीच हाथी भी पांच से छह किलामीटर का सफर तय करता है।

  • चैत्र नवरात्र: पालकी पर आगमन, हाथी पर प्रस्थान, जानें क्या संकेत दे रहा है समय

    चैत्र नवरात्र: पालकी पर आगमन, हाथी पर प्रस्थान, जानें क्या संकेत दे रहा है समय


    नई दिल्ली। देशभर में चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ 19 मार्च से हो चुका है और श्रद्धालु माँ भवानी के नौ रूपों की आराधना में जुटे हैं। नवरात्रि न केवल हिंदू नववर्ष का प्रतीक है, बल्कि देवी के आगमन और प्रस्थान की सवारी भविष्य के शुभ-अशुभ संकेतों का मार्गदर्शन भी करती है।

    इस वर्ष मां जगदंबा का आगमन गुरुवार को पालकी पर हुआ, जबकि प्रस्थान शुक्रवार को हाथी पर होगा। शास्त्रों के अनुसार, पालकी पर आगमन सामान्यतः शुभ नहीं माना जाता। यह प्राकृतिक आपदाओं, सामाजिक उपद्रव, दंगे या आर्थिक चुनौतियों का संकेत दे सकता है। गुरुवार को आगमन से जुड़े संकेतों को सावधानी और वित्तीय सतर्कता से जोड़ा जा रहा है।

    वहीं, प्रस्थान का समय और सवारी विशेष महत्व रखते हैं। शुक्रवार को मां का हाथी पर प्रस्थान शुभ माना गया है। हाथी स्थिरता, सुख-संपत्ति और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। इसका अर्थ है कि आने वाला समय अप्रिय घटनाओं के साथ-साथ जीवन में स्थिरता और अवसर भी लाएगा। शास्त्रों के अनुसार वार दिन और सवारी का तालमेल भविष्य की संभावनाओं को दर्शाता है। उदाहरण के लिए:

    रविवार और सोमवार को प्रस्थान – भैंसे की सवारी- रोग, शोक, अशुभता।

    मंगलवार और शनिवार को प्रस्थान – मुर्गा की सवारी – महामारी और जनहानि।

    बुधवार और शुक्रवार को प्रस्थान – हाथी की सवारी – सुख, समृद्धि और स्थिरता।

    गुरुवार को प्रस्थान – मानव पर सवार – भक्त पर विशेष कृपा और जीवन में संतुलन।

    इस साल आगमन पालकी पर और प्रस्थान हाथी पर होने से मिश्रित संकेत मिलते हैं। आगमन से सावधानी और चुनौतियों की चेतावनी मिलती है, जबकि प्रस्थान सुख-समृद्धि और स्थिरता की संभावना दर्शाता है। ऐसे में यह समय जीवन में सतर्क रहकर अवसरों का लाभ उठाने का प्रतीक है।

    पिछले वर्ष शारदीय नवरात्रि में मां का आगमन हाथी पर हुआ था और प्रस्थान भक्तों के कंधे पर हुआ था। यह दोनों ही शुभ संकेतों का प्रतीक थे। इस वर्ष के संकेत कुछ मिश्रित हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार सावधानी के साथ श्रद्धा और कर्म से जीवन में संतुलन बनाए रखा जा सकता है।